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शनि देव के फायदे, Shani Dev Mantra Ke Fayde
हिन्दू शास्त्रों के मुताबिक शनि देव बुरे कर्म करने पर ही प्राणियों को दण्डित करते हैं, जो धार्मिक दृष्टि से शनि दशा या फिर शनि की दृष्टि के रूप में जानी जाती है. बुरे कर्म का फल हमारे सांसारिक जीवन में शनि देव का दण्ड हमको शरीर, मन या आर्थिक परेशानियों के रूप में मिलता है. हर प्राणी कर्म और कर्तव्यों से किसी न किसी रूप में जुड़ा होता ही है, इसलिए जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए पैदा हुई हित या स्वार्थ पूर्ति की भावना से जाने-अनजाने मन, विचार व कर्म दोषों का भागी बनता है. हिन्दू शास्त्रों के अनुसार ऐसे दोषों का प्रायश्चित क्षमा के द्वारा संभव है.शनि देव व्यक्ति को उसके कर्म के अनुसार फल देते हैं. जीवन में सुख, शांति, समृद्धि आदि के लिए शनि देव की कृपा बहुत जरूरी है. शनिवार को स्नान के बाद यथासंभव काले वस्त्र पहनकर शनि देव मंदिर में शनि देव का ध्यान कर प्रतिमा को पवित्र जल, तिल या सरसों का तेल, काला वस्त्र, अक्षत, फूल, नैवेद्य अर्पित करें. सरल शनि मंत्रों जैसे ‘ॐ शं शनिश्चराय नम:’ शनि चालीसा या शनि स्त्रोत का पाठ करें. – मंत्र ध्यान व पूजा के बाद शनिदेव की आरती कर नीचे लिखे मंत्र से जाने-अनजाने हुए बुरे कर्म व विचार के लिये क्षमा मांग आने वाले वक्त को सुखद व सफल बनाने की कामना करें.

शनि मंत्र जाप विधि, Shani Mantra Jaap Vidhi
अगर आप से घर पर संभव हो तो किसी ब्राह्मण से शनि मंत्र जाप करा सकते हैं। नहीं तो आप प्रतिदिन 10 माला के हिसाब से इन मंत्रो का जाप 125 दिन तक करें। कम से कम 1 बार या फिर मंत्रों के 23,000 जाप करें या किसी ब्राह्मण करवाएं। 108बार जाप करना भी शुभ कारी है.

शनि मंत्र जाप किस माला से करे, शनि मंत्र जाप माला 
शनिवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद कुश (एक प्रकार की घास) के आसन पर बैठ जाएं. सामने शनिदेव की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और नीले फूल चढ़ाएं।इसके बाद रूद्राक्ष की माला से इनमें से किसी एक मंत्र की कम से कम पांच माला जप करें. शनिदेव से परेशानियां कम करने के लिए प्रार्थना करें. यदि प्रत्येक शनिवार को इस मंत्र का इसी विधि से जाप करेंगे तो शीघ्र लाभ होगा.


शनि देव मंत्र, Shani Dev Mantra

1- वैदूर्य कांति रमल:, प्रजानां वाणातसी कुसुम वर्ण विभश्च शरत:।
अन्यापि वर्ण भुव गच्छति तत्सवर्णाभि सूर्यात्मज: अव्यतीति मुनि प्रवाद:॥
अर्थ – शनि ग्रह वैदूर्यरत्न अथवा बाणफ़ूल या अलसी के फ़ूल जैसे निर्मल रंग से जब प्रकाशित होता है, तो उस समय प्रजा के लिये शुभ फ़ल देता है यह अन्य वर्णों को प्रकाश देता है, तो उच्च वर्णों को समाप्त करता है, ऐसा ऋषि, महात्मा कहते हैं।


2. शनि देव सामान्य मंत्र 
ॐ शं शनैश्चराय नमः।


3. शनिदेव महामंत्र 
ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥


4- सेहत के लिए शनि देव का मंत्र 
ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिहा।


5- शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र
ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः।


6- शनि देव महाराज के वैदिक मंत्र
ऊँ शन्नोदेवीर-भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।


7- शनि देव का एकाक्षरी मंत्र
ऊँ शं शनैश्चाराय नमः।


8- शनि देव जी का गायत्री मंत्र
ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्।


9- शनिदेव को प्रसन्न करने वाले सरल मंत्र
“ॐ शन्नो देविर्भिष्ठयः आपो भवन्तु पीतये। सय्योंरभीस्रवन्तुनः।।


10- शनि देव का पौराणिक 
मंत्र ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।
छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।


11- शनि देव का दोष निवारण मंत्र 
ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम। उर्वारुक मिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात।।
ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।शंयोरभिश्रवन्तु नः। ऊँ शं शनैश्चराय नमः।।


12- ध्यान मंत्र
इंद्रनीलद्युति: शूली वरदो गृधवाहन:।
बाणबाणासनधर: कर्तव्योर्क सुतस्तथा।।

13- शनि बीज मन्त्र 
ॐ प्राँ प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ।
बुरी दशा में शनि देव के बीज मंत्र का अवश्य जाप कर लेना चाहिये, ऐसा करने से आप परेशान नहीं होंगे.शनि के बीज मंत्र का जाप करने से और उडद की दाल जो शनि देव का अनाज है का प्रयोग करें, रोटी मे चने का प्रयोग करें, लोहे के बर्तन में खाना खाये, तो सारे रोगो से मुक्ति मिल जाती है।

14-शनि पत्नी मंत्र
ध्वजिनी धामिनी चैव कंकाली कलहप्रिया।
कंटकी कलही चाऽथ तुरंगी महिषी अजा।।
शनेर्नामानि पत्नीनामेतानि संजपन् पुमान्।
दुःखानि नाशयेन्नित्यं सौभाग्यमेधते सुखम।।


Video – SUNDRANI, Suresh Wadkar

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Mahamrityunjaya Mantra

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भगवान शिव के अचूक मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र
भगवान शिव के कई नाम है कोई उन्हें रुद्र तो कोई भोलेनाथ, कोई शंकर तो कोई महाकाल के नाम से पुकारता है. भगवान शिव की पूजा में विशेष नियम नहीं होते और इनकी पूजा विधि के मंत्र भी बेहद आसान होते हैं. शिव पुराण में भगवान शिव को खुश करने के लिए बहुत सारे मंत्र बताए गए हैं। आज हम आपको महामृत्युंजय मंत्र के साथ शिव जी के अन्य मंत्रो के बारे में बताने जा रहे हैं. जिनकी जाप करने से आपकी तमाम समस्याओं का निवारण हो जाएगा. मंत्र जपने वाला इस बात का ध्यान रखें कि मंत्र जाप करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख होना चाहिए। जप के पूर्व शिवजी को बिल्वपत्र अर्पित करना चाहिए। उनके पर जलधारा चढ़ाना चाहिए।
महामृत्युंजय मंत्र, Mahamrityunjaya Mantra
ॐ हौं जूं स: ॐ भूर्भुव: स्व: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्व: भुव: भू: ॐ स: जूं हौं ॐ !!

महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ, Mahamrityunjaya Mantra Ka Arth
1. त्रयंबकम- त्रि.नेत्रों वाला, कर्मकारक.
2. यजामहे- हम पूजते हैं, सम्मान करते हैं। हमारे श्रद्देय.
3. सुगंधिम- मीठी महक वाला, सुगंधित.
4. पुष्टि- एक सुपोषित स्थिति, फलने वाला व्यक्ति. जीवन की परिपूर्णता.
5. वर्धनम- वह जो पोषण करता है, शक्ति देता है.
6. उर्वारुक- ककड़ी.
6. इवत्र- जैसे, इस तरह.
7. बंधनात्र- वास्तव में समाप्ति से अधिक लंबी है.
8. मृत्यु- मृत्यु से.
9. मुक्षिया- हमें स्वतंत्र करें, मुक्ति दें.
10. मात्र न अमृतात- अमरता, मोक्ष.

महामृत्युंजय मंत्र का जाप कैसे करें, Mahamrityunjay Mantra Ka Jaap Kaise Karen
महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव का बहुत प्रिय मंत्र है। इस मंत्र के जाप से व्यक्ति मौत पर भी जीत हासिल कर सकता है। इस मंत्र के जाप से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और असाध्य रोगों का भी नाश होता है। इसके जाप से संसार का हर रोग और कष्ट दूर हो जाता है। शास्त्रों में इस मंत्र को अलग-अलग संख्या में करने का विधान है।
महामृत्युंजय पाठ 1100 बार करने पर भय से छुटकारा मिलता है। महामृत्युंजय मंत्र 108 बार पढ़ने से भी फायदा मिलता है। महामृत्युंजय मंत्र का जाप सवा लाख बार करने से पुत्र और सफलता की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही अकाल मृत्यु से भी बचाव होता है। ओम त्र्यंबकम यजामहे मंत्र का 11000 बार जाप करने पर रोगों से मुक्ति मिलती है।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते समय रखें इन बातों का ध्यान
1- मंत्रों का जाप सुबह-शाम किया जाता है।
2- जैसी भी समस्या क्यों न हो, यह मंत्र अपना चमत्कारी प्रभाव देता है।
3- भगवान शिव के मंत्रों का जाप रुद्राक्ष की माला से करना चाहिए।
4- भगवान शिव की प्रतिमा, फोटो या शिवलिंग के सामने आसन बिछाकर इस मंत्र का जाप करें।
5- मंत्र जाप शुरू करने से पहले भगवान शिव को बेलपत्र और जल चढ़ाएं।
6- पूरी श्रद्धा और विश्वास से साधना करने पर इच्छित फल की प्राप्ति होती है।
7- महामृत्युंजय चालीसा का उच्चारण सही तरीके और शुद्धता से करना चाहिए।
8- मंत्र उच्चारण के समय एक शब्द की गलती भी भारी पड़ सकती है।
9- मंत्र के जप के लिए एक निश्चित संख्या निर्धारित कर लें। जप की संख्या धीरे-धीरे बढ़ाएं लेकिन कम न करें।
10- महामृत्युंजय का मंत्र जाप धीमे स्वर में करें। मंत्र जप के समय इसका उच्चारण होठों से बाहर नहीं आना चाहिए।
11- महामृत्यु मंत्र के दौरान धूप-दीप जला कर रखें।
12- मंत्र का जप सदैव पूर्व दिशा की ओर मुंह करके करना चाहिए। जब तक मंत्र का जप करें, उतने दिनों तक तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

शिव के प्रिय मंत्र
कहा जाता है कि मंत्र जाप के माध्यम से भक्त न सिर्फ भोले भंडारी भगवान शिव को प्रसन्न कर सकते हैं बल्कि उनकी कृपा पाकर अनेक संकटों से मुक्ति भी पा सकते हैं. लेकिन भगवान शिव के मंत्रों की लिस्ट काफी लंबी है, इसलिए यहां कुछ मंत्र प्रस्तुत हैं जो कि भगवान शिव को बेहद प्रिय हैं. इन मंत्रो का जाप विशेषकर शिवरात्रि, श्रावण मास के दिन रुद्राक्ष की माला से करना चाहिए। जानिए भगवान शिव को प्रसन्न करने वाले कुछ खास मंत्र-
1- ॐ नमः शिवाय।
2- नमो नीलकण्ठाय।
3- ॐ पार्वतीपतये नमः।
4- ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।
5- ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्त्तये मह्यं मेधा प्रयच्छ स्वाहा।
6- ऊर्ध्व भू फट्।
7- इं क्षं मं औं अं।
8- प्रौं ह्रीं ठः।

शिवजी के मंत्र और उनका महत्त्व, Shiv Ji Ke Mantr Aur Unaka Mahatav
1- शिवजी की आराधना करने के लिए मंत्र
शिवजी की आराधना का मूल मंत्र तो ऊं नम: शिवाय ही है लेकिन इस मंत्र के अतिरिक्त भी कुछ मंत्र हैं जो महादेव को प्रिय हैं.
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारं| सदा वसन्तं ह्रदयाविन्दे भंव भवानी सहितं नमामि॥
जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा| ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा॥
इस मंत्र के जाप से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं और आपके दुख कष्ट हर लेते हैं. इस मंत्र का जाप कर आप अनेक समस्याओं से मुक्ति पा सकते हैं.
2- मनोवांछित फल पाने के लिए शिवजी के इस मंत्र का जाप करें:
नागेंद्रहाराय त्रिलोचनाय भस्मांग रागाय महेश्वराय| नित्याय शुद्धाय दिगंबराय तस्मे न काराय नम: शिवाय:॥
मंदाकिनी सलिल चंदन चर्चिताय नंदीश्वर प्रमथनाथ महेश्वराय| मंदारपुष्प बहुपुष्प सुपूजिताय तस्मे म काराय नम: शिवाय:॥
शिवाय गौरी वदनाब्जवृंद सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय| श्री नीलकंठाय वृषभद्धजाय तस्मै शि काराय नम: शिवाय:॥
अवन्तिकायां विहितावतारं मुक्तिप्रदानाय च सज्जनानाम्। अकालमृत्यो: परिरक्षणार्थं वन्दे महाकालमहासुरेशम्।।
3- स्वास्थ्य प्राप्ति के लिए शिवजी के मंत्र इस मंत्र का जाप करना चाहिए
सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्। भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये ।।
कावेरिकानर्मदयो: पवित्रे समागमे सज्जनतारणाय। सदैव मान्धातृपुरे वसन्तमोंकारमीशं शिवमेकमीडे।।
4- पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा उन्हें स्नान समर्पण करना चाहिए
ॐ वरुणस्योत्तम्भनमसि वरुणस्य सकम्भ सर्ज्जनीस्थो| वरुणस्य ऋतसदन्यसि वरुणस्य ऋतसदनमसि वरुणस्य ऋतसदनमासीद्||
5- भगवान शिव की पूजा करते समय इस मंत्र के द्वारा उन्हें यज्ञोपवीत समर्पण करना चाहिए
ॐ ब्रह्म ज्ज्ञानप्रथमं पुरस्ताद्विसीमतः सुरुचो वेन आवः| स बुध्न्या उपमा अस्य विष्ठाः सतश्च योनिमसतश्च विवः||
6- इस मंत्र के द्वारा भगवान भोलेनाथ को गंध समर्पण करना चाहिए
ॐ नमः श्वभ्यः श्वपतिभ्यश्च वो नमो नमो भवाय च रुद्राय च नमः| शर्वाय च पशुपतये च नमो नीलग्रीवाय च शितिकण्ठाय च||
7- इस मंत्र के द्वारा अर्धनारीश्वर को धूप समर्पण करना चाहिए
ॐ नमः कपर्दिने च व्युप्त केशाय च नमः सहस्त्राक्षाय च शतधन्वने च| नमो गिरिशयाय च शिपिविष्टाय च नमो मेढुष्टमाय चेषुमते च||
8- भोलेनाथ को इस मंत्र से सुगन्धित तेल समर्पण करना चाहिए
ॐ नमः कपर्दिने च व्युप्त केशाय च नमः सहस्त्राक्षाय च शतधन्वने च| नमो गिरिशयाय च शिपिविष्टाय च नमो मेढुष्टमाय चेषुमते च||
9- भगवान भोलेनाथ को इस मंत्र के द्वारा दीप दर्शन कराना चाहिए
ॐ नमः आराधे चात्रिराय च नमः शीघ्रयाय च शीभ्याय च| नमः ऊर्म्याय चावस्वन्याय च नमो नादेयाय च द्वीप्याय च||
10- पूजा के दौरान इस मंत्र के द्वारा भगवान शिव को पुष्प समर्पण करना चाहिए
ॐ नमः पार्याय चावार्याय च नमः प्रतरणाय चोत्तरणाय च| नमस्तीर्थ्याय च कूल्याय च नमः शष्प्याय च फेन्याय च||
11- इस मंत्र के द्वारा भगवान चन्द्रशेखर को नैवेद्य अर्पण करना चाहिए
ॐ नमो ज्येष्ठाय च कनिष्ठाय च नमः पूर्वजाय चापरजाय च| नमो मध्यमाय चापगल्भाय च नमो जघन्याय च बुधन्याय च||
12- पूजन के दौरान इस मंत्र से भगवान शिव को ताम्बूल पूगीफल समर्पण करना चाहिए
ॐ इमा रुद्राय तवसे कपर्दिने क्षयद्वीराय प्रभरामहे मतीः| यशा शमशद् द्विपदे चतुष्पदे विश्वं पुष्टं ग्रामे अस्तिमन्ननातुराम्||
13- इस मंत्र से भगवान शिवजी को बिल्वपत्र समर्पण करना चाहिए
दर्शनं बिल्वपत्रस्य स्पर्शनं पापनाशनम्| अघोरपापसंहारं बिल्वपत्रं शिवार्पणम्||

महामृत्युंजय मंत्र जप के नियम और विधि, Mahamrtyunjay Mantr Jap Ke Niyam Aur Vidhi
भगवान शिव या किसी भी देवी देवताओं की कृपा प्राप्ति के लिए मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। परंतु क्या आपको मंत्र जप के सही तरीके मालूम है? अगर नहीं तो ये खबर खास आपके लिए ही है. क्योंकि ूबुत से लोग ऐसे होते हैं जो मंत्र जाप करने की विधि जाने बिना कहीं भी किसी अवस्था में बैठकर मंत्र उच्चारण करना शुरू कर देते हैं। जिसे धार्मिक दृष्टि से ठीक नहीं माना जाता। इसके बारे में कहा जाता है मंत्र जाप को सही विधि से करने पर ही शुभ फल की प्राप्ति होती है। अगर बिना किसी जानकारी के किसी भी देवी-देवता का मंत्र जाप से आवाह्न किया जाता है तो वो कभी सफल नहीं होता। कहा जाता है अगर मंत्र जप की सही विधि होने पर एक साथ कई देवी-देवताओं की दिव्य शक्तियां प्राप्त होती है। आज हम आपके लिए इसी से जुड़ी खास जानकारी लेकर आए हैं जिसमें हम आपको बताएंगे कि मंत्र जाप करने के लिए तुलसी, मोती, रुदाक्ष, स्फटिक तथा चंदन की माला आदि से मंत्र जाप करते समय आपके लिए कौन सी विधि उपयोगी होती है।
1- मंत्र जप के लिए बैठने का आसन- किसी भी मंत्र को सिद्ध करने के लिए तथा उसका पूर्ण लाभ उठाने के लिए सबसे पहले सही आसन का चुनाव करें। प्राचीन समय में ऋषि मुनि इसके लिए सिद्धासन का प्रयोग किया करते थे। आप इसके अलावा पद्मासन, सुखासन, वीरासन या वज्रासन का प्रयोग कर सकते हैं।
2- मंत्र जप के लिए समय का चुनाव- किसी भी देवी-देवता की मंत्र साधना करने से पहले सही समय चुनें। वैसे धार्मिक शास्त्रों में इसके लिए ब्रह्म मुहूर्त अर्थात सूर्योदय से पूर्व का समय उपयुक्त है। संध्या के समय पूजा आरती के बाद भी जप करना लाभदायक माना जाता है।
3- मंत्र जप के लिए एकाग्रता का होना जरुरी- मंत्र जप के दौरान जातक का ध्यान और मन एकाग्रचित होना चाहिए। उस समय बिल्कुल भी बाहरी दुनिया में ध्यान नही देना चाहिए। जिस देवता का आप मंत्र उच्चारण कर रहे हैं बस उनकी ही रूप का ध्यान करें।
4- मंत्र जप के लिए दिशा- इस बात का खास ध्यान रखें कि मंत्र का जाप करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ़ हो तभी सुभ फल प्राप्त होंगे।
5- माला और आसन नमन- जिस आसन पर आप बैठे हो तथा जिस माला से जाप करने वाले हो सबसे पहले उन दोनों को मस्तिष्क से लगाकर नमन करें उसके बाद ही मंत्र जाप शुरू करें।
6- मंत्र जप के लिए माला का चयन- जिस देवता के मंत्र का जाप कर रहे हैं, उनके लिए बताई गई उस विशेष माला से ही मंत्र जाप करें। जैसे शिव जी के लिए रुद्राक्ष की माला।
7- माला छिपाकर करें जाप- मंत्र उच्चारण करते समय माला को कपड़े की थैली में रखें। इसके साथ ही इस बात का खास ध्यान रखें कि माला जाप करते समय कभी ये न देखे की कितनी मोती शेष बचे हैं। इससे अपूर्ण फल मिलता है
8- मंत्रो का सही उच्चारण- मंत्र उच्चारण में गलती न करें। बताते चलें माला को फेरते समय दांए हाथ के अंगूठे और मध्यमा अंगुली का प्रयोग करें। माला पूर्ण होने पर सुमेरु को पार न करें।
9- एक ही समय- जिस समय पर आप मंत्र जाप कर रहे हैं अगले दिन भी ठीक उसी समय पर जाप करें।

महामृत्युंजय मंत्र अनुराधा पौडवाल

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Chanting Of This Mantra Before Sleeping Will Be Away Problems

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नींद आने का मंत्र, Neend Aane Ka Mantr
वर्तमान समय में हर कोई व्यस्तता भरा जीवन जी रहा है. भागदौड़ में वो इतना उलझ कर रह गया है की उसे न तो दिन में चैन है और न रात को नींद. रात के समय सुबह के काम की टैंशन, बुरे सपने और अनिद्रा जैसी बहुत सारी परेशानियां रहती हैं. जिससे निजात पाने के लिए बहुत सारी दवाओं का सेवन करना पड़ता है. ऐसी दवाएं कुछ समय के लिए तो अच्छा प्रभाव देती हैं लेकिन भविष्य में उनके बुरे प्रभावों से रू-ब-रू होना पड़ता है. कुछ ऐसे मंत्र हैं जिनका रात को सोने से पहले नियमित जाप नींद संबंधी परेशानियों ये छुटकारा दिलवा सकता है.

1- ऊं सा ता ना मा।।
अगर आपको बुरे सपने आते है और बीच में ही नींद खुल जाती है, डरावने सपनों का डर सताता है या भय से कांप कर उठ जाते हैं तो नींद में जाने से पहले आध्यात्मिक मंत्र ”ऊं सा ता ना मा” का जाप करें. इस मंत्र के प्रभाव से दिमाग शांत रहता है और नींद भी अच्छी आती है.

2- हर हर मुकुन्दे।।
ये मंत्र आपको अच्छी और शांत नींद आने में मदद करेगा. सुहावनी रात गुजारने के लिए अथवा गहरी नींद की इच्छा रखते हैं तो “हर हर मुकुन्दे” मंत्र का जाप करें.

3- श्री हनुमान चालीस
हम सब जानते है कि श्री हनुमान चालीसा पढ़ने से डर दूर हो जाता है और मन में शांति रहती है. रात के समय बड़ी से बड़ी परेशानी से निजात चाहते हैं तो संकटमोचन हनुमान जी का ध्यान करते हुए हनुमान चालीसा का जाप करें. हनुमान चालीसा श्री हनुमान चालीस हिन्दी

4- ऊं गं गणपतये नमः।।
गणेश जी बड़े ही दयालु है और अपने भक्तों की सारी परेशानी दूर करते है. अगर आप किसी वजह से परेशान हैं और आपको नींद नहीं आती तो आप भगवन गणेश जी को याद कर लीजिये और उनका ये मंत्र आपको शांति देगा. सोने में जैसा भी विध्न आए विध्नहर्ता गणेश जी के प्रिय मंत्र ” ऊं गं गणपतये नमः” का जाप करें.

5- अगस्तिर्माधवश्चैव मुचुकुन्दो महाबल:। कपिलो मुनिरास्तीक: पंचैते सुखशायिन।।
यदि किसी को नींद न आती हो तो सोने से पहले हाथ-पैर धोकर बिस्तर पर बैठकर इस मन्त्र का जप 7 बार करके बिस्तर पर लेट जाए. ऐसा करने से नींद न आने की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी. मंत्र – अगस्तिर्माधवश्चैव मुचुकुन्दो महाबल:। कपिलो मुनिरास्तीक: पंचैते सुखशायिन:।।

6- बुरे सपने और बेचैनी से सदा के लिए पीछा छुड़ाने के लिए हनुमान जी के ‘शाबर मंत्र‘ को जपें.
हनुमान जी के शाबर मंत्र, Hanuman Ji Shabar Mantra
ॐ नमो बजर का कोठा,
जिस पर पिंड हमारा पेठा।
ईश्वर कुंजी ब्रह्म का ताला,
हमारे आठो आमो का जती
हनुमंत रखवाला।
।। जय हनुमान ।।

7- निद्रां भगवतीं विष्णो अतुलाम तेजसः प्रभु।।
गहरी नींद और अच्छे सपनो के लिए ये मंत्र पढ़ें, एक मान्यता के अनुसार जिन लोगों को रात में गहरी नींद आती है. उन्हे सुबह 4 बजे अपना बिस्तर छोड़ देना चाहिए, जल्दी उठने से शरीर की सभी इन्द्रियाँ साम्यावस्था में रहती हैं और किसी भी तरह का आलस्य नहीं आता है साथ ही शरीर भी स्वस्थ रहता है. मगर जिन लोगो को अनिद्रा की परेशानी है या नींद नहीं आती है तो सोते समय ये ”निद्रां भगवतीं विष्णो अतुलाम तेजसः प्रभु”।। छोटा सा मंत्र बोलना चाहिए इससे गहरी नींद आएगी और बुरे सपने भी परेशान नहीं करेंगे.

8- या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
मंत्र नियम- ये मंत्र दुर्गासप्तशती से लिया गया एक प्रभावकारी मंत्र है. सोने से पहले हाथ पैर जरूर धोएं. अब सोने से ठीक पहले इस मंत्र को मन ही मन बोलें और आंखें बंद कर अपनी दोनों भौहों के बीच देखें. बहुत जल्दी नींद आ जाएगी. रात को सोने से पहले इस मन्त्र जप 3 या 5 बार करके सो जाए बुरे स्वप्न आना बंद हो जायेंगे. या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

9- वाराणस्यां दक्षिणे तु कुक्कुटो नाम वै द्विज:। तस्य स्मरणमात्रेण दु:स्वप्न सुखदो भवेत्।।
यदि किसी को भी बुरे सपने आते हो तो रात्रि में अच्छे से हाथ-पैर धोकर पूर्व दिशा की ओर मुह करके बिस्तर पर शांत होके बैठकर इस मन्त्र को 21 बार उच्चारण करके आराम से जाए, बुरे स्वप्न आने बंद होने के साथ साथ गहरी नींद भी आने लगेगी. वाराणस्यां दक्षिणे तु कुक्कुटो नाम वै द्विज:। तस्य स्मरणमात्रेण दु:स्वप्न सुखदो भवेत्।।

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चारों वेदों से मिलकर बने गायत्री मंत्र का उच्‍चारण करने से व्‍यक्ति के जीवन में खुशियों का संचार होता है. इस मंत्र का जाप करने से शरीर निरोग बनता है और इंसान को यश, प्रसिद्धि और धन की प्राप्ति भी होती है.
गायत्री मंत्र, Gayatri Mantra
ॐ भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्यः धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।।
गायत्री मंत्र का अर्थ – उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अपनी अन्तरात्मा में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।

मंत्र के प्रत्येक शब्द की व्याख्या
गायत्री मंत्र के पहले नौ शब्द प्रभु के गुणों की व्याख्या करते हैं-
ॐ = प्रणव
भूर = मनुष्य को प्राण प्रदाण करने वाला
भुवः = दुख़ों का नाश करने वाला
स्वः = सुख़ प्रदाण करने वाला
तत = वह, सवितुर = सूर्य की भांति उज्जवल
वरेण्यं = सबसे उत्तम
भर्गो = कर्मों का उद्धार करने वाला
देवस्य = प्रभु
धीमहि = आत्म चिंतन के योग्य (ध्यान)
धियो = बुद्धि, यो = जो, नः = हमारी,
प्रचोदयात् = हमें शक्ति दें (प्रार्थना)

गायत्री मंत्र का जाप कब करें, गायत्री मंत्र जप का समय, Gayatri Mantra Ka Jaap Kab Kare
यूं तो इस बेहद सरल मंत्र को कभी भी पढ़ा जा सकता है लेकिन शास्त्रों के अनुसार इसका दिन में तीन बार जप करना चाहिए, गायत्री मंत्र का जाप 1, 7 , 21, या 108 बार कर सकते है-
1- गायत्री मंत्र के जाप का पहला समय सुबह का है. सूर्योदय से थोड़ी देर पहले मंत्र जप शुरू किया जाना चाहिए और जप सूर्योदय के बाद तक करना चाहिए.
2- मंत्र के जाप का दूसरा समय है दोपहर का. दोपहर में भी इस मंत्र का जप किया जा सकता है.
3- मंत्र के जाप का तीसरा समय है शाम को सूर्यास्त से कुछ देर पहले। सूर्यास्त से पहले मंत्र जप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जप करना चाहिए.
4- यदि इन तीनो समय के अलावा गायत्री मंत्र का जप करना हो तो मौन रहकर या मानसिक रूप से करना चाहिए। मंत्र जप अधिक तेज आवाज में नहीं करना चाहिए.

गायत्री मंत्र जाप विधि, Gayatri Mantra Jaap Vidhi
गायत्री मंत्र जाप करने से पहले स्नान आदि कर्मों से खुद को पवित्र कर लेना चाहिए.ज्‍योत‍िषशास्‍त्र के अनुसार यदि संध्याकाल के अतिरिक्त गायत्री मंत्र का जप करना हो, तो ऐसे में मौन रहकर या मानसिक रूप से मंत्र जप करना चाहिए. इस बात ध्‍यान रखें क‍ि इस प्रहर में मंत्र जप अधिक तेज आवाज में नहीं करना चाहिए. इसके अलावा गायत्री मंत्र जप करने के हमेशा रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना चाहिए. मंत्र जप की संख्या कम से कम 108 होनी चाहिए. ध्‍यान रखें क‍ि घर के मंदिर में या किसी पवित्र स्थान पर गायत्री माता का ध्यान करते हुए मंत्र का जप करना चाहिए. इस मंत्र के जप करने के लिए रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना श्रेष्ठ होता है.

गायत्री मंत्र के फायदे, Gayatri Mantra Ke Fayde
हिन्दू धर्म में गायत्री मंत्र को विशेष मान्यता प्राप्त है. कई शोधों द्वारा यह भी प्रमाणित किया गया है कि गायत्री मंत्र के जाप से कई फायदे भी होते हैं जैसे-
1- मानसिक शांति, चेहरे पर चमक, खुशी की प्राप्ति, चेहरे में चमक, इन्द्रियां बेहतर होती हैं, गुस्सा कम आता है और बुद्धि तेज होती है.
2- गायत्री मन्त्र का नियमित रुप से सात बार जप करने से व्यक्ति के आसपास नकारात्मक शक्तियाँ बिलकुल नहीं आती. उत्साह एवं सकारात्मकता बढ़ती है.
3- गायत्री मंत्र पाठ लगातार करने से पूर्वाभास होने लगता है. जप से कई प्रकार के लाभ होते हैं, व्यक्ति का तेज बढ़ता है और मानसिक चिन्ताओं से मुक्ति मिलती है. बौद्धिक क्षमता और मेधाशक्ति यानी स्मरणशक्ति बढ़ती है.
4- गायत्री मंत्र जाप से आप धार्मिक प्रवर्ति बनी रहती है, धर्म और सेवा कार्यों में मन लगता है.
5- गायत्री मंत्र पाठ से आशीर्वाद देने की शक्ति बढ़ती है.
6- गायत्री मंत्र पाठ से स्वप्न सिद्धि प्राप्त होती है.
7- आप गुस्से पे काबू पा लेते है और क्रोध शांत होता है.
8- चेहरे पे एक आकर्षण आ जाता है, त्वचा में चमक आती है.
9- मन साफ़ रहता है, बुराइयों से मन दूर होता है.

गायत्री मंत्र के चौबीस अक्षर चौबीस शक्तियां और सिद्धियां, Gayatri Mantra Ke Chaubees Akshar Chaubees Shaktiya Aur Siddhiya
गायत्री मन्त्र में सब मिलाकर चौबीस अक्षर होते हैं और यह 24 अक्षर चौबीस शक्तियों और सिद्धियों के प्रतीक होते हैं. ऋषियों ने इन अक्षरों में बीजरूप में विराजमान उन शक्तियों और सिद्धियों को पहचाना जिन्हें चौबीस अवतार, चौबीस ऋषि, चौबीस शक्तियां तथा चौबीस सिद्धियां कहा जाता है. गायत्री मंत्र के चौबीस अक्षरों के चौबीस देवता हैं और उनकी चौबीस चैतन्य शक्तियां भी हैं. गायत्री मंत्र के चौबीस अक्षर 24 शक्ति बीज हैं। गायत्री मंत्र का पाठ करने से उन सभी मंत्र शक्तियों का लाभ और सिद्धियां मिलती हैं.
1- तत्:
देवता– गणेश, सफलता शक्ति.
फल– कठिन कामों में सफलता, विघ्नों का नाश, बुद्धि की वृद्धि.
2- स:
देवता- नरसिंह, पराक्रम शक्ति.
फल- पुरुषार्थ, पराक्रम, वीरता, शत्रुनाश, आतंक-आक्रमण से रक्षा.
3- वि:
देवता- विष्णु, पालन शक्ति.
फल- प्राणियों का पालन, आश्रितों की रक्षा, योग्यताओं की वृद्धि.
4- तु:
देवता- शिव, कल्याण शक्ति.
फल- अनिष्ट का विनाश, कल्याण की वृद्धि, निश्चयता, आत्मपरायणता.
5- व:
देवता- श्रीकृष्ण, योग शक्ति.
फल- क्रियाशीलता, कर्मयोग, सौन्दर्य, सरसता, अनासक्ति, आत्मनिष्ठा.
6- रे:
देवता- राधा, प्रेम शक्ति.
फल- प्रेम-दृष्टि, द्वेषभाव की समाप्ति.
7- णि:
देवता- लक्ष्मी, धन शक्ति.
फल- धन, पद, यश और भोग्य पदार्थों की प्राप्ति.
8- यं:
देवता- अग्नि, तेज शक्ति.
फल- प्रकाश, शक्ति और सामर्थ्य की वृद्धि, प्रतिभाशाली और तेजस्वी होना.
9- भ :
देवता- इन्द्र, रक्षा शक्ति.
फल- रोग, हिंसक चोर, शत्रु, भूत-प्रेतादि के आक्रमणों से रक्षा.
10- र्गो :
देवता- सरस्वती, बुद्धि शक्ति.
फल- मेधा की वृद्धि, बुद्धि में पवित्रता, दूरदर्शिता, चतुराई, विवेकशीलता.
11- दे :
देवता- दुर्गा, दमन शक्ति.
फल- विघ्नों पर विजय, दुष्टों का दमन, शत्रुओं का संहार.
12- व :
देवता- हनुमान, निष्ठा शक्ति.
फल : कर्तव्यपरायणता, निष्ठावान, विश्वासी, निर्भयता एवं ब्रह्मचर्य-निष्ठा.
13- स्य :
देवता- पृथिवी, धारण शक्ति.
फल- गंभीरता, क्षमाशीलता, भार वहन करने की क्षमता, सहिष्णुता, दृढ़ता, धैर्य.
14- धी :
देवता- सूर्य, प्राण शक्ति.
फल- आरोग्य-वृद्धि, दीर्घ जीवन, विकास, वृद्धि, उष्णता, विचारों का शोधन.
15- म :
देवता- श्रीराम, मर्यादा शक्ति.
फल- तितिक्षा, कष्ट में विचलित न होना, मर्यादापालन, मैत्री, सौम्यता, संयम.
16- हि :
देवता- श्रीसीता, तप शक्ति.
फल- निर्विकारता, पवित्रता, शील, मधुरता, नम्रता, सात्विकता.
17- धि :
देवता- चन्द्र, शांति शक्ति.
फल- उद्विग्नता का नाश, काम, क्रोध, लोभ, मोह, चिन्ता का निवारण, निराशा के स्थान पर आशा का संचार.
18- यो :
देवता- यम, काल शक्ति.
फल- मृत्यु से निर्भयता, समय का सदुपयोग, स्फूर्ति, जागरुकता.
19- यो :
देवता- ब्रह्मा, उत्पादक शक्ति.
फल- संतानवृद्धि, उत्पादन शक्ति की वृद्धि.
20- न:
देवता- वरुण, रस शक्ति.
फल- भावुकता, सरलता, कला से प्रेम, दूसरों के लिए दयाभावना, कोमलता, प्रसन्नता, आर्द्रता, माधुर्य, सौन्दर्य.
21- प्र :
देवता- नारायण, आदर्श शक्ति.
फल- महत्वकांक्षा-वृद्धि, दिव्य गुण-स्वभाव, उज्जवल चरित्र, पथ-प्रदर्शक कार्यशैली.
22- चो :
देवता- हयग्रीव, साहस शक्ति.
फल- उत्साह, वीरता, निर्भयता, शूरता, विपदाओं से जूझने की शक्ति, पुरुषार्थ.
23- द :
देवता- हंस, विवेक शक्ति.
फल- उज्जवल कीर्ति, आत्म-संतोष, दूरदर्शिता, सत्संगति, सत्-असत् का निर्णय लेने की क्षमता, उत्तम आहार-विहार.
24- यात् :
देवता- तुलसी, सेवा शक्ति.
फल- लोकसेवा में रुचि, सत्यनिष्ठा, पातिव्रत्यनिष्ठा, आत्म-शान्ति, परदु:ख-निवारण.

Gayatri Mantra by Shankar Mahadevan

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