बैताल पचीसी: तीसरी कहानी: ​सबसे ज्यादा पुण्य किसका?, विक्रम -बेताल की कहानियाँ, बैताल पच्चीसी की कहानियाँ, Baital Pachisi Third Story: Sabse Jyada Punya Kiska, Vikram-Baital Stories In Hindi, Vikram-Baital ki Kahani In Hindi, Vikram-Baital Hindi Stories

बैताल पचीसी, तीसरी कहानी ​सबसे ज्यादा पुण्य किसका
बैताल पचीसी 25 कथाओं का एक ग्रन्थ है. जिसके रचयिता बेतालभट्ट बताये जाते हैं जो न्याय के लिये प्रसिद्ध राजा विक्रम के नौ रत्नों में से एक थे. बैताल पचीसी की कथायें राजा विक्रम की न्याय-शक्ति को दर्शाती हैं. इस ग्रंथ के अनुसार बेताल प्रतिदिन राजा विक्रम को एक कहानी सुनाता है और अन्त में राजा से ऐसा सवाल पूछता है, राजा को उसका जवाब देना ही पड़ता है. उसने शर्त लगा रखी है कि अगर राजा बोलेगा तो वह उससे रूठकर फिर से पेड़ पर जा लटकेगा. लेकिन यह जानते हुए भी सवाल सामने आने पर राजा चुप नहीं रह पाता और बोल पड़ता है. आज हम आपके लिए बैताल पचीसी की सभी कहानियां लेकर आए हैं ताकि आप मुफ्त में ये कहानी पढ़ सकें. हर एक कहानी के नीचे बाकि की कहानियों का लिंक भी प्रकाशित किया गया है ताकि आप सभी कहानियों को एक ही जगह पर पढ़ सकें.

वर्धमान नगर में रूपसेन नाम का राजा राज करता था. एक दिन उसके यहाँ वीरवर नाम का एक राजपूत नौकरी के लिए आया. राजा ने उससे पूछा कि उसे ख़र्च के लिए क्या चाहिए तो उसने जवाब दिया, हज़ार तोले सोना. सुनकर सबको बड़ा आश्चर्य हुआ. राजा ने पूछा, “तुम्हारे साथ कौन-कौन है?” उसने जवाब दिया, “मेरी स्त्री, बेटा और बेटी.” राजा को और भी अचम्भा हुआ. आख़िर चार जने इतने धन का क्या करेंगे? फिर भी उसने उसकी बात मान ली.

उस दिन से वीरवर रोज हज़ार तोले सोना भण्डारी से लेकर अपने घर आता. उसमें से आधा ब्राह्मणों में बाँट देता, बाकी के दो हिस्से करके एक मेहमानों, वैरागियों और संन्यासियों को देता और दूसरे से भोजन बनवाकर पहले ग़रीबों को खिलाता, उसके बाद जो बचता, उसे स्त्री-बच्चों को खिलाता, आप खाता. काम यह था कि शाम होते ही ढाल-तलवार लेकर राज के पलंग की चौकीदारी करता. राजा को जब कभी रात को ज़रूरत होती, वह हाज़िर रहता.

एक आधी रात के समय राजा को मरघट की ओर से किसी के रोने की आवाज़ आयी. उसने वीरवर को पुकारा तो वह आ गया. राजा ने कहा, “जाओ, पता लगाकर आओ कि इतनी रात गये यह कौन रो रहा है ओर क्यों रो रहा है?”

वीरवर तत्काल वहाँ से चल दिया. मरघट में जाकर देखता क्या है कि सिर से पाँव तक एक स्त्री गहनों से लदी कभी नाचती है, कभी कूदती है और सिर पीट-पीटकर रोती है. लेकिन उसकी आँखों से एक बूँद आँसू की नहीं निकलती. वीरवर ने पूछा, “तुम कौन हो? क्यों रोती हो?”

उसने कहा, “मैं राज-लक्ष्मी हूँ. रोती इसलिए हूँ कि राजा विक्रम के घर में खोटे काम होते हैं, इसलिए वहाँ दरिद्रता का डेरा पड़ने वाला है. मैं वहाँ से चली जाऊँगी और राजा दु:खी होकर एक महीने में मर जायेगा.”

सुनकर वीरवर ने पूछा, “इससे बचने का कोई उपाय है!”

स्त्री बोली, “हाँ, है. यहाँ से पूरब में एक योजन पर एक देवी का मन्दिर है. अगर तुम उस देवी पर अपने बेटे का शीश चढ़ा दो तो विपदा टल सकती है. फिर राजा सौ बरस तक बेखटके राज करेगा.”

वीरवर घर आया और अपनी स्त्री को जगाकर सब हाल कहा. स्त्री ने बेटे को जगाया, बेटी भी जाग पड़ी. जब बालक ने बात सुनी तो वह खुश होकर बोला, “आप मेरा शीश काटकर ज़रूर चढ़ा दें. एक तो आपकी आज्ञा, दूसरे स्वामी का काम, तीसरे यह देह देवता पर चढ़े, इससे बढ़कर बात और क्या होगी! आप जल्दी करें.”

वीरवर ने अपनी स्त्री से कहा, “अब तुम बताओ.”

स्त्री बोली, “स्त्री का धर्म पति की सेवा करने में है.”

निदान, चारों जने देवी के मन्दिर में पहुँचे. वीरवर ने हाथ जोड़कर कहा, “हे देवी, मैं अपने बेटे की बलि देता हूँ. मेरे राजा की सौ बरस की उम्र हो.”

इतना कहकर उसने इतने ज़ोर से खांडा मारा कि लड़के का शीश धड़ से अलग हो गया. भाई का यह हाल देख कर बहन ने भी खांडे से अपना सिर अलग कर डाला. बेटा-बेटी चले गये तो दु:खी माँ ने भी उन्हीं का रास्ता पकड़ा और अपनी गर्दन काट दी. वीरवर ने सोचा कि घर में कोई नहीं रहा तो मैं ही जीकर क्या करूँगा. उसने भी अपना सिर काट डाला. राजा को जब यह मालूम हुआ तो वह वहाँ आया. उसे बड़ा दु:ख हुआ कि उसके लिए चार प्राणियों की जान चली गयी. वह सोचने लगा कि ऐसा राज करने से धिक्कार है! यह सोच उसने तलवार उठा ली और जैसे ही अपना सिर काटने को हुआ कि देवी ने प्रकट होकर उसका हाथ पकड़ लिया. बोली, “राजन्, मैं तेरे साहस से प्रसन्न हूँ. तू जो वर माँगेगा, सो दूँगी.”

राजा ने कहा, “देवी, तुम प्रसन्न हो तो इन चारों को जिला दो.”

देवी ने अमृत छिड़ककर उन चारों को फिर से जिला दिया.

इतना कहकर बेताल बोला, राजा, बताओ, सबसे ज्यादा पुण्य किसका हुआ?”

राजा बोला, “राजा का.”

बेताल ने पूछा, “क्यों?”

राजा ने कहा, “इसलिए कि स्वामी के लिए चाकर का प्राण देना धर्म है; लेकिन चाकर के लिए राजा का राजपाट को छोड़, जान को तिनके के समान समझकर देने को तैयार हो जाना बहुत बड़ी बात है.”

यह सुन बेताल ग़ायब हो गया और पेड़ पर जा लटका. बेचारा राजा दौड़ा-दौड़ा वहाँ पहुँचा ओर उसे फिर पकड़कर लाया तो बोताल ने चौथी कहानी कही.

यहां पढ़ें बैताल पच्चीसी की बाकि की कहानियां

  1. पहली कहानी बैताल पचीसी: ​पापी कौन ? Baital Pachisi First Story: Papi Kaun?
  2. दूसरी कहानी बैताल पचीसी: ​पति कौन ? Baital Pachisi Second Story: Pati Kaun?
  3. तीसरी कहानी बैताल पचीसी: ​सबसे ज्यादा पुण्य किसका?, Baital Pachisi 3rd Story: Sabse Jyada Punya Kiska?
  4. चौथी कहानी बैताल पचीसी: ​ज्यादा पापी कौन?, Baital Pachisi Fourth Story: Jyada Paapi Kaun?
  5. पाँचवीं कहानी बैताल पचीसी : ​असली वर कौन?, Baital Pachisi Fifth Story: Asali Var Kaun?
  6. छठी कहानी बैताल पचीसी : ​पत्नी किसकी ?,aital Pachisi Sixth Story: Patni Kiski?
  7. सातवीं कहानी बैताल पचीसी : ​किसका पुण्य बड़ा?, Baital Pachisi Seventh Story:Kiska Punya Bada?
  8. आठवीं कहानी बैताल पचीसी : ​सबसे बढ़कर कौन ?,Baital Pachisi Eighth Story: Sabse Badhkar Kaun?
  9. नौवीं कहानी बैताल पचीसी : ​सर्वश्रेष्ठ वर कौन?, Baital Pachisi Ninth Story: Sarva Shrestha Var Kaun?
  10. दसवीं कहानी बैताल पचीसी : ​सबसे अधिक त्यागी कौन?, Baital Pachisi Tenth Story: Sabse Adhik Tyagi Kaun?
  11. ग्याहरवीं कहानी बैताल पचीसी : ​सबसे अधिक सुकुमार कौन?, Baital Pachisi Eleventh Story: Sabse Adhik Sukumar Kaun?
  12. बारहवीं कहानी बैताल पचीसी : ​दीवान की मृत्यु क्यूँ ?Baital Pachisi Twelfth Story: Diwan Ki Mrityu Kyon?
  13. तेरहवीं कहानी बैताल पचीसी : ​अपराधी कौन?, Baital Pachisi Thirteenth Story: Apradhi Kaun?
  14. चौदहवीं कहानी बैताल पचीसी : ​चोर ज़ोर-ज़ोर से क्यों रोया और फिर हँसा?, Baital Pachisi Fourteenth Story: Jor Jor Se Kyon Roya Aur Fir Hansa?
  15. पन्द्रहवीं कहानी बैताल पचीसी: ​क्या चोरी की गयी चीज़ पर चोर का अधिकार होता है? Baital Pachisi Fifteenth : Kya Chori Ki Gayi Chize Par Chor Ka Adhikar Hota Hai?
  16. सोलहवीं कहानी बैताल पचीसी : सबसे बड़ा काम किसने किया?, Baital Pachisi Sixteenth Story: Sabse Bada Kaam Kisne Kiya?
  17. सत्रहवीं कहानी बैताल पचीसी : अधिक साहसी कौन?,Baital Pachisi Seventeenth Story: Adhik Sahsi Kaun?
  18. अठारहवीं कहानी बैताल पचीसी : विद्या क्यों नष्ट हो गयी?Baital Pachisi Eighteenth Story: Vidya Kyon Nasht Ho Gayi?
  19. उन्नीसवीं कहानी बैताल पचीसी: पिण्ड दान का अधिकारी कौन?, Baital Pachisi Nineteenth Story: Pind Daan Ka Adhikari Kaun?
  20. बीसवीं कहानी बैताल पचीसी : बालक क्यों हँसा?, Baital Pachisi Twentieth Story: Balak Kyo Hansaa?
  21. इक्कीसवीं कहानी बैताल पचीसी : सबसे ज्यादा प्रेम में अंधा कौन था?, Baital Pachisi Twenty-first Story: Sabse Jyada Prem Me Andha Kaun Tha?
  22. बाईसवीं कहानी बैताल पचीसी: शेर बनाने का अपराध किसने किया?,Baital Pachisi Twenty-Second Story: Sher Bnaane Ka Apradh Kisne Kisne Kiya?
  23. तेइसवीं कहानी बैताल पचीसी ते: योगी पहले क्यों रोया, फिर क्यों हँसा?,Baital Pachisi Twenty-Third Story: Yogi Pahle Kyo Roya Fir Kyo Hansaa?
  24. चौबीसवीं कहानी बैताल पचीसी : माँ-बेटी के बच्चों में क्या रिश्ता हुआ? Baital Pachisi Twenty-fourth Story: Maa Beti Ke Bacchon Me Kya Rishta Hua?
  25. पच्चीसवीं कहानी बैताल पचीसी , Baital Pachisi Twenty-fifth Story

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