Ramayan ram janam

संपूर्ण रामायण कथा बालकाण्ड : राम का जन्म , भगवान राम का जन्म कब हुआ , श्री राम जी का जन्म कब हुआ था, राम जी का जन्म कहाँ हुआ था, राम के जन्म की क्या कथा है, श्रीराम के जन्म की पौराणिक कथा, रामायण में राम का जन्म, राम का जन्म स्थान, राम जन्म कथा, संपूर्ण रामायण राम जन्म , Ramayana Balakanda : Bhagwan Ram Janam, Bhagwan Ram Janam Katha in Hindi, Ram Janam Date, Ramayan Me Ram Ka Janam, Ram Ka Janam Kab Hua, Ram Ka Janam Kaha Hua राम किसके पुत्र थे? लक्ष्मण किसके पुत्र थे? भरत और शत्रुघ्न किसके पुत्र थे

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राम का जन्म , भगवान राम का जन्म कब हुआ
आदिकवि वाल्मीकि ने रामायण और तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना की है. दोनों ही पवित्र ग्रंथ हैं। तुलसीदास जी ने श्री राम को ईश्वर मान कर रामचरितमानस की रचना की जबकि वाल्मीकि ने श्री राम को मनुष्य ही मानकर रामायण लिखा। तुलसीदास जी ने रामचरितमानस को राम के राज्यभिषेक के बाद समाप्त कर दिया है वहीं आदिकवि श्री वाल्मीकि ने अपने रामायण में कथा को आगे श्री राम के महाप्रयाण तक वर्णित किया है।

कई शोधो का आधार पर माना जाता है कि श्री राम का जन्म 5114 ईसा पूर्व 10 जनवरी को सुबह के 12.05 बजे हुआ था हालांकि कुछ शोधकर्ता मानते हैं कि भगवान राम का जन्म 7323 ईसा पूर्व हुआ था। जबकि सैंकड़ों वर्षों से चैत्र मास (मार्च) की नवमी को रामनवमी के रूप में मनाया जाता रहा है। आइए आज हम आपको राम जन्म की कथा सुनाते हैं।

भगवान राम का जन्म कब हुआ , राम का जन्म 
5114 ईसा पूर्व 10 जनवरी को दिन के 12.05 पर भगवान राम का जन्म हुआ था जबकि सैंकड़ों वर्षों से चैत्र मास (मार्च) की नवमी को रामनवमी के रूप में मनाया जाता रहा है। राम एक ऐतिहासिक महापुरुष थे और इसके पर्याप्त प्रमाण हैं। हालांकि कुछ शोधकर्ता मानते हैं कि भगवान राम का जन्म 7323 ईसा पूर्व हुआ था।

मन्त्रीगणों तथा सेवकों ने महाराज की आज्ञानुसार श्यामकर्ण घोड़ा चतुरंगिनी सेना के साथ छुड़वा दिया। महाराज दशरथ ने देश देशान्तर के मनस्वी, तपस्वी, विद्वान ऋषि-मुनियों तथा वेदविज्ञ प्रकाण्ड पण्डितों को यज्ञ सम्पन्न कराने के लिये बुलावा भेज दिया। निश्चित समय आने पर समस्त अभ्यागतों के साथ महाराज दशरथ अपने गुरु वशिष्ठ जी तथा अपने परम मित्र अंग देश के अधिपति लोभपाद के जामाता ऋंग ऋषि को लेकर यज्ञ मण्डप में पधारे। इस प्रकार महान यज्ञ का विधिवत शुभारम्भ किया गया। सम्पूर्ण वातावरण वेदों की ऋचाओं के उच्च स्वर में पाठ से गूँजने तथा समिधा की सुगन्ध से महकने लगा।

समस्त पण्डितों, ब्राह्मणों, ऋषियों आदि को यथोचित धन-धान्य, गौ आदि भेंट कर के सादर विदा करने के साथ यज्ञ की समाप्ति हुई। राजा दशरथ ने यज्ञ के प्रसाद चरा को अपने महल में ले जाकर अपनी तीनों रानियों में वितरित कर दिया। प्रसाद ग्रहण करने के परिणामस्वरूप परमपिता परमात्मा की कृपा से तीनों रानियों ने गर्भधारण किया।

जब चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र में सूर्य, मंगल शनि, वृहस्पति तथा शुक्र अपने-अपने उच्च स्थानों में विराजमान थे, कर्क लग्न का उदय होते ही महाराज दशरथ की बड़ी रानी कौशल्या के गर्भ से एक शिशु का जन्म हुआ जो कि श्यामवर्ण, अत्यन्त तेजोमय, परम कान्तिवान तथा अद्भुत सौन्दर्यशाली था। उस शिशु को देखने वाले ठगे से रह जाते थे। इसके पश्चात् शुभ नक्षत्रों और शुभ घड़ी में महारानी कैकेयी के एक तथा तीसरी रानी सुमित्रा के दो तेजस्वी पुत्रों का जन्म हुआ।

सम्पूर्ण राज्य में आनन्द मनाया जाने लगा। महाराज के चार पुत्रों के जन्म के उल्लास में गन्धर्व गान करने लगे और अप्सरायें नृत्य करने लगीं। देवता अपने विमानों में बैठ कर पुष्प वर्षा करने लगे। महाराज ने उन्मुक्त हस्त से राजद्वार पर आये हुये भाट, चारण तथा आशीर्वाद देने वाले ब्राह्मणों और याचकों को दान दक्षिणा दी। पुरस्कार में प्रजा-जनों को धन-धान्य तथा दरबारियों को रत्न, आभूषण तथा उपाधियाँ प्रदान किया गया। चारों पुत्रों का नामकरण संस्कार महर्षि वशिष्ठ के द्वारा कराया गया तथा उनके नाम रामचन्द्र, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखे गये। राम – दशरथ तथा कौशल्या के पुत्र थे, लक्ष्मण और शत्रुघ्न – दशरथ तथा सुमित्रा के पुत्र थे और भरत – दशरथ तथा कैकयी के पुत्र थे।

आयु बढ़ने के साथ ही साथ रामचन्द्र गुणों में भी अपने भाइयों से आगे बढ़ने तथा प्रजा में अत्यंत लोकप्रिय होने लगे। उनमें अत्यन्त विलक्षण प्रतिभा थी जिसके परिणामस्वरू अल्प काल में ही वे समस्त विषयों में पारंगत हो गये। उन्हें सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों को चलाने तथा हाथी, घोड़े एवं सभी प्रकार के वाहनों की सवारी में उन्हें असाधारण निपुणता प्राप्त हो गई। वे निरन्तर माता-पिता और गुरुजनों की सेवा में लगे रहते थे। उनका अनुसरण शेष तीन भाई भी करते थे। गुरुजनों के प्रति जितनी श्रद्धा भक्ति इन चारों भाइयों में थी उतना ही उनमें परस्पर प्रेम और सौहार्द भी था। महाराज दशरथ का हृदय अपने चारों पुत्रों को देख कर गर्व और आनन्द से भर उठता था।

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  37. अयोध्याकाण्ड: श्री राम-भरत मिलाप कथा, राम और भरत का मिलन, चित्रकूट में भरत मिलाप की कहानी, राम-भरत मिलाप संवाद, श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटे भरत
  38. अयोध्याकाण्ड: महर्षि अत्रि का आश्रम, अत्रि ऋषि के आश्रम पहुंचे श्री राम Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Maharishi Atri Ka Ashram
  39. अरण्यकाण्ड: दण्डक वन में विराध वध, श्री राम द्वारा विराध राक्षस का वध, भगवान श्री राम ने किया दंडकवन के सबसे बड़े राक्षस विराध का वध
  40. अरण्यकाण्ड: महर्षि शरभंग का आश्रम, महर्षि शरभंग, शरभंग ऋषि की कथा, सीता की शंका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  41. अरण्यकाण्ड: अगस्त्य का आश्रम, महर्षि अगस्त्य मुनि, श्रीराम और अगस्त मुनि का मिलन स्थल सिद्धनाथ आश्रम Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  42. अरण्यकाण्ड: पंचवटी में आश्रम, श्री राम-लक्ष्मण एवं सीता पंचवटी आश्रम में कैसे पहुँचे?, पंचवटी किस राज्य में है, पंचवटी की कहानी, पंचवटी क्या है, पंचवटी कहां है
  43. अरण्यकाण्ड: रावण की बहन शूर्पणखा, श्री राम का खर-दूषण से युद्ध, खर-दूषण वध, खर-दूषण का वध किसने किया? Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  44. अरण्यकाण्ड: सीता की कथा और स्वर्ण मृग, श्री राम और स्वर्ण-मृग प्रसंग, मारीच का स्वर्णमृग रूप, सीता हरण, रामायण सीता हरण की कहानी, सीता हरण कैसे हुआ
  45. संपूर्ण रामायण कथा अरण्यकाण्ड: जटायु वध, रावण द्वारा गिद्धराज जटायु वध, सीता हरण व जटायु वध, रावण जटायु युद्ध, जटायु प्रसंग, जटायु कौन था
  46. अरण्यकाण्ड: रावण-सीता संवाद, रावण की माता सीता को धमकी, रावण और सीता संवाद अशोक वाटिका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  47. अरण्यकाण्ड: राम की वापसी और विलाप, श्री राम और लक्ष्मण विलाप, सीता हरण पर श्री राम जी के द्वारा विलाप, जटायु की मृत्यु, पक्षीराज जटायु की मृत्यु कैसे हुई
  48. अरण्यकाण्ड: कबन्ध का वध, राम द्वारा कबन्ध राक्षस का वध, रामायण में कबंध राक्षस, कबंध कौन था Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  49. अरण्यकाण्ड: शबरी का आश्रम, भगवान राम शबरी के आश्रम क्यों गए, श्री राम शबरी के आश्रम कैसे पहुँचे? शबरी के झूठे बेर प्रभु राम ने खाएं, शबरी के बेर की कहानी
  50. किष्किन्धाकाण्ड: राम हनुमान भेंट, श्रीराम की हनुमान से पहली मुलाकात कहां और कब हुई, राम हनुमान मिलन की कहानी
  51. किष्किन्धाकाण्ड: राम-सुग्रीव मैत्री, राम-सुग्रीव मित्रता, श्री राम और सुग्रीव के मित्रता की कहानी, राम-सुग्रीव वार्तालाप, राम-सुग्रीव संवाद
  52. किष्किन्धाकाण्ड: बाली सुग्रीव युध्द वालि-वध, बाली का वध, राम द्वारा बाली का वध, बाली-राम संवाद, तारा का विलाप
  53. किष्किन्धाकाण्ड: सुग्रीव का अभिषेक, बाली वध के बाद सुग्रीव का राज्याभिषेक (Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  54. किष्किन्धाकाण्ड: हनुमान-सुग्रीव संवाद, हनुमान और सुग्रीव की मित्रता, लक्ष्मण-सुग्रीव संवाद, राम का सुग्रीव पर कोप, रामायण सुग्रीव मित्रता
  55. किष्किन्धाकाण्ड: माता सीता की खोज, माता सीता की खोज में निकले राम, राम द्वारा हनुमान को मुद्रिका देना, माता सीता की खोज में निकले हनुमान
  56. किष्किन्धाकाण्ड: जाम्बवन्त द्वारा हनुमान को प्रेरणा, जाम्बवन्त के प्रेरक वचन Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  57. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का सागर पार करना, हनुमान जी ने समुद्र कैसे पार किया, हनुमान जी की लंका यात्रा, हनुमान जी का लंका में प्रवेश
  58. सुन्दरकाण्ड: लंका में सीता की खोज, माता सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान, सीता से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद
  59. सुन्दरकाण्ड: रावण -सीता संवाद, अशोक वाटिका में रावण संवाद, रावण सीता अशोक वाटिका, रावण की सीता को धमकी
  60. सुन्दरकाण्ड: जानकी राक्षसी घेरे में, माता सीता राक्षसी घेरे में, पति राम के वियोग में व्याकुल सीता, अशोक वाटिका में हनुमान जी किस वृक्ष पर बैठे थे
  61. सुन्दरकाण्ड: हनुमान सीता भेंट, सीता जी से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद, हनुमान का सीता को मुद्रिका देना
  62. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का विशाल रूप, हनुमान जी का पंचमुखी अवतार, हनुमान जी ने क्यों धारण किया पंचमुखी रूप, हनुमान के साथ क्यों नहीं गईं सीता, बजरंगबली का विराट रूप
  63. सुन्दरकाण्ड: हनुमान ने उजाड़ी अशोक वाटिका, हनुमान जी ने रावण की अशोक वाटिका को किया तहस-नहस, अशोक वाटिका विध्वंस, हनुमान राक्षस युद्ध
  64. सुन्दरकाण्ड: मेधनाद हनुमान युद्ध, लंका में हनुमान जी और मेघनाद का भयंकर युद्ध, मेघनाद ने हनुमान पर की बाणों की वर्षा
  65. सुन्दरकाण्ड: रावण के दरबार में हनुमान, रावण हनुमान संवाद, हनुमान-रावण की लड़ाई, लंका दहन, हनुमान जी द्वारा लंका दहन, हनुमान ने सोने की लंका में लगाई आग
  66. सुन्दरकाण्ड: माता सीता का संदेश देना, हनुमान के द्वारा राम सीता का संदेश, हनुमान ने राम को दिया माता सीता का संदेश
  67. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): समुद्र पार करने की चिन्ता, वानर सेना का प्रस्थान, वानर सेना का सेनापति कौन था, वानर सेना रामायण, वानर सेना का गठन
  68. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लंका में राक्षसी मन्त्रणा, विभीषण ने रावण को किस प्रकार समझाया, विभीषण का निष्कासन, विभीषण का श्री राम की शरण में आना
  69. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सेतु बन्धन, राम सेतु पुल, क्यों नहीं डूबे रामसेतु के पत्‍थर, राम सेतु का निर्माण कैसे हुआ, नल-नील द्वारा पुल बाँधना
  70. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सीता के साथ छल, रावण का छल, रावण ने छल से किया माता सीता का हरण Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  71. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अंगद रावण दरबार में, अंगद ने तोड़ा रावण का घमंड, रावण की सभा में अंगद-रावण संवाद, रावण की सभा में अंगद का पैर जमाना
  72. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): राम लक्ष्मण बन्धन में, नागपाश में राम लक्ष्मण, धूम्राक्ष और वज्रदंष्ट्र का वध, राक्षस सेनापति धूम्राक्ष का वध, अकम्पन का वध, प्रहस्त का वध
  73. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण कुम्भकर्ण संवाद, कुम्भकर्ण वध, कुंभकरण का वध किसने किया, कुम्भकर्ण की कहानी Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  74. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): त्रिशिरा, अतिकाय आदि का वध, अतिकाय का वध, मायासीता का वध, रावण पुत्र मेघनाद (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  75. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मेघनाद युद्ध कथा, मेघनाथ लक्ष्मण का अंतिम युद्ध, मेघनाद वध, मेघनाथ को कौन मार सकता था? लक्ष्मण ने मेघनाद को कैसे मारा
  76. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मूर्छित, मेघनाद ने ब्रह्म शक्ति से लक्ष्मण को किया मूर्छित, लक्ष्मण मूर्छित होने पर राम विलाप, संजीवनी बूटी लेकर आए हनुमान
  77. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण का युद्ध के लिये प्रस्थान, श्रीराम-रावण का युद्ध, राम और रावण के बीच युद्ध, रावण वध, मन्दोदरी का विलाप 
  78. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): विभीषण का राज्याभिषेक, रावण के बाद विभीषण बना लंका का राजा (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand Lanka Kand)
  79. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): माता सीता की अग्नि परीक्षा, माता सीता ने अग्नि परीक्षा क्यों दी थी? माता सीता ने अग्नि परीक्षा कैसे दी?, माता सीता की अग्नि परीक्षा कहां हुई थी? 
  80. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अयोध्या को प्रस्थान, राम अयोध्या कब लौटे थे, अयोध्या में राम का स्वागत, राम का अयोध्या वापस आना, वनवास से लौटे राम-लक्ष्मण और सीता
  81. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): भरत मिलाप, राम और भरत का मिलन, राम भरत संवाद, राम का राज्याभिषेक Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
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  100. उत्तरकाण्ड: महाप्रयाण, लव-कुश का अभिषेक, संपूर्ण वाल्मीकि रामायण, Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Mahaprayan, Valmiki Ramayan in Hindi
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बालकाण्ड : विश्वामित्र का आगमन, ऋषि विश्वामित्र का आगमन, विश्वामित्र आगमन, विश्वामित्र ने राम को मांगा, विश्वामित्र का आश्रम कहां था, विश्वामित्र कौन थे, मेनका और ऋषि विश्वामित्र की प्रेम कहानी (Ramayan Balakand- Vishwamitra Ka Aagman, Vishwamitra Aagman, Vishwamitra in Ramayana, Story of Rishi Vishwamitra, Vishwamitra Kaun the, Vishwamitra Katha in Hindi, Swarg Ki Apsara Menaka and Vishwamitra Love Story in Hindi)

संपूर्ण रामायण कथा बालकाण्ड : विश्वामित्र का आगमन, ऋषि विश्वामित्र का आगमन, विश्वामित्र आगमन, विश्वामित्र ने राम को मांगा, विश्वामित्र का आश्रम कहां था, विश्वामित्र कौन थे, मेनका और ऋषि विश्वामित्र की प्रेम कहानी (Ramayan Balakand- Vishwamitra Ka Aagman, Vishwamitra Aagman, Vishwamitra in Ramayana, Story of Rishi Vishwamitra, Vishwamitra Kaun the, Vishwamitra Katha in Hindi, Swarg Ki Apsara Menaka and Vishwamitra Love Story in Hindi)

विश्वामित्र का आगमन, ऋषि विश्वामित्र का आगमन
अयोध्यापति महाराज दशरथ के दरबार में यथोचित आसन पर गुरु वशिष्ठ, मन्त्रीगण और दरबारीगण बैठे थे। अयोध्यानरेश ने गुरु वशिष्ठ से कहा, हे गुरुदेव! जीवन तो क्षणभंगुर है और मैं वृद्धावस्था की ओर अग्रसर होते जा रहा हूँ। राम, भरत, लक्षम्ण और शत्रुघ्न चारों ही राजकुमार अब वयस्क भी हो चुके हैं। मेरी इच्छा है कि इस शरीर को त्यागने के पहले राजकुमारों का विवाह देख लूँ। अतः आपसे निवेदन है कि इन राजकुमारों के लिये योग्य कन्याओं की खोज करवायें। महाराज दशरथ की बात पूरी होते ही द्वारपाल ने ऋषि विश्वामित्र के आगमन की सूचना दी। स्वयं राजा दशरथ ने द्वार तक जाकर विश्वामित्र की अभ्यर्थना की और आदरपूर्वक उन्हें दरबार के अन्दर ले आये तथा गुरु वशिष्ठ के पास ही आसन देकर उनका यथोचित सत्कार किया।

कुशलक्षेम पूछने के पश्चात् राजा दशरथ ने विनम्र वाणी में ऋषि विश्वामित्र से कहा, हे मुनिश्रेष्ठ! आपके दर्शन से मैं कृतार्थ हुआ तथा आपके चरणों की पवित्र धूलि से यह राजदरबार और सम्पूर्ण अयोध्यापुरी धन्य हो गई। अब कृपा करके आप अपने आने का प्रयोजन बताइए। किसी भी प्रकार की आपकी सेवा करके मैं स्वयं को अत्यंत भाग्यशाली समझूँगा।

राजा के विनयपूर्ण वचनों को सुनकर मुनि विश्वामित्र बोले, हे राजन्! आपने अपने कुल की मर्यादा के अनुरूप ही वचन कहे हैं। इक्ष्वाकु वंश के राजाओं की श्रद्धा भक्ति गौ, ब्राह्मण और ऋषि-मुनियों के प्रति सदैव ही रही है। मैं आपके पास एक विशेष प्रयोजन से आया हूँ, समझिये कि कुछ माँगने के लिये आया हूँ। यदि आप मुझे वांछित वस्तु देने का वचन दें तो मैं अपनी माँग आपके सामने प्रस्तुत करू। आप के वचन न देने की दशा में मैं बिना कुछ माँगे ही वापस लौट जाऊँगा।

महाराज दशरथ ने कहा, हे ब्रह्मर्षि! आप निःसंकोच अपनी माँग रखें। सम्पूर्ण विश्व जानता है कि रघुकुल के राजाओं का वचन ही उनकी प्रतिज्ञा होती है। आप माँग तो मैं अपना शीश काट कर भी आपके चरणों में रख सकता हूँ। उनके इन वचनों से आश्वस्त ऋषि विश्वामित्र बोले, राजन्! मैं अपने आश्रम में एक यज्ञ कर रहा हूँ। इस यज्ञ के पूर्णाहुति के समय मारीच और सुबाहु नाम के दो राक्षस आकर रक्त, माँस आदि अपवित्र वस्तुएँ यज्ञ वेदी में फेंक देते हैं। इस प्रकार यज्ञ पूर्ण नहीं हो पाता। ऐसा वे अनेक बार कर चुके हैं। मैं उन्हें अपने तेज से श्राप देकर नष्ट भी नहीं कर सकता क्योंकि यज्ञ करते समय क्रोध करना वर्जित है।

मैं जानता हूँ कि आप मर्यादा का पालन करने वाले, ऋषि मुनियों के हितैषी एवं प्रजावत्सल राजा हैं। मैं आपसे आपके ज्येष्ठ पुत्र राम को माँगने के लिये आया हूँ ताकि वह मेरे साथ जाकर राक्षसों से मेरे यज्ञ की रक्षा कर सके और मेरा यज्ञानुष्ठान निर्विघ्न पूरा हो सके। मुझे पता है कि राम आसानी के साथ उन दोनों का संहार कर सकते हैं। अतः केवल दस दिनों के लिये राम को मुझे दे दीजिये। कार्य पूर्ण होते ही मैं उन्हें सकुशल आप के पास वापस पहुँचा दूँगा।

विश्वामित्र की बात सुनकर राजा दशरथ को अत्यन्त विषाद हुआ। ऐसा लगने लगा कि अभी वे मूर्छित हो जायेंगे। फिर स्वयं को संभाल कर उन्होंने कहा, मुनिवर! राम अभी बालक है। राक्षसों का सामना करना उसके लिये सम्भव नहीं होगा। आपके यज्ञ की रक्षा करने के लिये मैं स्वयं ही जाने को तैयार हूँ। विश्वामित्र बोले, राजन्! आप तनिक भी सन्देह न करें कि राम उनका सामना नहीं कर सकते। मैंने अपने योगबल से उनकी शक्तियों का अनुमान लगा लिया है। आप निःशंक होकर राम को मेरे साथ भेज दीजिये।

इस पर राजा दशरथ ने उत्तर दिया, हे मुनिश्रेष्ठ! राम ने अभी तक किसी राक्षस के माया प्रपंचों को नहीं देखा है और उसे इस प्रकार के युद्ध का अनुभव भी नहीं है। जब से उसने जन्म लिया है, मैंने उसे अपनी आँखों के सामने से कभी ओझल भी होने नहीं दिया है। उसके वियोग से मेरे प्राण निकल जावेंगे। आपसे विनय है कि कृपा करके मुझे ससैन्य चलने की आज्ञा दें।
पुत्रमोह से ग्रसित होकर राजा दशरथ को अपनी प्रतिज्ञा से विचलित होते देख ऋषि विश्वामित्र आवेश में आ गये। उन्होंने कहा, राजन्! मैं नहीं जानता था कि रघुकुल में अब प्रतिज्ञा पालन करने की परम्परा समाप्त हो गई है। यदि जानता होता तो मैं कदापि नहीं आता। लो मैं अब चला जाता हूँ। बात समाप्त होते होते उनका मुख क्रोध से लाल हो गया।

विश्वामित्र को इस प्रकार क्रुद्ध होते देख कर दरबारी एवं मन्त्रीगण भयभीत हो गये और किसी प्रकार के अनिष्ट की कल्पना से वे काँप उठे। गुरु वशिष्ठ ने राजा को समझाया, हे राजन्! पुत्र के मोह में ग्रसित होकर रघुकुल की मर्यादा, प्रतिज्ञा पालन और सत्यनिष्ठा को कलंकित मत कीजिये। मैं आपको परामर्श देता हूँ कि आप राम के बालक होने की बात को भूल कर एवं निःशंक होकर राम को मुनिराज के साथ भेज दीजिये। महामुनि अत्यन्त विद्वान, नीतिनिपुण और अस्त्र-शस्त्र के ज्ञाता हैं। मुनिवर के साथ जाने से राम का किसी प्रकार से भी अहित नहीं हो सकता उल्टे वे इनके साथ रह कर शस्त्र और शास्त्र विद्याओं में अत्यधिक निपुण हो जायेंगे तथा उनका कल्याण ही होगा।

गुरु वशिष्ठ के वचनों से आश्वस्त होकर राजा दशरथ ने राम को बुला भेजा। राम के साथ साथ लक्ष्मण भी वहाँ चले आये। राजा दशरथ ने राम को ऋषि विश्वामित्र के साथ जाने की आज्ञा दी। पिता की आज्ञा शिरोधार्य करके राम के मुनिवर के साथ जाने के लिये तैयार हो जाने पर लक्ष्मण ने भी ऋषि विश्वामित्र से साथ चलने के लिये प्रार्थना की और अपने पिता से भी राम के साथ जाने के लिये अनुमति माँगी। अनुमति मिल जाने पर राम और लक्ष्मण सभी गुरुजनों से आशीर्वाद ले कर ऋषि विश्वामित्र के साथ चल पड़े।
समस्त अयोध्यावासियों ने देख कि मन्द धीर गति से जाते हुये मुनिश्रेष्ठ विश्वामित्र के पीछे पीछे कंधों पर धनुष और तरकस में बाण रखे दोनों भाई राम और लक्ष्मण ऐसे लग रहे थे मानों ब्रह्मा जी के पीछे दोनों अश्विनी कुमार चले जा रहें हों। अद्भुत् कांति से युक्त दोनों भाई गोह की त्वचा से बने दस्ताने पहने हुये थे, हाथों में धनुष और कटि में तीक्ष्ण धार वाली कृपाणें शोभायमान हो रहीं थीं। ऐसा प्रतीत होता था मानो स्वयं शौर्य ही शरीर धारण करके चले जा रहे हों।

लता विटपों के मध्य से होते हुये छः कोस लम्बा मार्ग पार करके वे पवित्र सरयू नदी के तट पर पहुँचे। मुनि विश्वामित्र ने स्नेहयुक्त मधुर वाणी में कहा, हे वत्स! अब तुम लोग सरयू के पवित्र जल से आचमन स्नानादि करके अपनी थकान दूर कर लो, फिर मैं तुम्हें प्रशिक्षण दूँगा। सर्वप्रथम मैं तुम्हें बला और अतिबला नामक विद्याएँ सिखाऊँगा। इन विद्याओं के विषय में राम के द्वारा जिज्ञासा प्रकट करने पर ऋषि विश्वामित्र ने बताया, ये दोनों ही विद्याएँ असाधारण हैं। इन विद्याओं में पारंगत व्यक्तियों की गिनती संसार के श्रेष्ठ पुरुषों में होती है। विद्वानों ने इन्हें समस्त विद्याओं की जननी बताया है। इन विद्याओं को प्राप्त करके तुम भूख और प्यास पर विजय पा जाओगे। इन तेजोमय विद्याओं की सृष्टि स्वयं ब्रह्मा जी ने की है। इन विद्याओं को पाने का अधिकारी समझ कर मैं तुम्हें इन्हें प्रदान कर रहा हूँ।

राम और लक्ष्मण के स्नानादि से निवृत होने के पश्चात् विश्वामित्र जी ने उन्हें इन विद्याओं की दीक्षा दी। इन विद्याओं के प्राप्त हो जाने पर उनके मुख मण्डल पर अद्भुत् कान्ति आ गई। तीनों ने सरयू तट पर ही विश्राम किया। गुरु की सेवा करने के पश्चात् दोनों भाई तृण शैयाओं पर सो गये।

यहां जानिए अपने सवालों के जवाब
 विश्वामित्र कौन थे?
विश्वामित्र कान्यकुब्ज के पुरुवंशी महाराज गाधि के पुत्र थे. विश्वामित्र वैदिक काल के [ऋषि] (योगी) थे। ऋषि विश्वामित्र बड़े ही प्रतापी और तेजस्वी महापुरुष थे। ऋषि धर्म ग्रहण करने के पूर्व वे बड़े पराक्रमी और प्रजावत्सल नरेश थे ! ऋषि होने के पूर्व विश्वामित्र राजा थे और ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को हड़पने के लिए उन्होंने युद्ध किया था, लेकिन वे हार गए। इस हार ने ही उन्हें घोर तपस्या के लिए प्रेरित किया। विश्वामित्र ने अपनी तपस्या के बल पर त्रिशंकु को सशरीर स्वर्ग भेज दिया था। इस तरह ऋषि विश्वामित्र के असंख्य किस्से हैं। विश्वामित्र की तपस्या और मेनका द्वारा उनकी तपस्या भंग करने की कथा जगत प्रसिद्ध है।

विश्वामित्र जिस वन में यज्ञ कर रहे थे उस वन का नाम क्या था?
रामायण में विश्वामित्र जिस वन में यज्ञ कर रहे थे, उस वन का नाम सुंदर वन था. विश्वामित्र राजा दशरथ से अनुरोध किया कि वह राम और लक्ष्मण को अपने साथ सुंदर वन ले जाना चाहते हैं, क्योंकि सुंदर वन में ताड़का नाम की राक्षसी रहती थी. वह ऋषियों के यज्ञ को पूरा नहीं होने देती थी.
विश्वामित्र की पत्नी का क्या नाम था?
विश्वामित्र की पत्नी का क्या नाम मेनका था, जो स्वर्गलोक की अप्सरा थीं. मेनका से विश्वामित्र को एक सुन्दर कन्या प्राप्त हुई जिसका नाम शकुंतला रखा गया।

यहां पढ़िए स्वर्ग की अप्सरा मेनका और ऋषि विश्वामित्र की प्रेम कहानी  (Swarg ki Apsara Menaka and Vishwamitra love story in hindi)
भयानक वन में एकांत में बैठे ऋषि विश्वामित्र तपस्या में लीन थे। पृथ्वी अपनी गति से घूम रही थी लेकिन विश्वामित्र अपनी तपस्या में इस तरह समर्पित थे कि उन्हें बाहर की दुनिया की कोई खबर नही थी। ​ धीरे-धीरे उनके तप के प्रभाव से स्वर्ग में इंद्र का सिंहासन डोलने लगा।

नारद मुनि से विश्वामित्र के बारे में सुनकर इंद्र हुए चिंतित- नारद मुनि ने देवराज इंद्र को बताया कि पृथ्वीलोक में एक ऋषि वन में घोर तपस्या में लीन हैं। उनकी तपस्या में किसी भी विघ्न से कोई असर नहीं पड़ रहा है। यह सुनकर इंद्र को अपने इंद्रासन यानी इंद्रलोक की सत्ता जाने का भय सताने लगा।
इंद्र ने मेनका को धरती पर जाने का आदेश दिया- इंद्र ने स्वर्ग की सबसे खूबसूरत अप्सरा मेनका को बुलाया और उससे धरती पर जाने का आदेश दिया। इंद्रको पूरा विश्वास था कि विश्वामित्र मेनका की खूबसूरती में ऐसे खो जाएंगे कि अपनी तपस्या छोड़ देंगे।

विश्वामित्र की तपस्या भंग करना आसान नहीं था- कई कई सालों से तपस्या में बैठे विश्वामित्र का शरीर पत्थर की तरह कठोर हो चुका था। उन पर मेनका की उपस्थिति या खूबसूरती का कोई असर नहीं पड़ा। वह काम को अपने वश में कर चुके थे।
कामदेव ने अपने तीरों से विश्वामित्र पर निशाना साधा- मेनका में वे सभी गुण थे जो मृत्युलोक की एक नारी में होने चाहिए। इसके अलावा सुंदरता की मूरत अप्सरा मेनका अपने आप में ही आकर्षण का केन्द्र थी लेकिन ऋषि के तप को भंग करना आसान कार्य नहीं था। कामदेव ने भी विश्वामित्र पर अपने तीर चलाए और इस योजना में मेनका और इंद्र का साथ दिया।

कामदेव के तीरों का जादू विश्वामित्र पर चल गया- आखिरकार कामदेव के कामुक तीरों का जादू ऋषि विश्वामित्र पर चल गया। वह मेनका के रूप और सौंदर्य की ओर ऐसे आकर्षित हुए कि तपस्या से उठ खड़े हुए। विश्वामित्र के हृदय में मेनका के लिए प्रेम के अंकुर फूटने लगे।
मेनका के मन में भी विश्वामित्र के प्रति प्रेम पनपने लगा- अप्सरा मेनका जिस योजना के साथ धरती पर आई थी, वह काम तो सफल हो गया था। ऋषि की तपस्या भंग हो चुकी थी लेकिन अब वह भी मन में उनके प्रति प्रेम का अनुभव करने लगी थी। मेनका ने अपने बारे में ऋषि को कुछ नहीं बताया, उसे उनके क्रोध से डर लगता था। कुछ समय बाद दोनों ने शादी कर ली।

मेनका ने एक पुत्री को जन्म दिया- मेनका को यह भी डर था कि अभी अगर वह विश्वामित्र का साथ छोड़कर गई तो वह दोबारा तपस्या में बैठ सकते हैं। उनके साथ गृहस्थ आश्रम बिताने के कुछ वर्षों बाद मेनका ने एक पुत्री को जन्म दिया। अब संन्यासी विश्वामित्र पूरी तरह से गृहस्थ बन चुके थे।
इंद्र ने मेनका से कहा, स्वर्ग वापस चलो- मेनका अपनी नन्ही पुत्री के साथ खेल रही थी कि तभी देवराज इंद्र प्रकट हुए। देवराज ने मेनका को याद दिलाया कि वह कोई साधारण स्त्री नहीं बल्कि स्वर्ग की अप्सरा है। इंद्र ने कहा कि अब धरती पर उसका काम खत्म हो चुका है इसलिए वह स्वर्ग लौट आए।

इंद्र की बात सुनकर मेनका विलाप करने लगी- मेनका अपनी पुत्री और पति को छोड़कर वापस नहीं जाना चाहती थी। वह विलाप करने लगी। इंद्र ने मेनका से कहा, ‘अगर तुम स्वर्ग नहीं लौटी तो मैं तुम्हें शिला बना दूंगा।’
मेनका ने विश्वामित्र को बताया अपना सच- मेनका ने इसके बाद ऋषि विश्वामित्र को बताया कि वह स्वर्गलोक की अप्सरा है और उनकी तपस्या भंग करने के लिए देवताओं ने उन्हें धरती पर भेजा था। यह सुनकर विश्वामित्र बहुत दुखी हुए। मेनका ने अपनी पुत्री को वहीं छोड़कर उनसे विदा ले ली। विश्वामित्र ने उस कन्या को जंगल में एक ऋषि के आश्रम में छोड़ दिया। बाद में वही कन्या शकुंतला नाम से जानी गई।

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  61. सुन्दरकाण्ड: हनुमान सीता भेंट, सीता जी से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद, हनुमान का सीता को मुद्रिका देना
  62. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का विशाल रूप, हनुमान जी का पंचमुखी अवतार, हनुमान जी ने क्यों धारण किया पंचमुखी रूप, हनुमान के साथ क्यों नहीं गईं सीता, बजरंगबली का विराट रूप
  63. सुन्दरकाण्ड: हनुमान ने उजाड़ी अशोक वाटिका, हनुमान जी ने रावण की अशोक वाटिका को किया तहस-नहस, अशोक वाटिका विध्वंस, हनुमान राक्षस युद्ध
  64. सुन्दरकाण्ड: मेधनाद हनुमान युद्ध, लंका में हनुमान जी और मेघनाद का भयंकर युद्ध, मेघनाद ने हनुमान पर की बाणों की वर्षा
  65. सुन्दरकाण्ड: रावण के दरबार में हनुमान, रावण हनुमान संवाद, हनुमान-रावण की लड़ाई, लंका दहन, हनुमान जी द्वारा लंका दहन, हनुमान ने सोने की लंका में लगाई आग
  66. सुन्दरकाण्ड: माता सीता का संदेश देना, हनुमान के द्वारा राम सीता का संदेश, हनुमान ने राम को दिया माता सीता का संदेश
  67. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): समुद्र पार करने की चिन्ता, वानर सेना का प्रस्थान, वानर सेना का सेनापति कौन था, वानर सेना रामायण, वानर सेना का गठन
  68. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लंका में राक्षसी मन्त्रणा, विभीषण ने रावण को किस प्रकार समझाया, विभीषण का निष्कासन, विभीषण का श्री राम की शरण में आना
  69. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सेतु बन्धन, राम सेतु पुल, क्यों नहीं डूबे रामसेतु के पत्‍थर, राम सेतु का निर्माण कैसे हुआ, नल-नील द्वारा पुल बाँधना
  70. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सीता के साथ छल, रावण का छल, रावण ने छल से किया माता सीता का हरण Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  71. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अंगद रावण दरबार में, अंगद ने तोड़ा रावण का घमंड, रावण की सभा में अंगद-रावण संवाद, रावण की सभा में अंगद का पैर जमाना
  72. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): राम लक्ष्मण बन्धन में, नागपाश में राम लक्ष्मण, धूम्राक्ष और वज्रदंष्ट्र का वध, राक्षस सेनापति धूम्राक्ष का वध, अकम्पन का वध, प्रहस्त का वध
  73. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण कुम्भकर्ण संवाद, कुम्भकर्ण वध, कुंभकरण का वध किसने किया, कुम्भकर्ण की कहानी Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  74. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): त्रिशिरा, अतिकाय आदि का वध, अतिकाय का वध, मायासीता का वध, रावण पुत्र मेघनाद (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  75. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मेघनाद युद्ध कथा, मेघनाथ लक्ष्मण का अंतिम युद्ध, मेघनाद वध, मेघनाथ को कौन मार सकता था? लक्ष्मण ने मेघनाद को कैसे मारा
  76. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मूर्छित, मेघनाद ने ब्रह्म शक्ति से लक्ष्मण को किया मूर्छित, लक्ष्मण मूर्छित होने पर राम विलाप, संजीवनी बूटी लेकर आए हनुमान
  77. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण का युद्ध के लिये प्रस्थान, श्रीराम-रावण का युद्ध, राम और रावण के बीच युद्ध, रावण वध, मन्दोदरी का विलाप 
  78. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): विभीषण का राज्याभिषेक, रावण के बाद विभीषण बना लंका का राजा (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand Lanka Kand)
  79. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): माता सीता की अग्नि परीक्षा, माता सीता ने अग्नि परीक्षा क्यों दी थी? माता सीता ने अग्नि परीक्षा कैसे दी?, माता सीता की अग्नि परीक्षा कहां हुई थी? 
  80. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अयोध्या को प्रस्थान, राम अयोध्या कब लौटे थे, अयोध्या में राम का स्वागत, राम का अयोध्या वापस आना, वनवास से लौटे राम-लक्ष्मण और सीता
  81. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): भरत मिलाप, राम और भरत का मिलन, राम भरत संवाद, राम का राज्याभिषेक Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  82. उत्तरकाण्ड: रावण के पूर्व के राक्षसों के विषय में, रावण के जन्म की कथा, रावण का जन्म कैसे हुआ, रावण का जन्म कहां हुआ, रावण के कितने भाई थे
  83. उत्तरकाण्ड: हनुमान के जन्म की कथा, रामभक्त हनुमान के जन्म की कहानी, हनुमान की कथा, हनुमान जन्म लीला, पवनपुत्र हनुमान का जन्म कैसे हुआ
  84. उत्तरकाण्ड: अभ्यागतों की विदाई, प्रवासियों में अशुभ चर्चा, सीता का निर्वासन, राम ने सीता का त्याग क्यों किया, राम ने सीता को वनवास क्यों दिया
  85. उत्तरकाण्ड: राजा नृग की कथा, सूर्यवंशी राजा नृग की कथा, राजा नृग कुएँ का गिरगिट, राजा नृग का उद्धार कैसे हुआ? राजा नृग की मोक्ष कथा, राजा नृग का उपाख्यान 
  86. उत्तरकाण्ड: राजा निमि की कथा, शाप से सम्बंधित राजा की कथा, राजा निमि कौन थे? राजा निमि की कहानी, विदेह राजा जनक Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  87. उत्तरकाण्ड: राजा ययाति की कथा, कौन थे राजा ययाति, राजा ययाति की कहानी, ययाति का यदु कुल को शाप Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  88. उत्तरकाण्ड: कुत्ते का न्याय, राम और कुत्ते की कहानी, भगवान राम से जब न्याय मांगने आया एक कुत्ता, रामायण का अनोखा किस्सा
  89. उत्तरकाण्ड: पूर्व राजाओं के यज्ञ-स्थल एवं लवकुश का जन्म, लव कुश का जन्म कहां पर हुआ था, लव कुश में बड़ा कौन है, वाल्मीकि आश्रम कहां है, च्यवन ऋषि का आगमन
  90. उत्तरकाण्ड: ब्राह्मण बालक की मृत्यु, शंबूक ऋषि की हत्या किसने की, शंबुक कथा, शंबूक ऋषि का वध, राम ने क्यों की शंबूक की हत्या Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  91. उत्तरकाण्ड: राजा श्वेत क्यों खाया करते थे अपने ही शरीर का मांस, राजा श्वेत की कहानी, राजा श्वेत की कथा Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Raja Swet Ki Katha
  92. उत्तरकाण्ड: राजा दण्ड की कथा, दण्डकारण्य जंगल के श्रापित होने की कथा, शुक्राचार्य ने राजा दण्ड को दिया श्राप
  93. उत्तरकाण्ड: वृत्रासुर की कथा, वृत्रासुर का वध, वृत्रासुर कौन था? इंद्र द्वारा वृत्रासुर का वध Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Vritrasura Ki Katha
  94. उत्तरकाण्ड: राजा इल की कथा, जब पुरूष से स्त्री बन गये राजा ईल, राजा इल की कहानी (Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Raja Ill Ki Kahani, Raja Ill Ki Katha
  95. उत्तरकाण्ड: अश्वमेघ यज्ञ का अनुष्ठान रामायण, अश्वमेध यज्ञ क्या है? Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Ashvamedh Yagya Ka Anushthaan, Ashvamedh Yagya Kya Hai
  96. उत्तरकाण्ड: लव-कुश द्वारा रामायण गान, ‘हम कथा सुनाते’ लव-कुश के गीत, लव-कुश ने सुनाई राम कथा, लव कुश गीत, रामायण लव कुश कांड
  97. उत्तरकाण्ड: सीता का रसातल प्रवेश, सीता मैया धरती में क्यों समाई, सीता पृथ्वी समाधि, सीता जी का धरती में समाना, सीता का धरती में प्रवेश करना
  98. उत्तरकाण्ड: भरत व लक्ष्मण के पुत्रों के लिये राज्य व्यवस्था, वाल्मीकि रामायण (Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Bharat Aur Lakshman Ke Putron Ke Liye Rajya
  99. उत्तरकाण्ड: लक्ष्मण का परित्याग, राम ने लक्ष्मण का परित्याग क्यों किया, राम द्वारा लक्ष्मण का परित्याग, लक्ष्मण द्वारा प्राण विसर्जन, लक्ष्मण की मृत्यु
  100. उत्तरकाण्ड: महाप्रयाण, लव-कुश का अभिषेक, संपूर्ण वाल्मीकि रामायण, Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Mahaprayan, Valmiki Ramayan in Hindi
kaamadev ka aashram

बालकाण्ड : कामदेव का आश्रम, कामेश्वर धाम, वाल्मीकि रामायण, राम और लक्ष्मण, ऋषि विश्वामित्र (Ramayana Balakand: Kamdev’s Ashram, Kaamadev Ka Aashram, Kameshwar Dham, Valmiki Ramayan, Ram and Lakshman, Rishi Vishwamitra)

संपूर्ण रामायण कथा बालकाण्ड : कामदेव का आश्रम, कामेश्वर धाम, वाल्मीकि रामायण, राम और लक्ष्मण, ऋषि विश्वामित्र (Ramayana Balakand: Kamdev’s Ashram, Kaamadev Ka Aashram, Kameshwar Dham, Valmiki Ramayan, Ram and Lakshman, Rishi Vishwamitra)

कामदेव का आश्रम, कामेश्वर धाम
दूसरे दिन ब्राह्म-मुहूर्त्त में निद्रा त्याग कर मुनि विश्वामित्र तृण शैयाओं पर विश्राम करते हुये राम और लक्ष्मण के पास जा कर बोले, हे राम और लक्ष्मण! जागो। रात्रि समाप्त हो गई है। कुछ ही काल में प्राची में भगवान भुवन-भास्कर उदित होने वाले हैं। जिस प्रकार वे अन्धकार का नाश कर समस्त दिशाओं में प्रकाश फैलाते हैं उसी प्रकार तुम्हें भी अपने पराक्रम से राक्षसों का विनाश करना है। नित्य कर्म से निवृत होओ, सन्ध्या-उपासना करो। अग्निहोत्रादि से देवताओं को प्रसन्न करो। आलस्य को त्यागो और शीघ्र उठ जाओ क्योंकि अब सोने का समय नहीं है।

गुरु की आज्ञा प्राप्त होते ही दोनों भाइयों ने शैया त्याग दिया और नित्यकर्म एवं स्नान-ध्यान आदि से निवृत होकर मुनिवर के साथ गंगा तट की ओर चल दिये। वे गंगा और सरयू के संगम, जहाँ पर ऋषि-मुनियों तथा तपस्वियों के शान्त व सुन्दर आश्रम बने हुये थे, पर पहुँचे। एक अत्यधिक सुन्दर आश्रम को देखकर रामचन्द्र ने गुरु विश्वामित्र से पूछा, हे गुरुवर! यह परम रमणीक आश्रम किन महर्षि का निवास स्थान हैं?
राम के प्रश्न के उत्तर में ऋषि विश्वामित्र ने बताया,  हे राम! यह एक विशेष आश्रम है। पूर्व काल में कैलाशपति महादेव ने यहाँ घोर तपस्या की थी। सम्पूर्ण विश्व उनकी तपस्या को देखकर विचलित हो उठा था। उनकी तपस्या से देवराज इन्द्र भयभीत हो गए और उन्होंने शंकर जी के तप को भंग करने का निश्चय किया। इस कार्य के लिये उन्होंने कामदेव को नियुक्त कर दिया।

भगवान शिव पर कामदेव ने एक के बाद एक कई बाण छोड़े जिससे उनकी तपस्या में बाधा पड़ी। क्रुद्ध होकर महादेव ने अपना तीसरा नेत्र खोल दिया। उस तीसरे नेत्र की तेजोमयी ज्वाला से जल कर कामदेव भस्म हो गए। देवता होने के कारण कामदेव की मृत्यु नहीं हुई केवल शरीर ही नष्ट हुआ। इस प्रकार अंग नष्ट हो जाने के कारण उसका नाम अनंग हो गया और इस स्थान का नाम अंगदेश पड़ गया। यह भगवान शिव का आश्रम है किन्तु भगवान शिव के द्वारा यहाँ पर कामदेव को भस्म कर देने के कारण इसे कामदेव का आश्रम भी कहते हैं।

गुरु विश्वामित्र की आदेशानुसार सभी ने वहीं रात्रि विश्राम करने का निश्चय किया। राम और लक्ष्मण दोनों भाइयों ने वन से कंद-मूल-फल लाकर मुनिवर को समर्पित किये और गुरु के साथ दोनों भाइयों ने प्रसाद ग्रहण किया। तत्पश्चात् स्नान, सन्ध्या-उपासना आदि से निवृत होकर राम और लक्ष्मण गुरु विश्वामित्र से अनेक प्रकार की कथाएँ तथा धार्मिक प्रवचन सुनते रहे। अन्त में गुरु की यथोचित सेवा करने के पश्चात् आज्ञा पाकर वे परम पवित्र गायत्री मन्त्र का जाप करते हुये तृण शैयाओं पर जा विश्राम करने लगे।

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  9. संपूर्ण रामायण कथा बालकाण्ड : राम का जन्म , भगवान राम का जन्म कब हुआ , श्री राम जी का जन्म कब हुआ था, राम जी का जन्म कहाँ हुआ था, राम के जन्म की क्या कथा है.
  10. बालकाण्ड : विश्वामित्र का आगमन, ऋषि विश्वामित्र का आगमन, विश्वामित्र आगमन, विश्वामित्र ने राम को मांगा, विश्वामित्र का आश्रम कहां था, विश्वामित्र कौन थे.
  11. बालकाण्ड : कामदेव का आश्रम, कामेश्वर धाम, वाल्मीकि रामायण, राम और लक्ष्मण, ऋषि विश्वामित्र (Ramayana Balakand: Kamdev’s Ashram
  12. बालकाण्ड : ताड़का वध, राक्षसी ताड़का वध, ताड़का का वध कैसे हुआ, राम ने ताड़का का वध कैसे किया, ताड़का वध कहाँ हुआ था, ताड़का वन कहाँ है.
  13. बालकाण्ड : अलभ्य अस्त्रों का दान, विश्वामित्र द्वारा राम को अलभ्य अस्त्रों का दान, गुरु विश्वामित्र ने श्री राम को अस्त्र क्यों दिए? Vishvaamitra Dwara Ram Ko Alabhy Astron Ka Daan
  14. बालकाण्ड : महर्षि विश्वामित्र का आश्रम, सिद्धाश्रम, विश्वामित्र के आश्रम का नाम सिद्धाश्रम क्यों पड़ा? Sampoorn Ramayan Katha Bal Kand: Vishwamitra Ka Ashram
  15. बालकाण्ड: मारीच -सुबाहु का उत्पात, मारीच और सुबाहु वध, राम ने कैसे किया मारीच और सुबाहु का वध, मारीच और सुबाहु की माता का नाम क्या था?
  16. बालकाण्ड: धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, रामचंद्र का धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, धनुष यज्ञ का उद्देश्य, सीता स्वयंवर के लिए धनुष यज्ञ, शिवधनुष की विशेषता
  17. बालकाण्ड: गंगा-जन्म की कथा, गंगा की उत्पत्ति कथा, गंगा की उत्पत्ति कहां से हुई, गंगा की कहानी, गंगा की कथा, गंगा किसकी पुत्री थी, गंगा का जन्म कैसे हुआ
  18. बालकाण्ड: गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचे राम व लक्ष्मण, जनकपुरी में राम का आगमन, श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र का जनकपुर आगमन
  19. बालकाण्ड: अहिल्या की कथा – कौन थीं अहिल्या, क्यों और कैसे अहिल्या बन गई थी पत्थर? अहिल्या को श्राप क्यों मिला? अहिल्या को गौतम ऋषि ने दिया श्राप
  20. बालकाण्ड: विश्वामित्र का पूर्व चरित्र, विश्वामित्र का जीवन, विश्वामित्र की कहानी, विश्वामित्र के पिता का नाम, विश्वामित्र की संपूर्ण कथा, विश्वामित्र का जन्म कैसे हुआ
  21. बालकाण्ड: त्रिशंकु की स्वर्ग यात्रा, विश्वामित्र ने क्यों बनाया त्रिशंकु स्वर्ग, त्रिशंकु की कहानी, त्रिशंकु स्वर्ग क्या है और इसे किसने बनाया, त्रिशंकु को स्वर्ग जाने में किसने मदद की
  22. बालकाण्ड: ब्राह्मणत्व की प्राप्ति, विश्वामित्र को ब्राह्मणत्व की प्राप्ति, विश्वामित्र जी की कथा (Sampurna Ramayan Katha Bal Kand: Brahmanatva Ki Praapti
  23. बालकाण्ड: राम ने धनुष तोड़ा, धनुष यज्ञ राम विवाह, सीता स्वयंवर धनुष भंग, राम द्वारा धनुष भंग, शिवधनुष पिनाक की कथा, शिवधनुष की कथा
  24. बालकाण्ड: विवाह पूर्व की औपचारिकताएं, राम सीता विवाह, श्री राम सीता विवाह कथा, विवाह के समय राम और सीता की आयु कितनी थी,राम सीता की शादी
  25. बालकाण्ड: परशुराम जी का आगमन, राम का अयोध्या आगमन, विवाह के बाद राम सीता जी का अयोध्या में आगमन, पत्नियों सहित राजकुमारों का अयोध्या में आगमन
  26. अयोध्याकाण्ड: राम के राजतिलक की घोषणा, राजतिलक की तैयारी, श्री राम का राजतिलक, राम का राज्याभिषेक Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand
  27. अयोध्याकाण्ड: कैकेयी का कोपभवन में जाना, कैकेयी कोपभवन, कैकेयी क्रंदन, राजा दशरथ ने क्यों दिए कैकेयी को दो वरदान, कैकेयी द्वारा वरों की प्राप्ति
  28. अयोध्याकाण्ड: राम वनवास, राम को 14 वर्ष का वनवास, राम के वनवास जाने का कारण, राम 14 वर्ष के लिए वनवास क्यों गए, केकई ने राम को 14 वर्ष का वनवास क्यों दिया
  29. अयोध्याकाण्ड: तमसा नदी के तट पर राम लक्ष्मण और सीता, तमसा नदी कहां से निकली है, तमसा नदी किस जिले में है, तमसा नदी किस राज्य में है, टोंस नदी का इतिहास
  30. अयोध्याकाण्ड: भीलराज गुह, गंगा पार करना, केवट ने राम-लक्ष्मण और मां सीता को गंगा पार कराया, केवट और प्रभु श्रीराम का प्रसंग
  31. अयोध्याकाण्ड: राम, लक्ष्मण और सीता का चित्रकूट के लिये प्रस्थान, चित्रकूट की यात्रा, चित्रकूट धाम यात्रा, श्री रामजी के बनवास की कहानी
  32. अयोध्याकाण्ड: सुमन्त का अयोध्या लौटना, दशरथ सुमन्त संवाद (Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Sumant’s Return to Ayodhya
  33. अयोध्याकाण्ड: श्रवण कुमार की कथा, राजा दशरथ और श्रवण कुमार, श्रवण कुमार की कहानी, मातृ और पितृभक्त श्रवण कुमार
  34. अयोध्याकाण्ड: राजा दशरथ की मृत्यु, राजा दशरथ की मृत्यु कब हुई? अयोध्यापति राजा दशरथ की मृत्यु कैसे हुई? Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand
  35. अयोध्याकाण्ड: भरत-शत्रुघ्न की वापसी, भरत-शत्रुघ्न की अयोध्या वापसी, भरत कैकयी संवाद Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand
  36. अयोध्याकाण्ड: दशरथ की अन्त्येष्टि, दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार (Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Dasharatha’s Funeral
  37. अयोध्याकाण्ड: श्री राम-भरत मिलाप कथा, राम और भरत का मिलन, चित्रकूट में भरत मिलाप की कहानी, राम-भरत मिलाप संवाद, श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटे भरत
  38. अयोध्याकाण्ड: महर्षि अत्रि का आश्रम, अत्रि ऋषि के आश्रम पहुंचे श्री राम Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Maharishi Atri Ka Ashram
  39. अरण्यकाण्ड: दण्डक वन में विराध वध, श्री राम द्वारा विराध राक्षस का वध, भगवान श्री राम ने किया दंडकवन के सबसे बड़े राक्षस विराध का वध
  40. अरण्यकाण्ड: महर्षि शरभंग का आश्रम, महर्षि शरभंग, शरभंग ऋषि की कथा, सीता की शंका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  41. अरण्यकाण्ड: अगस्त्य का आश्रम, महर्षि अगस्त्य मुनि, श्रीराम और अगस्त मुनि का मिलन स्थल सिद्धनाथ आश्रम Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  42. अरण्यकाण्ड: पंचवटी में आश्रम, श्री राम-लक्ष्मण एवं सीता पंचवटी आश्रम में कैसे पहुँचे?, पंचवटी किस राज्य में है, पंचवटी की कहानी, पंचवटी क्या है, पंचवटी कहां है
  43. अरण्यकाण्ड: रावण की बहन शूर्पणखा, श्री राम का खर-दूषण से युद्ध, खर-दूषण वध, खर-दूषण का वध किसने किया? Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  44. अरण्यकाण्ड: सीता की कथा और स्वर्ण मृग, श्री राम और स्वर्ण-मृग प्रसंग, मारीच का स्वर्णमृग रूप, सीता हरण, रामायण सीता हरण की कहानी, सीता हरण कैसे हुआ
  45. संपूर्ण रामायण कथा अरण्यकाण्ड: जटायु वध, रावण द्वारा गिद्धराज जटायु वध, सीता हरण व जटायु वध, रावण जटायु युद्ध, जटायु प्रसंग, जटायु कौन था
  46. अरण्यकाण्ड: रावण-सीता संवाद, रावण की माता सीता को धमकी, रावण और सीता संवाद अशोक वाटिका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  47. अरण्यकाण्ड: राम की वापसी और विलाप, श्री राम और लक्ष्मण विलाप, सीता हरण पर श्री राम जी के द्वारा विलाप, जटायु की मृत्यु, पक्षीराज जटायु की मृत्यु कैसे हुई
  48. अरण्यकाण्ड: कबन्ध का वध, राम द्वारा कबन्ध राक्षस का वध, रामायण में कबंध राक्षस, कबंध कौन था Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  49. अरण्यकाण्ड: शबरी का आश्रम, भगवान राम शबरी के आश्रम क्यों गए, श्री राम शबरी के आश्रम कैसे पहुँचे? शबरी के झूठे बेर प्रभु राम ने खाएं, शबरी के बेर की कहानी
  50. किष्किन्धाकाण्ड: राम हनुमान भेंट, श्रीराम की हनुमान से पहली मुलाकात कहां और कब हुई, राम हनुमान मिलन की कहानी
  51. किष्किन्धाकाण्ड: राम-सुग्रीव मैत्री, राम-सुग्रीव मित्रता, श्री राम और सुग्रीव के मित्रता की कहानी, राम-सुग्रीव वार्तालाप, राम-सुग्रीव संवाद
  52. किष्किन्धाकाण्ड: बाली सुग्रीव युध्द वालि-वध, बाली का वध, राम द्वारा बाली का वध, बाली-राम संवाद, तारा का विलाप
  53. किष्किन्धाकाण्ड: सुग्रीव का अभिषेक, बाली वध के बाद सुग्रीव का राज्याभिषेक (Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  54. किष्किन्धाकाण्ड: हनुमान-सुग्रीव संवाद, हनुमान और सुग्रीव की मित्रता, लक्ष्मण-सुग्रीव संवाद, राम का सुग्रीव पर कोप, रामायण सुग्रीव मित्रता
  55. किष्किन्धाकाण्ड: माता सीता की खोज, माता सीता की खोज में निकले राम, राम द्वारा हनुमान को मुद्रिका देना, माता सीता की खोज में निकले हनुमान
  56. किष्किन्धाकाण्ड: जाम्बवन्त द्वारा हनुमान को प्रेरणा, जाम्बवन्त के प्रेरक वचन Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  57. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का सागर पार करना, हनुमान जी ने समुद्र कैसे पार किया, हनुमान जी की लंका यात्रा, हनुमान जी का लंका में प्रवेश
  58. सुन्दरकाण्ड: लंका में सीता की खोज, माता सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान, सीता से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद
  59. सुन्दरकाण्ड: रावण -सीता संवाद, अशोक वाटिका में रावण संवाद, रावण सीता अशोक वाटिका, रावण की सीता को धमकी
  60. सुन्दरकाण्ड: जानकी राक्षसी घेरे में, माता सीता राक्षसी घेरे में, पति राम के वियोग में व्याकुल सीता, अशोक वाटिका में हनुमान जी किस वृक्ष पर बैठे थे
  61. सुन्दरकाण्ड: हनुमान सीता भेंट, सीता जी से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद, हनुमान का सीता को मुद्रिका देना
  62. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का विशाल रूप, हनुमान जी का पंचमुखी अवतार, हनुमान जी ने क्यों धारण किया पंचमुखी रूप, हनुमान के साथ क्यों नहीं गईं सीता, बजरंगबली का विराट रूप
  63. सुन्दरकाण्ड: हनुमान ने उजाड़ी अशोक वाटिका, हनुमान जी ने रावण की अशोक वाटिका को किया तहस-नहस, अशोक वाटिका विध्वंस, हनुमान राक्षस युद्ध
  64. सुन्दरकाण्ड: मेधनाद हनुमान युद्ध, लंका में हनुमान जी और मेघनाद का भयंकर युद्ध, मेघनाद ने हनुमान पर की बाणों की वर्षा
  65. सुन्दरकाण्ड: रावण के दरबार में हनुमान, रावण हनुमान संवाद, हनुमान-रावण की लड़ाई, लंका दहन, हनुमान जी द्वारा लंका दहन, हनुमान ने सोने की लंका में लगाई आग
  66. सुन्दरकाण्ड: माता सीता का संदेश देना, हनुमान के द्वारा राम सीता का संदेश, हनुमान ने राम को दिया माता सीता का संदेश
  67. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): समुद्र पार करने की चिन्ता, वानर सेना का प्रस्थान, वानर सेना का सेनापति कौन था, वानर सेना रामायण, वानर सेना का गठन
  68. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लंका में राक्षसी मन्त्रणा, विभीषण ने रावण को किस प्रकार समझाया, विभीषण का निष्कासन, विभीषण का श्री राम की शरण में आना
  69. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सेतु बन्धन, राम सेतु पुल, क्यों नहीं डूबे रामसेतु के पत्‍थर, राम सेतु का निर्माण कैसे हुआ, नल-नील द्वारा पुल बाँधना
  70. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सीता के साथ छल, रावण का छल, रावण ने छल से किया माता सीता का हरण Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  71. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अंगद रावण दरबार में, अंगद ने तोड़ा रावण का घमंड, रावण की सभा में अंगद-रावण संवाद, रावण की सभा में अंगद का पैर जमाना
  72. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): राम लक्ष्मण बन्धन में, नागपाश में राम लक्ष्मण, धूम्राक्ष और वज्रदंष्ट्र का वध, राक्षस सेनापति धूम्राक्ष का वध, अकम्पन का वध, प्रहस्त का वध
  73. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण कुम्भकर्ण संवाद, कुम्भकर्ण वध, कुंभकरण का वध किसने किया, कुम्भकर्ण की कहानी Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  74. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): त्रिशिरा, अतिकाय आदि का वध, अतिकाय का वध, मायासीता का वध, रावण पुत्र मेघनाद (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  75. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मेघनाद युद्ध कथा, मेघनाथ लक्ष्मण का अंतिम युद्ध, मेघनाद वध, मेघनाथ को कौन मार सकता था? लक्ष्मण ने मेघनाद को कैसे मारा
  76. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मूर्छित, मेघनाद ने ब्रह्म शक्ति से लक्ष्मण को किया मूर्छित, लक्ष्मण मूर्छित होने पर राम विलाप, संजीवनी बूटी लेकर आए हनुमान
  77. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण का युद्ध के लिये प्रस्थान, श्रीराम-रावण का युद्ध, राम और रावण के बीच युद्ध, रावण वध, मन्दोदरी का विलाप 
  78. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): विभीषण का राज्याभिषेक, रावण के बाद विभीषण बना लंका का राजा (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand Lanka Kand)
  79. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): माता सीता की अग्नि परीक्षा, माता सीता ने अग्नि परीक्षा क्यों दी थी? माता सीता ने अग्नि परीक्षा कैसे दी?, माता सीता की अग्नि परीक्षा कहां हुई थी? 
  80. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अयोध्या को प्रस्थान, राम अयोध्या कब लौटे थे, अयोध्या में राम का स्वागत, राम का अयोध्या वापस आना, वनवास से लौटे राम-लक्ष्मण और सीता
  81. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): भरत मिलाप, राम और भरत का मिलन, राम भरत संवाद, राम का राज्याभिषेक Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  82. उत्तरकाण्ड: रावण के पूर्व के राक्षसों के विषय में, रावण के जन्म की कथा, रावण का जन्म कैसे हुआ, रावण का जन्म कहां हुआ, रावण के कितने भाई थे
  83. उत्तरकाण्ड: हनुमान के जन्म की कथा, रामभक्त हनुमान के जन्म की कहानी, हनुमान की कथा, हनुमान जन्म लीला, पवनपुत्र हनुमान का जन्म कैसे हुआ
  84. उत्तरकाण्ड: अभ्यागतों की विदाई, प्रवासियों में अशुभ चर्चा, सीता का निर्वासन, राम ने सीता का त्याग क्यों किया, राम ने सीता को वनवास क्यों दिया
  85. उत्तरकाण्ड: राजा नृग की कथा, सूर्यवंशी राजा नृग की कथा, राजा नृग कुएँ का गिरगिट, राजा नृग का उद्धार कैसे हुआ? राजा नृग की मोक्ष कथा, राजा नृग का उपाख्यान 
  86. उत्तरकाण्ड: राजा निमि की कथा, शाप से सम्बंधित राजा की कथा, राजा निमि कौन थे? राजा निमि की कहानी, विदेह राजा जनक Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  87. उत्तरकाण्ड: राजा ययाति की कथा, कौन थे राजा ययाति, राजा ययाति की कहानी, ययाति का यदु कुल को शाप Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  88. उत्तरकाण्ड: कुत्ते का न्याय, राम और कुत्ते की कहानी, भगवान राम से जब न्याय मांगने आया एक कुत्ता, रामायण का अनोखा किस्सा
  89. उत्तरकाण्ड: पूर्व राजाओं के यज्ञ-स्थल एवं लवकुश का जन्म, लव कुश का जन्म कहां पर हुआ था, लव कुश में बड़ा कौन है, वाल्मीकि आश्रम कहां है, च्यवन ऋषि का आगमन
  90. उत्तरकाण्ड: ब्राह्मण बालक की मृत्यु, शंबूक ऋषि की हत्या किसने की, शंबुक कथा, शंबूक ऋषि का वध, राम ने क्यों की शंबूक की हत्या Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  91. उत्तरकाण्ड: राजा श्वेत क्यों खाया करते थे अपने ही शरीर का मांस, राजा श्वेत की कहानी, राजा श्वेत की कथा Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Raja Swet Ki Katha
  92. उत्तरकाण्ड: राजा दण्ड की कथा, दण्डकारण्य जंगल के श्रापित होने की कथा, शुक्राचार्य ने राजा दण्ड को दिया श्राप
  93. उत्तरकाण्ड: वृत्रासुर की कथा, वृत्रासुर का वध, वृत्रासुर कौन था? इंद्र द्वारा वृत्रासुर का वध Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Vritrasura Ki Katha
  94. उत्तरकाण्ड: राजा इल की कथा, जब पुरूष से स्त्री बन गये राजा ईल, राजा इल की कहानी (Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Raja Ill Ki Kahani, Raja Ill Ki Katha
  95. उत्तरकाण्ड: अश्वमेघ यज्ञ का अनुष्ठान रामायण, अश्वमेध यज्ञ क्या है? Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Ashvamedh Yagya Ka Anushthaan, Ashvamedh Yagya Kya Hai
  96. उत्तरकाण्ड: लव-कुश द्वारा रामायण गान, ‘हम कथा सुनाते’ लव-कुश के गीत, लव-कुश ने सुनाई राम कथा, लव कुश गीत, रामायण लव कुश कांड
  97. उत्तरकाण्ड: सीता का रसातल प्रवेश, सीता मैया धरती में क्यों समाई, सीता पृथ्वी समाधि, सीता जी का धरती में समाना, सीता का धरती में प्रवेश करना
  98. उत्तरकाण्ड: भरत व लक्ष्मण के पुत्रों के लिये राज्य व्यवस्था, वाल्मीकि रामायण (Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Bharat Aur Lakshman Ke Putron Ke Liye Rajya
  99. उत्तरकाण्ड: लक्ष्मण का परित्याग, राम ने लक्ष्मण का परित्याग क्यों किया, राम द्वारा लक्ष्मण का परित्याग, लक्ष्मण द्वारा प्राण विसर्जन, लक्ष्मण की मृत्यु
  100. उत्तरकाण्ड: महाप्रयाण, लव-कुश का अभिषेक, संपूर्ण वाल्मीकि रामायण, Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Mahaprayan, Valmiki Ramayan in Hindi
tadka vadh

बालकाण्ड : ताड़का वध, राक्षसी ताड़का वध, ताड़का का वध कैसे हुआ, राम ने ताड़का का वध कैसे किया, ताड़का वध कहाँ हुआ था, ताड़का वन कहाँ है, ताड़का किसकी पुत्री थी, ताड़का के पुत्र का क्या नाम था, ताड़का वध रामलीला (Ramayan Balkand : Tadka Vadh, Rakshasi Tadka Vadh, Tadka Ka Vadh Kaise Hua, How Ram Killed Tadka, Ram Ne Tadka Ka Vadh Kaise Kiya, Tadka Vadh Kaha Hua Tha, Tadka Van Kaha Hai, Tadka Kiski Putri Thi, Tadka Ke Putra Ka Kya Naam Tha, Tadka Vadh Ramleela)

संपूर्ण रामायण कथा बालकाण्ड : ताड़का वध, राक्षसी ताड़का वध, ताड़का का वध कैसे हुआ, राम ने ताड़का का वध कैसे किया, ताड़का वध कहाँ हुआ था, ताड़का वन कहाँ है, ताड़का किसकी पुत्री थी, ताड़का के पुत्र का क्या नाम था, ताड़का वध रामलीला (Ramayan Balkand : Tadka Vadh, Rakshasi Tadka Vadh, Tadka Ka Vadh Kaise Hua, How Ram Killed Tadka, Ram Ne Tadka Ka Vadh Kaise Kiya, Tadka Vadh Kaha Hua Tha, Tadka Van Kaha Hai, Tadka Kiski Putri Thi, Tadka Ke Putra Ka Kya Naam Tha, Tadka Vadh Ramleela)

ताड़का वध, राक्षसी ताड़का वध
राम, लक्ष्मण, भरत एवम शत्रुघ्न चारों राजकुमार अपनी शिक्षा पूरी कर अयोध्या लौटते हैं उनके पराक्रम की चर्चा सभी जगह हो रही हैं | उसी दौरान कुछ हिस्सों में राक्षसी राज होने के कारण जन मानुष बहुत दुखी एवम प्रताड़ित हैं तब सभी मुनि मिलकर इस समस्या के निवारण हेतु एक उपाय सोचते हैं एवम अयोध्या जाकर दशरथ नंदन को इस दुविधा के अंत के लिए बुलाना तय करते हैं | इसके लिए मुनिराज विश्वामित्र अयोध्या के लिये प्रस्थान करते हैं |

अयोध्या पहुंचकर विश्वामित्र राजा दशरथ से सारी स्थिती स्पष्ट करते हैं और राम को अपने साथ भेजने का आग्रह करते हैं | राजा दशरथ जनकल्याण के लिए सहर्ष राम को जाने की आज्ञा दे देते हैं | यह सुन लक्षमण गुरु विश्वामित्र के चरण पकड़ कर अपने भैया राम के साथ ले चलने का आग्रह करते हैं | भातृप्रेम के आगे सभी हार मान जाते है और लक्षमण को भाई राम के साथ जाने की आज्ञा दे देते हैं |

सुबह के समय राम, लक्ष्मण एवम मुनि विश्वामित्र नदी के किनारे पहुँचते हैं | दो राज कुमारो को देख सभी मुनि विश्वामित्र से उनका परिचय जानना चाहते हैं | तब विश्वामित्र सभी को बताते है कि ये दोनों अयोध्या के राजकुमार हैं | उनकी बाते सुनने के बाद वहाँ के लोग उन्हें नाव देते हैं और कहते हैं कि वे इस नदी को इसी नाव से पार करें | मुनिराज सभी को धन्यवाद देते हैं और नाव लेकर निकल पड़ते हैं | किनारे पर पहुँचने के बाद उन्हें एक घना जंगल मिलता हैं तब राम विश्वामित्र से पहुँचते हैं – गुरुवर यह कैसा घना डरावना जंगल हैं ? जहाँ चारों तरफ खतरनाक जंगली जानवरों का शोर हैं अंधकार इतना अधिक गहरा हैं पेड़ो की घनी शाखाओं के कारण सूर्य का तेज प्रकाश भी यहाँ तक पहुँच नहीं पा रहा | क्या नाम हैं इस डरावने जंगल का ? विश्वामित्र उत्तर देते हैं – हे राम ! जहाँ तुम इस भयावह जंगल को देख रहे हों, वहाँ कई वर्षों पहले दो समृद्ध राज्य करूप एवम मालदा हुआ करते थे | वे दोनों ही राज्य बहुत सम्पन्न थे | जहाँ धन सम्पदा की प्रचुर मात्रा थी और प्रजा भी खुशहाल थी |

लक्ष्मण ने उत्सुक्ता से पूछा – हे गुरुवर जब यहाँ इतने सुंदर राज्य थे तब उनका ऐसा भयावह परिणाम कैसे हुआ ? विश्वामित्र ने बताया – यह सब सम्पन्नता यक्ष की पुत्री ताड़का ने समाप्त की उसने इस सुंदर जगह को एक भयानक जंगल बना दिया | ताड़का एक साधारण स्त्री नहीं बल्कि दानव सुन्द की पत्नी एवम राक्षस मारिच की माता एक राक्षसी हैं जिसमे हजार हाथियों के समान बल हैं जिसके कारण उसने और उसके पुत्र ने इस जगह पर बसे सुंदर राज्यों को उजाड़ दिया और यहाँ के नागरिको को मार डाला अथवा अपना दास बन लिया तब ही से इस जगह कोई आने की हिम्मत नहीं करता और अगर कोई गलती से आ भी जाये तो यहाँ से जिन्दा वापस नहीं जाता | यही कारण हैं जो मैं तुम दोनों को यहाँ लाया हूँ अब तुम्ही इस राक्षसी ताड़का का वध कर सकते हो |

तब आश्चर्य के भाव के साथ राम पूछते हैं – गुरुवर एक स्त्री में तो सदैव कोमलता के भाव होते हैं | उसमे ममता और उदारता होती हैं फिर क्या कारण हैं जो ताड़का में हजारों हाथियों का बल हैं और वो उसका इतना भयानक उपयोग कर रही हैं |विश्वामित्र कहते हैं पुत्र राम तुम बिलकुल सही कह रहे हो | इस सबके पीछे एक बड़ा कारण हैं | बहुत समय पहले एक सुकेतु नामक यक्ष था जिनकी कोई संतान नहीं थी इसलिये उसने ब्रह्मा जी की कठोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्म देव ने उसे एक कन्या संतान के रूप में दी | सुकेतु ने ब्रह्मदेव से अपनी संतान के लिये हजार हाथियों जितना बल माँगा और ब्रह्मदेव ने उसकी इच्छा पूरी की इसलिए ताड़का में इतना बल हैं | जब ताड़का की आयु विवाह योग्य हुई तब उसका विवाह दानव सुन्द से किया गया | सुन्द से उसकी दो संतान जन्मी जिसका नाम मारीच और सुबाहु रखा गया | मारीच भी अपनी माँ के समान महाबलशाली था लेकिन मारीच सुन्द का पुत्र होते हुए भी दानव नहीं था लेकिन वो बहुत उपद्रवी था वो ऋषि मुनियों को बहुत प्रताड़ित करता था उसके इस कृत्य के कारण मुनि अगस्त ने उसे श्राप दिया और उसे एक दानव बना दिया | यह देख सुन्द को क्रोध आया और उसने अगस्त मुनि को मारने हेतु उन पर आक्रमण किया | सुन्द के आगे बढ़ते ही अगस्त मुनि ने उसे अपने श्राप से भस्म कर दिया | अपने पति की मृत्यु को देख ताड़का क्रोध से भर गई और अगस्त मुनि पर आक्रमण कर दिया तब मुनि उसे भी श्राप दिया और उसके सुंदर कोमल शरीर को भयानक कुरूप बना दिया |

तब ही से राक्षसी ताड़का बदले की आग में जल रही हैं और निर्दोष मानवों पर अत्याचार कर रही हैं | उसके इसी अत्याचार से मनुष्यों को मुक्ति दिलाने के लिये मैं तुम दोनों को यहाँ लाया हूँ और अब तुम्हे ताड़का का वध करना होगा बिना यह सोचे की वो एक स्त्री हैं क्यूंकि वो एक श्रापित जिन्दगी जी रही हैं और मनुष्य जाति को प्रताड़ित कर रही हैं ऐसी स्त्री को मारना अधर्म नहीं है तुम बिना अड़चन उसका वध कर सकते हों क्यूंकि तुम्ही हो जो ताड़का को श्रापमुक्त कर सकता हैं और उसका सामना कर सकता हैं |

राम विश्वामित्र की बात मानते हैं और गुरु के आदेशानुसार ताड़का का वध करने के लिये एक नये शस्त्र ‘टंकार’ का आविष्कार करते हैं | टंकार एक ऐसा धनुष हैं जिसे खीचने पर असहनीय आवाज होती हैं जो चारों तरफ हाहाकार मचा देती हैं जिसे सुनकर जंगली जानवर डर कर भागने लगते हैं इस सबके कारण ताड़का को क्रोध आने लगता हैं और जब वो राम को धनुष बाण से सज्ज देख सोचती हैं कि यह राजकुमार विश्वामित्र द्वारा लाया गया हैं इसलिये अवश्य ही मेरे साम्राज्य को तबाह कर सकता हैं | वो तेजी से राम के उस शस्त्र पर झप्टा मारती हैं उसे देखकर राम लक्ष्मण से कहते हैं – लक्ष्मण देखो यह एक राक्षसी हैं जिसकी काया इतनी बड़ी हैं और कितनी कुरूप हैं यह मनुष्यों को मारने में आनंद अनुभव करती हैं और उनके रक्त का सेवन करती हैं इसलिए सावधान रहो और देखो मैं कैसे इसका संहार करता हूँ |

अपने विशाल काय शरीर के साथ ताड़का राम और लक्ष्मण के आस-पास घूम रही हैं उसकी गति प्रकाश की गति के समान तीव्र हैं | राम को विश्वामित्र ने कई शस्त्र प्रदान कर इस भयावह युद्ध के लिये पहले ही तैयार कर रखा था | राम और ताड़का के बीच बहुत देर तक युद्ध चलता हैं | अंत में राम ताड़का के ह्रदय स्थल पर तीर से आघात करते हैं और ताड़का पीड़ा से चीखती हुई चक्कर खाकर भूमि पर गिर पड़ी और अगले ही क्षण उसके प्राण पखेरू उड़ गये। राम के इस रण कौशल और ताड़का की मृत्यु से ऋषि विश्वामित्र अत्यंत प्रसन्न हुये। उनके मुख से रामचन्द्र के लिये आशीर्वचन निकलने लगे। | और भयावह वन वापस सुंदर राज्य में बदल जाता हैं |

गुरु की आज्ञा से वहीं पर सभी ने रात्रि व्यतीत किया। प्रातःकाल उन्होंने देखा कि ताड़का के आतंक से मुक्ति पा जाने के कारण उस वन की भयंकरता और विकरालता समाप्त हो चुकी है। कुछ समय तक उस वन की शोभा निहारने के उपरान्त स्नान-पूजन से निवृत हो कर वे महर्षि विश्वामित्र के आश्रम की ओर चल पड़े।

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  16. बालकाण्ड: धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, रामचंद्र का धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, धनुष यज्ञ का उद्देश्य, सीता स्वयंवर के लिए धनुष यज्ञ, शिवधनुष की विशेषता
  17. बालकाण्ड: गंगा-जन्म की कथा, गंगा की उत्पत्ति कथा, गंगा की उत्पत्ति कहां से हुई, गंगा की कहानी, गंगा की कथा, गंगा किसकी पुत्री थी, गंगा का जन्म कैसे हुआ
  18. बालकाण्ड: गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचे राम व लक्ष्मण, जनकपुरी में राम का आगमन, श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र का जनकपुर आगमन
  19. बालकाण्ड: अहिल्या की कथा – कौन थीं अहिल्या, क्यों और कैसे अहिल्या बन गई थी पत्थर? अहिल्या को श्राप क्यों मिला? अहिल्या को गौतम ऋषि ने दिया श्राप
  20. बालकाण्ड: विश्वामित्र का पूर्व चरित्र, विश्वामित्र का जीवन, विश्वामित्र की कहानी, विश्वामित्र के पिता का नाम, विश्वामित्र की संपूर्ण कथा, विश्वामित्र का जन्म कैसे हुआ
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  30. अयोध्याकाण्ड: भीलराज गुह, गंगा पार करना, केवट ने राम-लक्ष्मण और मां सीता को गंगा पार कराया, केवट और प्रभु श्रीराम का प्रसंग
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  32. अयोध्याकाण्ड: सुमन्त का अयोध्या लौटना, दशरथ सुमन्त संवाद (Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Sumant’s Return to Ayodhya
  33. अयोध्याकाण्ड: श्रवण कुमार की कथा, राजा दशरथ और श्रवण कुमार, श्रवण कुमार की कहानी, मातृ और पितृभक्त श्रवण कुमार
  34. अयोध्याकाण्ड: राजा दशरथ की मृत्यु, राजा दशरथ की मृत्यु कब हुई? अयोध्यापति राजा दशरथ की मृत्यु कैसे हुई? Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand
  35. अयोध्याकाण्ड: भरत-शत्रुघ्न की वापसी, भरत-शत्रुघ्न की अयोध्या वापसी, भरत कैकयी संवाद Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand
  36. अयोध्याकाण्ड: दशरथ की अन्त्येष्टि, दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार (Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Dasharatha’s Funeral
  37. अयोध्याकाण्ड: श्री राम-भरत मिलाप कथा, राम और भरत का मिलन, चित्रकूट में भरत मिलाप की कहानी, राम-भरत मिलाप संवाद, श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटे भरत
  38. अयोध्याकाण्ड: महर्षि अत्रि का आश्रम, अत्रि ऋषि के आश्रम पहुंचे श्री राम Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Maharishi Atri Ka Ashram
  39. अरण्यकाण्ड: दण्डक वन में विराध वध, श्री राम द्वारा विराध राक्षस का वध, भगवान श्री राम ने किया दंडकवन के सबसे बड़े राक्षस विराध का वध
  40. अरण्यकाण्ड: महर्षि शरभंग का आश्रम, महर्षि शरभंग, शरभंग ऋषि की कथा, सीता की शंका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  41. अरण्यकाण्ड: अगस्त्य का आश्रम, महर्षि अगस्त्य मुनि, श्रीराम और अगस्त मुनि का मिलन स्थल सिद्धनाथ आश्रम Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  42. अरण्यकाण्ड: पंचवटी में आश्रम, श्री राम-लक्ष्मण एवं सीता पंचवटी आश्रम में कैसे पहुँचे?, पंचवटी किस राज्य में है, पंचवटी की कहानी, पंचवटी क्या है, पंचवटी कहां है
  43. अरण्यकाण्ड: रावण की बहन शूर्पणखा, श्री राम का खर-दूषण से युद्ध, खर-दूषण वध, खर-दूषण का वध किसने किया? Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  44. अरण्यकाण्ड: सीता की कथा और स्वर्ण मृग, श्री राम और स्वर्ण-मृग प्रसंग, मारीच का स्वर्णमृग रूप, सीता हरण, रामायण सीता हरण की कहानी, सीता हरण कैसे हुआ
  45. संपूर्ण रामायण कथा अरण्यकाण्ड: जटायु वध, रावण द्वारा गिद्धराज जटायु वध, सीता हरण व जटायु वध, रावण जटायु युद्ध, जटायु प्रसंग, जटायु कौन था
  46. अरण्यकाण्ड: रावण-सीता संवाद, रावण की माता सीता को धमकी, रावण और सीता संवाद अशोक वाटिका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  47. अरण्यकाण्ड: राम की वापसी और विलाप, श्री राम और लक्ष्मण विलाप, सीता हरण पर श्री राम जी के द्वारा विलाप, जटायु की मृत्यु, पक्षीराज जटायु की मृत्यु कैसे हुई
  48. अरण्यकाण्ड: कबन्ध का वध, राम द्वारा कबन्ध राक्षस का वध, रामायण में कबंध राक्षस, कबंध कौन था Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  49. अरण्यकाण्ड: शबरी का आश्रम, भगवान राम शबरी के आश्रम क्यों गए, श्री राम शबरी के आश्रम कैसे पहुँचे? शबरी के झूठे बेर प्रभु राम ने खाएं, शबरी के बेर की कहानी
  50. किष्किन्धाकाण्ड: राम हनुमान भेंट, श्रीराम की हनुमान से पहली मुलाकात कहां और कब हुई, राम हनुमान मिलन की कहानी
  51. किष्किन्धाकाण्ड: राम-सुग्रीव मैत्री, राम-सुग्रीव मित्रता, श्री राम और सुग्रीव के मित्रता की कहानी, राम-सुग्रीव वार्तालाप, राम-सुग्रीव संवाद
  52. किष्किन्धाकाण्ड: बाली सुग्रीव युध्द वालि-वध, बाली का वध, राम द्वारा बाली का वध, बाली-राम संवाद, तारा का विलाप
  53. किष्किन्धाकाण्ड: सुग्रीव का अभिषेक, बाली वध के बाद सुग्रीव का राज्याभिषेक (Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  54. किष्किन्धाकाण्ड: हनुमान-सुग्रीव संवाद, हनुमान और सुग्रीव की मित्रता, लक्ष्मण-सुग्रीव संवाद, राम का सुग्रीव पर कोप, रामायण सुग्रीव मित्रता
  55. किष्किन्धाकाण्ड: माता सीता की खोज, माता सीता की खोज में निकले राम, राम द्वारा हनुमान को मुद्रिका देना, माता सीता की खोज में निकले हनुमान
  56. किष्किन्धाकाण्ड: जाम्बवन्त द्वारा हनुमान को प्रेरणा, जाम्बवन्त के प्रेरक वचन Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  57. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का सागर पार करना, हनुमान जी ने समुद्र कैसे पार किया, हनुमान जी की लंका यात्रा, हनुमान जी का लंका में प्रवेश
  58. सुन्दरकाण्ड: लंका में सीता की खोज, माता सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान, सीता से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद
  59. सुन्दरकाण्ड: रावण -सीता संवाद, अशोक वाटिका में रावण संवाद, रावण सीता अशोक वाटिका, रावण की सीता को धमकी
  60. सुन्दरकाण्ड: जानकी राक्षसी घेरे में, माता सीता राक्षसी घेरे में, पति राम के वियोग में व्याकुल सीता, अशोक वाटिका में हनुमान जी किस वृक्ष पर बैठे थे
  61. सुन्दरकाण्ड: हनुमान सीता भेंट, सीता जी से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद, हनुमान का सीता को मुद्रिका देना
  62. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का विशाल रूप, हनुमान जी का पंचमुखी अवतार, हनुमान जी ने क्यों धारण किया पंचमुखी रूप, हनुमान के साथ क्यों नहीं गईं सीता, बजरंगबली का विराट रूप
  63. सुन्दरकाण्ड: हनुमान ने उजाड़ी अशोक वाटिका, हनुमान जी ने रावण की अशोक वाटिका को किया तहस-नहस, अशोक वाटिका विध्वंस, हनुमान राक्षस युद्ध
  64. सुन्दरकाण्ड: मेधनाद हनुमान युद्ध, लंका में हनुमान जी और मेघनाद का भयंकर युद्ध, मेघनाद ने हनुमान पर की बाणों की वर्षा
  65. सुन्दरकाण्ड: रावण के दरबार में हनुमान, रावण हनुमान संवाद, हनुमान-रावण की लड़ाई, लंका दहन, हनुमान जी द्वारा लंका दहन, हनुमान ने सोने की लंका में लगाई आग
  66. सुन्दरकाण्ड: माता सीता का संदेश देना, हनुमान के द्वारा राम सीता का संदेश, हनुमान ने राम को दिया माता सीता का संदेश
  67. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): समुद्र पार करने की चिन्ता, वानर सेना का प्रस्थान, वानर सेना का सेनापति कौन था, वानर सेना रामायण, वानर सेना का गठन
  68. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लंका में राक्षसी मन्त्रणा, विभीषण ने रावण को किस प्रकार समझाया, विभीषण का निष्कासन, विभीषण का श्री राम की शरण में आना
  69. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सेतु बन्धन, राम सेतु पुल, क्यों नहीं डूबे रामसेतु के पत्‍थर, राम सेतु का निर्माण कैसे हुआ, नल-नील द्वारा पुल बाँधना
  70. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सीता के साथ छल, रावण का छल, रावण ने छल से किया माता सीता का हरण Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  71. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अंगद रावण दरबार में, अंगद ने तोड़ा रावण का घमंड, रावण की सभा में अंगद-रावण संवाद, रावण की सभा में अंगद का पैर जमाना
  72. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): राम लक्ष्मण बन्धन में, नागपाश में राम लक्ष्मण, धूम्राक्ष और वज्रदंष्ट्र का वध, राक्षस सेनापति धूम्राक्ष का वध, अकम्पन का वध, प्रहस्त का वध
  73. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण कुम्भकर्ण संवाद, कुम्भकर्ण वध, कुंभकरण का वध किसने किया, कुम्भकर्ण की कहानी Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  74. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): त्रिशिरा, अतिकाय आदि का वध, अतिकाय का वध, मायासीता का वध, रावण पुत्र मेघनाद (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  75. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मेघनाद युद्ध कथा, मेघनाथ लक्ष्मण का अंतिम युद्ध, मेघनाद वध, मेघनाथ को कौन मार सकता था? लक्ष्मण ने मेघनाद को कैसे मारा
  76. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मूर्छित, मेघनाद ने ब्रह्म शक्ति से लक्ष्मण को किया मूर्छित, लक्ष्मण मूर्छित होने पर राम विलाप, संजीवनी बूटी लेकर आए हनुमान
  77. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण का युद्ध के लिये प्रस्थान, श्रीराम-रावण का युद्ध, राम और रावण के बीच युद्ध, रावण वध, मन्दोदरी का विलाप 
  78. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): विभीषण का राज्याभिषेक, रावण के बाद विभीषण बना लंका का राजा (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand Lanka Kand)
  79. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): माता सीता की अग्नि परीक्षा, माता सीता ने अग्नि परीक्षा क्यों दी थी? माता सीता ने अग्नि परीक्षा कैसे दी?, माता सीता की अग्नि परीक्षा कहां हुई थी? 
  80. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अयोध्या को प्रस्थान, राम अयोध्या कब लौटे थे, अयोध्या में राम का स्वागत, राम का अयोध्या वापस आना, वनवास से लौटे राम-लक्ष्मण और सीता
  81. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): भरत मिलाप, राम और भरत का मिलन, राम भरत संवाद, राम का राज्याभिषेक Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  82. उत्तरकाण्ड: रावण के पूर्व के राक्षसों के विषय में, रावण के जन्म की कथा, रावण का जन्म कैसे हुआ, रावण का जन्म कहां हुआ, रावण के कितने भाई थे
  83. उत्तरकाण्ड: हनुमान के जन्म की कथा, रामभक्त हनुमान के जन्म की कहानी, हनुमान की कथा, हनुमान जन्म लीला, पवनपुत्र हनुमान का जन्म कैसे हुआ
  84. उत्तरकाण्ड: अभ्यागतों की विदाई, प्रवासियों में अशुभ चर्चा, सीता का निर्वासन, राम ने सीता का त्याग क्यों किया, राम ने सीता को वनवास क्यों दिया
  85. उत्तरकाण्ड: राजा नृग की कथा, सूर्यवंशी राजा नृग की कथा, राजा नृग कुएँ का गिरगिट, राजा नृग का उद्धार कैसे हुआ? राजा नृग की मोक्ष कथा, राजा नृग का उपाख्यान 
  86. उत्तरकाण्ड: राजा निमि की कथा, शाप से सम्बंधित राजा की कथा, राजा निमि कौन थे? राजा निमि की कहानी, विदेह राजा जनक Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  87. उत्तरकाण्ड: राजा ययाति की कथा, कौन थे राजा ययाति, राजा ययाति की कहानी, ययाति का यदु कुल को शाप Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  88. उत्तरकाण्ड: कुत्ते का न्याय, राम और कुत्ते की कहानी, भगवान राम से जब न्याय मांगने आया एक कुत्ता, रामायण का अनोखा किस्सा
  89. उत्तरकाण्ड: पूर्व राजाओं के यज्ञ-स्थल एवं लवकुश का जन्म, लव कुश का जन्म कहां पर हुआ था, लव कुश में बड़ा कौन है, वाल्मीकि आश्रम कहां है, च्यवन ऋषि का आगमन
  90. उत्तरकाण्ड: ब्राह्मण बालक की मृत्यु, शंबूक ऋषि की हत्या किसने की, शंबुक कथा, शंबूक ऋषि का वध, राम ने क्यों की शंबूक की हत्या Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  91. उत्तरकाण्ड: राजा श्वेत क्यों खाया करते थे अपने ही शरीर का मांस, राजा श्वेत की कहानी, राजा श्वेत की कथा Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Raja Swet Ki Katha
  92. उत्तरकाण्ड: राजा दण्ड की कथा, दण्डकारण्य जंगल के श्रापित होने की कथा, शुक्राचार्य ने राजा दण्ड को दिया श्राप
  93. उत्तरकाण्ड: वृत्रासुर की कथा, वृत्रासुर का वध, वृत्रासुर कौन था? इंद्र द्वारा वृत्रासुर का वध Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Vritrasura Ki Katha
  94. उत्तरकाण्ड: राजा इल की कथा, जब पुरूष से स्त्री बन गये राजा ईल, राजा इल की कहानी (Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Raja Ill Ki Kahani, Raja Ill Ki Katha
  95. उत्तरकाण्ड: अश्वमेघ यज्ञ का अनुष्ठान रामायण, अश्वमेध यज्ञ क्या है? Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Ashvamedh Yagya Ka Anushthaan, Ashvamedh Yagya Kya Hai
  96. उत्तरकाण्ड: लव-कुश द्वारा रामायण गान, ‘हम कथा सुनाते’ लव-कुश के गीत, लव-कुश ने सुनाई राम कथा, लव कुश गीत, रामायण लव कुश कांड
  97. उत्तरकाण्ड: सीता का रसातल प्रवेश, सीता मैया धरती में क्यों समाई, सीता पृथ्वी समाधि, सीता जी का धरती में समाना, सीता का धरती में प्रवेश करना
  98. उत्तरकाण्ड: भरत व लक्ष्मण के पुत्रों के लिये राज्य व्यवस्था, वाल्मीकि रामायण (Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Bharat Aur Lakshman Ke Putron Ke Liye Rajya
  99. उत्तरकाण्ड: लक्ष्मण का परित्याग, राम ने लक्ष्मण का परित्याग क्यों किया, राम द्वारा लक्ष्मण का परित्याग, लक्ष्मण द्वारा प्राण विसर्जन, लक्ष्मण की मृत्यु
  100. उत्तरकाण्ड: महाप्रयाण, लव-कुश का अभिषेक, संपूर्ण वाल्मीकि रामायण, Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Mahaprayan, Valmiki Ramayan in Hindi
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बालकाण्ड : अलभ्य अस्त्रों का दान, विश्वामित्र द्वारा राम को अलभ्य अस्त्रों का दान, गुरु विश्वामित्र ने श्री राम को अस्त्र क्यों दिए? (Ramayan Baalkaand: Vishvaamitra Dwara Ram Ko Alabhy Astron Ka Daan, Guru Vishvaamitr Ne Shree Raam Ko Astr Kyon Die? Why Did Guru Vishwamitra Give Weapons to Sri Rama)

संपूर्ण रामायण कथा बालकाण्ड : अलभ्य अस्त्रों का दान, विश्वामित्र द्वारा राम को अलभ्य अस्त्रों का दान, गुरु विश्वामित्र ने श्री राम को अस्त्र क्यों दिए? (Ramayan Baalkaand: Vishvaamitra Dwara Ram Ko Alabhy Astron Ka Daan, Guru Vishvaamitr Ne Shree Raam Ko Astr Kyon Die? Why Did Guru Vishwamitra Give Weapons to Sri Rama)

अलभ्य अस्त्रों का दान, विश्वामित्र द्वारा राम को अलभ्य अस्त्रों का दान
मार्ग में एक सुरम्य सरोवर दृष्टिगत हुआ। सरोवर के तट पर रुक कर विश्वामित्र ने कहा, हे राम! ताड़का का वध करके तुमने बहुत बड़ा मानव कल्याण का कार्य किया है। मैं तुम्हारे इस कार्य, पराक्रम एवं चातुर्य से अत्यधिक प्रसन्न हूँ। मैं तुन्हें आज तुम्हें कुछ ऐसे दुर्लभ अस्त्र प्रदान करता हूँ जिनकी सहायता से तुम दुर्दमनीय देवताओं, राक्षसों, यक्षों, नागादिकों को भी परास्त कर सकोगे। ये दण्डचक्र, धर्मचक्र, कालचक्र और इन्द्रचक्र नामक अस्त्र हैं। इन्हें तुम धारण करो। इनके धारण करने के पश्चात् तुम किसी भी शत्रु को परास्त करने का सामर्थ्य प्राप्त कर लोगे। इनके अतिरिक्त मैं तुम्हें विद्युत निर्मित वज्रास्त्र, शिव जी का शूल, ब्रह्मशिर, एषीक और समस्त अस्त्रों से अधिक शक्तिशाली ब्रह्मास्त्र देता हूँ।

इन्हें पा कर तुम तीनों लोकों में सर्वाधिक शक्ति सम्पन्न हो जाओगे। मैं तुम्हारी वीरता से इतना अधिक प्रसन्न हूँ कि तुम्हें प्रचण्ड मोदकी व शिखर नाम की गदाएँ प्रदान करते हुये मुझे अत्यंत हर्ष हो रहा है। मैं तुम्हें सूखी और गीली दोनों ही प्रकार की अशनी व पिनाक के साथ ही साथ नारायणास्त्र, आग्नेयास्त्र, वायव्यास्त्र, हयशिरास्त्र एवं क्रौंच अस्त्र भी तुम्हें प्रदान करता हूँ। अस्त्रों के अतिरिक्त मैं तुम्हें कुछ पाश भी देता हूँ जिनमें धर्मपाश, कालपाश एवं वरुणपाश मुख्य हैं। इनके पाशों के द्वारा तुम अत्यन्त फुर्तीले शत्रु को भी बाँध कर निष्क्रिय बनाने में समर्थ हो जाओगे। राम! कुछ अस्त्र ऐसे हैं जिनका प्रयोग असुर लोग करते हैं। नीति कहती है कि शत्रुओं को उनके ही शस्त्रास्त्रों से मारना चाहिये। इसलिये मैं तुम्हें असुरों के द्वारा प्रयोग किये जाने वाले कंकाल, मूसल, घोर कपाल और किंकणी नामक अस्त्र भी देता हूँ।

कुछ अस्त्र का प्रयोग विद्याधर करते हैं। उनमें प्रधान अस्त्र हैं खड्ग, मोहन, प्रस्वापन, प्रशमन, सौम्य, वर्षण, सन्तापन, विलापन, मादनास्त्र, गन्धर्वास्त्र, मानवास्त्र, पैशाचास्त्र, तामस और अद्वितीय सौमनास्त्र इन सभी अस्त्रों को भी मैं तुम्हें देता हूँ। ये मौसलास्त्र, सत्यास्त्र, असुरों का मायामय अस्त्र और भगवान सूर्य का प्रभास्त्र, हैं जिन्हें दिखाने मात्र से शत्रु निस्तेज होकर नष्ट हो जाते हैं। इन्हें भी तुम ग्रहण करो। अब इन अस्त्रों को देखो, ये कुछ विशेष प्रकार के अस्त्र हैं। ये सोम देवता द्वारा प्रयोग किये जाने वाले शिशर एवं दारुण नाम के अस्त्र हैं। शिशर के प्रयोग से शत्रु शीत से अकड़ कर और दारुण के प्रयोग से शत्रु गर्मी से व्याकुल होकर मूर्छित हो जाते हैं। हे वीरश्रेष्ठ! तुम इन अनुपम शक्ति वाले, शत्रुओं का मान मर्दन करने वाले और समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण कराने वाले अस्त्रों को धारण करो।

इतना कह कर महामुनि ने सम्पूर्ण अस्त्रों को, जो देवताओं को भी दुर्लभ हैं, बड़े स्नेह के साथ राम को प्रदान कर दिया। उन अस्त्रों को पाकर राम अत्यन्त प्रसन्न हुये और उन्होंने श्रद्धा के साथ गुरु को चरणों में प्रणाम किया और कहा, गुरुदेव! आपकी इस कृपा से मैं कृतार्थ हो गया हूँ। अब देवता, दैत्य, राक्षस, यक्ष आदि कोई भी मुझे परास्त नहीं कर सकता, मनुष्य की तो खैर बात ही क्या है। किन्तु मुनिवर! इसी प्रकार के अस्त्र गन्धर्वों, देवताओं, राक्षसों आदि के पास भी होंगे और उनका प्रयोग वे मुझ पर भी कर सकते हैं। कृपा करके उनसे बचने के उपाय भी मुझे बताइये। इसके अतिरिक्त ऐसा भी उपाय बताइये जिससे इन अस्त्रों को छोड़ने के पश्चात् अपना कार्य कर के ये अस्त्र पुनः मेरे पास वापस आ जावें। राम के इस प्रकार कहने पर विश्वामित्र बोले, राघव! शत्रुओं के अस्त्रों को मार्ग में ही काट कर नष्ट करने वाले इन सत्यवान, सत्यकीर्ति, प्रतिहार, पराड़मुख, अवान्मुख, लक्ष्य, उपलक्ष्य आदि इन अस्त्रों को भी तु ग्रहण करो। इन अस्त्रों को देने के बाद गुरु विश्वामित्र ने राम को वे विधियाँ भी बताईं जिनके द्वारा प्रयोग किये हुये अस्त्र वापस आ जाते हैं।

चलते चलते वे वन के अन्धकार से निकल कर ऐसे स्थान पर पहुँचे जो भगवान भास्कर के दिव्य प्रकाश से आलोकित हो रहा था और सामने नाना प्रकार के सुन्दर वृक्ष, मनोरम उपत्यका एवं मनोमुग्धकारी दृश्य दिखाई दे रहे थे। रामचन्द्र ने विश्वामित्र से पूछा, हे मुनिराज! सामने पर्वत की सुन्दर उपत्यकाओं में हरे हरे वृक्षों की जो लुभावनी पंक्तियां दृष्टिगत हो रही हैं, उनके पीछे ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे कोई आश्रम है। क्या वास्तव में ऐसा है या यह मेरी कल्पना मात्र है? वहाँ सुन्दर सुन्दर मधुरभाषी पक्षियों के झुण्ड भी दिखाई दे रहे हैं, जिससे प्रतीत होता है कि मेरी कल्पना निराधार नहीं है।

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  9. संपूर्ण रामायण कथा बालकाण्ड : राम का जन्म , भगवान राम का जन्म कब हुआ , श्री राम जी का जन्म कब हुआ था, राम जी का जन्म कहाँ हुआ था, राम के जन्म की क्या कथा है.
  10. बालकाण्ड : विश्वामित्र का आगमन, ऋषि विश्वामित्र का आगमन, विश्वामित्र आगमन, विश्वामित्र ने राम को मांगा, विश्वामित्र का आश्रम कहां था, विश्वामित्र कौन थे.
  11. बालकाण्ड : कामदेव का आश्रम, कामेश्वर धाम, वाल्मीकि रामायण, राम और लक्ष्मण, ऋषि विश्वामित्र (Ramayana Balakand: Kamdev’s Ashram
  12. बालकाण्ड : ताड़का वध, राक्षसी ताड़का वध, ताड़का का वध कैसे हुआ, राम ने ताड़का का वध कैसे किया, ताड़का वध कहाँ हुआ था, ताड़का वन कहाँ है.
  13. बालकाण्ड : अलभ्य अस्त्रों का दान, विश्वामित्र द्वारा राम को अलभ्य अस्त्रों का दान, गुरु विश्वामित्र ने श्री राम को अस्त्र क्यों दिए? Vishvaamitra Dwara Ram Ko Alabhy Astron Ka Daan
  14. बालकाण्ड : महर्षि विश्वामित्र का आश्रम, सिद्धाश्रम, विश्वामित्र के आश्रम का नाम सिद्धाश्रम क्यों पड़ा? Sampoorn Ramayan Katha Bal Kand: Vishwamitra Ka Ashram
  15. बालकाण्ड: मारीच -सुबाहु का उत्पात, मारीच और सुबाहु वध, राम ने कैसे किया मारीच और सुबाहु का वध, मारीच और सुबाहु की माता का नाम क्या था?
  16. बालकाण्ड: धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, रामचंद्र का धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, धनुष यज्ञ का उद्देश्य, सीता स्वयंवर के लिए धनुष यज्ञ, शिवधनुष की विशेषता
  17. बालकाण्ड: गंगा-जन्म की कथा, गंगा की उत्पत्ति कथा, गंगा की उत्पत्ति कहां से हुई, गंगा की कहानी, गंगा की कथा, गंगा किसकी पुत्री थी, गंगा का जन्म कैसे हुआ
  18. बालकाण्ड: गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचे राम व लक्ष्मण, जनकपुरी में राम का आगमन, श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र का जनकपुर आगमन
  19. बालकाण्ड: अहिल्या की कथा – कौन थीं अहिल्या, क्यों और कैसे अहिल्या बन गई थी पत्थर? अहिल्या को श्राप क्यों मिला? अहिल्या को गौतम ऋषि ने दिया श्राप
  20. बालकाण्ड: विश्वामित्र का पूर्व चरित्र, विश्वामित्र का जीवन, विश्वामित्र की कहानी, विश्वामित्र के पिता का नाम, विश्वामित्र की संपूर्ण कथा, विश्वामित्र का जन्म कैसे हुआ
  21. बालकाण्ड: त्रिशंकु की स्वर्ग यात्रा, विश्वामित्र ने क्यों बनाया त्रिशंकु स्वर्ग, त्रिशंकु की कहानी, त्रिशंकु स्वर्ग क्या है और इसे किसने बनाया, त्रिशंकु को स्वर्ग जाने में किसने मदद की
  22. बालकाण्ड: ब्राह्मणत्व की प्राप्ति, विश्वामित्र को ब्राह्मणत्व की प्राप्ति, विश्वामित्र जी की कथा (Sampurna Ramayan Katha Bal Kand: Brahmanatva Ki Praapti
  23. बालकाण्ड: राम ने धनुष तोड़ा, धनुष यज्ञ राम विवाह, सीता स्वयंवर धनुष भंग, राम द्वारा धनुष भंग, शिवधनुष पिनाक की कथा, शिवधनुष की कथा
  24. बालकाण्ड: विवाह पूर्व की औपचारिकताएं, राम सीता विवाह, श्री राम सीता विवाह कथा, विवाह के समय राम और सीता की आयु कितनी थी,राम सीता की शादी
  25. बालकाण्ड: परशुराम जी का आगमन, राम का अयोध्या आगमन, विवाह के बाद राम सीता जी का अयोध्या में आगमन, पत्नियों सहित राजकुमारों का अयोध्या में आगमन
  26. अयोध्याकाण्ड: राम के राजतिलक की घोषणा, राजतिलक की तैयारी, श्री राम का राजतिलक, राम का राज्याभिषेक Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand
  27. अयोध्याकाण्ड: कैकेयी का कोपभवन में जाना, कैकेयी कोपभवन, कैकेयी क्रंदन, राजा दशरथ ने क्यों दिए कैकेयी को दो वरदान, कैकेयी द्वारा वरों की प्राप्ति
  28. अयोध्याकाण्ड: राम वनवास, राम को 14 वर्ष का वनवास, राम के वनवास जाने का कारण, राम 14 वर्ष के लिए वनवास क्यों गए, केकई ने राम को 14 वर्ष का वनवास क्यों दिया
  29. अयोध्याकाण्ड: तमसा नदी के तट पर राम लक्ष्मण और सीता, तमसा नदी कहां से निकली है, तमसा नदी किस जिले में है, तमसा नदी किस राज्य में है, टोंस नदी का इतिहास
  30. अयोध्याकाण्ड: भीलराज गुह, गंगा पार करना, केवट ने राम-लक्ष्मण और मां सीता को गंगा पार कराया, केवट और प्रभु श्रीराम का प्रसंग
  31. अयोध्याकाण्ड: राम, लक्ष्मण और सीता का चित्रकूट के लिये प्रस्थान, चित्रकूट की यात्रा, चित्रकूट धाम यात्रा, श्री रामजी के बनवास की कहानी
  32. अयोध्याकाण्ड: सुमन्त का अयोध्या लौटना, दशरथ सुमन्त संवाद (Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Sumant’s Return to Ayodhya
  33. अयोध्याकाण्ड: श्रवण कुमार की कथा, राजा दशरथ और श्रवण कुमार, श्रवण कुमार की कहानी, मातृ और पितृभक्त श्रवण कुमार
  34. अयोध्याकाण्ड: राजा दशरथ की मृत्यु, राजा दशरथ की मृत्यु कब हुई? अयोध्यापति राजा दशरथ की मृत्यु कैसे हुई? Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand
  35. अयोध्याकाण्ड: भरत-शत्रुघ्न की वापसी, भरत-शत्रुघ्न की अयोध्या वापसी, भरत कैकयी संवाद Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand
  36. अयोध्याकाण्ड: दशरथ की अन्त्येष्टि, दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार (Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Dasharatha’s Funeral
  37. अयोध्याकाण्ड: श्री राम-भरत मिलाप कथा, राम और भरत का मिलन, चित्रकूट में भरत मिलाप की कहानी, राम-भरत मिलाप संवाद, श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटे भरत
  38. अयोध्याकाण्ड: महर्षि अत्रि का आश्रम, अत्रि ऋषि के आश्रम पहुंचे श्री राम Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Maharishi Atri Ka Ashram
  39. अरण्यकाण्ड: दण्डक वन में विराध वध, श्री राम द्वारा विराध राक्षस का वध, भगवान श्री राम ने किया दंडकवन के सबसे बड़े राक्षस विराध का वध
  40. अरण्यकाण्ड: महर्षि शरभंग का आश्रम, महर्षि शरभंग, शरभंग ऋषि की कथा, सीता की शंका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  41. अरण्यकाण्ड: अगस्त्य का आश्रम, महर्षि अगस्त्य मुनि, श्रीराम और अगस्त मुनि का मिलन स्थल सिद्धनाथ आश्रम Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  42. अरण्यकाण्ड: पंचवटी में आश्रम, श्री राम-लक्ष्मण एवं सीता पंचवटी आश्रम में कैसे पहुँचे?, पंचवटी किस राज्य में है, पंचवटी की कहानी, पंचवटी क्या है, पंचवटी कहां है
  43. अरण्यकाण्ड: रावण की बहन शूर्पणखा, श्री राम का खर-दूषण से युद्ध, खर-दूषण वध, खर-दूषण का वध किसने किया? Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  44. अरण्यकाण्ड: सीता की कथा और स्वर्ण मृग, श्री राम और स्वर्ण-मृग प्रसंग, मारीच का स्वर्णमृग रूप, सीता हरण, रामायण सीता हरण की कहानी, सीता हरण कैसे हुआ
  45. संपूर्ण रामायण कथा अरण्यकाण्ड: जटायु वध, रावण द्वारा गिद्धराज जटायु वध, सीता हरण व जटायु वध, रावण जटायु युद्ध, जटायु प्रसंग, जटायु कौन था
  46. अरण्यकाण्ड: रावण-सीता संवाद, रावण की माता सीता को धमकी, रावण और सीता संवाद अशोक वाटिका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  47. अरण्यकाण्ड: राम की वापसी और विलाप, श्री राम और लक्ष्मण विलाप, सीता हरण पर श्री राम जी के द्वारा विलाप, जटायु की मृत्यु, पक्षीराज जटायु की मृत्यु कैसे हुई
  48. अरण्यकाण्ड: कबन्ध का वध, राम द्वारा कबन्ध राक्षस का वध, रामायण में कबंध राक्षस, कबंध कौन था Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  49. अरण्यकाण्ड: शबरी का आश्रम, भगवान राम शबरी के आश्रम क्यों गए, श्री राम शबरी के आश्रम कैसे पहुँचे? शबरी के झूठे बेर प्रभु राम ने खाएं, शबरी के बेर की कहानी
  50. किष्किन्धाकाण्ड: राम हनुमान भेंट, श्रीराम की हनुमान से पहली मुलाकात कहां और कब हुई, राम हनुमान मिलन की कहानी
  51. किष्किन्धाकाण्ड: राम-सुग्रीव मैत्री, राम-सुग्रीव मित्रता, श्री राम और सुग्रीव के मित्रता की कहानी, राम-सुग्रीव वार्तालाप, राम-सुग्रीव संवाद
  52. किष्किन्धाकाण्ड: बाली सुग्रीव युध्द वालि-वध, बाली का वध, राम द्वारा बाली का वध, बाली-राम संवाद, तारा का विलाप
  53. किष्किन्धाकाण्ड: सुग्रीव का अभिषेक, बाली वध के बाद सुग्रीव का राज्याभिषेक (Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  54. किष्किन्धाकाण्ड: हनुमान-सुग्रीव संवाद, हनुमान और सुग्रीव की मित्रता, लक्ष्मण-सुग्रीव संवाद, राम का सुग्रीव पर कोप, रामायण सुग्रीव मित्रता
  55. किष्किन्धाकाण्ड: माता सीता की खोज, माता सीता की खोज में निकले राम, राम द्वारा हनुमान को मुद्रिका देना, माता सीता की खोज में निकले हनुमान
  56. किष्किन्धाकाण्ड: जाम्बवन्त द्वारा हनुमान को प्रेरणा, जाम्बवन्त के प्रेरक वचन Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  57. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का सागर पार करना, हनुमान जी ने समुद्र कैसे पार किया, हनुमान जी की लंका यात्रा, हनुमान जी का लंका में प्रवेश
  58. सुन्दरकाण्ड: लंका में सीता की खोज, माता सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान, सीता से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद
  59. सुन्दरकाण्ड: रावण -सीता संवाद, अशोक वाटिका में रावण संवाद, रावण सीता अशोक वाटिका, रावण की सीता को धमकी
  60. सुन्दरकाण्ड: जानकी राक्षसी घेरे में, माता सीता राक्षसी घेरे में, पति राम के वियोग में व्याकुल सीता, अशोक वाटिका में हनुमान जी किस वृक्ष पर बैठे थे
  61. सुन्दरकाण्ड: हनुमान सीता भेंट, सीता जी से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद, हनुमान का सीता को मुद्रिका देना
  62. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का विशाल रूप, हनुमान जी का पंचमुखी अवतार, हनुमान जी ने क्यों धारण किया पंचमुखी रूप, हनुमान के साथ क्यों नहीं गईं सीता, बजरंगबली का विराट रूप
  63. सुन्दरकाण्ड: हनुमान ने उजाड़ी अशोक वाटिका, हनुमान जी ने रावण की अशोक वाटिका को किया तहस-नहस, अशोक वाटिका विध्वंस, हनुमान राक्षस युद्ध
  64. सुन्दरकाण्ड: मेधनाद हनुमान युद्ध, लंका में हनुमान जी और मेघनाद का भयंकर युद्ध, मेघनाद ने हनुमान पर की बाणों की वर्षा
  65. सुन्दरकाण्ड: रावण के दरबार में हनुमान, रावण हनुमान संवाद, हनुमान-रावण की लड़ाई, लंका दहन, हनुमान जी द्वारा लंका दहन, हनुमान ने सोने की लंका में लगाई आग
  66. सुन्दरकाण्ड: माता सीता का संदेश देना, हनुमान के द्वारा राम सीता का संदेश, हनुमान ने राम को दिया माता सीता का संदेश
  67. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): समुद्र पार करने की चिन्ता, वानर सेना का प्रस्थान, वानर सेना का सेनापति कौन था, वानर सेना रामायण, वानर सेना का गठन
  68. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लंका में राक्षसी मन्त्रणा, विभीषण ने रावण को किस प्रकार समझाया, विभीषण का निष्कासन, विभीषण का श्री राम की शरण में आना
  69. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सेतु बन्धन, राम सेतु पुल, क्यों नहीं डूबे रामसेतु के पत्‍थर, राम सेतु का निर्माण कैसे हुआ, नल-नील द्वारा पुल बाँधना
  70. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सीता के साथ छल, रावण का छल, रावण ने छल से किया माता सीता का हरण Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  71. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अंगद रावण दरबार में, अंगद ने तोड़ा रावण का घमंड, रावण की सभा में अंगद-रावण संवाद, रावण की सभा में अंगद का पैर जमाना
  72. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): राम लक्ष्मण बन्धन में, नागपाश में राम लक्ष्मण, धूम्राक्ष और वज्रदंष्ट्र का वध, राक्षस सेनापति धूम्राक्ष का वध, अकम्पन का वध, प्रहस्त का वध
  73. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण कुम्भकर्ण संवाद, कुम्भकर्ण वध, कुंभकरण का वध किसने किया, कुम्भकर्ण की कहानी Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  74. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): त्रिशिरा, अतिकाय आदि का वध, अतिकाय का वध, मायासीता का वध, रावण पुत्र मेघनाद (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  75. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मेघनाद युद्ध कथा, मेघनाथ लक्ष्मण का अंतिम युद्ध, मेघनाद वध, मेघनाथ को कौन मार सकता था? लक्ष्मण ने मेघनाद को कैसे मारा
  76. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मूर्छित, मेघनाद ने ब्रह्म शक्ति से लक्ष्मण को किया मूर्छित, लक्ष्मण मूर्छित होने पर राम विलाप, संजीवनी बूटी लेकर आए हनुमान
  77. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण का युद्ध के लिये प्रस्थान, श्रीराम-रावण का युद्ध, राम और रावण के बीच युद्ध, रावण वध, मन्दोदरी का विलाप 
  78. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): विभीषण का राज्याभिषेक, रावण के बाद विभीषण बना लंका का राजा (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand Lanka Kand)
  79. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): माता सीता की अग्नि परीक्षा, माता सीता ने अग्नि परीक्षा क्यों दी थी? माता सीता ने अग्नि परीक्षा कैसे दी?, माता सीता की अग्नि परीक्षा कहां हुई थी? 
  80. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अयोध्या को प्रस्थान, राम अयोध्या कब लौटे थे, अयोध्या में राम का स्वागत, राम का अयोध्या वापस आना, वनवास से लौटे राम-लक्ष्मण और सीता
  81. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): भरत मिलाप, राम और भरत का मिलन, राम भरत संवाद, राम का राज्याभिषेक Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  82. उत्तरकाण्ड: रावण के पूर्व के राक्षसों के विषय में, रावण के जन्म की कथा, रावण का जन्म कैसे हुआ, रावण का जन्म कहां हुआ, रावण के कितने भाई थे
  83. उत्तरकाण्ड: हनुमान के जन्म की कथा, रामभक्त हनुमान के जन्म की कहानी, हनुमान की कथा, हनुमान जन्म लीला, पवनपुत्र हनुमान का जन्म कैसे हुआ
  84. उत्तरकाण्ड: अभ्यागतों की विदाई, प्रवासियों में अशुभ चर्चा, सीता का निर्वासन, राम ने सीता का त्याग क्यों किया, राम ने सीता को वनवास क्यों दिया
  85. उत्तरकाण्ड: राजा नृग की कथा, सूर्यवंशी राजा नृग की कथा, राजा नृग कुएँ का गिरगिट, राजा नृग का उद्धार कैसे हुआ? राजा नृग की मोक्ष कथा, राजा नृग का उपाख्यान 
  86. उत्तरकाण्ड: राजा निमि की कथा, शाप से सम्बंधित राजा की कथा, राजा निमि कौन थे? राजा निमि की कहानी, विदेह राजा जनक Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  87. उत्तरकाण्ड: राजा ययाति की कथा, कौन थे राजा ययाति, राजा ययाति की कहानी, ययाति का यदु कुल को शाप Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  88. उत्तरकाण्ड: कुत्ते का न्याय, राम और कुत्ते की कहानी, भगवान राम से जब न्याय मांगने आया एक कुत्ता, रामायण का अनोखा किस्सा
  89. उत्तरकाण्ड: पूर्व राजाओं के यज्ञ-स्थल एवं लवकुश का जन्म, लव कुश का जन्म कहां पर हुआ था, लव कुश में बड़ा कौन है, वाल्मीकि आश्रम कहां है, च्यवन ऋषि का आगमन
  90. उत्तरकाण्ड: ब्राह्मण बालक की मृत्यु, शंबूक ऋषि की हत्या किसने की, शंबुक कथा, शंबूक ऋषि का वध, राम ने क्यों की शंबूक की हत्या Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  91. उत्तरकाण्ड: राजा श्वेत क्यों खाया करते थे अपने ही शरीर का मांस, राजा श्वेत की कहानी, राजा श्वेत की कथा Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Raja Swet Ki Katha
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  97. उत्तरकाण्ड: सीता का रसातल प्रवेश, सीता मैया धरती में क्यों समाई, सीता पृथ्वी समाधि, सीता जी का धरती में समाना, सीता का धरती में प्रवेश करना
  98. उत्तरकाण्ड: भरत व लक्ष्मण के पुत्रों के लिये राज्य व्यवस्था, वाल्मीकि रामायण (Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Bharat Aur Lakshman Ke Putron Ke Liye Rajya
  99. उत्तरकाण्ड: लक्ष्मण का परित्याग, राम ने लक्ष्मण का परित्याग क्यों किया, राम द्वारा लक्ष्मण का परित्याग, लक्ष्मण द्वारा प्राण विसर्जन, लक्ष्मण की मृत्यु
  100. उत्तरकाण्ड: महाप्रयाण, लव-कुश का अभिषेक, संपूर्ण वाल्मीकि रामायण, Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Mahaprayan, Valmiki Ramayan in Hindi
vishwamitra ka ashram

बालकाण्ड : महर्षि विश्वामित्र का आश्रम, सिद्धाश्रम, विश्वामित्र के आश्रम का नाम सिद्धाश्रम क्यों पड़ा? (Sampoorn Ramayan Katha Bal Kand: Vishwamitra Ka Ashram, Vishwamitra Ashram, Siddhashram, Maharshi Vishwamitra Ka Ashram, Vishwamitra’s Ashram)

संपूर्ण रामायण कथा बालकाण्ड : महर्षि विश्वामित्र का आश्रम, सिद्धाश्रम, विश्वामित्र के आश्रम का नाम सिद्धाश्रम क्यों पड़ा? (Sampoorn Ramayan Katha Bal Kand: Vishwamitra Ka Ashram, Vishwamitra Ashram, Siddhashram, Maharshi Vishwamitra Ka Ashram, Vishwamitra’s Ashram)

महर्षि विश्वामित्र का आश्रम, सिद्धाश्रम
महर्षि विश्वामित्र, राम और लक्ष्मण चलते चलते वन के अन्धकार से निकल कर ऐसे स्थान पर पहुँचे जो भगवान भास्कर के दिव्य प्रकाश से आलोकित हो रहा था और सामने नाना प्रकार के सुन्दर वृक्ष, मनोरम उपत्यका एवं मनोमुग्धकारी दृश्य दिखाई दे रहे थे। रामचन्द्र ने विश्वामित्र से पूछा, हे मुनिराज! सामने पर्वत की सुन्दर उपत्यकाओं में हरे हरे वृक्षों की जो लुभावनी पंक्तियां दृष्टिगत हो रही हैं, उनके पीछे ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे कोई आश्रम है। क्या वास्तव में ऐसा है या यह मेरी कल्पना मात्र है? वहाँ सुन्दर सुन्दर मधुरभाषी पक्षियों के झुण्ड भी दिखाई दे रहे हैं, जिससे प्रतीत होता है कि मेरी कल्पना निराधार नहीं है।
विश्वामित्र जी ने कहा, हे वत्स! यह वास्तव में आश्रम ही है और इसका नाम सिद्धाश्रम है।
यह सुन कर लक्ष्मण ने पूछा, गुरुदेव! इसका नाम सिद्धाश्रम क्यों पड़ा?

विश्वामित्र जी ने कहा, इस सम्बन्ध में भी एक कथा प्रचलित है। प्राचीन काल में बलि नाम का एक राक्षस था। बलि बहुत पराक्रमी और बलशाली था और समस्त देवताओं को पराजित कर चुका था। एक बार उसी बलि ने यहाँ पर एक महान यज्ञ का अनुष्ठान किया था। इस यज्ञानुष्ठान से उसकी शक्ति में और भी वृद्धि हो जाने वाली थी। इस बात को विचार कर के देवराज इन्द्र अत्यंत भयभीत हो गया। इन्द्र समस्त देवताओं को साथ लेकर भगवान विष्णु के पास पहुँचा और उनकी स्तुति करने के पश्चात् उनसे प्रार्थना की, हे त्रिलोकीनाथ! राजा बलि ने समस्त देवताओं को परास्त कर दिया है और अब वह एक विराट यज्ञ कर रहा है। वह महादानी और उदार हृदय राक्षस है। उसके द्वार से कोई भी याचक खाली हाथ नहीं लौटता। उसकी तपस्या, तेजस्विता और यज्ञादि शुभ कर्मों से देवलोक सहित सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड काँप उठा है। यदि उसका यह यज्ञ पूर्ण हो जायेगा तो वह इन्द्रासन को प्राप्त कर लेगा। इन्द्रासन पर किसी राक्षस का अधिकार होना सुरों की परम्परा के विरुद्ध है। अतएव, हे लक्ष्मीपति! आप से प्रार्थना है कि आप दुछ ऐसा उपाय करें कि उसका यज्ञ पूर्ण न हो पाये। उनकी इस प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने कहा, आप सभी देवता निर्भय और निश्चिंत होकर अपने अपने धाम में वापस चले जाएँ। आप लोगों का मनोरथ पूर्ण करने के लिये मैं शीघ्र ही उपाय करूँगा।

देवताओं के चले जाने के बाद भगवान विष्णु वामन (बौने) का रूप धारण करके वहाँ पहुँचे जहाँ पर बलि यज्ञ कर रहा था। इस बौने किन्तु परम तेजस्वी ब्राह्मण से राजा बलि अत्यधिक प्रभावित हुये और बोले, विप्रवर! आपका स्वागत है। आज्ञा कीजिये, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?
बलि के इस तरह कहने पर वामन रूपधारी भगवान विष्णु ने कहा, राजन्! मुझे बैठ कर भगवान का भजन करने के लिए सिर्फ ढाई चरण भूमि की आवश्यकता है।

इस पर राजा बलि ने प्रसन्नता पूर्वक वामन को ढाई चरण भूमि नापने की अनुमति दे दी। अनुमति मिलते ही भगवान विष्णु ने विराट रूप धारण किया और एक चरण में सम्पूर्ण आकाश को और दूसरे चरण में पृथ्वी सहित पूरे पाताल को नाप लिया और पूछा, राजन! आपका समस्त राज्य तो मेरे दो चरण में ही आ गये। अब शेष आधा चरण से मैं क्या नापूँ?

बलि के द्वार से कभी भी कोई याचक खाली हाथ नहीं गया था। बलि इस याचक को भी निराश नहीं लौटने देना चाहता था। उसने कहा, हे ब्राह्मण! अभी मेरा शरीर बाकी है। आप मेरे इस शरीर पर अपना आधा चरण रख दीजिये। इस पर भगवान विष्णु ने बलि को भी अपने आधे चरण में नाप लिया। (बलि का यह दान इतना महान था कि बलिदान के नाम से विख्यात हो गया।) भगवान विष्णु ने बलि की दानशीलता से प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया कि यह स्थान सदा पवित्र माना जायेगा, सिद्धाश्रम कहलायेगा और यहाँ तपस्या करने वाले को शीघ्र ही समस्त सिद्धियाँ प्राप्त होंगी।

उसी समय से यह स्थान सिद्धाश्रम के नाम से विख्यात है और बहुत से ऋषि मुनि-यहाँ तपस्या करके मुक्ति लाभ करते हैं। मेरे स्वयं का आश्रम भी इसी स्थान पर है। मैं यहीं बैठ कर अपना यज्ञ सम्पन्न करना चाहता हूँ। जब-जब मैने यज्ञ प्रारम्भ किया तब-तब राक्षसों ने उसमें बाधा डाली है और उसे कभी पूर्ण नहीं होने दिया। अब तुम आ गये हो और मैं निश्चिन्त होकर यज्ञ पूरा कर सकूँगा।

इस प्रकार की बातें करते हुये विश्वामित्र ने राम और लक्ष्मण के साथ अपने आश्रम में पदार्पण किया। वहाँ रहने वाले समस्त ऋषि मुनियों और उनके शिष्यों ने उनका स्वागत सत्कार किया। राम ने विनीत स्वर में गुरु विश्वामित्र से कहा, मुनिराज! आप आज ही यज्ञ का शुभारम्भ कीजिये। मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं आपके यज्ञ की रक्षा करते हुये इस पवित्र प्रदेश को राक्षसों से मुक्त कर दूँगा।
राम के इन वचनों को सुन कर विश्वामित्र यज्ञ सामग्री एकत्रित करने में जुट गये।

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  13. बालकाण्ड : अलभ्य अस्त्रों का दान, विश्वामित्र द्वारा राम को अलभ्य अस्त्रों का दान, गुरु विश्वामित्र ने श्री राम को अस्त्र क्यों दिए? Vishvaamitra Dwara Ram Ko Alabhy Astron Ka Daan
  14. बालकाण्ड : महर्षि विश्वामित्र का आश्रम, सिद्धाश्रम, विश्वामित्र के आश्रम का नाम सिद्धाश्रम क्यों पड़ा? Sampoorn Ramayan Katha Bal Kand: Vishwamitra Ka Ashram
  15. बालकाण्ड: मारीच -सुबाहु का उत्पात, मारीच और सुबाहु वध, राम ने कैसे किया मारीच और सुबाहु का वध, मारीच और सुबाहु की माता का नाम क्या था?
  16. बालकाण्ड: धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, रामचंद्र का धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, धनुष यज्ञ का उद्देश्य, सीता स्वयंवर के लिए धनुष यज्ञ, शिवधनुष की विशेषता
  17. बालकाण्ड: गंगा-जन्म की कथा, गंगा की उत्पत्ति कथा, गंगा की उत्पत्ति कहां से हुई, गंगा की कहानी, गंगा की कथा, गंगा किसकी पुत्री थी, गंगा का जन्म कैसे हुआ
  18. बालकाण्ड: गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचे राम व लक्ष्मण, जनकपुरी में राम का आगमन, श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र का जनकपुर आगमन
  19. बालकाण्ड: अहिल्या की कथा – कौन थीं अहिल्या, क्यों और कैसे अहिल्या बन गई थी पत्थर? अहिल्या को श्राप क्यों मिला? अहिल्या को गौतम ऋषि ने दिया श्राप
  20. बालकाण्ड: विश्वामित्र का पूर्व चरित्र, विश्वामित्र का जीवन, विश्वामित्र की कहानी, विश्वामित्र के पिता का नाम, विश्वामित्र की संपूर्ण कथा, विश्वामित्र का जन्म कैसे हुआ
  21. बालकाण्ड: त्रिशंकु की स्वर्ग यात्रा, विश्वामित्र ने क्यों बनाया त्रिशंकु स्वर्ग, त्रिशंकु की कहानी, त्रिशंकु स्वर्ग क्या है और इसे किसने बनाया, त्रिशंकु को स्वर्ग जाने में किसने मदद की
  22. बालकाण्ड: ब्राह्मणत्व की प्राप्ति, विश्वामित्र को ब्राह्मणत्व की प्राप्ति, विश्वामित्र जी की कथा (Sampurna Ramayan Katha Bal Kand: Brahmanatva Ki Praapti
  23. बालकाण्ड: राम ने धनुष तोड़ा, धनुष यज्ञ राम विवाह, सीता स्वयंवर धनुष भंग, राम द्वारा धनुष भंग, शिवधनुष पिनाक की कथा, शिवधनुष की कथा
  24. बालकाण्ड: विवाह पूर्व की औपचारिकताएं, राम सीता विवाह, श्री राम सीता विवाह कथा, विवाह के समय राम और सीता की आयु कितनी थी,राम सीता की शादी
  25. बालकाण्ड: परशुराम जी का आगमन, राम का अयोध्या आगमन, विवाह के बाद राम सीता जी का अयोध्या में आगमन, पत्नियों सहित राजकुमारों का अयोध्या में आगमन
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  27. अयोध्याकाण्ड: कैकेयी का कोपभवन में जाना, कैकेयी कोपभवन, कैकेयी क्रंदन, राजा दशरथ ने क्यों दिए कैकेयी को दो वरदान, कैकेयी द्वारा वरों की प्राप्ति
  28. अयोध्याकाण्ड: राम वनवास, राम को 14 वर्ष का वनवास, राम के वनवास जाने का कारण, राम 14 वर्ष के लिए वनवास क्यों गए, केकई ने राम को 14 वर्ष का वनवास क्यों दिया
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  36. अयोध्याकाण्ड: दशरथ की अन्त्येष्टि, दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार (Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Dasharatha’s Funeral
  37. अयोध्याकाण्ड: श्री राम-भरत मिलाप कथा, राम और भरत का मिलन, चित्रकूट में भरत मिलाप की कहानी, राम-भरत मिलाप संवाद, श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटे भरत
  38. अयोध्याकाण्ड: महर्षि अत्रि का आश्रम, अत्रि ऋषि के आश्रम पहुंचे श्री राम Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Maharishi Atri Ka Ashram
  39. अरण्यकाण्ड: दण्डक वन में विराध वध, श्री राम द्वारा विराध राक्षस का वध, भगवान श्री राम ने किया दंडकवन के सबसे बड़े राक्षस विराध का वध
  40. अरण्यकाण्ड: महर्षि शरभंग का आश्रम, महर्षि शरभंग, शरभंग ऋषि की कथा, सीता की शंका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  41. अरण्यकाण्ड: अगस्त्य का आश्रम, महर्षि अगस्त्य मुनि, श्रीराम और अगस्त मुनि का मिलन स्थल सिद्धनाथ आश्रम Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  42. अरण्यकाण्ड: पंचवटी में आश्रम, श्री राम-लक्ष्मण एवं सीता पंचवटी आश्रम में कैसे पहुँचे?, पंचवटी किस राज्य में है, पंचवटी की कहानी, पंचवटी क्या है, पंचवटी कहां है
  43. अरण्यकाण्ड: रावण की बहन शूर्पणखा, श्री राम का खर-दूषण से युद्ध, खर-दूषण वध, खर-दूषण का वध किसने किया? Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  44. अरण्यकाण्ड: सीता की कथा और स्वर्ण मृग, श्री राम और स्वर्ण-मृग प्रसंग, मारीच का स्वर्णमृग रूप, सीता हरण, रामायण सीता हरण की कहानी, सीता हरण कैसे हुआ
  45. संपूर्ण रामायण कथा अरण्यकाण्ड: जटायु वध, रावण द्वारा गिद्धराज जटायु वध, सीता हरण व जटायु वध, रावण जटायु युद्ध, जटायु प्रसंग, जटायु कौन था
  46. अरण्यकाण्ड: रावण-सीता संवाद, रावण की माता सीता को धमकी, रावण और सीता संवाद अशोक वाटिका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  47. अरण्यकाण्ड: राम की वापसी और विलाप, श्री राम और लक्ष्मण विलाप, सीता हरण पर श्री राम जी के द्वारा विलाप, जटायु की मृत्यु, पक्षीराज जटायु की मृत्यु कैसे हुई
  48. अरण्यकाण्ड: कबन्ध का वध, राम द्वारा कबन्ध राक्षस का वध, रामायण में कबंध राक्षस, कबंध कौन था Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  49. अरण्यकाण्ड: शबरी का आश्रम, भगवान राम शबरी के आश्रम क्यों गए, श्री राम शबरी के आश्रम कैसे पहुँचे? शबरी के झूठे बेर प्रभु राम ने खाएं, शबरी के बेर की कहानी
  50. किष्किन्धाकाण्ड: राम हनुमान भेंट, श्रीराम की हनुमान से पहली मुलाकात कहां और कब हुई, राम हनुमान मिलन की कहानी
  51. किष्किन्धाकाण्ड: राम-सुग्रीव मैत्री, राम-सुग्रीव मित्रता, श्री राम और सुग्रीव के मित्रता की कहानी, राम-सुग्रीव वार्तालाप, राम-सुग्रीव संवाद
  52. किष्किन्धाकाण्ड: बाली सुग्रीव युध्द वालि-वध, बाली का वध, राम द्वारा बाली का वध, बाली-राम संवाद, तारा का विलाप
  53. किष्किन्धाकाण्ड: सुग्रीव का अभिषेक, बाली वध के बाद सुग्रीव का राज्याभिषेक (Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  54. किष्किन्धाकाण्ड: हनुमान-सुग्रीव संवाद, हनुमान और सुग्रीव की मित्रता, लक्ष्मण-सुग्रीव संवाद, राम का सुग्रीव पर कोप, रामायण सुग्रीव मित्रता
  55. किष्किन्धाकाण्ड: माता सीता की खोज, माता सीता की खोज में निकले राम, राम द्वारा हनुमान को मुद्रिका देना, माता सीता की खोज में निकले हनुमान
  56. किष्किन्धाकाण्ड: जाम्बवन्त द्वारा हनुमान को प्रेरणा, जाम्बवन्त के प्रेरक वचन Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  57. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का सागर पार करना, हनुमान जी ने समुद्र कैसे पार किया, हनुमान जी की लंका यात्रा, हनुमान जी का लंका में प्रवेश
  58. सुन्दरकाण्ड: लंका में सीता की खोज, माता सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान, सीता से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद
  59. सुन्दरकाण्ड: रावण -सीता संवाद, अशोक वाटिका में रावण संवाद, रावण सीता अशोक वाटिका, रावण की सीता को धमकी
  60. सुन्दरकाण्ड: जानकी राक्षसी घेरे में, माता सीता राक्षसी घेरे में, पति राम के वियोग में व्याकुल सीता, अशोक वाटिका में हनुमान जी किस वृक्ष पर बैठे थे
  61. सुन्दरकाण्ड: हनुमान सीता भेंट, सीता जी से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद, हनुमान का सीता को मुद्रिका देना
  62. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का विशाल रूप, हनुमान जी का पंचमुखी अवतार, हनुमान जी ने क्यों धारण किया पंचमुखी रूप, हनुमान के साथ क्यों नहीं गईं सीता, बजरंगबली का विराट रूप
  63. सुन्दरकाण्ड: हनुमान ने उजाड़ी अशोक वाटिका, हनुमान जी ने रावण की अशोक वाटिका को किया तहस-नहस, अशोक वाटिका विध्वंस, हनुमान राक्षस युद्ध
  64. सुन्दरकाण्ड: मेधनाद हनुमान युद्ध, लंका में हनुमान जी और मेघनाद का भयंकर युद्ध, मेघनाद ने हनुमान पर की बाणों की वर्षा
  65. सुन्दरकाण्ड: रावण के दरबार में हनुमान, रावण हनुमान संवाद, हनुमान-रावण की लड़ाई, लंका दहन, हनुमान जी द्वारा लंका दहन, हनुमान ने सोने की लंका में लगाई आग
  66. सुन्दरकाण्ड: माता सीता का संदेश देना, हनुमान के द्वारा राम सीता का संदेश, हनुमान ने राम को दिया माता सीता का संदेश
  67. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): समुद्र पार करने की चिन्ता, वानर सेना का प्रस्थान, वानर सेना का सेनापति कौन था, वानर सेना रामायण, वानर सेना का गठन
  68. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लंका में राक्षसी मन्त्रणा, विभीषण ने रावण को किस प्रकार समझाया, विभीषण का निष्कासन, विभीषण का श्री राम की शरण में आना
  69. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सेतु बन्धन, राम सेतु पुल, क्यों नहीं डूबे रामसेतु के पत्‍थर, राम सेतु का निर्माण कैसे हुआ, नल-नील द्वारा पुल बाँधना
  70. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सीता के साथ छल, रावण का छल, रावण ने छल से किया माता सीता का हरण Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  71. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अंगद रावण दरबार में, अंगद ने तोड़ा रावण का घमंड, रावण की सभा में अंगद-रावण संवाद, रावण की सभा में अंगद का पैर जमाना
  72. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): राम लक्ष्मण बन्धन में, नागपाश में राम लक्ष्मण, धूम्राक्ष और वज्रदंष्ट्र का वध, राक्षस सेनापति धूम्राक्ष का वध, अकम्पन का वध, प्रहस्त का वध
  73. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण कुम्भकर्ण संवाद, कुम्भकर्ण वध, कुंभकरण का वध किसने किया, कुम्भकर्ण की कहानी Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  74. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): त्रिशिरा, अतिकाय आदि का वध, अतिकाय का वध, मायासीता का वध, रावण पुत्र मेघनाद (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  75. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मेघनाद युद्ध कथा, मेघनाथ लक्ष्मण का अंतिम युद्ध, मेघनाद वध, मेघनाथ को कौन मार सकता था? लक्ष्मण ने मेघनाद को कैसे मारा
  76. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मूर्छित, मेघनाद ने ब्रह्म शक्ति से लक्ष्मण को किया मूर्छित, लक्ष्मण मूर्छित होने पर राम विलाप, संजीवनी बूटी लेकर आए हनुमान
  77. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण का युद्ध के लिये प्रस्थान, श्रीराम-रावण का युद्ध, राम और रावण के बीच युद्ध, रावण वध, मन्दोदरी का विलाप 
  78. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): विभीषण का राज्याभिषेक, रावण के बाद विभीषण बना लंका का राजा (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand Lanka Kand)
  79. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): माता सीता की अग्नि परीक्षा, माता सीता ने अग्नि परीक्षा क्यों दी थी? माता सीता ने अग्नि परीक्षा कैसे दी?, माता सीता की अग्नि परीक्षा कहां हुई थी? 
  80. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अयोध्या को प्रस्थान, राम अयोध्या कब लौटे थे, अयोध्या में राम का स्वागत, राम का अयोध्या वापस आना, वनवास से लौटे राम-लक्ष्मण और सीता
  81. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): भरत मिलाप, राम और भरत का मिलन, राम भरत संवाद, राम का राज्याभिषेक Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  82. उत्तरकाण्ड: रावण के पूर्व के राक्षसों के विषय में, रावण के जन्म की कथा, रावण का जन्म कैसे हुआ, रावण का जन्म कहां हुआ, रावण के कितने भाई थे
  83. उत्तरकाण्ड: हनुमान के जन्म की कथा, रामभक्त हनुमान के जन्म की कहानी, हनुमान की कथा, हनुमान जन्म लीला, पवनपुत्र हनुमान का जन्म कैसे हुआ
  84. उत्तरकाण्ड: अभ्यागतों की विदाई, प्रवासियों में अशुभ चर्चा, सीता का निर्वासन, राम ने सीता का त्याग क्यों किया, राम ने सीता को वनवास क्यों दिया
  85. उत्तरकाण्ड: राजा नृग की कथा, सूर्यवंशी राजा नृग की कथा, राजा नृग कुएँ का गिरगिट, राजा नृग का उद्धार कैसे हुआ? राजा नृग की मोक्ष कथा, राजा नृग का उपाख्यान 
  86. उत्तरकाण्ड: राजा निमि की कथा, शाप से सम्बंधित राजा की कथा, राजा निमि कौन थे? राजा निमि की कहानी, विदेह राजा जनक Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  87. उत्तरकाण्ड: राजा ययाति की कथा, कौन थे राजा ययाति, राजा ययाति की कहानी, ययाति का यदु कुल को शाप Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  88. उत्तरकाण्ड: कुत्ते का न्याय, राम और कुत्ते की कहानी, भगवान राम से जब न्याय मांगने आया एक कुत्ता, रामायण का अनोखा किस्सा
  89. उत्तरकाण्ड: पूर्व राजाओं के यज्ञ-स्थल एवं लवकुश का जन्म, लव कुश का जन्म कहां पर हुआ था, लव कुश में बड़ा कौन है, वाल्मीकि आश्रम कहां है, च्यवन ऋषि का आगमन
  90. उत्तरकाण्ड: ब्राह्मण बालक की मृत्यु, शंबूक ऋषि की हत्या किसने की, शंबुक कथा, शंबूक ऋषि का वध, राम ने क्यों की शंबूक की हत्या Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  91. उत्तरकाण्ड: राजा श्वेत क्यों खाया करते थे अपने ही शरीर का मांस, राजा श्वेत की कहानी, राजा श्वेत की कथा Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Raja Swet Ki Katha
  92. उत्तरकाण्ड: राजा दण्ड की कथा, दण्डकारण्य जंगल के श्रापित होने की कथा, शुक्राचार्य ने राजा दण्ड को दिया श्राप
  93. उत्तरकाण्ड: वृत्रासुर की कथा, वृत्रासुर का वध, वृत्रासुर कौन था? इंद्र द्वारा वृत्रासुर का वध Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Vritrasura Ki Katha
  94. उत्तरकाण्ड: राजा इल की कथा, जब पुरूष से स्त्री बन गये राजा ईल, राजा इल की कहानी (Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Raja Ill Ki Kahani, Raja Ill Ki Katha
  95. उत्तरकाण्ड: अश्वमेघ यज्ञ का अनुष्ठान रामायण, अश्वमेध यज्ञ क्या है? Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Ashvamedh Yagya Ka Anushthaan, Ashvamedh Yagya Kya Hai
  96. उत्तरकाण्ड: लव-कुश द्वारा रामायण गान, ‘हम कथा सुनाते’ लव-कुश के गीत, लव-कुश ने सुनाई राम कथा, लव कुश गीत, रामायण लव कुश कांड
  97. उत्तरकाण्ड: सीता का रसातल प्रवेश, सीता मैया धरती में क्यों समाई, सीता पृथ्वी समाधि, सीता जी का धरती में समाना, सीता का धरती में प्रवेश करना
  98. उत्तरकाण्ड: भरत व लक्ष्मण के पुत्रों के लिये राज्य व्यवस्था, वाल्मीकि रामायण (Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Bharat Aur Lakshman Ke Putron Ke Liye Rajya
  99. उत्तरकाण्ड: लक्ष्मण का परित्याग, राम ने लक्ष्मण का परित्याग क्यों किया, राम द्वारा लक्ष्मण का परित्याग, लक्ष्मण द्वारा प्राण विसर्जन, लक्ष्मण की मृत्यु
  100. उत्तरकाण्ड: महाप्रयाण, लव-कुश का अभिषेक, संपूर्ण वाल्मीकि रामायण, Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Mahaprayan, Valmiki Ramayan in Hindi
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बालकाण्ड: मारीच -सुबाहु का उत्पात, मारीच और सुबाहु वध, राम ने कैसे किया मारीच और सुबाहु का वध, मारीच और सुबाहु की माता का नाम क्या था? (Sampurna Ramayan Katha Bal Kand: Marich Aur Subahu Ka Vadh, Ram Ne Kaise Kiya Marich Suahu Ka Vadh)

संपूर्ण रामायण कथा बालकाण्ड: मारीच -सुबाहु का उत्पात, मारीच और सुबाहु वध, राम ने कैसे किया मारीच और सुबाहु का वध, मारीच और सुबाहु की माता का नाम क्या था? (Sampurna Ramayan Katha Bal Kand: Marich Aur Subahu Ka Vadh, Ram Ne Kaise Kiya Marich Suahu Ka Vadh)

मारीच -सुबाहु का उत्पात, मारीच और सुबाहु वध
दूसरे दिन ब्राह्म मुहूर्त में उठ कर तथा नित्यकर्म और सन्ध्या-उपसना आदि निवृत होकर राम और लक्ष्मण गुरु विश्वामित्र के पास जा कर बोले, गुरुदेव! कृपा करके हमें यह बताइये कि राक्षस यज्ञ में विघ्न डालने के लिये किस समय आते हैं। यह हम इसलिये जानना चाहते हैं कि कहीं ऐसा न हो कि हमारे अनजाने में ही वे आकर उपद्रव मचाने लगें।

दशरथ के वीर पुत्रों के इन उत्साहभरे इन वचनों को सुन कर वहाँ पर उपस्थित समस्त ऋषि-मुनि अत्यंत प्रसन्न हुये और बोले, हे रघुकुलभूषण राजकुमारों! यज्ञ की रक्षा करने के लिये तुमको आज से छः दिनों तथा रात्रियों तक पूर्ण रूप से सावधान मुद्रा में और सजग रहना होगा। इन छः दिनों मे विश्वामित्र जी मौन होकर यज्ञ करेंगे। इस समय भी वे तुम्हारे किसी भी प्रश्न का उत्तर नहीं देंगे क्योंकि वे यज्ञ की दीक्षा ले चुके हैं।

सूचना पा कर राम और लक्ष्मण दोनों भाई अपने समस्त शस्त्रास्त्रों से सुसज्जित होकर यज्ञ की रक्षा में तत्पर हो गये। पाँच दिन और पाँच रात्रि तक वे निरन्तर बिना किसी विश्राम के सतर्कता के साथ यज्ञ की रक्षा करते रहे किन्तु इस अवधि में किसी भी प्रकार की विघ्न-बाधा नहीं आई। छठवें दिन राम ने लक्ष्मण से कहा, भाई सौमित्र! यज्ञ का आज अन्तिम दिन है और उपद्रव करने के लिये राक्षसों की आने की पूर्ण सम्भावना है। आज हमें विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है। तनिक भी असावधानी से मुनिराज का यज्ञ और हमारा परिश्रम निष्फल और निरर्थक हो सकते हैं।

राम ने लक्ष्मण को अभी सचेष्ट किया ही था कि यज्ञ सामग्री, चमस, समिधा आदि अपने आप भभक उठे। आकाश से ऐसी ध्वनि आने लगी जैसे मेघ गरज रहे हों और सैकड़ों बिजलियाँ तड़क रही हों। इसके पश्चात् ताड़का पुत्र मारीच और सुबाहु की राक्षसी सेना रक्त, माँस, मज्जा, अस्थियों आदि की वर्षा करने लगी। रक्त गिरते देखकर राम ने उपद्रवकारियों पर एक खोजपूर्ण दृष्टि डाली। आकाश में मायावी राक्षसों की सेना को देख कर राम ने लक्ष्मण से कहा, लक्ष्मण! तुम धनुष पर शर-संधान करके सावधान हो जाओ। मैं मानवास्त्र चला कर इन महापापियों की सेना का अभी नाश किये देता हूँ।

यह कह कर राम ने असाधारण फुर्ती और कौशल का प्रदर्शन करते हुये उन पर मानवास्त्र छोड़ा। मानवास्त्र आँधी के वेग से जाकर मारीच की छाती में लगा और वह उसके वेग के कारण उड़कर एक सौ योजन अर्थात् चार सौ कोस दूर समुद्र में जा गिरा। इसके पश्चात् राम ने आकाश में आग्नेयास्त्र फेंका जिससे अग्नि की एक भयंकर ज्वाला प्रस्फुटित हुई और उसने सुबाहु को चारों ओर से आवृत कर लिया। इस अग्नि की ज्वाला ने क्षण भर में उस महापापी को जला कर भस्म कर दिया। जब उसका जला हुआ शरीर पृथ्वी पर गिरा तो एक बड़े जोर का धमाका हुजआ। उसके आघात से अनेक वृक्ष टूट कर भूमि पर गिर पड़े। मारीच और सुबाहु पर आक्रमण समाप्त करके राम ने बचे खुचे राक्षसों का नाश करने के लिये वायव्य नामक अस्त्र छोड़ दिया। उस अस्त्र के प्रहार से राक्षसों की विशाल सेना के वीर मर मर कर ओलों की भाँति भूमि पर गिरने लगे। इस प्रकार थोड़े ही समय में सम्पूर्ण राक्षसी सेना का नाश हो गया। चारों ओर राम की जय जयकार होने लगी तथा पुष्पों की वर्षा होने लगी। निर्विघ्न यज्ञ समाप्त करके मुनि विश्वामित्र यज्ञ वेदी से उठे और राम को हृदय से लगाकर बोले, हे रघुकुल कमल! तुम्हारे भुबजल के प्रताप और युद्ध कौशल से आज मेरा यज्ञ सफल हुआ। उपद्रवी राक्षसों का विनाश करके तुमने वास्तव में आज सिद्धाश्रम को कृतार्थ कर दिया।

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  9. संपूर्ण रामायण कथा बालकाण्ड : राम का जन्म , भगवान राम का जन्म कब हुआ , श्री राम जी का जन्म कब हुआ था, राम जी का जन्म कहाँ हुआ था, राम के जन्म की क्या कथा है.
  10. बालकाण्ड : विश्वामित्र का आगमन, ऋषि विश्वामित्र का आगमन, विश्वामित्र आगमन, विश्वामित्र ने राम को मांगा, विश्वामित्र का आश्रम कहां था, विश्वामित्र कौन थे.
  11. बालकाण्ड : कामदेव का आश्रम, कामेश्वर धाम, वाल्मीकि रामायण, राम और लक्ष्मण, ऋषि विश्वामित्र (Ramayana Balakand: Kamdev’s Ashram
  12. बालकाण्ड : ताड़का वध, राक्षसी ताड़का वध, ताड़का का वध कैसे हुआ, राम ने ताड़का का वध कैसे किया, ताड़का वध कहाँ हुआ था, ताड़का वन कहाँ है.
  13. बालकाण्ड : अलभ्य अस्त्रों का दान, विश्वामित्र द्वारा राम को अलभ्य अस्त्रों का दान, गुरु विश्वामित्र ने श्री राम को अस्त्र क्यों दिए? Vishvaamitra Dwara Ram Ko Alabhy Astron Ka Daan
  14. बालकाण्ड : महर्षि विश्वामित्र का आश्रम, सिद्धाश्रम, विश्वामित्र के आश्रम का नाम सिद्धाश्रम क्यों पड़ा? Sampoorn Ramayan Katha Bal Kand: Vishwamitra Ka Ashram
  15. बालकाण्ड: मारीच -सुबाहु का उत्पात, मारीच और सुबाहु वध, राम ने कैसे किया मारीच और सुबाहु का वध, मारीच और सुबाहु की माता का नाम क्या था?
  16. बालकाण्ड: धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, रामचंद्र का धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, धनुष यज्ञ का उद्देश्य, सीता स्वयंवर के लिए धनुष यज्ञ, शिवधनुष की विशेषता
  17. बालकाण्ड: गंगा-जन्म की कथा, गंगा की उत्पत्ति कथा, गंगा की उत्पत्ति कहां से हुई, गंगा की कहानी, गंगा की कथा, गंगा किसकी पुत्री थी, गंगा का जन्म कैसे हुआ
  18. बालकाण्ड: गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचे राम व लक्ष्मण, जनकपुरी में राम का आगमन, श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र का जनकपुर आगमन
  19. बालकाण्ड: अहिल्या की कथा – कौन थीं अहिल्या, क्यों और कैसे अहिल्या बन गई थी पत्थर? अहिल्या को श्राप क्यों मिला? अहिल्या को गौतम ऋषि ने दिया श्राप
  20. बालकाण्ड: विश्वामित्र का पूर्व चरित्र, विश्वामित्र का जीवन, विश्वामित्र की कहानी, विश्वामित्र के पिता का नाम, विश्वामित्र की संपूर्ण कथा, विश्वामित्र का जन्म कैसे हुआ
  21. बालकाण्ड: त्रिशंकु की स्वर्ग यात्रा, विश्वामित्र ने क्यों बनाया त्रिशंकु स्वर्ग, त्रिशंकु की कहानी, त्रिशंकु स्वर्ग क्या है और इसे किसने बनाया, त्रिशंकु को स्वर्ग जाने में किसने मदद की
  22. बालकाण्ड: ब्राह्मणत्व की प्राप्ति, विश्वामित्र को ब्राह्मणत्व की प्राप्ति, विश्वामित्र जी की कथा (Sampurna Ramayan Katha Bal Kand: Brahmanatva Ki Praapti
  23. बालकाण्ड: राम ने धनुष तोड़ा, धनुष यज्ञ राम विवाह, सीता स्वयंवर धनुष भंग, राम द्वारा धनुष भंग, शिवधनुष पिनाक की कथा, शिवधनुष की कथा
  24. बालकाण्ड: विवाह पूर्व की औपचारिकताएं, राम सीता विवाह, श्री राम सीता विवाह कथा, विवाह के समय राम और सीता की आयु कितनी थी,राम सीता की शादी
  25. बालकाण्ड: परशुराम जी का आगमन, राम का अयोध्या आगमन, विवाह के बाद राम सीता जी का अयोध्या में आगमन, पत्नियों सहित राजकुमारों का अयोध्या में आगमन
  26. अयोध्याकाण्ड: राम के राजतिलक की घोषणा, राजतिलक की तैयारी, श्री राम का राजतिलक, राम का राज्याभिषेक Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand
  27. अयोध्याकाण्ड: कैकेयी का कोपभवन में जाना, कैकेयी कोपभवन, कैकेयी क्रंदन, राजा दशरथ ने क्यों दिए कैकेयी को दो वरदान, कैकेयी द्वारा वरों की प्राप्ति
  28. अयोध्याकाण्ड: राम वनवास, राम को 14 वर्ष का वनवास, राम के वनवास जाने का कारण, राम 14 वर्ष के लिए वनवास क्यों गए, केकई ने राम को 14 वर्ष का वनवास क्यों दिया
  29. अयोध्याकाण्ड: तमसा नदी के तट पर राम लक्ष्मण और सीता, तमसा नदी कहां से निकली है, तमसा नदी किस जिले में है, तमसा नदी किस राज्य में है, टोंस नदी का इतिहास
  30. अयोध्याकाण्ड: भीलराज गुह, गंगा पार करना, केवट ने राम-लक्ष्मण और मां सीता को गंगा पार कराया, केवट और प्रभु श्रीराम का प्रसंग
  31. अयोध्याकाण्ड: राम, लक्ष्मण और सीता का चित्रकूट के लिये प्रस्थान, चित्रकूट की यात्रा, चित्रकूट धाम यात्रा, श्री रामजी के बनवास की कहानी
  32. अयोध्याकाण्ड: सुमन्त का अयोध्या लौटना, दशरथ सुमन्त संवाद (Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Sumant’s Return to Ayodhya
  33. अयोध्याकाण्ड: श्रवण कुमार की कथा, राजा दशरथ और श्रवण कुमार, श्रवण कुमार की कहानी, मातृ और पितृभक्त श्रवण कुमार
  34. अयोध्याकाण्ड: राजा दशरथ की मृत्यु, राजा दशरथ की मृत्यु कब हुई? अयोध्यापति राजा दशरथ की मृत्यु कैसे हुई? Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand
  35. अयोध्याकाण्ड: भरत-शत्रुघ्न की वापसी, भरत-शत्रुघ्न की अयोध्या वापसी, भरत कैकयी संवाद Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand
  36. अयोध्याकाण्ड: दशरथ की अन्त्येष्टि, दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार (Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Dasharatha’s Funeral
  37. अयोध्याकाण्ड: श्री राम-भरत मिलाप कथा, राम और भरत का मिलन, चित्रकूट में भरत मिलाप की कहानी, राम-भरत मिलाप संवाद, श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटे भरत
  38. अयोध्याकाण्ड: महर्षि अत्रि का आश्रम, अत्रि ऋषि के आश्रम पहुंचे श्री राम Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Maharishi Atri Ka Ashram
  39. अरण्यकाण्ड: दण्डक वन में विराध वध, श्री राम द्वारा विराध राक्षस का वध, भगवान श्री राम ने किया दंडकवन के सबसे बड़े राक्षस विराध का वध
  40. अरण्यकाण्ड: महर्षि शरभंग का आश्रम, महर्षि शरभंग, शरभंग ऋषि की कथा, सीता की शंका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  41. अरण्यकाण्ड: अगस्त्य का आश्रम, महर्षि अगस्त्य मुनि, श्रीराम और अगस्त मुनि का मिलन स्थल सिद्धनाथ आश्रम Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  42. अरण्यकाण्ड: पंचवटी में आश्रम, श्री राम-लक्ष्मण एवं सीता पंचवटी आश्रम में कैसे पहुँचे?, पंचवटी किस राज्य में है, पंचवटी की कहानी, पंचवटी क्या है, पंचवटी कहां है
  43. अरण्यकाण्ड: रावण की बहन शूर्पणखा, श्री राम का खर-दूषण से युद्ध, खर-दूषण वध, खर-दूषण का वध किसने किया? Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  44. अरण्यकाण्ड: सीता की कथा और स्वर्ण मृग, श्री राम और स्वर्ण-मृग प्रसंग, मारीच का स्वर्णमृग रूप, सीता हरण, रामायण सीता हरण की कहानी, सीता हरण कैसे हुआ
  45. संपूर्ण रामायण कथा अरण्यकाण्ड: जटायु वध, रावण द्वारा गिद्धराज जटायु वध, सीता हरण व जटायु वध, रावण जटायु युद्ध, जटायु प्रसंग, जटायु कौन था
  46. अरण्यकाण्ड: रावण-सीता संवाद, रावण की माता सीता को धमकी, रावण और सीता संवाद अशोक वाटिका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  47. अरण्यकाण्ड: राम की वापसी और विलाप, श्री राम और लक्ष्मण विलाप, सीता हरण पर श्री राम जी के द्वारा विलाप, जटायु की मृत्यु, पक्षीराज जटायु की मृत्यु कैसे हुई
  48. अरण्यकाण्ड: कबन्ध का वध, राम द्वारा कबन्ध राक्षस का वध, रामायण में कबंध राक्षस, कबंध कौन था Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  49. अरण्यकाण्ड: शबरी का आश्रम, भगवान राम शबरी के आश्रम क्यों गए, श्री राम शबरी के आश्रम कैसे पहुँचे? शबरी के झूठे बेर प्रभु राम ने खाएं, शबरी के बेर की कहानी
  50. किष्किन्धाकाण्ड: राम हनुमान भेंट, श्रीराम की हनुमान से पहली मुलाकात कहां और कब हुई, राम हनुमान मिलन की कहानी
  51. किष्किन्धाकाण्ड: राम-सुग्रीव मैत्री, राम-सुग्रीव मित्रता, श्री राम और सुग्रीव के मित्रता की कहानी, राम-सुग्रीव वार्तालाप, राम-सुग्रीव संवाद
  52. किष्किन्धाकाण्ड: बाली सुग्रीव युध्द वालि-वध, बाली का वध, राम द्वारा बाली का वध, बाली-राम संवाद, तारा का विलाप
  53. किष्किन्धाकाण्ड: सुग्रीव का अभिषेक, बाली वध के बाद सुग्रीव का राज्याभिषेक (Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  54. किष्किन्धाकाण्ड: हनुमान-सुग्रीव संवाद, हनुमान और सुग्रीव की मित्रता, लक्ष्मण-सुग्रीव संवाद, राम का सुग्रीव पर कोप, रामायण सुग्रीव मित्रता
  55. किष्किन्धाकाण्ड: माता सीता की खोज, माता सीता की खोज में निकले राम, राम द्वारा हनुमान को मुद्रिका देना, माता सीता की खोज में निकले हनुमान
  56. किष्किन्धाकाण्ड: जाम्बवन्त द्वारा हनुमान को प्रेरणा, जाम्बवन्त के प्रेरक वचन Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  57. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का सागर पार करना, हनुमान जी ने समुद्र कैसे पार किया, हनुमान जी की लंका यात्रा, हनुमान जी का लंका में प्रवेश
  58. सुन्दरकाण्ड: लंका में सीता की खोज, माता सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान, सीता से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद
  59. सुन्दरकाण्ड: रावण -सीता संवाद, अशोक वाटिका में रावण संवाद, रावण सीता अशोक वाटिका, रावण की सीता को धमकी
  60. सुन्दरकाण्ड: जानकी राक्षसी घेरे में, माता सीता राक्षसी घेरे में, पति राम के वियोग में व्याकुल सीता, अशोक वाटिका में हनुमान जी किस वृक्ष पर बैठे थे
  61. सुन्दरकाण्ड: हनुमान सीता भेंट, सीता जी से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद, हनुमान का सीता को मुद्रिका देना
  62. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का विशाल रूप, हनुमान जी का पंचमुखी अवतार, हनुमान जी ने क्यों धारण किया पंचमुखी रूप, हनुमान के साथ क्यों नहीं गईं सीता, बजरंगबली का विराट रूप
  63. सुन्दरकाण्ड: हनुमान ने उजाड़ी अशोक वाटिका, हनुमान जी ने रावण की अशोक वाटिका को किया तहस-नहस, अशोक वाटिका विध्वंस, हनुमान राक्षस युद्ध
  64. सुन्दरकाण्ड: मेधनाद हनुमान युद्ध, लंका में हनुमान जी और मेघनाद का भयंकर युद्ध, मेघनाद ने हनुमान पर की बाणों की वर्षा
  65. सुन्दरकाण्ड: रावण के दरबार में हनुमान, रावण हनुमान संवाद, हनुमान-रावण की लड़ाई, लंका दहन, हनुमान जी द्वारा लंका दहन, हनुमान ने सोने की लंका में लगाई आग
  66. सुन्दरकाण्ड: माता सीता का संदेश देना, हनुमान के द्वारा राम सीता का संदेश, हनुमान ने राम को दिया माता सीता का संदेश
  67. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): समुद्र पार करने की चिन्ता, वानर सेना का प्रस्थान, वानर सेना का सेनापति कौन था, वानर सेना रामायण, वानर सेना का गठन
  68. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लंका में राक्षसी मन्त्रणा, विभीषण ने रावण को किस प्रकार समझाया, विभीषण का निष्कासन, विभीषण का श्री राम की शरण में आना
  69. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सेतु बन्धन, राम सेतु पुल, क्यों नहीं डूबे रामसेतु के पत्‍थर, राम सेतु का निर्माण कैसे हुआ, नल-नील द्वारा पुल बाँधना
  70. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सीता के साथ छल, रावण का छल, रावण ने छल से किया माता सीता का हरण Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  71. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अंगद रावण दरबार में, अंगद ने तोड़ा रावण का घमंड, रावण की सभा में अंगद-रावण संवाद, रावण की सभा में अंगद का पैर जमाना
  72. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): राम लक्ष्मण बन्धन में, नागपाश में राम लक्ष्मण, धूम्राक्ष और वज्रदंष्ट्र का वध, राक्षस सेनापति धूम्राक्ष का वध, अकम्पन का वध, प्रहस्त का वध
  73. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण कुम्भकर्ण संवाद, कुम्भकर्ण वध, कुंभकरण का वध किसने किया, कुम्भकर्ण की कहानी Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  74. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): त्रिशिरा, अतिकाय आदि का वध, अतिकाय का वध, मायासीता का वध, रावण पुत्र मेघनाद (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  75. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मेघनाद युद्ध कथा, मेघनाथ लक्ष्मण का अंतिम युद्ध, मेघनाद वध, मेघनाथ को कौन मार सकता था? लक्ष्मण ने मेघनाद को कैसे मारा
  76. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मूर्छित, मेघनाद ने ब्रह्म शक्ति से लक्ष्मण को किया मूर्छित, लक्ष्मण मूर्छित होने पर राम विलाप, संजीवनी बूटी लेकर आए हनुमान
  77. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण का युद्ध के लिये प्रस्थान, श्रीराम-रावण का युद्ध, राम और रावण के बीच युद्ध, रावण वध, मन्दोदरी का विलाप 
  78. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): विभीषण का राज्याभिषेक, रावण के बाद विभीषण बना लंका का राजा (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand Lanka Kand)
  79. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): माता सीता की अग्नि परीक्षा, माता सीता ने अग्नि परीक्षा क्यों दी थी? माता सीता ने अग्नि परीक्षा कैसे दी?, माता सीता की अग्नि परीक्षा कहां हुई थी? 
  80. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अयोध्या को प्रस्थान, राम अयोध्या कब लौटे थे, अयोध्या में राम का स्वागत, राम का अयोध्या वापस आना, वनवास से लौटे राम-लक्ष्मण और सीता
  81. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): भरत मिलाप, राम और भरत का मिलन, राम भरत संवाद, राम का राज्याभिषेक Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  82. उत्तरकाण्ड: रावण के पूर्व के राक्षसों के विषय में, रावण के जन्म की कथा, रावण का जन्म कैसे हुआ, रावण का जन्म कहां हुआ, रावण के कितने भाई थे
  83. उत्तरकाण्ड: हनुमान के जन्म की कथा, रामभक्त हनुमान के जन्म की कहानी, हनुमान की कथा, हनुमान जन्म लीला, पवनपुत्र हनुमान का जन्म कैसे हुआ
  84. उत्तरकाण्ड: अभ्यागतों की विदाई, प्रवासियों में अशुभ चर्चा, सीता का निर्वासन, राम ने सीता का त्याग क्यों किया, राम ने सीता को वनवास क्यों दिया
  85. उत्तरकाण्ड: राजा नृग की कथा, सूर्यवंशी राजा नृग की कथा, राजा नृग कुएँ का गिरगिट, राजा नृग का उद्धार कैसे हुआ? राजा नृग की मोक्ष कथा, राजा नृग का उपाख्यान 
  86. उत्तरकाण्ड: राजा निमि की कथा, शाप से सम्बंधित राजा की कथा, राजा निमि कौन थे? राजा निमि की कहानी, विदेह राजा जनक Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  87. उत्तरकाण्ड: राजा ययाति की कथा, कौन थे राजा ययाति, राजा ययाति की कहानी, ययाति का यदु कुल को शाप Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  88. उत्तरकाण्ड: कुत्ते का न्याय, राम और कुत्ते की कहानी, भगवान राम से जब न्याय मांगने आया एक कुत्ता, रामायण का अनोखा किस्सा
  89. उत्तरकाण्ड: पूर्व राजाओं के यज्ञ-स्थल एवं लवकुश का जन्म, लव कुश का जन्म कहां पर हुआ था, लव कुश में बड़ा कौन है, वाल्मीकि आश्रम कहां है, च्यवन ऋषि का आगमन
  90. उत्तरकाण्ड: ब्राह्मण बालक की मृत्यु, शंबूक ऋषि की हत्या किसने की, शंबुक कथा, शंबूक ऋषि का वध, राम ने क्यों की शंबूक की हत्या Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  91. उत्तरकाण्ड: राजा श्वेत क्यों खाया करते थे अपने ही शरीर का मांस, राजा श्वेत की कहानी, राजा श्वेत की कथा Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Raja Swet Ki Katha
  92. उत्तरकाण्ड: राजा दण्ड की कथा, दण्डकारण्य जंगल के श्रापित होने की कथा, शुक्राचार्य ने राजा दण्ड को दिया श्राप
  93. उत्तरकाण्ड: वृत्रासुर की कथा, वृत्रासुर का वध, वृत्रासुर कौन था? इंद्र द्वारा वृत्रासुर का वध Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Vritrasura Ki Katha
  94. उत्तरकाण्ड: राजा इल की कथा, जब पुरूष से स्त्री बन गये राजा ईल, राजा इल की कहानी (Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Raja Ill Ki Kahani, Raja Ill Ki Katha
  95. उत्तरकाण्ड: अश्वमेघ यज्ञ का अनुष्ठान रामायण, अश्वमेध यज्ञ क्या है? Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Ashvamedh Yagya Ka Anushthaan, Ashvamedh Yagya Kya Hai
  96. उत्तरकाण्ड: लव-कुश द्वारा रामायण गान, ‘हम कथा सुनाते’ लव-कुश के गीत, लव-कुश ने सुनाई राम कथा, लव कुश गीत, रामायण लव कुश कांड
  97. उत्तरकाण्ड: सीता का रसातल प्रवेश, सीता मैया धरती में क्यों समाई, सीता पृथ्वी समाधि, सीता जी का धरती में समाना, सीता का धरती में प्रवेश करना
  98. उत्तरकाण्ड: भरत व लक्ष्मण के पुत्रों के लिये राज्य व्यवस्था, वाल्मीकि रामायण (Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Bharat Aur Lakshman Ke Putron Ke Liye Rajya
  99. उत्तरकाण्ड: लक्ष्मण का परित्याग, राम ने लक्ष्मण का परित्याग क्यों किया, राम द्वारा लक्ष्मण का परित्याग, लक्ष्मण द्वारा प्राण विसर्जन, लक्ष्मण की मृत्यु
  100. उत्तरकाण्ड: महाप्रयाण, लव-कुश का अभिषेक, संपूर्ण वाल्मीकि रामायण, Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Mahaprayan, Valmiki Ramayan in Hindi
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बालकाण्ड: धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, रामचंद्र का धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, धनुष यज्ञ का उद्देश्य, सीता स्वयंवर के लिए धनुष यज्ञ, शिवधनुष की विशेषता, पिनाक, (Sampurna Ramayan Katha Bal Kand- Dhanush Yagya Ke Liye Prasthan, Sita Swayamvar)

संपूर्ण रामायण कथा बालकाण्ड: धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, रामचंद्र का धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, धनुष यज्ञ का उद्देश्य, सीता स्वयंवर के लिए धनुष यज्ञ, शिवधनुष की विशेषता, पिनाक, (Sampurna Ramayan Katha Bal Kand- Dhanush Yagya Ke Liye Prasthan, Sita Swayamvar)

धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, रामचंद्र का धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान
दूसरे दिन राम और लक्ष्मण अपने नित्यकर्मों और सन्ध्योवन्दनादि से निवृत हुए और प्रणाम करने के उद्देश्य से गुरु विश्वामित्र के पास पहुँचे। वहाँ उपस्थित आश्रमवासी तपस्वियों से राम और लक्ष्मण को ज्ञात हुआ कि मिथिला में राजा जनक ने धनुष यज्ञ का आयोजन किया है। उस धनुष यज्ञ में देश-देशान्तर के राजा लोग भाग लेने के लिये आ रहे हैं। रामचन्द्र ने गुरु विश्वामित्र से पूछा, गुरुदेव! इस धनुष की क्या विशेषता है और इस यज्ञ का आयोजन का उद्देश्य क्या है?

ऋषि विश्वामित्र ने बताया, हे राम! जनक मिथिलापुरी के राजाओं की उपाधि है जो चिरकाल से चली आ रही है। प्राचीन काल में किसी समय देवरात नामक पूर्वपुरुष ने बड़ी निष्ठा और श्रद्धा के साथ यज्ञ किया था जिसमें उसने देवताओं को भी आमन्त्रित किया था। देवताओं ने देवरात के इस यज्ञ से प्रसन्न होकर उसे पिनाक नाम का धनुष प्रदान किया था। यह धनुष अत्यन्त सुन्दर, भव्य और गरिमामय है और साथ ही साथ यह बहुत भारी और शक्तिशाली भी है। बड़े बड़े बलवान, पराक्रमी और रणकुशल योद्धा तथा शूरवीर इस पर प्रत्यंचा चढ़ाना तो दूर, इसे उठा भी नहीं सकते। अपनी एकमात्र रूपवती एवं लावण्यमयी कन्या सीता के स्वयंवर के लिये मिथिला नरेश ने प्रतिज्ञा की है कि जो भी पराक्रमी वीर राजकुमार या राजा इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा देगा उसके साथ वे अपनी कन्या का विवाह कर देंगे। अनेक देशों के राजा एवं राजकुमार भारी संख्या में इस यज्ञ में भाग लेने के लिये मिथिलापुरी पहुँच रहे हैं। हम लोगों की भी इच्छा इस यज्ञ को देखने की है। अतः तुम भी हमारे साथ मिथिला पुरी चलो। उसे देख कर तुम लोगों को भी प्रसन्नता होगी।

महर्षि का आदेशानुसार राम और लक्ष्मण ने भी विश्वामित्र तथा अन्य ऋषि-मुनियों के साथ मिथिलापुरी की ओर प्रस्थान किया। मार्ग में अनेक प्रकार के दृश्यों का अवलोकन करते हुये वे आध्यात्मिक चर्चा भी करते जाते थे। इस प्रकार वे शोण नदी के तट पर पहुँचे। विश्वामित्र सहित सभी ऋषि मुनियों एवं राजकुमारों ने सरिता के शीतल जल में स्नान किया। इसके पश्चात् सन्ध्या-उपासना आदि से निवृत होकर धार्मिक कथाओं की चर्चा में व्यस्त हो गये। रात्रि अधिक हो जाने पर गुरु की आज्ञा से सभी ने वहीं रात्रि व्यतीत की।
प्रातः नित्यकर्मों तथा सन्ध्यावन्दनादि से निवृत होने के पश्चात् यह मण्डली आगे की ओर बढ़ी। वे परम पावन गंगा नदी के तट पर पहुँचे। उस समय मध्यानह्न होने के कारण भगवान भस्कर आकाश के मध्य में पहुँच चुके थे और गंगा का दृष्य अत्यंत मनोरम दिखाई दे रहा था। अठखेलियाँ करती हुई लहरों में सूर्य के अनेकों प्रतिबिम्ब दिखाई दे रहे थे। जल में कौतुकमयी मछलियाँ क्रीड़ा कर रही थीं और नभ में सारस, हंस जैसे पक्षी अपनी मीठी बोली में बोल रहे थे। दूर दूर तक सुनहरे रेत के कण बिखरे पड़े थे और तटवर्ती वृक्षों की अनुपम शोभा दृष्टिगत हो रही थी।

राम इस दृष्य को अपलक दृष्टि से देख रहे थे। उन्हें देख कर विश्वामित्र ने पूछा, वत्स! इतना भावविभोर होकर तुम क्या देख रहे हो? राम ने कहा, गुरुदेव! मैं सुरसरि की इस अद्भुत छटा को देख रहा हूँ। इस परम पावन सलिला के दर्शन मात्र से मेरे हृदय को अपूर्व शान्ति मिल रही है। भगवन्! मैं आपके श्रीमुख से यह सुनना चाहता हूँ कि इस कलुषहारिणी पवित्र गंगा की उत्पत्ति कैसे हुई?

राम का प्रश्न सुन कर ऋषि विश्वामित्र बोले, हे राम! अनेक प्रकार के कष्टों और तापों का निवारण करने वाली गंगा की कथा अत्यंत मनोरंजक तथा रोचक है। मैं तुम सभी को यह कथा सुनाता हूँ। ऋषि विश्वामित्र ने इस प्रकार कथा सुनाना आरम्भ किया, पर्वतराज हिमालय की अत्यंत रूपवती, लावण्यमयी एवं सर्वगुण सम्पन्न दो कन्याएँ थीं। इन कन्याओं की माता, सुमेरु पर्वत की पुत्री, मैना थीं। बड़ी कन्या का नाम गंगा तथा छोटी कन्या का नाम उमा था। गंगा अत्यन्त प्रभावशाली और असाधारण दैवी गुणों से सम्पन्न थी। वह किसी बन्धन को स्वीकार न कर मनमाने मार्गों का अनुसरण करती थी। उसकी इस असाधारण प्रतिभा से प्रभावित होकर देवता लोग विश्व के कल्याण की दृष्टि से उसे हिमालय से माँग कर ले गये। पर्वतराज की दूसरी कन्या उमा बड़ी तपस्विनी थी। उसने कठोर एवं असाधारण तपस्या करके शिव जी को वर के रूप में प्राप्त किया।
विश्वामित्र के इतना कहने पर राम ने कहा, हे भगवन्! जब गंगा को देवता लोग सुरलोक ले गये तो वह पृथ्वी पर कैसे अवतरित हुई और गंगा को त्रिपथगा क्यों कहते हैं?

राम के इस प्रश्न का उत्तर देते हुए ऋषि विश्वामित्रत ने कहा, सुरलोक में विचरण करती हुई गंगा से उमा की भेंट हुई। गंगा ने उमा से कहा कि मुझे सुरलोक में विचरण करते हुये बहुत दिन हो गये हैं। मेरी इच्छा है कि मैं अपनी मातृभूमि पृथ्वी पर विचरण करूँ। उमा ने गंगा आश्वासन दिया कि वे इसके लिये कोई प्रबन्ध करने का प्रयत्न करेंगी।

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  13. बालकाण्ड : अलभ्य अस्त्रों का दान, विश्वामित्र द्वारा राम को अलभ्य अस्त्रों का दान, गुरु विश्वामित्र ने श्री राम को अस्त्र क्यों दिए? Vishvaamitra Dwara Ram Ko Alabhy Astron Ka Daan
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  18. बालकाण्ड: गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचे राम व लक्ष्मण, जनकपुरी में राम का आगमन, श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र का जनकपुर आगमन
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  20. बालकाण्ड: विश्वामित्र का पूर्व चरित्र, विश्वामित्र का जीवन, विश्वामित्र की कहानी, विश्वामित्र के पिता का नाम, विश्वामित्र की संपूर्ण कथा, विश्वामित्र का जन्म कैसे हुआ
  21. बालकाण्ड: त्रिशंकु की स्वर्ग यात्रा, विश्वामित्र ने क्यों बनाया त्रिशंकु स्वर्ग, त्रिशंकु की कहानी, त्रिशंकु स्वर्ग क्या है और इसे किसने बनाया, त्रिशंकु को स्वर्ग जाने में किसने मदद की
  22. बालकाण्ड: ब्राह्मणत्व की प्राप्ति, विश्वामित्र को ब्राह्मणत्व की प्राप्ति, विश्वामित्र जी की कथा (Sampurna Ramayan Katha Bal Kand: Brahmanatva Ki Praapti
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  28. अयोध्याकाण्ड: राम वनवास, राम को 14 वर्ष का वनवास, राम के वनवास जाने का कारण, राम 14 वर्ष के लिए वनवास क्यों गए, केकई ने राम को 14 वर्ष का वनवास क्यों दिया
  29. अयोध्याकाण्ड: तमसा नदी के तट पर राम लक्ष्मण और सीता, तमसा नदी कहां से निकली है, तमसा नदी किस जिले में है, तमसा नदी किस राज्य में है, टोंस नदी का इतिहास
  30. अयोध्याकाण्ड: भीलराज गुह, गंगा पार करना, केवट ने राम-लक्ष्मण और मां सीता को गंगा पार कराया, केवट और प्रभु श्रीराम का प्रसंग
  31. अयोध्याकाण्ड: राम, लक्ष्मण और सीता का चित्रकूट के लिये प्रस्थान, चित्रकूट की यात्रा, चित्रकूट धाम यात्रा, श्री रामजी के बनवास की कहानी
  32. अयोध्याकाण्ड: सुमन्त का अयोध्या लौटना, दशरथ सुमन्त संवाद (Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Sumant’s Return to Ayodhya
  33. अयोध्याकाण्ड: श्रवण कुमार की कथा, राजा दशरथ और श्रवण कुमार, श्रवण कुमार की कहानी, मातृ और पितृभक्त श्रवण कुमार
  34. अयोध्याकाण्ड: राजा दशरथ की मृत्यु, राजा दशरथ की मृत्यु कब हुई? अयोध्यापति राजा दशरथ की मृत्यु कैसे हुई? Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand
  35. अयोध्याकाण्ड: भरत-शत्रुघ्न की वापसी, भरत-शत्रुघ्न की अयोध्या वापसी, भरत कैकयी संवाद Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand
  36. अयोध्याकाण्ड: दशरथ की अन्त्येष्टि, दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार (Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Dasharatha’s Funeral
  37. अयोध्याकाण्ड: श्री राम-भरत मिलाप कथा, राम और भरत का मिलन, चित्रकूट में भरत मिलाप की कहानी, राम-भरत मिलाप संवाद, श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटे भरत
  38. अयोध्याकाण्ड: महर्षि अत्रि का आश्रम, अत्रि ऋषि के आश्रम पहुंचे श्री राम Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Maharishi Atri Ka Ashram
  39. अरण्यकाण्ड: दण्डक वन में विराध वध, श्री राम द्वारा विराध राक्षस का वध, भगवान श्री राम ने किया दंडकवन के सबसे बड़े राक्षस विराध का वध
  40. अरण्यकाण्ड: महर्षि शरभंग का आश्रम, महर्षि शरभंग, शरभंग ऋषि की कथा, सीता की शंका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  41. अरण्यकाण्ड: अगस्त्य का आश्रम, महर्षि अगस्त्य मुनि, श्रीराम और अगस्त मुनि का मिलन स्थल सिद्धनाथ आश्रम Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  42. अरण्यकाण्ड: पंचवटी में आश्रम, श्री राम-लक्ष्मण एवं सीता पंचवटी आश्रम में कैसे पहुँचे?, पंचवटी किस राज्य में है, पंचवटी की कहानी, पंचवटी क्या है, पंचवटी कहां है
  43. अरण्यकाण्ड: रावण की बहन शूर्पणखा, श्री राम का खर-दूषण से युद्ध, खर-दूषण वध, खर-दूषण का वध किसने किया? Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  44. अरण्यकाण्ड: सीता की कथा और स्वर्ण मृग, श्री राम और स्वर्ण-मृग प्रसंग, मारीच का स्वर्णमृग रूप, सीता हरण, रामायण सीता हरण की कहानी, सीता हरण कैसे हुआ
  45. संपूर्ण रामायण कथा अरण्यकाण्ड: जटायु वध, रावण द्वारा गिद्धराज जटायु वध, सीता हरण व जटायु वध, रावण जटायु युद्ध, जटायु प्रसंग, जटायु कौन था
  46. अरण्यकाण्ड: रावण-सीता संवाद, रावण की माता सीता को धमकी, रावण और सीता संवाद अशोक वाटिका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  47. अरण्यकाण्ड: राम की वापसी और विलाप, श्री राम और लक्ष्मण विलाप, सीता हरण पर श्री राम जी के द्वारा विलाप, जटायु की मृत्यु, पक्षीराज जटायु की मृत्यु कैसे हुई
  48. अरण्यकाण्ड: कबन्ध का वध, राम द्वारा कबन्ध राक्षस का वध, रामायण में कबंध राक्षस, कबंध कौन था Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  49. अरण्यकाण्ड: शबरी का आश्रम, भगवान राम शबरी के आश्रम क्यों गए, श्री राम शबरी के आश्रम कैसे पहुँचे? शबरी के झूठे बेर प्रभु राम ने खाएं, शबरी के बेर की कहानी
  50. किष्किन्धाकाण्ड: राम हनुमान भेंट, श्रीराम की हनुमान से पहली मुलाकात कहां और कब हुई, राम हनुमान मिलन की कहानी
  51. किष्किन्धाकाण्ड: राम-सुग्रीव मैत्री, राम-सुग्रीव मित्रता, श्री राम और सुग्रीव के मित्रता की कहानी, राम-सुग्रीव वार्तालाप, राम-सुग्रीव संवाद
  52. किष्किन्धाकाण्ड: बाली सुग्रीव युध्द वालि-वध, बाली का वध, राम द्वारा बाली का वध, बाली-राम संवाद, तारा का विलाप
  53. किष्किन्धाकाण्ड: सुग्रीव का अभिषेक, बाली वध के बाद सुग्रीव का राज्याभिषेक (Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  54. किष्किन्धाकाण्ड: हनुमान-सुग्रीव संवाद, हनुमान और सुग्रीव की मित्रता, लक्ष्मण-सुग्रीव संवाद, राम का सुग्रीव पर कोप, रामायण सुग्रीव मित्रता
  55. किष्किन्धाकाण्ड: माता सीता की खोज, माता सीता की खोज में निकले राम, राम द्वारा हनुमान को मुद्रिका देना, माता सीता की खोज में निकले हनुमान
  56. किष्किन्धाकाण्ड: जाम्बवन्त द्वारा हनुमान को प्रेरणा, जाम्बवन्त के प्रेरक वचन Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  57. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का सागर पार करना, हनुमान जी ने समुद्र कैसे पार किया, हनुमान जी की लंका यात्रा, हनुमान जी का लंका में प्रवेश
  58. सुन्दरकाण्ड: लंका में सीता की खोज, माता सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान, सीता से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद
  59. सुन्दरकाण्ड: रावण -सीता संवाद, अशोक वाटिका में रावण संवाद, रावण सीता अशोक वाटिका, रावण की सीता को धमकी
  60. सुन्दरकाण्ड: जानकी राक्षसी घेरे में, माता सीता राक्षसी घेरे में, पति राम के वियोग में व्याकुल सीता, अशोक वाटिका में हनुमान जी किस वृक्ष पर बैठे थे
  61. सुन्दरकाण्ड: हनुमान सीता भेंट, सीता जी से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद, हनुमान का सीता को मुद्रिका देना
  62. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का विशाल रूप, हनुमान जी का पंचमुखी अवतार, हनुमान जी ने क्यों धारण किया पंचमुखी रूप, हनुमान के साथ क्यों नहीं गईं सीता, बजरंगबली का विराट रूप
  63. सुन्दरकाण्ड: हनुमान ने उजाड़ी अशोक वाटिका, हनुमान जी ने रावण की अशोक वाटिका को किया तहस-नहस, अशोक वाटिका विध्वंस, हनुमान राक्षस युद्ध
  64. सुन्दरकाण्ड: मेधनाद हनुमान युद्ध, लंका में हनुमान जी और मेघनाद का भयंकर युद्ध, मेघनाद ने हनुमान पर की बाणों की वर्षा
  65. सुन्दरकाण्ड: रावण के दरबार में हनुमान, रावण हनुमान संवाद, हनुमान-रावण की लड़ाई, लंका दहन, हनुमान जी द्वारा लंका दहन, हनुमान ने सोने की लंका में लगाई आग
  66. सुन्दरकाण्ड: माता सीता का संदेश देना, हनुमान के द्वारा राम सीता का संदेश, हनुमान ने राम को दिया माता सीता का संदेश
  67. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): समुद्र पार करने की चिन्ता, वानर सेना का प्रस्थान, वानर सेना का सेनापति कौन था, वानर सेना रामायण, वानर सेना का गठन
  68. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लंका में राक्षसी मन्त्रणा, विभीषण ने रावण को किस प्रकार समझाया, विभीषण का निष्कासन, विभीषण का श्री राम की शरण में आना
  69. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सेतु बन्धन, राम सेतु पुल, क्यों नहीं डूबे रामसेतु के पत्‍थर, राम सेतु का निर्माण कैसे हुआ, नल-नील द्वारा पुल बाँधना
  70. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सीता के साथ छल, रावण का छल, रावण ने छल से किया माता सीता का हरण Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  71. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अंगद रावण दरबार में, अंगद ने तोड़ा रावण का घमंड, रावण की सभा में अंगद-रावण संवाद, रावण की सभा में अंगद का पैर जमाना
  72. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): राम लक्ष्मण बन्धन में, नागपाश में राम लक्ष्मण, धूम्राक्ष और वज्रदंष्ट्र का वध, राक्षस सेनापति धूम्राक्ष का वध, अकम्पन का वध, प्रहस्त का वध
  73. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण कुम्भकर्ण संवाद, कुम्भकर्ण वध, कुंभकरण का वध किसने किया, कुम्भकर्ण की कहानी Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  74. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): त्रिशिरा, अतिकाय आदि का वध, अतिकाय का वध, मायासीता का वध, रावण पुत्र मेघनाद (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  75. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मेघनाद युद्ध कथा, मेघनाथ लक्ष्मण का अंतिम युद्ध, मेघनाद वध, मेघनाथ को कौन मार सकता था? लक्ष्मण ने मेघनाद को कैसे मारा
  76. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मूर्छित, मेघनाद ने ब्रह्म शक्ति से लक्ष्मण को किया मूर्छित, लक्ष्मण मूर्छित होने पर राम विलाप, संजीवनी बूटी लेकर आए हनुमान
  77. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण का युद्ध के लिये प्रस्थान, श्रीराम-रावण का युद्ध, राम और रावण के बीच युद्ध, रावण वध, मन्दोदरी का विलाप 
  78. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): विभीषण का राज्याभिषेक, रावण के बाद विभीषण बना लंका का राजा (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand Lanka Kand)
  79. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): माता सीता की अग्नि परीक्षा, माता सीता ने अग्नि परीक्षा क्यों दी थी? माता सीता ने अग्नि परीक्षा कैसे दी?, माता सीता की अग्नि परीक्षा कहां हुई थी? 
  80. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अयोध्या को प्रस्थान, राम अयोध्या कब लौटे थे, अयोध्या में राम का स्वागत, राम का अयोध्या वापस आना, वनवास से लौटे राम-लक्ष्मण और सीता
  81. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): भरत मिलाप, राम और भरत का मिलन, राम भरत संवाद, राम का राज्याभिषेक Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  82. उत्तरकाण्ड: रावण के पूर्व के राक्षसों के विषय में, रावण के जन्म की कथा, रावण का जन्म कैसे हुआ, रावण का जन्म कहां हुआ, रावण के कितने भाई थे
  83. उत्तरकाण्ड: हनुमान के जन्म की कथा, रामभक्त हनुमान के जन्म की कहानी, हनुमान की कथा, हनुमान जन्म लीला, पवनपुत्र हनुमान का जन्म कैसे हुआ
  84. उत्तरकाण्ड: अभ्यागतों की विदाई, प्रवासियों में अशुभ चर्चा, सीता का निर्वासन, राम ने सीता का त्याग क्यों किया, राम ने सीता को वनवास क्यों दिया
  85. उत्तरकाण्ड: राजा नृग की कथा, सूर्यवंशी राजा नृग की कथा, राजा नृग कुएँ का गिरगिट, राजा नृग का उद्धार कैसे हुआ? राजा नृग की मोक्ष कथा, राजा नृग का उपाख्यान 
  86. उत्तरकाण्ड: राजा निमि की कथा, शाप से सम्बंधित राजा की कथा, राजा निमि कौन थे? राजा निमि की कहानी, विदेह राजा जनक Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  87. उत्तरकाण्ड: राजा ययाति की कथा, कौन थे राजा ययाति, राजा ययाति की कहानी, ययाति का यदु कुल को शाप Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  88. उत्तरकाण्ड: कुत्ते का न्याय, राम और कुत्ते की कहानी, भगवान राम से जब न्याय मांगने आया एक कुत्ता, रामायण का अनोखा किस्सा
  89. उत्तरकाण्ड: पूर्व राजाओं के यज्ञ-स्थल एवं लवकुश का जन्म, लव कुश का जन्म कहां पर हुआ था, लव कुश में बड़ा कौन है, वाल्मीकि आश्रम कहां है, च्यवन ऋषि का आगमन
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  94. उत्तरकाण्ड: राजा इल की कथा, जब पुरूष से स्त्री बन गये राजा ईल, राजा इल की कहानी (Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Raja Ill Ki Kahani, Raja Ill Ki Katha
  95. उत्तरकाण्ड: अश्वमेघ यज्ञ का अनुष्ठान रामायण, अश्वमेध यज्ञ क्या है? Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Ashvamedh Yagya Ka Anushthaan, Ashvamedh Yagya Kya Hai
  96. उत्तरकाण्ड: लव-कुश द्वारा रामायण गान, ‘हम कथा सुनाते’ लव-कुश के गीत, लव-कुश ने सुनाई राम कथा, लव कुश गीत, रामायण लव कुश कांड
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  99. उत्तरकाण्ड: लक्ष्मण का परित्याग, राम ने लक्ष्मण का परित्याग क्यों किया, राम द्वारा लक्ष्मण का परित्याग, लक्ष्मण द्वारा प्राण विसर्जन, लक्ष्मण की मृत्यु
  100. उत्तरकाण्ड: महाप्रयाण, लव-कुश का अभिषेक, संपूर्ण वाल्मीकि रामायण, Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Mahaprayan, Valmiki Ramayan in Hindi
Ganga janam katha

बालकाण्ड: गंगा-जन्म की कथा, गंगा की उत्पत्ति कथा, गंगा की उत्पत्ति कहां से हुई, गंगा की कहानी, गंगा की कथा, गंगा किसकी पुत्री थी, गंगा का जन्म कैसे हुआ, गंगा के कितने पति थे (Sampurna Ramayan Katha Bal Kand- Ganga Janam Katha, Ganga Katha, Ganga Ki Utpatti Kahan Se Hui, Ganga Maiya Ki Kahani, Ganga Maiya)

संपूर्ण रामायण कथा बालकाण्ड: गंगा-जन्म की कथा, गंगा की उत्पत्ति कथा, गंगा की उत्पत्ति कहां से हुई, गंगा की कहानी, गंगा की कथा, गंगा किसकी पुत्री थी, गंगा का जन्म कैसे हुआ, गंगा के कितने पति थे (Sampurna Ramayan Katha Bal Kand- Ganga Janam Katha, Ganga Katha, Ganga Ki Utpatti Kahan Se Hui, Ganga Maiya Ki Kahani, Ganga Maiya)

गंगा-जन्म की कथा, गंगा की उत्पत्ति कथा
ऋषि विश्वामित्र ने कहा, वत्स राम! तुम्हारी ही अयोध्यापुरी में सगर नाम के एक राजा थे। वे पुत्रहीन थे। सगर की पटरानी का नाम केशिनी था जो कि विदर्भ प्रान्त के राजा की पुत्री थी। केशिनी रूपवती, धर्मात्मा और सत्यपरायण थी। सगर की दूसरी रानी का नाम था सुमति जो राजा अरिष्टनेमि की कन्या थी। महाराज सगर अपनी दोनों रानियों को लेकर हिमालय के भृगुप्रस्रवण नामक प्रान्त में गए और पुत्र प्राप्ति के लिये तपस्या करने लगे। उनकी तपस्या से महर्षि भृगु प्रसन्न हुए और उन्हें वर दिया कि तुम्हें अनेक पुत्रों की प्राप्ति होगी। दोनों रानियों में से एक का केवल एक ही पुत्र होगा जो कि वंश को बढ़ायेगा और दूसरी के साठ हजार पुत्र होंगे। कौन सी रानी कितने पुत्र चाहती है इसका निर्णय वे स्वयं आपस में मिलकर कर लें। केशिनी ने वंश को बढ़ाने वाले एक पुत्र की कामना की और गरुड़ की भगिनी सुमति ने साठ हजार बलवान पुत्रों की।

कुछ काल के पश्चात् रानी केशिनी ने असमञ्ज नामक पुत्र को जन्म दिया। रानी सुमति के गर्भ से एक तूंबा निकला जिसे फोड़ने पर छोटे छोटे साठ हजार पुत्र निकले। उन सबका पालन पोषण घी के घड़ों में रखकर किया गया।* कालचक्र व्यतीत होते गया और सभी राजकुमार युवा हो गये। सगर का ज्येष्ठ पुत्र असमञ्ज बड़ा दुराचारी था और उसे नगर के बालकों को सरयू नदी में फेंक कर उन्हें डूबते हुये देखने में बड़ा आनन्द आता था। इस दुराचारी पुत्र से दुःखी होकर सगर ने उसे अपने राज्य से निर्वासित कर दिया। असमञ्ज के अंशुमान नाम का एक पुत्र था। अंशुमान अत्यंत सदाचारी और पराक्रमी था। एक दिन राजा सगर के मन में अश्वमेघ यज्ञ करवाने का विचार आया। शीघ्र ही उन्होंने अपने इस विचार को कार्यरूप में परिणित कर दिया।

राम ने ऋषि विश्वामित्र से कहा, गुरुदेव! मेरी रुचि अपने पूर्वज सगर की यज्ञ गाथा को विस्तारपूर्वक सुनने में है। अतः कृपा करके इस वृतान्त को पूरा पूरा सुनाइये। राम के इस प्रकार से जिज्ञासा व्यक्त करने पर ऋषि विश्वामित्र प्रसन्न होकर कहने लगे, राजा सगर ने हिमालय एवं विन्ध्याचल के बीच की हरीतिमायुक्त भूमि पर एक विशाल यज्ञ मण्डप का निर्माण करवाया। फिर अश्वमेघ यज्ञ के लिये श्यामकर्ण घोड़ा छोड़कर उसकी रक्षा के लिये पराक्रमी अंशुमान को सेना के साथ उसके पीछे पीछे भेज दिया। यज्ञ की सम्भावित सफलता के परिणाम की आशंका से भयभीत होकर इन्द्र ने एक राक्षस का रूप धारण किया और उस घोड़े को चुरा लिया। घोड़े की चोरी की सूचना पाकर सगर ने अपने साठ हजार पुत्रों को आज्ञा दी कि घोड़ा चुराने वाले को पकड़कर या मारकर घोड़ा वापस लाओ। पूरी पृथ्वी में खोजने पर भी जब घोड़ा नहीं मिला तो, इस आशंका से कि किसीने घोड़े को तहखाने में न छुपा रखा हो, सगर के पुत्रों ने सम्पूर्ण पृथ्वी को खोदना आरम्भ कर दिया। उनके इस कार्य से असंख्य भूमितल निवासी प्राणी मारे गये। खोदते खोदते वे पाताल तक जा पहुँचे। Sampurna Ramayan katha bal kand- Ganga janam katha, Ganga katha, Ganga ki utpatti kahan se hui, Ganga maiya ki kahani, Ganga maiya

उनके इस नृशंस कृत्य के विषय में देवताओं ने ब्रह्मा जी को बताया तो ब्रह्मा जी ने कहा कि ये राजकुमार क्रोध एवं मद में अन्धे होकर ऐसा कर रहे हैं। पृथ्वी की रक्षा कर दायित्व कपिल ऋषि पर है इसलिये वे इस विषय में अवश्य ही कुछ न कुछ करेंगे। पूरी पृथ्वी को खोदने के बाद भी जब घोड़ा और उसको चुराने वाला चोर नहीं मिला तो निराश होकर राजकुमारों ने इसकी सूचना अपने पिता को दी। क्रुद्ध सगर ने आदेश दिया कि घोड़े को पाताल में जाकर ढूंढो। पाताल में घोड़े को खोजते खोजते वे सनातन वसुदेव कपिल के आश्रम में पहुँच गये। उन्होंने देखा कपिलदेव तपस्या में लीन हैं और उन्हीं के पास यज्ञ का वह घोड़ा बँधा हुआ है। उन्होंने कपिल मुनि को घोड़े का चोर समझकर उनके लिये अनेक दुर्वचन कहे और उन्हें मारने के लिये दौड़े। सगर के इन कुकृत्यों से कपिल मुनि की समाधि भंग हो गई। उन्होंने क्रुद्ध होकर सगर के उन सब पुत्रों को भस्म कर दिया।

गंगा-जन्म की कथा (2) – बालकाण्ड
ऋषि विश्वामित्र ने आगे कहा, बहुत दिनों तक अपने पुत्रों की सूचना नहीं मिलने पर महाराज सगर ने अपने तेजस्वी पौत्र अंशुमान को अपने पुत्रों तथा घोड़े का पता लगाने के लिये आदेश दिया। वीर अंशुमान शस्त्रास्त्रों से सुसज्जित होकर अपने चाचाओं के द्वारा बनाए गए मार्ग से पाताल की ओर चल पड़ा। मार्ग में मिलने वाले पूजनीय ऋषि मुनियों का यथोचित सम्मान करके अपने लक्ष्य के विषय में पूछता हुआ उस स्थान तक पहुँच गया जहाँ पर उसके चाचाओं के भस्मीभूत शरीरों की राख पड़ी थी और पास ही यज्ञ का घोड़ा चर रहा था। अपने चाचाओं के भस्मीभूत शरीरों को देखकर उसे अत्यन्त क्षोभ हुआ। उसने उनका तर्पण करने के लिये जलाशय की खोज की किन्तु उसे कोई भी जलाशय दृष्टिगत नहीं हुआ। तभी उसकी दृष्टि अपने चाचाओं के मामा गरुड़ पर पड़ी।

उन्हें सादर प्रणाम करके अंशुमान ने पूछा कि हे पितामह! मैं अपने चाचाओं का तर्पण करना चाहता हूँ। समीप में यदि कोई सरोवर हो तो कृपा करके उसका पता बताइये। यदि आपको इनकी मृत्यु के विषय में कुछ जानकारी है तो वह भी मुझे बताने की कृपा करें। गरुड़ जी ने बताया कि किस प्रकार किस प्रकार से इन्द्र ने घोड़े को चुरा कर कपिल मुनि के पास छोड़ दिया था और उसके चाचाओं ने कपिल मुनि के साथ उद्दण्ड व्यवहार किया था जिसके कारण कपिल मुनि ने उन सबको भस्म कर दिया। इसके पश्चात् गरुड जी ने अंशुमान से कहा कि ये सब अलौकिक शक्ति वाले दिव्य पुरुष के द्वारा भस्म किये गये हैं अतः लौकिक जल से तर्पण करने से इनका उद्धार नहीं होगा, केवल हिमालय की ज्येष्ठ पुत्री गंगा के जल से ही तर्पण करने पर इनका उद्धार सम्भव है। अब तुम घोड़े को लेकर वापस चले जाओ जिससे कि तुम्हारे पितामह का यज्ञ पूर्ण हो सके। गरुड़ जी की आज्ञानुसार अंशुमान वापस अयोध्या पहुँचे और अपने पितामह को सारा वृत्तान्त सुनाया। महाराज सगर ने दुःखी मन से यज्ञ पूरा किया। वे अपने पुत्रों के उद्धार करने के लिये गंगा को पृथ्वी पर लाना चाहते थे पर ऐसा करने के लिये उन्हें कोई भी युक्ति न सूझी। Sampurna Ramayan katha bal kand- Ganga janam katha, Ganga katha, Ganga ki utpatti kahan se hui, Ganga maiya ki kahani, Ganga maiya

थोड़ा रुककर ऋषि विश्वामित्र कहा, महाराज सगर के देहान्त के पश्चात् अंशुमान बड़ी न्यायप्रियता के साथ शासन करने लगे। अंशुमान के परम प्रतापी पुत्र दिलीप हुये। दिलीप के वयस्क हो जाने पर अंशुमान दिलीप को राज्य का भार सौंप कर हिमालय की कन्दराओं में जाकर गंगा को प्रसन्न करने के लिये तपस्या करने लगे किन्तु उन्हें सफलता नहीं प्राप्त हो पाई और वे स्वर्ग सिधार गए। इधर जब राजा दिलीप का धर्मनिष्ठ पुत्र भगीरथ बड़ा हुआ तो उसे राज्य का भार सौंपकर दिलीप भी गंगा को पृथ्वी पर लाने के लिये तपस्या करने चले गये। पर उन्हें भी सफलता नहीं मिली। भगीरथ बड़े प्रजावत्सल नरेश थे किन्तु उनकी कोई सन्तान नहीं हुई। इस पर वे अपने राज्य का भार मन्त्रियों को सौंपकर स्वयं गंगावतरण के लिये गोकर्ण नामक तीर्थ पर जाकर कठोर तपस्या करने लगे। उनकी अभूतपूर्व तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उन्हें वर माँगने के लिये कहा। भगीरथ ने ब्रह्मा जी से कहा कि हे प्रभो! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे यह वर दीजिये कि सगर के पुत्रों को मेरे प्रयत्नों से गंगा का जल प्राप्त हो जिससे कि उनका उद्धार हो सके। इसके अतिरिक्त मुझे सन्तान प्राप्ति का भी वर दीजिये ताकि इक्ष्वाकु वंश नष्ट न हो। ब्रह्मा जी ने कहा कि सन्तान का तेरा मनोरथ शीघ्र ही पूर्ण होगा, किन्तु तुम्हारे माँगे गये प्रथम वरदान को देने में कठिनाई यह है कि जब गंगा जी वेग के साथ पृथ्वी पर अवतरित होंगीं तो उनके वेग को पृथ्वी संभाल नहीं सकेगी। गंगा जी के वेग को संभालने की क्षमता महादेव जी के अतिरिक्त किसी में भी नहीं है। इसके लिये तुम्हें महादेव जी को प्रसन्न करना होगा। इतना कह कर ब्रह्मा जी अपने लोक को चले गये।

भगीरथ ने साहस नहीं छोड़ा। वे एक वर्ष तक पैर के अँगूठे के सहारे खड़े होकर महादेव जी की तपस्या करते रहे। केवल वायु के अतिरिक्त उन्होंने किसी अन्य वस्तु का भक्षण नहीं किया। अन्त में इस महान भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव जी ने भगीरथ को दर्शन देकर कहा कि हे भक्तश्रेष्ठ! हम तेरी मनोकामना पूरी करने के लिये गंगा जी को अपने मस्तक पर धारण करेंगे। इसकी सूचना पाकर विवश होकर गंगा जी को सुरलोक का परित्याग करना पड़ा। उस समय वे सुरलोक से कहीं जाना नहीं चाहती थीं, इसलिये वे यह विचार करके कि मैं अपने प्रचण्ड वेग से शिव जी को बहा कर पाताल लोक ले जाऊँगी वे भयानक वेग से शिव जी के सिर पर अवतरित हुईं। गंगा का यह अहंकार महादेव जी से छुपा न रहा। महादेव जी ने गंगा की वेगवती धाराओं को अपने जटाजूट में उलझा लिया। गंगा जी अपने समस्त प्रयत्नों के बाद भी महादेव जी के जटाओं से बाहर न निकल सकीं। गंगा जी को इस प्रकार शिव जी की जटाओं में विलीन होते देख भगीरथ ने फिर शंकर जी की तपस्या की। भगीरथ के इस तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शंकर ने गंगा जी को हिमालय पर्वत पर स्थित बिन्दुसर में छोड़ा। छूटते ही गंगा जी सात धाराओं में बँट गईं।

गंगा जी की तीन धाराएँ ह्लादिनी, पावनी और नलिनी पूर्व की ओर प्रवाहित हुईं। सुचक्षु, सीता और सिन्धु नाम की तीन धाराएँ पश्चिम की ओर बहीं और सातवीं धारा महाराज भगीरथ के पीछे पीछे चली। जिधर जिधर भगीरथ जाते थे, उधर उधर ही गंगा जी जाती थीं। स्थान स्थान पर देव, यक्ष, किन्नर, ऋषि-मुनि आदि उनके स्वागत के लिये एकत्रित हो रहे थे। जो भी उस जल का स्पर्श करता था, भव-बाधाओं से मुक्त हो जाता था। चलते चलते गंगा जी उस स्थान पर पहुँचीं जहाँ ऋषि जह्नु यज्ञ कर रहे थे। गंगा जी अपने वेग से उनके यज्ञशाला को सम्पूर्ण सामग्री के साथ बहाकर ले जाने लगीं। इससे ऋषि को बहुत क्रोध आया और उन्होंने क्रुद्ध होकर गंगा का सारा जल पी लिया। यह देख कर समस्त ऋषि मुनियों को बड़ा विस्मय हुआ और वे गंगा जी को मुक्त करने के लिये उनकी स्तुति करने लगे। उनकी स्तुति से प्रसन्न होकर जह्नु ऋषि ने गंगा जी को अपने कानों से निकाल दिया और उन्हें अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार कर लिया। तब से गंगा जाह्नवी कहलाने लगीँ। इसके पश्चात् वे भगीरथ के पीछे चलते चलते समुद्र तक पहुँच गईं और वहाँ से सगर के पुत्रों का उद्धार करने के लिये रसातल में चली गईं। उनके जल के स्पर्श से भस्मीभूत हुये सगर के पुत्र निष्पाप होकर स्वर्ग गये। उस दिन से गंगा के तीन नाम हुये, त्रिपथगा, जाह्नवी और भागीरथी। Sampurna Ramayan katha bal kand- Ganga janam katha, Ganga katha, Ganga ki utpatti kahan se hui, Ganga maiya ki kahani, Ganga maiya

हे रामचन्द्र! कपिल आश्रम में गंगा जी के पहुँचने के पश्चात् ब्रह्मा जी ने प्रसन्न होकर भगीरथ को वरदान दिया कि तेरे पुण्य के प्रताप से प्राप्त इस गंगाजल से जो भी मनुष्य स्नान करेगा या इसका पान करेगा, वह सब प्रकार के दुःखो से रहित होकर अन्त में स्वर्ग को प्रस्थान करेगा। जब तक पृथ्वी मण्डल में गंगा जी प्रवाहित होती रहेंगी तब तक उसका नाम भागीरथी कहलायेगा और सम्पूर्ण भूमण्डल में तेरी कीर्ति अक्षुण्ण रूप से फैलती रहेगी। सभी लोग श्रद्धा के साथ तेरा स्मरण करेंगे। यह कह कर ब्रह्मा जी अपने लोक को लौट गये। भगीरथ ने पुनः अपने पितरों को जलांजलि दी।
कथा समाप्त होने पर वे सब विश्राम करने चले गये।

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  36. अयोध्याकाण्ड: दशरथ की अन्त्येष्टि, दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार (Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Dasharatha’s Funeral
  37. अयोध्याकाण्ड: श्री राम-भरत मिलाप कथा, राम और भरत का मिलन, चित्रकूट में भरत मिलाप की कहानी, राम-भरत मिलाप संवाद, श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटे भरत
  38. अयोध्याकाण्ड: महर्षि अत्रि का आश्रम, अत्रि ऋषि के आश्रम पहुंचे श्री राम Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Maharishi Atri Ka Ashram
  39. अरण्यकाण्ड: दण्डक वन में विराध वध, श्री राम द्वारा विराध राक्षस का वध, भगवान श्री राम ने किया दंडकवन के सबसे बड़े राक्षस विराध का वध
  40. अरण्यकाण्ड: महर्षि शरभंग का आश्रम, महर्षि शरभंग, शरभंग ऋषि की कथा, सीता की शंका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  41. अरण्यकाण्ड: अगस्त्य का आश्रम, महर्षि अगस्त्य मुनि, श्रीराम और अगस्त मुनि का मिलन स्थल सिद्धनाथ आश्रम Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  42. अरण्यकाण्ड: पंचवटी में आश्रम, श्री राम-लक्ष्मण एवं सीता पंचवटी आश्रम में कैसे पहुँचे?, पंचवटी किस राज्य में है, पंचवटी की कहानी, पंचवटी क्या है, पंचवटी कहां है
  43. अरण्यकाण्ड: रावण की बहन शूर्पणखा, श्री राम का खर-दूषण से युद्ध, खर-दूषण वध, खर-दूषण का वध किसने किया? Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  44. अरण्यकाण्ड: सीता की कथा और स्वर्ण मृग, श्री राम और स्वर्ण-मृग प्रसंग, मारीच का स्वर्णमृग रूप, सीता हरण, रामायण सीता हरण की कहानी, सीता हरण कैसे हुआ
  45. संपूर्ण रामायण कथा अरण्यकाण्ड: जटायु वध, रावण द्वारा गिद्धराज जटायु वध, सीता हरण व जटायु वध, रावण जटायु युद्ध, जटायु प्रसंग, जटायु कौन था
  46. अरण्यकाण्ड: रावण-सीता संवाद, रावण की माता सीता को धमकी, रावण और सीता संवाद अशोक वाटिका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  47. अरण्यकाण्ड: राम की वापसी और विलाप, श्री राम और लक्ष्मण विलाप, सीता हरण पर श्री राम जी के द्वारा विलाप, जटायु की मृत्यु, पक्षीराज जटायु की मृत्यु कैसे हुई
  48. अरण्यकाण्ड: कबन्ध का वध, राम द्वारा कबन्ध राक्षस का वध, रामायण में कबंध राक्षस, कबंध कौन था Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  49. अरण्यकाण्ड: शबरी का आश्रम, भगवान राम शबरी के आश्रम क्यों गए, श्री राम शबरी के आश्रम कैसे पहुँचे? शबरी के झूठे बेर प्रभु राम ने खाएं, शबरी के बेर की कहानी
  50. किष्किन्धाकाण्ड: राम हनुमान भेंट, श्रीराम की हनुमान से पहली मुलाकात कहां और कब हुई, राम हनुमान मिलन की कहानी
  51. किष्किन्धाकाण्ड: राम-सुग्रीव मैत्री, राम-सुग्रीव मित्रता, श्री राम और सुग्रीव के मित्रता की कहानी, राम-सुग्रीव वार्तालाप, राम-सुग्रीव संवाद
  52. किष्किन्धाकाण्ड: बाली सुग्रीव युध्द वालि-वध, बाली का वध, राम द्वारा बाली का वध, बाली-राम संवाद, तारा का विलाप
  53. किष्किन्धाकाण्ड: सुग्रीव का अभिषेक, बाली वध के बाद सुग्रीव का राज्याभिषेक (Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  54. किष्किन्धाकाण्ड: हनुमान-सुग्रीव संवाद, हनुमान और सुग्रीव की मित्रता, लक्ष्मण-सुग्रीव संवाद, राम का सुग्रीव पर कोप, रामायण सुग्रीव मित्रता
  55. किष्किन्धाकाण्ड: माता सीता की खोज, माता सीता की खोज में निकले राम, राम द्वारा हनुमान को मुद्रिका देना, माता सीता की खोज में निकले हनुमान
  56. किष्किन्धाकाण्ड: जाम्बवन्त द्वारा हनुमान को प्रेरणा, जाम्बवन्त के प्रेरक वचन Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  57. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का सागर पार करना, हनुमान जी ने समुद्र कैसे पार किया, हनुमान जी की लंका यात्रा, हनुमान जी का लंका में प्रवेश
  58. सुन्दरकाण्ड: लंका में सीता की खोज, माता सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान, सीता से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद
  59. सुन्दरकाण्ड: रावण -सीता संवाद, अशोक वाटिका में रावण संवाद, रावण सीता अशोक वाटिका, रावण की सीता को धमकी
  60. सुन्दरकाण्ड: जानकी राक्षसी घेरे में, माता सीता राक्षसी घेरे में, पति राम के वियोग में व्याकुल सीता, अशोक वाटिका में हनुमान जी किस वृक्ष पर बैठे थे
  61. सुन्दरकाण्ड: हनुमान सीता भेंट, सीता जी से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद, हनुमान का सीता को मुद्रिका देना
  62. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का विशाल रूप, हनुमान जी का पंचमुखी अवतार, हनुमान जी ने क्यों धारण किया पंचमुखी रूप, हनुमान के साथ क्यों नहीं गईं सीता, बजरंगबली का विराट रूप
  63. सुन्दरकाण्ड: हनुमान ने उजाड़ी अशोक वाटिका, हनुमान जी ने रावण की अशोक वाटिका को किया तहस-नहस, अशोक वाटिका विध्वंस, हनुमान राक्षस युद्ध
  64. सुन्दरकाण्ड: मेधनाद हनुमान युद्ध, लंका में हनुमान जी और मेघनाद का भयंकर युद्ध, मेघनाद ने हनुमान पर की बाणों की वर्षा
  65. सुन्दरकाण्ड: रावण के दरबार में हनुमान, रावण हनुमान संवाद, हनुमान-रावण की लड़ाई, लंका दहन, हनुमान जी द्वारा लंका दहन, हनुमान ने सोने की लंका में लगाई आग
  66. सुन्दरकाण्ड: माता सीता का संदेश देना, हनुमान के द्वारा राम सीता का संदेश, हनुमान ने राम को दिया माता सीता का संदेश
  67. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): समुद्र पार करने की चिन्ता, वानर सेना का प्रस्थान, वानर सेना का सेनापति कौन था, वानर सेना रामायण, वानर सेना का गठन
  68. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लंका में राक्षसी मन्त्रणा, विभीषण ने रावण को किस प्रकार समझाया, विभीषण का निष्कासन, विभीषण का श्री राम की शरण में आना
  69. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सेतु बन्धन, राम सेतु पुल, क्यों नहीं डूबे रामसेतु के पत्‍थर, राम सेतु का निर्माण कैसे हुआ, नल-नील द्वारा पुल बाँधना
  70. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सीता के साथ छल, रावण का छल, रावण ने छल से किया माता सीता का हरण Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  71. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अंगद रावण दरबार में, अंगद ने तोड़ा रावण का घमंड, रावण की सभा में अंगद-रावण संवाद, रावण की सभा में अंगद का पैर जमाना
  72. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): राम लक्ष्मण बन्धन में, नागपाश में राम लक्ष्मण, धूम्राक्ष और वज्रदंष्ट्र का वध, राक्षस सेनापति धूम्राक्ष का वध, अकम्पन का वध, प्रहस्त का वध
  73. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण कुम्भकर्ण संवाद, कुम्भकर्ण वध, कुंभकरण का वध किसने किया, कुम्भकर्ण की कहानी Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  74. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): त्रिशिरा, अतिकाय आदि का वध, अतिकाय का वध, मायासीता का वध, रावण पुत्र मेघनाद (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  75. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मेघनाद युद्ध कथा, मेघनाथ लक्ष्मण का अंतिम युद्ध, मेघनाद वध, मेघनाथ को कौन मार सकता था? लक्ष्मण ने मेघनाद को कैसे मारा
  76. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मूर्छित, मेघनाद ने ब्रह्म शक्ति से लक्ष्मण को किया मूर्छित, लक्ष्मण मूर्छित होने पर राम विलाप, संजीवनी बूटी लेकर आए हनुमान
  77. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण का युद्ध के लिये प्रस्थान, श्रीराम-रावण का युद्ध, राम और रावण के बीच युद्ध, रावण वध, मन्दोदरी का विलाप 
  78. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): विभीषण का राज्याभिषेक, रावण के बाद विभीषण बना लंका का राजा (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand Lanka Kand)
  79. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): माता सीता की अग्नि परीक्षा, माता सीता ने अग्नि परीक्षा क्यों दी थी? माता सीता ने अग्नि परीक्षा कैसे दी?, माता सीता की अग्नि परीक्षा कहां हुई थी? 
  80. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अयोध्या को प्रस्थान, राम अयोध्या कब लौटे थे, अयोध्या में राम का स्वागत, राम का अयोध्या वापस आना, वनवास से लौटे राम-लक्ष्मण और सीता
  81. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): भरत मिलाप, राम और भरत का मिलन, राम भरत संवाद, राम का राज्याभिषेक Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  82. उत्तरकाण्ड: रावण के पूर्व के राक्षसों के विषय में, रावण के जन्म की कथा, रावण का जन्म कैसे हुआ, रावण का जन्म कहां हुआ, रावण के कितने भाई थे
  83. उत्तरकाण्ड: हनुमान के जन्म की कथा, रामभक्त हनुमान के जन्म की कहानी, हनुमान की कथा, हनुमान जन्म लीला, पवनपुत्र हनुमान का जन्म कैसे हुआ
  84. उत्तरकाण्ड: अभ्यागतों की विदाई, प्रवासियों में अशुभ चर्चा, सीता का निर्वासन, राम ने सीता का त्याग क्यों किया, राम ने सीता को वनवास क्यों दिया
  85. उत्तरकाण्ड: राजा नृग की कथा, सूर्यवंशी राजा नृग की कथा, राजा नृग कुएँ का गिरगिट, राजा नृग का उद्धार कैसे हुआ? राजा नृग की मोक्ष कथा, राजा नृग का उपाख्यान 
  86. उत्तरकाण्ड: राजा निमि की कथा, शाप से सम्बंधित राजा की कथा, राजा निमि कौन थे? राजा निमि की कहानी, विदेह राजा जनक Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  87. उत्तरकाण्ड: राजा ययाति की कथा, कौन थे राजा ययाति, राजा ययाति की कहानी, ययाति का यदु कुल को शाप Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  88. उत्तरकाण्ड: कुत्ते का न्याय, राम और कुत्ते की कहानी, भगवान राम से जब न्याय मांगने आया एक कुत्ता, रामायण का अनोखा किस्सा
  89. उत्तरकाण्ड: पूर्व राजाओं के यज्ञ-स्थल एवं लवकुश का जन्म, लव कुश का जन्म कहां पर हुआ था, लव कुश में बड़ा कौन है, वाल्मीकि आश्रम कहां है, च्यवन ऋषि का आगमन
  90. उत्तरकाण्ड: ब्राह्मण बालक की मृत्यु, शंबूक ऋषि की हत्या किसने की, शंबुक कथा, शंबूक ऋषि का वध, राम ने क्यों की शंबूक की हत्या Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  91. उत्तरकाण्ड: राजा श्वेत क्यों खाया करते थे अपने ही शरीर का मांस, राजा श्वेत की कहानी, राजा श्वेत की कथा Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Raja Swet Ki Katha
  92. उत्तरकाण्ड: राजा दण्ड की कथा, दण्डकारण्य जंगल के श्रापित होने की कथा, शुक्राचार्य ने राजा दण्ड को दिया श्राप
  93. उत्तरकाण्ड: वृत्रासुर की कथा, वृत्रासुर का वध, वृत्रासुर कौन था? इंद्र द्वारा वृत्रासुर का वध Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Vritrasura Ki Katha
  94. उत्तरकाण्ड: राजा इल की कथा, जब पुरूष से स्त्री बन गये राजा ईल, राजा इल की कहानी (Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Raja Ill Ki Kahani, Raja Ill Ki Katha
  95. उत्तरकाण्ड: अश्वमेघ यज्ञ का अनुष्ठान रामायण, अश्वमेध यज्ञ क्या है? Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Ashvamedh Yagya Ka Anushthaan, Ashvamedh Yagya Kya Hai
  96. उत्तरकाण्ड: लव-कुश द्वारा रामायण गान, ‘हम कथा सुनाते’ लव-कुश के गीत, लव-कुश ने सुनाई राम कथा, लव कुश गीत, रामायण लव कुश कांड
  97. उत्तरकाण्ड: सीता का रसातल प्रवेश, सीता मैया धरती में क्यों समाई, सीता पृथ्वी समाधि, सीता जी का धरती में समाना, सीता का धरती में प्रवेश करना
  98. उत्तरकाण्ड: भरत व लक्ष्मण के पुत्रों के लिये राज्य व्यवस्था, वाल्मीकि रामायण (Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Bharat Aur Lakshman Ke Putron Ke Liye Rajya
  99. उत्तरकाण्ड: लक्ष्मण का परित्याग, राम ने लक्ष्मण का परित्याग क्यों किया, राम द्वारा लक्ष्मण का परित्याग, लक्ष्मण द्वारा प्राण विसर्जन, लक्ष्मण की मृत्यु
  100. उत्तरकाण्ड: महाप्रयाण, लव-कुश का अभिषेक, संपूर्ण वाल्मीकि रामायण, Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Mahaprayan, Valmiki Ramayan in Hindi
janakpur me agman

बालकाण्ड: गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचे राम व लक्ष्मण, जनकपुरी में राम का आगमन, श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र का जनकपुर आगमन (Sampurna Ramayan Katha Bal Kand- Ram and Lakshman Reached Janakpuri With Guru Vishwamitra, Vishwamitra Ke Saath Janakpuri Pahunche Ram Lakshman, Janakpur Mein Ram Ka Agman)

संपूर्ण रामायण कथा बालकाण्ड: गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचे राम व लक्ष्मण, जनकपुरी में राम का आगमन, श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र का जनकपुर आगमन (Sampurna Ramayan Katha Bal Kand- Ram and Lakshman Reached Janakpuri With Guru Vishwamitra, Vishwamitra Ke Saath Janakpuri Pahunche Ram Lakshman, Janakpur Mein Ram Ka Agman)

गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचे राम व लक्ष्मण, जनकपुरी में राम का आगमन
ऋषि विश्वामित्र ने अपनी मण्डली के साथ प्रातःकाल ही जनकपुरी के लिए प्रस्थान किया। चलते चलते वे विशाला नगरी में पहुँचे। इस भव्य नगरी में सुन्दर मन्दिर और विशाल अट्टालिकायें शोभायमान हो रही थीं। वहाँ कि बड़ी बड़ी दुकानें, अमूल्य आभूषणों को धारण किये हुये स्त्री-पुरुष आदि नगर की सम्पन्नता का परिचय दे रहे थे। चौड़ी-चौड़ी और साफ सुथरी सड़कों को देख कर ज्ञात होता था कि नगर के रख-रखाव और व्यवस्था बहुत ही सुन्दर और प्रशंसनीय थी।

विशाला नगरी को पार कर के वे सभी मिथिलापुरी पहुँचे। उन्होंने देखा कि नगर के बाहर सुरम्य प्रदेश में एक मनोहर यज्ञशाला का निर्माण किया गया था और वहाँ पर विभिन्न प्रान्तों से आये हुये वेदपाठी ब्राह्मण मधुर ध्वनि में वेद मन्त्रों का सस्वर पाठ कर रहे थे। शोभायुक्त यज्ञ मण्डप अत्यन्त आकर्षक था जिसे देख कर राम ने कहा, हे गुरुदेव! इस यज्ञशाला की छटा मेरे मन को मोह रही है और विद्वान ब्राह्मणों के आनन्द दायक मन्त्रोच्चार को सुन कर मैं पुलकित हो रहा हूँ। कृपा करके इस यज्ञ मण्डप के समीप ही हम लोगों के ठहरने की व्यवस्था करें ताकि वेद मन्त्रों की ध्वनि हमारे मन मानस को निरन्तर पवित्र करती रहे।

जब राजा जनक को सूचना मिली कि ऋषि विश्वामित्र अपनी शिष्यों तथा अन्य ऋषि-मुनियों के साथ जनकपुरी में पधारे हैं तो उनके दर्शन के लिये वे राजपुरोहित शतानन्द को लेकर यज्ञशाला पहुँचे। पाद्य, अर्ध्य आदि से विश्वामित्र जी का पूजन करके राजा जनक बोले, हे महर्षि! आपने यहाँ पधार कर और दर्शन देकर हम लोगों को कृतार्थ कर दिया है। आपकी चरणधूलि से यह मिथिला नगरी पवित्र हो गई है। फिर राम और लक्ष्मण की ओर देखकर बोले, हे मुनिवर! आपके साथ ये परम तेजस्वी सिंह-शावक जैसे अनुपम सौन्दर्यशाली दोनों कुमार कौन हैं? इनकी वीरतापूर्ण आकृति देख कर प्रतीत होता है मानो ये किसी राजकुल के दीपक हैं। ऐसे सुन्दर, सुदर्शन कुमारों की उपस्थिति से यह यज्ञशाला वैसी ही शोभायुक्त हो गई है जैसे प्रातःकाल भगवान भुवन-भास्कर के उदय होने पर प्राची दिशा सौन्दर्य से परिपूर्ण हो जाती है। कृपा करके अवगत कराइये कि ये कौन हैं? कहाँ से आये हैं? इनके पिता और कुल का नाम क्या है?

इस पर ऋषि विश्वामित्र ने राजा जनक से कहा, हे राजन्! ये दोनों बालक वास्तव में राजकुमार हैं। ये अयोध्या नरेश सूर्यवंशी राजा दशरथ के पुत्र रामचन्द्र और लक्ष्मण हैं। ये दोनों बड़े वीर और पराक्रमी हैं। इन्होंने सुबाहु, ताड़का आदि के साथ घोर युद्ध करके उनका नाश किया है। मारीच जैसे महाबली राक्षस को तो राम ने एक ही बाण से सौ योजन दूर समुद्र में फेंक दिया। अपने यज्ञ की रक्षा के लिये मैं इन्हें अयोध्यापति राजा दशरथ से माँगकर लाया था। मैंने इन्हें नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों की शिक्षा प्रदान की है। इनके प्रयत्नों से मेरा यज्ञ निर्विघ्न तथा सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। अपने सद्व्यवहार, विनम्रता एवं सौहार्द से इन्होंने आश्रम में रहने वाले समस्त ऋषि मुनियों का मन मोह लिया है। आपके इस महान धनुषयज्ञ का उत्सव दिखाने के लिये मैं इन्हें यहाँ लाया हूँ। इस वृतान्त को सुन कर राजा जनक बहुत प्रसन्न हुये और उन सबके ठहरने के लिये यथोचित व्यवस्था कर दिया।

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  9. संपूर्ण रामायण कथा बालकाण्ड : राम का जन्म , भगवान राम का जन्म कब हुआ , श्री राम जी का जन्म कब हुआ था, राम जी का जन्म कहाँ हुआ था, राम के जन्म की क्या कथा है.
  10. बालकाण्ड : विश्वामित्र का आगमन, ऋषि विश्वामित्र का आगमन, विश्वामित्र आगमन, विश्वामित्र ने राम को मांगा, विश्वामित्र का आश्रम कहां था, विश्वामित्र कौन थे.
  11. बालकाण्ड : कामदेव का आश्रम, कामेश्वर धाम, वाल्मीकि रामायण, राम और लक्ष्मण, ऋषि विश्वामित्र (Ramayana Balakand: Kamdev’s Ashram
  12. बालकाण्ड : ताड़का वध, राक्षसी ताड़का वध, ताड़का का वध कैसे हुआ, राम ने ताड़का का वध कैसे किया, ताड़का वध कहाँ हुआ था, ताड़का वन कहाँ है.
  13. बालकाण्ड : अलभ्य अस्त्रों का दान, विश्वामित्र द्वारा राम को अलभ्य अस्त्रों का दान, गुरु विश्वामित्र ने श्री राम को अस्त्र क्यों दिए? Vishvaamitra Dwara Ram Ko Alabhy Astron Ka Daan
  14. बालकाण्ड : महर्षि विश्वामित्र का आश्रम, सिद्धाश्रम, विश्वामित्र के आश्रम का नाम सिद्धाश्रम क्यों पड़ा? Sampoorn Ramayan Katha Bal Kand: Vishwamitra Ka Ashram
  15. बालकाण्ड: मारीच -सुबाहु का उत्पात, मारीच और सुबाहु वध, राम ने कैसे किया मारीच और सुबाहु का वध, मारीच और सुबाहु की माता का नाम क्या था?
  16. बालकाण्ड: धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, रामचंद्र का धनुष यज्ञ के लिये प्रस्थान, धनुष यज्ञ का उद्देश्य, सीता स्वयंवर के लिए धनुष यज्ञ, शिवधनुष की विशेषता
  17. बालकाण्ड: गंगा-जन्म की कथा, गंगा की उत्पत्ति कथा, गंगा की उत्पत्ति कहां से हुई, गंगा की कहानी, गंगा की कथा, गंगा किसकी पुत्री थी, गंगा का जन्म कैसे हुआ
  18. बालकाण्ड: गुरु विश्वामित्र के साथ जनकपुरी पहुंचे राम व लक्ष्मण, जनकपुरी में राम का आगमन, श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र का जनकपुर आगमन
  19. बालकाण्ड: अहिल्या की कथा – कौन थीं अहिल्या, क्यों और कैसे अहिल्या बन गई थी पत्थर? अहिल्या को श्राप क्यों मिला? अहिल्या को गौतम ऋषि ने दिया श्राप
  20. बालकाण्ड: विश्वामित्र का पूर्व चरित्र, विश्वामित्र का जीवन, विश्वामित्र की कहानी, विश्वामित्र के पिता का नाम, विश्वामित्र की संपूर्ण कथा, विश्वामित्र का जन्म कैसे हुआ
  21. बालकाण्ड: त्रिशंकु की स्वर्ग यात्रा, विश्वामित्र ने क्यों बनाया त्रिशंकु स्वर्ग, त्रिशंकु की कहानी, त्रिशंकु स्वर्ग क्या है और इसे किसने बनाया, त्रिशंकु को स्वर्ग जाने में किसने मदद की
  22. बालकाण्ड: ब्राह्मणत्व की प्राप्ति, विश्वामित्र को ब्राह्मणत्व की प्राप्ति, विश्वामित्र जी की कथा (Sampurna Ramayan Katha Bal Kand: Brahmanatva Ki Praapti
  23. बालकाण्ड: राम ने धनुष तोड़ा, धनुष यज्ञ राम विवाह, सीता स्वयंवर धनुष भंग, राम द्वारा धनुष भंग, शिवधनुष पिनाक की कथा, शिवधनुष की कथा
  24. बालकाण्ड: विवाह पूर्व की औपचारिकताएं, राम सीता विवाह, श्री राम सीता विवाह कथा, विवाह के समय राम और सीता की आयु कितनी थी,राम सीता की शादी
  25. बालकाण्ड: परशुराम जी का आगमन, राम का अयोध्या आगमन, विवाह के बाद राम सीता जी का अयोध्या में आगमन, पत्नियों सहित राजकुमारों का अयोध्या में आगमन
  26. अयोध्याकाण्ड: राम के राजतिलक की घोषणा, राजतिलक की तैयारी, श्री राम का राजतिलक, राम का राज्याभिषेक Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand
  27. अयोध्याकाण्ड: कैकेयी का कोपभवन में जाना, कैकेयी कोपभवन, कैकेयी क्रंदन, राजा दशरथ ने क्यों दिए कैकेयी को दो वरदान, कैकेयी द्वारा वरों की प्राप्ति
  28. अयोध्याकाण्ड: राम वनवास, राम को 14 वर्ष का वनवास, राम के वनवास जाने का कारण, राम 14 वर्ष के लिए वनवास क्यों गए, केकई ने राम को 14 वर्ष का वनवास क्यों दिया
  29. अयोध्याकाण्ड: तमसा नदी के तट पर राम लक्ष्मण और सीता, तमसा नदी कहां से निकली है, तमसा नदी किस जिले में है, तमसा नदी किस राज्य में है, टोंस नदी का इतिहास
  30. अयोध्याकाण्ड: भीलराज गुह, गंगा पार करना, केवट ने राम-लक्ष्मण और मां सीता को गंगा पार कराया, केवट और प्रभु श्रीराम का प्रसंग
  31. अयोध्याकाण्ड: राम, लक्ष्मण और सीता का चित्रकूट के लिये प्रस्थान, चित्रकूट की यात्रा, चित्रकूट धाम यात्रा, श्री रामजी के बनवास की कहानी
  32. अयोध्याकाण्ड: सुमन्त का अयोध्या लौटना, दशरथ सुमन्त संवाद (Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Sumant’s Return to Ayodhya
  33. अयोध्याकाण्ड: श्रवण कुमार की कथा, राजा दशरथ और श्रवण कुमार, श्रवण कुमार की कहानी, मातृ और पितृभक्त श्रवण कुमार
  34. अयोध्याकाण्ड: राजा दशरथ की मृत्यु, राजा दशरथ की मृत्यु कब हुई? अयोध्यापति राजा दशरथ की मृत्यु कैसे हुई? Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand
  35. अयोध्याकाण्ड: भरत-शत्रुघ्न की वापसी, भरत-शत्रुघ्न की अयोध्या वापसी, भरत कैकयी संवाद Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand
  36. अयोध्याकाण्ड: दशरथ की अन्त्येष्टि, दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार (Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Dasharatha’s Funeral
  37. अयोध्याकाण्ड: श्री राम-भरत मिलाप कथा, राम और भरत का मिलन, चित्रकूट में भरत मिलाप की कहानी, राम-भरत मिलाप संवाद, श्रीराम की चरण पादुका लेकर अयोध्या लौटे भरत
  38. अयोध्याकाण्ड: महर्षि अत्रि का आश्रम, अत्रि ऋषि के आश्रम पहुंचे श्री राम Sampurna Ramayan Katha Ayodhya Kand- Maharishi Atri Ka Ashram
  39. अरण्यकाण्ड: दण्डक वन में विराध वध, श्री राम द्वारा विराध राक्षस का वध, भगवान श्री राम ने किया दंडकवन के सबसे बड़े राक्षस विराध का वध
  40. अरण्यकाण्ड: महर्षि शरभंग का आश्रम, महर्षि शरभंग, शरभंग ऋषि की कथा, सीता की शंका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  41. अरण्यकाण्ड: अगस्त्य का आश्रम, महर्षि अगस्त्य मुनि, श्रीराम और अगस्त मुनि का मिलन स्थल सिद्धनाथ आश्रम Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  42. अरण्यकाण्ड: पंचवटी में आश्रम, श्री राम-लक्ष्मण एवं सीता पंचवटी आश्रम में कैसे पहुँचे?, पंचवटी किस राज्य में है, पंचवटी की कहानी, पंचवटी क्या है, पंचवटी कहां है
  43. अरण्यकाण्ड: रावण की बहन शूर्पणखा, श्री राम का खर-दूषण से युद्ध, खर-दूषण वध, खर-दूषण का वध किसने किया? Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  44. अरण्यकाण्ड: सीता की कथा और स्वर्ण मृग, श्री राम और स्वर्ण-मृग प्रसंग, मारीच का स्वर्णमृग रूप, सीता हरण, रामायण सीता हरण की कहानी, सीता हरण कैसे हुआ
  45. संपूर्ण रामायण कथा अरण्यकाण्ड: जटायु वध, रावण द्वारा गिद्धराज जटायु वध, सीता हरण व जटायु वध, रावण जटायु युद्ध, जटायु प्रसंग, जटायु कौन था
  46. अरण्यकाण्ड: रावण-सीता संवाद, रावण की माता सीता को धमकी, रावण और सीता संवाद अशोक वाटिका Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  47. अरण्यकाण्ड: राम की वापसी और विलाप, श्री राम और लक्ष्मण विलाप, सीता हरण पर श्री राम जी के द्वारा विलाप, जटायु की मृत्यु, पक्षीराज जटायु की मृत्यु कैसे हुई
  48. अरण्यकाण्ड: कबन्ध का वध, राम द्वारा कबन्ध राक्षस का वध, रामायण में कबंध राक्षस, कबंध कौन था Sampurna Ramayan Katha Aranyakaand
  49. अरण्यकाण्ड: शबरी का आश्रम, भगवान राम शबरी के आश्रम क्यों गए, श्री राम शबरी के आश्रम कैसे पहुँचे? शबरी के झूठे बेर प्रभु राम ने खाएं, शबरी के बेर की कहानी
  50. किष्किन्धाकाण्ड: राम हनुमान भेंट, श्रीराम की हनुमान से पहली मुलाकात कहां और कब हुई, राम हनुमान मिलन की कहानी
  51. किष्किन्धाकाण्ड: राम-सुग्रीव मैत्री, राम-सुग्रीव मित्रता, श्री राम और सुग्रीव के मित्रता की कहानी, राम-सुग्रीव वार्तालाप, राम-सुग्रीव संवाद
  52. किष्किन्धाकाण्ड: बाली सुग्रीव युध्द वालि-वध, बाली का वध, राम द्वारा बाली का वध, बाली-राम संवाद, तारा का विलाप
  53. किष्किन्धाकाण्ड: सुग्रीव का अभिषेक, बाली वध के बाद सुग्रीव का राज्याभिषेक (Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  54. किष्किन्धाकाण्ड: हनुमान-सुग्रीव संवाद, हनुमान और सुग्रीव की मित्रता, लक्ष्मण-सुग्रीव संवाद, राम का सुग्रीव पर कोप, रामायण सुग्रीव मित्रता
  55. किष्किन्धाकाण्ड: माता सीता की खोज, माता सीता की खोज में निकले राम, राम द्वारा हनुमान को मुद्रिका देना, माता सीता की खोज में निकले हनुमान
  56. किष्किन्धाकाण्ड: जाम्बवन्त द्वारा हनुमान को प्रेरणा, जाम्बवन्त के प्रेरक वचन Sampurna Ramayan Katha Kishkindha Kand
  57. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का सागर पार करना, हनुमान जी ने समुद्र कैसे पार किया, हनुमान जी की लंका यात्रा, हनुमान जी का लंका में प्रवेश
  58. सुन्दरकाण्ड: लंका में सीता की खोज, माता सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान, सीता से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद
  59. सुन्दरकाण्ड: रावण -सीता संवाद, अशोक वाटिका में रावण संवाद, रावण सीता अशोक वाटिका, रावण की सीता को धमकी
  60. सुन्दरकाण्ड: जानकी राक्षसी घेरे में, माता सीता राक्षसी घेरे में, पति राम के वियोग में व्याकुल सीता, अशोक वाटिका में हनुमान जी किस वृक्ष पर बैठे थे
  61. सुन्दरकाण्ड: हनुमान सीता भेंट, सीता जी से मिले हनुमान, अशोक वाटिका में हनुमान सीता संवाद, हनुमान का सीता को मुद्रिका देना
  62. सुन्दरकाण्ड: हनुमान का विशाल रूप, हनुमान जी का पंचमुखी अवतार, हनुमान जी ने क्यों धारण किया पंचमुखी रूप, हनुमान के साथ क्यों नहीं गईं सीता, बजरंगबली का विराट रूप
  63. सुन्दरकाण्ड: हनुमान ने उजाड़ी अशोक वाटिका, हनुमान जी ने रावण की अशोक वाटिका को किया तहस-नहस, अशोक वाटिका विध्वंस, हनुमान राक्षस युद्ध
  64. सुन्दरकाण्ड: मेधनाद हनुमान युद्ध, लंका में हनुमान जी और मेघनाद का भयंकर युद्ध, मेघनाद ने हनुमान पर की बाणों की वर्षा
  65. सुन्दरकाण्ड: रावण के दरबार में हनुमान, रावण हनुमान संवाद, हनुमान-रावण की लड़ाई, लंका दहन, हनुमान जी द्वारा लंका दहन, हनुमान ने सोने की लंका में लगाई आग
  66. सुन्दरकाण्ड: माता सीता का संदेश देना, हनुमान के द्वारा राम सीता का संदेश, हनुमान ने राम को दिया माता सीता का संदेश
  67. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): समुद्र पार करने की चिन्ता, वानर सेना का प्रस्थान, वानर सेना का सेनापति कौन था, वानर सेना रामायण, वानर सेना का गठन
  68. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लंका में राक्षसी मन्त्रणा, विभीषण ने रावण को किस प्रकार समझाया, विभीषण का निष्कासन, विभीषण का श्री राम की शरण में आना
  69. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सेतु बन्धन, राम सेतु पुल, क्यों नहीं डूबे रामसेतु के पत्‍थर, राम सेतु का निर्माण कैसे हुआ, नल-नील द्वारा पुल बाँधना
  70. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): सीता के साथ छल, रावण का छल, रावण ने छल से किया माता सीता का हरण Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  71. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अंगद रावण दरबार में, अंगद ने तोड़ा रावण का घमंड, रावण की सभा में अंगद-रावण संवाद, रावण की सभा में अंगद का पैर जमाना
  72. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): राम लक्ष्मण बन्धन में, नागपाश में राम लक्ष्मण, धूम्राक्ष और वज्रदंष्ट्र का वध, राक्षस सेनापति धूम्राक्ष का वध, अकम्पन का वध, प्रहस्त का वध
  73. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण कुम्भकर्ण संवाद, कुम्भकर्ण वध, कुंभकरण का वध किसने किया, कुम्भकर्ण की कहानी Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  74. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): त्रिशिरा, अतिकाय आदि का वध, अतिकाय का वध, मायासीता का वध, रावण पुत्र मेघनाद (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  75. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मेघनाद युद्ध कथा, मेघनाथ लक्ष्मण का अंतिम युद्ध, मेघनाद वध, मेघनाथ को कौन मार सकता था? लक्ष्मण ने मेघनाद को कैसे मारा
  76. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): लक्ष्मण मूर्छित, मेघनाद ने ब्रह्म शक्ति से लक्ष्मण को किया मूर्छित, लक्ष्मण मूर्छित होने पर राम विलाप, संजीवनी बूटी लेकर आए हनुमान
  77. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): रावण का युद्ध के लिये प्रस्थान, श्रीराम-रावण का युद्ध, राम और रावण के बीच युद्ध, रावण वध, मन्दोदरी का विलाप 
  78. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): विभीषण का राज्याभिषेक, रावण के बाद विभीषण बना लंका का राजा (Sampoorna Ramayan Yuddha Kand Lanka Kand)
  79. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): माता सीता की अग्नि परीक्षा, माता सीता ने अग्नि परीक्षा क्यों दी थी? माता सीता ने अग्नि परीक्षा कैसे दी?, माता सीता की अग्नि परीक्षा कहां हुई थी? 
  80. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): अयोध्या को प्रस्थान, राम अयोध्या कब लौटे थे, अयोध्या में राम का स्वागत, राम का अयोध्या वापस आना, वनवास से लौटे राम-लक्ष्मण और सीता
  81. युद्धकाण्ड (लंकाकाण्ड): भरत मिलाप, राम और भरत का मिलन, राम भरत संवाद, राम का राज्याभिषेक Sampoorna Ramayan Yuddha Kand (Lanka Kand)
  82. उत्तरकाण्ड: रावण के पूर्व के राक्षसों के विषय में, रावण के जन्म की कथा, रावण का जन्म कैसे हुआ, रावण का जन्म कहां हुआ, रावण के कितने भाई थे
  83. उत्तरकाण्ड: हनुमान के जन्म की कथा, रामभक्त हनुमान के जन्म की कहानी, हनुमान की कथा, हनुमान जन्म लीला, पवनपुत्र हनुमान का जन्म कैसे हुआ
  84. उत्तरकाण्ड: अभ्यागतों की विदाई, प्रवासियों में अशुभ चर्चा, सीता का निर्वासन, राम ने सीता का त्याग क्यों किया, राम ने सीता को वनवास क्यों दिया
  85. उत्तरकाण्ड: राजा नृग की कथा, सूर्यवंशी राजा नृग की कथा, राजा नृग कुएँ का गिरगिट, राजा नृग का उद्धार कैसे हुआ? राजा नृग की मोक्ष कथा, राजा नृग का उपाख्यान 
  86. उत्तरकाण्ड: राजा निमि की कथा, शाप से सम्बंधित राजा की कथा, राजा निमि कौन थे? राजा निमि की कहानी, विदेह राजा जनक Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  87. उत्तरकाण्ड: राजा ययाति की कथा, कौन थे राजा ययाति, राजा ययाति की कहानी, ययाति का यदु कुल को शाप Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  88. उत्तरकाण्ड: कुत्ते का न्याय, राम और कुत्ते की कहानी, भगवान राम से जब न्याय मांगने आया एक कुत्ता, रामायण का अनोखा किस्सा
  89. उत्तरकाण्ड: पूर्व राजाओं के यज्ञ-स्थल एवं लवकुश का जन्म, लव कुश का जन्म कहां पर हुआ था, लव कुश में बड़ा कौन है, वाल्मीकि आश्रम कहां है, च्यवन ऋषि का आगमन
  90. उत्तरकाण्ड: ब्राह्मण बालक की मृत्यु, शंबूक ऋषि की हत्या किसने की, शंबुक कथा, शंबूक ऋषि का वध, राम ने क्यों की शंबूक की हत्या Sampoorna Ramayan Uttar Kand
  91. उत्तरकाण्ड: राजा श्वेत क्यों खाया करते थे अपने ही शरीर का मांस, राजा श्वेत की कहानी, राजा श्वेत की कथा Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Raja Swet Ki Katha
  92. उत्तरकाण्ड: राजा दण्ड की कथा, दण्डकारण्य जंगल के श्रापित होने की कथा, शुक्राचार्य ने राजा दण्ड को दिया श्राप
  93. उत्तरकाण्ड: वृत्रासुर की कथा, वृत्रासुर का वध, वृत्रासुर कौन था? इंद्र द्वारा वृत्रासुर का वध Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Vritrasura Ki Katha
  94. उत्तरकाण्ड: राजा इल की कथा, जब पुरूष से स्त्री बन गये राजा ईल, राजा इल की कहानी (Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Raja Ill Ki Kahani, Raja Ill Ki Katha
  95. उत्तरकाण्ड: अश्वमेघ यज्ञ का अनुष्ठान रामायण, अश्वमेध यज्ञ क्या है? Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Ashvamedh Yagya Ka Anushthaan, Ashvamedh Yagya Kya Hai
  96. उत्तरकाण्ड: लव-कुश द्वारा रामायण गान, ‘हम कथा सुनाते’ लव-कुश के गीत, लव-कुश ने सुनाई राम कथा, लव कुश गीत, रामायण लव कुश कांड
  97. उत्तरकाण्ड: सीता का रसातल प्रवेश, सीता मैया धरती में क्यों समाई, सीता पृथ्वी समाधि, सीता जी का धरती में समाना, सीता का धरती में प्रवेश करना
  98. उत्तरकाण्ड: भरत व लक्ष्मण के पुत्रों के लिये राज्य व्यवस्था, वाल्मीकि रामायण (Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Bharat Aur Lakshman Ke Putron Ke Liye Rajya
  99. उत्तरकाण्ड: लक्ष्मण का परित्याग, राम ने लक्ष्मण का परित्याग क्यों किया, राम द्वारा लक्ष्मण का परित्याग, लक्ष्मण द्वारा प्राण विसर्जन, लक्ष्मण की मृत्यु
  100. उत्तरकाण्ड: महाप्रयाण, लव-कुश का अभिषेक, संपूर्ण वाल्मीकि रामायण, Sampoorna Ramayan Uttar Kand: Mahaprayan, Valmiki Ramayan in Hindi