Meen Rashi Santan Prapti K Upay

मीन राशि में संतान योग, मीन राशि संतान प्राप्ति, मीन राशि पुत्र प्राप्ति योग, Meen Rashi Santan Yog, मीन राशि संतान योग, Meen राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Meen Rashi Santan Prapti Yog, मीन राशि संतान Prapti योग, मीन राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, मीन राशि को संतान सुख, Meen Rashi Putra Prapti Yog, मीन राशि संतान प्राप्ति, मीन लग्न में संतान योग, मीन राशि संतान प्राप्ति के उपाय, मीन राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Pisces Putra Prapti Yog, मीन राशि लाल किताब के टोटके, मीन राशि लाल किताब के नियम, Meen Rashi Lal Kitab Ke Totke Upay Hindi

मीन राशि में संतान योग, मीन राशि संतान प्राप्ति, मीन राशि पुत्र प्राप्ति योग, Meen Rashi Santan Yog, मीन राशि संतान योग, Meen राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Meen Rashi Santan Prapti Yog, मीन राशि संतान Prapti योग, मीन राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, मीन राशि को संतान सुख, Meen Rashi Putra Prapti Yog, मीन राशि संतान प्राप्ति, मीन लग्न में संतान योग, मीन राशि संतान प्राप्ति के उपाय, मीन राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Pisces Putra Prapti Yog, मीन राशि लाल किताब के टोटके, मीन राशि लाल किताब के नियम, Meen Rashi Lal Kitab Ke Totke Upay Hindi

मीन राशि संतान प्राप्ति, Meen Rashi Santan Prapti Yog
सारे संसारिक सुखों में अगर कोई सुख सबसे बड़ा है तो वो है मां बाप बनने का सुख. परंतु कई बार कुछ दंपति को संतान प्राप्ति का यह सुख मिल नहीं पाता है. यदि किसी मीन राशि की दंपति को संतान की प्राप्ति में समस्या आ रही हो, तो ऐसे व्यक्तियों को अपने राशि के अनुसार पूजा पाठ करना चाहिए. इस लेख में लिखे गये सरल उपायों को अपना कर मीन राशि के लोग संतान की प्राप्ति अति ही सहजता के साथ कर सकते हैं. किंतु उपायों को अति सावधानी से व श्रद्धा के साथ करना अति आवश्यक होता है. मीन राशि के जातकों के लिए संतान प्राप्ति के उपाय निम्नवत हैं-
मीन राशि के लोगों को संतान प्राप्ति न होने के ज्योतिषीय कारण
1. दंपति की कुण्डली में नाड़ी दोष होने पर संतान नहीं होती यदि होती भी है तो उनमें शारीरिक विकार होता है. उसके लिए विवाह करने से पहले ही ज्योतिष के उपाय करें.
2. परिवार में पितृ दोष लगने के कारण संतान प्राप्ति में विघ्न उत्पन्न होते है.
3. पत्नी का बृहस्पत ग्रह नीच का होने पर ऐसी स्थिति बनती है.
4. पूर्व जन्म में हुए सर्पशाप, पितृश्राप, माताश्राप, भ्राताश्राप, प्रेतश्राप या कुलदेवता श्राप आदि के चलते संतान विलंब से होती है या नहीं भी होती है.
5. पिछले जन्म में अगर आपने पेड़-पौधे भी कटवाये हैं, तो यह स्थिति उत्पन्न हो जाती है. इसलिए कुंडली की विधिवत विवेचना कर इसका उपाय अपेक्षित है.

मीन राशि के लिए संतान प्राप्ति के उपाय, Meen Rashi Santan Prapti Ke Upay
A. संतान प्राप्ति के लिए अपने इष्ट देव की करें पूजा
इष्ट देव का अर्थ है अपनी राशि के पसंद के देवता. मीन राशि के लोगों को अपनी राशि के अनुसार इष्ट देव की पूजा करने से ये फायदा होता कि कुंडली में चाहे कितने भी ग्रह दोष क्यों न हों, अगर इष्ट देव प्रसन्न हैं तो यह सभी दोष व्यक्ति को अधिक परेशान नहीं करते. इसलिए अगर कोई मीन राशि की दंपति संतान सुख से वंचित है तो वह अपने राशि के अनुसार ईष्ट देव की पूजा कर संतान सुख पा सकता है. अरुण संहिता जिसे लाल किताब के नाम से भी जाना जाता है, के अनुसार व्यक्ति के पूर्व जन्म में किए गए कर्म के आधार पर इष्ट देवता का निर्धारण होता है और इसके लिए जन्म कुंडली देखी जाती है. कुंडली का पंचम भाव इष्ट का भाव माना जाता है. इस भाव में जो राशि होती है उसके ग्रह के देवता ही हमारे इष्ट देव कहलाते हैं. राशि चक्र में अंतिम अर्थात 12वें नंबर की राशि है मीन राशि. इसके ग्रह स्वामी हैं गुरु और इष्टदेव हैं विष्णु जी और लक्ष्मी जी. इसलिए मीन राशि के जातक संतान प्राप्ति के लिए विष्णु जी और लक्ष्मी जी की विधिवत् पूजा पाठ कर संतान प्राप्ति का सुख प्राप्त कर सकते हैं.
मीन राशि स्वामी ग्रह – गुरु
मीन राशि इष्ट देव – विष्णु जी और लक्ष्मी जी
यहां जानिए संतान प्राप्ति के लिए किस तरह से करें विष्णु जी और लक्ष्मी जी की पूजा-

1. भगवान विष्णु जी की पूजा विधि (Vishnu Puja Vidhi)
मीन राशि के लोग गुरुवार के दिन सुर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहन लें. इसके बाद एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान विष्णु की तस्वीर या मूर्ति रखें. ध्यान रहे कि विष्णु पूजन से पहले प्रथम पूज्य गणेश जी की पूजा करें. इसके लिए पहले गणेश जी को स्नान कराएं, वस्त्र अर्पित करें, तत्पश्चात पुष्प, अक्षत अर्पित करें, फिर उसके बाद ही भगवान विष्णु का पूजन शुरू करें. विष्णु पूजन के लिए सबसे पहले भगवान विष्णु का आवाहन करें, उन्हें स्नान कराएं, पंचामृत एवं जल से उन को शुद्ध करें. अब विष्णु जी को वस्त्र पहनाएं तथा आभूषण व यज्ञोपवीत के साथ साथ पीले फूलों की माला भी पहनाएं. विष्णु जी को पीला रंग अधिक प्रिय है. इसलिए उनके आगे पीले फूल और पीले रंग के फलों का भोग लगाएं. तुलसीदल भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इसका प्रयोग अवश्य करें, और ध्यान रखें भगवान विष्णु के पूजन में चावलों का प्रयोग सामान्यतः नहीं किया जाता है, तो इसकी जगह पर आप तिल का प्रयोग कर सकते हैं. अब सुगंधित इत्र के साथ माथे पर तिलक अर्पित करें. ध्यान रखें कि तिलक में अष्टगंध का प्रयोग किया जाता है. तत्पश्चात धूप, दीप अर्पित करें. इसके बाद विष्णु जी की आरती जरूर करें. आरती के बाद मीन राशि के जातक विष्णु जी को नैवेद्य अर्पित करें और मंत्र का जाप करें – ॐ नमः नारायणाय…गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है, इसलिए मीन राशि के लोग इस दिन केले के पेड़ की पूजा जरूर करें. इस विधि से पूजा करने से मीन राशि के लोगों को भगवान विष्णु से अवश्य ही संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होगा.

2. लक्ष्मी जी की पूजा विधि (Laxmi Ji Ki Puja Vidhi)
लक्ष्मी जी की पूजा शुरू करने से पहले मीन राशि के लोग घर की अच्छी तरह से सफाई करें. पूजा की प्रक्रिया शुरू करने से पहले शुद्धिकरण के लिए पूरे घर में और परिवार के सभी सदस्यों पर गंगा जल छिड़कें. जहां पूजा की जानी है उस स्थान पर एक चौकी स्थापित करें. फिर चौकी पर एक लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर अनाज के दाने फैलाएं. हल्दी पाउडर से एक कमल बनाएं और उस पर देवी लक्ष्मी और गणेश की मूर्ति रखें. तांबे के बर्तन में तीन चौथाई पानी भरकर इसमें सिक्के, सुपारी, किशमिश, लौंग, सूखे मेवे और इलायची डाल दें. बर्तन के ऊपर आम के पत्ते गोलाकार में रखें और इसके बीच में एक नारियल रखें. कलश को सिंदूर और फूलों से सजाएं. लक्ष्मी पूजा से पहले गणेश जी की पूजा करें और फिर लक्ष्मी जी की पूजा करें. मूर्तियों को शुद्ध जल, पंचामृत, चंदन और गुलाब जल से स्नान कराएं. फिर इन्हें हल्दी पाउडर, चंदन का लेप और सिंदूर से सजाएं. इसके बाद मूर्तियों के चारों ओर माला और फूल चढ़ाएं.
बताशा, लड्डू, सुपारी, सूखे मेवे, नारियल, मिठाई, घर की रसोई में बने व्यंजन का भोग लगाएं. इसके अलावा कुछ सिक्के भी पूजा में रखें. मंत्र जाप के दौरान दीपक और अगरबत्ती जलाएं और फूल चढ़ाएं. देवी लक्ष्मी की कहानी पढ़ें. कहानी के अंत में देवी की मूर्ति पर फूल चढ़ाए जाते हैं और मिठाई का भोग लगाया जाता है. आखिर में आरती गाकर पूजा का समापन किया जाता है. फिर देवी से समृद्धि और धन की प्रार्थना की जाती है और प्रसाद के रूप में मिठाई का सेवन किया जाता है. पूजा में स्थापित किये कलश के जल से सिक्का निकाल कर बाकि का जल किसी पेड़ में डाल दें और नारियल व सिक्के को किसी गणेश जी के मंदिर में दान कर दें. इस विधि से लक्ष्मी जी की पूजा करने से मीन राशि के लोगों को अवश्य ही माता लक्ष्मी के आशीर्वाद से संतान प्राप्त होगी.

B. ज्योर्तिलिंग पर पूजा करने से होगी संतान सुख की प्राप्ति
देवाधिदेव भगवान् महादेव सर्वशक्तिमान हैं. भगवान भोलेनाथ ऐसे देव हैं जो थोड़ी सी पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं. संहारक के तौर पर पूज्य भगवान शंकर बड़े दयालु हैं. उनके अभिषेक से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी प्रकार विभिन्न राशि के व्यक्तियों के लिए शास्त्र अलग-अलग ज्योर्तिलिंगों की पूजा का महत्व बताया गया है. भगवान शंकर के पृथ्वी पर 12 ज्योर्तिलिंग हैं. भगवान शिव के सभी ज्योतिर्लिंगों को अपना अलग महत्व है. शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर के ये सभी ज्योजिर्लिंग प्राणियों को दु:खों से मुक्ति दिलाने में मददगार है. इन सभी ज्योर्तिलिंगों को 12 राशियों से भी जोड़कर देखा जाता है |
इस आधार पर मीन राशि के जातकों को महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित को गिरीशनेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए. इस ज्योर्तिलिंग का संबंध मीन राशि से है. इस राशि वाले जातकों को सावन के महीने में दूध में केसर डालकर शिवलिंग को स्नान कराना चाहिए. स्नान के पश्चात शिव को गाय का घी और शहद अर्पित करें. कनेर का पीला फूल और विल्वपत्र शिव को चढ़ाना चाहिए. गिरीशनेश्वर ज्योतिर्लिंग 12वें ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रसिद्ध है. यह तीर्थ स्थल दौलताबाद (देवगिरि) से 30 किमी की दूरी पर स्थित है जो कि गिरीशनेश्वर ज्योतिर्लिंग वेरूल नामक गांव में स्थित है. औरंगाबाद जो एलोरा गुफाओं के पास है. ऐतिहासिक मंदिर जो कि लाल चटटानों से निर्मित मंदिर जिसमें 5 परतों का सिकारा है. 12 ज्योतिर्लिंग अभिव्यक्ति में से एक के निवास के रूप में प्रतिष्ठित एक प्राचीन तीर्थ स्थान है.

C.  संतान प्राप्ति के लिए करें बृहस्पतिवार (गुरुवार) का व्रत
ज्योतिष के अनुसार बृहस्पतिवार (गुरुवार) को बृहस्पतिग्रह और भगवान विष्णु का दिन माना जाता है. बृहस्पतिवार (गुरुवार) को भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को गुरु का दर्जा दिया गया है. भगवान विष्णु को ही बृहस्पति भगवान भी कहते हैं. भगवान बृहस्पति की पूजा करने से ज्ञान, धर्म, संतान, विवाह और भाग्य बनते हैं. इसलिए बृहस्पति देव के हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए मीन राशि के लोग गुरुवार का व्रत करें. कहा जाता है कि अगर किसी लड़की की शादी नहीं हो रही है या संतान प्राप्ति मे बाधा आ रही है तो उसे गुरुवार का व्रत करना चाहिए. गुरु ग्रह की कृपा मीन राशि के लोग संतान प्राप्ति के आशीर्वाद पा सकते हैं.
कैसे करें बृहस्पतिवार व्रत की शुरुआत – मीन राशि के जातक पौष माह को छोड़ कर किसी भी हिंदी महीने से बृहस्पतिवार के व्रत की शुरूआत कर सकते हैं. व्रत की शुरुआत शुक्ल पक्ष से करना शुभ माना जाता है. हर व्रत की तरह गुरुवार व्रत का भी अलग विधान होता है. नियम के अनुसार, यह व्रत 16 गुरुवार तक लगातार रखा जाता है और 17 वें गुरुवार को व्रत का उद्यापन किया जाता है. लेकिन यदि महिलाओं को इस बीच मासिक धर्म होता है तो उस गुरुवार को छोड़ कर अगले से व्रत करना चाहिए.
बृहस्पतिवार व्रत की विधि – मीन राशि के जातकों को बृहस्पतिवार के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र की स्थापना करनी चाहिए. भगवान विष्णु को पीला वस्त्र अर्पित कर, उन्हें पीले फूल, हल्दी तथा गुड़ और चना का भोग लगाया जाता है. हल्दी मिले जल से भगवान का अभिषेक किया जाता है. इसके बाद हाथ में गुड़ और चना लेकर बृहस्पति देव की कथा का पाठ करना चाहिए. बृहस्पतिवार की आरती की जाता है तथा दिन भर फलाहार व्रत रखना चाहिए. व्रत का पारण अगले दिन स्नान और दान के साथ करना चाहिए. बृहस्पतिवार के दिन केला और पीली वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है. इस विधि से व्रत व पूजा कर मीन राशि के लोग अवश्य ही संतान प्राप्ति का सुख पा सकते हैं.

D. गुरुवार के दिन ये उपाय कर पाएं संतान सुख
यदि मीन राशि के जातक की कुंडली में बृहस्पति की स्थिति कमजोर हो तो इससे व्यक्ति के विवाह में देरी, संतान प्राप्ति में कठिनाई और जीवन के अन्य क्षेत्रों में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. बृहस्पति देव के हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए मीन राशि के लोग गुरुवार के दिन ये उपाय कर सकते हैं.
1. पति पत्नी गुरूवार का व्रत रखें या इस दिन पीले वस्त्र पहने, पीली वस्तुओं का दान करें यथासंभव पीला भोजन ही करें. अति शीघ्र योग्य संतान की प्राप्ति होगी
2. मीन राशि के लोग सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने के बाद भगवान् विष्णु की पूजा अर्चना करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. गुरुवार का व्रत रखें और यदि संभव हो तो केले के पौधे में जल में गुड़ और चने की दाल मिलाकर अर्पण करें. इसके साथ ही बृस्पतिदेव की कथा या सत्यनारायण भगवान की कथा सुने. शीघ्र ही संतान की प्राप्ति होगी.
3. गुरु दोष को दूर करने के लिए मीन राशि के लोग गुरुवार के दिन अपने नहाने के पानी में चुटकी भर हल्दी डालकर स्नान करें व नहाते वक्त ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं. इससे कुंडली में गुरु ग्रह के दोष दूर होते हैं.
4. माता बनने की इच्छुक महिला को चाहिए गुरुवार के दिन गेंहू के आटे की 2 मोटी लोई बनाकर उसमें भीगी चने की दाल और थोड़ी सी हल्दी मिलाकर नियमपूर्वक गाय को खिलाएं. शीघ्र ही उसकी गोद भर जायेगी.
5. यदि मीन राशि के जातक के लग्न कुंडली में पंचमेश पीड़ित हैं तो उनकी आराधना करें. संतान सुख की प्राप्ति के लिए गुरु ग्रह की पूजा करें. गुरुवार के दिन गुड़ दान करें. गुरु ग्रह को मजबूत बनाने के लिए इन मंत्रों का जाप करें-
देवानां च ऋषिणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम्. बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्..
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः. ह्रीं गुरवे नमः. बृं बृहस्पतये नमः.
6. गुरुवार के दिन स्त्रियों को पीले धागे में पिसी कौड़ी को कमर पर बांधने से प्रबल संतान के योग बनते है.
7. दंपति गुरुवार का व्रत रखकर पीले वस्त्र धारण करें, पीली वस्तुओं का दान करें यथासंभव पीला भोजन ही करें.
8. गुरुवार के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने और उन्हें दान दक्षिणा देने से मीन राशि के लोगों को विशेष फल की प्राप्ति होती है.
9. शुक्ल पक्ष में बरगद के पत्ते को धोकर साफ करके उस पर कुंकुम से स्वस्तिक (Swastika) बनाकर उस पर थोड़े से अक्षत और सुपारी रखकर सूर्यास्त से पहले किसी मंदिर में अर्पित कर दें और प्रभु से संतान का वरदान देने के लिये प्रार्थना करें. निश्चय ही संतान की प्राप्ति होगी.
10. यदि किसी दंपति को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है तो वो स्त्री शुक्ल पक्ष में अभिमंत्रित संतान गोपाल यंत्र (Santan Gopal Yantra) को अपने घर में स्थापित करके लगातार 16 गुरुवार को व्रत रखकर केले और पीपल के वृक्ष की सेवा करें उनमें दूध चीनी मिश्रित जल चढ़ाकर धूप अगरबत्ती जलाये. फिर मासिक धर्म (Menstrual) से ठीक तेहरवीं रात्रि में अपने पति से रमण करें संतान सुख अति शीघ्र प्राप्त होगा.

E. संतान प्राप्ति के लिए लाल किताब के उपाय
बृहस्पति को अन्य सभी ग्रहों का गुरु और ब्रह्मा जी का प्रतीक माना गया है. बृहस्पति की कृपा से जीवन में ज्ञान, धर्म, संतान और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, इसलिए कुंडली में बृहस्पति की स्थिति प्रबल होने बहुत आवश्यक है. जब जन्म कुंडली में बृहस्पति की स्थिति कमजोर हो तो, लाल किताब से संबंधित निम्न उपाय अवश्य करना चाहिए. इससे संतान प्राप्ति में आने वाली बाधाएं दूर होगी और मीन राशि के लोगों को शीघ्र ही संतान सुख की प्राप्ति होगी.
1. किसी भी गुरुवार को पीले धागे में पीली कौड़ी को कमर में बांधने से संतान प्राप्ति का प्रबल योग बनता है.
2. हल्दी की गांठ पीले रंग के धागे में बांधकर दायीं भुजा पर बांधना चाहिए.
3. सोने की चेन और बृहस्पति यंत्र धारण करना चाहिए.
4. घर में पीले सूरजमुखी का पौधा लगाना चाहिए.
5. पीपल के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करना चाहिए.
6. कुंडली में गुरु की स्थिति मजबूत बनाने के लिए बृहस्पतिवार के दिन किसी को उधार देते वक़्त ख़ास सावधानी बरतें. धन का लेन-देन करने से गुरु कमजोर होता है.
7. 27 गुरुवार तक केसर का तिलक लगाना और केसर की पुड़िया पीले रंग के कपड़े या कागज में अपने पास रखना चाहिए.
8. हर गुरुवार को भिखारियों को गुड़ का दान देने से भी संतान सुख प्राप्त होता है.
9. पीले रंग के वस्त्र पहनना और घर में पीले रंग के पर्दे लगाना शुभ होता है.
10. गुरुवार के दिन मंदिर में केले के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाना चाहिए.
11. गुरुवार के दिन ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः!’ मंत्र का जाप करें.
12. व्यक्ति को माता-पिता, गुरुजन और अन्य पूज्यनीय व्यक्तियों के प्रति आदर और सम्मान का भाव रखना चाहिए. गुरू, पुरोहित और शिक्षकों में बृहस्पति का निवास होता है अत: इनकी सेवा से भी बृहस्पति के दुष्प्रभाव में कमी आती है.
13. गुरुवार को बृहस्पति देव की पूजा में गंध, अक्षत, पीले फूल, पीले पकवान और पीले वस्त्र का दान करें.

F. संतान सुख के लिए बृहस्पतिवार को करें इन चीजों का दान
1. बृहस्पति ग्रह की शांति और उससे शुभ फल प्राप्त करने के लिए मीन राशि के लोग चीनी, केला, पीला कपड़ा, केसर, नमक, मिठाई, हल्दी, पीले फूल और पीला भोजन दान करें. संतान सुख की प्रप्ति होगी.
3. इस ग्रह की शांति के लिए बृहस्पति से संबंधित रत्न का दान करना भी श्रेष्ठ होता है. दान करते समय आपको ध्यान रहे कि दिन बृहस्पतिवार हो और सुबह का समय हो. किसी ब्राह्मण, गुरू अथवा पुरोहित को दान देना विशेष फलदायक होता है. शीघ्र ही संतान सुख मिलेगा.
4. जिन लोगों का बृहस्पति कमजोर हो उन लोगों को केला और पीले रंग की मिठाईयां गरीबों, पक्षियों विशेषकर कौओं को देना चाहिए. इस उपाय से संतान सुख मिलेगा.
5. निर्धन और ब्राह्मणों को दही चावल खिलाना चाहिए. इससे संतान सुख में आने वाली बाधाएं दूर होगी.

G. पितृ दोष के उपाय से मीन राशि को मिलेगा संतान सुख
मानव जीवन में कई तरह के दोष होते हैं जिनमें से एक है पितृदोष, अपने पूर्वजों के अंतिम संस्कार में किसी भी प्रकार की भूल हो जाने के कारण लोगों में पितृदोष चढ़ जाता है. ऐसा माना जाता है कि यदि व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है तो उस व्यक्ति को जीवन में संतान का सुख नहीं मिल पाता है. अगर मिलता भी है तो कई बार संतान विकलांग होती है, मंदबुद्धि होती है या फिर चरित्रहीन होती है या फिर कई बार बच्‍चे की पैदा होते ही मृत्‍यु हो जाती है. इसलिए मीन राशि के जो जातक पितृदोष पीड़ित हैं वे संतान सुख के लिए अपनी कुंडली में मौजूद पितृ दोष को दूर करने का उपाय करें.
1. मीन राशि के लोग पूर्वजों के निधन की तिथि पर ब्राह्मणों को श्रृद्धापूर्वक भोजन करवाएं और यथाशक्ति दान भी करें.
2. कुंडली में पितृ दोष होने पर मीन राशि के व्‍यक्ति को दक्षिण दिशा में पितरों की फोटो लगाकर उनको रोजाना माला चढ़ाकर उनका स्‍मरण करना चाहिए. ऐसा करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलने के साथ ही पितृदोष के प्रभाव समाप्‍त होता है.
3. कुंडली में पितृदोष दूर करने के लिए मीन राशि के जातक किसी गरीब कन्‍या का विवाह करें या फिर विवाह में मदद करें, इससे भी आपको लाभ मिलेगा.
4. मीन राशि के जातक शाम के वक्‍त रोजाना दक्षिण दिशा में एक दीपक जरूर जलाएं. रोजाना नहीं जला सकते हैं तो कम से कम पितर पक्ष में जरूर जलाएं.
5. घर के पास में लगे पीपल के पेड़ पर मीन राशि के लोग दोपहर में जल चढ़ाएं. पुष्‍प, अक्षत, दूध, गंगाजल और काले तिल भी चढ़ाएं. पितरजनों को याद करें. इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होता है.

H. नाड़ी दोष का उपाय कर पाएं संतान सुख
विवाह के समय कुंडली मिलान में बनने वाले दोषों में से एक है नाड़ी दोष. इस दोष के होने पर वैवाहिक स्थिति कभी ठीक नहीं रहती, दंपत्ति संतान सुख से वंचित रह सकते हैं साथ ही वर-वधू के जीवन पर मृत्यु का संकट मंडराया रहता है. नाड़ी दोष निवारण के लिए भगवान शिव की पूजा की जाती है. पूरे विधि-विधान से महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए शिव को प्रसन्न किया जाता है. शिवजी की कृपा से ही नाड़ी दोष शांत होता है.
1. महामृत्युंजय मंत्र का जप सबसे आसान उपाय है. वर और कन्या दोनों की नाड़ी मध्य में हो तो पुरुष को प्राण का भय रहता है. इस स्थिति में पुरुष को महामृत्युंजय जाप कराना अति आवश्यक होता है. अगर वर और कन्या दोनों की नाड़ी आदि हो तो स्त्री को प्राण का भय रहता है. इस स्थिति में कन्या महामृत्युजंय जाप कराना अति आवश्यक होता है.
2. ब्राह्मण को स्वर्ण-नाड़ी, अनाज, कपड़ा और गाय भेंट करना भी नाड़ी दोष के निवारण का एक तरीका है.
3. नाड़ी दोष वाली महिला का विवाह भी वास्तविक विवाह से पहले भगवान विष्णु से होता है और इसे नाड़ी दोष अपवाद और उपाय माना जाता है.
4. इसलिए, शादी से पहले किसी भी कुंडली मिलान के लिए गुण मिलान करवाना बहुत महत्वपूर्ण है. आपको नाड़ी दोष अपवाद और उपचार के लिए एक वास्तविक ज्योतिषी से परामर्श करने की सलाह दी जाती है.

मीन राशि में संतान योग, मीन राशि संतान प्राप्ति, मीन राशि पुत्र प्राप्ति योग, Meen Rashi Santan Yog, मीन राशि संतान योग, Meen राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Meen Rashi Santan Prapti Yog, मीन राशि संतान Prapti योग, मीन राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, मीन राशि को संतान सुख, Meen Rashi Putra Prapti Yog, मीन राशि संतान प्राप्ति, मीन लग्न में संतान योग, मीन राशि संतान प्राप्ति के उपाय, मीन राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Pisces Putra Prapti Yog, मीन राशि लाल किताब के टोटके, मीन राशि लाल किताब के नियम, Meen Rashi Lal Kitab Ke Totke Upay Hindi

Kumbh Rashi Santan Prapti K Upay

कुंभ राशि में संतान योग, कुंभ राशि संतान प्राप्ति, कुम्भ राशि पुत्र प्राप्ति योग, Kumbha Rashi Santan Yog, कुंभ राशि संतान योग, Kumbha राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Kumbha Rashi Santan Prapti Yog, कुम्भ राशि संतान Prapti योग, कुम्भ राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, कुम्भ राशि को संतान सुख, Kumbha Rashi Putra Prapti Yog, कुम्भ राशि संतान प्राप्ति, कुम्भ लग्न में संतान योग, कुम्भ राशि संतान प्राप्ति के उपाय, कुम्भ राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Aquarius Putra Prapti Yog, लाल किताब के टोटके, लाल किताब के नियम, Lal Kitab Ke Totke Upay Hindi

कुंभ राशि में संतान योग, कुंभ राशि संतान प्राप्ति, कुम्भ राशि पुत्र प्राप्ति योग, Kumbha Rashi Santan Yog, कुंभ राशि संतान योग, Kumbha राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Kumbha Rashi Santan Prapti Yog, कुम्भ राशि संतान Prapti योग, कुम्भ राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, कुम्भ राशि को संतान सुख, Kumbha Rashi Putra Prapti Yog, कुम्भ राशि संतान प्राप्ति, कुम्भ लग्न में संतान योग, कुम्भ राशि संतान प्राप्ति के उपाय, कुम्भ राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Aquarius Putra Prapti Yog, लाल किताब के टोटके, लाल किताब के नियम, Lal Kitab Ke Totke Upay Hindi

कुंभ राशि में संतान योग, Kumbha Rashi Santan Yog
संतान प्राप्ति का सुख जीवन का सबसे बड़ा सुख है, इस सुख को पाने के लिए व्यक्ति क्या-क्या नहीं करता है. लेकिन फिर भी कई बार सारे उपाय करने के बावजूद संतान का सुख भोगने में नाकाम रहते हैं. ज्योतिष के अनुसार अपनी राशि के अनुसार ही देवी-देवताओं की पूजा करने से वांछित फल की प्राप्ति हो सकती है. कौन-सा व्यक्ति किस देवता की पूजा करे, इसके लिए अपने नामाक्षर की राशि तथा राशि के अंशों की जानकारी प्राप्त करके उस अंश के अनुसार देवता की पूजा करने से अवश्य ही लाभ की प्राप्ति होती है. अगर आपकी राशि कुंभ है और आप भी संतान सुख पाना चाहते हैं तो यहां दिए जा रहे उपाय करें. इन उपायों से आपकी जिंदगी में खुशियां जल्द ही आएंगी.

कुंभ राशि के लोगों को संतान प्राप्ति न होने के ज्योतिषीय कारण
1. दंपति की कुण्डली में नाड़ी दोष होने पर संतान नहीं होती यदि होती भी है तो उनमें शारीरिक विकार होता है. उसके लिए विवाह करने से पहले ही ज्योतिष के उपाय करें.
2. परिवार में पितृ दोष लगने के कारण संतान प्राप्ति में विघ्न उत्पन्न होते है.
3. शनि दोष होने पर संतान प्राप्ति में बाधा आती है.
4. पूर्व जन्म में हुए सर्पशाप, पितृश्राप, माताश्राप, भ्राताश्राप, प्रेतश्राप या कुलदेवता श्राप आदि के चलते संतान विलंब से होती है या नहीं भी होती है.
5. पिछले जन्म में अगर आपने पेड़-पौधे भी कटवाये हैं, तो यह स्थिति उत्पन्न हो जाती है. इसलिए कुंडली की विधिवत विवेचना कर इसका उपाय अपेक्षित है.

कुंभ राशि के लिए संतान प्राप्ति के उपाय, Kumbh Rashi Santan Prapti Ke Upay
A. संतान प्राप्ति के लिए कुंभ राशि के लोग करें इष्ट देव की पूजा
इष्ट देव का अर्थ है अपनी राशि के पसंद के देवता. अरुण संहिता जिसे लाल किताब के नाम से भी जाना जाता है, के अनुसार व्यक्ति के पूर्व जन्म में किए गए कर्म के आधार पर इष्ट देवता का निर्धारण होता है और इसके लिए जन्म कुंडली देखी जाती है. कुंडली का पंचम भाव इष्ट का भाव माना जाता है. इस भाव में जो राशि होती है उसके ग्रह के देवता ही हमारे इष्ट देव कहलाते हैं. कुंभ राशि का स्वामी ग्रह शनि है और  इष्टदेव काली माता, भैरव या शनिदेव, हनुमान जी हैं. कुंभ राशि के व्यक्ति को अपने इष्ट देव काली माता, भैरव या शनिदेव, हनुमान जी की पूजा करना चाहिए. इष्ट देव की पूजा करने से ये फायदा होता कि कुंडली में चाहे कितने भी ग्रह दोष क्यों न हों, अगर इष्ट देव प्रसन्न हैं तो यह सभी दोष व्यक्ति को अधिक परेशान नहीं करते. इसलिए अगर कुंभ राशि का कोई दंपति संतान सुख से वंचित है तो वह अपने राशि के अनुसार ईष्ट देव की पूजा कर संतान सुख पा सकता है. यहां जानिए किस तरह से करें इष्ट देव काली माता, भैरव या शनिदेव, हनुमान जी की पूजा, ताकि जल्द से जल्द मिल सके संतान प्राप्ति का आशीर्वाद-

1. काली माता पूजा विधि, Kali Mata Puja Vidhi
घर में मां की पूजा करना बेहद आसान है. इसके लिए आप घर के मंदिर में मां काली की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. माता काली के चरणों में और माथे पर रोली, चंदन और कुमकुम का तिलक लगाना है. मां काली की पूजा में पुष्प लाल रंग का और कपड़े काले रंग के होने चाहिए. इसके बाद धूपबत्ती बत्ती जलानी है और धूपबत्ती को माता काली के साथ-साथ अन्य देवी देवता को भी दिखाना है और तीन बार आपको ऐसा बोलना है जय सभी देवी देवताओं की, जय सभी संतो की, जय सभी पितरों की. इसके बाद आपको वहीं पर जमीन पर बैठकर माता काली की आरती या फिर माता काली की चालीसा का पाठ करना है. पाठ पूरा होने के बाद आपको माता काली के चरणों में प्रणाम करना है. ध्यान रखें कि आपको एक आसन पर बैठकर हर शनिवार को मां काली के क्रीं क्रीं क्रीं स्वाहा मंत्र का 108 बार जप करना है. काली गायत्री मंत्र या मां के बीज मंत्रों का जप करना बेहद फलदायी माना जाता है. जप के बाद प्रसाद के रूप में मां काली को भोग अवश्य अर्पण करें. अपनी इच्छा पूरी होने तक माता काली की पूजा जारी रखें. यदि आप विशेष उपासना करना चाहते हैं तो सवा लाख, ढाई लाख, पांच लाख मंत्र का जप अपनी सुविधा अनुसार कर सकते हैं.

2. काल भैरव की पूजा विधि, Kaal Bhairav Puja Vidhi
शनिवार के दिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठ कर नित्य-क्रिया आदि कर स्वच्छ हो जाएं. काले रंग का कपड़ा पहने. एक लकड़ी के पाट पर सबसे पहले शिव और पार्वतीजी के चित्र को स्थापित करें. फिर काल भैरव के चित्र को स्थापित करें. जल का छिड़काव करने के बाद सभी को गुलाब के फूलों का हार पहनाएं या फूल चढ़ाएं. अब चौमुखी दीपक जलाएं और साथ ही धूप जलाएं. कंकू, हल्दी से सभी को तिलक लगाकर हाथ में गंगा जल लेकर अब व्रत या पूजा करने का संकल्प लें. अब शिव और पार्वतीजी का पूजन करें और उनकी आरती उतारें. फिर भगवान भैरव का पूजन करें. भैरव जी को काले तिल, उड़द अर्पित करें. हलुआ, पूरी और मदिरा भैरव नाथ के प्रिय भोग हैं. इसके अलावा भैरव नाथ को इमरती, जलेबी और 5 तरह की मिठाइयां भी अर्पित कर सकते हैं. अब काल भैरव की आरती उतारें. इस दौरान शिव चालीसा और भैरव चालीसा पढ़ें. ह्रीं उन्मत्त भैरवाय नमः का जाप करें. इसके उपरान्त काल भैरव की आराधना करें. अब पितरों को याद करें और उनका श्राद्ध करें. पूजा सम्पूर्ण होने के बाद काले कुत्‍ते को मीठी रोटियां खिलाएं या कच्चा दूध पिलाएं. हो सके तो आज के दिन बिल्वपत्रों पर सफेद या लाल चंदन से ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर शिव लिंग पर चढ़ाएं.

3. शनिदेव पूजा विधि, Shani Dev Puja Vidhi
सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें. स्नान करने के बाद स्वच्छ काले रंग का वस्त्र धारंण करें. घर के मंदिर में तेल का दीपक प्रज्वलित करें. गणेश जी के पूजन से पूजा प्रारंभ करें. भगवान शिव औऱ हनुमान जी को फल और फूल चढ़ाएं. अब शनि देव को नीले लाजवन्ती का फूल, तिल, तेल, गुड़ अर्पण करना चाहिए. पूजा के अंत में 21 बार शनिदेव महाराज के मंत्रों ‘ओम शनैश्चराय विदमहे सूर्यापुत्राय धीमहि.. तन्नो मंद: प्रचोदयात..’ का जाप करें और अंत में कपूर से आरती करें. शनि चालीसा का पाठ करें. पूरे दिन उपवास करें और शाम को पूजा दोहराकर पूजा का समापन करें. शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा के पश्चात उनसे अपने अपराधों एवं जाने अनजाने जो भी आपसे पाप कर्म हुआ हो उसके लिए क्षमा याचना करनी चाहिए. शनि महाराज की पूजा के पश्चात राहु और केतु की पूजा भी करनी चाहिए. इस दिन शनि भक्तों को पीपल में जल देना चाहिए और पीपल में सूत्र बांधकर सात बार परिक्रमा करनी चाहिए.

4. हनुमान जी पूजा विधि, Hanuman Puja Vidhi
हनुमान जी की पूजा जितनी सरल है उतनी ही कठिन भी है. मंगलवार के दिन सबसे पहले सुबह उठकर स्नान आदि कर निवृत होकर लाल वस्त्र धारण करें. कोशिश करें की आपने जो वस्त्र पहना है वह सिला हुआ ना हो. इस दिन आप मंदिर व घर कहीं भी पूजा-पाठ कर सकते हैं. यदि आप घर में पूजा करते हैं तो ईशान कोण को साफ कर यहां पर एक चौकी स्थापित करें और उस पर लाल वस्त्र बिछाएं. फिर उस पर हनुमान जी की मूर्ती स्थापित करें और वहां पर भगवान श्री राम और माता सीता की भी प्रतिमा अवश्य रखें. इसके बाद घी का दीपक और धूप दीप जलाकर सुंदर कांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंत्रों का जाप करें. फिर लाल फूल, लाल सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं. इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ कर हनुमान जी की आरती करें और भगवान को गुड़, केले और लड्डू का भोग लगाएं. तथा परिवार के सदस्यों को प्रसाद वितरित करें. वहीं यदि आपने मंगलावर का व्रत रखा है तो ध्यान रहे कि आपको इस दिन सिर्फ एक बार शाम के समय भोजन करना है. इस दौरान आप अपने भोजन में केवल मीठा भोजन सम्मिलित करें. दिन में आप दूध, केले और मीठे फलहार को शामिल करें.

B. शनिवार का व्रत करने से कुंभ राशि को मिलेगा संतान सुख
शनिवार के दिन व्रत करने से शनि ग्रह का दोष समाप्त हो जाता है. भविष्य में आने वाले प्रकोप से भी बचा जा सकता है. साढ़ेसाती और ढैय्या से छुटकारा मिलता है और बिगड़ा काम पूरा होता है. इससे नौकरी और व्यापार में सफलता तो मिलती ही है, साथ ही साथ संतान सुख, समृद्धि, मान-सम्मान और धन-यश की भी प्राप्ति होती है. वैसे तो शनिवार का व्रत कभी भी शुरू किया जा सकता है, लेकिन श्रावण मास में शनिवार का व्रत प्रारंभ करने का विशेष महत्व माना गया है. इसलिए संतान सुख की प्राप्ति के लिए यहां दिए जा रहे विधि से शनिवार का व्रत रखें व पूजा पाठ करें.
शनिवार के दिन प्रातः काल जल्दी उठकर स्नान कर शनि देव का स्मरण करना चाहिए. इसके बाद पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करना चाहिए. लोहे से बनी शनि देवता की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराना चाहिए. इसके बाद मूर्ति को चावलों से बनाए चौबीस दल के कमल पर स्थापित करना चाहिए. इसके बाद काले तिल, फूल, धूप, काला वस्त्र व तेल आदि से पूजा करें. व्रत में पूजा के बाद शनि देव की कथा का श्रवण करें और दिनभर उनका स्मरण करते रहें. पूजन के दौरान शनि के इन 10 नामों का उच्चारण करें- कोणस्थ, कृष्ण, पिप्पला, सौरि, यम, पिंगलो, रोद्रोतको, बभ्रु, मंद, शनैश्चर.
पूजन के बाद कुंभ राशि के जातक पीपल के वृक्ष के तने पर सूत के धागे से सात परिक्रमा करें. इसके पश्चात निम्न मंत्र से शनि देव की प्रार्थना करें-
शनैश्चर नमस्तुभ्यं नमस्ते त्वथ राहवे.
केतवेअथ नमस्तुभ्यं सर्वशांतिप्रदो भव॥
इसी तरह 7 शनिवार तक व्रत करते हुए शनि के प्रकोप से सुरक्षा के लिए व संतान सुख के लिए शनि मंत्र की समिधाओं में, राहु की कुदृष्टि से सुरक्षा के लिए दूर्वा की समिधा में, केतु से सुरक्षा के लिए केतु मंत्र में कुशा की समिधा में, कृष्ण जौ, काले तिल से 108 आहुति प्रत्येक के लिए देनी चाहिए. फिर अपनी क्षमतानुसार, ब्राह्मणों को भोजन कराएं तथा लौह वस्तु, धन आदि का दान करें. इस दिन व्यक्ति को एक ही बार भोजन करना चाहिए. इसके अलावा कुंभ राशि के लोग इस दिन चीटियों को आटा डालें, ऐसा करना आपके लिए फलदायी होगा. उपर दिए गए नियम से शनि देव का व्रत रखने से दुर्भाग्य को भी सौभाग्य में बदला जा सकता है तथा संतान सुख पाया जा सकता है.

C. शनि दोष दूर करने से कुंभ राशि को होगी संतान सुख की प्राप्ति
1. प्रत्येक शनिवार को 11 बार महाराज दशरथ द्वारा लिखा गया दशरथ स्तोत्र का पाठ करें. शनि महाराज ने स्वयं दशरथ जी को वरदान दिया था कि जो व्यक्ति आपके द्वारा लिखे गये स्तोत्र का पाठ करेगा उसे मेरी दशा या शनि दशा के दौरान कष्ट का सामना नहीं करना होगा.
2. शनिवार के दिन शाम को सूर्यास्त के बाद हनुमान जी की पूजा करें, हनुमान चालीसा का पाठ करें और उन्हें सिंदूर अर्पित करें. काली तिल्ली के तेल से दीपक जलाएं. ऐसा करने से आप पर कभी भी शनि की बुरी नजर नहीं पड़ेगी.
3. प्रत्येक शनिवार के दिन शनि महाराज पीपल के वृक्ष में निवास करते हैं. इसदिन जल में चीनी एवं काला तिल मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित करके तीन बार परिक्रमा करने से शनि प्रसन्न होते हैं.
4. शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनि यंत्र की स्थापना करें. हर रोज इसके सामने सरसों के तेल का दीपक जलाकर शनि यंत्र की विधि-विधान से पूजा करें. माना जाता है कि ऐसा करने वालों पर शनि की कुदृष्टि नहीं होती.
5. शनिवार के दिन उड़द दाल की खिचड़ी खाने से भी शनि दोष के कारण प्राप्त होने वाले कष्ट में कमी आती है.
6. शनिदेव (Shani Dev) की कृपा पाने के लिए हर शनिवार शाम को किसी शनि मंदिर (Shani Mandir) में ‘ओम शं शनैश्चराय नम:’ मंत्र का जाप करें.
7. शनिवार के दिन शाम को सूर्यास्त के पूर्व पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए. ध्यान रहे कि दीपक जलाने से पहले व्यक्ति को स्नान आदि करके पवित्र हो जाना चाहिए. इससे शनिदेव भक्तों पर अपनी कृपा दृष्टि बरसाते है.
8. शनि को खुश करने के लिए ज्योतिषशास्त्र में कुछ मंत्रों का भी उल्लेख किया गया है. जैसे शनि वैदिक मंत्र ‘ओम शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये. शं योरभि स्रवन्तु न:.’
9. शनिदेव की कृपा पाने के लिए अपने माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा करें. यदि आप अपने माता-पिता से दूर रहते हैं तो उन्हें फोन से या फिर मन ही मन प्रतिदिन प्रणाम करें.
10. मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंदिर में तिल का दीया जलाने से भी शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है.
11. घर में शमी का वृक्ष लगाएं. यदि यह वृक्ष शनिवार के दिन लगाया जाय तो अति उत्तम होगा. नियमित रूप से शमी वृक्ष की पूजा करें. इससे न सिर्फ आपके घर का वास्तुदोष दूर होगा बल्कि शनिदेव की कृपा भी बनी रहेगी. मान्यता है कि इससे शनिदेव की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होंगी.
12. शनिदेव से जुड़े दोष दूर करने या फिर उनकी कृपा पाने के लिए शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय है. नियमपूर्वक शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं. इस उपाय से शनि द्वारा मिलने वाला नकारात्मक परिणाम समाप्त हो जाता है.
13. काले कपड़े में शमी वृक्ष की जड़ को बांधकर अपनी दायी बाजू पर धारण करने पर शनिदेव आपका बुरा नहीं करेंगे बल्कि संतान सुख में सहायक होंगे.
14. शनि से जुड़े दोष दूर करने या फिर उनकी कृपा पाने के लिए शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय है. नियमपूर्वक शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं. इस उपाय से शनि द्वारा मिलने वाला नकारात्मक परिणाम समाप्त हो जाता है.

D. शनिवार को करें ये उपाय कुंभ राशि को मिलेगा संतान सुख
1. यदि आप निःसंतान हैं और संतान कामना की इच्छा रखते हैं तो शनिवार के दिन किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर 11 फूल और 11 बेलपत्र से बनी माला चढ़ाएं.
2. शनिवार के दिन रोज रात में एक कटोरे में सरसों का तेल भरकर अपने पलंग के नीचे रखें. सुबह उस तेल में पकौड़े बनाकर कुत्तों को खिलाएं. इसके अलावा सरसों के तेल का परांठा या तेल लगी रोटी को काली गाय या काले कुत्ते को खिलाएं.
3. यदि शादी के कई साल बाद भी संतान सुख नहीं मिल पाया है तो शनिवार के दिन काली गाय के माथे पर कुमकुम से तिलक लगाएं. इसके बाद उसे बूंदी का लड्डू खिलाएं. फिर उसके दाहिने सींग को अपने हाथ से छूकर आशीर्वाद लें, संतान सुख मिलेगा.
4. शनिवार के दिन एक कटोरे में सरसों का तेल निकालें और उस तेल में अपना चेहरा देखें. फिर वो तेल किसी को दान कर दें. ऐसा करने से जीवन के तमाम कष्ट दूर होंगे और संतान सुख मिलेगा.
5. बछड़े की सेवा करें. इससे जल्द ही आपको संतान की प्राप्ति होगी.

E. पीपल के पेड़ पर करें ये उपाय, मिलेगा संतान सुख
1. एक पीपल का वृक्ष लगवाएं. उसमे जल डालें और उसकी रक्षा करें. हर शनिवार को पीपल के पास शनि मन्त्र ओम नमः शिवाय का जाप करें.
2. रविवार को छोड़कर स्त्री रोजाना पीपल के पेड़ पर दीपक जलाएं. और उसकी परिक्रमा करते हुए संतान प्रप्ति की प्रर्थना करें.
3. पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल के दीपक हर शनिवार को जलाएं. इसके बाद वृक्ष की नौ बार परिक्रमा करें. “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप करें.
4. शनिवार को पीपल का एक पत्ता उठा लाएं. उस पर सुगंध लगाएं. पत्ते को अपने पर्स में रख लें. हर महीने पत्ते को बदल लें.
5. शनिवार के दिन पीपल के पत्ते पर चमेली का तेल लगाकर मंदिर में शिवलिंग को अर्पित करें. इसके बाद 108 बार ओम नमः शिवाय और 108 बार शनि मंत्र ओम शं ह्रीं शं शनैश्चराय नमः का जाप करें. इससे आपकी परेशानी भी दूर होगी और जीवन में संतान सुख की प्राप्ति होगी.
6. संतान सुख की प्राप्ति के लिए शनिवार के दिन एक पत्थर लेकर उसे काले रंग से रंगें और उसे पीपल की जड़ में रख आएं. इसके बाद वहां सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शनि मंत्र का 108 बार जाप करें. संतान सुख का आशीर्वाद मिलेगा.
7. शनिवार को पीपल के पेड़ में शाम को जल चढ़ाएं और तिल के तेल का दीपक जलाएं. ऐसा कम से कम 11 शनिवार करें.

F. लाल किताब के इन उपायों से होगी संतान सुख की प्राप्ति
1. शनिवार के दिन जरूरतमंदों को काले तिल, काला कपड़ा, कम्बल, लोहे के बर्तन, उड़द की दाल का दान करना भी शुभ माना जाता है. कहते हैं इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को संतान सुख का वरदान देते हैं.
2. शनिवार को एक कांसे की कटोरी में सरसों का तेल और सिक्का (रुपया-पैसा) डालकर उसमें अपनी परछाई देखें और तेल मांगने वाले को दे दें या किसी शनि मंदिर में शनिवार के दिन कटोरी सहित तेल रखकर आ जाएं. यह उपाय आप कम से कम पांच शनिवार करेंगे तो आप पर शनिदेव की कृपा बरसेगी और संतान सुख मिलेगा.
3. शनिदेव के प्रकोप से छुटकारा पाने के लिए शिवलिंग पर जल चढ़ाना भी बहुत फायदेमंद होता है. इसके लिए आप एक तांबे के लोटे में जल भरकर इसमें थोड़ा काला तिल मिला लें. ऐसा प्रत्येक शनिवार को करने से शनि दोष कम हो जाता है और संतान सुख का प्राप्ति होती है.
4. संतान सुख की प्राप्ति के लिए अंधे, अपंगों, सेवकों और सफाइकर्मियों की मदद करें और इनके साथ अच्छा व्यवहार करें. इन्हें छाता, जूता या चमड़े की कोई भी चीज भेंट करें.
5. अगर काफी कोशिशों के बावजूद आपके काम नहीं बन रहें हैं तो शनिवार के दिन रुद्राक्ष की माला से ॐ शं शानैश्वराय नम: मंत्र का 108 बार जाप करें. ऐसा प्रत्यके शनिवार करने से संतान सुख में आ रही बाधाएं दूर होती है.
6. जीवन से समस्याओं को दूर करने और तरक्की के लिए शनिवार के दिन गेंहूं पिसवाएं. इसमें थोड़े काले चने भी साथ में पिसवाएं. अब इस आटे की रोटी बनाकर काले कुत्ते को खिलाएं. ऐसा करने से आपकी सोयी हुई किस्मत जाग जाएगी और संतान सुख मिलेगा.
7. भैरव महाराज की उपासना करें, शनिवार का व्रत रखें और शराब ना पीएं. किसी भी भैरव मंदिर में शनिवार को शराब चढ़ाएं.
8. कौवे को प्रतिदिन रोटी खिलावें. विशेषकर शनिवार को कौवे को रोटी या वह जो भी खा सके उसे खिलाएं. यदि काला कौवा न मिले तो आप काले कुत्ते को रोटी खिलाएं.
9. शनि देव को प्रसन्न करने और संतान सुख पाने के लिए शनिवार की शाम को अपनी लंबाई के बराबर लाल रेशमी सूत नाप लें. अब एक स्वच्छ बरगद के पत्ते पर अपनी मनोकामना व्यक्त करते हुए धागे को लपेट लें. इसके बाद इसे किसी नदी में प्रवाहित कर दें. ऐसा करने से आपका शनि ग्रह मजबूत होगा.
10. अगर शनि ग्रह के खराब स्थिति में होने से संतान प्राप्ति सुख में बाधा आ रही है तो शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें. साथ ही बंदरों को गुड़ और चना खिलाएं. ऐसा करने से आपकी समस्या दूर हो जाएगी.
नोट – लाल किताब के उपाय हमेशा एक बार में एक ही करें. एक साथ कई उपाय करने की भूल बिलकुल न करें.

G. पितृ दोष के उपाय से कुंभ राशि को मिलेगा संतान सुख
ऐसा माना जाता है कि यदि व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है तो उस व्यक्ति को जीवन में संतान का सुख नहीं मिल पाता है. अगर मिलता भी है तो कई बार संतान विकलांग होती है, मंदबुद्धि होती है या फिर चरित्रहीन होती है या फिर कई बार बच्‍चे की पैदा होते ही मृत्‍यु हो जाती है. इसलिए कुंभ राशि के जो जातक संतान सुख चाहते हैं वे अपनी कुंडली में मौजूद पितृ दोष को दूर करने के लिए यहां दिए जा रहे उपाय करें.
1. कुंभ राशि के जातक की कुंडली में पितृ दोष है तो वे पूर्वजों के निधन की तिथि पर ब्राह्मणों को श्रृद्धापूर्वक भोजन करवाएं और यथाशक्ति दान भी करें, इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होता है.
2. कुंडली में पितृ दोष है तो दक्षिण दिशा में पितरों की फोटो लगाकर उनको रोजाना माला चढ़ाकर उनका स्‍मरण करना चाहिए. ऐसा करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और पितृदोष का प्रभाव समाप्‍त होता है.
3. पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए किसी गरीब कन्‍या का विवाह कराएं या फिर विवाह में मदद करें. इससे भी आपको लाभ होता है.
4. घर के पास में लगे पीपल के पेड़ पर दोपहर में जल चढ़ाएं. पुष्‍प, अक्षत, दूध, गंगाजल और काले तिल भी चढ़ाएं. पितरजनों को याद करें. इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होता है.
5. शाम के वक्‍त रोजाना दक्षिण दिशा में एक दीपक जरूर जलाएं. रोजाना नहीं जला सकते हैं तो कम से कम पितर पक्ष में जरूर जलाएं.

H. नाड़ी दोष के उपाय से कुंभ राशि को मिलेगा संतान सुख
विवाह के समय कुंडली मिलान में बनने वाले दोषों में से एक है नाड़ी दोष. किसी व्यक्ति की कुंडली में नाड़ी दोष होने पर वैवाहिक स्थिति कभी ठीक नहीं रहती, दंपत्ति को संतान सुख नहीं मिल पाता और साथ ही वर-वधू के जीवन पर मृत्यु का संकट मंडराया रहता है. यदि कुंभ राशि के जातक की कुंडली में नाड़ी दोष है तो उसके निवारण के लिए भगवान शिव की पूजा करें. शिवजी की कृपा से ही नाड़ी दोष शांत होता है.
1. वर और कन्या दोनों की नाड़ी मध्य में हो तो पुरुष को प्राण का भय रहता है. इस स्थिति में पुरुष को महामृत्युंजय जाप कराना अति आवश्यक होता है. अगर वर और कन्या दोनों की नाड़ी आदि हो तो स्त्री को प्राण का भय रहता है. इस स्थिति में कन्या महामृत्युजंय जाप कराना अति आवश्यक होता है.
2. पूजा के पहले दिन 5 से 7 ब्राह्मण, पूजा करानेवाले लोग पूजा घर या मंदिर में साथ बैठकर भगवान शिव की आराधना करते हैं. शिव परिवार की पूजा करने के बाद मुख्य पंडितजी अपने सहायकों सहित कन्या और वर की कुंडली में स्थित नाड़ी दोष के निवारण के लिए सवा लाख महामृत्युंजय मंत्र के जप का संकल्प लेते हैं.
3. नाड़ी दोष का प्रभाव कम करने के लिए किसी ब्राह्मण को गोदान या स्वर्णदान करना चाहिए. इसके अलावा सालगिराह पर अपने वजन के बराबर अन्न दान करना चाहिए. साथ ही ब्राह्मणों को भोजन और वस्त्र दान करने से नाड़ी दोष शान्त हो जाता है.
4. पीयूष धारा के अनुसार स्वर्ण दान, गऊ दान, वस्त्र दान, अन्नादान, स्वर्ण की सर्पाकृति बनाकर प्राण-प्रतिष्ठा तथा महामृत्युञ्जय जप करवाने से नाड़ी दोष शान्त हो जाता है.

I. ज्योर्तिलिंग पर पूजा करने से होगी संतान सुख की प्राप्ति
देवाधिदेव भगवान् महादेव सर्वशक्तिमान हैं. भगवान भोलेनाथ ऐसे देव हैं जो थोड़ी सी पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं. संहारक के तौर पर पूज्य भगवान शंकर बड़े दयालु हैं. उनके अभिषेक से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी प्रकार विभिन्न राशि के व्यक्तियों के लिए शास्त्र अलग-अलग ज्योतिर्लिंगों की पूजा का महत्व बताया गया है. भगवान शंकर के पृथ्वी पर 12 ज्योर्तिलिंग हैं. भगवान शिव के सभी ज्योतिर्लिंगों को अपना अलग महत्व है. शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर के ये सभी ज्योजिर्लिंग प्राणियों को दु:खों से मुक्ति दिलाने में मददगार है. इन सभी ज्योतिर्लिंगों को 12 राशियों से भी जोड़कर देखा जाता है. इस आधार पर कुंभ राशि के व्यक्ति को उत्तराखंड स्थित केदारनाथ ज्योतिर्लिंग पर पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. केदारनाथ शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराना चाहिए. इसके बाद कमल का फूल और धतूरा चढ़ाएं. इस राशि के लोग अपने कार्य बिना किसी के मदद के करना चाहते हैं. गुस्सा रहता है. पर जल्दी ही शांत हो जाते हैं. केदारनाथ ज्योतिर्लिंग हिमालय की बर्फ से ढके क्षेत्र में स्थित है. श्री केदारेश्वर केदार नामक एक पहाड़ पर और पहाड़ों के पूर्वी ओर नदी मंदाकिनी के स्त्रोत पर, हिमालय पर स्थित है, अलकनंदा बद्रीनारायण के तट पर स्थित है. यह जगह लगभग 253 किलोमीटर दूर हरिद्वार से और 229 किलोमीटर उत्तर ऋषिकेश की है. केदार भगवान शिव, रक्षक और विनाशक का दूसरा नाम है. केदारनाथ देश का हिमालय में सबसे महत्वपूर्ण मंदिर है. ऐसा माना जाता है कि केदारनाथ मंदिर का निर्माण पाण्‍डवों ने करवाया था. यहां के मंदिर में अंदर की दीवारों पर विस्तृत नक्काशियां देखने को मिलेगी. शिवलिंग एक पिरामिड के रूप में है.

कुंभ राशि संतान प्राप्ति, कुम्भ राशि पुत्र प्राप्ति योग, Kumbha Rashi Santan Yog, कुंभ राशि संतान योग, Kumbha राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Kumbha Rashi Santan Prapti Yog, कुम्भ राशि संतान Prapti योग, कुम्भ राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, कुम्भ राशि को संतान सुख, Kumbha Rashi Putra Prapti Yog, कुम्भ राशि संतान प्राप्ति, कुम्भ लग्न में संतान योग, कुम्भ राशि संतान प्राप्ति के उपाय, कुम्भ राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Aquarius Putra Prapti Yog, लाल किताब के टोटके, लाल किताब के नियम, Lal Kitab Ke Totke Upay Hindi

Makar Rashi Santan Prapti K Upay

मकर राशि में संतान योग, मकर राशि संतान प्राप्ति, मकर राशि पुत्र प्राप्ति योग, Makar Rashi Santan Yog, मकर राशि संतान योग, Makar राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Makar Rashi Santan Prapti Yog, मकर राशि संतान Prapti योग, मकर राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, मकर राशि को संतान सुख, Makar Rashi Putra Prapti Yog, मकर राशि संतान प्राप्ति, मकर लग्न में संतान योग, मकर राशि संतान प्राप्ति के उपाय, मकर राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Capricorn Putra Prapti Yog, लाल किताब के टोटके, लाल किताब के नियम, Lal Kitab Ke Totke Upay Hindi

मकर राशि में संतान योग, मकर राशि संतान प्राप्ति, मकर राशि पुत्र प्राप्ति योग, Makar Rashi Santan Yog, मकर राशि संतान योग, Makar राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Makar Rashi Santan Prapti Yog, मकर राशि संतान Prapti योग, मकर राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, मकर राशि को संतान सुख, Makar Rashi Putra Prapti Yog, मकर राशि संतान प्राप्ति, मकर लग्न में संतान योग, मकर राशि संतान प्राप्ति के उपाय, मकर राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Capricorn Putra Prapti Yog, लाल किताब के टोटके, लाल किताब के नियम, Lal Kitab Ke Totke Upay Hindi

मकर राशि में संतान योग, मकर राशि संतान प्राप्ति, Makar Rashi Santan Yog, Makar Rashi Santan Prapti
कोई भी शादी शुदा दंपति तब तक पूर्ण नहीं होता जब तक कि उसे संतान सुख नहीं मिल जाता. शास्त्रों में भी माना गया है कि संतान सुख जीवन का सबसे बड़ा सुख है और जिस दंपत्ति को किसी कारणवश संतान नहीं होती उनका दुख केवल वही समझ सकते हैं. निसंतान दंपत्ति संतान की लालसा से कभी न कभी, कोई न कोई पूजा-पाठ या अनुष्ठान अवश्य ही करता है. किंतु कईबार कठिन से कठिन अनुष्ठान करने के बाद भी उन्हें मनोनुकूल सिद्धि की प्राप्ति नहीं हो पाती. कारण यह है कि व्यक्ति सलाहनुसार देवी -देवता की पूजा करने लगता है किंतु उन्हें अपने उद्देश्य की प्राप्ति नहीं होती. हताश व्यक्ति पूजा-पाठ अनुष्ठान आदि को ही ढकोसला बताने लगता है जबकि ऐसा कतई नहीं होता. ज्योतिष के अनुसार अपनी राशि के अनुसार ही देवी-देवताओं की पूजा करने से वांछित फल की प्राप्ति हो सकती है, इसलिए मकर राशि का जो जातक संतान प्राप्ति का सुख पाना चाहता है वह अपनी राशि के अनुसार पूजा-पाठ व उपाय करें. यहां हम मकर राशि के लिए कुछ उपाय लेकर आए हैं, जिन्हें कर वह अवश्य ही संतान सुख पा सकता है-

मकर राशि के लोगों को संतान प्राप्ति न होने के ज्योतिषीय कारण
1. दंपति की कुण्डली में नाड़ी दोष होने पर संतान नहीं होती यदि होती भी है तो उनमें शारीरिक विकार होता है. उसके लिए विवाह करने से पहले ही ज्योतिष के उपाय करें.
2. परिवार में पितृ दोष लगने के कारण संतान प्राप्ति में विघ्न उत्पन्न होते है.
3. शनि दोष होने पर संतान प्राप्ति में बाधा आती है.
4. पूर्व जन्म में हुए सर्पशाप, पितृश्राप, माताश्राप, भ्राताश्राप, प्रेतश्राप या कुलदेवता श्राप आदि के चलते संतान विलंब से होती है या नहीं भी होती है.
5. पिछले जन्म में अगर आपने पेड़-पौधे भी कटवाये हैं, तो यह स्थिति उत्पन्न हो जाती है. इसलिए कुंडली की विधिवत विवेचना कर इसका उपाय अपेक्षित है.

मकर राशि के लिए संतान प्राप्ति के उपाय, Makar Rashi Santan Prapti Ke Upay
A. संतान प्राप्ति के लिए मकर राशि के लोग करें इष्ट देव की पूजा
इष्ट देव का अर्थ है अपनी राशि के पसंद के देवता. अरुण संहिता (लाल किताब) के अनुसार व्यक्ति के पूर्व जन्म में किए गए कर्म के आधार पर ही उसके इष्ट देवता का निर्धारण होता है. वयक्ति के कुंडली का पंचम भाव इष्ट का भाव माना जाता है. इस भाव में जो राशि होती है उसके ग्रह के देवता यानी ग्रह स्वामी ही उस राशि के इष्ट देव कहलाते हैं. आज हम इस खबर में बात कर रहे हैं मकर राशि की, तो मकर राशि का स्वामी ग्रह शनि है और इनके इष्टदेव काली माता, भैरव या शनिदेव और हनुमान जी हैं. मकर राशि के व्यक्ति को संतान सुख पाने व मनचाहा फल पाने के लिए अपने इष्ट देव काली माता, भैरव या शनिदेव, हनुमान जी की पूजा करना चाहिए. इष्ट देव की पूजा करने से ये फायदा होता कि कुंडली में चाहे कितने भी ग्रह दोष क्यों न हों, अगर इष्ट देव प्रसन्न हैं तो यह सभी दोष व्यक्ति को अधिक परेशान नहीं करते. इसलिए अगर मकर राशि का कोई दंपति संतान सुख से वंचित है तो वह अपने राशि के अनुसार ईष्ट देव की पूजा कर संतान सुख पा सकता है. यहां जानिए मकर राशि के जातक किस तरह से अपने इष्ट देव काली माता, भैरव या शनिदेव, हनुमान जी की पूजा करें ताकि जल्द से जल्द उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिल सके.

1. काली माता पूजा विधि
शनिवार के दिन माता काली की पूजा करने से मनचाहे फल की प्राप्ति होती है और संतान सुख मिलता है. माता काली की पूजा करने के लिए सुबह उठकर दैनिक क्रिया करते हुए स्नान करें. नहाने के बाद साफ और स्वच्छ कपड़े पहनें, इस दिन काले रंग के कपड़े पहनना शुभ रहता है. इसके बाद आपको अपने घर के मंदिर या घर के आस-पास स्थित किसी माता काली के मंदिर में जाकर कुश की सहायता से माता काली की फोटो अथवा मूर्ति के ऊपर तीन बार पानी का छिड़काव करना है. उसके बाद आपको माता काली के चरणों में फूल अर्पण करना है. माता काली के चरणों में और माथे पर रोली, चंदन और कुमकुम का तिलक लगाना है. इसके बाद धूपबत्ती बत्ती जलानी है और धूपबत्ती को माता काली के साथ-साथ अगर आप के मंदिर में अन्य देवी देवता भी स्थापित हैं, तो उन्हें भी दिखाना है और तीन बार आपको ऐसा बोलना है जय सभी देवी देवताओं की, जय सभी संतो की जय सभी पितरों की जय. इसके बाद आपको वहीं पर जमीन पर बैठकर माता काली की आरती या फिर माता काली की चालीसा का पाठ करना है. पाठ पूरा होने के बाद आपको माता काली के चरणों में प्रणाम करना है और आपने जो पानी लिया है उसमें आपको अच्छत डालना है और फिर इस पानी को ले जाकर माता काली के चरणों में या फिर आसपास स्थित किसी नीम के पेड़ में डाल देना है और फिर मन ही मन माता काली से हाथ जोड़कर अपनी मनोकामना को पूरी करने की कामना मांगनी है. लगातार ऐसा कुछ महीनों तक करने से निश्चित ही माता काली आप पर प्रसन्न होंगी और आपकी सभी मनोकामना को पूरी करेंगी अर्थात् संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देंगी.

2. काल भैरव की पूजा विधि (Kaal Bhairav Puja Vidhi )
शनिवार के दिन काल भैरव पूजन के लिए सुबह जल्दी उठें और स्नान कर साफ वस्त्रों को धारण करें. इस दिन काले कपड़े पहनना ज्यादा फलदायी होता है. एक लकड़ी के पाट पर सबसे पहले शिव और पार्वतीजी के चित्र को स्थापित करें. फिर काल भैरव के चित्र को स्थापित करें. जल का छिड़काव करने के बाद सभी को गुलाब के फूलों का हार पहनाएं या फूल चढ़ाएं. अब चौमुखी दीपक जलाएं और साथ ही धूप जलाएं. कंकू, हल्दी से सभी को तिलक लगाकर हाथ में गंगा जल लेकर अब व्रत या पूजा करने का संकल्प लें. अब शिव और पार्वतीजी का पूजन करें. फिर भगवान भैरव का पूजन करें. भैरव जी को काले तिल, उड़द अर्पित करें. हलुआ, पूरी और मदिरा भैरव नाथ के प्रिय भोग हैं. इसके अलावा भैरव नाथ को इमरती, जलेबी और 5 तरह की मिठाइयां भी अर्पित करें. अब भैरव नाथ की आरती उतारें. इस दौरान शिव चालीसा और भैरव चालीसा पढ़ें. ह्रीं उन्मत्त भैरवाय नमः का जाप करें. इसके उपरान्त काल भैरव की आराधना करें. अब पितरों को याद करें और उनका श्राद्ध करें. पूजा सम्पूर्ण होने के बाद काले कुत्‍ते को मीठी रोटियां खिलाएं या कच्चा दूध पिलाएं. हो सके तो आज के दिन बिल्वपत्रों पर सफेद या लाल चंदन से ‘ॐ नमः शिवाय’ लिखकर शिव लिंग पर चढ़ाएं.

3. शनिदेव पूजा विधि
शनिवार के दिन प्रात: ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने के बाद स्वच्छ काले रंग का वस्त्र धारण करना चाहिए. इस दिन शनिदेव की प्रतिमा की विधि सहित पूजन करनी चाहिए. शनि भक्तों को इस दिन गणेश जी के पूजन से पूजा प्रारंभ करनी चाहिए. इसके बाद भगवान शिव औऱ हनुमान जी को फल और फूल चढ़ाना चाहिए. इसके बाद शनि देव को नीले लाजवन्ती का फूल, तिल, तेल, गुड़ अर्पण करना चाहिए. शनि देव के नाम से तेल का दीपोत्सर्ग करना चाहिए. पूजा के अंत में 21 बार शनिदेव महाराज के मंत्रों ‘ओम शनैश्चराय विदमहे सूर्यापुत्राय धीमहि.. तन्नो मंद: प्रचोदयात..’ का जाप करें और अंत में कपूर से आरती करें. शनि चालीसा का पाठ करें. शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा के पश्चात उनसे अपने अपराधों एवं जाने अनजाने जो भी आपसे पाप कर्म हुआ हो उसके लिए क्षमा याचना करनी चाहिए.शनि महाराज की पूजा के पश्चात राहु और केतु की पूजा भी करनी चाहिए. इस दिन शनि भक्तों को पीपल में जल देना चाहिए और पीपल में सूत्र बांधकर सात बार परिक्रमा करनी चाहिए. शाम को पूजा दोहराकर पूजा का समापन करें.

4. हनुमान जी की पूजा विधि
मंगलवार और शनिवार के दिन सुबह उठकर स्नान आदि कर निवृत होकर लाल वस्त्र धारण करें. कोशिश करें की आपने जो वस्त्र पहना है वह सिला हुआ ना हो. घर के ईशान कोण को साफ कर यहां पर एक चौकी स्थापित करें और उस पर लाल वस्त्र बिछाएं. फिर उस पर हनुमान जी की मूर्ती स्थापित करें और वहां पर भगवान श्री राम और माता सीता की भी प्रतिमा अवश्य रखें. इसके बाद घी का दीपक और धूप दीप जलाकर सुंदर कांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंत्र ॐ हं हनुमते नम: का जाप करें. फिर लाल फूल, लाल सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं. इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ कर हनुमान जी की आरती करें. भगवान को गुड़, केले और लड्डू का भोग लगाएं. तथा परिवार के सदस्यों को प्रसाद वितरित करें. वहीं यदि आपने व्रत रखा है तो ध्यान रहे कि आपको इस दिन सिर्फ एक बार शाम के समय भोजन करना है. इस दौरान आप अपने भोजन में केवल मीठा भोजन सम्मिलित करें. दिन में आप दूध, केले और मीठे फलहार को शामिल करें.

B. शनिवार का व्रत करने से मकर राशि को मिलेगा संतान सुख
शनि की कुदृष्टि से राजाओं तक का वैभव पलक झपकते ही नष्ट हो जाता है. शनि की साढ़े साती दशा जीवन में अनेक दुःखों, विपत्तियों का समावेश करती है. सभी ग्रहों में शनि का मनुष्य पर सबसे हानिकारक प्रकोप होता है. अतः मनुष्य को शनि की कुदृष्टि से बचने के लिए व संतान प्राप्ति के सुख को पाने के लिए शनिवार का व्रत करते हुए शनि देवता की पूजा-अर्चना करनी चाहिए. वैसे तो शनिवार का व्रत कभी भी शुरू किया जा सकता है, लेकिन श्रावण मास में शनिवार का व्रत प्रारंभ करने का विशेष महत्व माना गया है. यहां जानिए कैसे करें शनिवार का व्रत ?
मकर राशि के लोग ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नदी या कुएं के जल से स्नान करें. ऐसा न हो सके तो नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें. स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहन लें. तत्पश्चात पीपल के वृक्ष पर जल अर्पण करें. लोहे से बनी शनि देवता की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं. फिर इस मूर्ति को चावलों से बनाए चौबीस दल के कमल पर स्थापित करें. इसके बाद काले तिल, फूल, धूप, काला वस्त्र व तेल आदि से पूजा करें. पूजन के दौरान शनि के इन 10 नामों का उच्चारण करें- कोणस्थ, कृष्ण, पिप्पला, सौरि, यम, पिंगलो, रोद्रोतको, बभ्रु, मंद, शनैश्चर.
पूजन के बाद मकर राशि के लोग पीपल के वृक्ष के तने पर सूत के धागे से सात बार परिक्रमा करें. इसके पश्चात निम्न मंत्र से शनि देव की प्रार्थना करें-
शनैश्चर नमस्तुभ्यं नमस्ते त्वथ राहवे.
केतवेअथ नमस्तुभ्यं सर्वशांतिप्रदो भव॥
इसी तरह 7 शनिवार तक व्रत करते हुए शनि के प्रकोप से सुरक्षा के लिए व संतान सुख के लिए शनि मंत्र की समिधाओं में, राहु की कुदृष्टि से सुरक्षा के लिए दूर्वा की समिधा में, केतु से सुरक्षा के लिए केतु मंत्र में कुशा की समिधा में, कृष्ण जौ, काले तिल से 108 आहुति प्रत्येक के लिए देनी चाहिए. फिर अपनी क्षमतानुसार ब्राह्मणों को भोजन कराएं तथा लौह वस्तु, धन आदि का दान करें. इस दिन व्यक्ति को एक ही बार भोजन करना चाहिए. इसके अलावा मकर राशि के लोग इस दिन चीटियों को आटा डालना फलदायी माना गया है. इस तरह शनि देव का व्रत रखने से मकर राशि के लोग दुर्भाग्य को भी सौभाग्य में बदल सकते हैं तथा संतान प्राप्ति का सुख पा सकते हैं.

C. शनि दोष दूर करने से मकर राशि को होगी संतान सुख की प्राप्ति
1. प्रत्येक शनिवार के दिन शनि महाराज पीपल के वृक्ष में निवास करते हैं. इसदिन जल में चीनी एवं काला तिल मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित करके तीन बार परिक्रमा करने से शनि प्रसन्न होते हैं.
2. शनिवार के दिन शाम को सूर्यास्त के पूर्व पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए. ध्यान रहे कि दीपक जलाने से पहले व्यक्ति को स्नान आदि करके पवित्र हो जाना चाहिए. इससे शनिदेव भक्तों पर अपनी कृपा दृष्टि बरसाते है.
3. शनिवार के दिन उड़द दाल की खिचड़ी खाने से भी शनि दोष के कारण प्राप्त होने वाले कष्ट में कमी आती है.
4. मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंदिर में तिल का दीया जलाने से भी शनि की पीड़ा से मुक्ति मिलती है.
5. शनि को खुश करने के लिए ज्योतिषशास्त्र में कुछ मंत्रों का भी उल्लेख किया गया है. जैसे शनि वैदिक मंत्र ‘ओम शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये. शं योरभि स्रवन्तु न:.’
6. प्रत्येक शनिवार को 11 बार महाराज दशरथ द्वारा लिखा गया दशरथ स्तोत्र का पाठ करें. शनि महाराज ने स्वयं दशरथ जी को वरदान दिया था कि जो व्यक्ति आपके द्वारा लिखे गये स्तोत्र का पाठ करेगा उसे मेरी दशा या शनि दशा के दौरान कष्ट का सामना नहीं करना होगा.
7. शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनि यंत्र की स्थापना करें. हर रोज इसके सामने सरसों के तेल का दीपक जलाकर शनि यंत्र की विधि-विधान से पूजा करें. माना जाता है कि ऐसा करने वालों पर शनि की कुदृष्टि नहीं होती.
8. हर शनिवार के दिन काले कुत्तों को रोटी खिलाएं तथा गरीब एवं जरूरत मंद लोगों को काले वस्तुओं का दान करें.
9. घर में शमी का वृक्ष लगाएं. यदि यह वृक्ष शनिवार के दिन लगाया जाय तो अति उत्तम होगा. नियमित रूप से शमी वृक्ष की पूजा करें. इससे न सिर्फ आपके घर का वास्तुदोष दूर होगा बल्कि शनिदेव की कृपा भी बनी रहेगी. मान्यता है कि इससे शनिदेव की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होंगी.
10. काले कपड़े में शमी वृक्ष की जड़ को बांधकर अपनी दायी बाजू पर धारण करने पर शनिदेव आपका बुरा नहीं करेंगे बल्कि संतान सुख में सहायक होंगे.
11. शनिवार के दिन शाम को सूर्यास्त के बाद हनुमान जी की पूजा करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें तथा उन्हें सिंदूर अर्पित करें और काली तिल्ली के तेल से दीपक जलाएं. ऐसा करने से आप पर कभी भी शनि की बुरी नजर नहीं पड़ेगी
12. शनि से जुड़े दोष दूर करने या फिर उनकी कृपा पाने के लिए शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय है. नियमपूर्वक शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं. इस उपाय से शनि द्वारा मिलने वाला नकारात्मक परिणाम समाप्त हो जाता है.
13. शनिदेव की कृपा पाने के लिए अपने माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा करें. यदि आप अपने माता-पिता से दूर रहते हैं तो उन्हें फोन से या फिर मन ही मन प्रतिदिन प्रणाम करें.
14. शनिदेव से जुड़े दोष दूर करने या फिर उनकी कृपा पाने के लिए शिव की उपासना एक सिद्ध उपाय है. नियमपूर्वक शिव सहस्त्रनाम या शिव के पंचाक्षरी मंत्र का पाठ करने से शनि के प्रकोप का भय जाता रहता है और सभी बाधाएं दूर होती हैं. इस उपाय से शनि द्वारा मिलने वाला नकारात्मक परिणाम समाप्त हो जाता है.
15. शनिदेव (Shani Dev) की कृपा पाने के लिए हर शनिवार शाम को किसी शनि मंदिर (Shani Mandir) में ‘ओम शं शनैश्चराय नम:’ मंत्र का जाप करें.

D. शनिवार को करें ये उपाय मिलेगा संतान सुख
1. यदि मकर राशि के निःसंतान जातक संतान कामना की इच्छा रखते हैं तो शनिवार के दिन किसी शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर 11 फूल और 11 बेलपत्र से बनी माला चढ़ाएं.
2. मकर राशि के लोग शनिवार के दिन रोज रात में एक कटोरे में सरसों का तेल भरकर अपने पलंग के नीचे रखें. सुबह उस तेल में पकौड़े बनाकर कुत्तों को खिलाएं. इसके अलावा सरसों के तेल का परांठा या तेल लगी रोटी को काली गाय या काले कुत्ते को खिलाएं.
3. यदि शादी के कई साल बाद भी मकर राशि के लोगों को संतान सुख नहीं मिल पाया है तो शनिवार के दिन काली गाय के माथे पर कुमकुम से तिलक लगाएं. इसके बाद उसे बूंदी का लड्डू खिलाएं. फिर उसके दाहिने सींग को अपने हाथ से छूकर आशीर्वाद लें, संतान सुख मिलेगा.
4. शनिवार के दिन एक कटोरे में सरसों का तेल निकालें और उस तेल में अपना चेहरा देखें. फिर वो तेल किसी को दान कर दें. ऐसा करने से जीवन के तमाम कष्ट दूर होंगे और संतान सुख मिलेगा.
5. मकर राशि के लोग बछड़े की सेवा करें. इससे जल्द ही आपको संतान की प्राप्ति होगी.

E. मकर राशि के लोग पीपल के पेड़ पर करें ये उपाय, मिलेगा संतान सुख
1. मकर राशि के लोग एक पीपल का वृक्ष लगवाएं. उसमे जल डालें और उसकी रक्षा करें. हर शनिवार को पीपल के पास शनि मन्त्र ओम नमः शिवाय का जाप करें.
2. रविवार को छोड़कर स्त्री रोजाना पीपल के पेड़ पर दीपक जलाएं. और उसकी परिक्रमा करते हुए संतान प्रप्ति की प्रर्थना करें.
3. मकर राशि के लोग पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल के दीपक हर शनिवार को जलाएं. इसके बाद वृक्ष की नौ बार परिक्रमा करें. “ॐ शं शनैश्चराय नमः” का जाप करें.
4. मकर राशि के लोग शनिवार को पीपल का एक पत्ता उठा लाएं. उस पर सुगंध लगाएं. पत्ते को अपने पर्स में रख लें. हर महीने पत्ते को बदल लें.
5. मकर राशि के लोग शनिवार के दिन पीपल के पत्ते पर चमेली का तेल लगाकर मंदिर में शिवलिंग को अर्पित करें. इसके बाद 108 बार ओम नमः शिवाय और 108 बार शनि मंत्र ओम शं ह्रीं शं शनैश्चराय नमः का जाप करें. इससे आपकी परेशानी भी दूर होगी और जीवन में संतान सुख की प्राप्ति होगी.
6. मकर राशि के लोग संतान सुख की प्राप्ति के लिए शनिवार के दिन एक पत्थर लेकर उसे काले रंग से रंगें और उसे पीपल की जड़ में रख आएं. इसके बाद वहां सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शनि मंत्र का 108 बार जाप करें. संतान सुख का आशीर्वाद मिलेगा.
7. शनिवार को पीपल के पेड़ में शाम को जल चढ़ाएं और तिल के तेल का दीपक जलाएं. ऐसा कम से कम 11 शनिवार करें, मनचाहा फल मिलेगा.

F. नाड़ी दोष के उपाय से मकर राशि को मिलेगा संतान सुख
विवाह के समय कुंडली मिलान में बनने वाले दोषों में से एक है नाड़ी दोष. इस दोष के होने पर मकर राशि की वैवाहिक स्थिति कभी ठीक नहीं रहती. मकर राशि के दंपत्ति संतान सुख से वंचित रह सकते हैं साथ ही वर-वधू के जीवन पर मृत्यु का संकट मंडराने लगता है. नाड़ी दोष निवारण के लिए भगवान शिव की पूजा की जाती है. शिवजी की कृपा से ही नाड़ी दोष शांत होता है. मकर राशि के लोगों की कुंडली में अगर नाड़ी दोष है तो वो यहां दिए जा रहे उपाय करके इस दोष से मुक्ति पा सकते हैं.
1. नाड़ी दोष निवारण की पूजा वर और वधू दोनों को साथ बिठाकर की जाती है. इस पूजा में सवा लाख महामृत्युंजय मंत्रों का जप किया जाता है.
2. पूजा के पहले दिन 5 से 7 ब्राह्मण, पूजा करानेवाले लोग पूजा घर या मंदिर में साथ बैठकर भगवान शिव की आराधना करते हैं. शिव परिवार की पूजा करने के बाद मुख्य पंडितजी अपने सहायकों सहित कन्या और वर की कुंडली में स्थित नाड़ी दोष के निवारण के लिए सवा लाख महामृत्युंजय मंत्र के जप का संकल्प लेते हैं.
3. जप पूरा हो जाने के बाद विधि पूर्वक हवन कर ज्योतिषाचार्यों के परामर्श के अनुसार दान दिया जाता है.
4. आमतौर पर यदि वर और कन्या की कुंडली में नाड़ी दोष हो तो विवाह न करने की सलाह दी जाती है. लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में जरूरी उपाय करके इस दोष को शांत किया जा सकता है. इसक लिए ब्राह्मण को गाय का दान दिया जाता है.
5. अपने जन्मदिन पर अपने वजन के बराबर अन्न का दान करने पर नाड़ी दोष के प्रभावों से शांति मिलती है.
6. समय-समय पर ब्राह्मणों को भोजन कराकर वस्त्र दान करने से भी नाड़ी दोष के प्रभावों को शांत किया जा सकता है.
7. पीयूष धारा के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के विवाह में नाड़ी दोष बाधा बन रहा है तो उसे स्वर्ण दान, वस्त्र दान, अन्न दान करना चाहिए. सोने से सर्प की आकृति बनाकर, उसकी विधि पूर्वक प्राण-प्रतिष्ठा करके महामृत्युंजय मंत्र का जप कराने से नाड़ी दोष शांत होता है.

G. पितृ दोष के उपाय से मकर राशि को मिलेगा संतान सुख
ऐसा माना जाता है कि यदि व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है तो उस व्यक्ति को जीवन में संतान का सुख नहीं मिल पाता है. अगर मिलता भी है तो कई बार संतान विकलांग होती है, मंदबुद्धि होती है या फिर चरित्रहीन होती है या फिर कई बार बच्‍चे की पैदा होते ही मृत्‍यु हो जाती है. इसलिए मकर राशि के जो जातक संतान सुख चाहते हैं वे अपनी कुंडली में मौजूद पितृ दोष को दूर करने के लिए यहां दिए जा रहे उपाय करें.
1. मकर राशि के जातक की कुंडली में पितृ दोष है तो वे पूर्वजों के निधन की तिथि पर ब्राह्मणों को श्रृद्धापूर्वक भोजन करवाएं और यथाशक्ति दान भी करें, इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होता है.
2. कुंडली में पितृ दोष है तो दक्षिण दिशा में पितरों की फोटो लगाकर उनको रोजाना माला चढ़ाकर उनका स्‍मरण करना चाहिए. ऐसा करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और पितृदोष का प्रभाव समाप्‍त होता है.
3. पितृदोष से मुक्ति पाने के लिए किसी गरीब कन्‍या का विवाह कराएं या फिर विवाह में मदद करें. इससे भी आपको लाभ होता है.
4. घर के पास में लगे पीपल के पेड़ पर दोपहर में जल चढ़ाएं. पुष्‍प, अक्षत, दूध, गंगाजल और काले तिल भी चढ़ाएं. पितरजनों को याद करें. इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होता है.
5. शाम के वक्‍त रोजाना दक्षिण दिशा में एक दीपक जरूर जलाएं. रोजाना नहीं जला सकते हैं तो कम से कम पितर पक्ष में जरूर जलाएं.

H. ज्योर्तिलिंग पर पूजा करने से होगी मकर राशि को संतान सुख की प्राप्ति
देवाधिदेव भगवान् महादेव सर्वशक्तिमान हैं. भगवान भोलेनाथ ऐसे देव हैं जो थोड़ी सी पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं. संहारक के तौर पर पूज्य भगवान शंकर बड़े दयालु हैं. उनके अभिषेक से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी प्रकार विभिन्न राशि के व्यक्तियों के लिए शास्त्र अलग-अलग ज्योतिर्लिंगों की पूजा का महत्व बताया गया है. भगवान शंकर के पृथ्वी पर 12 ज्योर्तिलिंग हैं. भगवान शिव के सभी ज्योतिर्लिंगों को अपना अलग महत्व है. शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर के ये सभी ज्योजिर्लिंग प्राणियों को दु:खों से मुक्ति दिलाने में मददगार है. इन सभी ज्योतिर्लिंगों को 12 राशियों से भी जोड़कर देखा जाता है. इस आधार पर मकर राशि के जातकों को त्रयम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग की पूजा करनी चाहिए. त्रयम्बकेश्वर ज्योर्तिलिंग का संबंध मकर राशि से है. यह ज्योर्तिलिंग नासिक में स्थित है. महाशिवरात्रि के दिन इस राशि वाले गंगाजल में गुड़ मिलाकर शिव का जलाभिषेक करना चाहिए. शिव को नीले का रंग फूल और धतूरा चढ़ाएं. मकर राशि के लिए मंत्र – त्रयम्बकेश्वर का ध्यान करते हुए ‘ओम नमः शिवाय’ मंत्र का 5 माला जप करें. त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में त्रिम्बक शहर में है. यह नासिक शहर से 28 किलोमीटर दूर है. ज्योतिर्लिंग की अदभुत विशेषता भगवान ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव का प्रतीक तीन चेहरों के दर्शन होते हैं. इस प्राचीन मंदिर की स्‍थापत्य शैली पूरी तरह से काले पत्थर पर अपनी आकर्षक वास्तुकला और मूर्तिकला के लिए जाना जाता है. मंदिर लहरदार परिदृश्य और रसीला हरी वनस्पति की पृष्ठभूमि पर ब्रहमगिरि पर्वत श्रृंखला की तलहटी में स्थित है. गोदावरी जो भारत में सबसे लंबी नदी है के तीन स्त्रोत ब्रहमगिरि पर्वत से उत्पन्न होकर राजमहेंद्रु के पास समुद्र से मिलती है.

I. लाल किताब के इन उपायों से होगी संतान सुख की प्राप्ति
1. भैरव महाराज की उपासना करें, शनिवार का व्रत रखें और शराब ना पीएं. किसी भी भैरव मंदिर में शनिवार को शराब चढ़ाएं.
2. कौवे को प्रतिदिन रोटी खिलावें. विशेषकर शनिवार को कौवे को रोटी या वह जो भी खा सके उसे खिलाएं. यदि काला कौवा न मिले तो आप काले कुत्ते को रोटी खिलाएं.
3. शनिवार को एक कांसे की कटोरी में सरसों का तेल और सिक्का (रुपया-पैसा) डालकर उसमें अपनी परछाई देखें और तेल मांगने वाले को दे दें या किसी शनि मंदिर में शनिवार के दिन कटोरी सहित तेल रखकर आ जाएं. यह उपाय आप कम से कम पांच शनिवार करेंगे तो आप पर शनिदेव की कृपा बरसेगी और संतान सुख मिलेगा.
4. संतान सुख की प्राप्ति के लिए अंधे, अपंगों, सेवकों और सफाइकर्मियों की मदद करें और इनके साथ अच्छा व्यवहार करें. इन्हें छाता, जूता या चमड़े की कोई भी चीज भेंट करें.
5. अगर काफी कोशिशों के बावजूद आपके काम नहीं बन रहें हैं तो शनिवार के दिन रुद्राक्ष की माला से ॐ शं शानैश्वराय नम: मंत्र का 108 बार जाप करें. ऐसा प्रत्यके शनिवार करने से संतान सुख में आ रही बाधाएं दूर होती है.
6. शनिदेव के प्रकोप से छुटकारा पाने के लिए शिवलिंग पर जल चढ़ाना भी बहुत फायदेमंद होता है. इसके लिए आप एक तांबे के लोटे में जल भरकर इसमें थोड़ा काला तिल मिला लें. ऐसा प्रत्येक शनिवार को करने से शनि दोष कम हो जाता है और संतान सुख का प्राप्ति होती है.
7. शनिवार के दिन जरूरतमंदों को काले तिल, काला कपड़ा, कम्बल, लोहे के बर्तन, उड़द की दाल का दान करना भी शुभ माना जाता है. कहते हैं इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को संतान सुख का वरदान देते हैं.
8. जीवन से समस्याओं को दूर करने और तरक्की के लिए शनिवार के दिन गेंहूं पिसवाएं. इसमें थोड़े काले चने भी साथ में पिसवाएं. अब इस आटे की रोटी बनाकर काले कुत्ते को खिलाएं. ऐसा करने से आपकी सोयी हुई किस्मत जाग जाएगी और संतान सुख मिलेगा.
9. शनि देव को प्रसन्न करने और संतान सुख पाने के लिए शनिवार की शाम को अपनी लंबाई के बराबर लाल रेशमी सूत नाप लें. अब एक स्वच्छ बरगद के पत्ते पर अपनी मनोकामना व्यक्त करते हुए धागे को लपेट लें. इसके बाद इसे किसी नदी में प्रवाहित कर दें. ऐसा करने से आपका शनि ग्रह मजबूत होगा.
10. अगर शनि ग्रह के खराब स्थिति में होने से संतान प्राप्ति सुख में बाधा आ रही है तो शनिवार के दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें. साथ ही बंदरों को गुड़ और चना खिलाएं. ऐसा करने से आपकी समस्या दूर हो जाएगी.
नोट – लाल किताब के उपाय हमेशा एक बार में एक ही करें. एक साथ कई उपाय करने की भूल बिलकुल न करें.

मकर राशि में संतान योग, मकर राशि में संतान योग, मकर राशि संतान प्राप्ति, मकर राशि पुत्र प्राप्ति योग, Makar Rashi Santan Yog, मकर राशि संतान योग, Makar राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Makar Rashi Santan Prapti Yog, मकर राशि संतान Prapti योग, मकर राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, मकर राशि को संतान सुख, Makar Rashi Putra Prapti Yog, मकर राशि संतान प्राप्ति, मकर लग्न में संतान योग, मकर राशि संतान प्राप्ति के उपाय, मकर राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Capricorn Putra Prapti Yog

Dhanu Rashi Santan Prapti K Upay

धनु राशि में संतान योग, धनु राशि संतान प्राप्ति, धनु राशि पुत्र प्राप्ति योग, Dhanu Rashi Santan Yog, धनु राशि संतान योग, Dhanu राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Dhanu Rashi Santan Prapti Yog, धनु राशि संतान Prapti योग, धनु राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, धनु राशि को संतान सुख, Dhanu Rashi Putra Prapti Yog, धनु राशि संतान प्राप्ति, धनु लग्न में संतान योग, धनु राशि संतान प्राप्ति के उपाय, धनु राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Saggitarius Putra Prapti Yog, लाल किताब के टोटके, लाल किताब के नियम, Lal Kitab Ke Totke Upay Hindi

धनु राशि में संतान योग, धनु राशि संतान प्राप्ति, धनु राशि पुत्र प्राप्ति योग, Dhanu Rashi Santan Yog, धनु राशि संतान योग, Dhanu राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Dhanu Rashi Santan Prapti Yog, धनु राशि संतान Prapti योग, धनु राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, धनु राशि को संतान सुख, Dhanu Rashi Putra Prapti Yog, धनु राशि संतान प्राप्ति, धनु लग्न में संतान योग, धनु राशि संतान प्राप्ति के उपाय, धनु राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Saggitarius Putra Prapti Yog, लाल किताब के टोटके, लाल किताब के नियम, Lal Kitab Ke Totke Upay Hindi

धनु राशि में संतान योग, Dhanu Rashi Santan Yog
यदि धनु राशि के किसी जातक को विवाह के कई साल बाद भी संतान प्राप्ति में समस्या आ रही है और वे तरह तरह के उपाय कर थक चुके हैं, तो वे शास्त्रों में बताएं गए कुछ उपाय व पूजा पाठ करके मनचाही श्रेष्ठ व संस्कारित संतान का सुख प्राप्त कर सकते है. बस हर राशि के जातक ये ध्यान रखें कि वे अपने राशि के अनुसार ही पूजा पाठ करके मनचाहे फल को प्राप्त कर सकते हैं. आज हम इस खबर में धनु राशि के जातक के लिए कुछ उपाय लेकर आए हैं. इस उपाय को कर आप निश्चित रूप से संतान प्राप्ति का सुख उठा पाएंगे. यहां जानिए संतान प्राप्ति न होने के ज्योतिषीय कारण व उपाय-

धनु राशि के लोगों को संतान प्राप्ति न होने के ज्योतिषीय कारण
1. दंपति की कुण्डली में नाड़ी दोष होने पर संतान नहीं होती यदि होती भी है तो उनमें शारीरिक विकार होता है. उसके लिए विवाह करने से पहले ही ज्योतिष के उपाय करें.
2. परिवार में पितृ दोष लगने के कारण संतान प्राप्ति में विघ्न उत्पन्न होते है.
3. पत्नी का बृहस्पत ग्रह नीच का होने पर ऐसी स्थिति बनती है.
4. पूर्व जन्म में हुए सर्पशाप, पितृश्राप, माताश्राप, भ्राताश्राप, प्रेतश्राप या कुलदेवता श्राप आदि के चलते संतान विलंब से होती है या नहीं भी होती है.
5. पिछले जन्म में अगर आपने पेड़-पौधे भी कटवाये हैं, तो यह स्थिति उत्पन्न हो जाती है. इसलिए कुंडली की विधिवत विवेचना कर इसका उपाय अपेक्षित है.

धनु राशि के लिए संतान प्राप्ति के उपाय, Dhanu Rashi Santan Prapti Ke Upay
A. संतान प्राप्ति के लिए अपने इष्ट देव की करें पूजा
इष्ट देव का अर्थ है अपनी राशि के पसंद के देवता. इष्ट देव की पूजा करने से ये फायदा होता कि कुंडली में चाहे कितने भी ग्रह दोष क्यों न हों, अगर इष्ट देव प्रसन्न हैं तो यह सभी दोष व्यक्ति को अधिक परेशान नहीं करते. इसलिए अगर कोई दंपति संतान सुख से वंचित है तो वह अपने राशि के अनुसार ईष्ट देव की पूजा कर संतान सुख पा सकता है. अरुण संहिता जिसे लाल किताब के नाम से भी जाना जाता है, के अनुसार व्यक्ति के पूर्व जन्म में किए गए कर्म के आधार पर इष्ट देवता का निर्धारण होता है और इसके लिए जन्म कुंडली देखी जाती है. कुंडली का पंचम भाव इष्ट का भाव माना जाता है. इस भाव में जो राशि होती है उसके ग्रह के देवता ही हमारे इष्ट देव कहलाते हैं. धनु राशि का स्वामी ग्रह गुरु है और इष्टदेव विष्णु जी और लक्ष्मी जी है. इसलिए धनु राशि के जातक संतान प्राप्ति के लिए विष्णु जी और लक्ष्मी जी की विधिवत् पूजा पाठ कर संतान प्राप्ति का वरदान पा सकते हैं.
धनु राशि स्वामी ग्रह – गुरु
धनु राशि इष्ट देव – विष्णु जी और लक्ष्मी जी
यहां जानिए संतान प्राप्ति के लिए किस तरह से करें विष्णु जी और लक्ष्मी जी की पूजा-

1. भगवान विष्णु जी की पूजा विधि (Vishnu Puja Vidhi)
धनु राशि के लोग गुरुवार के दिन सुर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहन लें. इसके बाद एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर उस पर भगवान विष्णु की प्रतिमा रखें. विष्णु पूजन से पहले प्रथम पूज्य गणेश जी की पूजा आवश्य करें. इसके लिए पहले गणेश जी को स्नान कराएं, वस्त्र अर्पित करें, तत्पश्चात पुष्प, अक्षत अर्पित करें, फिर उसके बाद ही भगवान विष्णु का पूजन शुरू करें. अब विष्णु भगवान के पूजन के लिए सबसे पहले भगवान विष्णु का आवाहन करें, उन्हें स्नान कराएं, पंचामृत एवं जल से उन को शुद्ध करें. तत्पश्चात आप विष्णु जी को वस्त्र पहनाएं, फिर आभूषण व यज्ञोपवीत के साथ साथ पीले फूलों की माला भी पहना सकते हैं. बता दें कि विष्णु जी को पीला रंग अधिक प्रिय है. इसलिए उनके आगे पीले फूल और पीले रंग के फलों का भोग लगाएं. तुलसीदल भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इसका प्रयोग अवश्य करें, और ध्यान रखें भगवान विष्णु के पूजन में चावलों का प्रयोग सामान्यतः नहीं किया जाता है, तो इसकी जगह पर आप तिल का प्रयोग कर सकते हैं. अब सुगंधित इत्र के साथ माथे पर तिलक अर्पित करें. ध्यान रखें कि तिलक में अष्टगंध का प्रयोग किया जाता है. तत्पश्चात धूप, दीप अर्पित करें. इसके बाद विष्णु जी की आरती जरूर करें. आरती के बाद नैवेद्य अर्पित करें और मंत्र का जाप करें – ॐ नमः नारायणाय…गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा का विशेष महत्व है, इसलिए केले के पेड़ की पूजा जरूर करें. इस विधि से पूजा करने से धनु राशि के लोगों को भगवान विष्णु से अवश्य ही संतान प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होगा.

2. लक्ष्मी जी की पूजा विधि (Laxmi Ji Ki Puja Vidhi)
लक्ष्मी जी की पूजा शुरू करने से पहले धनु राशि के लोग घर की अच्छी तरह से सफाई करें और सजाएं. पूजा की प्रक्रिया शुरू करने से पहले शुद्धिकरण अनुष्ठान के लिए पूरे घर में और परिवार के सभी सदस्यों पर गंगा जल छिड़कें. एक चौकी स्थापित करें जहां पूजा की जानी है. फिर चौकी पर एक लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर अनाज के दाने फैलाएं. हल्दी पाउडर से एक कमल बनाएं और उस पर देवी लक्ष्मी और गणेश की मूर्ति रखें. तांबे के बर्तन में तीन चौथाई पानी भरकर इसमें सिक्के, सुपारी, किशमिश, लौंग, सूखे मेवे और इलायची डाल दें. बर्तन के ऊपर आम के पत्ते गोलाकार में रखें और इसके बीच में एक नारियल रखें. कलश को सिंदूर और फूलों से सजाएं.
मूर्तियों को शुद्ध जल, पंचामृत, चंदन और गुलाब जल से स्नान कराना चाहिए. फिर इन्हें हल्दी पाउडर, चंदन का लेप और सिंदूर से सजाएं. इसके बाद मूर्तियों के चारों ओर माला और फूल चढ़ाए जाते हैं.
लक्ष्मी पूजा से पहले गणेश जी की पूजा करें और फिर लक्ष्मी जी की पूजा होती है. प्रसाद में आमतौर पर बादशा, लड्डू, सुपारी और मेवा, सूखे मेवे, नारियल, मिठाई, घर की रसोई में बने व्यंजन होते हैं. इसके अलावा कुछ सिक्के भी पूजा में रखें. मंत्र जाप के दौरान दीपक और अगरबत्ती जलाई जाती है और फूल चढ़ाए जाते हैं. देवी लक्ष्मी की कहानी पढ़ें. कहानी के अंत में देवी की मूर्ति पर फूल चढ़ाए जाते हैं और मिठाई का भोग लगाया जाता है. आखिर में आरती गाकर पूजा का समापन किया जाता है. फिर देवी से समृद्धि और धन की प्रार्थना की जाती है और प्रसाद के रूप में मिठाई का सेवन किया जाता है. पूजा में स्थापित किये कलश के जल से सिक्का निकाल कर बाकि का जल किसी पेड़ में डाल दें और नारियल व सिक्के को किसी गणेश जी के मंदिर में दान कर दें. इस विधि से लक्ष्मी जी की पूजा करने से धनु राशि के लोगों को अवश्य ही माता लक्ष्मी के आशीर्वाद से संतान प्राप्त होगी.

B.  संतान प्राप्ति के लिए करें बृहस्पतिवार (गुरुवार) का व्रत
ज्योतिष के अनुसार बृहस्पतिवार (गुरुवार) को बृहस्पतिग्रह और भगवान विष्णु का दिन माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. भगवान विष्णु को ही बृहस्पति भगवान भी कहते हैं. भगवान बृहस्पति की पूजा करने से ज्ञान, धर्म, संतान, विवाह और भाग्य बनते हैं. इसलिए बृहस्पति देव के हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए धनु राशि के लोग गुरुवार का व्रत करें. कहा जाता है कि अगर किसी लड़की की शादी नहीं हो रही है या संतान प्राप्ति मे बाधा आ रही है तो उसे गुरुवार का व्रत करना चाहिए. वैदिक ज्योतिष में बृहस्पति को गुरु का दर्जा दिया गया है. ऐसे में गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा करके व व्रत करके गुरु ग्रह की कृपा पाई जा सकती है. गुरु को प्रसन्न रखकर भगवान और ग्रह दोनों को प्रसन्न किया जा सकता है. यहां जानिए कि किस तरह से बृहस्पतिवार का व्रत कर धनु राशि के लोग संतान प्राप्ति के आशीर्वाद पा सकते हैं.
कैसे करें बृहस्पतिवार व्रत की शुरुआत – पौष माह को छोड़ कर किसी भी हिंदी महीने से बृहस्पतिवार के व्रत की शुरूआत कर सकते हैं. व्रत की शुरुआत शुक्ल पक्ष से करना शुभ माना जाता है. हर व्रत की तरह गुरुवार व्रत का भी अलग विधान होता है. नियम के अनुसार, यह व्रत 16 गुरुवार तक लगातार रखा जाता है और 17 वें गुरुवार को व्रत का उद्यापन किया जाता है. लेकिन यदि महिलाओं को इस बीच मासिक धर्म होता है तो उस गुरुवार को छोड़ कर अगले से व्रत करना चाहिए.
बृहस्पतिवार व्रत की विधि – बृहस्पतिवार के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र की स्थापना करनी चाहिए. भगवान विष्णु को पीला वस्त्र अर्पित कर, उन्हें पीले फूल, हल्दी तथा गुड़ और चना का भोग लगाया जाता है. हल्दी मिले जल से भगवान का अभिषेक किया जाता है. इसके बाद हाथ में गुड़ और चना लेकर बृहस्पति देव की कथा का पाठ करना चाहिए. बृहस्पतिवार की आरती की जाता है तथा दिन भर फलाहार व्रत रखना चाहिए. व्रत का पारण अगले दिन स्नान और दान के साथ करना चाहिए. बृहस्पतिवार के दिन केला और पीली वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है. इस विधि से व्रत व पूजा कर धनु राशि के लोग अवश्य ही संतान सुख को प्राप्त कर सकते हैं.

C. गुरुवार के दिन ये उपाय कर पाएं संतान सुख
यदि धनु राशि के जातक की कुंडली में बृहस्पति की स्थिति कमजोर हो तो इससे व्यक्ति के विवाह में देरी, संतान प्राप्ति में कठिनाई और जीवन के अन्य क्षेत्रों में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. बृहस्पति देव के हानिकारक प्रभावों से बचने के लिए धनु राशि के लोग गुरुवार के दिन ये उपाय कर सकते हैं.
1. गुरु दोष को दूर करने के लिए धनु राशि के लोग गुरुवार के दिन अपने नहाने के पानी में चुटकी भर हल्दी डालकर स्नान करें व नहाते वक्त ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं. इससे कुंडली में गुरु ग्रह के दोष दूर होते हैं.
2. धनु राशि के लोग सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने के बाद भगवान् विष्णु की पूजा अर्चना करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें. गुरुवार का व्रत रखें और यदि संभव हो तो केले के पौधे में जल में गुड़ और चने की दाल मिलाकर अर्पण करें. इसके साथ ही बृस्पतिदेव की कथा या सत्यनारायण भगवान की कथा सुने.
3. यदि धनु राशि के जातक के लग्न कुंडली में पंचमेश पीड़ित हैं तो उनकी आराधना करें. संतान सुख की प्राप्ति के लिए गुरु ग्रह की पूजा करें. गुरुवार के दिन गुड़ दान करें. गुरु ग्रह को मजबूत बनाने के लिए इन मंत्रों का जाप करें-
देवानां च ऋषिणां च गुरुं काञ्चनसन्निभम्. बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्..
ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः. ह्रीं गुरवे नमः. बृं बृहस्पतये नमः.
4. दंपति गुरुवार का व्रत रखकर पीले वस्त्र धारण करें, पीली वस्तुओं का दान करें यथासंभव पीला भोजन ही करें.
5. गुरुवार के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने और उन्हें दान दक्षिणा देने से धनु राशि के लोगों को विशेष फल की प्राप्ति होती है.
6. गुरुवार के दिन स्त्रियों को पीले धागे में पिसी कौड़ी को कमर पर बांधने से प्रबल संतान के योग बनते है.
7. कुंडली में गुरु की स्थिति मजबूत बनाने के लिए बृहस्पतिवार के दिन किसी को उधार देते वक़्त ख़ास सावधानी बरतें. धन का लेन-देन करने से गुरु कमजोर होता है.
8. माता बनने की इच्छुक महिला को चाहिए गुरुवार के दिन गेंहू के आटे की 2 मोटी लोई बनाकर उसमें भीगी चने की दाल और थोड़ी सी हल्दी मिलाकर नियमपूर्वक गाय को खिलाएं

D. संतान प्राप्ति के लिए लाल किताब के उपाय
बृहस्पति को अन्य सभी ग्रहों का गुरु और ब्रह्मा जी का प्रतीक माना गया है. बृहस्पति की कृपा से जीवन में ज्ञान, धर्म, संतान और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, इसलिए कुंडली में बृहस्पति की स्थिति प्रबल होने बहुत आवश्यक है. जब जन्म कुंडली में बृहस्पति की स्थिति कमजोर हो तो, लाल किताब से संबंधित निम्न उपाय अवश्य करना चाहिए. इससे संतान प्राप्ति में आने वाली बाधाएं दूर होगी.
1. हल्दी की गांठ पीले रंग के धागे में बांधकर दायीं भुजा पर बांधना चाहिए.
2. सोने की चेन और बृहस्पति यंत्र धारण करना चाहिए.
3. घर में पीले सूरजमुखी का पौधा लगाना चाहिए.
4. 27 गुरुवार तक केसर का तिलक लगाना और केसर की पुड़िया पीले रंग के कपड़े या कागज में अपने पास रखना चाहिए.
5. व्यक्ति को माता-पिता, गुरुजन और अन्य पूज्यनीय व्यक्तियों के प्रति आदर और सम्मान का भाव रखना चाहिए. गुरू, पुरोहित और शिक्षकों में बृहस्पति का निवास होता है अत: इनकी सेवा से भी बृहस्पति के दुष्प्रभाव में कमी आती है.
6. पीले रंग के वस्त्र पहनना और घर में पीले रंग के पर्दे लगाना शुभ होता है.
7. गुरुवार के दिन मंदिर में केले के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाना चाहिए.
8. गुरुवार के दिन ‘ॐ बृं बृहस्पतये नमः!’ मंत्र का जाप करें.
9. गुरुवार को बृहस्पति देव की पूजा में गंध, अक्षत, पीले फूल, पीले पकवान और पीले वस्त्र का दान करें.
10. पीपल के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करना चाहिए.

E. संतान सुख के लिए बृहस्पतिवार को करें इन चीजों का दान
1. बृहस्पति ग्रह की शांति और उससे शुभ फल प्राप्त करने के लिए जिन वस्तुओं का दान करना चाहिए.
2. उनमें चीनी, केला, पीला कपड़ा, केसर, नमक, मिठाई, हल्दी, पीले फूल और पीला भोजन उत्तम माना गया है.
3. इस ग्रह की शांति के लिए बृहस्पति से संबंधित रत्न का दान करना भी श्रेष्ठ होता है. दान करते समय आपको ध्यान रहे कि दिन बृहस्पतिवार हो और सुबह का समय हो. किसी ब्राह्मण, गुरू अथवा पुरोहित को दान देना विशेष फलदायक होता है.
4. जिन लोगों का बृहस्पति कमजोर हो उन लोगों को केला और पीले रंग की मिठाईयां गरीबों, पक्षियों विशेषकर कौओं को देना चाहिए.
5. निर्धन और ब्राह्मणों को दही चावल खिलाना चाहिए.

F. ज्योर्तिलिंग पर पूजा करने से होगी संतान सुख की प्राप्ति
देवाधिदेव भगवान् महादेव सर्वशक्तिमान हैं. भगवान भोलेनाथ ऐसे देव हैं जो थोड़ी सी पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं. संहारक के तौर पर पूज्य भगवान शंकर बड़े दयालु हैं. उनके अभिषेक से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी प्रकार विभिन्न राशि के व्यक्तियों के लिए शास्त्र अलग-अलग ज्योर्तिलिंगों की पूजा का महत्व बताया गया है. भगवान शंकर के पृथ्वी पर 12 ज्योर्तिलिंग हैं. भगवान शिव के सभी ज्योतिर्लिंगों को अपना अलग महत्व है. शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर के ये सभी ज्योजिर्लिंग प्राणियों को दु:खों से मुक्ति दिलाने में मददगार है. इन सभी ज्योर्तिलिंगों को 12 राशियों से भी जोड़कर देखा जाता है.
इस आधार पर धनु राशि के व्यक्ति को संतान प्रप्ति के लिए वाराणसी स्थित काशी विश्‍वनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए. विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का संबंध धनु राशि से है. इस राशि वाले व्यक्ति को सावन के महीने तथा महाशिवरात्रि के दिन गंगाजल में केसर मिलाकर शिव को अर्पित करना चाहिए. विल्वपत्र एवं पीला अथवा लाल कनेर शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए. धनु राशि के लिए शिव मंत्र -ओम तत्पुरूषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रूद्रः प्रचोदयात।।. इस मंत्र से शिव की पूजा करें. काशी विश्वनाथ मंदिर सबसे प्रसिद्ध भगवान शिव का मंदिर है. यह ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के वाराणसी के गंगा नदी के पश्चिमी तट पर अवस्थित है. दुनिया में यह सबसे पुराना जीवित शहर जो मंदिरों का शहर काशी कहा जाता है और इसलिए मंदिर लोकप्रिय काशी विश्वनाथ भी कहा जाता है. वाराणसी के पवित्र शहर में भीड़ गलियों के बीच स्थित है. मुक्ति पाने वाले यहां आते हैं तारक मंत्र लेकर प्रार्थना करते हैं भक्ति के साथ विश्वेश्वर पूजा जिससे सभी इच्छाओं और सभी सिद्धियां उपलब्ध होती है और अंत में मनुष्य मुक्त हो जाता है.

G. पितृ दोष के उपाय से धनु राशि को मिलेगा संतान सुख
ऐसा माना जाता है कि यदि व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष है तो उस व्यक्ति को जीवन में संतान का सुख नहीं मिल पाता है. अगर मिलता भी है तो कई बार संतान विकलांग होती है, मंदबुद्धि होती है या फिर चरित्रहीन होती है या फिर कई बार बच्‍चे की पैदा होते ही मृत्‍यु हो जाती है. इसलिए संतान सुख की प्राप्ति के लिए जरूरी है कि धनु राशि के लोग अपनी कुंडली में मौजूद पितृ दोष को दूर करने का उपाय करें.
1. पूर्वजों के निधन की तिथि पर ब्राह्मणों को श्रृद्धापूर्वक भोजन करवाएं और यथाशक्ति दान भी करें.
2. कुंडली में पितृ दोष होने पर व्‍यक्ति को दक्षिण दिशा में पितरों की फोटो लगाकर उनको रोजाना माला चढ़ाकर उनका स्‍मरण करना चाहिए. ऐसा करने से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलने के साथ ही पितृदोष के प्रभाव समाप्‍त होता है.
3. कुंडली में पितृदोष दूर करने के लिए किसी गरीब कन्‍या का विवाह करने या फिर विवाह में मदद करने से भी आपको लाभ होता है.
4. शाम के वक्‍त रोजाना दक्षिण दिशा में एक दीपक जरूर जलाएं. रोजाना नहीं जला सकते हैं तो कम से कम पितर पक्ष में जरूर जलाएं.
5. घर के पास में लगे पीपल के पेड़ पर दोपहर में जल चढ़ाएं. पुष्‍प, अक्षत, दूध, गंगाजल और काले तिल भी चढ़ाएं. पितरजनों को याद करें. इससे पितृ दोष का प्रभाव कम होता है.

H. नाड़ी दोष का उपाय कर पाएं संतान सुख
विवाह के समय कुंडली मिलान में बनने वाले दोषों में से एक है नाड़ी दोष. इस दोष के होने पर वैवाहिक स्थिति कभी ठीक नहीं रहती, दंपत्ति संतान सुख से वंचित रह सकते हैं साथ ही वर-वधू के जीवन पर मृत्यु का संकट मंडराया रहता है. नाड़ी दोष निवारण के लिए भगवान शिव की पूजा की जाती है. पूरे विधि-विधान से महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए शिव को प्रसन्न किया जाता है. शिवजी की कृपा से ही नाड़ी दोष शांत होता है.
1. नाड़ी दोष निवारण की पूजा वर और वधू दोनों को साथ बिठाकर की जाती है. इस पूजा में सवा लाख महामृत्युंजय मंत्रों का जप किया जाता है.
2. पूजा के पहले दिन 5 से 7 ब्राह्मण, पूजा करानेवाले लोग पूजा घर या मंदिर में साथ बैठकर भगवान शिव की आराधना करते हैं. शिव परिवार की पूजा करने के बाद मुख्य पंडितजी अपने सहायकों सहित कन्या और वर की कुंडली में स्थित नाड़ी दोष के निवारण के लिए सवा लाख महामृत्युंजय मंत्र के जप का संकल्प लेते हैं. जप पूरा हो जाने के बाद विधि पूर्वक हवन कर ज्योतिषाचार्यों के परामर्श के अनुसार दान दिया जाता है.
3. आमतौर पर यदि वर और कन्या की कुंडली में नाड़ी दोष हो तो विवाह न करने की सलाह दी जाती है. लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में जरूरी उपाय करके इस दोष को शांत किया जा सकता है. इसक लिए ब्राह्मण को गाय का दान दिया जाता है.
4. अपने जन्मदिन पर अपने वजन के बराबर अन्न का दान करने पर नाड़ी दोष के प्रभावों से शांति मिलती है.
5. समय-समय पर ब्राह्मणों को भोजन कराकर वस्त्र दान करने से भी नाड़ी दोष के प्रभावों को शांत किया जा सकता है.
6. पीयूष धारा के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के विवाह में नाड़ी दोष बाधा बन रहा है तो उसे स्वर्ण दान, वस्त्र दान, अन्न दान करना चाहिए. सोने से सर्प की आकृति बनाकर, उसकी विधि पूर्वक प्राण-प्रतिष्ठा करके महामृत्युंजय मंत्र का जप कराने से नाड़ी दोष शांत होता है.

I. ग्रहों की शांति से धनु राशि को मिलेगा संतान सुख
ग्रहों के कारण संतान सुख में बाधा आ रही हो, तो सूर्य के लिए हरिवंश पुराण का पाठ करें. चंद्रमा के लिए सोमवार का व्रत रख कर शिव की उपासना करनी चाहिए. मंगल के लिए महारुद्र या अतिरुद्र यज्ञ कराएं. बुध के लिए महाविष्णु की उपासना करें. गुरु के लिए पितरों का श्राद्ध करें. शुक्र के लिए गौपालन एवं उसकी सेवा करें. शनि के लिए महामृत्युंजय का जप एवं हवन करें. राहु के लिए नागपाश यंत्र की पूजा व बुधवार को व्रत रख करना चाहिए. ऐसे लोगों के लिए कन्यादान करना भी श्रेष्ठ माना गया है. केतु के लिए ब्राह्मण भोजन करा कर उन्हें वस्त्र भेंट करें. इसके अलावा “नवग्रह शांति पाठ”, संतान प्राप्ति में बेहद मददगार होता है इस पाठ से सारे दोष से निवारण मिलता है.

धनु राशि में संतान योग, धनु राशि संतान प्राप्ति, धनु राशि पुत्र प्राप्ति योग, Dhanu Rashi Santan Yog, धनु राशि संतान योग, Dhanu राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Dhanu Rashi Santan Prapti Yog, धनु राशि संतान Prapti योग, धनु राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, धनु राशि को संतान सुख, Dhanu Rashi Putra Prapti Yog, धनु राशि संतान प्राप्ति, धनु लग्न में संतान योग, धनु राशि संतान प्राप्ति के उपाय, धनु राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Saggitarius Putra Prapti Yog, लाल किताब के टोटके, लाल किताब के नियम, Lal Kitab Ke Totke Upay Hindi

Vrushchik Rashi Santan Prapti K Upay

वृश्चिक राशि में संतान योग, वृश्चिक राशि संतान प्राप्ति, वृश्चिक राशि पुत्र प्राप्ति योग, वृश्चिक राशि संतान योग, Vrushchik Rashi Santan Yog, Vrushchik राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Vrushchik Rashi Santan Prapti Yog, वृश्चिक राशि संतान Prapti योग, वृश्चिक राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, वृश्चिक राशि को संतान सुख, Vrushchik Rashi Putra Prapti Yog, वृश्चिक राशि संतान प्राप्ति, वृश्चिक लग्न में संतान योग, वृश्चिक राशि संतान प्राप्ति के उपाय, वृश्चिक राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Scorpio Putra Prapti Yog, संतान प्राप्ति के लिए लाल किताब के उपाय, Santan Prapti Ke Liye Laal Kitab Ke Upay

वृश्चिक राशि में संतान योग, वृश्चिक राशि संतान प्राप्ति, वृश्चिक राशि पुत्र प्राप्ति योग, वृश्चिक राशि संतान योग, Vrushchik Rashi Santan Yog, Vrushchik राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Vrushchik Rashi Santan Prapti Yog, वृश्चिक राशि संतान Prapti योग, वृश्चिक राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, वृश्चिक राशि को संतान सुख, Vrushchik Rashi Putra Prapti Yog, वृश्चिक राशि संतान प्राप्ति, वृश्चिक लग्न में संतान योग, वृश्चिक राशि संतान प्राप्ति के उपाय, वृश्चिक राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Scorpio Putra Prapti Yog, संतान प्राप्ति के लिए लाल किताब के उपाय, Santan Prapti Ke Liye Laal Kitab Ke Upay

वृश्चिक राशि में संतान योग, Vrushchik Rashi Santan Yog
कोई भी शादी शुदा दंपत्ति तब तक पूरी तरह से सुखी नहीं होता जब तक कि उसके घर आंगन में बच्चे की किलकारी न गूंजे. कई बार सारी सुख सुविधाओं के बावजूद लोग संतान सुख से वंचित रह जाते हैं. कई उपाय करने के बाद भी उन्हें वो खुशियां नहीं मिल पाती जो कि उन्हें चाहिए. वजह है संतान प्राप्ति के लिए सही उपाय व पूजा पाठ न करना. ज्योतिष मानते है कि अपनी राशि के अनुसार ही देवी-देवताओं की पूजा करने से वांछित फल की प्राप्ति हो सकती है. अगर आपकी राशि वृश्चिक है और आप भी अब तक संतान का सुख नहीं पा सके हैं तो यहां पर हम आपकी राशि के अनुसार कुछ उपाय और पूजा पाठ के बारे में बता रहे हैं, जिन्हे कर आप अवश्य ही संतान सुख पा सकते हैं.

वृश्चिक राशि को संतान प्राप्ति न होने के कारण, संतान सुख में बाधक कारक
1. मंगल खराब होने या मांगलिक दोष से भी संतान सुख में बाधा आ सकती है.
2. वृश्चिक राशि में राहु- केतु की स्थिति भी है संतान सुख में बाधक
3. दंपति की कुण्डली में नाड़ी दोष होने पर संतान नहीं होती यदि होती भी है तो उनमें शारीरिक विकार होता है. उसके लिए विवाह करने से पहले ही ज्योतिष के उपाय करें.
4. परिवार में पितृ दोष लगने के कारण संतान प्राप्ति में विघ्न उत्पन्न होते है.
5. पूर्व जन्म में हुए सर्पशाप, पितृश्राप, माताश्राप, भ्राताश्राप, प्रेतश्राप या कुलदेवता श्राप आदि के चलते संतान विलंब से होती है या नहीं भी होती है.
6. पिछले जन्म में अगर आपने पेड़-पौधे भी कटवाये हैं, तो यह स्थिति उत्पन्न हो जाती है. इसलिए कुंडली की विधिवत विवेचना कर इसका उपाय अपेक्षित है.

वृश्चिक राशि संतान प्राप्ति के उपाय, Vrushchik Rashi Santan Prapti Ke Upay
A. इष्ट देव की पूजा से वृश्चिक राशि को मिलेगा संतान सुख
अपने इष्ट देव (Isht Dev) की पूजा करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है. इष्ट देव का अर्थ है अपनी राशि के पसंद के देवता. अरुण संहिता जिसे लाल किताब के नाम से भी जाना जाता है, के अनुसार व्यक्ति के पूर्व जन्म में किए गए कर्म के आधार पर इष्ट देवता का निर्धारण होता है और इसके लिए जन्म कुंडली देखी जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इष्ट देव की पूजा करने से व्यक्ति को अच्छे और शुभ फल की प्राप्ति होती है. इष्ट देव की पूजा करने से ये फायदा होता कि कुंडली में चाहे कितने भी ग्रह दोष क्यों न हों, अगर इष्ट देव प्रसन्न हैं तो यह सभी दोष व्यक्ति को अधिक परेशान नहीं करते. इसलिए अगर कोई दंपति संतान सुख से वंचित है तो वह अपने राशि के अनुसार ईष्ट देव की पूजा कर संतान सुख पा सकता है. कुंडली का पंचम भाव इष्ट का भाव माना जाता है. इस भाव में जो राशि होती है उसके ग्रह के देवता ही हमारे इष्ट देव कहलाते हैं. वृश्चिक राशि का स्वामी ग्रह मंगल है इसलिए वृश्चिक राशि के जातक कार्तिकेयजी, हनुमानजी और राम जी को अपना इष्टदेव मानकर पूजा कर सकते हैं और मनचाहाफल प्राप्त कर सकते हैं.
वृश्चिक राशि स्वामी ग्रह – मंगल
वृश्चिक राशि इष्ट देव – भगवान कार्तिकेय, हनुमान जी और राम जी
यहां जानें कि संतान प्राप्ति के लिए कैसे करें वृश्चिक राशि के लोग अपने इष्ट देव भगवान कार्तिकेय, हनुमान जी और राम जी की पूजा-

1. कार्तिकेय पूजन विधि
सुबह जल्दी उठें, घर की साफ-सफाई कर स्नानादि कर ले और स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
स्नानादि के बाद एक पटरी लें और उस पर भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित करें. इनके साथ मां गौरी और शिव जी की प्रतिमा भी स्थापित करें. इसके बाद भगवान का तिलक करें और उनके समक्ष दीप, धूप जलाएं. फिर उन्हें कलावा, अक्षत, हल्दी, चंदन, गाय का घी, दूध, मौसमी फल, फूल आदि चीजें अर्पित करें. लेकिन ध्यान रखें कि शिव जी को हल्दी न चढ़ाएं. पूजा करने के बाद भगवान की आरती करें. साथ ही भजन-कीर्तन भी करें. भगवान कार्तिकेय के मंत्रों देव सेनापते स्कंद कार्तिकेय भवोद्भव. कुमार गुह गांगेय शक्तिहस्त नमोस्तु ते॥ का जाप करें. इससे भगवान प्रसन्न हो जाते हैं.

2. हनुमान जी पूजन विधि
हनुमान जी की पूजा जितनी सरल है उतनी ही कठिन भी है. मंगलवार के दिन सबसे पहले सुबह उठकर स्नान आदि कर निवृत होकर लाल वस्त्र धारंण करें. कोशिश करें की आपने जो वस्त्र पहना है वह सिला हुआ ना हो. घर के ईशान कोण को साफ कर, चौकी स्थापित करें और उस पर लाल वस्त्र बिछाएं. फिर उस पर हनुमान जी की मूर्ती स्थापित करें और वहां पर भगवान श्री राम और माता सीता की भी प्रतिमा अवश्य रखें. इसके बाद घी का दीपक और धूप दीप जलाकर सुंदर कांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंत्र श्री हनुमंते नम: का जाप करें. फिर लाल फूल, लाल सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं. इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ कर हनुमान जी की आरती करें और भगवान को गुड़, केले और लड्डू का भोग लगाएं. तथा परिवार के सदस्यों को प्रसाद वितरित करें. वहीं यदि आपने मंगलावर का व्रत रखा है तो ध्यान रहे कि आपको इस दिन सिर्फ एक बार शाम के समय भोजन करना है. इस दौरान आप अपने भोजन में केवल मीठा भोजन सम्मिलित करें. दिन में आप दूध, केले और मीठे फलहार को शामिल करें.
व्रत और पूजा के दौरान महिलाएं इस बात का ध्यान रखें कि वह हनुमान जी को लाल वस्त्र या सिंदूर ना चढ़ाएं क्योंकि हनुमान जी ब्रम्हचारी थे. साथ ही वे अपने शुद्ध दिनों में ही हनुमान जी की पूजा करें.

3. राम जी पूजन विधि
सूर्योदय से पहले उठ जाएं और फिर स्नान आदि करने के बाद साफ सुथरे कपड़े पहनें. पूजा स्थान पर पूजन सामग्री के साथ आसान लगाकर बैठें. भगवान श्रीराम की पूजा में तुलसी का पत्ता होना अनिवार्य है क्योंकि श्रीराम विष्णु जी के अवतार हैं और भगवान विष्णु को तुलसी बेहद प्रिय है. उसके बाद रोली, चंदन, धूप और गंध से रामजी की पूजा करें. दीपक जलाएं, फिर श्रीराम को मिष्ठान, फल, फूल आदि अर्पित करें. सभी देवी-देवताओं का ध्यान लगाएं और आरती करें. इसके बाद राम जी के मंत्र ॐ नमो भगवते रामचंद्राय: का जाप करें. अगर संभव हो तो घर में हवन कराएं. पूजा के बाद रामचरितमानस, रामायण और रामरक्षास्तोत्र का पाठ जरूर करें. इसे पढ़ना बहुत शुभ माना जाता है.

B. मंगलवार का व्रत करने से वृश्चिक राशि को होगी संतान प्राप्ति
मंगलवार का व्रत श्री हनुमान जी को समर्पित है, यह व्रत करने से कुंडली में मौजूद मंगल ग्रह शुभ फल देता है. यह व्रत करने से व्यक्ति के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और निसंतान दंपति को संतान प्राप्ति सुख का आशीर्वाद मिलता है. संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत भक्तों को लगातार 21 मंगलवार तक करना चाहिए. मंगलवार व्रत में हनुमान जी की पूजा सूर्योदय के बाद और शाम को सूर्यास्त के बाद दिन में दो बार करनी चाहिए.
मंगलवार व्रत विधि- मंगलवार का व्रत करने के लिए व्रती सुबह जल्दी उठें तथा स्नान करके स्वच्छ लाल कपड़े पहन लें. कोशिश करें कि कपड़े सिले हुए ना हो. घर के ईशान कोण में चौकी रखें. अब भगवान हनुमान की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. साथ में श्री राम और माता सीता की मूर्ति या चित्र भी अवश्य स्थापित करें. हाथ में जल लेकर भगवान हनुमान के सामने व्रत करने का संकल्प लें और प्रार्थना करें. धूप-दीप जलाकर भगवान राम और माता सीता की पूजा आराधना करें. इसके बाद श्री हनुमान की पूजा करें.
मंगलवार व्रत के दौरान आपको गुड़ और गेहूं का भोजन करना चाहिए. इस दिन नमक ना खाएं. मंगलवार व्रत करने के दौरान मीठा भोजन ग्रहण करें. आप फल और दूध का सेवन भी कर सकते हैं.

C. मंगल दोष निवारण से वृश्चिक राशि को होगी संतान सुख की प्राप्ति
1. मंगल दोष निवारण के लिए मेहमानों को मिठाई जरूर खिलाएं.
2. घर से जब भी बाहर निकलें, जेब में लाल रंग का रूमाल रखकर ही निकलें. दिन ढलने के बाद राशि स्‍वामी मंगल ग्रह की कृपा पाने के लिए बच्‍चों में गुड़ बांटें.
3. संतान सुख पाने के लिए आपको कमल के गट्टे की माला लाल वस्त्र में बांधकर अपने गले में धारण करना चाहिए अथवा इसे मंदिर में रखना रखना चाहिए.
4. रोज सुबह 108 बार ‘ ऊं आदित्याय नम:’ मंत्र का जाप करें.
5. किसी से कोई वस्‍तु मुफ्त में न लें.
6. हाथी के दांत से बनी किसी वस्‍तु का प्रयोग न करें.
7. पीला वस्त्र लाभदाय है. चादर भी पीले रंग की ही रखें.
8. प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ें.
9. मसूर की दाल बहते जल में प्रवाहित करें या मंदिर में दान करें.
10. सफेद रंग का सुरमा आंखों में लगाएं.
11. राशि की उग्रता को कम करने के लिए वृश्चिक के जातकों को रात में सोते वक्‍त सिरहाने एक गिलास पानी रखकर सोना चाहिए. सुबह उस जल को किसी गमले में डाल दें.
12. विधवाओं की नि:स्वार्थ मदद करें. हमेशा अपनों से बड़ों का सम्मान करें और उनसे आशीर्वाद लेते रहें
13. ग्रहों को शांति रखने के लिए आपको बांए हाथ में चांदी का छल्‍ला धारण करना चाहिए. इसके साथ ही साधु, संतों , मां और गुरुओं की सेवा करें.
14. आपकी राशि के लोगों को मीठी वस्‍तुओं का व्‍यापार नहीं करना चाहिए. इसके साथ ही आंगन में नीम का पेड़ लगाएं.
15. वृश्चिक राशि वालों का राशि स्‍वामी मंगल को माना जाता है जो कि स्‍वभाव से काफी उग्र होते हैं. इस वजह से वृश्चिक वालों को क्रोध काफी आता है. बेहतर होगा कि आप हर बात में धैर्य से काम लें.
16. घमंड, अहंकार, बदजुबानी और अपराधिक प्रवृत्ति से दूर रहें.
17. दक्षिण और शेरमुखी मकान में न रहें.
18. जहां रोज भट्टी जलती हो वहां भी न रहें.
19. मांस, मटन, चिकन, अंडा और मछली खाने से बचें.
20. भाई और पिता से झगड़ा न करें. क्रोध से बचें.

D . संतान सुख के लिए वृश्चिक राशि को लोग मंगलवार को करें ये उपाय
1. संतान सुख के लिए मंगलवार को हनुमान जी का व्रत रखें. यदि व्रत रखना संभव न हो सके तो हनुमान जी की पूजा अवश्य करें. इस दौरान हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ अवश्य करें. ऐसा करने से अवश्य ही आपकी मनोकामना पूर्ण होगी.
2. हनुमान जी को चोला चढ़ाये और चने का भोग लगाएं.
3. मंगलवार के दिन गरीबो को गुड़ बांटे, तथा हनुमान जी को गुलाब की माला अर्पित करें.
4. संतान सुख प्राप्त करने के लिए वृश्चिक राशि के जातक कोई भी महत्वपूर्ण कार्य मंगलवार को करें तो श्रेष्ठ फल प्राप्त होगा.
5. प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में जाकर बूंदी का प्रसाद चढ़ाकर बांटना शुभ रहेगा. इससे जीवन में आने वाली अकस्मात परेशानियां दूर हो जाएंगी और संतान सुख की प्राप्ति होगी.
6. वृश्चिक राशि वालों के लिए बेहतर होगा कि बहन, बुआ और बेटियों को अक्‍सर उपहार देते रहें. हर मंगलवार को मीठी रोटी गाय को खिलाएं, इससे अवश्य ही संतान सुख की प्राप्ति होगी.
7. यदि बच्चे न होते हों या होते ही मर जाते हों, तो मंगलवार के दिन मिट्टी की हांडी में शहद भरकर श्मशान में दबायें.

E. वृश्चिक राशि में राहु- केतु की सही स्थिति देगी संतान सुख
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि वृश्चिक राशि में राहु- केतु की स्थिति शुभ न हो तो ये दोनों ग्रह (राहु- केतु) व्यक्ति की जीवन में परेशानियों का अंबार लगा देते हैं. इसके कारण व्यक्ति के जीवन में एक परेशानी समाप्त होती है तो दूसरी आरंभ हो जाती है. राहु-केतु के द्वारा निर्मिक कालसर्प दोष या फिर पितृ दोष जन्म कुंडली में मौजूद हो तो जीवन में और भी अधिक परेशानियां देखने को मिलती है. व्यक्ति जीवन भर भटकता रहता है. हर कार्य में असफलता प्राप्त होती है. करियर में बाधा आती है. इसके अलावा आपकी कुंडली में मौजूद ग्रहों की और नक्षत्रों की स्थिति भी संतान प्राप्ति की राह में बाधा बन सकती है. कुंडली में राहु और केतु का स्थान यह निश्चित करता है कि आपको संतान प्राप्ति होगी या नहीं होगी अथवा संतान की प्राप्ति कब होगी? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु और केतु को पाप ग्रह की श्रेणी में रखा गया है. ये सदैव अशुभ फल देते हैं ऐसा नहीं है. शुभ स्थान होने पर ये दोनों ग्रह बहुत अच्छे परिणाम भी देते हैं. इसलिए जरूरी है कि वृश्चिक राशि के जातक राहु- केतु दोष निवारण उपाय करें ताकि वे संतान सुख पाने के साथ ही जीवन की अन्य परेशानियों से छुटकारा भी पा सके. अगर संतान सुख की लालसा है और कोई सरल उपाय अभी तक नजर नहीं आया है तो एक बार इस उपाय को अपनाएं और राहू केतु की आराधना से समस्त क्लेशों को दूर करते हुए संतति प्राप्ति की बाधाओं को निष्क्रिय करें, क्योंकि इनको खुश करने से ही घर में किलकारियां गूंज सकती हैं.
राहु- केतु का उपाय
राहु और केतु को शांत रखने के लिए बुधवार को भगवान गणेश जी की पूजा करें. इस दिन गणेश जी को दुर्वा घास चढ़ाएं. मां दुर्गा के नवार्ण मंत्र का पाठ करने से भी इन ग्रहों को शांत रखने में मदद मिलती है. ये मंत्र इस प्रकार है- ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
राहु और केतु को खुश करने के लिए मंत्र
1. अर्धकायं महावीर्यं चंद्रादित्यविमर्दनम्. सिंहिंकागर्भशंभूतम् तं राहुं प्रणमाम्यहम्..
2. ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नमः.
3. पलाशपुष्पसंकाशं तारकाग्रहमस्तकम्. रौद्रं रौद्रात्मकम् घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्.

F. पितृ दोष के उपाय से वृश्चिक राशि को मिलेगा संतान सुख
पितृ दोष होने पर व्‍यक्ति के जीवन में संतान का सुख नहीं मिल पाता है. अगर मिलता भी है तो कई बार संतान विकलांग होती है, मंदबुद्धि होती है या फिर चरित्रहीन होती है या फिर कई बार बच्‍चे की पैदा होते ही मृत्‍यु हो जाती है. इसलिए संतान सुख की प्राप्ति के लिए जरूरी है कि वृश्चिक राशि के लोग अपनी कुंडली में मौजूद पितृ दोष को दूर करने का उपाय करें.
1. कुंडली में पितृ दोष होने पर व्‍यक्ति को दक्षिण दिशा में पितरों की फोटो लगाकर उनको रोजाना माला चढ़ाकर उनका स्‍मरण करना चाहिए. पूर्वजों का आशीर्वाद मिलने के साथ ही पितृदोष के प्रभाव समाप्‍त होने लगेंगे.
2. पूर्वजों के निधन की तिथि पर ब्राह्मणों को श्रृद्धापूर्वक भोजन करवाएं और यथाशक्ति दान भी करें.
3. शाम के वक्‍त रोजाना दक्षिण दिशा में एक दीपक जरूर जलाएं. रोजाना नहीं जला सकते हैं तो कम से कम पितर पक्ष में जरूर जलाएं.
4. घर के पास में लगे पीपल के पेड़ पर दोपहर में जल चढ़ाएं. पुष्‍प, अक्षत, दूध, गंगाजल और काले तिल भी चढ़ाएं. पितरजनों को याद करें.
5. कुंडली में पितृदोष दूर करने के लिए किसी गरीब कन्‍या का विवाह करने या फिर विवाह में मदद करने से भी आपको लाभ होता है.

G. नाड़ी दोष का उपाय कर वृश्चिक राशि को लोग पाएं संतान सुख
विवाह के समय कुंडली मिलान में बनने वाले दोषों में से एक है नाड़ी दोष. इस दोष के होने पर वैवाहिक स्थिति कभी ठीक नहीं रहती, दंपत्ति संतान सुख से वंचित रह सकते हैं साथ ही वर-वधू के जीवन पर मृत्यु का संकट मंडराया रहता है. नाड़ी दोष निवारण के लिए भगवान शिव की पूजा की जाती है. पूरे विधि-विधान से महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए शिव को प्रसन्न किया जाता है. शिवजी की कृपा से ही नाड़ी दोष शांत होता है.
1. नाड़ी दोष निवारण की पूजा वर और वधू दोनों को साथ बिठाकर की जाती है. इस पूजा में सवा लाख महामृत्युंजय मंत्रों का जप किया जाता है.
2. पूजा के पहले दिन 5 से 7 ब्राह्मण, पूजा करानेवाले लोग पूजा घर या मंदिर में साथ बैठकर भगवान शिव की आराधना करते हैं. शिव परिवार की पूजा करने के बाद मुख्य पंडितजी अपने सहायकों सहित कन्या और वर की कुंडली में स्थित नाड़ी दोष के निवारण के लिए सवा लाख महामृत्युंजय मंत्र के जप का संकल्प लेते हैं.
3. जप पूरा हो जाने के बाद विधि पूर्वक हवन कर ज्योतिषाचार्यों के परामर्श के अनुसार दान दिया जाता है.
4. आमतौर पर यदि वर और कन्या की कुंडली में नाड़ी दोष हो तो विवाह न करने की सलाह दी जाती है. लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में जरूरी उपाय करके इस दोष को शांत किया जा सकता है. इसक लिए ब्राह्मण को गाय का दान दिया जाता है.
5. अपने जन्मदिन पर अपने वजन के बराबर अन्न का दान करने पर नाड़ी दोष के प्रभावों से शांति मिलती है.
6. समय-समय पर ब्राह्मणों को भोजन कराकर वस्त्र दान करने से भी नाड़ी दोष के प्रभावों को शांत किया जा सकता है.
7. पीयूष धारा के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के विवाह में नाड़ी दोष बाधा बन रहा है तो उसे स्वर्ण दान, वस्त्र दान, अन्न दान करना चाहिए. सोने से सर्प की आकृति बनाकर, उसकी विधि पूर्वक प्राण-प्रतिष्ठा करके महामृत्युंजय मंत्र का जप कराने से नाड़ी दोष शांत होता है.

H. ज्योतिर्लिंग पर पूजा करने से होगी वृश्चिक राशि को संतान सुख की प्राप्ति
देवाधिदेव भगवान् महादेव सर्वशक्तिमान हैं. भगवान भोलेनाथ ऐसे देव हैं जो थोड़ी सी पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं. संहारक के तौर पर पूज्य भगवान शंकर बड़े दयालु हैं. उनके अभिषेक से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी प्रकार विभिन्न राशि के व्यक्तियों के लिए शास्त्र अलग-अलग ज्योतिर्लिंगों की पूजा का महत्व बताया गया है. भगवान शंकर के पृथ्वी पर 12 ज्योतिर्लिंग हैं. भगवान शिव के सभी ज्योतिर्लिंगों को अपना अलग महत्व है. शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर के ये सभी ज्योतिर्लिंग प्राणियों को दु:खों से मुक्ति दिलाने में मददगार है. इन सभी ज्योतिर्लिंगों को 12 राशियों से भी जोड़कर देखा जाता है.
वृश्चिक राशि के व्यक्ति को नागेश्वर ज्योतिर्लिंग पर पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है. वृश्चित राशि वाले जातक को गुजरात के द्वारका जिले में अवस्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए. इस ज्योतिर्लिंग का संबंध वृश्चिक राशि से है. महाशिवरात्रि के दिन इनका दर्शन करने से दुर्घटनाओं से बचाव होता है. जो लोग इस दिन नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का दर्शन न कर सकें वह दूध और धान के लावा से शिव की पूजा करें. शिव को गेंदे का फूल, शमी एवं बेलपत्र चढाएं. वृश्चिक राशि के जातक ‘ह्रीं ओम नमः शिवाय ह्रीं’. मंत्र का जप करें. नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में दसवें ज्योतिर्लिंग के रूप में विश्व भर में प्रसिद्ध है. नागेश्वर अर्थात नागों का ईश्वर और यह विष आदि से बचाव का सांकेतक भी है. यह प्रसिद्ध मंदिर भगवान शिव को समर्पित है. यह मंदिर गुजरात के द्वारकापुरी से 25 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है. नागेश्वर मंदिर जिस जगह पर बना है वहां कोई गांव या बसाहट नहीं है.

I. ग्रहों की शांति से वृश्चिक राशि को मिलेगा संतान सुख
ग्रहों के कारण संतान सुख में बाधा आ रही हो, तो सूर्य के लिए हरिवंश पुराण का पाठ करें. चंद्रमा के लिए सोमवार का व्रत रख कर शिव की उपासना करनी चाहिए. मंगल के लिए महारुद्र या अतिरुद्र यज्ञ कराएं. बुध के लिए महाविष्णु की उपासना करें. गुरु के लिए पितरों का श्राद्ध करें. शुक्र के लिए गौपालन एवं उसकी सेवा करें. शनि के लिए महामृत्युंजय का जप एवं हवन करें. राहु के लिए नागपाश यंत्र की पूजा व बुधवार को व्रत रख करना चाहिए. ऐसे लोगों के लिए कन्यादान करना भी श्रेष्ठ माना गया है. केतु के लिए ब्राह्मण भोजन करा कर उन्हें वस्त्र भेंट करें. इसके अलावा “नवग्रह शांति पाठ”, संतान प्राप्ति में बेहद मददगार होता है इस पाठ से सारे दोष से निवारण मिलता है.

J. संतान प्राप्ति के लिए वृश्चिक राशि के लोग करें लाल किताब के उपाय
1. लाल किताब के अनुसार नि:संतान दंपत्ति को संतान गोपाल साधना करने की सलाह दी जाती है. यह प्रयोग हजारों बार सफल होते देखा गया है, जो नि:संतान हैं, उनके लिए इससे बढ़ कर कोई उपाय है ही नहीं.
2. धन्योऽपि गृहस्थ आश्रम : चार आश्रम, ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ व संन्यास आश्रम में से गृहस्थ आश्रम की महिमा ऋषि-महर्षियों ने भी प्रतिपादित की है. देव भी गृहस्थाश्रम सुख भोगने के लिए पृथ्वी लोक पर बार-बार जन्म लेते हैं.
3. यदि बच्चे जन्म लेते ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते हों तो ऐसी स्थिति में कुछ उपाय कर निदान किया जा सकता है. जैसे गर्भधारण करते ही गर्भवती स्त्री की कलाई पर लाल रंग का धागा बांधना चाहिए. संतान होने पर वह धागा मां की कलाई से खोलकर बच्चे की कलाई पर बांध दें एवं मां की कलाई पर दूसरा धागा बांध दें. यह धागा 18 माह तक बंधा रहे, इस बात का विशेष ध्यान रखें.
4. बच्चों को उनके जन्मदिवस पर नमकीन वस्तुएं बांटें.
5. मेहमानों को मिठाई जरूर खिलाएं.
6. सफेद रंग का सुरमा आंखों में लगाएं.
7. हनुमानजी की भक्ति करें.
8. गुड़ खाना चाहिए.
9. विधवाओं की निस्वार्थ मदद करें.
10. हमेशा अपनों से बड़ों का सम्मान करें.
11. कभी-कभी गुलाबी या लाल चादर पर सोएं.

वृश्चिक राशि में संतान योग, वृश्चिक राशि संतान प्राप्ति, वृश्चिक राशि पुत्र प्राप्ति योग, वृश्चिक राशि संतान योग, Vrushchik Rashi Santan Yog, Vrushchik राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Vrushchik Rashi Santan Prapti Yog, वृश्चिक राशि संतान Prapti योग, वृश्चिक राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, वृश्चिक राशि को संतान सुख, Vrushchik Rashi Putra Prapti Yog, वृश्चिक राशि संतान प्राप्ति, वृश्चिक लग्न में संतान योग, वृश्चिक राशि संतान प्राप्ति के उपाय, वृश्चिक राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Scorpio Putra Prapti Yog, संतान प्राप्ति के लिए लाल किताब के उपाय, Santan Prapti Ke Liye Laal Kitab Ke Upay

Tula Rashi Santan Prapti K Upay

तुला राशि में संतान योग, तुला राशि संतान प्राप्ति, तुला राशि पुत्र प्राप्ति योग, तुला राशि संतान योग, Tula Rashi Santan Yog, Tula राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Tula Rashi Santan Prapti Yog, तुला राशि संतान Prapti योग, तुला राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, तुला राशि को संतान सुख, Tula Rashi Putra Prapti Yog, तुला राशि संतान प्राप्ति, तुला लग्न में संतान योग, तुला राशि संतान प्राप्ति के उपाय, तुला राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Libra Putra Prapti Yog, संतान प्राप्ति के लिए लाल किताब के उपाय

तुला राशि में संतान योग, तुला राशि संतान प्राप्ति, तुला राशि पुत्र प्राप्ति योग, तुला राशि संतान योग, Tula Rashi Santan Yog, Tula राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Tula Rashi Santan Prapti Yog, तुला राशि संतान Prapti योग, तुला राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, तुला राशि को संतान सुख, Tula Rashi Putra Prapti Yog, तुला राशि संतान प्राप्ति, तुला लग्न में संतान योग, तुला राशि संतान प्राप्ति के उपाय, तुला राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Libra Putra Prapti Yog, संतान प्राप्ति के लिए लाल किताब के उपाय

तुला राशि संतान प्राप्ति, तुला राशि पुत्र प्राप्ति योग
हर मां बाप के लिए औलाद का सुख सबसे बड़ा सुख होता है, पर कई बार शादी शुदा दंपति इस सुख से वंचित रह जाते हैं. वे संतान सुख पाने के लिए हरसंभव उपाय करते हैं, हर किसी की सलाहनुसार पूजा पाठ या अनुष्ठान करते हैं किंतु इसके बाद भी वे मनोनुकूल सिद्धि को प्राप्त नहीं कर पाते. हताश व्यक्ति पूजा-पाठ अनुष्ठान आदि को ही ढकोसला बताने लगता है जबकि ऐसा कतई नहीं होता. ज्योतिष मानते हैं कि हर राशि के लोगों को उनकी अपनी राशि के अनुसार ही देवी-देवताओं की पूजा करने से वांछित फल की प्राप्ति हो सकती है. इसलिए तुला राशि के जो जातक अब तक निसंतान हैं वो अपनी राशि के अनुसार पूजा पाठ कर व कुछ उपाय कर संतान प्राप्ति का सुख पा सकते हैं. आइये इस खबर में जानते हैं कि संतान सुख के लिए तुला राशि के जातकों को ज्योतिष के परामर्श के अनुसार किस देवी देवता की पूजा करना चाहिए व कौन कौन से उपाय करने चाहिए.

तुला राशि के लोगों को संतान प्राप्ति न होने के कारण
1. दंपति की कुण्डली में नाड़ी दोष
2. परिवार में पितृ दोष होना
3. पति का शुक्र ग्रह उचित स्थिति में न होना
4. पत्नी का बृहस्पत ग्रह नीच का होना
5. पूर्व जन्म में हुए सर्पशाप, पितृश्राप, माताश्राप, भ्राताश्राप, प्रेतश्राप या कुलदेवता श्राप आदि

तुला राशि संतान प्राप्ति के उपाय, तुला राशि वालों को पुत्र प्राप्ति के उपाय
A. इष्ट देव की पूजा से होगी तुला राशि को संतान सुख की प्राप्ति
इष्ट देव का अर्थ है अपनी राशि के पसंद के देवता. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अपनी राशि के अनुसार इष्ट देव (Isht Dev) की पूजा करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है और इससे व्यक्ति को मनोवांछित फल की प्राप्ति भी होती है. इसका कारण ये है कि इष्ट देव का संबंध हमारे कर्मों और हमारे जीवन से होता है. इष्ट देव की पूजा करने से ये फायदा होता कि कुंडली में चाहे कितने भी ग्रह दोष क्यों न हों, अगर इष्ट देव प्रसन्न हैं तो यह सभी दोष व्यक्ति को अधिक परेशान नहीं करते. इसलिए अगर तुला राशि का कोई दंपति संतान सुख से वंचित है तो वह अपने राशि के अनुसार ईष्ट देव यानी की मां दुर्गा व कालभैरव या शनिदेव को अपना इष्टदेव मानकर पूजा कर संतान सुख पा सकता है. आपको पता हो कि तुला (Libra) राशि का स्वामी शुक्र ग्रह है और इसलिए इनकी इष्ट देवी मां दुर्गा हैं, उन्हें इनकी आराधना करनी चाहिए. मां दुर्गा के साथ ही तुला राशि के जातक शिव जी के दूसरे रूप कालभैरव और शनिदेव को अपना इष्टदेव मानकर पूजा कर सकते हैं.
तुला राशि का स्वामी ग्रह – शुक्र
तुला राशि इष्टदेव – मां दुर्गा, कालभैरव, शनिदेव
यहां जानिए कि संतान सुख की प्राप्ति के लिए तुला राशि के जातक किस तरह से करें मां दुर्गा व शनिदेव की पूजा-

1. संतान प्राप्ति के लिए दुर्गा पूजन विधि
किसी भी शुभ कार्य या पूजन में सबसे पहले भगवान गणेश का नाम लेना मंगलकारी रहता है. क्योंकि गणेश जी प्रथम पूज्‍य हैं और इसीलिए सबसे पहले इनका पूजन करें इसके पश्‍चात् मां दुर्गा की पूजा करें. सबसे पहले अपने मन में दुर्गा माँ का आवाह्न करें और उन्‍हें आसन दें. अब दुर्गा माँ को पहले पंचामृत और फिर जल से स्‍नान करवाएं. अब माता दुर्गा को वस्त्र अर्पित करें. वस्त्रों के बाद आभूषण पहनाएं. अब हाथ मैं अक्षत पुष्प लेकर श्री जगदम्बायै दुर्गा देव्यै नम:, दुर्गादेवीमावाहया​मि मंत्र बोलते हुए दुर्गा माँ का आवाहन करें. अब मां दुर्गा के समक्ष घी का दीपक जलाएं, अब मां को कुमकुम, अक्षत, सिंदूर, इत्र ,गुड़हल का पुष्प और माला अर्पित करे. मिठाइयाँ एवं फलों का नैवेद्य अर्पित करे. श्री दुगा चालीसा का पाठ करे. अंत मैं दुर्गा माँ की आरती करे. दुर्गा पूजा के बाद अज्ञानतावश पूजा में कुछ कमी रह जाने या गलतियों के लिए दुर्गा माँ के सामने हाथ जोड़कर निम्नलिखित मंत्र का जप करते हुए क्षमा याचना करे
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वरि l यत पूजितं मया देवी, परिपूर्ण तदस्त्वैमेव l
आवाहनं न जानामि, न जानामि विसर्जनं l पूजा चैव न जानामि, क्षमस्व परमेश्वरि l
इस प्रकार विधिवत् माता दुर्गा का पूजन करने से तुला राशि के लोगों की संतान सुख की कामना अवश्य ही पूर्ण होगी.

2. संतान प्राप्ति के लिए शनिदेव पूजन विधि
शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा व व्रत करने से विशेषफल की प्राप्ति होती है. श्रावण मास में शनिवार का व्रत प्रारम्भ करना अति मंगलकारी है. शनिदेव की पूजा के लिए श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें व स्वच्छ काले रंग का वस्त्र धारंण करें. अब घर के मंदिर में तेल का दीपक जलाएं और गणेश जी के पूजन से पूजा प्रारंभ करें. शनि देव को नीले लाजवन्ती का फूल, तिल, तेल, गुड़ अर्पण करें. अब भगवान शिव औऱ हनुमान जी को भी फल और फूल चढ़ाएं. शनि चालीसा का पाठ करें. पूजा के अंत में 21 बार शनिदेव महाराज के मंत्रों ओम शनैश्चराय विदमहे सूर्यापुत्राय धीमहि।। तन्नो मंद: प्रचोदयात।। का जाप करें और अंत में कपूर से आरती करें. शनिदेव की पूजा के पश्चात उनसे अपने अपराधों एवं जाने अनजाने जो भी आपसे पाप कर्म हुआ हो उसके लिए क्षमा याचना करें.

3. संतान प्राप्ति के लिए कालभैरव पूजन विधि
कालभैरव पूजन के लिए सुबह ब्रह्ममुहूर्त में उठ कर नित्य-क्रिया आदि कर स्वच्छ हो जाएं और साफ वस्त्रों को धारण करें. एक लकड़ी के पाट पर सबसे पहले शिव और पार्वतीजी के चित्र को स्थापित करें. फिर काल भैरव के चित्र को स्थापित करें. जल का छिड़काव करने के बाद सभी को गुलाब के फूलों का हार पहनाएं या फूल चढ़ाएं. अब सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं और साथ ही धूप जलाएं. अब हल्दी से सभी को तिलक लगाएं. अब शिव और पार्वतीजी का पूजन करें और उनकी आरती उतारें. फिर भगवान भैरव का पूजन करें, उन्हें काले तिल, उड़द अर्पित करें और उनकी आरती उतारें. इस दौरान शिव चालीसा और भैरव चालीसा पढ़ें. ह्रीं उन्मत्त भैरवाय नमः का जाप करें. इसके उपरान्त काल भैरव की आराधना करें. अब पितरों को याद करें और उनका श्राद्ध करें. व्रत के सम्पूर्ण होने के बाद काले कुत्‍ते को मीठी रोटियां खिलाएं या कच्चा दूध पिलाएं.

B. संतान प्राप्ति के लिए करें शुक्रवार का व्रत
शुक्रवार का व्रत धन, विवाह, बच्चे और भौतिकवादी सुख प्राप्त करने के लिए किया जाता है. इसलिए तुला राशि के जो दंपति संतान सुख पाना चाहते हैं वे शुक्रवार का व्रत अवश्य रखें. यह व्रत उन्हें मां संतोषी के लिए रखना है. यह व्रत आप किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले शुक्रवार से शुरू कर सकते हैं. यह व्रत 16 शुक्रवार तक करना चाहिए. इसकी विधि इस प्रकार है-
शुक्रवार व्रत विधि-  सूर्योदय से पूर्व उठें. घर की सफाई कर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं. घर के ही किसी पवित्र स्थान पर संतोषी माता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. संपूर्ण पूजन सामग्री तथा किसी बड़े पात्र में शुद्ध जल भरकर रखें. जल भरे पात्र पर गुड़ और चने से भरकर दूसरा पात्र रखें. संतोषी माता की विधि-विधान से पूजा करें. इसके पश्चात संतोषी माता की कथा सुनें. तत्पश्चात आरती कर सभी को गुड़-चने का प्रसाद बांटें. अंत में बड़े पात्र में भरे जल को घर में जगह-जगह छिड़क दें तथा शेष जल को तुलसी के पौधे में डाल दें. ध्यान रखें कि इस व्रत के दौरान शुक्रवार के दिन व्रत करने वाले स्त्री-पुरुष खट्टी चीज अचार और खट्टे फल का न ही स्पर्श करें और न ही खाएँ. गुड़ और चने का प्रसाद स्वयं भी अवश्य खाएं. व्रत करने वाले के परिवार के लोग भी उस दिन कोई खट्टी चीज नहीं खाएँ. इसी प्रकार मनचाहे फल व संतान प्राप्ति के लिए भक्तजन 16 शुक्रवार का नियमित उपवास रखें. अंतिम शुक्रवार को व्रत का विसर्जन करें. विसर्जन के दिन उपरोक्त विधि से संतोषी माता की पूजा कर 8 बालकों को खीर-पुरी का भोजन कराएं तथा दक्षिणा व केले का प्रसाद देकर उन्हें विदा करें. अंत में स्वयं भोजन ग्रहण करें. उपर दिए गए विधि से अगर आप मां संतोषी का व्रत करते हैं तो अवश्य मां संतोषी आपको संतान प्राप्ति का वरदान देंगी.

C- शुक्र ग्रह के उपाय से तुला राशि को मिलेगा संतान सुख
तुला राशि का स्वामी ग्रह शुक्र है. यदि आपकी कुंडली में शुक्र खराब है तो संतान सुख में बाधा आ सकती है. माना जाता है कि यदि पति का शुक्र ग्रह उचित स्थिति में न हो तो संतान का सुख नहीं मिलता है. इसलिए तुला राशि के शुक्र मजबूत करने के लिए यहां दिए जा रहे निम्नलिखित उपाय कर संतान का सुख पा सकते हैं-
1. संतान प्राप्ति के लिए शुक्र के बीज मंत्र ‘ओम शुं शुक्राय नम:’ का जप करें. इस मंत्र के नियमित जप से सिर्फ पौरुष वृद्धि होती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है.
2. जिन लोगों का शुक्र ग्रह कमजोर है, उन्हें 21 बार या 31 बार शुक्रवार का व्रत करना चाहिए. यह व्रत करने से शुक्र मजबूत होता है और मां दुर्गा की भी कृपा प्राप्त होती है. इस व्रत के प्रभाव से सुख, सौभाग्य और समृद्धि बढ़ती है.
3. ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, अगर विवाह के काफी साल गुजर गए हैं और अभी तक बच्चे की किलकारियां आंगन में नहीं गूंजी हैं तो शुक्रवार के दिन मदार पेड़ की जड़ को उखाड़ लें और फिर उसको निसंतान दंपत्ति के कमरे में बांध दें. ऐसा करने से हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और संतान प्राप्ति की बाधा खत्म होती है.
4. फिरोजा रत्न धारण करें. इस रत्न को पहनने से शुक्र भी अनुकूल होता है और राहु-केतु की प्रतिकूलता में भी कमी आती है. बृहस्पति ग्रह का यह नीला रत्न उपचारात्मक शक्तियों के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. इस रत्न को धारण करने से संतान प्राप्ति के साथ-साथ जीवन में सुख-समृद्धि भी आती है. प्राचीन संस्कृति में फिरोजा रत्न को लोग संतान प्राप्ति और धन वृद्धि के लिए पहनते थे.
5. शुक्र को प्रबल बनाने के लिए आपको सफेद कपड़े, सुंदर वस्त्र, चावल, घी, चीनी आदि का दान करना चाहिए. इनके अलावा आप श्रृंगार सामग्री, कपूर, मिश्री, दही आदी का भी दान कर सकते हैं.
6. शुक्रवार को सफेद वस्त्र पहनकर ओम द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम: मंत्र का जाप 5, 11 या 21 बार करना चाहिए. इससे तुला राशि के लोगों का शुक्र प्रबल होता है.
7. संतान सुख पाने के लिए ग्यारह शुक्रवार तक किसी कन्या को सफेद मिठाई खिलाएं. यह टोटका करने से मां दुर्गा प्रसन्न होकर आपकी कामना पूर्ण करती है.
8. शुक्र के लिए हीरा, सोना, स्फटिक भी दान करने के लिए कहा जाता है, लेकिन यह सबके लिए संभव नहीं है.
9. जिनका शुक्र कमजोर है, उनको हीरा पहनना चाहिए, इसके लिए आप किसी अच्छे ज्योतिषाचार्य की मदद ले सकते हैं.
10. शुक्र को मजबूत करने के लिए भोजन में चीनी, चावल, दूध, दही और घी से बने भोज्य पदार्थ खाना चाहिए. किसी को कोई सेहत संबंधी समस्या हो तो परहेज करें.
11. आप शुक्र का उपरत्न कुरंगी, दतला, तुरमली या सिम्मा धारण कर सकते हैं.
12. महिलाओं का सम्मान करने, साफ-सफाई रखने और इत्र आदि का प्रयोग करने से भी शुक्र ग्रह मजबूत होता है.
13. शुक्र की स्थिति ठीक करने के लिए गौपालन एवं उसकी सेवा करें. ऐसा करने से संतान प्राप्ति में आ रही बाधाएं दूस होती हैं.

D. ज्योतिर्लिंग पर पूजा करने से होगी संतान सुख की प्राप्ति
देवाधिदेव भगवान् महादेव सर्वशक्तिमान हैं. भगवान भोलेनाथ ऐसे देव हैं जो थोड़ी सी पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं. संहारक के तौर पर पूज्य भगवान शंकर बड़े दयालु हैं. उनके अभिषेक से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी प्रकार विभिन्न राशि के व्यक्तियों के लिए शास्त्र अलग-अलग ज्योतिर्लिंगों की पूजा का महत्व बताया गया है. भगवान शंकर के पृथ्वी पर 12 ज्योतिर्लिंग हैं. भगवान शिव के सभी ज्योतिर्लिंगों को अपना अलग महत्व है. शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर के ये सभी ज्योतिर्लिंग प्राणियों को दु:खों से मुक्ति दिलाने में मददगार है. इन सभी ज्योतिर्लिंगों को 12 राशियों से भी जोड़कर देखा जाता है. तुला राशि के व्यक्ति को रामेश्वर ज्योतिर्लिंग पर पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है. तमिलनाडु स्थित भगवान राम द्वारा स्थापित रामेश्वर ज्योतिर्लिंग का संबंध तुला राशि से है. भगवन राम ने सीता की तलाश में समुद्र पर सेतु निर्माण के लिए इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी. महाशिवरात्रि के दिन इनके दर्शन से दांपत्य जीवन में प्रेम और सद्भाव बना रहता है. जो लोग इस दिन रामेश्वर ज्योतिर्लिंग का दर्शन नहीं कर सकें वह दूध में बताशा मिलाकर शिवलिंग को स्नान कराएं और आक का फूल शिव को अर्पित करें. रामेश्‍वरम/ रामलिंगेश्‍वर ज्योतिर्लिंग हिन्दुओं के चार धामों में से एक धाम है. यह तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम जिले में स्थित है. श्री रामेश्वर तीर्थ तमिलनाडु प्रांत के रामनाड जिले में है. मन्नार की खाड़ी में स्थित द्वीप जहां भगवान राम का लोक-प्रसिद्ध विशाल मंदिर है. श्री रामेश्वर जी का मंदिर एक हजार फुट लम्बा, छः सौ पचास फुट चौड़ा तथा एक सौ पच्चीस फुट ऊँचा है.

E. नाड़ी दोष के उपाय से तुला राशि को मिलेगा संतान सुख
विवाह के समय कुंडली मिलान में बनने वाले दोषों में से एक है नाड़ी दोष. इस दोष के होने पर वैवाहिक स्थिति कभी ठीक नहीं रहती, दंपत्ति संतान सुख से वंचित रह सकते हैं साथ ही वर-वधू के जीवन पर मृत्यु का संकट मंडराया रहता है. नाड़ी दोष निवारण के लिए भगवान शिव की पूजा की जाती है. पूरे विधि-विधान से महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए शिव को प्रसन्न किया जाता है. शिवजी की कृपा से ही नाड़ी दोष शांत होता है.
1. शादी से पूर्व आपको सवा लाख बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए या फिर खुद करना चाहिए. इसके बाद शादी के हर 3 वर्ष बाद भी आपको ऐसा करना चाहिए.
2. कन्या की कुंडली में नाड़ी दोष होने पर विवाह से पूर्व कन्या का प्रथम विवाह भगवान विष्‍णु से करवा देना चाहिए.
3. विवाह से पूर्व सोने की वस्तु, वस्त्र और अन्न का दान करने से भी नाड़ी दोष दूर होता है.
4. नाड़ी दोष को दूर करने के लिए नाड़ी दोष निवारण पूजा भी कराई जाती है. इसके साथ ही, जातक को भगवान विष्णु की पूजा भी करनी चाहिए.
5. पीयूष धारा के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के विवाह में नाड़ी दोष बाधा बन रहा है तो उसे स्वर्ण दान, वस्त्र दान, अन्न दान करना चाहिए. सोने से सर्प की आकृति बनाकर, उसकी विधि पूर्वक प्राण-प्रतिष्ठा करके महामृत्युंजय मंत्र का जप कराने से नाड़ी दोष शांत होता है.

F. पितृ दोष के उपाय से तुला राशि को मिलेगा संतान सुख
पितृ दोष होने पर व्‍यक्ति के जीवन में संतान का सुख नहीं मिल पाता है. अगर मिलता भी है तो कई बार संतान विकलांग होती है, मंदबुद्धि होती है या फिर चरित्रहीन होती है या फिर कई बार बच्‍चे की पैदा होते ही मृत्‍यु हो जाती है. इसलिए संतान सुख की प्राप्ति के लिए जरूरी है कि तुला राशि के लोग अपनी कुंडली में मौजूद पितृ दोष का उपाय करें.
1. पूर्वजों के निधन की तिथि पर ब्राह्मणों को श्रृद्धापूर्वक भोजन करवाएं और यथाशक्ति दान भी करें.
2. कुंडली में पितृ दोष होने पर व्‍यक्ति को दक्षिण दिशा में पितरों की फोटो लगाकर उनको रोजाना माला चढ़ाकर उनका स्‍मरण करना चाहिए. पूर्वजों का आशीर्वाद मिलने के साथ ही पितृदोष के प्रभाव समाप्‍त होने लगेंगे.
3. शाम के वक्‍त रोजाना दक्षिण दिशा में एक दीपक जरूर जलाएं. रोजाना नहीं जला सकते हैं तो कम से कम पितर पक्ष में जरूर जलाएं.
4. कुंडली में पितृदोष दूर करने के लिए किसी गरीब कन्‍या का विवाह करने या फिर विवाह में मदद करने से भी आपको लाभ होता है.
5. घर के पास में लगे पीपल के पेड़ पर दोपहर में जल चढ़ाएं. पुष्‍प, अक्षत, दूध, गंगाजल और काले तिल भी चढ़ाएं. पितरजनों को याद करें.

G. लाल किताब के उपाय से होगी संतान प्राप्ति
1. लाल किताब के अनुसार, संतान प्राप्ति में अगर तुला राशि के लोगों को बाधा आ रही है तो वे एक चांदी का तार लें और उसको अग्नि में डाल दें. फिर उस तार को दूध में डाल दें और पी जाएं, ऐसा आप लगातर 40 दिनों तक करें. ऐसा करने से कुंडली में शुक्र की स्थिति मजबूत होती है, जिससे सभी शारीरिक समस्याओं का अंत होता है और संतान की कामना की पूर्ति होती है.
2. लाल किताब के अनुसार तुला राशि के जातक संतान सुख की प्राप्ति हेतु प्रत्येक गुरुवार को गणपतिजी का पूजन करें.
3. लाल किताब के अनुसार संतान सुख की प्राप्ति के लिए शुक्रवार का व्रत रखकर मां लक्ष्मी की उपासना करें.
4. तुला राशि के जातक संतान सुख की प्राप्ति हेतु सिरहाने पानी का लोटा रखकर सोएं और सुबह उस लोटे के पानी को बाहर डाल दें या कीकर के वृक्ष में डाल दें. लाल किताब से जुड़े इस उपाय को कर आप मनवांक्षित फल पा सकते हैं.
5. तुला राशि के जातक संतान सुख की प्राप्ति हेतु मंदिर में पीले केले का प्रसाद वितरित करें.
6. संतान सुख की प्राप्ति के लिए काले कपड़े पहनने से परहेज करें. शुक्रवार को स्काई ब्लू कपड़े पहनें.
7. तुला राशि के जातक संतान सुख की प्राप्ति हेतु मांस-शराब से दूर रहें.
8. संतान सुख की प्राप्ति के लिए चांदी का एक सिक्का अपने पास हमेशा रखें.

H. ग्रहों की शांति से मिलेगा संतान सुख
ग्रहों के कारण संतान सुख में बाधा आ रही हो, तो सूर्य के लिए हरिवंश पुराण का पाठ करें. चंद्रमा के लिए सोमवार का व्रत रख कर शिव की उपासना करनी चाहिए. मंगल के लिए महारुद्र या अतिरुद्र यज्ञ कराएं. बुध के लिए महाविष्णु की उपासना करें. गुरु के लिए पितरों का श्राद्ध करें. शुक्र के लिए गौपालन एवं उसकी सेवा करें. शनि के लिए महामृत्युंजय का जप एवं हवन करें. राहु के लिए नागपाश यंत्र की पूजा व बुधवार को व्रत रख करना चाहिए. ऐसे लोगों के लिए कन्यादान करना भी श्रेष्ठ माना गया है. केतु के लिए ब्राह्मण भोजन करा कर उन्हें वस्त्र भेंट करें. इसके अलावा “नवग्रह शांति पाठ”, संतान प्राप्ति में बेहद मददगार होता है इस पाठ से सारे दोष से निवारण मिलता है.

I. संतान प्राप्ति के अन्य उपाय
1. रोज रात गर्म पानी के साथ अजवाइन खाएं.
2. संतान सुख की प्राप्ति के लिए ‘ऊं बुं बुधाय नम:’ मंत्र का जाप करें.
3. उत्तम संस्कारित संतान के लिए शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन बरगद के पत्ते को धोकर साफ करके उस पर कुमकुम से स्वस्तिक बनाकर उस पर थोड़े से चावल और एक सुपारी रखकर सूर्यास्त से पहले किसी मंदिर में अर्पित कर दें और प्रभु से संतान का वरदान देने के लिए प्रार्थना करें निश्चय ही संतान की प्राप्ति होगी.
4. संतान प्राप्ति की इच्छुक स्त्रियों को 9 वर्ष से कम आयु की कन्याओं के चरण छुने चाहिए, इस प्रकार जल्द ही उनके घर मे बच्चो की किलकारियां गूंज सकती है.
5. संतान गोपाल यंत्र की स्थापना करें व सवा लाख संतान गोपाल मंत्र का जाप करने से और दस मुखी रुद्राक्ष धारण करने से भी जल्दी ही संतान प्राप्ति होती है.
6. प्रतिदिन भोजन में से कुछ अंश गाय आदि जानवरों को दें.
7. दिन में तंदूर की मीठी रोटियां बनाकर आवारा कुत्तों को खिलाएं.
8. यदि बार-बार गर्भपात होता है, तो शुक्रवार के दिन एक गोमती चक्र लाल वस्त्र में सिलकर गर्भवती महिला के कमर पर बांध दें. गर्भपात नहीं होगा.
9. जिन स्त्रियों के सिर्फ कन्या ही होती है, उन्हें शुक्र मुक्ता पहना दी जाये, तो एक वर्ष के अंदर ही पुत्र-रत्न की प्राप्ति होगी.
10. उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में नीम की जड़ लाकर सदैव अपने पास रखने से निसंतान दम्पति को संतान सुख अवश्य प्राप्त होता है.

तुला राशि में संतान योग, तुला राशि संतान प्राप्ति, तुला राशि पुत्र प्राप्ति योग, तुला राशि संतान योग, Tula Rashi Santan Yog, Tula राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Tula Rashi Santan Prapti Yog, तुला राशि संतान Prapti योग, तुला राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, तुला राशि को संतान सुख, Tula Rashi Putra Prapti Yog, तुला राशि संतान प्राप्ति, तुला लग्न में संतान योग, तुला राशि संतान प्राप्ति के उपाय, तुला राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Libra Putra Prapti Yog, संतान प्राप्ति के लिए लाल किताब के उपाय

Kanya Rashi Santan Prapti K Upay

कन्या राशि में संतान योग, कन्या राशि में संतान योग, कन्या राशि संतान प्राप्ति, कन्या राशि पुत्र प्राप्ति योग, कन्या राशि संतान योग, Kanya Rashi Santan Yog, Kanya राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Kanya Rashi Santan Prapti Yog, कन्या राशि संतान Prapti योग, कन्या राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, कन्या राशि को संतान सुख, Kanya Rashi Putra Prapti Yog, कन्या राशि संतान प्राप्ति, कन्या लग्न में संतान योग, कन्या राशि संतान प्राप्ति के उपाय, कन्या राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Virgo Putra Prapti Yog

कन्या राशि में संतान योग, कन्या राशि संतान प्राप्ति, कन्या राशि पुत्र प्राप्ति योग, कन्या राशि संतान योग, Kanya Rashi Santan Yog, Kanya राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Kanya Rashi Santan Prapti Yog, कन्या राशि संतान Prapti योग, कन्या राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, कन्या राशि को संतान सुख, Kanya Rashi Putra Prapti Yog, कन्या राशि संतान प्राप्ति, कन्या लग्न में संतान योग, कन्या राशि संतान प्राप्ति के उपाय, कन्या राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Virgo Putra Prapti Yog

कन्या राशि संतान प्राप्ति, Kanya Rashi Santan Prapti Yog
माँ शब्द सुनना हर स्त्री के लिए अलग ही एहसास होता है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. संतान तो जीवन की वो खुशी है जिसे हर कोई पाना चाहता है. हर इंसान की चाहत होती है कि उसके घर-आँगन में बच्चे की किलकारी गूंजे. परंतु किसी किसी दंपति के जीवन मे, उसके आंगन में उस किलकारी की कमी रह जाती है जिसका वो सुख चाहती है. ज्योतिषी मानते हैं कि अगर निसंतान दंपत्ति अपनी राशि के अनुसार देवी-देवताओं की पूजा व उपाय करें तो उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होगी व संतान सुख की प्राप्ति होगी. आज यहां हम बात कर रहे हैं कन्या राशि की. तो अगर आपकी राशि कन्या है और शादी के कई साल बाद भी अब तक आपको संतान सुख की प्राप्ति नहीं हुई है तो यहां दिए जा रहे पूजा पाठ व उपाय कर आप संतान सुख को पा सकते हैं.

कन्या राशि के लोगों को संतान प्राप्ति न होने के कारण
1. दंपति की कुण्डली में नाड़ी दोष होने पर संतान नहीं होती यदि होती भी है तो उनमें शारीरिक विकार होता है.
2. परिवार में पितृ दोष लगने के कारण संतान प्राप्ति में विघ्न उत्पन्न होते है.
3. यदि बुध ग्रह कमजोर हो तो संतान का सुख नहीं मिलता है.
5. पूर्व जन्म में हुए सर्पशाप, पितृश्राप, माताश्राप, भ्राताश्राप, प्रेतश्राप या कुलदेवता श्राप आदि के चलते संतान विलंब से होती है या नहीं भी होती है.
6. पिछले जन्म में अगर आपने पेड़-पौधे भी कटवाये हैं, तो यह स्थिति उत्पन्न हो जाती है. इसलिए रासिनुसार पूजा-पाठ कर इसका उपाय करना जरूरी है.

कन्या राशि संतान प्राप्ति के उपाय, Kanya Rashi Santan Prapti Ke Upay
A . कन्या राशि के लोग संतान प्राप्ति के लिए इष्टदेव की करें पूजा
इष्ट देव का अर्थ है अपनी राशि के पसंद के देवता. इष्ट देव की पूजा करने से ये फायदा होता कि कुंडली में चाहे कितने भी ग्रह दोष क्यों न हों, अगर इष्ट देव प्रसन्न हैं तो यह सभी दोष व्यक्ति को अधिक परेशान नहीं करते. इसलिए अगर कोई दंपति संतान सुख से वंचित है तो वह अपने राशि के अनुसार ईष्ट देव की पूजा कर संतान सुख पा सकता है. इष्ट देव का संबंध हमारे कर्मों और हमारे जीवन से होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इष्ट देव की पूजा करने से व्यक्ति को अच्छे और शुभ फल की प्राप्ति होती है. साथ ही जिन्हें संतान नहीं हो रही है उन राशियों के जातक को संतान सुख की प्राप्ति होती है. इसलिए अगर कन्या राशि के जातक संतान सुख चाहते हैं तो उन्हे अपने इष्ट देव (Isht Dev) की पूजा करनी चाहिए. कन्या (Virgo) राशि का स्वामी ग्रह बुध है और इसलिए उनके इष्ट देव गणेशजी और विष्णुजी हैं और उन्हें इनकी पूजा करनी चाहिए.
कन्या राशि का स्वामी ग्रह- बुध है
कन्या राशि इष्टदेव- गणेशजी और विष्णुजी
यहां जानिए संतान प्राप्ति के लिए कैसे करें भगवान गणेश और विष्णु जी की पूजा

1- भगवान गणेश की पूजा से मिलेगा कन्या राशि वालों को संतान सुख
भगवान गणेश को अतिप्रिय है बुधवार का दिन. शीघ्र फलदायी होती है बुधवार की गणेश पूजा. शास्त्रों में भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता अर्थात सभी तरह की परेशानियों को खत्म करने वाला बताया गया है. इसलिए कन्या राशि के लोगों को संतान सुख की प्राप्ति के लिए बुधवार के दिन भगवान गणेश की विधिवत् पूजा अर्चना करनी चाहिए.
भगवान गणेश पूजा विधि- प्रातः काल स्नान ध्यान आदि से निवृत्त होकर पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख कर के आसन पर विराजमान होकर सामने श्री गणेश की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. शुद्ध आसन पर बैठकर सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि गणेश भगवान को समर्पित कर, गणेशजी को सूखे सिंदूर का तिलक लगाएं और इनकी आरती करें. अंत में भगवान गणेश जी का स्मरण कर ॐ गं गणपतये नमः का 108 नाम मंत्र का जाप करना चाहिए. ध्यान रखें कि भगवान श्रीगेश को तुलसी दल व तुलसी पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए. उन्हें दुर्वा को धोकर ही चढ़ाना चाहिए. श्रीगणेश भगवान को मोदक (लड्डू) अधिक प्रिय होते हैं इसलिए उन्हें देशी घी से बने मोदक का प्रसाद भी चढ़ाना चाहिए. श्रीगणेश सहित प्रभु शिव व गौरी, नन्दी, कार्तिकेय सहित सम्पूर्ण शिव परिवार की पूजा षोड़षोपचार विधि से करना चाहिए. गणेश भगवान की पूजा के बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ करना फलदायी माना जाता है. अगर समय का अभाव है तो 12 वें अध्याय और कुंजीकास्तोत्र का पाठ कर लेना चाहिए, इससे आपको भगवान गणेश व मां दुर्गा के आशीर्वाद से संतान सुख की प्राप्ति होगी.

2- विष्‍णु पूजन से होगी कन्या राशि वालों को संतान प्राप्ति
मां लक्ष्‍मी के स्‍वामी भगवान विष्‍णु ही इस संसार के पालनहार हैं और अगर आप उनकी पूजा सच्‍चे मन और भक्‍तिभाव से करते हैं तो आपको इस संसार के सबसे बड़े सुख अर्थात् संतान की प्राप्ति होगी. अगर आप भगवान विष्‍णु के साथ मां लक्ष्‍मी की भी पूजा करते हैं तो आपको गृहस्‍थ जीवन का सुख मिलता है. मां लक्ष्‍मी धन और वैभव प्रदान करती हैं और भगवान विष्‍णु के साथ उनकी पूजा करने से आपके सभी कष्‍ट दूर हो जाते हैं. जो कोई संतान सुख की चाह रखता है उन्हें भगवान विष्‍णु के साथ मां लक्ष्‍मी की पूजा जरूर करनी चाहिए. शास्‍त्रों के अनुसार बृहस्‍पतिवार के दिन विष्‍णु पूजन का विशेष महत्‍व है. यहां जानिए भगवान विष्‍णु की पूजन विधि-
विष्‍णु पूजन विधि – संतान सुख की प्राप्ति के लिए विधिवत् भगवान विष्णु की पूजा करें. विष्‍णु पूजन करने के लिए सबसे पहले व्रत का संकल्‍प लें. व्रत का संकल्‍प लेने के लिए हाथों में जल, पुष्‍प और चावल लें. संकल्‍प में पूजन का साल, वार, तिथि, जगह और अपने नाम को लेकर अपनी मनोकामना बोलें. अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें.
किसी भी शुभ कार्य या पूजन में सबसे पहले भगवान गणेश का नाम लेना मंगलकारी रहता है. क्योंकि गणेश जी प्रथम पूज्‍य हैं और इसीलिए सबसे पहले इनका पूजन करना चाहिए. गणेश जी को स्‍नान करें और वस्‍त्र अर्पित करें. अब पुष्‍प और अक्षत अर्पित करें. इसके पश्‍चात् भगवान विष्‍णु की पूजा करें. भगवान विष्‍णु का आवाह्न करें और उन्‍हें आसन दें. अब विष्‍णु जी को स्‍नान करवाएं. पहले पंचामृत और फिर जल से स्‍नान करवाएं. अब विष्‍णु जी को वस्‍त्र पहनाएं. इसके बाद आभूषण और यज्ञोपवीत पहनाएं. फूलों की माला पहनाएं. सुगंधित इत्र अर्पित करें और माथे पर तिलक लगाएं. तिलक के लिए अष्‍टगंध का प्रयोग कर सकते हैं. अब धूप और दीप अर्पित करें. भगवान विष्‍णु को तुलसीदल विशेष प्रिय है इसलिए विष्‍णु पूजन में इसका प्रयोग जरूर करें. भगवान विष्‍णु के पूजन में चावलों का प्रयोग नहीं किया जाता है इसलिए आप इनके स्‍थान पर तिल का प्रयोग कर सकते हैं. घी का दीपक जलाएं और आरती करें. आरती के बाद नेवैद्य अर्पित करें और ऊं नमो नारायणाय नम: मंत्र का जाप करें. इस पूजा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी अवश्य ही आपकी झोली में संतान सुख डालेगी.

B. संतान सुख के लिए करें बुधवार का व्रत
मान्यताओं के अनुसार, बुधवार का व्रत करना हर एक इंसान के लिए लाभदायक होता है. बुधवार का व्रत करने से सुख-शांति समृद्धि के साथ संतान सुख की भी प्राप्ति होती है. मान्यता है कि जिन लोगों की कुण्डली में बुध अनुकूल परिणाम देने के लिए सक्षम नहीं है उन्हें इस व्रत का पालन करना चाहिए. इसलिए कन्या राशि के जो जातक संतान सुख चाहते हैं वे विधिवत् बुधवार का व्रत करें, इससे उन्हे अनुकूल परिणाम मिलेगा. बताते चलें कि बुधवार व्रत को शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से शुरू करना शुभ माना जाता है. यह व्रत लगातार सात बुधवार तक किया जाना चाहिए. व्रत शुरु करने से पहले गणेश जी सहित नवग्रह पूजन की जाती है. ध्यान दें कि बुधवार व्रत के दौरान भागवत महापुराण का पाठ अवश्य करना चाहिए. बुधवार व्रत करने से व्यक्ति का जीवन में सुख-शांति से और घर धन-धान्य से भरा रहता है तथा व्यक्ति की सभी मनेकामनाएं पूर्ण होती है.
बुधवार व्रत विधि- सुबह स्नान के बाद भगवान बुध की पूजा करनी चाहिये. इस दिन हरे रंग के वस्त्रों का प्रयोग करना चाहिये. यदि पूजा के लिये भगवान बुध की प्रतिमा न मिले तो भगवान शिव शंकर की प्रतिमा से भी पूजा की जा सकती है. बुध की पूजा के लिए घर के ही किसी पवित्र स्थान पर भगवान बुध या शंकर भगवान की मूर्ति अथवा चित्र किसी कांस्य पात्र में स्थापित करें. तत्पश्चात धूप, बेल-पत्र, अक्षत और घी का दीपक जलाकर पूजा करें. इस दिन भगवान को सफेद फूल तथा हरे रंग की वस्तुएं चढ़ाएं. इसके बाद निम्न मंत्र से बुध की प्रार्थना करें-
बुध त्वं बुद्धिजनको बोधदः सर्वदा नृणाम्‌.
तत्वावबोधं कुरुषे सोमपुत्र नमो नमः॥
बुधवार की व्रतकथा सुनकर आरती करें. इसके पश्चात गुड़, भात और दही का प्रसाद बांटकर स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें. यथाशक्ति ब्राह्मणों को भोजन कराकर उन्हें दान दें. व्रती एक समय ही भोजन करें.

C. संतान प्राप्ति के लिए बुधवार के दिन करें ये उपाय
1- बुधवार को भगवान गणेश का दिन माना जाता है. बुधवार के दिन गणेश जी को दूब या दूर्वा जरूर चढ़ानी चाहिए. यदि आप प्रत्येक बुधवार को 21 दूर्वा गणेश जी को चढ़ाएंगे तो आपको अवश्य ही संतान सुख की प्राप्ति होगी और गणेश जी का आशीर्वाद सदा आप पर बना रहेगा.
2- बुधवार के दिन गेंहू के आटे की गोलियां बनाकर उसमें चने की दाल और थोड़ी हल्दी मिलाकर गाय को खिलाए.
3- साल में कम से कम एक बार बुधवार के दिन अपने वजन के बराबर घास खरीदकर गौशाला में दान करें, इससे भगवान गणेश प्रसन्न होकर आपको संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देंगे.
4- बुधवार के दिन गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करने से विशेष लाभ मिलेगा. इसके अलावा आप गणेश मंदिर जाकर उन्हें दूर्वा अर्पित करें और लड्डू का भोग जरूर लगाएं.
5- बुधवार के दिन 7 साबुत कौड़ियां लें. कौड़ियां बाजार में पूजन सामग्री की दुकानों पर आसानी से मिल जाती हैं. इसके साथ ही एक मुट्ठी हरे खड़े मूंग लें और दोनों को एक हरे कपड़े में बांधकर चुपचाप किसी मंदिर की सीढ़ियों पर रख आएं. लेकिन ध्यान रखें कि इस संबंध में किसी को कुछ न बताएं और पूरी आस्था रखें.

D. बुध दोष का उपाय कर पाएं संतान सुख
बुधवार का दिन प्रथम पूजनीय भगवान गणेश के अलावा बुध ग्रह को समर्पित है. बुध को ग्रहों का राजकुमार माना जाता है. ज्योतिष में कन्या राशि का स्वामी बुध है और इसका तत्व पृथ्वी है. कहा जाता है कि किसी की कुंडली में बुध सही तो सब शुद्ध यानी अगर बुध मजबूत हो जीवन में सब ठीक रहता है. लेकिन अगर यही बुध कमजोर हो या नीच का हो तो खुशियां मुंह फेर लेती हैं. जुआ और सट्टे की लत लग जाती है, निर्णय क्षमता कमजोर होती है, संतान सुख में बाधा आती है, संतान कष्ट में रहती है और देखते ही देखते घर में सब बर्बाद होने लगता है. इसलिए संतान प्राप्ति के लिए बुध मजबूत होना चाहिए, यहां कन्या राशि के जातक जानिए बुध को मजबूत करने के आसान तरीके ताकि आप भी पा सके संतान सुख के साथ खुशहाल जीवन भी.
1- बुधवार के दिन हरे रंग की चीजों का प्रयोग करना शुभ होता है. यदि आपका बुध कमजोर है तो हमेशा अपने पास हरे रंग का रुमाल रखें.
2- बुधवार के दिन किसी जरूरतमंद को हरी मूंग की दाल दान करें. इससे बुध ग्रह मजबूत होता है.
3- बुध के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए घर की पूर्व दिशा में लाल रंग का झंडा लगाना चाहिए.
4- बुध दोष से निजात पाने के लिए सोने के आभूषण धारण करना लाभकारी माना जाता है.
5- यदि कन्या राशि का कोई व्यक्ति बुध दोष से पीड़ित है तो उसे मां दुर्गा की आराधना करनी चाहिए. रोजाना ‘ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र का 5, 7, 11, 21 या 108 बार जाप करने से बुध दोष समाप्त होता है.
6- कन्या राशि के लोगों को बुध दोष को दूर करने के लिए हाथ की सबसे छोटी उंगली यानि कनिष्ठा उंगली में पन्ना पहनना भी काफी लाभकारी माना जाता है. लेकिन इसके लिए किसी पंडित या ज्योतिष की सलाह लेना बेहद जरूरी है.

E. ज्योतिर्लिंग पर पूजा करने से होगी संतान सुख की प्राप्ति
देवाधिदेव भगवान् महादेव सर्वशक्तिमान हैं. भगवान भोलेनाथ ऐसे देव हैं जो थोड़ी सी पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं. संहारक के तौर पर पूज्य भगवान शंकर बड़े दयालु हैं. उनके अभिषेक से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी प्रकार विभिन्न राशि के व्यक्तियों के लिए शास्त्र अलग-अलग ज्योतिर्लिंग की पूजा का महत्व बताया गया है. भगवान शंकर के पृथ्वी पर 12 ज्योतिर्लिंग हैं. भगवान शिव के सभी ज्योतिर्लिंगों को अपना अलग महत्व है. शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर के ये सभी ज्योजिर्लिंग प्राणियों को दु:खों से मुक्ति दिलाने में मददगार है. इन सभी ज्योतिर्लिंगों को 12 राशियों से भी जोड़कर देखा जाता है.
कन्या राशि के व्यक्ति को भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग पर पूजा करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है. महाराष्ट्र में भीमा नदी के किनारे बसा भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग कन्या राशि का ज्योतिर्लिंग हैं. इस राशि वाले भीमाशंकर को प्रसन्न करने के लिए दूध में घी मिलाकर शिवलिंग को स्नान कराएं. भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है. भारत के बारह ज्योतिर्लिंग में भीमाशंकर का स्थान छटवां है जो महाराष्ट्र के पूणे से लगभग 110 किमी दूर सहाद्रि नामक पर्वत पर स्थित है. श्रावण के महीने में भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन का महत्व बहुत बढ़ जाता है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से व्यक्ति को समस्त दु:खों से छुटकारा मिल जाता है. यह मंदिर अत्यंत पुराना और कलात्मक है. भीमाशंकर मंदिर नागर शैली की वास्तुकला से बनी एक प्राचीन और नयी संरचनाओं का समिश्रण है.

F. कन्या राशि वालों के लिए लाल किताब के उपाय
1- संतान सुख की प्राप्ति के लिए कन्या राशि के लोग बुधवार के दिन दुर्गा माता के मंदिर में जाएं और उन्हें हरे रंग की चूड़ियां चढ़ाएं. ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम: मंत्र का जाप करें, इसके अलावा गणेश मंत्र या दुर्गा माता के मंत्र का भी जाप कर सकते हैं.
2- संतान गोपाल यानी बाल गोपाल पूजा भी संतान प्राप्ति के लिए श्रेष्ठ उपाय माना गया है. भगवान श्री कृष्ण के बचपन का रूप बाल गोपाल कहलाता है. कहते हैं कि श्री कृष्ण के इस रूप की पूजा करने से गोद जल्द भर जाती है. ये पूजा विवाहित जोड़ों को करनी चाहिए.
संतान गोपाल मंत्र- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः.
3- संतान सुख की प्राप्ति के लिए कन्या राशि के लोग बुधवार के दिन श्री गणेश को घी और गुड़ का भोग लगाएं. बाद में यह घी व गुड़ गाय को खिला दें.
4- संतान सुख की प्राप्ति के लिए कन्या राशि के लोग बुधवार के दिन दुर्गा मंदिर के बाहर बैठी किसी कन्या को बुधवार के दिन भोजन कराएं.
5- महिलाओं का सम्मान करें और बुधवार के दिन इन्हें मिठाई खिलाएं.
संतान प्राप्ति के लिए कन्या राशि के लोग बुधवार के दिन 9 कन्याओं को हरे रंग का रुमाल बांटें.
6- संतान सुख की प्राप्ति के लिए कन्या राशि के लोग कन्या, बेटी, बहन, साली, बुआ, मौसी और विधवाओं की सेवा करें.
7- बुधवार के दिन तुलसी का गिरा हुआ पत्ता धोकर खाना बहुत शुभ होता है.
8– संतान सुख की प्राप्ति के लिए कन्या राशि के लोग बुधवार के दिन गाय को हरा चारा खिलाएं.

G- नाड़ी दोष का उपाय कन्या राशि के लोग पाए संतान सुख
विवाह के समय कुंडली मिलान में बनने वाले दोषों में से एक है नाड़ी दोष. इस दोष के होने पर वैवाहिक स्थिति कभी ठीक नहीं रहती, दंपत्ति संतान सुख से वंचित रह सकते हैं साथ ही वर-वधू के जीवन पर मृत्यु का संकट मंडराया रहता है. नाड़ी दोष निवारण के लिए भगवान शिव की पूजा की जाती है. पूरे विधि-विधान से महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए शिव को प्रसन्न किया जाता है. शिवजी की कृपा से ही नाड़ी दोष शांत होता है.
1. वर और कन्या दोनों की नाड़ी मध्य में हो तो पुरुष को प्राण का भय रहता है. इस स्थिति में पुरुष को महामृत्युंजय जाप कराना अति आवश्यक होता है. अगर वर और कन्या दोनों की नाड़ी आदि हो तो स्त्री को प्राण का भय रहता है. इस स्थिति में कन्या महामृत्युजंय जाप कराना अति आवश्यक होता है.
2. पूजा के पहले दिन 5 से 7 ब्राह्मण, पूजा करानेवाले लोग पूजा घर या मंदिर में साथ बैठकर भगवान शिव की आराधना करते हैं. शिव परिवार की पूजा करने के बाद मुख्य पंडितजी अपने सहायकों सहित कन्या और वर की कुंडली में स्थित नाड़ी दोष के निवारण के लिए सवा लाख महामृत्युंजय मंत्र के जप का संकल्प लेते हैं.
3. नाड़ी दोष का प्रभाव कम करने के लिए किसी ब्राह्मण को गोदान या स्वर्णदान करना चाहिए. इसके अलावा सालगिराह पर अपने वजन के बराबर अन्न दान करना चाहिए. साथ ही ब्राह्मणों को भोजन और वस्त्र दान करने से नाड़ी दोष शान्त हो जाता है.
4. पीयूष धारा के अनुसार स्वर्ण दान, गऊ दान, वस्त्र दान, अन्नादान, स्वर्ण की सर्पाकृति बनाकर प्राण-प्रतिष्ठा तथा महामृत्युञ्जय जप करवाने से नाड़ी दोष शान्त हो जाता है.

H- पितृ दोष के उपाय से मिलेगा कन्या राशि के लोगों को संतान सुख
मानव जीवन में कई तरह के दोष होते हैं जिनमें से एक है पितृदोष, अपने पूर्वजों के अंतिम संस्कार किसी भी प्रकार की भूल हो जाने के कारण लोगों में पितृदोष चढ़ जाता है और संतान सुख में बाधा आने लगती है. यहां दिए जा रहे उपाय कर कन्या राशि के लोग पितृदोष दूर कर भविष्य में संतान सुख प्राप्त कर सकते हैं.
1- पितृदोष दूर करने के लिए शिव लिंग पर तांबे का सर्प अनुष्ठानपूर्वक चढ़ाएं.
2- प्रत्येक सोमवार को ‘ॐ हर-हर महादेव’ कहते हुए दही से भगवान शिव का अभिषेक करें.
3- पितृदोष दूर करने के लिए पारद के शिवलिंग बनवाकर घर में प्राण प्रतिष्ठित करवाएं.
4- पितृदोष से जुड़े कष्टों से बचने के लिए प्रतिदिन भगवान शिव के ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का प्रतिदिन एक माला जप करें और जब नाग पंचमी आए तो उस दिन विशेष रूप से व्रत रखें. 5- साथ ही साथ चांदी के नाग प्रतिमा वाली अंगूठी पहनें.
पितृदोष दूर करने के लिए सूर्य अथवा चन्द्र ग्रहण के दिन सात अनाज से तुला दान करें.
6- कालसर्प योग यंत्र की प्राण प्रतिष्ठा करवाकर नित्य पूजन करें. इससे पितृदोष दूर होता है.
7- पितृ दोष दूर करने के लिए अपने मकान की दक्षिण दिशा में पूर्वजों की तस्वीर लगाएं।
8- पितृदोष से बचने के लिए अपने घर एवं दुकान में मोर पंख लगाएं.
9- पितृदोष से जुड़े कष्टों से बचने के लिए ताजी मूली का दान करें.
10- मुठ्ठी भर कोयले के टुकड़े नदी या बहते हुए पानी में बहायें.
11- पितृदोष से बचने के लिए बहते हुए पानी में नारियल बहाएं.
12- यदि आपकी कुंडली में पितृदोष आपके लिए बड़े कष्टों का कारण बन रहा है तो उससे मुक्ति पाने के लिए प्रतिदिन ‘सर्प सूक्त’ का पाठ उत्तम उपाय है.
13- यदि आपकी कुंडली में पितृदोष हो तो पितृपक्ष में पितरों को प्रसन्न करने के लिए अपने पूर्वजों के द्वारा बनवाए घर में जाकर धूप-दीप दिखाना चाहिए और पूरे पितृपक्ष में ‘ॐ पितृय: नम:’ मंत्र का जाप करना चाहिए.

I- संतान प्राप्ति के अन्य उपाय
ग्रहों के कारण संतान सुख में बाधा आ रही हो, तो सूर्य के लिए हरिवंश पुराण का पाठ करें. चंद्रमा के लिए सोमवार का व्रत रख कर शिव की उपासना करनी चाहिए. मंगल के लिए महारुद्र या अतिरुद्र यज्ञ कराएं. बुध के लिए महाविष्णु की उपासना करें. गुरु के लिए पितरों का श्राद्ध करें. शुक्र के लिए गौपालन एवं उसकी सेवा करें. शनि के लिए महामृत्युंजय का जप एवं हवन करें. राहु के लिए नागपाश यंत्र की पूजा व बुधवार को व्रत रख करना चाहिए. ऐसे लोगों के लिए कन्यादान करना भी श्रेष्ठ माना गया है. केतु के लिए ब्राह्मण भोजन करा कर उन्हें वस्त्र भेंट करें.

कन्या राशि में संतान योग, कन्या राशि में संतान योग, कन्या राशि संतान प्राप्ति, कन्या राशि पुत्र प्राप्ति योग, कन्या राशि संतान योग, Kanya Rashi Santan Yog, Kanya राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Kanya Rashi Santan Prapti Yog, कन्या राशि संतान Prapti योग, कन्या राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, कन्या राशि को संतान सुख, Kanya Rashi Putra Prapti Yog, कन्या राशि संतान प्राप्ति, कन्या लग्न में संतान योग, कन्या राशि संतान प्राप्ति के उपाय, कन्या राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Virgo Putra Prapti Yog

Singh Rashi Santan Prapti K Upay

सिंह राशि में संतान योग, सिंह राशि संतान प्राप्ति, सिंह राशि पुत्र प्राप्ति योग, सिंह राशि संतान योग, Singh Rashi Santan Yog, Singh राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Singh Rashi Santan Prapti Yog, सिंह राशि संतान Prapti योग, सिंह राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, सिंह राशि को संतान सुख, Singh Rashi Putra Prapti Yog, सिंह राशि संतान प्राप्ति, सिंह लग्न में संतान योग, सिंह राशि संतान प्राप्ति के उपाय, सिंह राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Leo Putra Prapti Yog, संतान प्राप्ति के लिए लाल किताब के उपाय

सिंह राशि में संतान योग, सिंह राशि संतान प्राप्ति, सिंह राशि पुत्र प्राप्ति योग, सिंह राशि संतान योग, Singh Rashi Santan Yog, Singh राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Singh Rashi Santan Prapti Yog, सिंह राशि संतान Prapti योग, सिंह राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, सिंह राशि को संतान सुख, Singh Rashi Putra Prapti Yog, सिंह राशि संतान प्राप्ति, सिंह लग्न में संतान योग, सिंह राशि संतान प्राप्ति के उपाय, सिंह राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Leo Putra Prapti Yog, संतान प्राप्ति के लिए लाल किताब के उपाय

सिंह राशि संतान प्राप्ति, सिंह राशि पुत्र प्राप्ति योग व उपाय
संतान प्राप्ति को दुनिया में सबसे अधिक सुखदायक माना जाता है. प्रत्येक दंपति की चाहत होती है कि उन्हें भी संतान हो, उनके घर भी बच्चे की किलकारी गूंजे. लेकिन इस चाहत में विघ्न तब पड़ता है, जब पति-पत्नी को पता चलता है कि वो संतान का सुख नहीं पा सकते है. लेकिन ज्योतिषी मानते हैं कि प्रत्येक राशि के जातक अपने राशिनुसार पूजा पाठ कर और कुछ उपाय कर संतान का सुख प्राप्त कर सकते हैं. माना जाता है कि अपनी राशि के अनुसार ही देवी-देवताओं की पूजा करने से वांछित फल की प्राप्ति हो सकती है. आज हम बात कर रहे हैं सिंह राशि की. तो अगर आपकी राशि सिंह है और आप अब तक संतान सुख को प्राप्त नहीं कर सके हैं तो आप यहां दिए जा रहे उपाय कर संतान सुख प्राप्त कर सकते हैं. सिंह राशि के जातक जानिए संतान सुख प्राप्त न होने के कारण और उपाय-

संतान प्राप्ति न होने के ज्योतिषीय कारण
1. दंपति की कुण्डली में नाड़ी दोष होने पर संतान नहीं होती यदि होती भी है तो उनमें शारीरिक विकार होता है. उसके लिए विवाह करने से पहले ही ज्योतिष के उपाय करें.
2. परिवार में पितृ दोष लगने के कारण संतान प्राप्ति में विघ्न उत्पन्न होते है.
3. पूर्व जन्म में हुए सर्पशाप, पितृश्राप, माताश्राप, भ्राताश्राप, प्रेतश्राप या कुलदेवता श्राप आदि के चलते संतान विलंब से होती है या नहीं भी होती है.
4. पिछले जन्म में अगर आपने पेड़-पौधे भी कटवाये हैं, तो यह स्थिति उत्पन्न हो जाती है. इसलिए कुंडली की विधिवत विवेचना कर इसका उपाय अपेक्षित है.

सिंह राशि के अनुसार संतान प्राप्ति के उपाय, सिंह राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Leo Putra Prapti Yog, Singh Rashi Santan Prapti Ke Upay
A . संतान प्राप्ति के लिए सिंह राशि के लोग करें इष्ट देव की पूजा
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अपनी राशि के अनुसार ही देवी-देवताओं की पूजा करने से वांछित फल की प्राप्ति हो सकती है। वैसे तो कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा और श्रद्धा अनुसार किसी भी देवी-देवता की पूजा कर सकता है लेकिन अपने इष्ट देव (Isht Dev) की पूजा करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है. इसका कारण ये है कि इष्ट देव का संबंध हमारे कर्मों और हमारे जीवन से होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इष्ट देव की पूजा करने से व्यक्ति को अच्छे और शुभ फल की प्राप्ति होती है. साथ ही जिन्हें संतान नहीं हो रही है उन राशियों के जातक को संतान सुख की प्राप्ति होती है. अरुण संहिता जिसे लाल किताब के नाम से भी जाना जाता है, के अनुसार व्यक्ति के पूर्व जन्म में किए गए कर्म के आधार पर इष्ट देवता का निर्धारण होता है और इसके लिए जन्म कुंडली देखी जाती है. कुंडली का पंचम भाव इष्ट का भाव माना जाता है. इस भाव में जो राशि होती है उसके ग्रह के देवता ही हमारे इष्ट देव कहलाते हैं. इष्ट देव की पूजा करने से ये फायदा होता कि कुंडली में चाहे कितने भी ग्रह दोष क्यों न हों, अगर इष्ट देव प्रसन्न हैं तो यह सभी दोष व्यक्ति को अधिक परेशान नहीं करते. जानकारी के लिए बता दें कि सिंह राशि वालों का स्वामी ग्रह सूर्य है और उनके इष्ट देव हनुमान जी और मां गायत्री हैं. इसलिए अगर सिंह राशि के दंपति संतान सुख से वंचित है तो वह अपने राशि के अनुसार ईष्ट देव हनुमान जी और मां गायत्री की पूजा कर संतान सुख पा सकते है.
सिंह राशि ग्रह स्वामी- सूर्य
सिंह राशि ईष्टदेव- हनुमान जी और मां गायत्री
यहां जानिए सिंह राशि के जातक संतान प्राप्ति के लिए कैसे करें हनुमान जी और मां गायत्री की पूजा-

1. हनुमान जी की पूजा से मिलेगा संतान सुख- हनुमान जी की पूजा जितनी सरल है उतनी ही कठिन भी है. मंगलवार के दिन सबसे पहले सुबह उठकर स्नान आदि कर निवृत होकर लाल वस्त्र धारंण करें. कोशिश करें की आपने जो वस्त्र पहना है वह सिला हुआ ना हो. अब हनुमान जी की पूजा के लिए ईशान कोण को साफ कर चौकी स्थापित करें और उस पर लाल वस्त्र बिछाएं, उसपर हनुमान जी की मूर्ति स्थापित करें और वहां पर भगवान श्री राम और माता सीता की भी प्रतिमा अवश्य रखें. इसके बाद घी का दीपक और धूप दीप जलाकर सुंदर कांड का पाठ करें और हनुमान जी के मंत्रों का जाप करें. फिर लाल फूल, लाल सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं. इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ कर हनुमान जी की आरती करें और भगवान को गुड़, केले और लड्डू का भोग लगाएं. तथा परिवार के सदस्यों को प्रसाद वितरित करें. वहीं यदि आपने मंगलावर का व्रत रखा है तो ध्यान रहे कि आपको इस दिन सिर्फ एक बार शाम के समय भोजन करना है. इस दौरान आप अपने भोजन में केवल मीठा भोजन सम्मिलित करें. दिन में आप दूध, केले और मीठे फलहार को शामिल करें.

2. मां गायत्री पूजन से मिलेगा संतान प्राप्ति का सुख – अथर्ववेद में बताया गया है कि मां गायत्री से आयु, प्राण, संतान, प्रजा, पशु, कीर्ति, धन एवं ब्रह्मवर्चस मिलता है. विधि और नियमों से की गई गायत्री उपासना रक्षा कवच बनाती है. जिससे परेशानियों के समय उसकी रक्षा होती है. देवी गायत्री की उपासना करने वालों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. मां गायत्री की पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें. स्नान करने के बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें. सभी देवी- देवताओं का गंगा जल से अभिषेक करें. मां गायत्री का ध्यान करें. मां को पुष्प अर्पित करें. गायत्री मंत्र ‘ऊं भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि. धियो यो न: प्रचोदयात्..’ का जप करें. मां को भोग लगाएं. इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है.

B. रविवार व्रत और सूर्य देव की पूजा से मिलेगा संतान प्राप्ति का सुख
रविवार का दिन सूर्य देवता को समर्पित है. जीवन में सुख-समृद्धि, धन-संपत्ति और शत्रुओं से सुरक्षा व संतान प्राप्ति का सुख पाने के लिए रविवार का व्रत सर्वश्रेष्ठ है. रविवार का व्रत करने व कथा सुनने से निसंतान दंपति को संतान सुख मिलता है व व्रती की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. सूर्य का व्रत एक वर्ष तक (30 रविवारों तक) या 12 रविवारों तक करना चाहिए. महिलाएं मासिक धर्म के दौरान व्रत न रखें और उसकी गिनती रविवार व्रत में न करें. उसके अगले रविवार को व्रत रखें. व्रत पूरा होने के बाद व्रत का उद्यापन कर दें.
रविवार व्रत की संपूर्ण विधि- रविवार को सूर्योदय से पहले उठें, स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ लाल रंग के कपड़े पहन लें. रोली या लाल चंदन, लाल पुष्प, अक्षत, दूर्वा मिश्रित जल आदि से सूर्य को अर्घ्य दें. अर्घ्य देते समय ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः मंत्र का मन में ही जाप करें. इसके बाद घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) पर भगवान सूर्य की मूर्ति, चित्र या सूर्य मंत्र स्थापित करें. इस व्रत को शुरू करने से पहले सूर्यदेव का स्मरण कर संकल्प लें कि -हे सूर्य देवता मैं आने वाले 12 या 30 रविवार तक व्रत करने का संकल्प लेती हूं/लेता हूं, अत: मेरी यह व्रत पूजा स्वीकार करें. अब व्रत की शुरुआत करें और पूजा करें. सबसे पहले जल, कुमकुम, चंदन पुष्प से छींटे देकर सूर्य देवता को स्नान कराएं. इसके बाद सूर्य भगवान को किसी ऋतु फल का भोग लगाएं. लाल चंदन, कुमकुम या रोली का तिलक लगाकर रविवार व्रतकथा सुनने के बाद आरती करें. इसके बाद सूर्य देव का स्मरण करते हुए ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम: इस मंत्र का 12 या 5 अथवा 3 माला जप करें. शाम में सूर्यास्त के समय भी एक बार फिर से लोटे में जल, चंदन, चावल (अक्षत) और लाल पुष्प डालकर सूर्यदेवता को अर्ध्य दें.
रविवार के दिन नमक नहीं खाएं. इस व्रत में इलायची मिश्रित गुड़ का हलवा, गेहूं की रोटियां या गुड़ से निर्मित दलिया, दूध, दही, घी और चीनी सूर्यास्त के पूर्व भोजन के रूप में ग्रहण करें. यदि निराहार रहते हुए सूर्य छिप जाये तो दूसरे दिन सूर्य उदय हो जाने पर अर्घ्य देने के बाद ही भोजन करें. इस विधि से पूजा करने पर सूर्य देव अवश्य ही प्रसन्न होकर आपको संतान प्राप्ति सुख का आशीर्वाद देंगे.

C. ज्योतिर्लिंग पर पूजा करने से होगी संतान सुख की प्राप्ति
देवाधिदेव भगवान् महादेव सर्वशक्तिमान हैं. भगवान भोलेनाथ ऐसे देव हैं जो थोड़ी सी पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं. संहारक के तौर पर पूज्य भगवान शंकर बड़े दयालु हैं. उनके अभिषेक से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी प्रकार विभिन्न राशि के व्यक्तियों के लिए शास्त्र अलग-अलग ज्योतिर्लिंग की पूजा का महत्व बताया गया है. भगवान शंकर के पृथ्वी पर 12 ज्योतिर्लिंग हैं. भगवान शिव के सभी ज्योतिर्लिंगों को अपना अलग महत्व है. शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर के ये सभी ज्योजिर्लिंग प्राणियों को दु:खों से मुक्ति दिलाने में मददगार है. इन सभी ज्योतिर्लिंगों को 12 राशियों से भी जोड़कर देखा जाता है.
इसलिए सिंह राशि के व्यक्ति को वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है. सिंह राशि के जातकों को बाबा वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए. ऐसे जातक कारोबार, परिवार, राजनीति, स्वास्थ्य या संतान को लेकर परेशान हैं तो उन्हे महाशिवरात्रि में शिवलिंग को जल में दूध, दही, गंगाजल व मिश्री मिलाकर ॐ जटाधराय नमः मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक करना चाहिए. झारखण्ड के देवघर स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल बैद्यनाथ धाम भगवान शंकर के द्वादश ज्योतिर्लिंग में से नौवां ज्योतिर्लिंग है. यह ज्योतिर्लिंग सर्वाधिक महिमामंडित है.यूं तो यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं लेकिन सावन में यहां भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ता है. सावन में यहां प्रतिदिन करीब एक लाख भक्त ज्योतिर्लिग पर जलाभिषेक करते हैं. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक यह ज्योतिर्लिंग लंकापति रावण द्वारा यहां लाया गया था. माना जाता है कि इस ज्योतिर्लिंग पर सच्चे मन से पूजा करने वालों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है व संतान सुख प्राप्त होता है.

D. नाड़ी दोष निवारण उपाय से मिलेगा संतान सुख
विवाह के समय कुंडली मिलान में बनने वाले दोषों में से एक है नाड़ी दोष. इस दोष के होने पर वैवाहिक स्थिति कभी ठीक नहीं रहती, दंपत्ति संतान सुख से वंचित रह सकते हैं साथ ही वर-वधू के जीवन पर मृत्यु का संकट मंडराते रहता है. नाड़ी दोष निवारण के लिए भगवान शिव की पूजा की जाती है. पूरे विधि-विधान से महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए शिव को प्रसन्न किया जाता है. शिवजी की कृपा से ही नाड़ी दोष शांत होता है. यहां जानिए नाड़ी दोष को शांत करने के उपाय-
1. महामृत्युंजय मंत्र का जप सबसे आसान उपाय है. वर और कन्या दोनों की नाड़ी मध्य में हो तो पुरुष को प्राण का भय रहता है. इस स्थिति में पुरुष को महामृत्युंजय जाप कराना अति आवश्यक होता है. अगर वर और कन्या दोनों की नाड़ी आदि हो तो स्त्री को प्राण का भय रहता है. इस स्थिति में कन्या महामृत्युजंय जाप कराना अति आवश्यक होता है.
2. ब्राह्मण को स्वर्ण-नाड़ी, अनाज, कपड़ा और गाय भेंट करना भी नाडी दोष के निवारण का एक तरीका है.
3. नाड़ी दोष वाली महिला का विवाह भी वास्तविक विवाह से पहले भगवान विष्णु से होता है और इसे नाड़ी दोष अपवाद और उपाय माना जाता है.

E. पितृ दोष के निवारण से पाएं सिंह राशि के लोग संतान सुख
जो लोग अपने पितृ का तर्पण, श्राद्ध या पिंडदान नहीं करते हैं. उनसे पितृ नाराज होकर जाते है और वे पितृ दोष के भागीदार होते हैं. माना जाता है कि जिन लोगों के कुंडली में पितृ दोष होता है उन्हें संतान सुख नहीं मिल पाता इसलिए इस दोष से मुक्ति पाना बेहद जरूरी है.सिंह राशि के लोगों को पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए पितृ पक्ष में प्रतिदिन अपने पितरों का तर्पण करना चाहिए. जल, जौं और काले तिल समेत पुष्पों के साथ तर्पण करना चाहिए. पूर्वजों की पसंद का खाना बनाकर किसी ब्राह्मण को भोजन जरूर कराना चाहिए. इससे पित्तरों का आशीर्वाद मिलता है और पितृ दोष दूर होता है. इसके अलावा पित्तरों के नाम पर श्रीमद् भागवत कथा, गीता, गरूड़ पुराण, नारायण बली, त्रिपिंडी श्राद्ध या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना उत्तम माना गया है. ऐसा करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.

F. संतान प्राप्ति के लिए नवग्रह पूजा
संतान प्राप्ति के लिए आप नवग्रह पूजा कर सकते हैं. इसके लिए आप किसी ज्योतिष विशेषज्ञ से घर या मंदिर में हवन व अभिषेक कराकर नव ग्रहों की शांति की पूजा करवा सकते हैं. ग्रहों के कारण संतान सुख में बाधा आ रही हो, तो सूर्य के लिए हरिवंश पुराण का पाठ करें. चंद्रमा के लिए सोमवार का व्रत रख कर शिव की उपासना करनी चाहिए. मंगल के लिए महारुद्र या अतिरुद्र यज्ञ कराएं. बुध के लिए महाविष्णु की उपासना करें. गुरु के लिए पितरों का श्राद्ध करें. शुक्र के लिए गौपालन एवं उसकी सेवा करें. शनि के लिए महामृत्युंजय का जप एवं हवन करें. राहु के लिए नागपाश यंत्र की पूजा व बुधवार को व्रत रख करना चाहिए. ऐसे लोगों के लिए कन्यादान करना भी श्रेष्ठ माना गया है. केतु के लिए ब्राह्मण भोजन करा कर उन्हें वस्त्र भेंट करें. कहा जाता है कि ऐसा करने से सभी कमजोर ग्रह मजबूत होकर अपना शुभ प्रभाव देने लगते हैं और निंसतान दंपत्ति के घर किलकारियां गूजने लगती है.

G. संतान प्राप्ति के लिए लाल किताब के उपाय
1. उपाय तो मंत्र-तंत्र-यंत्र एवं ज्योतिष में बहुत है पर आवश्यकता है तो मात्र श्रद्धा व पूर्ण विश्वास की. यदि ईश्वर पर पूर्ण विश्वास एवं श्रद्धा है तो ‘संतान गोपाल साधना’ करें, निश्चित रूप से मनोकामना पूर्ण होगी. यह प्रयोग हजारों बार सफल होते देखा गया है, जो नि:संतान हैं, उनके लिए इससे बढ़ कर कोई उपाय है ही नहीं.
2. धन्योऽपि गृहस्थ आश्रम : चार आश्रम, ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ व संन्यास आश्रम में से गृहस्थ आश्रम की महिमा ऋषि-महर्षियों ने भी प्रतिपादित की है. देव भी गृहस्थाश्रम सुख भोगने के लिए पृथ्वी लोक पर बार-बार जन्म लेते हैं.
3. संतान सुख की प्राप्ति के लिए सिंह राशि के लोग शराब और माँस का सेवन न करें, किसी से मुफ्त में कुछ न लें, यात्रा के समय अपने मुँह में कोई मीठी वस्तु रखें, दादी माँ से आशीर्वाद लें, आग को दूध से बुझाएँ, सूर्य को अर्घ्य दें, रविवार का व्रत रखें, थोड़ा थोड़ा गुड़ खाते रहें, रात को दो रोटियाँ आग में जलाएँ.
4. यदि बच्चे जन्म लेते ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते हों तो ऐसी स्थिति में गर्भधारण करते ही गर्भवती स्त्री की कलाई पर लाल रंग का धागा बांधना चाहिए. संतान होने पर वह धागा मां की कलाई से खोलकर बच्चे की कलाई पर बांध दें एवं मां की कलाई पर दूसरा धागा बांध दें. यह धागा 18 माह तक बंधा रहे, इस बात का विशेष ध्यान रखें.

H. संतान सुख के लिए अन्य उपाय
1. संतान सुख के लिए मंगलवार को हनुमान जी का व्रत रखें. यदि व्रत रखना संभव न हो सके तो हनुमान जी की पूजा अवश्य करें. इस दौरान हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ अवश्य करें. ऐसा करने से अवश्य ही आपकी मनोकामना पूर्ण होगी.
2. संतान प्राप्ति के लिए सिंह राशि के जातक बछड़े वाली गाय की सेवा करें. गाय को मीठी रोटी खिलाएं,
3. संतान सुख प्राप्त करने के लिए सिंह राशि के जातक कोई भी महत्वपूर्ण कार्य मंगलवार को करें तो श्रेष्ठ फल प्राप्त होगा.
4. संतान की इच्छा रखने वाली स्त्रियों को “सर्प-पूजन” करना चाहिए, इससे संतान दोष दूर हो जाता है.
5. प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में जाकर बूंदी का प्रसाद चढ़ाकर बांटना शुभ रहेगा. इससे जीवन में आने वाली अकस्मात परेशानियां दूर हो जाएंगी और संतान सुख की प्राप्ति होगी.
6. सिंह राशि वालों के लिए बेहतर होगा कि बहन, बुआ और बेटियों को अक्‍सर उपहार देते रहें. इससे अवश्य ही संतान सुख की प्राप्ति होगी.
7. यदि बच्चे न होते हों या होते ही मर जाते हों, तो मंगलवार के दिन मिट्टी की हांडी में शहद भरकर श्मशान में दबायें.
8. हनुमान जी को चोला चढ़ाये और चने का भोग लगाएं.
9. गरीबो को गुड़ बांटे तथा हनुमान जी को गुलाब की माला अर्पित करें.

सिंह राशि में संतान योग, सिंह राशि में संतान योग, सिंह राशि संतान प्राप्ति, सिंह राशि पुत्र प्राप्ति योग, सिंह राशि संतान योग, Singh Rashi Santan Yog, Singh राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Singh Rashi Santan Prapti Yog, सिंह राशि संतान Prapti योग, सिंह राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, सिंह राशि को संतान सुख, Singh Rashi Putra Prapti Yog, सिंह राशि संतान प्राप्ति, सिंह लग्न में संतान योग, सिंह राशि संतान प्राप्ति के उपाय, सिंह राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Leo Putra Prapti Yog

Kark Rashi Santan Prapti K Upay

कर्क राशि में संतान योग, कर्क राशि पुत्र प्राप्ति योग, कर्क राशि संतान योग, Kark Rashi Santan Yog, Kark राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Kark Rashi Santan Prapti Yog, कर्क राशि संतान Prapti योग, कर्क राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, कर्क राशि को संतान सुख, Kark Rashi Putra Prapti Yog, कर्क राशि संतान प्राप्ति, कर्क लग्न में संतान योग, कर्क राशि संतान प्राप्ति के उपाय, कर्क राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Cancer Putra Prapti Yog, संतान प्राप्ति के लिए लाल किताब के उपाय

कर्क राशि में संतान योग, कर्क राशि पुत्र प्राप्ति योग, कर्क राशि संतान योग, Kark Rashi Santan Yog, Kark राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Kark Rashi Santan Prapti Yog, कर्क राशि संतान Prapti योग, कर्क राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, कर्क राशि को संतान सुख, Kark Rashi Putra Prapti Yog, कर्क राशि संतान प्राप्ति, कर्क लग्न में संतान योग, कर्क राशि संतान प्राप्ति के उपाय, कर्क राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Cancer Putra Prapti Yog, संतान प्राप्ति के लिए लाल किताब के उपाय

कर्क राशि में संतान योग, कर्क राशि पुत्र प्राप्ति योग
एक सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए घर में बच्चों की किलकारियों का गूंजना काफी महत्वपूर्ण होता है. जो महिलाएं किसी कारणवश मां नहीं बन पातीं उनका दुख केवल वही समझ सकती हैं, अक्सर संतान प्राप्ति के लिए दम्पत्ति अपनी सारी दौलत लुटाने को तैयार रहते हैं, जिसका फायदा कई बार ऐसे लोग भी उठा लेते हैं, जो ढोंगी होते हैं और हालातों के मारे बे-औलाद मां-बाप कुछ नहीं कर पाते. लेकिन ज्योतिष शास्त्र के कुछ ऐसे उपाय होते हैं, जो एक निराश दम्पत्ति के लिए आशा की किरण बन सकते हैं, लेकिन वो उपाय तभी कारगर साबित होते हैं जब आप उन उपायों को अपनी राशि के अनुसार करते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जो भी दंपत्ति पूरे श्रद्धाभाव से अपनी राशि के अनुसार पूजा पाठ करते हैं उन्हें अवश्य ही संतान सुख प्रप्त होता है. आज हम बात कर रहे हैं राशि चक्र की चौथी राशि कर्क के बारे में. तो चलिए जानते हैं कि वो कौन से उपाय है जिन्हें करके कर्क राशि के जातक संतान प्राप्ति का सुख पा सकते हैं-

संतान प्राप्ति में आने वाली बाधाएं
1. दंपति की कुण्डली में नाड़ी दोष
2. परिवार में पितृ दोष लगने के कारण
3. पूर्व जन्म में हुए सर्पशाप, पितृश्राप, माताश्राप, भ्राताश्राप, प्रेतश्राप या कुलदेवता श्राप आदि
4. पिछले जन्म में अगर आपने पेड़-पौधे भी कटवाये हैं, तो यह स्थिति उत्पन्न हो जाती है. इसलिए कुंडली की विधिवत विवेचना कर इसका उपाय अपेक्षित है.

राशि के अनुसार संतान प्राप्ति के उपाय, कर्क राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Cancer Putra Prapti Yog, Kark Rashi Santan Prapti Ke Upay
A . संतान प्राप्ति के लिए कर्क राशि के लोग करें इष्ट देवी की पूजा
इष्ट देव/ देवी का अर्थ है अपनी राशि के पसंद के देवी- देवता. अरुण संहिता जिसे लाल किताब के नाम से भी जाना जाता है, के अनुसार व्यक्ति के पूर्व जन्म में किए गए कर्म के आधार पर इष्ट देवी/ देवता का निर्धारण होता है और इसके लिए जन्म कुंडली देखी जाती है. कुंडली का पंचम भाव इष्ट का भाव माना जाता है. इस भाव में जो राशि होती है उसके ग्रह के देवता ही हमारे इष्ट देव कहलाते हैं. इष्ट देव की पूजा करने से ये फायदा होता है कि कुंडली में चाहे कितने भी ग्रह दोष क्यों न हों, अगर इष्ट देव प्रसन्न हैं तो यह सभी दोष व्यक्ति को अधिक परेशान नहीं करते. इसलिए अगर कोई दंपति संतान सुख से वंचित है तो वह अपने राशि के अनुसार ईष्ट देव की पूजा कर संतान सुख पा सकता है. आज हम बात कर रहे हैं कर्क राशि की, तो कर्क राशि का स्वामी ग्रह चंद्रमा है और कर्क राशि के इष्ट देव शिव जी और देवी गौरी हैं. इसलिए यदि आपकी राशि कर्क है, तो आपको अपनी इच्छाओं की पूर्ति और संतान सुख की प्राप्ति के लिए भगवान शिव और माता गौरी की पूजा करनी चाहिए.
कर्क राशि ग्रह स्वामी- चंद्रमा
कर्क राशि ईष्ट देव- शिव जी और देवी गौरी

1 . गौरी पूजन से मिलेगा संतान प्राप्ति का सुख
शास्त्रों के अनुसार मान्यता है कि महागौरी को शिवा भी कहा जाता है. इनके हाथ में दुर्गा शक्ति का प्रतीक त्रिशूल है तो दूसरे हाथ में भगवान शिव का प्रतीक डमरू है. अपने सांसारिक रूप में महागौरी उज्ज्वल, कोमल, श्वेत वर्णी तथा श्वेत वस्त्रधारी और चतुर्भुजा हैं. ये सफेद वृषभ यानी बैल पर सवार रहती हैं. इनके समस्त आभूषण आदि भी श्वेत हैं. महागौरी की उपासना करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और पूर्वसंचित पाप भी नष्ट हो जाते हैं.
गौरी पूजन विधि – गौरी पूजन में सबसे पहले गणपति महाराज का पूजन करें. गणेश जी को सबसे पहले गंगाजल से स्नान कराएं. पंचामृत से फिर दोबारा गंगाजल से स्नान कराकर साफ कपड़े से पोछकर उन्हें आसन पर रखें. इसके बाद मां गौरी को आपके घर आने और आसन पर विराजमान होने के लिए उनका आवाहन करें. इसके बाद मां को सफेद या लाल रंग के वस्त्र अर्पित करें. लाल रंग शुभ माना जाता है. वहीं मान्यताओं के मुताबिक, सफेद रंग मां गौरी को बेहद पसंद हैं. वस्त्र अर्पित करने के बाद देवी मूर्ति को कुमकुम, रोली लगाएं और पुष्प अर्पित करें. उन्हें धूप-दीप दिखाएं और व दक्षिणा चढ़ाएं. इसके बाद माता महागौरी को पांच तरह के मिष्ठान और फल का भोग लगाएं. ध्यान रखें कि इस पूजन में षोडशोपचार में माता को सुहाग की सामग्री अर्पित करें. ध्‍यान रखें कि इनकी संख्‍या 16 होनी चाहिए. इसमें फल, फूल, माला, मिठाई और सुहाग की वस्‍तुओं को शामिल करें. संख्‍या लेकिन 16 ही हो. पूजन के समय ॐ गौर्ये नम: व ॐ पार्वत्यै नम: मंत्र का जाप करें. पूजन समाप्ति के बाद आरती पढ़ें. मां से अपनी मनोकामना पूर्ति का अनुनय-विनय करें.

2. शिव पूजन से मिलेगा संतान प्राप्ति का सुख
देवाधिदेव भगवान् महादेव सर्वशक्तिमान हैं. भगवान भोलेनाथ ऐसे देव हैं जो थोड़ी सी पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं. संहारक के तौर पर पूज्य भगवान शंकर बड़े दयालु हैं. उनकी पूजा से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यदि कोई निसंतान दंपति संतान सुख चाहता है तो वो अवश्य ही सोमवार के दिन अपने घर या मंदिर में विधिवत् भगवान शिव की पूजा करें.
शिव पूजन विधि – पूजा के दिन प्रात: स्नानादि नित्य कर्मों से निवृत हो जायें और साफ वस्त्र पहन लें. घर के ईशान कोण में एक चौकी पर भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी की मूर्ति या तस्वीर रखें, वहां पर भगवान गणेश की भी मूर्ति रखें. पूजा शुरू करने से पहले संकल्प लें. संकल्प लेने के लिए हाथ में जल, फूल व चावल लें, संकल्प में जिस दिन पूजा कर रहे हैं, उस वर्ष, उस वार, तिथि, जगह और अपने नाम को लेकर अपनी इच्छा बोलें, और हाथ में लिए जल आदि को जमीन पर छोड़ दें. सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश जी का पूजन करें. गणेश जी को सबसे पहले शुद्ध जल, फिर पंचामृत और फिर दोबारा शुद्ध जल से स्नान कराएं. उन्हें आसन वस्त्र, गंध, पुष्प और अक्षत अर्पित करें. अब भगवान शिव का पूजन शुरू करें. सबसे पहले शिव जी को शुद्ध जल से, फिर पंचामृत से और फिर दोबारा शुद्ध जल से स्नान कराएं. शिवलिंग पर मिट्टी के बर्तन में पवित्र जल भरकर ऊपर से बिल्वपत्र, आक व धतूरे के पुष्प, चंदन, चावल आदि के साथ चढायें. यदि नजदीक कोई शिवालय न हो तो शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर या शिव मूर्ति की पूजा भी की जा सकती है. श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक जलाएं, धूप बत्ती लगाएं. भगवान शिव जी की आरती करें. इसके बाद परिक्रमा करें और नेवैद्य अर्पित करें. भगवान शिव के पूजन के समय ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप मन में करते रहें. यदि घर में ही शिव पूजन कर रहे हैं तो अपने मंदिर में शिव जी को सम्मान सहिन स्थान व आसन दें.

B. चंद्रमा का जाप करने से कर्क राशि को मिलेगा संतान सुख
सोमवार के दिन भोलेनाथ की पूजा के साथ-साथ चंद्र देव की पूजा का भी विशेष महत्व है. इसका एक कारण ये है कि चंद्रमा शिव शंकर के सिर पर विराजमान हैं. चंद्रमा का जाप करने से निसंतान दंपति को संतान सुख मिलता है. मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है, उनका हर तरह की परिस्थिति में मन नियंत्रण में होता है. वहीं, इसी तरह कुंडली में चंद्रमा के कमजोर होने पर व्यक्ति का मन सदैव अशांत रहता है, मानसिक पीड़ा होती है और जातक का किसी भी कार्य में मन नहीं लगता है. तो अगर आप भी इनकी कृपा से संतान सुख पाना चाहते हैं तो सोमवार के दिन शाम को चंद्रमा कवच समेत इन मंत्रों का जाप करें.
श्री चंद्र कवच
श्रीचंद्रकवचस्तोत्रमंत्रस्य गौतम ऋषिः । अनुष्टुप् छंदः।
चंद्रो देवता। चन्द्रप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ।
समं चतुर्भुजं वन्दे केयूरमुकुटोज्ज्वलम् ।
वासुदेवस्य नयनं शंकरस्य च भूषणम् ॥ १ ॥
एवं ध्यात्वा जपेन्नित्यं शशिनः कवचं शुभम् ।
शशी पातु शिरोदेशं भालं पातु कलानिधिः ॥ २ ॥
चक्षुषी चन्द्रमाः पातु श्रुती पातु निशापतिः ।
प्राणं क्षपाकरः पातु मुखं कुमुदबांधवः ॥ ३ ॥
पातु कण्ठं च मे सोमः स्कंधौ जैवा तृकस्तथा ।
करौ सुधाकरः पातु वक्षः पातु निशाकरः ॥ ४ ॥
हृदयं पातु मे चंद्रो नाभिं शंकरभूषणः ।
मध्यं पातु सुरश्रेष्ठः कटिं पातु सुधाकरः ॥ ५ ॥
ऊरू तारापतिः पातु मृगांको जानुनी सदा
अब्धिजः पातु मे जंघे पातु पादौ विधुः सदा ॥ ६ ॥
सर्वाण्यन्यानि चांगानि पातु चन्द्रोSखिलं वपुः ।
एतद्धि कवचं दिव्यं भुक्ति मुक्ति प्रदायकम् ॥
यः पठेच्छरुणुयाद्वापि सर्वत्र विजयी भवेत् ॥ ७ ॥
॥ इति श्रीब्रह्मयामले चंद्रकवचं संपूर्णम् ॥

चंद्र मंत्र
ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:।
ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:।
ॐ श्रीं श्रीं चन्द्रमसे नम:।
चंद्रमा का बीज मंत्र
ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:।।
चंद्रमा का वैदिक मंत्र:
ॐ इमं देवा असपत्न सुवध्वं महते क्षत्राय महते
ज्यैष्ठयाय महते जानराज्यायेनद्रस्येन्द्रियाय।
इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विश
एष वोमी राजा सोमोस्मांक ब्राह्मणाना राजा।।
शिवजी के मंत्र:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।

C. सोमवार का व्रत करने से कर्क राशि को मिलेगा संतान सुख
सोमवार का व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिये किया जाता है. आम तौर पर सोमवार का व्रत तीसरे पहर तक होता है यानि कि शाम तक ही सोमवार का व्रत रखा जाता है. सोमवार का व्रत प्रति सोमवार भी रखा जाता है, सौम्य प्रदोष व्रत और सोलह सोमवार व्रत भी रखे जाते हैं. सोमवार के सभी व्रतों की विधि एक समान ही होती है. मान्यता है कि चित्रा नक्षत्रयुक्त सोमवार से आरंभ कर सात सोमवार तक व्रत करने पर व्यक्ति को सभी तरह के सुख प्राप्त होते हैं. यदि कोई निसंतान दंपति पूरे श्रद्धा से 16 सोमवार का व्रत करती है और शिव पूजन करती है तो उसे शीघ्र ही संतान का सुख मिलता हैं. कर्क राशि के जातक संतान सुख की प्राप्ति के लिए नीचे दी गई विधि से सोमवार का व्रत करें .
सोमवार व्रत-पूजन विधि- सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में सोकर उठें. पूरे घर की सफाई कर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं. गंगा जल या पवित्र जल पूरे घर में छिड़कें. घर में ही किसी पवित्र स्थान पर भगवान शिव के साथ माता पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. पूरी पूजन तैयारी के बाद निम्न मंत्र से संकल्प लें – मम क्षेमस्थैर्यविजयारोग्यैश्वर्याभिवृद्धयर्थं सोमवार व्रतं करिष्ये॥. इसके पश्चात निम्न मंत्र से ध्यान करें –
ध्यायेन्नित्यंमहेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांग परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्‌.
पद्मासीनं समंतात्स्तुतममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्ववंद्यं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्‌॥
ध्यान के पश्चात ॐ नमः शिवाय से शिवजी का तथा ॐ नमः शिवाय से पार्वतीजी का षोडशोपचार पूजन करें. पूजन के पश्चात व्रत कथा सुनें. तत्पश्चात आरती कर प्रसाद वितरण करें. इसके बाद भोजन या फलाहार ग्रहण करें. इस व्रत में व्रती को दिन में केवल एक समय ही भोजन करना चाहिये.

D. ज्योर्तिलिंग पर पूजा करने से होगी संतान सुख की प्राप्ति
इसी प्रकार विभिन्न राशि के व्यक्तियों के लिए शास्त्र अलग-अलग ज्योर्तिलिंगों की पूजा का महत्व बताया गया है. भगवान शंकर के पृथ्वी पर 12 ज्योर्तिलिंग हैं. भगवान शिव के सभी ज्योतिर्लिंगों को अपना अलग महत्व है. शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर के ये सभी ज्योजिर्लिंग प्राणियों को दु:खों से मुक्ति दिलाने में मददगार है. इन सभी ज्योर्तिलिंगों को 12 राशियों से भी जोड़कर देखा जाता है. इसलिए कर्क राशि के व्यक्ति को संतान सुख की प्राप्ति के लिए ओंकारेश्वर ज्योर्तिलिंग पर पूजा करना चाहिए.
कर्क राशि – ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग
कर्क राशि वाले जातकों को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए. मध्य प्रदेश में नर्मदा तट पर बसा ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का संबंध कर्क राशि से है. इस राशि वाले महाशिवरात्रि के दिन शिव के इसी रूप की पूजा करें. ओंकारेश्वर का ध्यान करते हुए शिवलिंग को पंचामृत से स्नान कराएं. इसके बाद अपामार्ग और विल्वपत्र चढ़ाएं. श्री ओंकारेश्वर मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है. यह नर्मदा नदी के बीच मन्धाता व शिवपुरी नामक द्वीप पर स्थित है. यह भगवान शिव के बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक है. यह यहां के मोरटक्का गांव से लगभग 12 मील (20 किमी) दूर बसा है. यह द्वीप हिन्दू पवित्र चिन्ह ॐ के आकार में बना है. यहां दो मंदिर स्थित हैं – 1. ओम्कारेश्वर 2. अमरेश्वर. श्री ओम्कारेश्वर का निर्माण नर्मदा नदी से स्वतः ही हुआ है.

E. नाड़ी दोष निवारण उपाय
विवाह के समय कुंडली मिलान में बनने वाले दोषों में से एक है नाड़ी दोष. इस दोष के होने पर वैवाहिक स्थिति कभी ठीक नहीं रहती, दंपत्ति संतान सुख से वंचित रह सकते हैं साथ ही वर-वधू के जीवन पर मृत्यु का संकट मंडराया रहता है. नाड़ी दोष निवारण के लिए भगवान शिव की पूजा की जाती है. पूरे विधि-विधान से महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए शिव को प्रसन्न किया जाता है. शिवजी की कृपा से ही नाड़ी दोष शांत होता है.
1. महामृत्युंजय मंत्र का जप सबसे आसान उपाय है. वर और कन्या दोनों की नाड़ी मध्य में हो तो पुरुष को प्राण का भय रहता है. इस स्थिति में पुरुष को महामृत्युंजय जाप कराना अति आवश्यक होता है. अगर वर और कन्या दोनों की नाड़ी आदि हो तो स्त्री को प्राण का भय रहता है. इस स्थिति में कन्या महामृत्युजंय जाप कराना अति आवश्यक होता है.
2. ब्राह्मण को स्वर्ण-नाड़ी, अनाज, कपड़ा और गाय भेंट करना भी नाडी दोष के निवारण का एक तरीका है.
3. नाड़ी दोष वाली महिला का विवाह भी वास्तविक विवाह से पहले भगवान विष्णु से होता है और इसे नाड़ी दोष अपवाद और उपाय माना जाता है.
4. इसलिए, शादी से पहले किसी भी कुंडली मिलान के लिए गुण मिलान करवाना बहुत महत्वपूर्ण है. आपको नाड़ी दोष अपवाद और उपचार के लिए एक वास्तविक ज्योतिषी से परामर्श करने की सलाह दी जाती है.

F. पितृ दोष से मुक्ति के उपाय
जो लोग अपने पितृ का तर्पण, श्राद्ध या पिंडदान नहीं करते हैं. उनसे पितृ नाराज होकर जाते है तो उन्हें शाप मिलता है और वे पितृ दोष के भागीदार होते हैं. इसके अलावा जिन लोगों के कुंडली में पितृ दोष है उन्हें संतान सुख नहीं मिल पाता इसलिए इस दोष से मुक्ति पाना बेहद जरूरी है.
1. पितृ पक्ष में प्रतिदिन अपने पितरों का तर्पण करना चाहिए. जल, जौं और काले तिल समेत पुष्पों के साथ तर्पण करने पितृ प्रसन्न होते हैं और पितृ दोष दूर होता है.
2. पितृ पक्ष में उनकी मृत्यु तिथि पर उनके नाम श्राद्ध करना चाहिए. इसमें पूर्वजों की पसंद का खाना बनाकर किसी ब्राह्मण को भोजन जरूर कराना चाहिए. इससे पित्तरों का आशीर्वाद मिलता है.
3. पित्तरों के नाम पर श्रीमद् भागवत कथा, गीता, गरूड़ पुराण, नारायण बली, त्रिपिंडी श्राद्ध या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना उत्तम माना गया है. ऐसा करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.
4. पितृ पक्ष में नियमित रूप से प्रतिदिन पीपल या बरगद के पेड़ पर जल और काला तिल चढ़ाने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.
5. जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष है उन्हें अपने पूर्वजों या पितरों के नाम श्राद्ध या पिण्ड दान करना चाहिए. इससे पितृ शांत होते है और पितृ दोष से मुक्ति भी मिलती है.
6. जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष है उन्हें गाय, कुत्ते, कौवे, देव और चींटी को भोजन कराना चाहिए.

G. संतान प्राप्ति के लिए करें नवग्रह पूजा
संतान प्राप्ति के लिए करें नवग्रह पूजा कर सकते हैं. इसके लिए आप किसी ज्योतिष विशेषज्ञ से घर या मंदिर में हवन व अभिषेक कराकर नव ग्रहों की शांति की पूजा करवा सकते हैं. ग्रहों के कारण संतान सुख में बाधा आ रही हो, तो सूर्य के लिए हरिवंश पुराण का पाठ करें. चंद्रमा के लिए सोमवार का व्रत रख कर शिव की उपासना करनी चाहिए. मंगल के लिए महारुद्र या अतिरुद्र यज्ञ कराएं. बुध के लिए महाविष्णु की उपासना करें. गुरु के लिए पितरों का श्राद्ध करें. शुक्र के लिए गौपालन एवं उसकी सेवा करें. शनि के लिए महामृत्युंजय का जप एवं हवन करें. राहु के लिए नागपाश यंत्र की पूजा व बुधवार को व्रत रख करना चाहिए. ऐसे लोगों के लिए कन्यादान करना भी श्रेष्ठ माना गया है. केतु के लिए ब्राह्मण भोजन करा कर उन्हें वस्त्र भेंट करें. कहा जाता है कि ऐसा करने से सभी कमजोर ग्रह मजबूत होकर अपना शुभ प्रभाव देने लगते हैं और निंसतान दंपत्ति के घर किलकारियां गूजने लगती है.

H. लाल किताब के उपाय देंगे संतान सुख
उपाय तो मंत्र-तंत्र-यंत्र एवं ज्योतिष में बहुत है पर आवश्यकता है तो मात्र श्रद्धा व पूर्ण विश्वास की. यदि ईश्वर पर पूर्ण विश्वास एवं श्रद्धा है तो ‘संतान गोपाल साधना’ करें, निश्चित रूप से मनोकामना पूर्ण होगी और अवश्य होगी.यह प्रयोग हजारों बार सफल होते देखा है और जो नि:संतान हैं, उनके लिए इससे बढ़ कर कोई उपाय है ही नहीं. यदि बच्चे जन्म लेते ही मृत्यु को प्राप्त हो जाते हों तो ऐसी स्थिति में कुछ उपाय कर निदान किया जा सकता है. जैसे गर्भधारण करते ही गर्भवती स्त्री की कलाई पर लाल रंग का धागा बांधना चाहिए. संतान होने पर वह धागा मां की कलाई से खोलकर बच्चे की कलाई पर बांध दें एवं मां की कलाई पर दूसरा धागा बांध दें. यह धागा 18 माह तक बंधा रहे, इस बात का विशेष ध्यान रखें.

I. संतान प्राप्ति के अन्य उपाय
1. सोमवार को शिव-पार्वती को खीर का भोग लगायें.
2. गौरी शंकर रुद्राक्ष धारण करने से भी संतान प्राप्ति में आने वाली बाधाएं टलती हैं.
3. सुखी दांपत्य जीवन एवं संतान सुख के लिये घर में पूरे शिव परिवार की स्थापना करें, अकेले शिवलिंग कभी न रखें.
4. कागज पर अपना नाम लिखें, फिर उसे मोड़कर ओवर लैप करके पति का नाम लिखें. पति पत्नी का नाम लिखा कागज शिव मंदिर में मां पार्वती को चढायें और अपनी मनोकामना मांगे, ऐसा करने से शिव पार्वति संतान प्रप्ति का आशीर्वाद देंगे.
5. लाल या गुलाबी कपड़े पहन कर पत्नी कनकधारा स्रोत का पाठ करें.
6. लाल फूलों से शिव जी की पूजा करें.
7. मंगलवार को नारियल में लाल सिंदूर लगाकर लाल कपड़े में लपेटकर लाल मौली बांधकर नवग्रह में मंगल ग्रह के पास रखें. यह उपाय 5 मंगलवार तक करने से संतान सुख प्राप्त होगा.
8. हर मंगलवार पति-पत्नी दोनों लाल चंदन का टीका लगायें. ऐसा करने से सभी मनोकामना पूर्ण होगी.
9. पत्नी अगर मंगलवार को मंगलचंडी स्रोत का पाठ करती हैं तो ऐसा करने से भी संतान सुख की प्राप्ति का वरदान मिलता है.
10. 5 आटे का दीप जलायें, फिर बची हुई बाती के तेल से पति के हृदय पर मालिश करें, ऐसा करने से बीमारी दूर भाग जायेगी.
11. अथर्ववेद में वर्णित संतान प्रकरण को पढ़ें.
12. दुर्गासप्तशती के संतान मंत्रों के सम्पुट से सतचंडी अनुष्ठान कराएं.नागपाश यंत्र एवं मंगलयंत्र पूजा कक्ष में रखें. यदि कुंडली में कालसर्प दोष हो, तो इसकी शांति कराएं. यदि पितृदोष हो, तो इसकी भी शांति कराएं.

कर्क राशि में संतान योग, कर्क राशि पुत्र प्राप्ति योग, कर्क राशि संतान योग, Kark Rashi Santan Yog, Kark राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Kark Rashi Santan Prapti Yog, कर्क राशि संतान Prapti योग, कर्क राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, कर्क राशि को संतान सुख, Kark Rashi Putra Prapti Yog, कर्क राशि संतान प्राप्ति, कर्क लग्न में संतान योग, कर्क राशि संतान प्राप्ति के उपाय, कर्क राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Cancer Putra Prapti Yog, संतान प्राप्ति के लिए लाल किताब के उपाय

Mithun Rashi Santan Prapti K Upay

मिथुन राशि में संतान योग, मिथुन राशि संतान प्राप्ति, मिथुन राशि पुत्र प्राप्ति योग, मिथुन राशि संतान योग, Mithun Rashi Santan Yog, Mithun राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Mithun Rashi Santan Prapti Yog, मिथुन राशि संतान Prapti योग, मिथुन राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, मिथुन राशि को संतान सुख, Mithun Rashi Putra Prapti Yog, मिथुन राशि संतान प्राप्ति, मिथुन लग्न में संतान योग, मिथुन राशि संतान प्राप्ति के उपाय, मिथुन राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Gemini Putra Prapti Yog, संतान प्राप्ति के लिए लाल किताब के उपाय

मिथुन राशि में संतान योग, मिथुन राशि संतान प्राप्ति, मिथुन राशि पुत्र प्राप्ति योग, मिथुन राशि संतान योग, Mithun Rashi Santan Yog, Mithun राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Mithun Rashi Santan Prapti Yog, मिथुन राशि संतान Prapti योग, मिथुन राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, मिथुन राशि को संतान सुख, Mithun Rashi Putra Prapti Yog, मिथुन राशि संतान प्राप्ति, मिथुन लग्न में संतान योग, मिथुन राशि संतान प्राप्ति के उपाय, मिथुन राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Gemini Putra Prapti Yog, संतान प्राप्ति के लिए लाल किताब के उपाय

मिथुन राशि संतान प्राप्ति, मिथुन राशि पुत्र प्राप्ति योग
विवाह के बाद संतान सुख हर दंपति के लिए सबसे बड़ा सुख होता है. शास्त्रों में बताया गया है कि संतान से ही व्यक्ति को मोक्ष प्राप्ति का रास्ता मिलता है और पितरों को आत्मा की शांति भी मिलती है. इसलिए हर व्यक्ति की चाहत होती है कि उसकी संतान हो और वह वंश वृद्धि को आगे बढ़ाए. लेकिन व्यक्ति की कुंडली में ग्रह-नक्षत्रों की ऐसी स्थिति बन जाती है, जिससे संतान प्राप्ति में बाधा आने लगती है. इस तरह की बाधाओं से मुक्ति के लिए ज्योतिष शास्त्र और लाल किताब में कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं, इन उपायों को अपनी राशिनुसार करने से संतान प्राप्ति में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. आज हम बात कर रहे हैं राशि चक्र की तीसरी राशि मिथुन की. अगर शादी के कई साल बाद भी मिथुन राशि के जातकों को अब तक संतान सुख नहीं मिल सका है, तो यहां दिए जा रहे कुछ उपाय कर आप अवश्य ही भगवान गणेश और माता लक्ष्मी से संतान सुख का आशीर्वाद पा सकते हैं. जानिए संतान सुख प्राप्त न होने के कारण और उपाय-

संतान प्राप्ति न होने के कारण
1. दंपति की कुण्डली में नाड़ी दोष होने पर संतान नहीं होती यदि होती भी है तो उनमें शारीरिक विकार होता है.
2. परिवार में पितृ दोष लगने के कारण संतान प्राप्ति में विघ्न उत्पन्न होते है.
3. यदि बुध ग्रह कमजोर हो तो संतान का सुख नहीं मिलता है.
5. पूर्व जन्म में हुए सर्पशाप, पितृश्राप, माताश्राप, भ्राताश्राप, प्रेतश्राप या कुलदेवता श्राप आदि के चलते संतान विलंब से होती है या नहीं भी होती है.
6. पिछले जन्म में अगर आपने पेड़-पौधे भी कटवाये हैं, तो यह स्थिति उत्पन्न हो जाती है. इसलिए रासिनुसार पूजा-पाठ कर इसका उपाय करना जरूरी है.

मिथुन राशि संतान प्राप्ति के उपाय, मिथुन राशि वालों को पुत्र प्राप्ति के उपाय, Mithun Rashi Santan Prapti Ke Upay
A . मिथुन राशि के लोग संतान प्राप्ति के लिए इष्टदेव की करें पूजा
इष्ट देव का अर्थ है अपनी राशि के पसंद के देवता. अरुण संहिता जिसे लाल किताब के नाम से भी जाना जाता है, के अनुसार व्यक्ति के पूर्व जन्म में किए गए कर्म के आधार पर इष्ट देवता का निर्धारण होता है और इसके लिए जन्म कुंडली देखी जाती है. कुंडली का पंचम भाव इष्ट का भाव माना जाता है. इस भाव में जो राशि होती है उसके ग्रह के देवता ही हमारे इष्ट देव कहलाते हैं. मिथुन (Gemini) राशि का स्वामी ग्रह बुध है और इसलिए उनके इष्ट देव गणेशजी और विष्णुजी हैं और उन्हें इनकी पूजा करनी चाहिए. इष्ट देव की पूजा करने से ये फायदा होता है कि कुंडली में चाहे कितने भी ग्रह दोष क्यों न हों, अगर इष्ट देव प्रसन्न हैं तो यह सभी दोष व्यक्ति को अधिक परेशान नहीं करते. इसलिए अगर कोई दंपति संतान सुख से वंचित है तो वह अपने राशि के अनुसार ईष्ट देव गणेशजी और विष्णुजी की पूजा कर संतान सुख पा सकता है.
मिथुन राशि स्वामी ग्रह – बुध
मिथुन राशि इष्ट देव – गणेशजी और विष्णुजी है

1 – भगवान गणेश की पूजा से मिलेगा संतान सुख
श्रीगणेश पूजा अपने आपमें बहुत ही महत्वपूर्ण व कल्याणकारी है. चाहे वह किसी कार्य की सफलता के लिए हो या फिर चाहे किसी कामनापूर्ति स्त्री, पुत्र, पौत्र, धन, समृद्धि के लिए या फिर अचानक ही किसी संकट मे पड़े हुए दुखों के निवारण हेतु हो. अत: यदि आप संतान प्राप्ति का चाहत रखते हैं तो विधिवत् भगवान गणेश की पूजा करें.
गणेश जी की पूजा विधि – बुधवार के दिन भगवान गणेश पूजन से पहले नित्यादि क्रियाओं से निवृत्त होकर शुद्ध आसन में बैठकर सभी पूजन सामग्री पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक आदि को एकत्रित कर क्रमश: पूजा करें. भगवान श्रीगेश को तुलसी दल व तुलसी पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए. उन्हें दुर्वा को धोकर ही चढ़ाना चाहिए. श्रीगणेश भगवान को मोदक (लड्डू) अधिक प्रिय होते हैं इसलिए उन्हें देशी घी से बने मोदक का प्रसाद भी चढ़ाना चाहिए. श्रीगणेश के दिव्य मंत्र ॐ श्री गं गणपतये नम: का 108 बार जप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. श्रीगणेश सहित प्रभु शिव व गौरी, नन्दी, कार्तिकेय सहित सम्पूर्ण शिव परिवार की पूजा षोड़षोपचार विधि से करना चाहिए. गणेश भगवान की पूजा के बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ करना फलदायी माना जाता है. अगर समय का अभाव है तो 12 वें अध्याय और कुंजीकास्तोत्र का पाठ कर लेना चाहिए, इससे आपको भगवान गणेश व मां दुर्गा के आशीर्वाद से संतान सुख की प्राप्ति होगी.

2. विष्‍णु पूजन से होगी मिथुन राशि वालों को संतान प्राप्ति
मां लक्ष्‍मी के स्‍वामी भगवान विष्‍णु का पूजन करने से सभी तरह के सांसारिक सुखों की प्राप्‍ति होती है. भगवान विष्‍णु ही इस संसार के पालनहार हैं और अगर आप उनकी पूजा सच्‍चे मन और भक्‍तिभाव से करते हैं तो आपको इस संसार के प्रत्‍येक सुख की प्राप्ति होगी अर्थात् संतान की प्राप्ति होगी. भगवान विषणु के अनेक रूप हैं और उन्‍होंने मनुष्‍य के उद्धार के लिए धरती पर कई बार जन्‍म लिया है. मंदिर में तो विष्‍णु पूजन का आयोजन होता ही है लेकिन आप घर पर भी रोज़ विष्‍णु पूजन कर सकते हैं. वैसे शास्‍त्रों के अनुसार बृहस्‍पतिवार के दिन विष्‍णु पूजन का विशेष महत्‍व है.
अगर आप भगवान विष्‍णु के साथ मां लक्ष्‍मी की भी पूजा करते हैं तो आपको गृहस्‍थ जीवन का सुख मिलता है. मां लक्ष्‍मी धन और वैभव प्रदान करती हैं और भगवान विष्‍णु के साथ उनकी पूजा करने से आपके सभी कष्‍ट दूर हो जाते हैं. जो कोई संतान सुख की चाह रखता है उन्हें भगवान विष्‍णु के साथ मां लक्ष्‍मी की पूजा जरूर करनी चाहिए.
विष्‍णु पूजन विधि – अगर आप संतान सुख की प्राप्ति के लिए भगवान विष्‍णु का पूजन कर रहे हैं तो विधिवत् भगवान विष्णु की पूजा करें. विष्‍णु पूजन आरंभ करने से पूर्व व्रत का संकल्‍प लें. सबसे पहले हाथों में जल, पुष्‍प और चावल लें. संकल्‍प में जिस दिन पूजन कर रहे हैं उस साल, वार, तिथि और उस जगह और अपने नाम को लेकर अपनी मनोकामना बोलें. अब हाथों में लिए गए जल को जमीन पर छोड़ दें.
किसी भी शुभ कार्य या पूजन में सबसे पहले भगवान गणेश का नाम लिया जाता है. गणेश जी प्रथम पूज्‍य हैं और इसीलिए सबसे पहले इनका पूजन करना मंगलकारी रहता है. गणेश जी को स्‍नान करें और वस्‍त्र अर्पित करें. अब पुष्‍प और अक्षत अर्पित करें. इसके पश्‍चात् भगवान विष्‍णु की पूजा करें. भगवान विष्‍णु का आवाह्न करें और उन्‍हें आसन दें. अब विष्‍णु जी को स्‍नान करवाएं. पहले पंचामृत और फिर जल से स्‍नान करवाएं. अब विष्‍णु जी को वस्‍त्र पहनाएं. इसके बाद आभूषण और यज्ञोपवीत पहनाएं. फूलों की माला पहनाएं. सुगंधित इत्र अर्पित करें और माथे पर तिलक लगाएं. तिलक के लिए अष्‍टगंध का प्रयोग कर सकते हैं. अब धूप और दीप अर्पित करें. भगवान विष्‍णु को तुलसीदल विशेष प्रिय है इसलिए विष्‍णु पूजन में इसका प्रयोग जरूर करें. भगवान विष्‍णु के पूजन में चावलों का प्रयोग नहीं किया जाता है इसलिए आप इनके स्‍थान पर तिल का प्रयोग कर सकते हैं. घी का दीपक जलाएं और आरती करें. आरती के बाद नेवैद्य अर्पित करें और ऊं नमो नारायणाय नम: मंत्र का जाप करें. इस पूजा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी अवश्य ही आपकी झोली में संतान सुख डालेगी.

B . बुधवार का व्रत करने से मिलेगा संतान सुख
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति बुधवार का व्रत रखता है उसे सर्व-सुखों की प्राप्ति होती है. बुधवार का व्रत रखने वाले व्यक्ति के जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं होती है तथा अरिष्ट ग्रहों की शांति होती है. बुधवार का व्रत करने वाले व्यक्ति की बुद्धि भी बढ़ती है और जो दंपति संतान सुख से वंचित है उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है. मिथुन राशि के निसंतान जातक संतान प्राप्ति के लिए यहां दिए जा रहे विधि से बुधवार का व्रत करें.
बुधवार व्रत विधि- बुधवार के दिन सुबह उठकर संपूर्ण घर की सफाई करें. तत्पश्चात स्नानादि से निवृत्त हो जाएं. इसके बाद पवित्र जल का घर में छिड़काव करें. घर के ही किसी पवित्र स्थान पर भगवान बुध या शंकर भगवान की मूर्ति अथवा चित्र किसी कांस्य पात्र में स्थापित करें. तत्पश्चात धूप, बेल-पत्र, अक्षत और घी का दीपक जलाकर पूजा करें. इसके बाद निम्न मंत्र से बुध की प्रार्थना करें-
बुध त्वं बुद्धिजनको बोधदः सर्वदा नृणाम्‌,
तत्वावबोधं कुरुषे सोमपुत्र नमो नमः॥
बुधवार की व्रतकथा सुनकर आरती करें. इसके पश्चात गुड़, भात और दही का प्रसाद बांटकर स्वयं भी प्रसाद ग्रहण करें.

C. बुध दोष से निजात पाने के उपाय
बुधवार का दिन प्रथम पूजनीय भगवान गणेश के अलावा बुध ग्रह को समर्पित है. बुध को ग्रहों का राजकुमार माना जाता है. ज्योतिष में मिथुन राशि का स्वामी बुध है और इसका तत्व पृथ्वी है. कहा जाता है कि किसी की कुंडली में बुध सही तो सब शुद्ध यानी अगर बुध मजबूत हो जीवन में सब ठीक रहता है. लेकिन अगर यही बुध कमजोर हो या नीच का हो तो खुशियां मुंह फेर लेती हैं. जुआ और सट्टे की लत लग जाती है, निर्णय क्षमता कमजोर होती है, संतान सुख में बाधा आती है, संतान कष्ट में रहती है और देखते ही देखते घर में सब बर्बाद होने लगता है. इसलिए संतान प्राप्ति के लिए बुध मजबूत होना चाहिए, यहां मिथुन राशि के जातक जानिए बुध को मजबूत करने के आसान तरीके ताकि आप भी पा सके संतान सुख के साथ खुशहाल जीवन भी.
1. कहा जाता है कि बुधवार के दिन हरे रंग की चीजों का प्रयोग करना शुभ होता है और यदि आपका बुध कमजोर है तो हमेशा अपने पास हरे रंग का रुमाल रखें. साथ ही बुधवार के दिन किसी जरूरतमंद को हरी मूंग की दाल दान करें.
2. यदि कोई व्यक्ति बुध दोष से पीड़ित है तो उसे मां दुर्गा की आराधना करनी चाहिए. रोजाना ‘ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र का 5, 7, 11, 21 या 108 बार जाप करने से बुध दोष समाप्त होता है.
3. बुध दोष से निजात पाने के लिए सोने के आभूषण धारण करना लाभकारी माना जाता है. इसके अलावा बुध के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए घर की पूर्व दिशा में लाल रंग का झंडा लगाना चाहिए.
4. बुध दोष को दूर करने के लिए हाथ की सबसे छोटी उंगली यानि कनिष्ठा उंगली में पन्ना पहनना भी काफी लाभकारी माना जाता है. लेकिन इसके लिए किसी पंडित या ज्योतिष की सलाह लेना बेहद जरूरी है.

D. संतान प्राप्ति के लिए बुधवार के दिन करें ये उपाय
1. बुधवार को भगवान गणेश का दिन माना जाता है. बुधवार के दिन गणेश जी को दूब या दूर्वा जरूर चढ़ानी चाहिए. यदि आप प्रत्येक बुधवार को 21 दूर्वा गणेश जी को चढ़ाएंगे तो आपको अवश्य ही संतान सुख की प्राप्ति होगी और गणेश जी का आशीर्वाद सदा आप पर बना रहेगा.
2. जीवन में आ रही परेशानियों से निजात पाने के लिए बुधवार के दिन गाय को घास खिलानी चाहिए. कहा जाता है कि साल में कम से कम एक बार बुधवार के दिन अपने वजन के बराबर घास खरीदकर गौशाला में दान करें, इससे भगवान गणेश प्रसन्न होकर आपको संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देंगे.
3. बुधवार के दिन गेंहू के आटे की गोलियां बनाकर उसमें चने की दाल और थोड़ी हल्दी मिलाकर गाय को खिलाए.
4. बुधवार का दिन विशेष रूप से गणेशजी का होता है इसीलिए आपको इस दिन गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करना विशेष लाभ देगा. इसके अलावा आप गणेश मंदिर जाकर उन्हें दूर्वा अर्पित करें और लड्डू का भोग जरूर लगाएं.
5. बुधवार के दिन 7 साबुत कौड़ियां लें. कौड़ियां बाजार में पूजन सामग्री की दुकानों पर आसानी से मिल जाती हैं. इसके साथ ही एक मुट्ठी हरे खड़े मूंग लें और दोनों को एक हरे कपड़े में बांधकर चुपचाप किसी मंदिर की सीढ़ियों पर रख आएं. लेकिन ध्यान रखें कि इस संबंध में किसी को कुछ न बताएं और पूरी आस्था रखें.
6. बुधवार के दिन सवा पाव मूंग उबालकर उसमें घी और शकर मिलाकर गाय को खिलाएं. इससे जल्द ही आपकी मनोकामना पूर्ण होगी.

E. ज्योर्तिलिंग पर पूजा करने से होगी संतान सुख की प्राप्ति
देवाधिदेव भगवान् महादेव सर्वशक्तिमान हैं. भगवान भोलेनाथ ऐसे देव हैं जो थोड़ी सी पूजा से भी प्रसन्न हो जाते हैं. संहारक के तौर पर पूज्य भगवान शंकर बड़े दयालु हैं. उनके अभिषेक से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इसी प्रकार विभिन्न राशि के व्यक्तियों के लिए शास्त्रों में अलग-अलग ज्योर्तिलिंगों की पूजा का महत्व बताया गया है. भगवान शंकर के पृथ्वी पर 12 ज्योर्तिलिंग हैं. भगवान शिव के सभी ज्योतिर्लिंगों को अपना अलग महत्व है. शास्त्रों के अनुसार भगवान शंकर के ये सभी ज्योतिर्लिंग प्राणियों को दु:खों से मुक्ति दिलाने में मददगार है. इन सभी ज्योर्तिलिंगों को 12 राशियों से भी जोड़कर देखा जाता है.
आइये जाने की मिथुन राशि के व्यक्ति को किस ज्योर्तिलिंग पर पूजा करने से संतान सुख के साथ विशेष फल प्राप्त होगा-
मिथुन राशि – महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
मिथुन राशि वाले जातक को महाकालेश्वर का ध्यान करते हुए ‘ओम नमो भगवते रूद्राय ’ मंत्र का यथासंभव जप करना चाहिए. हरे फलों का रस, मूंग, बेलपत्र आदि से उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा करनी चाहिए. महाकालेश्वर कालों के काल हैं. इनकी पूजा करने वाले को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है. इस राशि में जन्म लेने वाले व्यक्ति को महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन एवं पूजा करनी चाहिए. महाकालेश्वर के शिवलिंग को दूध में शहद मिलाकर स्नान कराएं और बिल्व पत्र एवं शमी के पत्ते चढ़ायें. शिव को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद पाने के लिए दूध से अभिषेक करें. महाकालेश्वर मंदिर मध्यप्रदेश राज्य के उज्जैन नगर में स्थित है जो कि क्षिप्रा नदी के किनारे बसा है. स्वयंभू, भव्य और दक्षिणमुखी होने के कारण महाकालेश्वर मंदिर की अत्यन्त पुण्यदायी महात्मय है. मराठों के शासनकाल में यहां दो महत्वपूर्ण घटनाएं घटी, पहली महाकालेश्वर मंदिर का पुर्निनिर्माण और ज्योतिर्लिंग की पुनर्प्रतिष्ठा तथा दूसरी सिंहस्थ पर्व स्नान की स्थापना. इसके बाद राजा भोज ने इस मंदिर का विस्तार करवाया.

F. नाड़ी दोष को दूर करने के उपाय
विवाह के समय कुंडली मिलान में बनने वाले दोषों में से एक है नाड़ी दोष. इस दोष के होने पर वैवाहिक स्थिति कभी ठीक नहीं रहती, दंपत्ति संतान सुख से वंचित रह सकते हैं साथ ही वर-वधू के जीवन पर मृत्यु का संकट मंडराया रहता है. नाड़ी दोष निवारण के लिए भगवान शिव की पूजा की जाती है. पूरे विधि-विधान से महामृत्युंजय मंत्र का जप करते हुए शिव को प्रसन्न किया जाता है. शिवजी की कृपा से ही नाड़ी दोष शांत होता है.
1. शादी से पूर्व आपको सवा लाख बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए या फिर खुद करना चाहिए. इसके बाद शादी के हर 3 वर्ष बाद भी आपको ऐसा करना चाहिए.
2. कन्या की कुंडली में नाड़ी दोष होने पर विवाह से पूर्व कन्या का प्रथम विवाह भगवान विष्‍णु से करवा देना चाहिए.
3. विवाह से पूर्व सोने की वस्तु, वस्त्र और अन्न का दान करने से भी नाड़ी दोष दूर होता है.
4. नाड़ी दोष को दूर करने के लिए नाड़ी दोष निवारण पूजा भी कराई जाती है. इसके साथ ही, जातक को भगवान विष्णु की पूजा भी करनी चाहिए.
5. पीयूष धारा के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के विवाह में नाड़ी दोष बाधा बन रहा है तो उसे स्वर्ण दान, वस्त्र दान, अन्न दान करना चाहिए. सोने से सर्प की आकृति बनाकर, उसकी विधि पूर्वक प्राण-प्रतिष्ठा करके महामृत्युंजय मंत्र का जप कराने से नाड़ी दोष शांत होता है.

G. वास्तु के निवारण से मिथुन राशि के लोगों के घर में गूंजेंगी किलकारियां
कहते हैं घर में कभी-कभी नकारात्मक उर्जा कभी संचार होने लगता है, जिसकी वजह से कई तरह की समस्याएं उत्पन्न होती है जिनमें से एक समस्या संतान सुख ना मिलने की भी होती है. अपने घर में समस्त वास्तु दोषों को दूर करने का उपाय करें. ऐसे दंपत्ति जो संतान सुख चाहते हैं वह निश्चय करें कि घर में किसी भी तरह का वास्तु दोष ना पनपे.

H. पितृदोष संतान प्राप्ति में बाधा बन सकता है?
मानव जीवन में कई तरह के दोष होते हैं जिनमें से एक है पितृदोष, अपने पूर्वजों के अंतिम संस्कार किसी भी प्रकार की भूल हो जाने के कारण लोगों में पितृदोष चढ़ जाता है. पितरों को तारने के लिए उनका श्राद्ध किया जाता है उनकी मुक्ति के लिए प्रार्थना की जाती है जिससे पितृदोष दूर होता है और भविष्य में होने वाली संतान प्राप्ति की बाधा भी दूर होती है.

I. लाल किताब के उपाय
1. बुधवार के दिन दुर्गा माता के मंदिर में जाएं और उन्हें हरे रंग की चूड़ियां चढ़ाएं. ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम: मंत्र का जाप बुधवार के दिन करना बेहद शुभकारी होता है. इसके अलावा गणेश मंत्र या दुर्गा माता के मंत्र का भी जाप कर सकते हैं.
2. बुधवार के दिन श्री गणेश को घी और गुड़ का भोग लगाएं. बाद में यह घी व गुड़ गाय को खिला दें. फिर दुर्गा मंदिर के बाहर बैठी किसी कन्या को बुधवार के दिन भोजन कराएं. माता को हरे रंग की चूड़ियां चढ़ाएं या 9 कन्याओं को हरे रंग का रुमाल बांटें.
3. कन्या, बेटी, बहन, साली, बुआ, मौसी और विधवाओं की सेवा करें. इनसे अच्छे संबंध रखें और बुधवार के दिन इन्हें मिठाई खिलाएं.
4. बुधवार के दिन तुलसी का गिरा हुआ पत्ता धोकर खाना बहुत शुभ होता है.
5. बुधवार के दिन गाय को हरा चारा खिलाएं.

J. संतान प्राप्ति के अन्य उपाय
ग्रहों के कारण संतान सुख में बाधा आ रही हो, तो सूर्य के लिए हरिवंश पुराण का पाठ करें. चंद्रमा के लिए सोमवार का व्रत रख कर शिव की उपासना करनी चाहिए. मंगल के लिए महारुद्र या अतिरुद्र यज्ञ कराएं.
बुध के लिए महाविष्णु की उपासना करें. गुरु के लिए पितरों का श्राद्ध करें. शुक्र के लिए गौपालन एवं उसकी सेवा करें. शनि के लिए महामृत्युंजय का जप एवं हवन करें. राहु के लिए नागपाश यंत्र की पूजा व बुधवार को व्रत रख करना चाहिए. ऐसे लोगों के लिए कन्यादान करना भी श्रेष्ठ माना गया है. केतु के लिए ब्राह्मण भोजन करा कर उन्हें वस्त्र भेंट करें. बुधवार के दिन गेंहू के आटे की गोलियां बनाकर उसमें चने की दाल और थोड़ी हल्दी मिलाकर गाय को खिलाएं. ऋद्धि-सिद्धि दाता श्री गणेश जी की आराधना-उपासना करें. प्रतिदिन भोजन में से कुछ अंश गाय आदि जानवरों को दें.

मिथुन राशि में संतान योग, मिथुन राशि में संतान योग, मिथुन राशि संतान प्राप्ति, मिथुन राशि पुत्र प्राप्ति योग, मिथुन राशि संतान योग, Mithun Rashi Santan Yog, Mithun राशि के अनुसार संतान प्राप्ति, Mithun Rashi Santan Prapti Yog, मिथुन राशि संतान Prapti योग, मिथुन राशि को पुत्र प्राप्ति कब होगी, मिथुन राशि को संतान सुख, Mithun Rashi Putra Prapti Yog, मिथुन राशि संतान प्राप्ति, मिथुन लग्न में संतान योग, मिथुन राशि संतान प्राप्ति के उपाय, मिथुन राशि वालों को पुत्र प्राप्ति, Gemini Putra Prapti Yog