period mein guruwar ka vrat karna chahie ya nahi period ke panchve din poja kar sakte hain mahavari period ke kitne din baad pooja karni chaahie period khatam hone ke kitne din bad chahie

पीरियड में गुरुवार का व्रत करना चाहिए या नहीं, पीरियड के पांचवें दिन पूजा कर सकते हैं, पीरियड के कितने दिन बाद पूजा करनी चाहिए, माहवारी के कितने दिन बाद पूजा करनी चाहिए, पीरियड के कितने दिन बाद पूजा करना चाहिए, पीरियड खत्म होने के कितने दिन बाद पूजा करनी चाहिए, पीरियड के कितने दिन बाद पूजा कर सकते हैं, क्या पीरियड में पूजा कर सकते हैं, Period Ke Kitne Din Bad Puja Karna Chahie, Kya Periods Me Vrat Karna Chahiye, Period Me Fast Rakh Sakte Hai

पीरियड में गुरुवार का व्रत करना चाहिए या नहीं, पीरियड के पांचवें दिन पूजा कर सकते हैं, पीरियड के कितने दिन बाद पूजा करनी चाहिए, माहवारी के कितने दिन बाद पूजा करनी चाहिए, पीरियड के कितने दिन बाद पूजा करना चाहिए, पीरियड खत्म होने के कितने दिन बाद पूजा करनी चाहिए, पीरियड के कितने दिन बाद पूजा कर सकते हैं, क्या पीरियड में पूजा कर सकते हैं, Period Ke Kitne Din Bad Puja Karna Chahie, Kya Periods Me Vrat Karna Chahiye, Period Me Fast Rakh Sakte Hai

पीरियड में गुरुवार का व्रत करना चाहिए या नहीं

पीरियड के कितने दिन बाद पूजा करनी चाहिए – हिन्दू नियमो के अनुसार, मासिक धर्म या माहवारी (Periods) के दिनों में महिलाओं को धार्मिक कार्यों में शामिल नहीं होना चाहिए. इसको लेकर बहुत सारे विचार है की महिलाओ को क्या करना चाहिए क्या नहीं।मासिक धर्म या माहवारी दिनों में महिलाओं को मंदिर जाने की इजाजत नहीं होती साथ ही पूजा पाठ के सामान और मूर्ति को हाथ लगाना भी अशुभ माना जाता है. जी हां, ये तो सही है कि मासिक धर्म के समय महिलाओं को पूजा-पाठ इत्यादि करने से मना किया जाता है. पहले के जमाने में तो नियम बहुत हि कड़े और कष्ट दायी थे. पुराने वक्त में पीरियड्स के समय महिलाएं जमीन पर चटाई बिछाकर सोती थी, किसी कार्य में भाग नहीं लेती थी, यहां तक कि रसोई घर में भी उन्हें जाने से मना किया जाता था. अच्छी बात ये है कि बदलते जमाने के साथ लोगों की सोच भी बदली है और पहले की अपेक्षा धीरे धीरे ही सही पर समाज में इन चीजों को लेकर जागरुकता फैली है.
महिलाएं अपने परिवार की उन्नति के लिए बहुत कुछ करती है जैसे की कड़े व्रत रखना और उनको पालन करना, ये सब वो अपने घर परिवार के लिए करती है की भगवान उनके घर में सुख शांति रखे. जैसे 16 सोमवार का व्रत हो या फिर गुरुवार का व्रत हो महिलाएं सुख और समृद्धि के लिए नियमों का पालन करते हुए व्रत करती है.अब सवाल यह आता है कि किसी भी व्रत के बीच में अगर किसी महिला को पीरियड्स आ जाए तो ऐसे में उसे क्या करना चाहिए? जैसा कि हम सभी जानते हैं कि यह एक बेहद साधारण सी समस्या है जिसका सामना लगभग सभी लड़कियों को कभी न कभी करना ही पड़ता है. दिनभर भूखे रहकर, सारे नियमों का पालन करने के बाद शाम के वक्त या पूजा के समय माहवारी आ जाए तो मूड का बिगड़ जाता है. तो ऐसे समय में क्या करना चाहिए, क्या व्रत भंग कर देना सही है, बिल्कुल भी नहीं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि ऐसे में आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए.

क्या पीरियड में पूजा कर सकते हैं?

व्रत के दौरान माहवारी आ जाए तो क्या करें – यदि व्रत के बीच किसी महिला को मासिक धर्म या माहवारी आ जाए तो उपवास या व्रत तोड़ने की कोई आवश्यकता नहीं है. आप बाकियों से दूरी बनाकर सभी नियमों का पालन कर सकती हैं. पूजा-पाठ से दूरी बनाकर अन्य नियमों का ठीक वैसे ही पालन करें जैसे कि सामान्य दिनों में करती हैं. इससे भी आपको व्रत का उतना ही फल मिलेगा. यह प्रकृति का चक्र है, इसमें इंसान का कोई हाथ नहीं और न ही इसमें कुछ गलत है. किसी भी कार्य या ईश्वर के प्रति आस्था इंसान के मन और विचारों से जुड़ा हुआ है, शरीर तो महज एक जरिया है. इसीलिए पूरी मन और श्रद्धा से माहवारी के दिनों में भी आप अपनी परंपराओं को बरकरार रखकर सभी नियम कानूनों का पालन कर सकती हैं.

माहवारी में व्रत का पालन कैसे करें?

व्रत के संकल्प के दौरान मासिक चक्र आने पर व्रत को लेकर हर स्त्री के मन में शंका, संशय और व्रत भंग होने के कारण धर्म दोष की पीड़ा रहती है. इन व्रतों में मुख्यत: प्रतिमाह आने वाले एकादशी, संकष्टी चतुर्थी, प्रदोष व्रत आदि हैं. यह धर्मसंकट उस समय ज्यादा पीड़ादायक होता है. जब महिलाएं विशेष कामनाओं की प्राप्ति के लिए सोलह सोमवार या सोलह शुक्रवार के व्रत रखती है. शास्त्रों में व्यावहारिक रुप से इसका उपाय भी बताया गया है-
मासिक च्रक के दौरान व्रत पालन को लेकर संशय दूर करने के लिए सबसे पहली बात यह है कि व्रत संख्या में उस दिन को न गिना जाए. इस दौरान व्रत रखें. किंतु यह भी जरुरी है कि किसी भी तरह से भगवान की उपासना और देव पूजा में शामिल न होवें. यही नियम मासिक और सोलह सोमवार आदि संकल्प व्रतों में व्यवहार में अपनाए. इससे व्रत भंग का दोष नहीं लगता और व्रत धर्म का पालन भी हो जाता है.
ऐसा करने पर मात्र व्रत की अवधि बढ़ जाती है. जैसे अगर आपने १६ सोमवार का व्रत लिया है तो १६ सप्ताह के जगह पर मासिक चक्र के दिन आए सोमवार को न गिनने से यह व्रत अवधि १७ वें सप्ताह के सोमवार पर पूरी होती है. दूसरा संशय यह कि अगर व्रत के दिन ही स्त्री को मासिक धर्म आ जाए. तब क्या करें. तब भी ऊपर लिखी बात का ही पालन करें यानि मासिक चक्र आते ही देवकार्य और पूजा से अलग हो जाएं, किंतु व्रत रख सकती हैं.

पीरियड या माहवारी के दौरान व्रत से संबंधित सवाल और जवाब

व्रत के दौरान अगर पीरियड या माहवारी आ जाए तो क्या करना चाहिए और क्या नहीं इससे जुड़े सवाल और उनके जवाब-
सवाल- क्या पीरियड में व्रत रख सकते हैं, पीरियड में गुरुवार का व्रत करना चाहिए या नहीं
जवाब- हां बिल्कुल आपको व्रत रखना चाहिए, मान लीजिये कि नवरात्रि में कुछ व्रत करने के बाद अगर आपका मासिक धर्म आ जाता है अथवा आपने करवाचौथ का व्रत रखा है और शाम को मासिक धर्म आ जाए तो क्या करेंगी आप ? आपको इस व्रत को पूरा करना ही पड़ेगा. परंतु इसके पश्चात पूजा पाठ नहीं करें. आपको माहवारी के दौरान किये जाने वाले व्रत से भी उतना ही फल मिलेगा जितना आम दिनों में मिलता है और भगवान प्रसन्न होंगे क्योंकि इसमें आपकी गलती नहीं है. ये प्रकृति का चक्र है, जो कभी भी किसी भी दिन हो सकता है. इसीलिए बिना किसी संकोच के चिंता नहीं करें.

सवाल- पीरियड के पांचवें दिन पूजा कर सकते हैं, पीरियड के कितने दिन बाद पूजा करनी चाहिए
जवाब- हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है कि मासिक धर्म आने पर किसी भी महिला को चार या फिर पांच दिन के लिए किसी भी प्रकार की पूजा-अर्चना एवं गृहस्थी के कार्यों से दूरी बना लेनी चाहिए. मनुस्मृति और भविष्यपुराण में यह भी कहा गया है कि इन चार दिनों में पति-पत्नी को ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए साथ शयन नहीं करना चाहिए. इसके अलावा आप 3 दिन के बाद देवी की पूजा कर सकती हैं. मासिक धर्म के तीसरे और चौथे दिन भगवान की मूर्ति को नहीं छूना चाहिए जब तक स्त्री को पीरियड के चार दिन पुरे न हो गये हों.
सवाल- मासिक धर्म या माहवारी के समय क्या नहीं खाना चाहिए?
जवाब- पीरियड के दौरान गर्म चाजों से दुरी बना लेनी चाहिए इनके सेवन से बचना चाहिए. इसके अलावा चाय और कॉफी का सेवन न करें तो बेहतर होगा क्योंकि इसमें कैफ़ेन अधिक मात्रा में पाई जाती है जो पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द को बढ़ा सकती है और मूड स्विंग की समस्या भी पैदा कर सकती है. इसके अलावा ज्यादा मीठे, खट्टे चीजों के सेवन से बचें.

सवाल- पीरियड के समय गुरुवार, सोमवार, या करवा चौथ की पूजा कैसे करें?
जवाब- अगर गुरुवार, सोमवार, या करवा चौथ के दिन या उससे पहले माहवारी आ जाए तो व्रत शुरू होने से पहले पर्याप्त मात्रा में पानी पियें. क्योंकि पूरे दिन हाइड्रेट यानि शरीर में जल की मात्रा संतुलित रहने से आपको पीरियड्स के दौरान पेट में दर्द नहीं होगा. सुबह सरगी में सेब और नट्स जरूर खाएं. इसके अलावा शाम की पूजा को छोड़ दें. पर चाँद को जरूर देखें और अपना व्रत पूरा करें. क्योंकि पूजा पाठ आपके मन, आत्मा और आपके विचार से होता है.
सवाल- माहवारी के दौरान महिलाओ को क्या करना चाहिए?
जवाब:  पीरियड्स के दौरान महिलाओं को खास तौर पर स्वच्छता का ख्याल रखना चाहिए. महिलाओं को हर महीने मासिक धर्म से गुजरना पड़ता है. ऐसे समय में उन्हें सैनिटरी नैपकिन, टिशू पेपर, हैंड सैनिटाइजर, तौलिए, एंटीसेप्टिक दवा हमेशा अपने साथ रखनी चाहिए. ताकि किसी भी तरह के इंफेक्शन से बचा जा सके और सेहत भी अच्छी रहे. और हाँ कपड़े का प्रयोग बिलकुल भी ना करें, कपडे से इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है.

ये भी पढ़े –

  1. शंकर जी, भगवान शिव की पूजा विधि, Shiv Pujan, भगवान शिव जी को प्रसन्न कैसे करें, शिव जी की कथा, शिव पूजन सामग्री, शिव पूजा के दौरान पहने जाने वाले वस्त्र.
  2. सोमवार व्रत कैसे करें, सोमवार व्रत पूजन विधि नियम कथा आरती, प्रति सोमवार व्रत विधि, सोमवार व्रत के नियम, सोमवार व्रत का उद्यापन कैसे करें.
  3. 16 सोमवार व्रत विधि, 16 Somvar Vrat Vidhi In Hindi, 16 सोमवार व्रत कब से शुरू करें, सोलह सोमवार व्रत कथा आरती और उद्द्यापन, 16 Somvar Vrat Kab Se Shuru Kare.
  4. मंगलवार व्रत के नियम, Mangalvar Vrat Ke Niyam, मंगलवार व्रत विधि विधान, मंगलवार व्रत का खाना, मंगलवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं, मंगलवार का व्रत.
  5. बुधवार व्रत विधि विधान, बुधवार का व्रत कैसे किया जाता है, बुधवार व्रत कथा आरती, बुधवार व्रत उद्यापन विधि, बुधवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं.
  6. गुरुवार बृहस्पतिवार वीरवार व्रत विधि, वीरवार की व्रत कथा आरती, गुरुवार व्रत कथा आरती, गुरुवार का उद्यापन कब करना चाहिए, बृहस्पतिवार व्रत कथा उद्यापन.
  7. लक्ष्मी पूजा , शुक्रवार वैभव लक्ष्मी व्रत विधि, वैभव लक्ष्मी पूजा विधि, वैभव लक्ष्मी व्रत कथा, वैभव लक्ष्मी की आरती, वैभव लक्ष्मी व्रत कैसे करें, वैभव लक्ष्मी व्रत फल.
  8. संतोषी माता व्रत विधि , शुक्रवार व्रत विधि , शुक्रवार व्रत कथा आरती, संतोषी माता व्रत कथा, संतोषी माता की आरती, मां संतोषी का व्रत कैसे करें.
  9. शनिवार व्रत पूजा विधि, शनिवार के व्रत का उद्यापन, शनिवार के कितने व्रत करना चाहिए, शनिवार व्रत के लाभ, शनिवार का उद्यापन कैसे होता है.
  10. रविवार व्रत विधि विधान पूजा विधि व्रत कथा आरती, रविवार के कितने व्रत करने चाहिए, रविवार व्रत कब से शुरू करना चाहिए, रविवार के व्रत में क्या खाना चाहिए.
  11. माता पार्वती की पूजा विधि आरती जन्म कथा, Mata Parvati Puja Vidhi Aarti Janm Katha, माता पार्वती की पूजन सामग्री, Maa Parvati Mantra, Parvati Mata Mantra.
  12. बीकासूल कैप्सूल खाने से क्या फायदे होते हैं, बिकासुल कैप्सूल के लाभ, Becosules Capsules Uses in Hindi, बेकासूल, बीकोस्यूल्स कैप्सूल.
  13. जिम करने के फायदे और नुकसान, Gym Karne Ke Fayde, जिम जाने से पहले क्या खाएं, Gym Jane Ke Fayde, जिम से नुकसान, जिम जाने के नुकसान.
  14. मोटापा कम करने के लिए डाइट चार्ट, वजन घटाने के लिए डाइट चार्ट, बाबा रामदेव वेट लॉस डाइट चार्ट इन हिंदी, वेट लॉस डाइट चार्ट.
  15. बच्चों के नये नाम की लिस्ट, बेबी नाम लिस्ट, बच्चों के नाम की लिस्ट, हिंदी नाम लिस्ट, बच्चों के प्रभावशाली नाम, हिन्दू बेबी नाम, हिन्दू नाम लिस्ट.
  16. रेखा की जीवनी , रेखा की बायोग्राफी, रेखा की फिल्में, रेखा का करियर, रेखा की शादी, Rekha Ki Jivani, Rekha Biography In Hindi, Rekha Films, Rekha Career.
  17. प्यार का सही अर्थ क्या होता है, Pyar Kya Hota Hai, Pyar Kya Hai, प्यार क्या होता है, प्यार क्या है, Pyaar Kya Hai, Pyar Ka Matlab Kya Hota Hai, Love Kya Hota Hai.
  18. शराब छुड़ाने की आयुर्वेदिक दवा , होम्योपैथी में शराब छुड़ाने की दवा, शराब छुड़ाने के लिए घरेलू नुस्खे , शराब छुड़ाने का मंत्र , शराब छुड़ाने के लिए योग.
  19. ज्यादा नींद आने की वजह, Jyada Nind Kyon Aati Hai, ज्यादा नींद आना के कारण, ज्यादा नींद आना, शरीर में सुस्ती, शरीर में थकावट.
  20. भगवान राम के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान राम के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान राम के नाम, भगवान राम से बेबी बॉय नेम्स, राम जी के नाम पर लड़के का नाम.
  21. भगवान शिव के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान शिव के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान शिव के नाम, शिव जी के नाम पर लड़के का नाम.
Janki Jayanti Puja

जानकी जयंती पूजन विधि, Janki Jayanti Puja Vidhi, सीता अष्टमी व्रत पूजा विधि, Sita Ashtami Vrat Puja Vidhi, जानकी जयंती का महत्व, माता सीता की जन्म कथा, जानकी जयंती कथा, सीता जी की आरती , Mata Sita Ki Janam Katha, Janki Jayanti Ka Mahtva, Sita Ji Ki Aarti

जानकी जयंती पूजन विधि, Janki Jayanti Puja Vidhi, सीता अष्टमी व्रत पूजा विधि, Sita Ashtami Vrat Puja Vidhi, जानकी जयंती का महत्व, माता सीता की जन्म कथा, जानकी जयंती कथा, सीता जी की आरती , Mata Sita Ki Janam Katha, Janki Jayanti Ka Mahtva, Sita Ji Ki Aarti

जानकी जयंती पूजन विधि, Janki Jayanti Puja Vidhi

फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जानकी जयंती (माता सीता का जन्मदिन) के रूप में मनाया जाता है. इस दिन जनक दुलारी, राम प्रिया माता सीता का प्राकट्य हुआ था. इसे सीता अष्टमी भी कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि इस दिन माता सीता राजा जनक और रानी सुनयना को पुत्री के रूप में मिली थीं. पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार जब राजा जनक हल से धरती जोत रहे थे. तभी उनका हल किसी कठोर चीज से स्पर्श हुआ जब राजा जनक ने देखा तो वहां से उन्हें एक कलश प्राप्त हुआ. उस कलश में एक सुंदर कन्या थी. राजा जनक के कोई संतान नहीं थी, वे उस कन्या को अपने साथ ले आए. इस कन्या का नाम ही सीता रखा गया. राजा जनक की जेयष्ठ पुत्री होने के कारण ये जनक दुलारी कहलायीं. माता सीता को लक्ष्मी जी का ही स्वरूप माना जाता है. जानकी जयंती के दिन दिन माता सीता की विधि-विधान से पूजा की जाती है. तो चलिए जानते हैं जानकी जयंती का महत्व और पूजा विधि…

सीता अष्टमी व्रत पूजा विधि, Sita Ashtami Vrat Puja Vidhi

1- सीता अष्टमी के दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत होकर माता सीता और भगवान श्रीराम के समक्ष व्रत का संकल्प करें.
2- मंदिर के सामने एक चौकी पर लाल रंग का वस्त्र डालकर माता सीता और प्रभु राम की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें.
3- सबसे पहले भगवान गणेश और माता अंबिका की पूजा करें.
4- इसके बाद माता सीता और भगवान श्रीराम की पूजा आरंभ करें.
5- प्रतिमा पर रोली, अक्षत, सफेद फूल अर्पित करें.
6- माता सीता को पीले फूल, पीले वस्त्र और सोलह श्रृंगार का सामान अर्पित करें.
7- माता सीता को भोग में पीली चीजें अर्पित करें.
8- राजा जनक और माता सुनयना की भी पूजा करें.
9- विधिपूर्वक पूजा के बाद मां सीता की आरती करें.
10- दूध और गुड़ से व्यंजन बनाकर प्रसाद चढ़ाएं और वितरित करें.
11- पूजन करने के पश्चात माता जानकी के मंत्र रामाभ्यां नमः का एक माला जाप करें.
12- शाम को पुनः पूजन करने के पश्चात प्रसाद में चढ़ाएं दूध और गुड़े के बने व्यंजन से व्रत का पारण करें.
13- जानकी जयंती के दिन श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान पुण्य करें. संभव हो तो शाम के वक्त कन्‍याभोज या ब्राह्मण भोज करें.

जानकी जयंती का महत्व, Sita Jayanti Ka Mahtva

ग्रंथों में दिए गए उल्लेख के अनुसार इस दिन जानकी जयंती के दिन माता सीता और भगवान श्री राम की उपासना करने और उपवास रखने से भक्त के सभी दुख दूर हो जाते हैं और व्यक्ति को जमीन दान के साथ-साथ सोलह तरह के महत्वपूर्ण दानों का फल भी प्राप्त होता है. शास्त्रों में लिखा है कि जानकी जयंती के दिन जो भी महिला उपवास करती है, उसे माता सीता की कृपा प्राप्त होती है. उस स्त्री के पति को माता सीता लंबी आयु का वरदान देती हैं. निसंतान दम्पत्तियों के लिए भी जानकी जयंती पर किया गया व्रत किसी आशीर्वाद कम नहीं, ऐसा माना गया है, की इस दिन व्रत करने से दंपत्ति को संतान सुख की प्राप्ति होती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सीता जयंती का व्रत करने से वैवाहिक जीवन से जुड़े सभी कष्टों का नाश होता है. सुहागन महिलाओं के लिए यह व्रत बहुत मायने रखता है. इसके साथ ही इस दिन कुंवारी लड़कियां भी मनचाहे वर के लिए व्रत करती हैं. यदि किसी कन्या के विवाह में बाधा आ रही हो तो इस व्रत को करने से विवाह की बाधाएं दूर होती हैं.

माता सीता की जन्म कथा, जानकी जयंती कथा, Mata Sita Ki Janam Katha, Janki Jayanti Katha 

वाल्मिकी रामायण के अनुसार, एक बार मिथिला में पड़े भयंकर सूखे से राजा जनक बेहद परेशान हो गए थे, तब इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए उन्हें एक ऋषि ने यज्ञ करने और धरती पर हल चलाने का सुझाव दिया. ऋषि के सुझाव पर राजा जनक ने यज्ञ करवाया और उसके बाद राजा जनक धरती जोतने लगे. तभी उन्हें धरती में से सोने की खूबसूरत संदूक में एक सुंदर कन्या मिली. राजा जनक की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उस कन्या को हाथों में लेकर उन्हें पिता प्रेम की अनुभूति हुई. राजा जनक ने उस कन्या को सीता नाम दिया और उसे अपनी पुत्री के रूप में अपना लिया.

माता सीता का विवाह भगवान श्रीराम के साथ हुआ. लेकिन विवाह के पश्चात वे राजसुख से वंचित रहीं. विवाह के तुरंत बाद 14 वर्षों का वनवास और फिर वनवास में उनका रावण के द्वारा अपहरहण हुआ. लंका विजय के बाद जब वे अपने प्रभु श्रीराम के साथ अयोध्या वापस लौटीं तो उनके चरित्र पर सवाल उठाए गए. यहां तक कि उन्हें अग्नि परीक्षा भी देनी पड़ी, परंतु फिर भी उनके भाग्य में वो सुख नहीं मिल पाया, जिसकी वे हकदार थीं. उन्हें अयोध्या से बाहर छोड़ दिया गया. जंगल में रहकर उन्होंने लव-कुश को जन्म दिया और अकेले ही उनका पालन-पोषण किया. अंत में मां जानकी धरती मां के भीतर समा गईं. सनातन संस्कृति में माता सीता अपने त्याग एवं समर्पण के लिए सदा के लिए अमर हो गईं.

सीता जी की आरती, Sita Ji Ki Aarti, Janki Jayanti Aarti

आरती श्रीजनक-दुलारी की, सीताजी रघुबर-प्यारी की...

जगत-जननि जगकी विस्तारिणि, नित्य सत्य साकेत विहारिणि,

परम दयामयि दीनोद्धारिणि, मैया भक्तन-हितकारी की...

आरती श्रीजनक-दुलारी की,

सतीशिरोमणि पति-हित-कारिणि, पति-सेवा-हित-वन-वन-चारिणि,

पति-हित पति-वियोग-स्वीकारिणि, त्याग-धर्म-मूरति-धारी की...

आरती श्रीजनक-दुलारी की...

विमल-कीर्ति सब लोकन छाई, नाम लेत पावन मति आई,

सुमिरत कटत कष्ट दुखदायी, शरणागत-जन-भय-हारी की...

आरती श्रीजनक-दुलारी की, सीताजी रघुबर-प्यारी की...

ये भी पढ़े –

  1. शंकर जी, भगवान शिव की पूजा विधि, Shiv Pujan, भगवान शिव जी को प्रसन्न कैसे करें, शिव जी की कथा, शिव पूजन सामग्री, शिव पूजा के दौरान पहने जाने वाले वस्त्र.
  2. सोमवार व्रत कैसे करें, सोमवार व्रत पूजन विधि नियम कथा आरती, प्रति सोमवार व्रत विधि, सोमवार व्रत के नियम, सोमवार व्रत का उद्यापन कैसे करें.
  3. 16 सोमवार व्रत विधि, 16 Somvar Vrat Vidhi In Hindi, 16 सोमवार व्रत कब से शुरू करें, सोलह सोमवार व्रत कथा आरती और उद्द्यापन, 16 Somvar Vrat Kab Se Shuru Kare.
  4. मंगलवार व्रत के नियम, Mangalvar Vrat Ke Niyam, मंगलवार व्रत विधि विधान, मंगलवार व्रत का खाना, मंगलवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं, मंगलवार का व्रत.
  5. बुधवार व्रत विधि विधान, बुधवार का व्रत कैसे किया जाता है, बुधवार व्रत कथा आरती, बुधवार व्रत उद्यापन विधि, बुधवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं.
  6. गुरुवार बृहस्पतिवार वीरवार व्रत विधि, वीरवार की व्रत कथा आरती, गुरुवार व्रत कथा आरती, गुरुवार का उद्यापन कब करना चाहिए, बृहस्पतिवार व्रत कथा उद्यापन.
  7. लक्ष्मी पूजा , शुक्रवार वैभव लक्ष्मी व्रत विधि, वैभव लक्ष्मी पूजा विधि, वैभव लक्ष्मी व्रत कथा, वैभव लक्ष्मी की आरती, वैभव लक्ष्मी व्रत कैसे करें, वैभव लक्ष्मी व्रत फल.
  8. संतोषी माता व्रत विधि , शुक्रवार व्रत विधि , शुक्रवार व्रत कथा आरती, संतोषी माता व्रत कथा, संतोषी माता की आरती, मां संतोषी का व्रत कैसे करें.
  9. शनिवार व्रत पूजा विधि, शनिवार के व्रत का उद्यापन, शनिवार के कितने व्रत करना चाहिए, शनिवार व्रत के लाभ, शनिवार का उद्यापन कैसे होता है.
  10. रविवार व्रत विधि विधान पूजा विधि व्रत कथा आरती, रविवार के कितने व्रत करने चाहिए, रविवार व्रत कब से शुरू करना चाहिए, रविवार के व्रत में क्या खाना चाहिए.
  11. माता पार्वती की पूजा विधि आरती जन्म कथा, Mata Parvati Puja Vidhi Aarti Janm Katha, माता पार्वती की पूजन सामग्री, Maa Parvati Mantra, Parvati Mata Mantra.
  12. बीकासूल कैप्सूल खाने से क्या फायदे होते हैं, बिकासुल कैप्सूल के लाभ, Becosules Capsules Uses in Hindi, बेकासूल, बीकोस्यूल्स कैप्सूल.
  13. जिम करने के फायदे और नुकसान, Gym Karne Ke Fayde, जिम जाने से पहले क्या खाएं, Gym Jane Ke Fayde, जिम से नुकसान, जिम जाने के नुकसान.
  14. मोटापा कम करने के लिए डाइट चार्ट, वजन घटाने के लिए डाइट चार्ट, बाबा रामदेव वेट लॉस डाइट चार्ट इन हिंदी, वेट लॉस डाइट चार्ट.
  15. बच्चों के नये नाम की लिस्ट, बेबी नाम लिस्ट, बच्चों के नाम की लिस्ट, हिंदी नाम लिस्ट, बच्चों के प्रभावशाली नाम, हिन्दू बेबी नाम, हिन्दू नाम लिस्ट.
  16. रेखा की जीवनी , रेखा की बायोग्राफी, रेखा की फिल्में, रेखा का करियर, रेखा की शादी, Rekha Ki Jivani, Rekha Biography In Hindi, Rekha Films, Rekha Career.
  17. प्यार का सही अर्थ क्या होता है, Pyar Kya Hota Hai, Pyar Kya Hai, प्यार क्या होता है, प्यार क्या है, Pyaar Kya Hai, Pyar Ka Matlab Kya Hota Hai, Love Kya Hota Hai.
  18. शराब छुड़ाने की आयुर्वेदिक दवा , होम्योपैथी में शराब छुड़ाने की दवा, शराब छुड़ाने के लिए घरेलू नुस्खे , शराब छुड़ाने का मंत्र , शराब छुड़ाने के लिए योग.
  19. ज्यादा नींद आने की वजह, Jyada Nind Kyon Aati Hai, ज्यादा नींद आना के कारण, ज्यादा नींद आना, शरीर में सुस्ती, शरीर में थकावट.
  20. भगवान राम के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान राम के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान राम के नाम, भगवान राम से बेबी बॉय नेम्स, राम जी के नाम पर लड़के का नाम.
  21. भगवान शिव के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान शिव के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान शिव के नाम, शिव जी के नाम पर लड़के का नाम.

जानकी जयंती पूजन विधि, Janki Jayanti Puja Vidhi, सीता अष्टमी व्रत पूजा विधि, Sita Ashtami Vrat Puja Vidhi, जानकी जयंती का महत्व, माता सीता की जन्म कथा, जानकी जयंती कथा, सीता जी की आरती , Mata Sita Ki Janam Katha, Janki Jayanti Ka Mahtva, Sita Ji Ki Aarti

Shabari-Jayanti

शबरी जयंती पूजा विधि, Shabari Jayanti Puja Vidhi, शबरी कौन थी, Shabari Kaun Thi, शबरी इन रामायण, Shabri In Ramayana, Shabri And Ram Story In Hindi, Shabri Ke Ber, शबरी जंयती कथा, Shabari Jayanti Katha, शबरी भीलनी की कथा, शबरी के पिता का नाम, शबरी का विवाह, शबरी का आश्रम कहां है, शबरी की जीवनी, शबरी का जन्म स्थान, शबरी जयंती का महत्व, Shabari Jayanti Ka Mahatva

शबरी जयंती पूजा विधि, Shabari Jayanti Puja Vidhi, शबरी कौन थी, Shabari Kaun Thi, शबरी इन रामायण, Shabri In Ramayana, Shabri And Ram Story In Hindi, Shabri Ke Ber, शबरी जंयती कथा, Shabari Jayanti Katha, शबरी भीलनी की कथा, शबरी के पिता का नाम, शबरी का विवाह, शबरी का आश्रम कहां है, शबरी की जीवनी, शबरी का जन्म स्थान, शबरी जयंती का महत्व, Shabari Jayanti Ka Mahatva

शबरी जयंती पूजा विधि, Shabari Jayanti Puja Vidhi
फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शबरी जयंती मनाई जाती है. यह दिन भगवान राम की अनन्य भक्त माता शबरी को समर्पित है. शबरी जयंती के दिन ही शबरी को उसके भक्ति के परिणामस्वरूप मोक्ष प्राप्त हुआ था. यह पर्व मोक्ष तथा भक्ति का प्रतीक माना जाता है. इस दिन शबरी माला में माता शबरी की पूजा करने का विधान है. माता शबरी की पूजा अर्चना करने से भगवान राम की कृपा भी प्राप्त होती है. प्रभु श्री राम ने अपनी भक्त शबरी की भक्ति को पूर्ण करने के लिए उनके जूठे बेर खाए थे. रामायण, रामचरितमानस आदि में शबरी की कथा का उल्लेख मिलता है. इस दिन माता शबरी की स्मृति यात्रा निकाली जाती है. लोग रामायण का पाठ आदि कराते हैं. शबरी का जिक्र तो आपने रामायण के दौरान सुना, जाना और पढ़ा ही होगा आइए आज जानते हैं शबरी कौन थी, शबरी जयंती का महत्व, कथा, पूजा विधि आदि के बारे में जानकारी विस्तार से-

शबरी जयंती पूजा विधि , Shabari Jayanti Ki Puja Vidhi
1. शबरी जयंती के दिन भगवान श्री राम की पूजा की जाती है. इस दिन साधक को सुबह जल्दी उठना चाहिए और साफ वस्त्र धारण करने चाहिए.
2. इसके बाद एक साफ चौकी लेकर उस पर गंगाजल छिड़कना चाहिए और उस पर भगावान श्री राम की प्रतिमा को स्थापित करना चाहिए.
3. प्रतिमा स्थापित करने के बाद भगवान श्री राम को फल, फूल व नैवेद्य और बेर विशेष रूप से अर्पित करने चाहिए.
4. इसके बाद भगवान श्री राम के आगे धूप व दीप जलाने चाहिए.
5. धूप व दीप जलाने के बाद भगवान श्री राम की विधिवत पूजा करनी चाहिए.
6. इसके बाद भगवान श्री राम की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए.
7. भगवान श्री राम की कथा पढ़ने और सुनने के बाद उनकी धूप व दीप से आरती उतारनी चाहिए. 8. इसके बाद भगवान श्री राम को बेर का भोग अवश्य लगाना चाहिए और भोग लगाते समय माता शबरी को याद करना चाहिए.
9. अंत में पूजा में हुई किसी भी गलती के लिए भगवान श्री राम से क्षमा याचना अवश्य करनी चाहिए. 10. इसके बाद यदि संभव हो तो निर्धन लोगों के बीच में बेर अवश्य बांटे.

शबरी जयंती का महत्व , Shabari Jayanti Ka Mahatva
शास्त्रों के अनुसार, शबरी को भगवान श्री राम का भक्त माना जाता है. शबरी के झूठे बेर श्री राम ने खाए थे और उनकी भक्ति को पूरा किया था. बता दें कि जहां शबरी माता ने श्री राम को अपने जूठे बेर खिलाएं, माता शबरी का वह आश्रम छत्तीसगढ़ के शिवरीनारायण में स्थित है. इनकी कथा रामायण, भागवत,रमाचरित मानस,सुरसागर आदि ग्रंथों में पढ़ने को मिलती है. शबरी जयंती पर इनकी स्मृति यात्रा का आयोजन किया जाता है. साथ ही इस दिन श्री राम के भक्त भी इक्ट्ठा होते हैं. इस दिन रामायण आदि ग्रंथों का पाठ किया जाता है. सात ही कई धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं. इस दिन पूरी श्रद्धा के साथ व्रत करने से व्यक्ति को प्रभु श्री राम की कृपा प्राप्ति होती है जिस तरह के शबरी को हुई थी.

कौन थीं माता शबरी , Shabari Mata Kaun Thi, Shabari Jayanti Introduction In Hindi, शबरी जंयती कथा, Shabari Jayanti Story
ग्रंथों में मिलने वाली कथा के अनुसार माता शबरी भगवान श्री राम की परम भक्त थी. शबरी का असली नाम श्रमणा था. ये भील सामुदाय के शबर जाति से संबंध रखती थीं इसी कारण कालांतर में उनका नाम शबरी हुआ. इनके पिता भीलों के मुखिया थे, उन्होंने श्रमणा का विवाह एक भील कुमार से तय किया था. विवाह से पहले परंपरा के अनुसार कई सौ पशुओं को बलि देने के लिए लाया गया. जिन्हें देख श्रमणा का हृदय द्रवित हो उठा कि यह कैसी परंपरा जिसके कारण बेजुबान और निर्दोष जानवरो की हत्या की जाती है. श्रमणा उन भेड़ बकरियों को बचाने की कोशिश करने लगीं. उन्हें बचाने के लिए शबरी ने सुबह ही सभी जानवरों को छोड़ दिया तथा खुद भी घर वापस नहीं आयीं. इस तरह से शबरी अपने विवाह से एक दिन पूर्व भाग गई और दंडकारण्य वन में पहुंच गई.

दंडकारण्य में मातंग ऋषि तपस्या किया करते थे. श्रमणा उनकी सेवा करना चाहती थी परंतु वह भील जाति से थी जिसके कारण उन्हें लगता था कि उन्हें सेवा करने का अवसर नहीं मिलेगा, लेकिन इसके बाद भी वे चुपचाप प्रातः जल्दी उठकर आश्रम से नदी तक का रास्ते से सारे कंकड़ और कांटो को चुनकर पूरे रास्ते को भलिभांति साफ कर दिया करती थी और रास्ते में बालू बिछा देती थी. एक दिन जब शबरी यह सब कार्य कर रही थी तो ऋषिश्रेष्ठ ने उन्हें देख लिया. वे शबरी की सेवा भावना से अत्यंत प्रसन्न हुए. उन्होंने अपने आश्रम में शरण दे दी. शबरी वहीं पर रहने लगी. एक दिन जब ऋषि मातंग को लगा कि उनका अंत समय निकट है तो उन्होंने शबरी से कहा कि वे अपने आश्रम में ही प्रभु श्री राम की प्रतीक्षा करें. वे एक दिन अवश्य ही उनसे मिलने आएंगे. मातंग ऋषि की मृत्यु के पश्चात शबरी का समय भगवान राम की प्रतीक्षा में बीतने लगा. वह अपने आश्रम को एकदम साफ-सुथरा रखती थी और प्रतिदिन भगवान राम के लिए मीठे बेर तोड़कर लाती थी. एक भी बेर खट्टा न हो इसके लिए वह एक-एक बेर चखकर तोड़ती थी. ऐसा करते-करते कई वर्ष बीतते चले गए.

एक दिन शबरी को पता चला कि दो सुंदर युवक उन्हें खोज रहे हैं, वे समझ गईं कि उनके प्रभु राम आ गए हैं. अब तक उनका शरीर बहुत वृद्ध हो गया था परंतु अपने प्रभु राम के आने की खबर सुनते ही उसमे चुस्ती आ गई और वो दौड़ती हुई, अपने प्रभु राम के पास पहुंची और उन्हें घर लेकर आई और उनके पांव को धोकर बैठाया. इसके बाद उन्होंने अपने तोड़े हुए मीठे बेर राम को दिए भगवान राम ने बड़े प्रेम से वे बेर खाए और अपनी भक्त शबरी की भक्ति को पूर्ण किया. राम जी ने लक्ष्मण को भी बेर खाने को कहा लेकिन उन्हें  जूठे बेर खाने में संकोच हो रहा था, फिर भी अपने भ्राता श्री राम का मन रखने के लिए उन्होंने बेर उठा तो लिए लेकिन खाए नहीं, कहा जाता है कि इसका परिणाम यह हुआ कि राम-रावण युद्ध में जब शक्ति बाण का प्रयोग किया गया तो वे मूर्छित हो गए थे. हे प्रभु श्री राम जिस तरह से आपने माता शबरी पर अपनी कृपा बरसाई ऐसे ही हम सबके ऊपर अपनी कृपा दृष्टि बनाएं रखना.

शबरी मंदिर, Shabari Temple, Shabari Mandir, शबरी मंदिर कहां है, शबरी मंदिर का महत्व, शबरी मंदिर की विशेषता
शबरी मंदिर भारत के छत्तीसगढ़ प्रांत में स्थित खरौद नगर के दक्षिण प्रवेश द्वार पर स्थित शौरि मंडप शबरी का ही मंदिर है. ईंट से बना पूर्वाभिमुख इस मंदिर को सौराइन दाई अथवा शबरी का मंदिर भी कहा जाता है. मंदिर के गर्भगृह में श्रीराम और लक्ष्मण धनुष बाण लिये विराजमान हैं. कहा जाता है कि श्रीराम और लक्ष्मण जी शबरी के जूठे बेर यहीं खाये थे. तत्कालीन साहित्य में उल्लेख मिलता है कि नगर के दक्षिण दिशा में शबरी देवी (सौराइन दाई) का मंदिर स्थित है. ईंट से बना यह मंदिर पूर्वाभिमुख है. लक्ष्मणेश्वर महादेव मंदिर के शिलालेख में इसके निर्माण के काल का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि गंगाधर नामक अमात्य ने एक शौरि मंडप का निर्माण कराकर पुण्य का कार्य किया है. शौरि वास्तव में विष्णु का एक नाम है और यह क्षेत्र भी विष्णु प्रतिमाओं के कारण श्री नारायण क्षेत्र या श्री पुरूषोत्तम क्षेत्र कहलाता है, जिसका उल्लेख स्कन्द पुराण में मिलता है. इस मंदिर के गर्भगृह के प्रवेश द्वार पर गरूड़ जी की मूर्ति है. अत: इसके विष्णु मंदिर होने की कल्पना की जा सकती है. सम्प्रति यहाँ देवी की मूर्ति है. इस मंदिर में देवी की मूर्ति कब और किसने स्थापित की, यह पता नहीं चलता. संभवत: विष्णु और शक्ति में सामंजस्य स्थापित करने के लिए इस मंदिर में देवी की स्थापना की गई है. प्राचीन काल में यह क्षेत्र दंडकारण्य कहलाता था. दंडकारण्य में श्रीराम लक्ष्मण और जानकी ने कई वर्ष व्यतीत किये. इसी क्षेत्र से सीता का हरण हुआ था. श्रीराम और लक्ष्मण ने सीता की खोज के दौरान शबरी के आश्रम में आकर उसके जूठे बेर खाये थे, इसी प्रसंग को लेकर इस स्थान को शबरी-नारायण कहा गया. कालान्तर में यह बिगड़कर शिवरीनारायण कहलाने लगा. प्राचीन काल में इस क्षेत्र में खर-दूषण का राज था, जो श्रीराम के हाथों वीरगति को प्राप्त हुआ था. कदाचित् उन्हीं के नाम पर यह नगर खरौद कहलाया.

ये भी पढ़े –

  1. शंकर जी, भगवान शिव की पूजा विधि, Shiv Pujan, भगवान शिव जी को प्रसन्न कैसे करें, शिव जी की कथा, शिव पूजन सामग्री, शिव पूजा के दौरान पहने जाने वाले वस्त्र.
  2. सोमवार व्रत कैसे करें, सोमवार व्रत पूजन विधि नियम कथा आरती, प्रति सोमवार व्रत विधि, सोमवार व्रत के नियम, सोमवार व्रत का उद्यापन कैसे करें.
  3. 16 सोमवार व्रत विधि, 16 Somvar Vrat Vidhi In Hindi, 16 सोमवार व्रत कब से शुरू करें, सोलह सोमवार व्रत कथा आरती और उद्द्यापन, 16 Somvar Vrat Kab Se Shuru Kare.
  4. मंगलवार व्रत के नियम, Mangalvar Vrat Ke Niyam, मंगलवार व्रत विधि विधान, मंगलवार व्रत का खाना, मंगलवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं, मंगलवार का व्रत.
  5. बुधवार व्रत विधि विधान, बुधवार का व्रत कैसे किया जाता है, बुधवार व्रत कथा आरती, बुधवार व्रत उद्यापन विधि, बुधवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं.
  6. गुरुवार बृहस्पतिवार वीरवार व्रत विधि, वीरवार की व्रत कथा आरती, गुरुवार व्रत कथा आरती, गुरुवार का उद्यापन कब करना चाहिए, बृहस्पतिवार व्रत कथा उद्यापन.
  7. लक्ष्मी पूजा , शुक्रवार वैभव लक्ष्मी व्रत विधि, वैभव लक्ष्मी पूजा विधि, वैभव लक्ष्मी व्रत कथा, वैभव लक्ष्मी की आरती, वैभव लक्ष्मी व्रत कैसे करें, वैभव लक्ष्मी व्रत फल.
  8. संतोषी माता व्रत विधि , शुक्रवार व्रत विधि , शुक्रवार व्रत कथा आरती, संतोषी माता व्रत कथा, संतोषी माता की आरती, मां संतोषी का व्रत कैसे करें.
  9. शनिवार व्रत पूजा विधि, शनिवार के व्रत का उद्यापन, शनिवार के कितने व्रत करना चाहिए, शनिवार व्रत के लाभ, शनिवार का उद्यापन कैसे होता है.
  10. रविवार व्रत विधि विधान पूजा विधि व्रत कथा आरती, रविवार के कितने व्रत करने चाहिए, रविवार व्रत कब से शुरू करना चाहिए, रविवार के व्रत में क्या खाना चाहिए.
  11. माता पार्वती की पूजा विधि आरती जन्म कथा, Mata Parvati Puja Vidhi Aarti Janm Katha, माता पार्वती की पूजन सामग्री, Maa Parvati Mantra, Parvati Mata Mantra.
  12. बीकासूल कैप्सूल खाने से क्या फायदे होते हैं, बिकासुल कैप्सूल के लाभ, Becosules Capsules Uses in Hindi, बेकासूल, बीकोस्यूल्स कैप्सूल.
  13. जिम करने के फायदे और नुकसान, Gym Karne Ke Fayde, जिम जाने से पहले क्या खाएं, Gym Jane Ke Fayde, जिम से नुकसान, जिम जाने के नुकसान.
  14. मोटापा कम करने के लिए डाइट चार्ट, वजन घटाने के लिए डाइट चार्ट, बाबा रामदेव वेट लॉस डाइट चार्ट इन हिंदी, वेट लॉस डाइट चार्ट.
  15. बच्चों के नये नाम की लिस्ट, बेबी नाम लिस्ट, बच्चों के नाम की लिस्ट, हिंदी नाम लिस्ट, बच्चों के प्रभावशाली नाम, हिन्दू बेबी नाम, हिन्दू नाम लिस्ट.
  16. रेखा की जीवनी , रेखा की बायोग्राफी, रेखा की फिल्में, रेखा का करियर, रेखा की शादी, Rekha Ki Jivani, Rekha Biography In Hindi, Rekha Films, Rekha Career.
  17. प्यार का सही अर्थ क्या होता है, Pyar Kya Hota Hai, Pyar Kya Hai, प्यार क्या होता है, प्यार क्या है, Pyaar Kya Hai, Pyar Ka Matlab Kya Hota Hai, Love Kya Hota Hai.
  18. शराब छुड़ाने की आयुर्वेदिक दवा , होम्योपैथी में शराब छुड़ाने की दवा, शराब छुड़ाने के लिए घरेलू नुस्खे , शराब छुड़ाने का मंत्र , शराब छुड़ाने के लिए योग.
  19. ज्यादा नींद आने की वजह, Jyada Nind Kyon Aati Hai, ज्यादा नींद आना के कारण, ज्यादा नींद आना, शरीर में सुस्ती, शरीर में थकावट.
  20. भगवान राम के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान राम के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान राम के नाम, भगवान राम से बेबी बॉय नेम्स, राम जी के नाम पर लड़के का नाम.
  21. भगवान शिव के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान शिव के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान शिव के नाम, शिव जी के नाम पर लड़के का नाम.

शबरी जयंती पूजा विधि, Shabari Jayanti Puja Vidhi, शबरी कौन थी, Shabari Kaun Thi, शबरी इन रामायण, Shabri In Ramayana, Shabri And Ram Story In Hindi, Shabri Ke Ber, शबरी जंयती कथा, Shabari Jayanti Katha, शबरी भीलनी की कथा, शबरी के पिता का नाम, शबरी का विवाह, शबरी का आश्रम कहां है, शबरी की जीवनी, शबरी का जन्म स्थान, शबरी जयंती का महत्व, Shabari Jayanti Ka Mahatva

yashoda jayanti

यशोदा जयंती, Yashoda Jayanti, यशोदा जयंती पूजा विधि, Yashoda Jayanti Puja Vidhi, यशोदा जयंती का महत्व यशोदा जयंती कथा, Yashoda Jayanti Katha In Hindi, Yashoda Jayanti Importance, Yashoda Jayanti Ka Mahatva, यशोदा जयंती पर करें ये उपाय

यशोदा जयंती, Yashoda Jayanti, यशोदा जयंती पूजा विधि, Yashoda Jayanti Puja Vidhi, यशोदा जयंती का महत्व यशोदा जयंती कथा, Yashoda Jayanti Katha In Hindi, Yashoda Jayanti Importance, Yashoda Jayanti Ka Mahatva, यशोदा जयंती पर करें ये उपाय

यशोदा जयंती यशोदा जयंती पूजा विधि
फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष षष्ठी को माँ यशोदा जयंती (Yashoda Jayanti Kab Hai) मनायी जाती है. यह दिन भगवान श्री कृष्ण की मैया यशोदा के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है. वैसे तो भगवान कृष्ण को माता देवकी ने जन्म दिया था लेकिन उनका लालन-पोषण मां यशोदा ने किया था. इस दिन मां यशोदा के भक्त उनकी पूरे विधि-विधान के साथ पूजा करते हैं. इस दिन माता यशोदा की गोद में बैठे श्री कष्ण वाली फोटो की पूजा करनी चाहिए. इस दिन महिलाएं अपनी संतान के मंगल-कुशल के लिए व्रत करती हैं. ऐसा करने से संतान से संबंधित सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं. इस दिन को पूरी दुनिया के इस्कॉन मंदिरों और कृष्ण जी के सभी मंदिरों में धूमधाम से मनाया जाता है. यह त्योहार गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारतीय राज्यों में बहुत ही उल्लास के साथ मनाते हैं. जानते हैं यशोदा जयंती का महत्व मुहूर्त और पूजा विधि-

यशोदा जयंती पूजा विधि, Yshoda Jayanti Puja Vidhi
1- यशोदा जयंती को प्रातः काल स्नान आदि करने के बाद माता यशोदा का ध्यान करें.
2- पूजन के लिए माता यशोदा की भगवान कृष्ण की गोद में लिए हुए तस्वीर को स्थापित करें.
3- यदि माता यशोदा की तस्वीर न हो तो उनका ध्यान करते हुए भगवान श्री कृष्ण के समक्ष दीपक प्रज्वलित कराएं
4- मां यशोदा जी को लाल चुनरी अर्पित करें.
5- माता यशोदा को मिष्ठान और भगवान कृष्ण को मक्खन का भोग लगाएं.
6- इसके बाद माता यशोदा और भगवान कृष्ण की आरती करें. तत्पश्चात गायत्री मंत्र का जाप करें.
7- पूजा संपन्न होने के बाद अपनी मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें.

यशोदा जयंती पर करें ये उपाय
1- संपत्ति से लाभ हेतु गेहूं से भरा तांबे का कलश कृष्ण मंदिर में चढ़ाएं.
2- गृहक्लेश से मुक्ति हेतु यशोदा-कृष्ण पर चढ़ी मौली घर के मेन गेट पर बांधें.
3- गरीबों को दान-पुण्य करें. इससे जीवन में आने वाले कष्टों से मुक्ति मिलती है.
4- संतान सुख की प्राप्ति हेतु यशोदा-कृष्ण पर चढ़ा कोंहड़ा (कद्दू) नाभि से वारकर चौराहे पर रखें.
5- घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक व ॐ बनाने से नकारात्मक ऊर्जा से छुटकारा मिलता है.

यशोदा जयंती का महत्व, Yshoda Jayanti Importance
मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां यशोदा का जन्मदिन मनाया जाता है. श्री कृष्ण का जन्म तो मां देवकी से हुआ था लेकिन उनका लालन-पोषण मां यशोदा ने किया था. कृष्ण के पिता वासुदेव ने कृष्ण जी के पैदा होते ही उन्हें कंस से बचाने के लिए गोकुल में नंद बाबा के पास छोड़ दिया था. नंद बाबा की पत्नी यशोदा थीं और उन्होंने ही कृष्ण जी का लालन-पोषण किया था. इसलिए कृष्ण जी को मां यशोदा के बच्चे के रूप में जाना जाता है. इस दिन यशोदा जी की गोद में बैठे हुए कृष्ण जी की पूजा की जाती है. ऐसा करने से संतान संबंधित सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं. साथ ही सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण हो जाती हैं. मान्यता है कि अगर कोई महिला इस दिन भगवान श्री कृष्ण और यशोदा जी की पूजा करती है तो उसे भगवान श्री कृष्ण बाल रूप में दर्शन देते हैं. साथ ही इच्छाओं को पूर्ण करते हैं.

यशोदा जयंती कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक समय में यशोदा ने श्रीहरि की घोर तपस्या की, उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर विष्णु ने उन्हें वर मांगने को कहा. यशोदा ने कहा हे ईश्वर! मेरी तपस्या तभी पूर्ण होगी जब आप मुझे, मेरे पुत्र रूप में प्राप्त होंगे. भगवान ने प्रसन्न होकर उन्हें कहा कि आने वाले काल में मैं वासुदेव एवं देवकी के घर मैं जन्म लूंगा लेकिन मुझे मातृत्व का सुख आपसे ही प्राप्त होगा. समय के साथ ऐसा ही हुआ और श्रीकृष्ण देवकी व वासुदेव की आठवीं संतान के रूप में प्रकट हुए. इस दिन कृष्ण व यशोदा के विधिवत पूजन, व्रत व उपाय से निसंतान दंपत्ति को संतान सुख प्राप्त होता है, गृहक्लेश से मुक्ति मिलती है व संपत्ति से लाभ मिलता है.

ये भी पढ़े –

  1. शंकर जी, भगवान शिव की पूजा विधि, Shiv Pujan, भगवान शिव जी को प्रसन्न कैसे करें, शिव जी की कथा, शिव पूजन सामग्री, शिव पूजा के दौरान पहने जाने वाले वस्त्र.
  2. सोमवार व्रत कैसे करें, सोमवार व्रत पूजन विधि नियम कथा आरती, प्रति सोमवार व्रत विधि, सोमवार व्रत के नियम, सोमवार व्रत का उद्यापन कैसे करें.
  3. 16 सोमवार व्रत विधि, 16 Somvar Vrat Vidhi In Hindi, 16 सोमवार व्रत कब से शुरू करें, सोलह सोमवार व्रत कथा आरती और उद्द्यापन, 16 Somvar Vrat Kab Se Shuru Kare.
  4. मंगलवार व्रत के नियम, Mangalvar Vrat Ke Niyam, मंगलवार व्रत विधि विधान, मंगलवार व्रत का खाना, मंगलवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं, मंगलवार का व्रत.
  5. बुधवार व्रत विधि विधान, बुधवार का व्रत कैसे किया जाता है, बुधवार व्रत कथा आरती, बुधवार व्रत उद्यापन विधि, बुधवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं.
  6. गुरुवार बृहस्पतिवार वीरवार व्रत विधि, वीरवार की व्रत कथा आरती, गुरुवार व्रत कथा आरती, गुरुवार का उद्यापन कब करना चाहिए, बृहस्पतिवार व्रत कथा उद्यापन.
  7. लक्ष्मी पूजा , शुक्रवार वैभव लक्ष्मी व्रत विधि, वैभव लक्ष्मी पूजा विधि, वैभव लक्ष्मी व्रत कथा, वैभव लक्ष्मी की आरती, वैभव लक्ष्मी व्रत कैसे करें, वैभव लक्ष्मी व्रत फल.
  8. संतोषी माता व्रत विधि , शुक्रवार व्रत विधि , शुक्रवार व्रत कथा आरती, संतोषी माता व्रत कथा, संतोषी माता की आरती, मां संतोषी का व्रत कैसे करें.
  9. शनिवार व्रत पूजा विधि, शनिवार के व्रत का उद्यापन, शनिवार के कितने व्रत करना चाहिए, शनिवार व्रत के लाभ, शनिवार का उद्यापन कैसे होता है.
  10. रविवार व्रत विधि विधान पूजा विधि व्रत कथा आरती, रविवार के कितने व्रत करने चाहिए, रविवार व्रत कब से शुरू करना चाहिए, रविवार के व्रत में क्या खाना चाहिए.
  11. माता पार्वती की पूजा विधि आरती जन्म कथा, Mata Parvati Puja Vidhi Aarti Janm Katha, माता पार्वती की पूजन सामग्री, Maa Parvati Mantra, Parvati Mata Mantra.
  12. बीकासूल कैप्सूल खाने से क्या फायदे होते हैं, बिकासुल कैप्सूल के लाभ, Becosules Capsules Uses in Hindi, बेकासूल, बीकोस्यूल्स कैप्सूल.
  13. जिम करने के फायदे और नुकसान, Gym Karne Ke Fayde, जिम जाने से पहले क्या खाएं, Gym Jane Ke Fayde, जिम से नुकसान, जिम जाने के नुकसान.
  14. मोटापा कम करने के लिए डाइट चार्ट, वजन घटाने के लिए डाइट चार्ट, बाबा रामदेव वेट लॉस डाइट चार्ट इन हिंदी, वेट लॉस डाइट चार्ट.
  15. बच्चों के नये नाम की लिस्ट, बेबी नाम लिस्ट, बच्चों के नाम की लिस्ट, हिंदी नाम लिस्ट, बच्चों के प्रभावशाली नाम, हिन्दू बेबी नाम, हिन्दू नाम लिस्ट.
  16. रेखा की जीवनी , रेखा की बायोग्राफी, रेखा की फिल्में, रेखा का करियर, रेखा की शादी, Rekha Ki Jivani, Rekha Biography In Hindi, Rekha Films, Rekha Career.
  17. प्यार का सही अर्थ क्या होता है, Pyar Kya Hota Hai, Pyar Kya Hai, प्यार क्या होता है, प्यार क्या है, Pyaar Kya Hai, Pyar Ka Matlab Kya Hota Hai, Love Kya Hota Hai.
  18. शराब छुड़ाने की आयुर्वेदिक दवा , होम्योपैथी में शराब छुड़ाने की दवा, शराब छुड़ाने के लिए घरेलू नुस्खे , शराब छुड़ाने का मंत्र , शराब छुड़ाने के लिए योग.
  19. ज्यादा नींद आने की वजह, Jyada Nind Kyon Aati Hai, ज्यादा नींद आना के कारण, ज्यादा नींद आना, शरीर में सुस्ती, शरीर में थकावट.
  20. भगवान राम के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान राम के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान राम के नाम, भगवान राम से बेबी बॉय नेम्स, राम जी के नाम पर लड़के का नाम.
  21. भगवान शिव के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान शिव के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान शिव के नाम, शिव जी के नाम पर लड़के का नाम.

यशोदा जयंती, Yashoda Jayanti, यशोदा जयंती पूजा विधि, Yashoda Jayanti Puja Vidhi, यशोदा जयंती का महत्व यशोदा जयंती कथा, Yashoda Jayanti Katha In Hindi, Yashoda Jayanti Importance, Yashoda Jayanti Ka Mahatva, यशोदा जयंती पर करें ये उपाय

Sankashti-Chaturthi

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी, Dwijapriya Sankashti Chaturthi, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि, Dwijapriya Sankashti Chaturthi Puja Vidhi, संकष्टी चतुर्थी कब है, Sankashti Chaturthi Kab Hai, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा, आरती, मंत्र, Dwijapriya Sankashti Chaturthi Vrat Katha, संकष्टी चतुर्थी व्रत में क्या खाएं, व्रत में क्या न खाएं, Sankashti Chaturthi Vrat Mai Kya Khaye

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी, Dwijapriya Sankashti Chaturthi, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि, Dwijapriya Sankashti Chaturthi Puja Vidhi, संकष्टी चतुर्थी कब है, Sankashti Chaturthi Kab Hai, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा, आरती, मंत्र, Dwijapriya Sankashti Chaturthi Vrat Katha, संकष्टी चतुर्थी व्रत में क्या खाएं, व्रत में क्या न खाएं, Sankashti Chaturthi Vrat Mai Kya Khaye

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी, Dwijapriya Sankashti Chaturthi
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी को काफी खास माना जाता है. इसे द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी (Dwijapriya Sankashti Chaturthi) कहा जाता है. यह दिन भारत के उत्तरी और दक्षिणी राज्यों में ज्यादा धूम-धाम से मनाया जाता है. इस दिन भगवान गणेश के द्विजप्रिय रूप की पूजा अर्चना की जाती है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, विघ्नहर्ता द्विजप्रिय गणेश के चार सिर और चार भुजाएं हैं. भगवान के इस रूप का व्रत करने से सभी तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं. साथ ही अच्छी सेहत और सुख समृद्धि मिलती है. आज माएं अपनी संतान की आयु के लिए व्रत रखती हैं. जानकारी के लिए बता दें कि हर साल 24 चतुर्थी आती है और प्रत्येक तीन वर्ष बाद अधिमास की मिलाकर 26 चतुर्थी होती है. सभी चतुर्थी की महिमा और महत्व अलग-अलग है. पूरे साल में संकष्टी चतुर्थी के 13 व्रत रखे जाते हैं. आज हम आपके लिए लेकर आए हैं द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि, महत्व, कथा आदि के बारे में जानकारी विस्तार से.

चतुर्थी व्रत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी
पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि भगवान गणेश (Lord Ganesha) को समर्पित है. हिंदू कैलेंडर के मुताबिक, हर माह दो चतुर्थी तिथि आती है. इसमें से एक शुक्ल पक्ष में आती है और एक कृष्ण पक्ष में. अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) कहते हैं. संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है. अगर चतुर्थी तिथि मंगलवार के दिन पड़े तो उसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी (Angarki Sankashti) या द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी (Dwijapriya Sankashti Chaturthi) कहा जाता है.

संकष्टी चतुर्थी पूजन विधि, Dwijapriya Sankashti Chaturthi Pujan Vidhi
1- सबसे पहले सुबह उठें और स्नान करें.
2- इस दिन लाल रंग के साफ कपड़े पहनकर भगवान गणेश का पूजन करें.
3- पूजा करते समय अपना मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें.
4- स्वच्छ आसन या चौकी पर भगवान की प्रतिमा या चित्र को विराजित करें.
5- उन्हें तिल, गुड़, लड्डू, दुर्वा, चंदन चढ़ाएं. गणेश वदंन करें.
6- भगवान गणेश के मंत्रों ॐ गणेशाय नमः या ॐ गं गणपते नमः का जाप करें.
7- गणेश मंत्र का जप करते हुए 21 दूर्वा गणेश जी को अर्पित करनी चाहिए.
8- पूरे दिन व्रत रहें. शाम के समय चांद निकलने से पहले द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की कथा पढ़ें. अब चंद्रमा को अर्घ्य दें और चांद देखकर अपना व्रत खोलें.
9- अपना व्रत पूरा करने के बाद तिल का दान करें. कहा जाता है कि इस दिन तिल का दान करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं.
10- मान्‍यता है कि तुलसी ने गणेश जी को शाप दिया था इसलिए गणेश जी को तुलसी कदापि न चढ़ाएं, ऐसा करने से वह नाराज हो जाते हैं.
11- भोग
भगवान गणेश को बूंदी के लड्डूओं का भोग लगाना चाहिए. तिल तथा गुड़ से बने हुए लड्डू तथा ईख, शकरकंद, गुड़ और घी अर्पित करने की महिमा है.
12- गणेश जी के 12 नाम का जाप
सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न-नाश, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र, गजानन.

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत में क्या खाएं, Dwijapriya Sankashti Chaturthi Vrat Mai Kya Khaye
गणेश चतुर्थी पर के दिन सिर्फ फलाहार का ही सेवन करें. इस दिन रस वाले फल भी खाएं. ऐसा करने से आपके शरीर में पानी की कमीं नही होगी. गणेश चतुर्थी के दिन आप खीरा भी खा सकते हैं. गणेश चतुर्थी के दिन व्रत में मीठे का प्रयोग करें. इसके लिए आप साबूदाने की खीर, आलू का हलुआ आदि खा सकते हैं. गणेश चतुर्थी के दिन दही का सेवन करें. गणेश चतुर्थी के व्रत में अगर आप पूरे दिन में कभी भी कमजोरी महसूस करें तो चाय का सेवन कर सकते हैं. गणेश चतुर्थी के दिन व्रत खोलने के समय आप उबले हुए आलू में काली मिर्च और व्रत का नमक डालकर खा सकते हैं. कुट्टु के आंटे की रोटी या परांठा बनाकर खा सकते हैं. इसके अलावा गणेश चतुर्थी के दिन व्रत खोलते समय आप बादाम वाला दूध भी पी सकते हैं. गणेश चतुर्थी के दिन अगर आप मीठा खाकर आपना व्रत खोलना चाहते हैं तो आप सिंघाड़े का हलूआ भी खा सकते हैं.  गणेश चतुर्थी पर व्रत को तोड़ने के लिए पहले बप्पा के प्रसाद का ही प्रयोग करें. उसके बाद ही अन्य चीजों से व्रत खोलें.

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत में क्या न खाएं, Dwijapriya Sankashti Chaturthi Vrat Mai Kya Na Khaye
गणेश चतुर्थी पर व्रत में जमीन के अंदर की चीजों को खाना वर्जित माना गया है. इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन मूली, प्याज, गाजर और चुंकदर का सेवन बिल्कुल भी न करें. गणेश चतुर्थी पर काले नमक का प्रयोग बिल्कुल भी न करें इस दिन व्रत के नमक का ही प्रयोग करें. गणेश चतुर्थी के व्रत के भोजन में मसालों का प्रयोग न करें. ऐसा करने से आपका व्रत खंडित हो सकता है. इस दिन कटहल से बनी हुई भी कोई चीज,पापड़. चिप्स, पूड़ी, पकौड़ी,मूंगफली नहीं खाई जाती. गणेश चतुर्थी के व्रत में तुलसी का प्रयोग नहीं किया जाता. इसलिए किसी भी प्रकार से तुलसी ग्रहण न करें.अगर आप ऐसा करते हैं तो आपको गणेश जी के क्रोध का सामना करना पड़ सकता है. इस बात का ध्यान रखें कि घर का कोई भी सदस्य तामसिक भोजन का प्रयोग न करें. गणेश चतुर्थी के व्रत में किसी का भी झूठा कुछ न खाएं और किसी भी प्रकार की नशीली चीजों का प्रयोग न करें.

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी महत्व , Dwijapriya Sankashti Chaturthi Mahatva, Importance of Sakat Chauth
संकष्टी चतुर्थी का मतलब होता है संकट को हरने वाली चतुर्थी. संकष्टी संस्कृत भाषा से लिया गया एक शब्द है, जिसका अर्थ होता है कठिन समय से मुक्ति पाना. इस दिन व्यक्ति अपने दुःखों से छुटकारा पाने के लिए गणपति की अराधना करता है. हिन्दू धर्म में फाल्गुन माह की चतुर्थी तिथि यानी द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी को बहुत ही शुभ माना जाता है, इस दिन भगवान गणेश के 32 रुपों में से उनके छठे स्वरूप की पूजा की जाती है. पौराणिक मान्यता के अनुसार द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी तिथि पर पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-पाठ करने और व्रत रखने से भक्तों पर विघ्नहर्ता भगवान गणेश की विशेष कृपा बनती है और व्यक्ति के जीवन की सभी परेशानियों का अंत हो जाता है. सूर्योदय से प्रारम्भ होने वाला यह व्रत चंद्र दर्शन के बाद संपन्न होता है. इस दिन विधिवत व्रत रखने पौर पूजा करने से सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है.

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी की कथा , Dwijapriya Sankashti Chaturthi Vrat Katha, Vrat Katha of Sankashti Chaturthi,
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती और भगवान शिव नदी के पास बैठे हुए थे तभी अचानक माता पार्वती ने चौपड़ खेलने की अपनी इच्छा ज़ाहिर की. लेकिन समस्या की बात यह थी कि वहां उन दोनों के अलावा तीसरा कोई नहीं था जो खेल में निर्णायक की भूमिका निभाए. इस समस्या का समाधान निकालते हुए शिव और पार्वती ने मिलकर एक मिट्टी की मूर्ति बनाई और उसमें जान डाल दी.

मिट्टी से बने बालक को दोनों ने यह आदेश दिया कि तुम खेल को अच्छी तरह से देखना और यह फैसला लेना कि कौन जीता और कौन हारा. खेल शुरू हुआ जिसमें माता पार्वती बार-बार भगवान शिव को मात दे कर विजयी हो रही थीं. खेल चलते रहा लेकिन एक बार गलती से बालक ने माता पार्वती को हारा हुआ घोषित कर दिया. बालक की इस गलती ने माता पार्वती को बहुत क्रोधित कर दिया जिसकी वजह से गुस्से में आकर उन्होंने बालक को श्राप दे दिया और वह लंगड़ा हो गया. बालक ने अपनी भूल के लिए माता से बहुत क्षमा मांगी. तब माता ने कहा कि अब श्राप वापस तो नहीं हो सकता लेकिन वे एक उपाय बता सकती हैं जिससे श्राप मुक्ति हो सकती है. माता ने कहा कि संकष्टी वाले दिन इस जगह पर कुछ कन्याएं पूजा करने आती हैं, तुम उनसे व्रत की विधि पूछना और उस व्रत को सच्चे मन से करना.

बालक ने व्रत की विधि को जान कर पूरी श्रद्धापूर्वक और विधि अनुसार उसे किया. उसकी सच्ची आराधना से भगवान गणेश प्रसन्न हुए और उसकी इच्छा पूछी. बालक ने माता पार्वती और भगवान शिव के पास जाने की अपनी इच्छा को ज़ाहिर किया. गणेश ने उस बालक की मांग को पूरा कर दिया और उसे शिवलोक पंहुचा दिया, लेकिन जब वह पहुंचा तो वहां उसे केवल भगवान शिव ही मिले.

माता पार्वती भगवान शिव से नाराज़ होकर कैलाश छोड़कर चली गयी थीं. जब शिव ने उस बच्चे को पूछा की तुम यहां कैसे आए तो उसने उन्हें बताया कि गणेश की पूजा से उसे यह वरदान प्राप्त हुआ है. ये जानने के बाद भगवान शिव ने भी पार्वती को मनाने के लिए उस व्रत को किया जिसके बाद माता पार्वती भगवान शिव से प्रसन्न हो कर वापस कैलाश वापस लौट आयीं. इस तरह संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने वाले की गणपति सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.

गणेश भगवान की आरती, Bhagwan Ganesh Ki Aarti


1. जय गणेश देवा- गणेश भगवान की आरती

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा,
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा... जय...
एकदंत, दयावंत, चारभुजा धारी,
माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी...जय...

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया,
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया...जय...

पान चढ़े, फूल चढ़े और चढ़े मेवा,
लडुअन का भोग लगे, संत करे सेवा...जय...

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी,
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी...जय...

2. सुखकर्ता दुखहर्ता- श्री गणेश की आरती

सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची.
नुरवी पुरवी प्रेम कृपा जयाची.
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची.
कंठी झळके माळ मुक्ताफळांची....
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति.
दर्शनमात्रे मन कामनापूर्ति.... जय देव...

रत्नखचित फरा तूज गौरीकुमरा.
चंदनाची उटी कुंकुमकेशरा.
हिरेजड़ित मुकुट शोभतो बरा.
रुणझुणती नूपुरे चरणी घागरिया.... जय देव...

लंबोदर पीतांबर फणीवर बंधना.
सरळ सोंड वक्रतुंड त्रिनयना.
दास रामाचा वाट पाहे सदना.
संकष्टी पावावें, निर्वाणी रक्षावे,
सुरवरवंदना....
जय देव जय देव जय मंगलमूर्ति.
दर्शनमात्रे मन कामनापूर्ति.... जय देव...

3. शेंदुर लाल चढ़ायो- श्री गणेश की आरती

शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको.
दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको.
हाथ लिए गुडलद्दु सांई सुरवरको.
महिमा कहे न जाय लागत हूं पादको ....1....

जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता.
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता ....

अष्टौ सिद्धि दासी संकटको बैरि.
विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी.
कोटीसूरजप्रकाश ऐबी छबि तेरी.
गंडस्थलमदमस्तक झूले शशिबिहारि ....2....

जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता.
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता ....

भावभगत से कोई शरणागत आवे.
संतत संपत सबही भरपूर पावे.
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे.
गोसावीनंदन निशिदिन गुन गावे ....3....

जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता.
धन्य तुम्हारा दर्शन मेरा मन रमता ....

ये भी पढ़े –

  1. शंकर जी, भगवान शिव की पूजा विधि, Shiv Pujan, भगवान शिव जी को प्रसन्न कैसे करें, शिव जी की कथा, शिव पूजन सामग्री, शिव पूजा के दौरान पहने जाने वाले वस्त्र.
  2. सोमवार व्रत कैसे करें, सोमवार व्रत पूजन विधि नियम कथा आरती, प्रति सोमवार व्रत विधि, सोमवार व्रत के नियम, सोमवार व्रत का उद्यापन कैसे करें.
  3. 16 सोमवार व्रत विधि, 16 Somvar Vrat Vidhi In Hindi, 16 सोमवार व्रत कब से शुरू करें, सोलह सोमवार व्रत कथा आरती और उद्द्यापन, 16 Somvar Vrat Kab Se Shuru Kare.
  4. मंगलवार व्रत के नियम, Mangalvar Vrat Ke Niyam, मंगलवार व्रत विधि विधान, मंगलवार व्रत का खाना, मंगलवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं, मंगलवार का व्रत.
  5. बुधवार व्रत विधि विधान, बुधवार का व्रत कैसे किया जाता है, बुधवार व्रत कथा आरती, बुधवार व्रत उद्यापन विधि, बुधवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं.
  6. गुरुवार बृहस्पतिवार वीरवार व्रत विधि, वीरवार की व्रत कथा आरती, गुरुवार व्रत कथा आरती, गुरुवार का उद्यापन कब करना चाहिए, बृहस्पतिवार व्रत कथा उद्यापन.
  7. लक्ष्मी पूजा , शुक्रवार वैभव लक्ष्मी व्रत विधि, वैभव लक्ष्मी पूजा विधि, वैभव लक्ष्मी व्रत कथा, वैभव लक्ष्मी की आरती, वैभव लक्ष्मी व्रत कैसे करें, वैभव लक्ष्मी व्रत फल.
  8. संतोषी माता व्रत विधि , शुक्रवार व्रत विधि , शुक्रवार व्रत कथा आरती, संतोषी माता व्रत कथा, संतोषी माता की आरती, मां संतोषी का व्रत कैसे करें.
  9. शनिवार व्रत पूजा विधि, शनिवार के व्रत का उद्यापन, शनिवार के कितने व्रत करना चाहिए, शनिवार व्रत के लाभ, शनिवार का उद्यापन कैसे होता है.
  10. रविवार व्रत विधि विधान पूजा विधि व्रत कथा आरती, रविवार के कितने व्रत करने चाहिए, रविवार व्रत कब से शुरू करना चाहिए, रविवार के व्रत में क्या खाना चाहिए.
  11. माता पार्वती की पूजा विधि आरती जन्म कथा, Mata Parvati Puja Vidhi Aarti Janm Katha, माता पार्वती की पूजन सामग्री, Maa Parvati Mantra, Parvati Mata Mantra.
  12. बीकासूल कैप्सूल खाने से क्या फायदे होते हैं, बिकासुल कैप्सूल के लाभ, Becosules Capsules Uses in Hindi, बेकासूल, बीकोस्यूल्स कैप्सूल.
  13. जिम करने के फायदे और नुकसान, Gym Karne Ke Fayde, जिम जाने से पहले क्या खाएं, Gym Jane Ke Fayde, जिम से नुकसान, जिम जाने के नुकसान.
  14. मोटापा कम करने के लिए डाइट चार्ट, वजन घटाने के लिए डाइट चार्ट, बाबा रामदेव वेट लॉस डाइट चार्ट इन हिंदी, वेट लॉस डाइट चार्ट.
  15. बच्चों के नये नाम की लिस्ट, बेबी नाम लिस्ट, बच्चों के नाम की लिस्ट, हिंदी नाम लिस्ट, बच्चों के प्रभावशाली नाम, हिन्दू बेबी नाम, हिन्दू नाम लिस्ट.
  16. रेखा की जीवनी , रेखा की बायोग्राफी, रेखा की फिल्में, रेखा का करियर, रेखा की शादी, Rekha Ki Jivani, Rekha Biography In Hindi, Rekha Films, Rekha Career.
  17. प्यार का सही अर्थ क्या होता है, Pyar Kya Hota Hai, Pyar Kya Hai, प्यार क्या होता है, प्यार क्या है, Pyaar Kya Hai, Pyar Ka Matlab Kya Hota Hai, Love Kya Hota Hai.
  18. शराब छुड़ाने की आयुर्वेदिक दवा , होम्योपैथी में शराब छुड़ाने की दवा, शराब छुड़ाने के लिए घरेलू नुस्खे , शराब छुड़ाने का मंत्र , शराब छुड़ाने के लिए योग.
  19. ज्यादा नींद आने की वजह, Jyada Nind Kyon Aati Hai, ज्यादा नींद आना के कारण, ज्यादा नींद आना, शरीर में सुस्ती, शरीर में थकावट.
  20. भगवान राम के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान राम के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान राम के नाम, भगवान राम से बेबी बॉय नेम्स, राम जी के नाम पर लड़के का नाम.
  21. भगवान शिव के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान शिव के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान शिव के नाम, शिव जी के नाम पर लड़के का नाम.

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी, Dwijapriya Sankashti Chaturthi, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि, Dwijapriya Sankashti Chaturthi Puja Vidhi, संकष्टी चतुर्थी कब है, Sankashti Chaturthi Kab Hai, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा, आरती, Dwijapriya Sankashti Chaturthi Vrat Katha, संकष्टी चतुर्थी व्रत में क्या खाएं, संकष्टी चतुर्थी व्रत में क्या न खाएं, Sankashti Chaturthi Vrat Mai Kya Khaye, संकष्टी चतुर्थी पूजन मंत्र

Mahashivratri-2021

2021 में महाशिवरात्रि कब है, महाशिवरात्रि व्रत 2021 पूजा मुहूर्त, Mahashivratri Vrat 2021 Puja Muhurat, शिव का जलाभिषेक, Shiv Abhishek Vidhi , महाशिवरात्रि 2021 पूजा विधि, महाशिवरात्रि मंत्र, महाशिवरात्रि का महत्व, महाशिवरात्रि कथा- आरती, महाशिवरात्रि व्रत में क्या खाएं,  Mahashivratri Puja 2021 Vidhi, Mantra, Mahashivratri Katha- Aarti, Mahashivratri Vrat Mein Kya Khana Chahiye

2021 में महाशिवरात्रि कब है, महाशिवरात्रि व्रत 2021 पूजा मुहूर्त, Mahashivratri Vrat 2021 Puja Muhurat, शिव का जलाभिषेक, Shiv Abhishek Vidhi, महाशिवरात्रि 2021 पूजा विधि, महाशिवरात्रि मंत्र, महाशिवरात्रि का महत्व, महाशिवरात्रि कथा- आरती, महाशिवरात्रि व्रत में क्या खाएं, Mahashivratri Puja 2021 Vidhi, Mantra, Mahashivratri Katha- Aarti, Mahashivratri Vrat Mein Kya Khana Chahiye

2021 में महाशिवरात्रि कब है, महाशिवरात्रि व्रत 2021 पूजा मुहूर्त
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि (Mahashivratri) पर्व मनाया जाता है. दक्षिण भारतीय पंचांग (अमावस्यान्त पंचांग) के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को यह पर्व मनाया जाता है. वहीं उत्तर भारतीय पंचांग (पूर्णिमान्त पंचांग) के मुताबिक़ फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का आयोजन होता है. पूर्णिमान्त व अमावस्यान्त दोनों ही पंचांगों के अनुसार महाशिवरात्रि (Mahashivratri 2021) एक ही दिन पड़ती है. इस साल 2021 में 11 मार्च (गुरुवार) को महाशिवरात्रि है. साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण है. पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से सृष्टि का आरम्भ हुआ. इसी दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का विवाह हुआ था. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की विधि-विधान से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. ऐसे में आज हम आपको साल 2021 में किस दिन महाशिवरात्रि के दिन और तारीख के बारे में बताने जा रहे हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में-

महा शिवरात्रि 11 मार्च 2021 (बृहस्पतिवार) मुहूर्त,  महा शिवरात्रि मुहूर्त 
निशिता काल पूजा समय – 00:06 से 00:55, मार्च 12
अवधि – ०० घण्टे 48 मिनट्स
12 मार्च, शिवरात्रि पारण समय – 06:34 से 15:02
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 18:27 से 21:29
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 21:29 से 00:31, मार्च 12
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय –00:31 से 03:32, मार्च 12
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 03:32 से 06:34, मार्च 12
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ – मार्च 11, 2021 को 14:39 बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त – मार्च 12, 2021 को 15:02 बजे

महाशिवरात्रि व्रत पूजा विधि, शिव का जलाभिषेक (जल से) , शिव का दुग्‍धाभिषेक (दूध से)
1. मिट्टी या तांबे के लोटे में पानी या दूध भरकर ऊपर से बेलपत्र, आक-धतूरे के फूल, चावल, शहद, दूध, दही, शक्कर आदि डालकर शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए. अगर आस-पास कोई शिव मंदिर नहीं है, तो घर में ही मिट्टी का शिवलिंग बनाकर उनका पूजन किया जाना चाहिए. अभिषेक में तुलसी के पत्ते, हल्दी, चंपा और केतकी के फूल का प्रयोग नहीं किया जाता है
2. महाशिवरात्रि के दिन शिवपुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र या शिव के पंचाक्षर मंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप करना चाहिए.
3. शास्त्रों के अनुसार, महाशिवरात्रि का पूजा निशील काल में करना उत्तम माना गया है. निशिता काल वह समय है जब भगवान शिव लिंग स्वरुप में पृथ्वी पर अवतरित हुए थे. हालांकि भक्त अपनी सुविधानुसार भी भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं. साथ ही महाशिवरात्रि के दिन रात्रि जागरण का भी विधान है.
4. इस खास दिन अगर आप भोले को मुर्दे की भस्म भी लगाते हैं तो वह और भी प्रसन्न होते हैं.

महाशिवरात्रि पूजन में छह वस्तुओं को जरुर शामिल करें
1. गंगाजल, दूध, शहद और बेर या बेल के पत्तो के साथ शिव का अभिषेक
2. सिंदूर का पेस्ट स्नान के बाद शिव लिंग को लगाया जाता है.
3. फल
4. जलती धूप, धन, उपज (अनाज).
5. दीपक
6. पान के पत्ते

महामृत्युंजय मंत्र, संजीवनी मंत्र, त्रयंबकम मंत्र (Mahamrityunjay Mantra)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

महाशिवरात्रि के 4 प्रहर के 4 मंत्र
1. महाशिवरात्रि के प्रथम प्रहर में संकल्प करके शिवलिंग को दूध से स्नान करवाकर ॐ हीं ईशानाय नम: का जाप करना चाहिए.
2. महाशिवरात्रि के द्वितीय प्रहर में शिवलिंग को दधि (दही) से स्नान करवाकर ॐ हीं अधोराय नम: का जाप करें.
3. महाशिवरात्रि के तृतीय प्रहर में शिवलिंग को घृत से स्नान करवाकर ॐ हीं वामदेवाय नम: का जाप करें.
4. महाशिवरात्रि के चतुर्थ प्रहर में शिवलिंग को मधु (शहद) से स्नान करवाकर ॐ हीं सद्योजाताय नम: मंत्र का जाप करना करें.

ये चीजें व्रत में खाएं
1. महाशिवारात्रि के व्रत में नमक का उपयोग नहीं करते हैं. हालांकि सेंधा नमक आप अपने खाने में डाल सकते हैं. व्रत में बनाया जाने वाला खाना पूरी तरह सात्विक होता है.
2. महाशिवरात्रि के व्रत मे शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए अनार या संतरे आदि के जूस का सेवन कर सकते हैं.
3.  महाशिवरात्रि के दिन फलाहार जैसे सेब, संतरा, पपीता, केला और खीरा आदि खा सकते हैं.
4. इस व्रत में आप आलू फ्राइ, मखाना और मूंगफली को हल्के घी में फ्राई करके या दही में सेंधा नमक और काली मिर्च मिला कर खा सकते हैं.
5.इस दौरान आप गाजर या लौकी की खीर आदि मीठी चीजों का सेवन भी कर सकते हैं.
7. इस व्रत में आप साबुदाने की खिचड़ी या पापड़, कुट्टू के आटे का खाना आदि का सेवन कर सकते हैं.

इन चीजों का सेवन व्रत में न करें
1. अनाज का सेवन व्रत में नहीं करना चाहिए.
2. साधारण नमक का इस्तेमाल शिवरात्रि के व्रत के खाने में ना उपयोग करें. सेंधा नमक ही खाने में इस्तेमाल करना चाहिए.
3. नॉनवेज या अंडा व्रत के दौरान ना खाएं.
4. प्याज-लहसुन से बनी चीजें भी इस व्रत में नहीं खानी चाहिए.
5. मदिरा पान का सेवन भी व्रत में ना करें.
6. जिन लोगों को गैस या एसिडिटी की समस्या जल्दी होती है, वे व्रत में चाय और कॉफी का सेवन कम करें.

महाशिवरात्रि व्रत के नियम, Mahashivratri Vrat Ke Niyam
1. महाशिवरात्रि (Mahashivratri) के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर जल में काला तिल डालकर स्नान करें व साफ वस्त्र धारण करें. इस दिन काले वस्त्र बिल्कुल भी न पहनें.
2. यह व्रत महाशिवरात्रि से शुरू होकर अगले दिन तक रखा जाता है. यदि आप निर्जला व्रत रखते हैं तो आप को भगवान शिव (Lord Shiva) का विशेष आर्शीवाद प्राप्त होगा. अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो आप एक समय भोजन कर सकते हैं.
3. इस दिन भगवान शिव का पूजन करने से पहले नंदी की पूजा अवश्य करें. इसके बाद भगवान शिव को पंचामृत से स्नान कराएं. जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर सम्मिलित हो. पंचामृत से स्नान कराने के बाद भगवान शिव को गंगाजल से स्नान कराएं.
4. इसके बाद भगवान शिव को धूप दिखाएं और इसके बाद उन पर बेलपत्र, फूल, भांग, धतुरा आदि चढ़ाएं. भगवान शिव को भागं, धतुरा और बेलपत्र अति प्रिय हैं.
5. यह सब चढ़ाने के बाद भगवान शिव को बेर और अन्य फल फल अवश्य चढ़ाएं और भगवान शिव के मंत्र ऊं नम: शिवाय का वहीं बैठकर जाप करें.

महाशिवरात्रि महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी पावन रात्रि को भगवान शिव ने संरक्षण और विनाश का सृजन किया था और इसी दिन शिव-पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था. शिव और आदि शक्ति के मिलन की रात को ही शिवरात्रि कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि की रात आध्यात्मिक शक्तियां जागृत होती हैं. माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन विधि-विधान से व्रत रखने वालों को धन, सौभाग्य, समृद्धि और संतान की प्राप्ति होती है. इस पर्व पर भगवान शिव का पूजन और व्रत से सभी रोग और शारीरिक दोष समाप्त हो जाते हैं.

महाशिवरात्रि कथा
महाशिवरात्रि को लेकर एक या दो नहीं बल्कि हिंदू पुराणों में कई कथाएं प्रचलित हैं.
कथा 1- समुद्र मंथन के दौरान जब देवतागण एवं असुर पक्ष अमृत-प्राप्ति के लिए मंथन कर रहे थे, तभी समुद्र में से कालकूट नामक भयंकर विष निकला. देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव ने भयंकर विष को अपने शंख में भरा और भगवान विष्णु का स्मरण कर उसे पी गए. भगवान विष्णु अपने भक्तों के संकट हर लेते हैं. उन्होंने उस विष को शिवजी के कंठ (गले) में ही रोक कर उसका प्रभाव समाप्त कर दिया. विष के कारण भगवान शिव का कंठ नीला पड़ गया और वे संसार में नीलंकठ के नाम से प्रसिद्ध हुए.

पौराणिक कथा 2- शिव पुराण में एक अन्य कथा के अनुसार एक बार ब्रह्माजी व विष्णुजी में विवाद छिड़ गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है. ब्रह्माजी सृष्टि के रचयिता होने के कारण श्रेष्ठ होने का दावा कर रहे थे और भगवान विष्णु पूरी सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में स्वयं को श्रेष्ठ कह रहे थे. तभी वहां एक विराट लिंग प्रकट हुआ. दोनों देवताओं ने सहमति से यह निश्चय किया गया कि जो इस लिंग के छोर का पहले पता लगाएगा उसे ही श्रेष्ठ माना जाएगा

अत: दोनों विपरीत दिशा में शिवलिंग की छोर ढूढंने निकले. छोर न मिलने के कारण विष्णुजी लौट आए. ब्रह्मा जी भी सफल नहीं हुए परंतु उन्होंने आकर विष्णुजी से कहा कि वे छोर तक पहुंच गए थे. उन्होंने केतकी के फूल को इस बात का साक्षी बताया. ब्रह्मा जी के असत्य कहने पर स्वयं शिव वहां प्रकट हुए और उन्होंने ब्रह्माजी की एक सिर काट दिया, और केतकी के फूल को श्राप दिया कि शिव जी की पूजा में कभी भी केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं होगा. चूंकि यह फाल्गुन के महीने का 14 वां दिन था जिस दिन शिव ने पहली बार खुद को लिंग रूप में प्रकट किया था. इस दिन को बहुत ही शुभ और विशेष माना जाता है और महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है. इस दिन शिव की पूजा करने से उस व्यक्ति को सुख और समृद्धि प्राप्त होती है.

लोक कथा 3- एक पौराणिक कथा के अनुसार एक आदमी जो शिव का परम भक्त था, एक बार जंगल गया, और खो गया. बहुत रात हो चुकी थी इसीलिए उसे घर जाने का रास्ता नहीं मिल रहा था. क्योंकि वह जंगल में काफी अंदर चला गया था इसलिए जानवरों के डर से वह एक पेड़ पर चढ़ गया. लेकिन उसे डर था कि अगर वह सो गया तो वह पेड़ से गिर जाएगा और जानवर उसे खा जाएंगे. इसलिए जागते रहने के लिए वह रात भर शिवजी नाम लेके पत्तियां तोड़ के गिरता रहा. जब सुबह हुई तो उसने देखा कि उसने रात में हजार पत्तियां तोड़ कर शिव लिंग पर गिराई हैं, और जिस पेड़ की पत्तियां वह तोड़ रहा था वह बेल का पेड़ था. अनजाने में वह रात भर शिव की पूजा कर रहा था जिससे खुश हो कर शिव ने उसे आशीर्वाद दिया. यह कहानी महाशिवरात्रि को उन लोगों को सुनाई जाती है जो व्रत रखते हैं. और रात शिव जी पर चढ़ाया गया प्रसाद खा कर अपना व्रत तोड़ते हैं.

Lord Shiv Aarti in Hindi, शिवजी की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा,

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा..ॐ जय शिव ओंकारा..

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे,

हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे..ॐ जय शिव ओंकारा..

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे,

त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे..ॐ जय शिव ओंकारा..

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी,

त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी..ॐ जय शिव ओंकारा..

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे,

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे..ॐ जय शिव ओंकारा..

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी,

सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी..ॐ जय शिव ओंकारा..

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका,

मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे..ॐ जय शिव ओंकारा..

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा,

पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा..ॐ जय शिव ओंकारा..

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा,

भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा..ॐ जय शिव ओंकारा..

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला,

शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला..ॐ जय शिव ओंकारा..

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी,

नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी..ॐ जय शिव ओंकारा..

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे,

कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे..ॐ जय शिव ओंकारा..

ये भी पढ़े –

  1. शंकर जी, भगवान शिव की पूजा विधि, Shiv Pujan, भगवान शिव जी को प्रसन्न कैसे करें, शिव जी की कथा, शिव पूजन सामग्री, शिव पूजा के दौरान पहने जाने वाले वस्त्र.
  2. सोमवार व्रत कैसे करें, सोमवार व्रत पूजन विधि नियम कथा आरती, प्रति सोमवार व्रत विधि, सोमवार व्रत के नियम, सोमवार व्रत का उद्यापन कैसे करें.
  3. 16 सोमवार व्रत विधि, 16 Somvar Vrat Vidhi In Hindi, 16 सोमवार व्रत कब से शुरू करें, सोलह सोमवार व्रत कथा आरती और उद्द्यापन, 16 Somvar Vrat Kab Se Shuru Kare.
  4. मंगलवार व्रत के नियम, Mangalvar Vrat Ke Niyam, मंगलवार व्रत विधि विधान, मंगलवार व्रत का खाना, मंगलवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं, मंगलवार का व्रत.
  5. बुधवार व्रत विधि विधान, बुधवार का व्रत कैसे किया जाता है, बुधवार व्रत कथा आरती, बुधवार व्रत उद्यापन विधि, बुधवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं.
  6. गुरुवार बृहस्पतिवार वीरवार व्रत विधि, वीरवार की व्रत कथा आरती, गुरुवार व्रत कथा आरती, गुरुवार का उद्यापन कब करना चाहिए, बृहस्पतिवार व्रत कथा उद्यापन.
  7. लक्ष्मी पूजा , शुक्रवार वैभव लक्ष्मी व्रत विधि, वैभव लक्ष्मी पूजा विधि, वैभव लक्ष्मी व्रत कथा, वैभव लक्ष्मी की आरती, वैभव लक्ष्मी व्रत कैसे करें, वैभव लक्ष्मी व्रत फल.
  8. संतोषी माता व्रत विधि , शुक्रवार व्रत विधि , शुक्रवार व्रत कथा आरती, संतोषी माता व्रत कथा, संतोषी माता की आरती, मां संतोषी का व्रत कैसे करें.
  9. शनिवार व्रत पूजा विधि, शनिवार के व्रत का उद्यापन, शनिवार के कितने व्रत करना चाहिए, शनिवार व्रत के लाभ, शनिवार का उद्यापन कैसे होता है.
  10. रविवार व्रत विधि विधान पूजा विधि व्रत कथा आरती, रविवार के कितने व्रत करने चाहिए, रविवार व्रत कब से शुरू करना चाहिए, रविवार के व्रत में क्या खाना चाहिए.
  11. माता पार्वती की पूजा विधि आरती जन्म कथा, Mata Parvati Puja Vidhi Aarti Janm Katha, माता पार्वती की पूजन सामग्री, Maa Parvati Mantra, Parvati Mata Mantra.
  12. बीकासूल कैप्सूल खाने से क्या फायदे होते हैं, बिकासुल कैप्सूल के लाभ, Becosules Capsules Uses in Hindi, बेकासूल, बीकोस्यूल्स कैप्सूल.
  13. जिम करने के फायदे और नुकसान, Gym Karne Ke Fayde, जिम जाने से पहले क्या खाएं, Gym Jane Ke Fayde, जिम से नुकसान, जिम जाने के नुकसान.
  14. मोटापा कम करने के लिए डाइट चार्ट, वजन घटाने के लिए डाइट चार्ट, बाबा रामदेव वेट लॉस डाइट चार्ट इन हिंदी, वेट लॉस डाइट चार्ट.
  15. बच्चों के नये नाम की लिस्ट, बेबी नाम लिस्ट, बच्चों के नाम की लिस्ट, हिंदी नाम लिस्ट, बच्चों के प्रभावशाली नाम, हिन्दू बेबी नाम, हिन्दू नाम लिस्ट.
  16. रेखा की जीवनी , रेखा की बायोग्राफी, रेखा की फिल्में, रेखा का करियर, रेखा की शादी, Rekha Ki Jivani, Rekha Biography In Hindi, Rekha Films, Rekha Career.
  17. प्यार का सही अर्थ क्या होता है, Pyar Kya Hota Hai, Pyar Kya Hai, प्यार क्या होता है, प्यार क्या है, Pyaar Kya Hai, Pyar Ka Matlab Kya Hota Hai, Love Kya Hota Hai.
  18. शराब छुड़ाने की आयुर्वेदिक दवा , होम्योपैथी में शराब छुड़ाने की दवा, शराब छुड़ाने के लिए घरेलू नुस्खे , शराब छुड़ाने का मंत्र , शराब छुड़ाने के लिए योग.
  19. ज्यादा नींद आने की वजह, Jyada Nind Kyon Aati Hai, ज्यादा नींद आना के कारण, ज्यादा नींद आना, शरीर में सुस्ती, शरीर में थकावट.
  20. भगवान राम के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान राम के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान राम के नाम, भगवान राम से बेबी बॉय नेम्स, राम जी के नाम पर लड़के का नाम.
  21. भगवान शिव के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान शिव के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान शिव के नाम, शिव जी के नाम पर लड़के का नाम.

2021 में महाशिवरात्रि कब है, महाशिवरात्रि व्रत 2021 पूजा मुहूर्त, 11 मार्च 2021 महाशिवरात्रि, महाशिवरात्रि 2021 पूजा विधि, महाशिवरात्रि का मंत्र, महाशिवरात्रि का महत्व, महाशिवरात्रि कथा- आरती, महाशिवरात्रि व्रत में क्या खाएं, क्या नहीं खाएं, Mahashivratri Vrat 2021 Puja Muhurat, Mahashivratri Puja 2021 Vidhi, Mantra, Mahashivratri Katha, Aarti, Mahashivratri Vrat Mein Kya Khana Chahiye, Vrat Mein Kya Nhi Khana Chahiye

Mahashivratri-Vrat-vidhi

महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है, महाशिवरात्रि व्रत विधि, महाशिवरात्रि पूजा विधि, शिव अभिषेक विधि, महाशिवरात्रि मंत्र, महाशिवरात्रि कथा, आरती, महत्व, महाशिवरात्रि व्रत में क्या खाना चाहिए, Mahashivratri Kyo Manayi Jati Hai, Mahashivratri Vrat Puja Vidhi, Shiv Abhishek Vidhi, Mahashivratri Mantra, Mahashivratri Katha, Aarti, Mahashivratri Vrat Mein Kya Khana Chahiye, Mahashivratri Ka Mahatva

महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है, महाशिवरात्रि व्रत विधि, महाशिवरात्रि पूजन विधि, शिव अभिषेक विधि, महाशिवरात्रि मंत्र, महाशिवरात्रि कथा-आरती, महत्व, महाशिवरात्रि व्रत में क्या खाना चाहिए, Mahashivratri Kyo Manayi Jati Hai, Mahashivratri Vrat Puja Vidhi, Shiv Abhishek Vidhi, Mahashivratri Mantra, Mahashivratri Katha, Aarti, Mahashivratri Vrat Mein Kya Khana Chahiye, Mahashivratri Vrat Mein Kya Nhi Khana Chahiye, Mahashivratri Ka Mahatva, महाशिवरात्रि व्रत के नियम, Mahashivratri Vrat Ke Niyam

महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है, महाशिवरात्रि व्रत विधि
वर्ष में आने वाली 12 शिवरात्रियों में से, महाशिवरात्री सबसे पवित्र पर्व हैं. महाशिवरात्रि त्योहार शिवरात्रि या शिव की महान रात के रूप में भी लोकप्रिय है. अमावस्यान्त पंचांग (दक्षिण भारतीय पंचांग) के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है. जबकि पूर्णिमान्त पंचांग (उत्तर भारतीय पंचांग) के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को यह पर्व मानाया जाता है. हालांकि पूर्णिमान्त व अमावस्यान्त दोनों ही पंचांगों के अनुसार महाशिवरात्रि (Mahashivratri) एक ही दिन पड़ती है. इस दिन शिवलिंग के रुद्राभिषेक का खास महत्व होता है. महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु कावड़ के जरिए गंगाजल भी लेकर आते हैं जिससे भगवान शिव को स्नान करवाया जाता हैं. माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन विधि-विधान से व्रत रखने वालों को धन, सौभाग्य, समृद्धि, संतान और आरोग्य की प्राप्ति होती है.

क्‍यों मनाई जाती है शिवरात्रि?
1- शिवरात्रि मनाए जाने को लेकर तीन मान्‍यताएं प्रचलित हैं. एक पौराणिक मान्‍यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही शिव जी पहली बार प्रकट हुए थे. मान्‍यता है कि शिव जी अग्नि ज्‍योर्तिलिंग के रूप में प्रकट हु थे, जिसका न आदि था और न ही अंत. कहते हैं कि इस शिवलिंग के बारे में जानने के लिए सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने हंस का रूप धारण किया और उसके ऊपरी भाग तक जाने की कोशिश करने लगे, लेकिन उन्‍हें सफलता नहीं मिली. वहीं, सृष्टि के पालनहार विष्‍णु ने भी वराह रूप धारण कर उस शिवलिंग का आधार ढूंढना शुरू किया लेकिन वो भी असफल रहे.
2- एक अन्‍य पौराणिक मान्‍यता के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन ही विभन्नि 64 जगहों पर शिवलिंग उत्‍पन्न हुए थे. हालांकि 64 में से केवल 12 ज्‍योर्तिलिंगों के बारे में जानकारी उपलब्‍ध. इन्‍हें 12 ज्‍योर्तिलिंग के नाम से जाना जाता है.
3- तीसरी मान्‍यता के अनुसार महाशिवरात्रि की रात को ही भगवान शिव शंकर और माता शक्ति का विवाह संपन्न हुआ था.

 शिव का जलाभिषेक
महाशिवरात्रि के अवसर पर भक्त शिवलिंग की तीन या सात बार परिक्रमा करें और फिर शिवलिंग (शिव) का अभिषेक करें. भगवान शिव का अभिषेक अनेकों प्रकार से किया जाता है. जलाभिषेक(जल से) और दुग्‍धाभिषेक (दूध से). मिट्टी या तांबे के लोटे में पानी या दूध भरकर ऊपर से बेलपत्र, आक-धतूरे के फूल, चावल, शहद, दूध, दही, शक्कर आदि डालकर शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए अर्थात् अभिषेक करना चाहिए. अगर आस-पास कोई शिव मंदिर नहीं है, तो घर में ही मिट्टी का शिवलिंग बनाकर उनका पूजन करें. ध्यान रखें कि अभिषेक में तुलसी के पत्ते, हल्दी, चंपा और केतकी के फूल का प्रयोग नहीं किया जाता है.

पूजन सामग्री
महाशिवरात्रि के व्रत से एक दिन पहले ही पूजन सामग्री एकत्रित कर लें, जो इस प्रकार है: शमी के पत्ते, सुगंधित पुष्‍प, बेल पत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें, तुलसी दल, गाय का कच्चा दूध, गन्‍ने का रस, दही, शुद्ध देसी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, कपूर, धूप, दीप, रूई, चंदन, पंच फल, पंच मेवा, पंच रस, इत्र, रोली, मौली, जनेऊ, पंच मिष्‍ठान, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री, दक्षिणा, पूजा के बर्तन आदि.

महाशिवरात्रि की पूजन विधि, महाशिवरात्रि व्रत पूजा विधि,
1. महाशिवरात्रि के दिन सुबह-सवेरे उठकर स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें और व्रत का संकल्‍प लें.
2. इसके बाद शिव मंदिर जाएं या घर के मंदिर में ही शिवलिंग पर जल चढ़ाएं.
3. जल चढ़ाने के लिए सबसे पहले तांबे के एक लोटे में गंगाजल लें. अगर ज्‍यादा गंगाजल न हो तो सादे पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाएं.
4. अब लोटे में चावल और सफेद चंदन मिलाएं और ऊं नम: शिवाय बोलते हुए शिवलिंग पर जल चढ़ाएं.
5. जल चढ़ाने के बाद चावल, बेलपत्र, सुगंधित पुष्‍प, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें, तुलसी दल, गाय का कच्‍चा दूध, गन्‍ने का रस, दही, शुद्ध देसी घी, शहद, पंच फल, पंच मेवा, पंच रस, इत्र, मौली, जनेऊ और पंच मिष्‍ठान एक-एक कर चढ़ाएं.
6. अब शमी के पत्ते चढ़ाते हुए ये मंत्र बोलें:
अमंगलानां च शमनीं शमनीं दुष्कृतस्य च।
दु:स्वप्रनाशिनीं धन्यां प्रपद्येहं शमीं शुभाम्।।
शमी के पत्ते चढ़ाने के बाद शिवजी को धूप और दीपक दिखाएं.
7. महाशिवरात्रि के दिन शिवपुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र या शिव के पंचाक्षर मंत्र ॐ नमः शिवाय का जाप करना चाहिए.
8. फिर कर्पूर से आरती कर प्रसाद बांटें.
9. शिवरात्रि के दिन रात्रि जागरण करना फलदाई माना जाता है.
10. शिवरात्रि का पूजन निशीथ काल (निशिता काल) में करना सर्वश्रेष्ठ रहता है. रात्रि का आठवां मुहूर्त निशीथ काल कहलाता है. निशिता काल वह समय है जब भगवान शिव लिंग स्वरुप में पृथ्वी पर अवतरित हुए थे. हालांकि भक्त रात्रि के चारों प्रहरों में से किसी भी एक प्रहर में सच्‍ची श्रद्धा भाव से शिव पूजन कर सकते हैं.
11. इस खास दिन अगर आप भोलेबाबा को मुर्दे की भस्म लगाते हैं तो वह और भी प्रसन्न होते हैं.

महाशिवरात्रि पूजा में छह वस्तुओं को अवश्य शामिल करें
1. शिव लिंग का पानी, दूध, शहद और बेर या बेल के पत्तो के साथ अभिषेक, जो आत्मा की शुद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं.
2. सिंदूर का पेस्ट स्नान के बाद शिव लिंग को लगाया जाता है. यह पुण्य का प्रतिनिधित्व करता है.
3. फल, जो दीर्घायु और इच्छाओं की संतुष्टि को दर्शाते हैं.
4. जलती धूप, धन, उपज (अनाज).
5. दीपक जो ज्ञान की प्राप्ति के लिए अनुकूल है.
6. पान के पत्ते जो सांसारिक सुखों के साथ संतोष अंकन करते हैं.

महाशिवरात्रि के 4 प्रहर के 4 मंत्र
1. महाशिवरात्रि के प्रथम प्रहर में संकल्प करके शिवलिंग को दूध से स्नान करवाकर ॐ हीं ईशानाय नम: का जाप करना चाहिए.
2. महाशिवरात्रि के द्वितीय प्रहर में शिवलिंग को दधि (दही) से स्नान करवाकर ॐ हीं अधोराय नम: का जाप करें.
3. महाशिवरात्रि के तृतीय प्रहर में शिवलिंग को घृत से स्नान करवाकर ॐ हीं वामदेवाय नम: का जाप करें.
4. महाशिवरात्रि के चतुर्थ प्रहर में शिवलिंग को मधु (शहद) से स्नान करवाकर ॐ हीं सद्योजाताय नम: मंत्र का जाप करना करें.

महामृत्युंजय मंत्र, संजीवनी मंत्र, त्रयंबकम मंत्र (Mahamrityunjay Mantra)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
महाशिवारात्रि व्रत में क्या खाना चाहिए
महाशिवारात्रि के व्रत में नमक का उपयोग नहीं करते हैं. हालांकि सेंधा नमक आप अपने खाने में डाल सकते हैं. व्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए अनार या संतरे आदि के जूस पी सकते हैं.ज्यादा से ज्यादा से पानी पीएं, ताकि आपको डिहाड्रेशन जैसी समस्या का सामना न करना पड़े. फलाहार में सेब, संतरा, पपीता, केला और खीरा आदि खा सकते हैं. इसके अलावा आलू फ्राइ, मखाना और मूंगफली को हल्के घी में फ्राई करके, दही आदि में सेंधा नमक और काली मिर्च मिला कर खा सकते हैं. इस व्रत में आप साबुदाने की खिचड़ी या पापड़, कुट्टू के आटे का खाना आदि का सेवन कर सकते हैं. मीठे में आप गाजर या लौकी की खीर आदि चीजें खा सकते हैं.

महाशिवारात्रि व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए
शिवरात्रि के व्रत के खाने में साधारण नमक का इस्तेमाल ना करें. व्रत में सेंधा नमक ही खाएं. महाशिवारात्रि के व्रत में अनाज का सेवन न करें. नॉनवेज, अंडा, प्याज-लहसुन से बनी चीजें, मदिरा पान का सेवन भी व्रत में ना करें. व्रत में बनाया जाने वाला खाना पूरी तरह सात्विक होता है. इसके अलावा जिन लोगों को गैस या एसिडिटी की समस्या जल्दी होती है, वे व्रत में चाय और कॉफी का सेवन कम करें.
महाशिवरात्रि व्रत का महत्व  , Mahashivratri Vrat Ka Mahatva
शिव भक्‍त साल भर अपने आराध्‍य भोले भंडारी की विशेष आराधना के लिए महाशिवरात्रि की प्रतीक्षा करते हैं. इस दिन शिवालयों में शिवलिंग पर जल, दूध और बेल पत्र चढ़ाकर भक्‍त शिव शंकर को प्रसन्‍न करने की कोशिश करते हैं. मान्‍यता है कि महाशिवरात्रि के दिन जो भी भक्‍त सच्‍चे मन से शिविलंग का अभिषेक या जल चढ़ाते हैं उन्‍हें महादेव की विशेष कृपा मिलती है. कहते हैं कि शिव इतने भोले हैं कि अगर कोई अनायास भी शिवलिंग की पूजा कर दे तो भी उसे शिव कृपा प्राप्‍त हो जाती है. यही कारण है कि भगवान शिव शंकर को भोलेनाथ कहा गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन शिवरात्रि का व्रत कुंवारी कन्याओं के लिए श्रेष्ठ माना गया है. यह व्रत करने से उन्हें मनचाहा वर प्राप्त होता है. उत्तर भारत के प्रसिद्ध शिव मंदिरों, काशी विश्वनाथ व बद्रीनाथ धाम में इस दिन विशेष पूजा पाठ और दर्शन का आयोजन होता है. बड़ी संख्या में यहां भक्त दर्शन करते हैं.

महाशिवरात्रि व्रत के नियम (Mahashivratri Vrat Ke Niyam)
1- महाशिवरात्रि (Mahashivratri) के दिन साधक को सबसे पहले सूर्योदय से पूर्व उठकर जल में काले तिल डालकर स्नान करना चाहिए और इसके बाद साफ वस्त्र धारण नहीं करने चाहिए. लेकिन आपको इस दिन काले वस्त्र बिल्कुल भी धारण नहीं करने चाहिए.
2- यह व्रत महाशिवरात्रि से शुरू होकर अगले दिन तक रखा जाता है. यदि आप निर्जला व्रत रखते हैं तो आप को भगवान शिव (Lord Shiva) का विशेष आर्शीवाद प्राप्त होगा. अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो आप एक समय भोजन कर सकते हैं.
3- इस दिन भगवान शिव का पूजन करने से पहले नंदी की पूजा अवश्य करें. इसके बाद भगवान शिव को पंचामृत से स्नान कराएं. जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर सम्मिलित हो. पंचामृत से स्नान कराने के बाद भगवान शिव को गंगाजल से स्नान कराएं.
4- इसके बाद भगवान शिव को धूप दिखाएं और इसके बाद उन पर बेलपत्र, फूल, भांग, धतुरा आदि चढ़ाएं. भगवान शिव को भागं, धतुरा और बेलपत्र अति प्रिय हैं.
5- यह सब चढ़ाने के बाद भगवान शिव को बेर और अन्य फल फल अवश्य चढ़ाएं और भगवान शिव के मंत्र ऊं नम: शिवाय का वहीं बैठकर जाप करें.

महाशिवरात्रि की व्रत कथा
पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार प्राचीन काल में चित्रभानु नाम का एक शिकारी था. जानवरों की हत्या करके वह अपने परिवार को पालता था. वह एक साहूकार का कर्जदार था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका. क्रोधित साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लि.। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी. शिकारी ध्यानमग्न होकर शिव-संबंधी धार्मिक बातें सुनता रहा. चतुर्दशी को उसने शिवरात्रि व्रत की कथा भी सुनी. शाम होते ही साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया और ऋण चुकाने के विषय में बात की. शिकारी अगले दिन सारा ऋण लौटा देने का वचन देकर बंधन से छूट गया. अपनी दिनचर्या की भांति वह जंगल में शिकार के लिए निकला, लेकिन दिनभर बंदी गृह में रहने के कारण भूख-प्यास से व्याकुल था. शिकार खोजता हुआ वह बहुत दूर निकल गया. जब अंधकार हो गया तो उसने विचार किया कि रात जंगल में ही बितानी पड़ेगी. वह एक तालाब के किनारे एक बेल के पेड़ पर चढ़ कर रात बीतने का इंतजार करने लगा.बिल्व वृक्ष के नीचे शिवलिंग था जो बिल्वपत्रों से ढंका हुआ था. शिकारी को उसका पता न चला. पड़ाव बनाते समय उसने जो टहनियां तोड़ीं, वे संयोग से शिवलिंग पर गिरती चली गई. इस प्रकार दिनभर भूखे-प्यासे शिकारी का व्रत भी हो गया और शिवलिंग पर बिल्वपत्र भी चढ़ गए. एक पहर रात्रि बीत जाने पर एक गर्भिणी हिरणी तालाब पर पानी पीने पहुंची.

शिकारी ने धनुष पर तीर चढ़ाकर ज्यों ही प्रत्यंचा खींची, हिरणी बोली, मैं गर्भिणी हूं. शीघ्र ही प्रसव करुंगी. तुम एक साथ दो जीवों की हत्या करोगे, जो ठीक नहीं है. मैं बच्चे को जन्म देकर शीघ्र ही तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत हो जाऊंगी, तब मार लेना. शिकारी ने प्रत्यंचा ढीली कर दी और हिरणी जंगली झाड़ियों में लुप्त हो गई. प्रत्यंचा चढ़ाने तथा ढीली करने के वक्त कुछ बिल्व पत्र अनायास ही टूट कर शिवलिंग पर गिर गए. इस प्रकार उससे अनजाने में ही प्रथम प्रहर का पूजन भी सम्पन्न हो गया. कुछ ही देर बाद एक और हिरणी उधर से निकली. शिकारी की प्रसन्नता का ठिकाना न रहा. समीप आने पर उसने धनुष पर बाण चढ़ाया. तब उसे देख हिरणी ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया, हे शिकारी! मैं थोड़ी देर पहले ऋतु से निवृत्त हुई हूं. कामातुर विरहिणी हूं. अपने प्रिय की खोज में भटक रही हूं. मैं अपने पति से मिलकर शीघ्र ही तुम्हारे पास आ जाऊंगी. शिकारी ने उसे भी जाने दिया. दो बार शिकार को खोकर उसका माथा ठनका. वह चिंता में पड़ गया. रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था. इस बार भी धनुष से लग कर कुछ बेलपत्र शिवलिंग पर जा गिरे तथा दूसरे प्रहर का पूजन भी सम्पन्न हो गया.

तभी एक अन्य हिरणी अपने बच्चों के साथ उधर से निकली. शिकारी के लिए यह स्वर्णिम अवसर था. उसने धनुष पर तीर चढ़ाने में देर नहीं लगाई. वह तीर छोड़ने ही वाला था कि हिरणी बोली, हे शिकारी!’ मैं इन बच्चों को इनके पिता के हवाले करके लौट आऊंगी. इस समय मुझे मत मारो. शिकारी हंसा और बोला, सामने आए शिकार को छोड़ दूं, मैं ऐसा मूर्ख नहीं. इससे पहले मैं दो बार अपना शिकार खो चुका हूं. मेरे बच्चे भूख-प्यास से व्यग्र हो रहे होंगे. उत्तर में हिरणी ने फिर कहा, जैसे तुम्हें अपने बच्चों की ममता सता रही है, ठीक वैसे ही मुझे भी. हे शिकारी! मेरा विश्वास करों, मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरंत लौटने की प्रतिज्ञा करती हूं. हिरणी का दीन स्वर सुनकर शिकारी को उस पर दया आ गई. उसने उस मृगी को भी जाने दिया. शिकार के अभाव में तथा भूख-प्यास से व्याकुल शिकारी अनजाने में ही बेल-वृक्ष पर बैठा बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे फेंकता जा रहा था. पौ फटने को हुई तो एक हृष्ट-पुष्ट मृग उसी रास्ते पर आया. शिकारी ने सोच लिया कि इसका शिकार वह अवश्य करेगा. शिकारी की तनी प्रत्यंचा देखकर मृग विनीत स्वर में बोला, हे शिकारी! यदि तुमने मुझसे पूर्व आने वाली तीन मृगियों तथा छोटे-छोटे बच्चों को मार डाला है, तो मुझे भी मारने में विलंब न करो, ताकि मुझे उनके वियोग में एक क्षण भी दुःख न सहना पड़े. मैं उन हिरणियों का पति हूं. यदि तुमने उन्हें जीवनदान दिया है तो मुझे भी कुछ क्षण का जीवन देने की कृपा करो। मैं उनसे मिलकर तुम्हारे समक्ष उपस्थित हो जाऊंगा.

मृग की बात सुनते ही शिकारी के सामने पूरी रात का घटनाचक्र घूम गया, उसने सारी कथा मृग को सुना दी. तब मृग ने कहा, मेरी तीनों पत्नियां जिस प्रकार प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई हैं, मेरी मृत्यु से अपने धर्म का पालन नहीं कर पाएंगी. अतः जैसे तुमने उन्हें विश्वासपात्र मानकर छोड़ा है, वैसे ही मुझे भी जाने दो. मैं उन सबके साथ तुम्हारे सामने शीघ्र ही उपस्थित होता हूं. शिकारी ने उसे भी जाने दिया. इस प्रकार सुबह हो आई. उपवास, रात्रि-जागरण तथा शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ने से अनजाने में ही पर शिवरात्रि की पूजा पूर्ण हो गई. पर अनजाने में ही की हुई पूजन का परिणाम उसे तत्काल मिला. शिकारी का हिंसक हृदय निर्मल हो गया. उसमें भगवद्शक्ति का वास हो गया. थोड़ी ही देर बाद वह मृग सपरिवार शिकारी के समक्ष उपस्थित हो गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके. किंतु जंगली पशुओं की ऐसी सत्यता, सात्विकता एवं सामूहिक प्रेमभावना देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई. उसने मृग परिवार को जीवनदान दे दिया. अनजाने में शिवरात्रि के व्रत का पालन करने पर भी शिकारी को मोक्ष की प्राप्ति हुई. जब मृत्यु काल में यमदूत उसके जीव को ले जाने आए तो शिवगणों ने उन्हें वापस भेज दिया तथा शिकारी को शिवलोक ले गए. शिव जी की कृपा से ही अपने इस जन्म में राजा चित्रभानु अपने पिछले जन्म को याद रख पाए तथा महाशिवरात्रि के महत्व को जान कर उसका अगले जन्म में भी पालन कर पाए.


शिवजी की आरती, Lord Shiv Aarti in Hindi

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवान्छित फल पावे॥
ॐ जय शिव ओंकारा॥

ये भी पढ़े –

  1. शंकर जी, भगवान शिव की पूजा विधि, Shiv Pujan, भगवान शिव जी को प्रसन्न कैसे करें, शिव जी की कथा, शिव पूजन सामग्री, शिव पूजा के दौरान पहने जाने वाले वस्त्र.
  2. सोमवार व्रत कैसे करें, सोमवार व्रत पूजन विधि नियम कथा आरती, प्रति सोमवार व्रत विधि, सोमवार व्रत के नियम, सोमवार व्रत का उद्यापन कैसे करें.
  3. 16 सोमवार व्रत विधि, 16 Somvar Vrat Vidhi In Hindi, 16 सोमवार व्रत कब से शुरू करें, सोलह सोमवार व्रत कथा आरती और उद्द्यापन, 16 Somvar Vrat Kab Se Shuru Kare.
  4. मंगलवार व्रत के नियम, Mangalvar Vrat Ke Niyam, मंगलवार व्रत विधि विधान, मंगलवार व्रत का खाना, मंगलवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं, मंगलवार का व्रत.
  5. बुधवार व्रत विधि विधान, बुधवार का व्रत कैसे किया जाता है, बुधवार व्रत कथा आरती, बुधवार व्रत उद्यापन विधि, बुधवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं.
  6. गुरुवार बृहस्पतिवार वीरवार व्रत विधि, वीरवार की व्रत कथा आरती, गुरुवार व्रत कथा आरती, गुरुवार का उद्यापन कब करना चाहिए, बृहस्पतिवार व्रत कथा उद्यापन.
  7. लक्ष्मी पूजा , शुक्रवार वैभव लक्ष्मी व्रत विधि, वैभव लक्ष्मी पूजा विधि, वैभव लक्ष्मी व्रत कथा, वैभव लक्ष्मी की आरती, वैभव लक्ष्मी व्रत कैसे करें, वैभव लक्ष्मी व्रत फल.
  8. संतोषी माता व्रत विधि , शुक्रवार व्रत विधि , शुक्रवार व्रत कथा आरती, संतोषी माता व्रत कथा, संतोषी माता की आरती, मां संतोषी का व्रत कैसे करें.
  9. शनिवार व्रत पूजा विधि, शनिवार के व्रत का उद्यापन, शनिवार के कितने व्रत करना चाहिए, शनिवार व्रत के लाभ, शनिवार का उद्यापन कैसे होता है.
  10. रविवार व्रत विधि विधान पूजा विधि व्रत कथा आरती, रविवार के कितने व्रत करने चाहिए, रविवार व्रत कब से शुरू करना चाहिए, रविवार के व्रत में क्या खाना चाहिए.
  11. माता पार्वती की पूजा विधि आरती जन्म कथा, Mata Parvati Puja Vidhi Aarti Janm Katha, माता पार्वती की पूजन सामग्री, Maa Parvati Mantra, Parvati Mata Mantra.
  12. बीकासूल कैप्सूल खाने से क्या फायदे होते हैं, बिकासुल कैप्सूल के लाभ, Becosules Capsules Uses in Hindi, बेकासूल, बीकोस्यूल्स कैप्सूल.
  13. जिम करने के फायदे और नुकसान, Gym Karne Ke Fayde, जिम जाने से पहले क्या खाएं, Gym Jane Ke Fayde, जिम से नुकसान, जिम जाने के नुकसान.
  14. मोटापा कम करने के लिए डाइट चार्ट, वजन घटाने के लिए डाइट चार्ट, बाबा रामदेव वेट लॉस डाइट चार्ट इन हिंदी, वेट लॉस डाइट चार्ट.
  15. बच्चों के नये नाम की लिस्ट, बेबी नाम लिस्ट, बच्चों के नाम की लिस्ट, हिंदी नाम लिस्ट, बच्चों के प्रभावशाली नाम, हिन्दू बेबी नाम, हिन्दू नाम लिस्ट.
  16. रेखा की जीवनी , रेखा की बायोग्राफी, रेखा की फिल्में, रेखा का करियर, रेखा की शादी, Rekha Ki Jivani, Rekha Biography In Hindi, Rekha Films, Rekha Career.
  17. प्यार का सही अर्थ क्या होता है, Pyar Kya Hota Hai, Pyar Kya Hai, प्यार क्या होता है, प्यार क्या है, Pyaar Kya Hai, Pyar Ka Matlab Kya Hota Hai, Love Kya Hota Hai.
  18. शराब छुड़ाने की आयुर्वेदिक दवा , होम्योपैथी में शराब छुड़ाने की दवा, शराब छुड़ाने के लिए घरेलू नुस्खे , शराब छुड़ाने का मंत्र , शराब छुड़ाने के लिए योग.
  19. ज्यादा नींद आने की वजह, Jyada Nind Kyon Aati Hai, ज्यादा नींद आना के कारण, ज्यादा नींद आना, शरीर में सुस्ती, शरीर में थकावट.
  20. भगवान राम के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान राम के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान राम के नाम, भगवान राम से बेबी बॉय नेम्स, राम जी के नाम पर लड़के का नाम.
  21. भगवान शिव के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान शिव के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान शिव के नाम, शिव जी के नाम पर लड़के का नाम.

महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है, महाशिवरात्रि व्रत विधि, महाशिवरात्रि पूजन विधि, शिव अभिषेक विधि, महाशिवरात्रि मंत्र, महाशिवरात्रि कथा-आरती, महत्व, महाशिवरात्रि व्रत में क्या खाना चाहिए, Mahashivratri Kyo Manayi Jati Hai, Mahashivratri Vrat Puja Vidhi, Shiv Abhishek Vidhi, Mahashivratri Mantra, Mahashivratri Katha, Aarti, Mahashivratri Vrat Mein Kya Khana Chahiye, Mahashivratri Vrat Mein Kya Nhi Khana Chahiye

Lalita Jayanti Puja Vidhi

ललिता जयंती की पूजा विधि, Lalita Jayanti Puja Vidhi, माता ललिता पूजन विधि, ललिता जयंती मंत्र, ललिता जयंती महत्व, ललिता जयंती की कथा, माता ललिता की आरती, ललिता जयंती आरती, Lalita Jayanti Mantra, Lalita Jayanti Katha In Hindi, Lalita Jayanti Aaarti, Lalita Jayanti Importance In Hindi ललिता माता चालीसा , Lalita Mata Ki Chalisa

ललिता जयंती की पूजा विधि, Lalita Jayanti Puja Vidhi, माता ललिता पूजन विधि, ललिता जयंती मंत्र, ललिता जयंती महत्व, ललिता जयंती की कथा, माता ललिता की आरती, ललिता जयंती आरती, Lalita Jayanti Mantra, Lalita Jayanti Katha In Hindi, Lalita Jayanti Aaarti, Lalita Jayanti Importance In Hindi ललिता माता चालीसा , Lalita Mata Ki Chalisa

ललिता जयंती, Lalita Jayanti
ललिता जंयती प्रत्येक साल माघ मास की पूर्णिमा तिथि के दिन मनाई जाती है. इस दिन मां ललिता की आराधना करने से भक्तजनो को मोक्ष की प्राप्ति होती है और व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है. ऐसी मान्यता हैं कि साल में केवल एक बार भी इनकी आराधना सच्ची श्रद्धा से कर ली जाये व्यक्ति का जीवन निहाल हो जाता हैं. जो कोई भी इस दिन मां ललिता की पूजा श्रद्धा भक्ति-भाव सहित करता है तो उसे मां त्रिपुर सुंदरी की कृपा अवश्य प्राप्त होती है और जीवन में हमेशा सुख शांति एवं समृद्धि बनी रहती है . माता ललिता को राजेश्वरी, षोडशी, त्रिपुरा सुंदरी आदि नामों से भी जाना जाता है. आदिशक्ति त्रिपुर सुंदरी मां ललिता दस महाविद्याओं में से एक हैं, ललिता की पूजा उपासना सभी के लिए बहुत ही फलदायक होता है. अगर आप भी मां ललिता की कृपा पाना चाहते हैं तो जान लीजिए ललिता जयंती पर ललिता माता की विशेष पूजा विधि, ललिता जयंती का महत्व, ललिता जयंती की कथा, ललिता माता का मंत्र और ललिता जयंती माता की आरती के बारे में-

मां ललिता की पूजा विधि, ललिता जयंती की पूजा विधि, माता ललिता पूजन विधि, Lalita Jayanti Puja Vidhi, Lalita Mata Pujan Vidhi In Hindi
1. इस दिन यानि मां ललिता जयंती के दिन सूर्यास्त से पहले उठें और सफेद और हरे रंग के वस्त्र धारण करें.
2. इसके बाद एक चौकी लें और उस पर गंगाजल छिड़कें और स्वंय उतर दिशा की और बैठ जाएं फिर चौकी पर सफेद रंग का कपड़ा बिछाएं.
3. चौकी पर कपड़ा बिछाने के बाद मां ललिता की तस्वीर स्थापित करें. यदि आपको मां षोडशी की तस्वीर न मिले तो आप श्री यंत्र भी स्थापित कर सकते हैं.
4. इसके बाद मां ललिता का कुमकुम से तिलक करें और उन्हें अक्षत, फल, फूल, दूध से बना प्रसाद या खीर अर्पित करें.
5. यह सभी चीजें अर्पित करने के बाद मां ललिता की विधिवत पूजा करें और ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः॥ मंत्र का जाप करें.
6. इसके बाद मां ललिता की कथा सुनें या पढ़ें.
7. कथा पढ़ने के बाद मां ललिता की धूप व दीप से आरती उतारें और उन्हें सफेद रंग की मिठाई या खीर का भोग लगाएं.
8. इसके बाद मां ललिता को सफेद रंग की मिठाई या खीर का भोग लगाएं और माता से पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें.
9. पूजा के बाद प्रसाद का नौ वर्ष से छोटी कन्याओं में बांट दें.
10. यदि आपको नौ वर्ष से छोटी कन्याएं न मिलें तो आप यह प्रसाद गाय को खिला दें.
11. दक्षिणमार्गी शाक्तों के मतानुसार देवी ललिता को चण्डी का स्थान प्राप्त है. इनकी पूजा पद्धति देवी चण्डी के समान ही है तथा ललितोपाख्यान, ललितासहस्रनाम, ललितात्रिशती का पाठ किया जाता है.

ललिता माता का मंत्र , Lalita Jayanti Mantra, ललिता माता का मंत्र , Lalita Mata Ka Mantra
त्रिपुर सुंदरी या ललिता माता का मंत्र- दो मंत्र है. रूद्राक्ष माला से दस माला जप कर सकते हैं.
मंत्र 1: ऐ ह्नीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नम:
मंत्र 2: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौ: ॐ ह्रीं श्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौ: ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं नम:

दश महाविद्या – देवी शक्ति के 10 रूप
1. काली (Goddess Kali)
2. तारा (Goddess Tara)
3. षोडशी (Goddess Shodashi)
4. भुवनेश्वरी (Goddess Bhuvaneshvari)
5. भैरवी (Goddess Bhairavi)
6. छिन्नमस्ता (Goddess Chhinnamasta)
7. धूमावती (Goddess Dhumavati)
8. बगलामुखी (Goddess Bagalamukhi)
9. मातङ्गी (Goddess Matangi)
10. कमला (Goddess Kamala)

ललिता जयंती महत्व , Lalita Jayanti Importance , Lalita Jayanti Ka Mahatva
ललिता जंयती के दिन मां ललिता की पूजा – आराधना करने से भक्तजनो को मोक्ष की प्राप्ति होती है और व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है. इनके पूजन से जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति भी होती है. इतना ही नहीं मां ललिता की पूजा करने वाला व्यक्ति को जीवित रहते ही सभी प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है. माता ललिता को राजेश्वरी, षोडशी,त्रिपुरा सुंदरी आदि नामों से भी जाना जाता है. माता ललिता मां पार्वती का ही एक रूप है. इसलिए इनका एक नाम तांत्रिक पार्वती भी है. ललिता जंयती पर कई जगहों पर मेले का आयोजन भी होता है. ललिता जंयती के दिन मां ललिता के मंदिर में भक्तों की भीड़ माता के दर्शनों के लिए उमड़ी रहती है. इस दिन मां ललिता के साथ स्कंदमाता और भगवान शंकर की पूजा भी की जाती है.

ललिता जयंती कथा , माता ललिता की कथा, Lalita Jayanti Story , Lalita Jayanti Ki Katha In Hindi , Mata Lalita Ki Katha, 
पौराणिक कथा के अनुसार देवी ललिता आदि शक्ति का वर्णन देवी पुराण से प्राप्त होता है. नैमिषारण्य में एक बार यज्ञ हो रहा था जहां दक्ष प्रजापति के आने पर सभी देवता गण उनका स्वागत करने के लिए उठे. लेकिन भगवान शंकर वहां होने के बावजूद भी नहीं उठे इसी अपमान का बदला लेने के लिये दक्ष ने अपने यज्ञ में शिवजी को आमंत्रित नही किया. जिसका पता मां सती को चला और वो बिना भगवान शंकर से अनुमति लिये अपने पिता राजा दक्ष के घर पहुंच गई.

उस यज्ञ में अपने पिता के द्वारा भगवान शंकर की निंदा सुनकर और खुद को अपमानित होते देखकर उन्होने उसी अग्नि कुंड में कूदकर अपने अपने प्राणों को त्याग दिया भगवान शिव को इस बात की जानकारी हुई तो तो वह मां सती के प्रेम में व्याकुल हो गए और उन्होने मां सती के शव को कंधे में रखकर इधर उधर उन्मत भाव से घूमना शुरु कर दिया. भगवान शंकर की इस स्थिति से विश्व की सम्पूर्ण व्यवस्था छिन्न भिन्न हो गई ऐसे में विवश होकर अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शन के शव के टुकडे़ टुकडे़ कर दिए.

जिसके बाद मां सती के शव के अंग कटकर गिर गए और उन अंगों से शक्ति विभिन्न प्रकार की आकृतियों से उन स्थानों पर विराजमान हुई और वह शक्तिपीठ स्थल बन गए. महादेव भी उन स्थानों पर भैरव के विभिन्न रुपों में स्थित है.नैमिषारण्य में मां सती का ह्रदय गिरा था.नैमिष एक लिंगधारिणी शक्तिपीठ स्थल है. जहां लिंग स्वरूप में भगवान शिव की पूजा की जाती है और यही मां ललिता देवी का मंदिर भी है. जहां दरवाजे पर ही पंचप्रयाग तीर्थ विद्यमाना है.


ललिता माता आरती, ललिता जयंती आरती

जय शरणं वरणं नमो नम:

श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी,
राजेश्वरी जय नमो नम:..
करुणामयी सकल अघ हारिणी,
अमृत वर्षिणी नमो नम:..

जय शरणं वरणं नमो नम:
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी...,

अशुभ विनाशिनी, सब सुखदायिनी,
खलदल नाशिनी नमो नम:..

भंडासुर वध कारिणी जय मां,
करुणा कलिते नमो नम:..
जय शरणं वरणं नमो नम:
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी...,

भव भय हारिणी कष्ट निवारिणी,
शरण गति दो नमो नम:..

शिव भामिनी साधक मन हारिणी,
आदि शक्ति जय नमो नम:..

जय शरणं वरणं नमो नम:,
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी.....
जय त्रिपुर सुंदरी नमो नम:,
जय राजेश्वरी जय नमो नम:..

जय ललितेश्वरी जय नमो नम:,
जय अमृत वर्षिणी नमो नम:..

जय करुणा कलिते नमो नम:,
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी...,

ललिता माता चालीसा, Lalita Mata Ki Chalisa

।।चौपाई।।
जयति-जयति जय ललिते माता। तव गुण महिमा है विख्याता।।
तू सुन्दरी, त्रिपुरेश्वरी देवी। सुर नर मुनि तेरे पद सेवी।।

तू कल्याणी कष्ट निवारिणी। तू सुख दायिनी, विपदा हारिणी।।
मोह विनाशिनी दैत्य नाशिनी। भक्त भाविनी ज्योति प्रकाशिनी।।

आदि शक्ति श्री विद्या रूपा। चक्र स्वामिनी देह अनूपा।।
हृदय निवासिनी-भक्त तारिणी। नाना कष्ट विपति दल हारिणी।।

दश विद्या है रूप तुम्हारा। श्री चन्द्रेश्वरी नैमिष प्यारा।।
धूमा, बगला, भैरवी, तारा। भुवनेश्वरी, कमला, विस्तारा।।

षोडशी, छिन्न्मस्ता, मातंगी। ललितेशक्ति तुम्हारी संगी।।
ललिते तुम हो ज्योतित भाला। भक्तजनों का काम संभाला।।

भारी संकट जब-जब आए। उनसे तुमने भक्त बचाए।।
जिसने कृपा तुम्हारी पाई। उसकी सब विधि से बन आई।।

संकट दूर करो मां भारी। भक्तजनों को आस तुम्हारी।।
त्रिपुरेश्वरी, शैलजा, भवानी। जय-जय-जय शिव की महारानी।।

योग सिद्धि पावें सब योगी। भोगें भोग महा सुख भोगी।।
कृपा तुम्हारी पाके माता। जीवन सुखमय है बन जाता।।

दुखियों को तुमने अपनाया। महा मूढ़ जो शरण न आया।।
तुमने जिसकी ओर निहारा। मिली उसे संपत्ति, सुख सारा।।

आदि शक्ति जय त्रिपुर प्यारी। महाशक्ति जय-जय, भय हारी।।
कुल योगिनी, कुंडलिनी रूपा। लीला ललिते करें अनूपा।।

महा-महेश्वरी, महाशक्ति दे। त्रिपुर-सुन्दरी सदा भक्ति दे।।
महा महा-नन्दे कल्याणी। मूकों को देती हो वाणी।।

इच्छा-ज्ञान-क्रिया का भागी। होता तब सेवा अनुरागी।।
जो ललिते तेरा गुण गावे। उसे न कोई कष्ट सतावे।।

सर्व मंगले ज्वाला-मालिनी। तुम हो सर्वशक्ति संचालिनी।।
आया मां जो शरण तुम्हारी। विपदा हरी उसी की सारी।।

नामा कर्षिणी, चिंता कर्षिणी। सर्व मोहिनी सब सुख-वर्षिणी।।
महिमा तव सब जग विख्याता। तुम हो दयामयी जग माता।।

सब सौभाग्य दायिनी ललिता। तुम हो सुखदा करुणा कलिता।।
आनंद, सुख, संपत्ति देती हो। कष्ट भयानक हर लेती हो।।

मन से जो जन तुमको ध्यावे। वह तुरंत मन वांछित पावे।।
लक्ष्मी, दुर्गा तुम हो काली। तुम्हीं शारदा चक्र-कपाली।।

मूलाधार, निवासिनी जय-जय। सहस्रार गामिनी मां जय-जय।।
छ: चक्रों को भेदने वाली। करती हो सबकी रखवाली।।

योगी, भोगी, क्रोधी, कामी। सब हैं सेवक सब अनुगामी।।
सबको पार लगाती हो मां। सब पर दया दिखाती हो मां।।

हेमावती, उमा, ब्रह्माणी। भण्डासुर की हृदय विदारिणी।।
सर्व विपति हर, सर्वाधारे। तुमने कुटिल कुपंथी तारे।।

चन्द्र-धारिणी, नैमिश्वासिनी। कृपा करो ललिते अधनाशिनी।।
भक्तजनों को दरस दिखाओ। संशय भय सब शीघ्र मिटाओ।।

जो कोई पढ़े ललिता चालीसा। होवे सुख आनंद अधीसा।।
जिस पर कोई संकट आवे। पाठ करे संकट मिट जावे।।

ध्यान लगा पढ़े इक्कीस बारा। पूर्ण मनोरथ होवे सारा।।
पुत्रहीन संतति सुख पावे। निर्धन धनी बने गुण गावे।।

इस विधि पाठ करे जो कोई। दु:ख बंधन छूटे सुख होई।।
जितेन्द्र चन्द्र भारतीय बतावें। पढ़ें चालीसा तो सुख पावें।।

सबसे लघु उपाय यह जानो। सिद्ध होय मन में जो ठानो।।
ललिता करे हृदय में बासा। सिद्धि देत ललिता चालीसा।।

।।दोहा।।
ललिते मां अब कृपा करो सिद्ध करो सब काम।
श्रद्धा से सिर नाय करे करते तुम्हें प्रणाम।।

ये भी पढ़े –

  1. शंकर जी, भगवान शिव की पूजा विधि, Shiv Pujan, भगवान शिव जी को प्रसन्न कैसे करें, शिव जी की कथा, शिव पूजन सामग्री, शिव पूजा के दौरान पहने जाने वाले वस्त्र.
  2. सोमवार व्रत कैसे करें, सोमवार व्रत पूजन विधि नियम कथा आरती, प्रति सोमवार व्रत विधि, सोमवार व्रत के नियम, सोमवार व्रत का उद्यापन कैसे करें.
  3. 16 सोमवार व्रत विधि, 16 Somvar Vrat Vidhi In Hindi, 16 सोमवार व्रत कब से शुरू करें, सोलह सोमवार व्रत कथा आरती और उद्द्यापन, 16 Somvar Vrat Kab Se Shuru Kare.
  4. मंगलवार व्रत के नियम, Mangalvar Vrat Ke Niyam, मंगलवार व्रत विधि विधान, मंगलवार व्रत का खाना, मंगलवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं, मंगलवार का व्रत.
  5. बुधवार व्रत विधि विधान, बुधवार का व्रत कैसे किया जाता है, बुधवार व्रत कथा आरती, बुधवार व्रत उद्यापन विधि, बुधवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं.
  6. गुरुवार बृहस्पतिवार वीरवार व्रत विधि, वीरवार की व्रत कथा आरती, गुरुवार व्रत कथा आरती, गुरुवार का उद्यापन कब करना चाहिए, बृहस्पतिवार व्रत कथा उद्यापन.
  7. लक्ष्मी पूजा , शुक्रवार वैभव लक्ष्मी व्रत विधि, वैभव लक्ष्मी पूजा विधि, वैभव लक्ष्मी व्रत कथा, वैभव लक्ष्मी की आरती, वैभव लक्ष्मी व्रत कैसे करें, वैभव लक्ष्मी व्रत फल.
  8. संतोषी माता व्रत विधि , शुक्रवार व्रत विधि , शुक्रवार व्रत कथा आरती, संतोषी माता व्रत कथा, संतोषी माता की आरती, मां संतोषी का व्रत कैसे करें.
  9. शनिवार व्रत पूजा विधि, शनिवार के व्रत का उद्यापन, शनिवार के कितने व्रत करना चाहिए, शनिवार व्रत के लाभ, शनिवार का उद्यापन कैसे होता है.
  10. रविवार व्रत विधि विधान पूजा विधि व्रत कथा आरती, रविवार के कितने व्रत करने चाहिए, रविवार व्रत कब से शुरू करना चाहिए, रविवार के व्रत में क्या खाना चाहिए.
  11. माता पार्वती की पूजा विधि आरती जन्म कथा, Mata Parvati Puja Vidhi Aarti Janm Katha, माता पार्वती की पूजन सामग्री, Maa Parvati Mantra, Parvati Mata Mantra.
  12. बीकासूल कैप्सूल खाने से क्या फायदे होते हैं, बिकासुल कैप्सूल के लाभ, Becosules Capsules Uses in Hindi, बेकासूल, बीकोस्यूल्स कैप्सूल.
  13. जिम करने के फायदे और नुकसान, Gym Karne Ke Fayde, जिम जाने से पहले क्या खाएं, Gym Jane Ke Fayde, जिम से नुकसान, जिम जाने के नुकसान.
  14. मोटापा कम करने के लिए डाइट चार्ट, वजन घटाने के लिए डाइट चार्ट, बाबा रामदेव वेट लॉस डाइट चार्ट इन हिंदी, वेट लॉस डाइट चार्ट.
  15. बच्चों के नये नाम की लिस्ट, बेबी नाम लिस्ट, बच्चों के नाम की लिस्ट, हिंदी नाम लिस्ट, बच्चों के प्रभावशाली नाम, हिन्दू बेबी नाम, हिन्दू नाम लिस्ट.
  16. रेखा की जीवनी , रेखा की बायोग्राफी, रेखा की फिल्में, रेखा का करियर, रेखा की शादी, Rekha Ki Jivani, Rekha Biography In Hindi, Rekha Films, Rekha Career.
  17. प्यार का सही अर्थ क्या होता है, Pyar Kya Hota Hai, Pyar Kya Hai, प्यार क्या होता है, प्यार क्या है, Pyaar Kya Hai, Pyar Ka Matlab Kya Hota Hai, Love Kya Hota Hai.
  18. शराब छुड़ाने की आयुर्वेदिक दवा , होम्योपैथी में शराब छुड़ाने की दवा, शराब छुड़ाने के लिए घरेलू नुस्खे , शराब छुड़ाने का मंत्र , शराब छुड़ाने के लिए योग.
  19. ज्यादा नींद आने की वजह, Jyada Nind Kyon Aati Hai, ज्यादा नींद आना के कारण, ज्यादा नींद आना, शरीर में सुस्ती, शरीर में थकावट.
  20. भगवान राम के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान राम के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान राम के नाम, भगवान राम से बेबी बॉय नेम्स, राम जी के नाम पर लड़के का नाम.
  21. भगवान शिव के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान शिव के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान शिव के नाम, शिव जी के नाम पर लड़के का नाम.

ललिता जयंती की पूजा विधि, Lalita Jayanti Puja Vidhi, माता ललिता पूजन विधि, ललिता जयंती मंत्र, ललिता जयंती महत्व, ललिता जयंती की कथा, माता ललिता की आरती, ललिता जयंती आरती, Lalita Jayanti Mantra, Lalita Jayanti Katha In Hindi, Lalita Jayanti Aaarti, Lalita Jayanti Importance In Hindi ललिता माता चालीसा , Lalita Mata Ki Chalisa

Bhishma-Dwadashi-Puja-Vidhi

भीष्म द्वादशी 2021 पूजा मुहूर्त, Bhishma Dwadashi 2021 Puja Muhurat, भीष्म द्वादशी पूजा विधि, भीष्म द्वादशी व्रत विधि, तर्पण विधि, भीष्म द्वादशी का महत्व, भीष्म द्वादशी कथा, भीष्म द्वादशी के दिन क्या करें दान, Bhishma Dwadashi Puja Vidhi, Tarpan Vidhi, Bhishma Dwadashi Vrat Vidhi, Bhishma Dwadashi Katha , Bhishma Dwadashi Mahatva

भीष्म द्वादशी 2021 पूजा मुहूर्त, Bhishma Dwadashi 2021 Puja Muhurat, भीष्म द्वादशी पूजा विधि, भीष्म द्वादशी व्रत विधि, तर्पण विधि, भीष्म द्वादशी का महत्व, भीष्म द्वादशी कथा, भीष्म द्वादशी के दिन क्या करें दान, Bhishma Dwadashi Puja Vidhi, Tarpan Vidhi, Bhishma Dwadashi Vrat Vidhi, Bhishma Dwadashi Katha , Bhishma Dwadashi Mahatva

भीष्म द्वादशी व्रत – परिचय , Bhishma Dwadashi Vrat
भीष्म द्वादशी का पर्व माघ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी को किया जाता है. यह व्रत भीष्म पितामह के निमित्त किया जाता है. इस दिन महाभारत की कथा के भीष्म पर्व का पठन किया जाता है, साथ ही भगवान श्री कृष्ण का पूजन भी होता है. इस वर्ष भीष्म द्वादशी 24 फरवरी 2021 को बुधवार के दिन मनाई जाएगी. पौराणिक मान्यता अनुसार भीष्म पितामह ने अपने शरीर का त्याग अष्टमी तिथि को किया था लेकिन उनके निमित्त जो भी धार्मिक कर्मकाण्ड किए गए उसके लिए द्वादशी तिथि का चयन किया गया था. अत: उनके निर्वाण दिवस के पूजन को इस दिन मनाया जाता है. भीष्म द्वादशी के दिन व्रत और पूजा के साथ ही भीष्म तर्पण और अपने पितरों की पूजा करने से पितर तृप्त होते हैं और हर तरह के पाप खत्म हो जाते हैं. अगर आप भी भीष्म द्वादशी का व्रत कर रहे हैं तो यहां जानिए भीष्म द्वादशी 2021 पूजा मुहूर्त, भीष्म द्वादशी पूजा विधि, तर्पण विधि, भीष्म द्वादशी का महत्व, भीष्म द्वादशी कथा, भीष्म द्वादशी के दिन क्या करें दान आदि के बारे में विस्तार से-

भीष्म द्वादशी पूजा मुहूर्त – 24 फरवरी 2021 , बुधवार
द्वादशी तिथि आरंभ – 23 फरवरी 2021, 18:06 से.
द्वादशी समाप्त – 24 फरवरी 2021, 18:07.

भीष्म द्वादशी पूजा विधि, भीष्म द्वादशी की पूजा कैसे करें, Bhishma Dwadashi Puja Vidhi, Bhishma Dwadashi Vrat Vidhi,
1. भीष्म द्वादशी के दिन नित्य कर्म से निवृत्त होकर स्नान के पश्चात भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा करनी चाहिए.
2. इस पूजा में मौली, रोली, कुंमकुंम, केले के पत्ते, फल, पंचामृत, तिल, सुपारी, पान एवं दुर्वा आदि रखना चाहिए.
3. पूजा के लिए (दूध, शहद, केला, गंगाजल, तुलसी पत्ता, मेवा) मिलाकर पंचामृत से भगवान को भोग लगाएं.
4. पूजन से पहले भीष्म द्वादशी कथा करना चाहिए.
5. इस व्रत में ऊं नमो नारायणाय नम: आदि नामों से भगवान नारायण की पूजा अर्चना करनी चाहिए. ऐसा करने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं.
6. तत्पश्चात लक्ष्मी देवी एवं अन्य देवों की स्तुति-आरती की जाती है.
7. पूजन के बाद चरणामृत एवं प्रसाद सभी को बांटें.
8. ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद दक्षिणा देनी चाहिए. तत्पश्चात खुद भोजन करें.
9. इस दिन अपने पूर्वजों का तर्पण करने का भी विधान है.

भीष्म द्वादशी तर्पण विधि (Bhishma Dwadashi Tarpan Vidhi)
1. साधक किसी पवित्र नदी में स्नान कर बिना सीले वस्त्र धारण करे.
2. इसके बाद दहिने कंधे पर जनेऊ धारण करें. यदि आप जनेऊ धारण नहीं कर सकते तो दहिने कंधे पर गम्छा जरूर रखें.
3. दाहिने कंधें पर गम्छा रखने के बाद हाथ में तिल और जल लें और दक्षिण की और मुख कर लें.
4. इसके बाद वैयाघ्रपदगोत्राय सांकृतिप्रवराय च. गंगापुत्राय भीष्माय प्रदास्येहं तिलोदकम् अपुत्राय ददाम्येतत्सलिलं भीष्मवर्मणे .. मंत्र का जाप करें.
5. मंत्र जाप के बाद तिल और जल के अंगूठे और तर्जनी उंगली के मध्य भाग से होते हुए पात्र में छोड़े.
7. इसके बाद जनेऊ या गम्छे को बाएं कंधे पर डाल लें और गंगापुत्र भीष्म को अर्घ्य दें.
8. जिसके लिए आप भीष्म पितामह का नाम लेते हुए सूर्य को जल दे सकते हैं या दक्षिण मुखी होकर भी आप किसी वट वृक्ष को जल दे सकते हैं.
9. इसके बाद तर्पण वाले जल को किसी पवित्र वृक्ष या बरगद के पेड़ पर भी चढ़ा सकते है.
10. अंत में हाथ जोड़कर भीष्म पितामह को प्रणाम करें और अपने पितरों को भी प्रणाम करें.

भीष्म द्वादशी पर करें तिल का दान, Bhishma Dwadashi ke Din Kya Karen Daan
भीष्म द्वादशी का दिन तिलों के दान की महत्ता भी दर्शाता है. इस दिन में तिलों से हवन करना. पानी में तिल दाल कर स्नान करना और तिल का दान करना ये सभी अत्यंत उत्तम कार्य बताए गए हैं. तिल दान करने से अपने जीवन में खुशियों का आगमन होता है. सफलता के दरवाजे खुलते हैं. हिंदू धर्म में इस दिन को लेकर अलग-अलग तरह की मान्यताएं हैं, लेकिन इस पर्व पर तिलों को बेहद ही महत्वपू्र्ण माना जाता. भीष्म द्वादशी के दिन तिलों के दान से लेकर तिल खाने तक को शुभ बताया गया है. हिन्दू धर्म में तिल पवित्र, पापनाशक और पुण्यमय माने जाते हैं. शुद्ध तिलों का संग्रह करके यथाशक्ति ब्राह्मणों को दक्षिणासहित तिल का दान करना चाहिए. तिल के दान का फल अग्निष्टोम यज्ञ के समान होता है. तिल दान देने वाले को गोदान करने का फल मिलता है.

भीष्म द्वादशी महत्व, Bhishma Dwadashi Mahatva, Bhishma Dwadashi Vrat Ka Mahatva
माघ मास में शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को भीष्म द्वादशी का समय तर्पण और पूजा-पाठ के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है. इस दिन स्नान दान का भी अत्यंत ही शुभ फल मिलता है. इस दिन को तिल द्वादशी भी कहते हैं. इसलिए इस दिन तिलों का दान और सेवन दोनों ही कार्य उत्तम होते हैं. मान्यता है कि पांडवों ने इस दिन पितामह भीष्म का अंतिम संस्कार किया था. इसलिए इस दिन को पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करना शांति प्रदान करने वाला होता है. मान्यता है कि भीष्म द्वादशी के दिन उपवास रखने से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस द्वादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन भी किया जाता है. ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं और सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा देने से सुख की वृद्धि होती है. द्वादशी के दिन स्नान-दान करने से सुख-सौभाग्य, धन-संतान की प्राप्ति होती है. इस दिन गरीबों को भोजन कराने के बाद ही स्वयं भोजन किया जाता है. इस व्रत से समस्त पापों का नाश होता है. इस व्रत को करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. भीष्म द्वादशी का उपवास संतोष प्रदान करता है.

भीष्म द्वादशी की पौराणिक कथा ,Bhishma Dwadashi Katha In Hindi
राजा शांतनु की रानी गंगा ने देवव्रत नामक पुत्र को जन्म दिया और उसके जन्म के बाद गंगा शांतनु को छोड़कर चली जाती हैं, क्योंकि उन्होंने ऐसा वचन दिया था. शांतनु गंगा के वियोग में दुखी रहने लगते हैं. परंतु कुछ समय बीतने के बाद शांतनु गंगा नदी पार करने के लिए मत्स्य गंधा नाम की कन्या की नाव में बैठते हैं और उसके रूप-सौंदर्य पर मोहित हो जाते हैं.

राजा शांतनु कन्या के पिता के पास जाकर उनकी कन्या के साथ विवाह करने का प्रस्ताव रखते हैं. परंतु मत्स्य गंधा के पिता राजा शांतनु के समक्ष एक शर्त रखते हैं कि उनकी पुत्री को होने वाली संतान ही हस्तिनापुर राज्य की उत्तराधिकारी बनेगी, तभी यह विवाह हो सकता है. यही (मत्स्य गंधा) आगे चलकर सत्यवती नाम से प्रसिद्ध हुई.

राजा शांतनु यह शर्त मानने से इंकार करते हैं, लेकिन वे चिंतित रहने लगते हैं. देवव्रत को जब पिता की चिंता का कारण मालूम पड़ता है तो वह अपने पिता के समक्ष आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेते हैं. पुत्र की इस प्रतिज्ञा को सुनकर राजा शांतनु उन्हें इच्छा मृत्यु का वरदान देते हैं. इस प्रतिज्ञा के कारण ही देवव्रत, भीष्म पितामह के नाम से प्रसिद्ध हुए.

जब महाभारत का युद्ध होता है तो भीष्म पितामह कौरवों की तरफ से युद्ध लड़ रहे होते हैं और भीष्म पितामह के युद्ध कौशल से कौरव जीतने लगते हैं, तब भगवान श्रीकृष्ण एक चाल चलते हैं और शिखंडी को युद्ध में उनके समक्ष खड़ा कर देते हैं. अपनी प्रतिज्ञा अनुसार शिखंडी पर शस्त्र न उठाने के कारण भीष्म युद्ध क्षेत्र में अपने शस्त्र त्याग देते हैं. जिससे अन्य योद्धा अवसर पाते ही उन पर तीरों की बौछार शुरू कर देते हैं. महाभारत के इस महान योद्धा ने शरशैय्या पर शयन किया.

इसीलिए कहा जाता हैं कि सूर्य दक्षिणायन होने के कारण शास्त्रीय मतानुसार भीष्म ने अपने प्राण नहीं त्यागे और सूर्य के उत्तरायण होने पर अपने नश्वर शरीर का त्याग किया. उन्होंने अष्टमी को अपने प्राण त्याग दिए थे. उनके पूजन के लिए माघ मास की द्वादशी तिथि निश्चित की गई है, इसीलिए इस तिथि को भीष्म द्वादशी कहा जाता है. भगवान ने यह व्रत भीष्म पितामह को बताया था और उन्होंने इस व्रत का पालन किया था, जिससे इसका नाम भीष्म द्वादशी पडा. यह व्रत एकादशी के ठीक दूसरे दिन द्वादशी को किया जाता है. यह व्रत समस्त बीमारियों को मिटाता है. इस उपवास से समस्त पापों का नाश होकर मनुष्य को अमोघ फल प्राप्त होता है.

ये भी पढ़े –

  1. शंकर जी, भगवान शिव की पूजा विधि, Shiv Pujan, भगवान शिव जी को प्रसन्न कैसे करें, शिव जी की कथा, शिव पूजन सामग्री, शिव पूजा के दौरान पहने जाने वाले वस्त्र.
  2. सोमवार व्रत कैसे करें, सोमवार व्रत पूजन विधि नियम कथा आरती, प्रति सोमवार व्रत विधि, सोमवार व्रत के नियम, सोमवार व्रत का उद्यापन कैसे करें.
  3. 16 सोमवार व्रत विधि, 16 Somvar Vrat Vidhi In Hindi, 16 सोमवार व्रत कब से शुरू करें, सोलह सोमवार व्रत कथा आरती और उद्द्यापन, 16 Somvar Vrat Kab Se Shuru Kare.
  4. मंगलवार व्रत के नियम, Mangalvar Vrat Ke Niyam, मंगलवार व्रत विधि विधान, मंगलवार व्रत का खाना, मंगलवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं, मंगलवार का व्रत.
  5. बुधवार व्रत विधि विधान, बुधवार का व्रत कैसे किया जाता है, बुधवार व्रत कथा आरती, बुधवार व्रत उद्यापन विधि, बुधवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं.
  6. गुरुवार बृहस्पतिवार वीरवार व्रत विधि, वीरवार की व्रत कथा आरती, गुरुवार व्रत कथा आरती, गुरुवार का उद्यापन कब करना चाहिए, बृहस्पतिवार व्रत कथा उद्यापन.
  7. लक्ष्मी पूजा , शुक्रवार वैभव लक्ष्मी व्रत विधि, वैभव लक्ष्मी पूजा विधि, वैभव लक्ष्मी व्रत कथा, वैभव लक्ष्मी की आरती, वैभव लक्ष्मी व्रत कैसे करें, वैभव लक्ष्मी व्रत फल.
  8. संतोषी माता व्रत विधि , शुक्रवार व्रत विधि , शुक्रवार व्रत कथा आरती, संतोषी माता व्रत कथा, संतोषी माता की आरती, मां संतोषी का व्रत कैसे करें.
  9. शनिवार व्रत पूजा विधि, शनिवार के व्रत का उद्यापन, शनिवार के कितने व्रत करना चाहिए, शनिवार व्रत के लाभ, शनिवार का उद्यापन कैसे होता है.
  10. रविवार व्रत विधि विधान पूजा विधि व्रत कथा आरती, रविवार के कितने व्रत करने चाहिए, रविवार व्रत कब से शुरू करना चाहिए, रविवार के व्रत में क्या खाना चाहिए.
  11. माता पार्वती की पूजा विधि आरती जन्म कथा, Mata Parvati Puja Vidhi Aarti Janm Katha, माता पार्वती की पूजन सामग्री, Maa Parvati Mantra, Parvati Mata Mantra.
  12. बीकासूल कैप्सूल खाने से क्या फायदे होते हैं, बिकासुल कैप्सूल के लाभ, Becosules Capsules Uses in Hindi, बेकासूल, बीकोस्यूल्स कैप्सूल.
  13. जिम करने के फायदे और नुकसान, Gym Karne Ke Fayde, जिम जाने से पहले क्या खाएं, Gym Jane Ke Fayde, जिम से नुकसान, जिम जाने के नुकसान.
  14. मोटापा कम करने के लिए डाइट चार्ट, वजन घटाने के लिए डाइट चार्ट, बाबा रामदेव वेट लॉस डाइट चार्ट इन हिंदी, वेट लॉस डाइट चार्ट.
  15. बच्चों के नये नाम की लिस्ट, बेबी नाम लिस्ट, बच्चों के नाम की लिस्ट, हिंदी नाम लिस्ट, बच्चों के प्रभावशाली नाम, हिन्दू बेबी नाम, हिन्दू नाम लिस्ट.
  16. रेखा की जीवनी , रेखा की बायोग्राफी, रेखा की फिल्में, रेखा का करियर, रेखा की शादी, Rekha Ki Jivani, Rekha Biography In Hindi, Rekha Films, Rekha Career.
  17. प्यार का सही अर्थ क्या होता है, Pyar Kya Hota Hai, Pyar Kya Hai, प्यार क्या होता है, प्यार क्या है, Pyaar Kya Hai, Pyar Ka Matlab Kya Hota Hai, Love Kya Hota Hai.
  18. शराब छुड़ाने की आयुर्वेदिक दवा , होम्योपैथी में शराब छुड़ाने की दवा, शराब छुड़ाने के लिए घरेलू नुस्खे , शराब छुड़ाने का मंत्र , शराब छुड़ाने के लिए योग.
  19. ज्यादा नींद आने की वजह, Jyada Nind Kyon Aati Hai, ज्यादा नींद आना के कारण, ज्यादा नींद आना, शरीर में सुस्ती, शरीर में थकावट.
  20. भगवान राम के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान राम के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान राम के नाम, भगवान राम से बेबी बॉय नेम्स, राम जी के नाम पर लड़के का नाम.
  21. भगवान शिव के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान शिव के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान शिव के नाम, शिव जी के नाम पर लड़के का नाम.
Masik Durga Ashtami

मासिक दुर्गाष्टमी 2021 व्रत, मासिक दुर्गाष्टमी पूजा विधि, मासिक दुर्गाष्टमी 2021 मुहूर्त-तिथियां, मासिक दुर्गाष्टमी महत्व, मासिक दुर्गाष्टमी कथा, मासिक दुर्गाष्टमी आरती, Masik Durga Ashtami Puja Vidhi, Masik Durga Ashtami 2021 Date, Time, Masik Durga Ashtami 2021 Muhurat, Masik Durga Ashtami Katha, Masik Durga Ashtami Aarti, Masik Durga Ashtami Mahatva

मासिक दुर्गाष्टमी 2021 व्रत, मासिक दुर्गाष्टमी पूजा विधि, मासिक दुर्गाष्टमी 2021 मुहूर्त-तिथियां, मासिक दुर्गाष्टमी महत्व, मासिक दुर्गाष्टमी कथा, मासिक दुर्गाष्टमी आरती, Masik Durga Ashtami Puja Vidhi, Masik Durga Ashtami 2021 Date, Time, Masik Durga Ashtami 2021 Muhurat, Masik Durga Ashtami Katha, Masik Durga Ashtami Aarti, Masik Durga Ashtami Mahatva

मासिक दुर्गाष्टमी 2021 व्रत, मासिक दुर्गाष्टमी पूजा विधि
हिंदी कैलेंडर के अनुसार प्रत्येक माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गा अष्टमी मनाई जाती है. इसे दुर्गाष्टमी और मास दुर्गाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है. नवरात्रि के समय पड़ने वाली दुर्गाष्टमी को महाष्टमी होती है, इसके अलावा हर माह भी दुर्गा अष्टमी पर मां दुर्गा का पूजन और व्रत किया जाता है. हर माह पड़ने वाली मासिक दुर्गाष्टमी का महत्व बहुत ज्यादा होता है. इस दिन भक्त दुर्गा मां दुर्गा की उपासना करते हैं. व्रत करते हैं साथ ही पूजा-पाठ भी करते हैं. इस दिन मां की आरती और भजन भी किए जाते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन दुर्गा मंत्रों का जाप करने से घर में सुख- समृद्धि आती है. आइए जानते हैं मासिक दुर्गाष्टमी की तिथि, मासिक दुर्गाष्टमी शुभ मुहूर्त, मासिक दुर्गाष्टमी पूजा विधि और मासिक दुर्गाष्टमी का महत्व, मासिक दुर्गाष्टमी की कथा, मासिक दुर्गाष्टमी आरती-

मासिक दुर्गाष्टमी व्रत पूजा विधि, मासिक दुर्गाष्टमी 2021 व्रत विधि, Masik Durga Ashtami 2021 Puja Vidhi,Masik Durga Ashtami Vrat Vidhi
1. इस दिन प्रातः उठकर दैनिक क्रिया से निवृत्त होने के बाद स्नान कर लाल रंग के साफ-सुथरे कपड़े पहनें व तांबे के पात्र में लाल रंग का तिलक लगाकर सूर्य देवता को अर्ध्य दें.
2. घर की साफ-सफाई करके पूजा स्थान और घर में गंगाजल छिड़कें.
3. लकड़ी का एक साफ पाटा या चौकी लेकर उसपर लाल वस्त्र बिछाएं.
4. चौकी को गंगाजल से शुद्ध करें और माँ दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें.
5. मां की मूर्ति पर लाल रंग का पुष्प चढ़ाकर धूप और दीप जलाना चाहिए. इसके साथ ही मां को 16 श्रृंगार का सामान भी चढ़ाएं.
6. फल और मिठाई अर्पित करने के बाद माां दुर्गा की आरती उतारें.
7.इसके बाद मां दुर्गा की ज्योति जलाकर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय दुर्गा सप्तसती का पाठ करना चाहिए. इस दिन दुर्गा चलीसा का पाठ भी कर सकते हैं.
8.सप्तसती का पाठ करने के बाद ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चै का जाप करना चाहिए.
9. बाद में मां को चढ़ाए गए 16 श्रृंगार का सामान किसी सुहागन या नवदुर्गा के मंदिर में दे देना चाहिए. ऐसा करने से घर की रूठी हुई खुशियां दोबारा वापस आने लगती हैं.

मासिक दुर्गाष्टमी पूजा के समय इस बात का रखें ध्यान
1. घर में सुख और समृद्धि के लिए मां की ज्योति आग्नेय कोण में जलाना चाहिए.
2. पूजा करने वाले का मुख पूजा के समय पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए.
3. पूजा के समय पूजा का सामान दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना चाहिए.
4. इस दिन कभी न करें ये गलतियां: .मासिक दुर्गाष्टमी की पूजा करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि पूजा में तुलसी, आंवला, दूर्वा, मदार और आक के पुष्प का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.
5. घर में कभी एक से अधिक मां दुर्गा की प्रतिमा या फोटो नहीं रखना चाहिए.

मासिक दुर्गाष्टमी 2021 तिथियां, Masik Durga Ashtami 2021 Date, Time, Masik Durga Ashtami 2021 Muhurat, मासिक दुर्गाष्टमी 2021 का शुभ मुहूर्त, Masik Durga Ashtami 2021 Subh Muhurat

    • जनवरी 21, 2021, बृहस्पतिवार – पौष, शुक्ल अष्टमी
      प्रारम्भ – 01:14 PM, जनवरी 20
      समाप्त – 03:50 PM, जनवरी 21
    • फरवरी 20, 2021, शनिवार – माघ, शुक्ल अष्टमी
      प्रारम्भ – 10:58 AM, फरवरी 19
      समाप्त – 01:31 PM, फरवरी 20
    • मार्च 22, 2021, सोमवार – फाल्गुन, शुक्ल अष्टमी
      प्रारम्भ – 07:09 AM, मार्च 21
      समाप्त – 09:00 AM, मार्च 22
    • अप्रैल 20, 2021, मंगलवार – चैत्र, शुक्ल अष्टमी
      प्रारम्भ – 12:01 AM, अप्रैल 20
      समाप्त – 12:43 AM, अप्रैल 21
    • >मई 20, 2021, बृहस्पतिवार – वैशाख, शुक्ल अष्टमी
      प्रारम्भ – 12:50 PM, मई 19
      समाप्त – 12:23 PM, मई 20
    • जून 18, 2021, शुक्रवार – ज्येष्ठ, शुक्ल अष्टमी
      प्रारम्भ – 09:59 PM, जून 17
      समाप्त – 08:39 PM, जून 18
    • जुलाई 17, 2021, शनिवार – आषाढ़, शुक्ल अष्टमी
      प्रारम्भ – 04:34 AM, जुलाई 17
      समाप्त – 02:41 AM, जुलाई 18
    • अगस्त 15, 2021, रविवार – श्रावण, शुक्ल अष्टमी
      प्रारम्भ – 09:51 AM, अगस्त 15
      समाप्त – 07:45 AM, अगस्त 16
    • सितम्बर 14, 2021, मंगलवार – भाद्रपद, शुक्ल अष्टमी
      प्रारम्भ – 03:10 PM, सितम्बर 13
      समाप्त – 01:09 PM, सितम्बर 14
    • अक्टूबर 13, 2021, बुधवार – आश्विन, शुक्ल अष्टमी
      प्रारम्भ – 09:47 PM, अक्टूबर 12
      समाप्त – 08:07 PM, अक्टूबर 13
    • नवम्बर 11, 2021, बृहस्पतिवार – कार्तिक, शुक्ल अष्टमी
      प्रारम्भ – 06:49 AM, नवम्बर 11
      समाप्त – 05:51 AM, नवम्बर 12
    • दिसम्बर 11, 2021, शनिवार – मार्गशीर्ष, शुक्ल अष्टमी
      प्रारम्भ – 07:09 PM, दिसम्बर 10
      समाप्त – 07:12 PM, दिसम्बर 11

दुर्गा अष्टमी व्रत का महत्व, Masik Durga Mahatva
मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि की दुर्गाअष्टमी तो बहुत महत्व रखती ही है इसके अलावा मासिक दुर्गाष्टमी हर माह में पड़ने वाला ऐसा दिन होता है, जब भक्त शक्ति की अराधना कर उन्हें प्रसन्न कर सकते हैं. मासिक दुर्गाष्टमी के दिन, देवी दुर्गा के भक्त उनकी पूजा करते हैं. साथ ही पूरे दिन उपवास भी करते हैं. जो भक्त प्रत्येक मासिक दुर्गाअष्टमी को व्रत और पूजन करते हैं मां आदिशक्ति जगदंबे उनके सारे कष्टों का हरण कर लेती है. उन्हें स्वास्थ्य, धन, समृद्धि और खुशहाली की प्राप्ति होती है.

दुर्गाष्टमी की कथा, मासिक दुर्गाष्टमी कथा, Masik Durga Ashtami Katha
पौराणिक मान्यताओं अनुसार, प्राचीन काल में असुर दंभ को महिषासुर नाम के एक पुत्र की प्राप्ति हुई थी, जिसके भीतर बचपन से ही अमर होने की प्रबल इच्छा हिलोरें खा रही थी. अपनी इसी इच्छा की पूर्ति हेतु उसने अमर होने का वरदान हासिल करने के लिए ब्रह्मा जी की घोर तपस्या आरंभ की. महिषासुर द्वारा की गई इस कठोर तपस्या से ब्रह्मा जी प्रसन्न भी हुए और उन्होंने वैसा ही किया जैसा महिषासुर चाहता था. ब्रह्मा जी ने खुश होकर उसे मनचाहा वरदान मांगने को कहा. ऐसे में महिषासुर, जो सिर्फ अमर होना चाहता था, उसने ब्रह्मा जी से वरदान मांगते हुए खुद को अमर करने के लिए उन्हें बाध्य कर दिया.

परन्तु ब्रह्मा जी ने महिषासुर को अमरता का वरदान देने की बात ये कहते हुए टाल दी कि जन्म के बाद मृत्यु और मृत्यु के बाद जन्म निश्चित है, इसलिए अमरता जैसी किसी बात का कोई अस्तित्व नहीं है. जिसके बाद ब्रह्मा जी की बात सुनकर महिषासुर ने उनसे एक अन्य वरदान मानने की इच्छा जताते हुए कहा कि ठीक है स्वामी, यदि मृत्यु होना तय है तो मुझे ऐसा वरदान दे दीजिये कि मेरी मृत्यु किसी स्त्री के हाथ से ही हो, इसके अलावा अन्य कोई दैत्य, मानव या देवता, कोई भी मेरा वध ना कर पाए.

जिसके बाद ब्रह्मा जी ने महिषासुर को दूसरा वरदान दे दिया. ब्रह्मा जी द्वारा वरदान प्राप्त करते ही महिषासुर अहंकार से अंधा हो गया और इसके साथ ही बढ़ गया उसका अन्याय. मौत के भय से मुक्त होकर उसने अपनी सेना के साथ पृथ्वी लोक पर आक्रमण कर दिया, जिससे धरती चारों तरफ से त्राहिमाम-त्राहिमाम होने लगी. उसके बल के आगे समस्त जीवों और प्राणियों को नतमस्तक होना ही पड़ा. जिसके बाद पृथ्वी और पाताल को अपने अधीन करने के बाद अहंकारी महिषासुर ने इन्द्रलोक पर भी आक्रमण कर दिया, जिसमें उन्होंने इन्द्र देव को पराजित कर स्वर्ग पर भी कब्ज़ा कर लिया.

महिषासुर से परेशान होकर सभी देवी-देवता त्रिदेवों (महादेव, ब्रह्मा और विष्णु) के पास सहायता मांगने पहुंचे. चूँकि ब्रह्मा जी से वरदान पाकर महिषासुर अत्यंत शक्तिशाली हो चुका था, जिसका अंत त्रिदेव भी नहीं कर सकते थे, इसलिए विष्णु जी ने उसके अंत के लिए देवी शक्ति के निर्णाम की सलाह दी. जिसके बाद सभी देवताओं ने मिलकर देवी शक्ति को सहायता के लिए पुकारा और इस पुकार को सुनकर सभी देवताओं के शरीर में से निकले तेज ने एक अत्यंत खूबसूरत सुंदरी का निर्माण किया. उसी तेज से निकली मां आदिशक्ति जिसके रूप और तेज से सभी देवता भी आश्चर्यचकित हो गए.

त्रिदेवों की मदद से निर्मित हुई देवी दुर्गा को हिमवान ने सवारी के लिए सिंह दिया और इसी प्रकार वहाँ मौजूद सभी देवताओं ने भी मां को अपने एक-एक अस्त्र-शस्त्र सौंपे और इस तरह स्वर्ग में देवी दुर्गा को इस समस्या हेतु तैयार किया गया. माना जाता है कि देवी का अत्यंत सुन्दर रूप देखकर महिषासुर उनके प्रति बहुत आकर्षित होने लगा और उसने अपने एक दूत के जरिए देवी के पास विवाह का प्रस्ताव तक पहुंचाया. अहंकारी महिषासुर की इस ओच्छी हरकत ने देवी भगवती को अत्याधिक क्रोधित कर दिया, जिसके बाद ही मां ने महिषासुर को युद्ध के लिए ललकारा.

मां दुर्गा से युद्ध की ललकार सुनकर ब्रह्मा जी से मिले वरदान के अहंकार में अँधा महिषासुर उनसें युद्ध करने के लिए तैयार भी हो गया. इस युद्ध में एक-एक करके महिषासुर की संपूर्ण सेना का मां दुर्गा ने सर्वनाश कर दिया. इस दौरान माना ये भी जाता है कि ये युद्ध पूरे नौ दिनों तक चला जिस दौरान असुरों के सम्राट महिषासुर ने विभिन्न रूप धककर देवी को छलने की कई बार कोशिश की. लेकिन उसकी सभी कोशिश आखिरकार नाकाम रही और देवी भगवती ने अपने चक्र से इस युद्ध में महिषासुर का सिर काटते हुए उसका वध कर दिया. अंत: इस तरह देवी भगवती के हाथों महिषासुर की मृत्यु संभव हो पाई.
माना जाता है कि जिस दिन मां भगवती ने स्वर्ग लोक, पृथ्वी लोक और पाताल लोक को महिषासुर के पापों से मुक्ति दिलाई उस दिन से ही दुर्गा अष्टमी का पर्व प्रारम्भ हुआ.


मां दुर्गा की आरती, मासिक दुर्गाष्टमी आरती

जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति,
तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवरी ..टेक..

मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को,
उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको ..जय..

कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै,
रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै ..जय..

केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी,
सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी ..जय..

कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती,
कोटिक चंद्र दिवाकर राजत समज्योति ..जय..

शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती,
धूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ..जय..

चौंसठ योगिनि मंगल गावैं नृत्य करत भैरू,
बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू ..जय..

भुजा चार अति शोभित खड्ग खप्परधारी,
मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी ..जय..

कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती,
श्री मालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति ..जय..

श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै,
कहत शिवानंद स्वामी सुख-सम्पत्ति पावै ..जय..

ये भी पढ़े –

  1. शंकर जी, भगवान शिव की पूजा विधि, Shiv Pujan, भगवान शिव जी को प्रसन्न कैसे करें, शिव जी की कथा, शिव पूजन सामग्री, शिव पूजा के दौरान पहने जाने वाले वस्त्र.
  2. सोमवार व्रत कैसे करें, सोमवार व्रत पूजन विधि नियम कथा आरती, प्रति सोमवार व्रत विधि, सोमवार व्रत के नियम, सोमवार व्रत का उद्यापन कैसे करें.
  3. 16 सोमवार व्रत विधि, 16 Somvar Vrat Vidhi In Hindi, 16 सोमवार व्रत कब से शुरू करें, सोलह सोमवार व्रत कथा आरती और उद्द्यापन, 16 Somvar Vrat Kab Se Shuru Kare.
  4. मंगलवार व्रत के नियम, Mangalvar Vrat Ke Niyam, मंगलवार व्रत विधि विधान, मंगलवार व्रत का खाना, मंगलवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं, मंगलवार का व्रत.
  5. बुधवार व्रत विधि विधान, बुधवार का व्रत कैसे किया जाता है, बुधवार व्रत कथा आरती, बुधवार व्रत उद्यापन विधि, बुधवार के व्रत में नमक खाना चाहिए या नहीं.
  6. गुरुवार बृहस्पतिवार वीरवार व्रत विधि, वीरवार की व्रत कथा आरती, गुरुवार व्रत कथा आरती, गुरुवार का उद्यापन कब करना चाहिए, बृहस्पतिवार व्रत कथा उद्यापन.
  7. लक्ष्मी पूजा , शुक्रवार वैभव लक्ष्मी व्रत विधि, वैभव लक्ष्मी पूजा विधि, वैभव लक्ष्मी व्रत कथा, वैभव लक्ष्मी की आरती, वैभव लक्ष्मी व्रत कैसे करें, वैभव लक्ष्मी व्रत फल.
  8. संतोषी माता व्रत विधि , शुक्रवार व्रत विधि , शुक्रवार व्रत कथा आरती, संतोषी माता व्रत कथा, संतोषी माता की आरती, मां संतोषी का व्रत कैसे करें.
  9. शनिवार व्रत पूजा विधि, शनिवार के व्रत का उद्यापन, शनिवार के कितने व्रत करना चाहिए, शनिवार व्रत के लाभ, शनिवार का उद्यापन कैसे होता है.
  10. रविवार व्रत विधि विधान पूजा विधि व्रत कथा आरती, रविवार के कितने व्रत करने चाहिए, रविवार व्रत कब से शुरू करना चाहिए, रविवार के व्रत में क्या खाना चाहिए.
  11. माता पार्वती की पूजा विधि आरती जन्म कथा, Mata Parvati Puja Vidhi Aarti Janm Katha, माता पार्वती की पूजन सामग्री, Maa Parvati Mantra, Parvati Mata Mantra.
  12. बीकासूल कैप्सूल खाने से क्या फायदे होते हैं, बिकासुल कैप्सूल के लाभ, Becosules Capsules Uses in Hindi, बेकासूल, बीकोस्यूल्स कैप्सूल.
  13. जिम करने के फायदे और नुकसान, Gym Karne Ke Fayde, जिम जाने से पहले क्या खाएं, Gym Jane Ke Fayde, जिम से नुकसान, जिम जाने के नुकसान.
  14. मोटापा कम करने के लिए डाइट चार्ट, वजन घटाने के लिए डाइट चार्ट, बाबा रामदेव वेट लॉस डाइट चार्ट इन हिंदी, वेट लॉस डाइट चार्ट.
  15. बच्चों के नये नाम की लिस्ट, बेबी नाम लिस्ट, बच्चों के नाम की लिस्ट, हिंदी नाम लिस्ट, बच्चों के प्रभावशाली नाम, हिन्दू बेबी नाम, हिन्दू नाम लिस्ट.
  16. रेखा की जीवनी , रेखा की बायोग्राफी, रेखा की फिल्में, रेखा का करियर, रेखा की शादी, Rekha Ki Jivani, Rekha Biography In Hindi, Rekha Films, Rekha Career.
  17. प्यार का सही अर्थ क्या होता है, Pyar Kya Hota Hai, Pyar Kya Hai, प्यार क्या होता है, प्यार क्या है, Pyaar Kya Hai, Pyar Ka Matlab Kya Hota Hai, Love Kya Hota Hai.
  18. शराब छुड़ाने की आयुर्वेदिक दवा , होम्योपैथी में शराब छुड़ाने की दवा, शराब छुड़ाने के लिए घरेलू नुस्खे , शराब छुड़ाने का मंत्र , शराब छुड़ाने के लिए योग.
  19. ज्यादा नींद आने की वजह, Jyada Nind Kyon Aati Hai, ज्यादा नींद आना के कारण, ज्यादा नींद आना, शरीर में सुस्ती, शरीर में थकावट.
  20. भगवान राम के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान राम के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान राम के नाम, भगवान राम से बेबी बॉय नेम्स, राम जी के नाम पर लड़के का नाम.
  21. भगवान शिव के नाम पर बच्चों के नाम, भगवान शिव के नाम पर लड़कों के नाम, लड़कों के लिए भगवान शिव के नाम, शिव जी के नाम पर लड़के का नाम.