Navratri 2022

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शारदीय नवरात्रि तिथि 2022, Shardiya Navratri Date 2022

कब है शारदीय नवरात्रि 2022
शारदीय नवरात्रि दिनांक 25 सितंबर 2022 से आरम्भ होने वाला है. नवरात्रि में दुर्गा माता की नौ दिनों में 9 स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री माता के नौ स्वरूप हैं. प्राचीन मान्यता के अनुसार नवरात्रि में 9 दिनों तक माता दुर्गा के 9 स्वरूपों की आराधना करने से जीवन में ऋद्धि-सिद्धि ,सुख- शांति, मान-सम्मान, यश और समृद्धि की प्राप्ति शीघ्र ही होती है. माता दुर्गा हिन्दू धर्म में आद्यशक्ति के रूप में सुप्रतिष्ठित है तथा माता शीघ्र फल प्रदान करनेवाली देवी के रूप में लोक में प्रसिद्ध है. देवीभागवत पुराण के अनुसार आश्विन मास में माता की पूजा-अर्चना वा नवरात्र व्रत करने से मनुष्य पर देवी दुर्गा की कृपा सम्पूर्ण वर्ष बनी रहती है और मनुष्य का कल्याण होता है.
नवरात्रि पर घटस्थापना का विशेष महत्व है. यदि शारदीय नवरात्रि पर आप व्रत रहते हैं और घटस्थापना नहीं करते तो आपको आपकी पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा. घटस्थापना या कलश स्थापना का नवरात्रि में विशेष महत्व है. इसे नवरात्रि के पहला दिन किया जाता है. शुभ मुहुर्त में घट स्थापना पूरे विधि-विधान के साथ की जाती है. शास्त्रों के अनुसार, कलश को भगवान गणेश की संज्ञा दी गई है.

शारदीय नवरात्रि 2022 कैलेंडर

नवरात्रि तिथि  –     दिनांक     –       दिन      – देवी स्वरूप की पूजा
प्रथमा तिथि  –  26 सितंबर 2022 – सोमवार – घटस्थापना, चन्द्रदर्शन, शैलपुत्री
द्वितीया तिथि – 27 सितंबर 2022 – मंगलवार – ब्रह्मचारिणी पूजा
तृतीया तिथि – 28 सितंबर 2022 –  बुधवार –  सिन्दूर चंद्रघंटा
चतुर्थी तिथि – 29 सितंबर 2022 –  गुरुवार  –  कुष्मांडा
पंचमी तिथि – 30 सितंबर 2022 –  शुक्रवार   – स्कंदमाता
षष्ठी तिथि –    01 अक्तूबर 2022 – शनिवार –   सरस्वती आवाहन,कात्यायनी
सप्तमी तिथि – 02 अक्तूबर 2022 – रविवार  – सरस्वती पूजा, कालरात्रि
अष्टमी तिथि – 03 अक्तूबर 2022 – सोमवार  – महागौरी, दुर्गा महा अष्टमी पूजा
नवमी तिथि – 04 अक्तूबर 2022 – मंगलवार – सिद्धिदात्री दुर्गा, महा नवमी पूजा
दशमी तिथि – 05 अक्तूबर 2022 – बुधवार –  दुर्गा विसर्जन, विजयदशमी
जानकारी के लिए बता दें कि हिन्दू धर्म में नवरात्रि का खास महत्व है. हिन्दू कैलेंडर के अनुसार साल में चार बार नवरात्रि आती है. चैत्र और शारदीय के अलावा दो गुप्त नवरात्रि भी आती है.

शारदीय नवरात्रि घटस्थापना 2022 शुभ मुहूर्त

शारदीय नवरात्रि घटस्थापना 2022 शुभ मुहूर्त (Shardiya Navratri 2022 Ghatasthapana Shubh Muhurat)
आश्विन घटस्थापना – 26 सितंबर 2022 – सोमवार के दिन
घटस्थापना मुहूर्त – सुबह 06:11 से 07:51 मिनट तक
अवधि – 01 घण्टे 40 मिनट
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त – सुबह 11:54 से दोपहर 12:42 तक
अवधि – 00 घण्टे 47 मिनट
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – 26 सितंबर को सुबह 03:24 से 27 सितंबर सुबह 03:08 बजे तक
प्रतिपदा तिथि समाप्त – 27 सितंबर 2022 को सुबह 03:09 बजे

शारदीय नवरात्रि घटस्थापना सामग्री

शारदीय नवरात्रि घटस्थापना सामग्री (Shardiya Navratri Ghatasthapana Samigri) घट स्थापना के लिए मिट्टी का कलश, कलश में भरने के लिए शुद्ध जल या गंगाजल, कलश पर बांधने के लिए मोली,इत्र,कलश पर रखने के लिए सिक्के,अशोक या आम के 5 पत्ते,कलश को ढकने के लिए ढक्कन,ढक्कन में रखने के लिए साबूत चावल, एक जटा वाला नारियल, नारियल पर लपेटने के लिए चुनरी या लाल कपडा,फूल माला,जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र,जौ बोने के लिए शुद्ध साफ़ की हुई मिटटी,पात्र में बोने के लिए जौ आदि चीजों की आवश्यकता होती है.

नवरात्रि घटस्थापना विधि

शारदीय नवरात्रि घटस्थापना विधि (Shardiya Navratri Ghatasthapana Vidhi)
1. घटस्थापना नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि के दिन की जाती है. लेकिन उससे पहले जौ को बोया जाता है. जौ बोने के लिए एक मिट्टी के बर्तन में मिट्टी रखें और उसके ऊपर जौ को डाल दें.
2. जौ बोने के बाद तांबे का कलश लें और उसमें जल और गंगाजल डालें. इसके बाद उसमें साबूत सुपारी डालें और इत्र छिड़कें.
3. कलश में यह सभी सामग्री डालने के बाद उसमें कुछ सिक्के अवश्य डालें.
4. इसके बाद उस कलश पर अशोक या आम के पत्ते रख दें और उस कलश का मुख ढक दें.
5. कलश का मुख ढकने के बाद उस कलश पर अक्षत अवश्य रखें.
6. इसके बाद एक नारियल पर मोली लपेटें और उस नारियल को लाल चुन्नी से लपेट कर कलश पर रख दें.
7. नारियल स्थापित करने के बाद कलश को जौं के पात्र के बीच में रख दें.
8. इसके बाद सभी देवताओं का ध्यान करें और उनसे प्रार्थना करें कि वह मां दुर्गा के साथ नौ दिनों तक इस कलश में स्थान ग्रहण करें.
9. कलश की स्थापना करने के बाद घी का दीपक जलाकर और धूप दिखाकर कलश की पूजा करें.
10. इसके बााद कलश पर माला, फल,फूल, मिठाई और इत्र आदि अर्पित करें.

शारदीय नवरात्रि के 9 देवियों के 9 भोग और 9 बीज मंत्र

   9 दिन    –    9 देवी  –  9 भोग      –   9 बीज मंत्र  
पहला दिन – शैलपुत्री – देसी घी –   ह्रीं शिवायै नम:
दूसरा दिन – ब्रह्मचारिणी – शक्कर,सफेद मिठाई,मिश्री, फल –   ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:
तीसरा दिन चन्द्रघण्टा के लिए मंत्र – मिठाई और खीर-   ऐं श्रीं शक्तयै नम:
चौथा दिन – कूष्मांडा के लिए मंत्र – मालपुआ – ऐं ह्री देव्यै नम:
पांचवा दिन – स्कंदमाता के लिए मंत्र – केला –  ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:
छठा दिन – कात्यायनी के लिए मंत्र – शहद –  क्लीं श्री त्रिनेत्राय नम:
सातवाँ दिन – कालरात्रि के लिए मंत्र – गुड़ –  क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:
आठवां दिन – महागौरी के लिए मंत्र –  नारियल – श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:
नौवां दिन – सिद्धिदात्री के लिए मंत्र – अनार और तिल-  ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:

नवरात्रि पर क्या करें और क्या न करें

क्या करें – नवरात्रि के 9 दिन सात्विक भोजन करें, साफ़ सफाई पर विशेष ध्यान दें, देवी मां की पूजा आराधना, भजन-कीर्तन, जगराता और आरती पूरे मन और श्रध्दा से करें. मां के बीज मंत्रो का जरूर जप करें, लाभ मिलेगा.
क्या न करें – ध्यान रहे कि आप नवरात्रि के 9 दिन प्याज, लहसुन, शराब, मांस-मछली का सेवन भीलकर भी न करें, लड़ाई, झगड़ा, कलह, कलेश आदि से दूर रहें. नवरात्रि के 9 दिन काले कपड़े और चमड़े की चीजें न पहने, दाढ़ी, बाल और नाखून न काटें.

नवरात्रि में मां दुर्गा पूजा से लाभ

नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा से लाभ
  दिन     –    पूजा से लाभ
प्रतिपदा –  देवी शैलपुत्री की पूजा से चंद्र दोष समाप्त होता है.
द्वितीया –  देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा से मंगल दोष खत्म होता है.
तृतीया –  देवी चंद्रघण्टा पूजा से शुक्र ग्रह का प्रभाव बढ़ता है.
चतुर्थी –  माँ कूष्माण्डा की पूजा से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होता है.
पंचमी –  देवी स्कंदमाता की पूजा से बुध ग्रह का दोष कम होता है.
षष्ठी –  देवी कात्यायनी की पूजा से बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है.
सप्तमी –  देवी कालरात्रि की पूजा से शनिदोष खत्म होता है.
अष्टमी –  देवी महागौरी की पूजा से राहु का बुरा प्रभाव खत्म होता है.
नवमी –  देवी सिद्धिदात्री की पूजा से केतु का असर कम होता है.

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नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. शारदीय नवरात्रि दूसरे दिन माता दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान है. मान्यता है कि इस दिन विधिवत पूजा करने वाले भक्तों को ज्ञान सदाचार लगन, एकाग्रता और संयम रखने की शक्ति प्राप्त होती है और व्यक्ति अपने कर्तव्य पथ से भटकता नहीं है. नवरात्रि के दूसरे दिन व्रत रखने और मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के साथ ही आप अपने दोस्तों व प्रियजनों को इस दिन की बधाई देते हैं. ऐसे में आज हम आपके लिए नवरात्रि के बेस्ट शुभकमना संदेश लेकर आएं हैं जिन्हें आप अपनों को भेजकर उनका दिन शुभ बना सकते हैं-

|1|
कुमकुम भरे कदमों से आए माँ दुर्गा आपके द्वार,
सुख संपत्ति मिले आपको अपार,
मेरी ओर से नवरात्रि 2022 की शुभकामनाएँ करें स्वीकार!
मां ब्रह्मचारिणी आप पर विशेष कृपा बरसाएं
|2|
ना गिन कर दिया ना तोल कर दिया,
जब भी दिया शेरोंवाली माँ ने, दिल खोल कर दिया.
जय शेरोंवाली माँ.
शुभ नवरात्रि 2022 , मां ब्रह्मचारिणी माता की जय
|3|
हमको था इंतजार वो घड़ी आ गई
होकर सिंह पर सवार माता रानी आ गई
होगी अब मन की हर मुराद पूरी
हरने सारे दुख माता अपने द्वार आ गई
नवरात्रि 2022 के दूसरे दिन की हार्दिक शुभकामनाएं
|4|
मां की ज्योति से प्रेम मिलता है
सबके दिलों को मर्म मिलता है
जो भी जाता है मां के द्वार
कुछ न कुछ जरूर मिलता है
शुभ नवरात्रि 2022 , मां ब्रह्मचारिणी माता आपकी सारी मनोकामना पूर्ण करें
|5|
मां भरती झोली खाली
मां अम्बे वैष्णों वाली
मां संकट हरने वाली
मां विपदा मिटाने वाली
मां के सभी भक्तों को
नवरात्रि 2022 की शुभकामनाएं, मां ब्रह्मचारिणी आपको लंबी आयु दें
|6|
मां दुर्गे, मां अंबे, मां जगदंबे, मां भवानी
मां शीतला, मां वैष्णो, मां चंडी
माता रानी मेरी और आपकी मनोकामना पूरी करें
नवरात्रि 2022 की शुभकामनाएं, जय माता दी

|7|
सर्व मंगल मांगल्ये,
शिवे सर्वार्थ साधिके,
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी
नारायणी नमोस्तुते .
नवरात्रि 2022 के दूसरे दिन की हार्दिक शुभकामनायें.
|8|
हे मां तुमसे विश्वास ना उठने देना,
तेरी दुनिया में भय से जब सिमट जाऊं,
चारो ओर अंधेरा ही अंधेरा घना पाऊं,
बन के रोशनी तुम राह दिखा देना
शारदीय नवरात्रि 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं, मां ब्रह्मचारिणी की जय
|9|
घरों माँ दुर्गा का वास हो,
दुखों और संकटों का नाश हो,
मेरा माँ पर विश्वास हो
हर जगह सुख-शांति का वास हो.
मां ब्रह्मचारिणी माता की जय, नवरात्रि 2022 की शुभकामनाएं
|10|
माँ की महिमा का गुणगान करों,
नवरात्रि में तुम माँ का ध्यान करों,
सारे कष्टों से मिलेगी मुक्ति
अबकी बार कुछ दिन उपवास करों.
मां ब्रह्मचारिणी माता की जय
|11|
हे माँ वरदान ना देना हमें,
बस थोडा सा प्यार दे देना हमें,
तेरे चरणों में बीते ये जीवन सारा,
एक बस यही आशीर्वाद दे देना हमें.
नवरात्रि 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं
|12|
जब भी मैं बुरे समय में घबराता हूं,
मेरी पहाड़ो वाली माता की आवाज आती है,
सारी घबराहट दूर हो जाती है,
मां मेरे दिल में बस जाती है.
जय माता दी!, Happy Navratri 2022

|13|
माँ की आराधना का ये पर्व हैं
माँ के नौ रूपों की भक्ति का पर्व हैं
बिगड़े काम बनाने का पर्व है
भक्ति का दिया दिल में जलने का पर्व हैं
नवरात्रि 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं, मां ब्रह्मचारिणी माता की जय
|14|
मातारानी का जब पावन पर्व है आता,
ढेरों खुशियां साथ है लाता है,
इस बार मां दुर्गा आपको वो सबकुछ दें,
जो कुछ आपका दिल है चाहता.
जय माता दी! Happy Navratri 2022
|15|
देवी के कदम आपके घर में आएं,
आप खुशियों से नहाएं,
परेशानी आपसे आँखें चुराएं.
मां ब्रह्मचारिणी माता की जय
|16|
दिव्य है आँखों का नूर,
करती है संकटों को दूर,
माँ की छवि है निराली,
नवरात्रि में आई है खुशहाली.
Happy Navratri 2022
|17|
माँ दुर्गा के चरणों में जिसने सिर को झुकाया हैं,
वहीं तो आसमान की बुलंदी को छू पाया हैं.
Happy Navratri 2022
|18|
मां दुर्गा, मां अंबे, मां जगदंबे,
मां भवानी, मां शीतला, मां वैष्णो, मां चंडी,
माता रानी मेरी और आपकी मनोकामना पूरी करें!
नवरात्रि 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं, मां ब्रह्मचारिणी माता की जय

|19|
या देवी सर्वभूतेषु,
शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमस्तस्यै नमो नम:
शारदीय नवरात्रि 2022 की शुभकामनाएं! मां ब्रह्मचारिणी माता की जय
|20|
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी.
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते..
जय माता दी, शुभ नवरात्रि 2022
|21|
माँ दुर्गा से प्रार्थना हैं कि आपको
बल, बुद्धि, ऐश्वर्या, सुख और संपन्नता प्रदान करें
नवरात्रि 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं, मां ब्रह्मचारिणी माता की जय
|22|
इस नवरात्रि मां दुर्गा आपको सुख समृद्धि वैभव और ख्याति प्रदान करें.
शारदीय नवरात्रि 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं, मां ब्रह्मचारिणी माता की जय
|23|
शक्ति की देवी मां दुर्गा सबके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आएं
जय मां जगदम्बा! जय मां दुर्गे!
नवरात्रि 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं, मां ब्रह्मचारिणी माता की जय
|24|
लाल रंग से सजा मां का दरबार,
हर्षित हुआ मन, पुलकित हुआ संसार,
अपने पावन कदमों से मां आए आपके द्वार,
शुभ हो आपको ये नवरात्रि का त्योहार
शुभ नवरात्रि 2022 , मां ब्रह्मचारिणी माता की जय

|25|
हम को था इंतजार वो घड़ी आ गई,
होकर सिंह पर सवार माता रानी आ गईं,
होगी अब मन की हर मुराद पूरी,
हरने अब सारे दुःख माता द्वार आ गयी.
Happy Navratri 2022
|26|
नव दीप जलें, नव फूल खिलें
रोज मां का आर्शीवाद मिलें
इस नवरात्रि आपको वो सब मिलें
जो आपका दिल की हो कामना
जय माता दी! Navratri 2022 Ki Hardik Shubhkamnaye 2022
|27|
सारा जहां हो जिसकी शरण में
नमन है उस मां के चरण में
हम है उस मां के चरण की धूल
आओ सब मिलकर चढ़ाए मां की चरणों में फूल
जय माता दी! Happy Navratri 2022
|28|
मां का रूप का मनभावन
तन, मन और जीवन हो गया पावन,
मां के कदमों की आहट से
गूंज उठा मेरा घर आंगन
जय माता दी! Navratri Ki Hardik Shubhkamnaye 2022
|29|
मां दुर्गा के पग आपके घर में आएं,
आप खुशहाली से नहाएं,
परेशानियां आपसे आंखें चुराएं.
जय माता दी! नवरात्रि 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं
|30|
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता.
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:..
जय माता दी! नवरात्रि 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं

|31|
सजा दो ये दरबार मेरी माता आने वाली है,
प्रेम की ज्योति जला कर दुःख-दर्द मिटाने वाली है
नवरात्रि पर्व 2022 की शुभकामनाएं, मां ब्रह्मचारिणी माता की जय
|32|
आपके घर में हो मां शक्ति का वास,
हर संकट का हो नाश
घर में सुख समृद्धि का हो वास
जय माता दी! Happy Navratri 2022
|33|
हे माँ! तुमसे विश्वास ना उठने देना,
तेरी दुनिया में भय से जब सिमट जाऊं,
चारों ओर अँधेरा ही अँधेरा घना पाऊं,
बन के रोशनी तुम राह दिखा देना .
मां ब्रह्मचारिणी माता की जय
|34|
या देवी सर्व भूतेषु माँ रूपेण संस्थिता .
या देवी सर्व भूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता .
या देवी सर्व भूतेषु बुद्धि रूपेण संस्थिता .
या देवी सर्व भूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता .
नमस्तस्यै. नमस्तस्यै.
नमस्तस्यै. नमो नमः..
मां ब्रह्मचारिणी माता की जय
|35|
यह दुनिया एक माया है,
सब छूट जाता है जो कमाया है,
कर्म फल हर कोई पाता है,
जीवन चक्र चलता जाता है.
हैप्पी शारदीय नवरात्रि 2022 , मां ब्रह्मचारिणी माता की जय
|36|
नवरात्रि का पर्व जब आता है,
ढेरों सारी खुशियाँ लाता है,
इस बार माँ आपको वो सब दे
जो आपका दिल चाहता है
नवरात्री पर्व 2022 की शुभकामनाएं, माता ब्रह्मचारिणी की जय हो

|37|
हर जीव के मुक्ति का मार्ग है माँ,
जग की पालनहार है माँ,
सबकी भक्ति का आधार है माँ,
असीम शक्ति की अवतार है माँ
शुभ नवरात्रि 2022
|38|
सारी दुनिया छोड़कर माँ की शरण में आया हूँ,
माँ के चरणों में ही जीवन का सारा सुख पाया हूँ.
Happy Navratri 2022
|39|
ओम् सर्वमंगल मांगल्ये
शिवे सर्वार्थ साधिके,
शरण्ये त्रयम्बके गौरी
नारायणी नमोस्तुते.
नवरात्र 2022 की शुभकामनाएं! माता ब्रह्मचारिणी की जय हो
|40|
आप सभी को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें.
माता ब्रह्मचारिणी आपको शक्ति,सामर्थ्य व शांति प्रदान करें.
नवरात्र 2022 की शुभकामनाएं! माता ब्रह्मचारिणी की जय हो
|41|
नवरात्रि के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाये !
श्री माता ब्रह्मचारिणी आप की सभी मनोकामनाएँ पूरी करें
नवरात्र 2022 की शुभकामनाएं! माता ब्रह्मचारिणी की जय हो

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शारदीय नवरात्रि 2022 के पावन पर्व की शुरुआत इस बार 26 सितंबर 2022 से हो रही है. 9 दिवसीय यह पर्व 05 अक्टूबर 2022 तक है. इन 9 दिनों में मां के सभी 9 स्वरूपों की आराधना की जाएगी. इन नौ द‍िनों में भक्‍त उपवास रखकर मां की पूजा करते हैं. इन नौ द‍िनों में मां के अलग अलग स्‍वरूपों की पूजा पूरी श्रद्धा के साथ की जाती है. शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर अपने दोस्तों, परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों को शुभकामनाएं दी जाती हैं. ऐसे में यदि आप इनसे दूर हैं, तो कुछ ऐसे संदेश हैं, जिन्हें भेजकर आप उन्हें इस पावन पर्व की बधाई दे सकते हैं.
|1|
माँ तेरे चरणों में स्वर्ग हैं
माँ तेरे आशीष में प्रेम हैं
माँ तेरी भक्ति में शक्ति हैं..
माँ तेरी आराधना में शांति हैं..
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

|2|
दिव्य है मां की आंखों का नूर,
संकटों को मां करती हैं दूर,
मां की ये छवि निराली
नवरात्रि में आपके घर लाए खुशहाली।।
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं…
|3|
मां का रूप मनभावन
तन, मन और जीवन हो गया पावन,
मां के कदमों की आहट से
गूंज उठा मेरा घर आंगन
दुर्गा पूजा 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं।
|4|
सुबह सुबह लो मां दुर्गा का नाम,
पूरे होंगे आपके अधूरे और बिगड़े काम!
Happy 2022 Durga Puja

|5|
हे माँ वरदान ना देना हमें,
बस थोडा सा प्यार दे देना हमें,
तेरे चरणों में बीते ये जीवन सारा,
एक बस यही आशीर्वाद दे देना हमें।
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
|6|
जब भी मैं बुरे समय में घबराता हूं,
मेरी पहाड़ो वाली माता की आवाज आती है,
सारी घबराहट दूर हो जाती है,
मां मेरे दिल में बस जाती है।
जय माता दी!
Happy Navratri 2022
|7|
माँ की आराधना का ये पर्व हैं
माँ के नौ रूपों की भक्ति का पर्व हैं
बिगड़े काम बनाने का पर्व है
भक्ति का दिया दिल में जलने का पर्व हैं
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
|8|
मातारानी का जब पावन पर्व है आता,
ढेरों खुशियां साथ है लाता है,
इस बार मां दुर्गा आपको वो सबकुछ दें,
जो कुछ आपका दिल है चाहता।
जय माता दी!
Happy Navratri 2022
|9|
मां दुर्गा, मां अंबे, मां जगदंबे,
मां भवानी, मां शीतला, मां वैष्णो, मां चंडी,
माता रानी मेरी और आपकी मनोकामना पूरी करें!
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
|10|
या देवी सर्वभूतेषु,
शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै
नमस्तस्यै नमो नम:
शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं!

|11|
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।
जय माता दी।
शुभ नवरात्रि 2022
|12|
माँ दुर्गा से प्रार्थना हैं कि आपको
बल, बुद्धि, ऐश्वर्या, सुख और संपन्नता प्रदान करें
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
|13|
इस नवरात्रि मां दुर्गा आपको सुख समृद्धि वैभव और ख्याति प्रदान करें।
जय माता दी।
शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।

|14|
शक्ति की देवी मां दुर्गा सबके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आएं
जय मां जगदम्बा! जय मां दुर्गे!
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं…
|15|
लाल रंग से सजा मां का दरबार,
हर्षित हुआ मन, पुलकित हुआ संसार,
अपने पावन कदमों से मां आए आपके द्वार,
शुभ हो आपको ये नवरात्रि का त्योहार
शुभ नवरात्रि
|16|
हम को था इंतजार वो घड़ी आ गई,
होकर सिंह पर सवार माता रानी आ गईं,
होगी अब मन की हर मुराद पूरी,
हरने अब सारे दुःख माता द्वार आ गयी।
Happy Navratri 2022
|17|
चांद की चांदनी, बसंत की बहार,
फूलों की खुशबू, अपनों का प्यार,
मुबारक हो आपको नवरात्र का त्योहार,
नवरात्र की शुभकामनाएं!

|18|
जगत पालनहार है मां,
मुक्ति का धाम है मां,
हमारी भक्ति का आधार है मां,
हम सब की रक्षा की अवतार है मां।।
नवरात्रि की शुभकामनाएं
|19|
आपके घर में हो मां शक्ति का वास,
हर संकट का हो नाश
घर में सुख समृद्धि का हो वास
जय माता दी!
Happy Navratri 2022
|20|
माँ लक्ष्मी का हाथ हो,
सरस्वती का साथ हो,
गणेश का निवास हो,
और मां दुर्गा के आशीर्वाद से,
आपके जीवन में प्रकाश ही प्रकाश हो
जय माता दी, शुभ नवरात्र 2022
|21|
हे माँ! तुमसे विश्वास ना उठने देना,
तेरी दुनिया में भय से जब सिमट जाऊं,
चारों ओर अँधेरा ही अँधेरा घना पाऊं,
बन के रोशनी तुम राह दिखा देना ।
|22|
मां दुर्गा आई आपके द्वार
करके आई माता 16 श्रृंगार
आपके जीवन में न आए कभी हार
हमेशा रहे सुखी आपका ये परिवार
शुभ नवरात्रि 2022
|23|
या देवी सर्व भूतेषु माँ रूपेण संस्थिता ।
या देवी सर्व भूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता ।
या देवी सर्व भूतेषु बुद्धि रूपेण संस्थिता ।
या देवी सर्व भूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै। नमस्तस्यै।
नमस्तस्यै। नमो नमः।।

|24|
नव दीप जलें, नव फूल खिलें
रोज मां का आर्शीवाद मिलें
इस नवरात्रि आपको वो सब मिलें
जो आपका दिल की हो कामना
जय माता दी!
Navratri Ki Hardik Shubhkamnaye 2022
|25|
जिंदगी की हर तमन्ना हो पूरी,
आपकी कोई आरजू रहे न अधूरी,
करते है हाथ जोड़कर माँ दुर्गा की विनती,
आपकी हर मनोकामना हो पूरी ।
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें ।
|26|
सारा जहां हो जिसकी शरण में
नमन है उस मां के चरण में
हम है उस मां के चरण की धूल
आओ सब मिलकर चढ़ाए मां की चरणों में फूल
जय माता दी!
Happy Navratri 2022

|27|
मां का रूप का मनभावन
तन, मन और जीवन हो गया पावन,
मां के कदमों की आहट से
गूंज उठा मेरा घर आंगन
जय माता दी!
Navratri Ki Hardik Shubhkamnaye 2022
|28|
माता तेरे चरणों मे
भेंट हम चढ़ाते हैं
कभी नारियल तो
कभी फूल चढ़ाते हैं
और झोलियाँ भर भर के
तेरे दर से लाते हैं।
शुभ नवरात्र
|29|
हर पल खुशी कदम चूमे
नवरात्रि में हम सब मिलकर झूमे
हो न कभी आपका दुःख से सामना
यही है आपको नवरात्रि की शुभकामना
शुभ नवरात्रि
|30|
मां दुर्गा के पग आपके घर में आएं,
आप खुशहाली से नहाएं,
परेशानियां आपसे आंखें चुराएं।
जय माता दी!
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

|31|
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
जय माता दी!
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
|32|
लक्ष्मी जी का हाँथ हो,
सरस्वती जी का साथ हो,
गणेश जी का निवास हो,
औए माँ दुर्गा का आशीर्वाद हो।
इस नवरात्रि आपके लिए खुशियों का पैगाम हो।
|33|
देवी मां के कदम आपके घर आएं
आप खुशी से नहाएं और परेशानियां आपसे आंखें चुराए.
जय माता दी।।
नवरात्रि की शुभकामनाएं
|34|
सजा दो ये दरबार मेरी माता आने वाली है,
प्रेम की ज्योति जला कर दुःख-दर्द मिटाने वाली है
नवरात्री पर्व 2022 की शुभकामनाएं
|35|
हमें था जिसका इंतजार वो घड़ी आ गई,
होकर सिंह पर सवार माता रानी आ गई।
शारदीय नवरात्र 2022 की शुभकामनाएं
|35|
माता रानी ये वरदान देना,
बस थोड़ा सा प्यार देना,
आपकी चरणों में बीते जीवन सारा
ऐसा आशीर्वाद देना।
आप सभी को नवरात्रि 2022 की शुभकामनाएं।

|36|
मां का पर्व आता है,
हजारों खुशियां लाता है.
इस बार मां आपको वो सब दे,
जो आपका दिल चाहता है.
शुभ नवरात्रि 2022
|37|
यह दुनिया एक माया है,
सब छूट जाता है जो कमाया है,
कर्म फल हर कोई पाता है,
जीवन चक्र चलता जाता है.
हैप्पी शारदीय नवरात्रि 2022
|38|
नवरात्रि का पर्व जब आता है,
ढेरों सारी खुशियाँ लाता है,
इस बार माँ आपको वो सब दे
जो आपका दिल चाहता है
नवरात्री पर्व 2022 की शुभकामनाएं

|39|
हर जीव के मुक्ति का मार्ग है माँ,
जग की पालनहार है माँ,
सबकी भक्ति का आधार है माँ,
असीम शक्ति की अवतार है माँ
शुभ नवरात्रि 2022
|40|
माँ करती सबकी बेड़ा पार है,
माँ करती सबका उद्धार है,
माँ सबके कष्टों को हरती है,
माँ भक्तों के लिए कितना कुछ करती है।
हैप्पी नवरात्रि 2022

|41|
सारी दुनिया छोड़कर माँ की शरण में आया हूँ,
माँ के चरणों में ही जीवन का सारा सुख पाया हूँ।
Happy Navratri 2022
|42|
ओम् सर्वमंगल मांगल्ये
शिवे सर्वार्थ साधिके,
शरण्ये त्रयम्बके गौरी
नारायणी नमोस्तुते।
नवरात्र 2022 की शुभकामनाएं!
|43|
सजा हे दरबार, एक ज्योति जगमगाई है,
सुना हे नवरात्रि का त्योहार आया हैं,
वो देखो मंदिर में मेरी माता मुस्करायी है।
|44|
आप सभी को शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें।
माँ दुर्गा आपको शक्ति,सामर्थ्य व शांति प्रदान करें।
|45|
नवरात्रि के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाये !
श्री मां दुर्गा जी आप की सभी मनोकामनाएँ पूरी करें
|46|
करे कुछ चमत्कार मां दुर्गा
जीवन का हर संकट अब हो खत्म
वक्त की चादर पलटे कुछ ऐसे कि अब नहीं हो खुशियों में देरी
नवरात्रि का हार्दिक शुभकामनाएं
|47|
नव दीप जलें नव फूल खिलें,
रोज़ मां का आशीर्वाद मिले,
इस नवरात्रि आपको वो सब मिले जो आपका दिल चाहता है।

|48|
माता रानी वरदान ना देना हमें,
बस थोड़ा सा प्यार देना हमें,
तेरे चरणों में बीते ये जीवन सारा,
एक बस यही आशीर्वाद देना हमें
शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
|49|
हो जाओ तैयार, मां अम्बे आने वाली है,
सजा लो दरबार मां अम्बे आने वाली हैं,
तन, मन और जीवन हो जायेगा पावन,
मां के कदमों की आहट से गूंज उठेगा आंगन
शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं
|50|
सारा जहान है जिसकी शरण में
नमन है उस माँ के चरण में,
हम हैं उस माँ के चरणों की धूल,
आओ मिलकर माँ को चढ़ाएं श्रद्धा के फूल।
शुभ नवरात्रि…
|51|
मां शक्ति का वास हो,
संकटों का नाश हो,
हर घर मे सुख-शांति का वास हो, जय माता दी।
|52|
रूठी है, तो माना लेंगे,
पास अपने उसे बुला लेंगे,
मैय्या है वो दिल की भोली,
बातों मे उसे लगा लेंगे,
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।
|53|
गंगा किनारे दरबार है तेरा
हम सब तेरे हैं पुजारी
हमें हमारा है तेरा
तू है मां हमारी रखवारी
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

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नव दुर्गा बीज मंत्र, माँ शैलपुत्री बीज मंत्र, माँ ब्रह्मचारिणी बीज मंत्र, माँ चंद्रघंटा बीज मंत्र, माँ कूष्माण्डा बीज मंत्र, माँ स्कंदमाता बीज मंत्र, माँ कात्यायनी बीज मंत्र, माँ कालरात्रि बीज मंत्र, माँ महागौरी बीज मंत्र, माँ सिद्धिदात्री बीज मंत्र, माँ चन्द्रघंटा बीज मंत्र, Nav Durga Beej Mantra, Shailaputri Beej Mantra, Brahmacharini Beej Mantra, Chandraghanta Beej Mantra, Kushmanda Beej Mantra, Skandamata Beej Mantra, Katyayani Beej Mantra, Kaalratri Beej Mantra, Mahagauri Beej Mantra, Siddhidhatri Beej Mantra

नव दुर्गा बीज मंत्र, Nav Durga Beej Mantra
नवरात्रि के समय में मां दुर्गा के 9 स्वरुपों की विधि विधान से पूजा की जाती है, इसलिए इसे दुर्गा पूजा भी कहा जाता है। नव दुर्गा के पूजन का अर्थ है प्रत्येक पदार्थ में परमात्मा को अनुभव करना, माँ दुर्गा की ही शक्ति है, जिसे समस्त प्राणीमात्र में देखा जा सकता है।नवरात्रि के समय में मां दुर्गा के बीज मंत्रों का जाप कल्याणकारी और प्रभावी माना जाता है। हर नवरात्रि आप 9 दुर्गा के बीज मंत्रों का जाप कर सकते हैं। इसमें शब्दों के उच्चारण का विशेष ध्यान रखा जाता है। मां दुर्गा की आराधना से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है। इसलिए हमको मन, वचन और कर्म के साथ ही काया को विहित विधि-विधान के अनुसार परिशुद्ध-पवित्र करके मां दुर्गा के शरणागत होकर उनकी उपासना-आराधना करनी चाहिए। इससे सारे कष्टों से मुक्त होकर सहज ही परम पद के अधिकारी बन सकते हैं। यह देवी कल्याणकारी है। मां दुर्गा के 9 स्वरुपों के बीज मंत्र निम्नलिखित हैं।

9 दुर्गा के बीज मंत्र, Nav Durga Beej Mantra
1. माँ शैलपुत्री बीज मंत्र- ह्रीं शिवायै नम:।
2. माँ ब्रह्मचारिणी बीज मंत्र- ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।
3. माँ चंद्रघंटा बीज मंत्र- ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
4. माँ कूष्माण्डा बीज मंत्र- ऐं ह्री देव्यै नम:।
5. माँ स्कंदमाता बीज मंत्र- ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।
6. माँ कात्यायनी बीज मंत्र- क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:।
7. माँ कालरात्रि बीज मंत्र- क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
8. माँ महागौरी बीज मंत्र- श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।
9. माँ सिद्धिदात्री बीज मंत्र- ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।

9 दुर्गा के बीज मंत्र जाप विधि, Nav Durga Beej Mantra Jaap Vidhi
9 दुर्गा के बीज मंत्र जाप कम से कम 11 बार करें, बीज मंत्र जाप आप 1 से लेकर 108 बार कर सकते है, हो सके तो 1100 बार तुलसी या लाल चंदन की माला से जब करें. बीज मंत्र जाप सुबह और शाम को कर सकते है,बीज मंत्र का जाप मन को शांति देगा और सारे बिगड़े कार्य पुरे होंगे. ब्राह्म मुहूर्त में सुबह 4 बजे से लेकर प्रातः 7 बजे तक इन मंत्रो का जाप बहुत ही उत्तम होता है.
1- नवरात्री का पहला दिन, माँ शैलपुत्री बीज मंत्र
नवरात्री के पहले दिन कलश स्थापन के बाद सबसे पहले माँ शैलफुत्री की पूजा करें और फिर इस मंत्र का जाप करें- ह्रीं शिवायै नम:
2- नवरात्री का दूसरा दिन, माँ ब्रह्मचारिणी बीज मंत्र
नवरात्री के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी को पूजा होती है, माता की पूजा करने के बाद इस मंत्र का जाप करें- ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।
3- नवरात्री का तीसरा दिन, माँ चंद्रघंटा बीज मंत्र
नवरात्री के तीसरे दिन माता के रुप चंन्द्रघण्टा की पूजा होती है, माता चंन्द्रघण्टा की पूजा करने के बाद इस मंत्र का जाप करें- ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
4- नवरात्री का चौथा दिन, माँ कूष्माण्डा बीज मंत्र
माता कूष्मांडा की पूजा चौथे दिन की जाती है और माता कूष्मांडा की पूजा करने के बाद इस मंत्र का जाप करें- ऐं ह्री देव्यै नम:।

5- नवरात्री का पांचवा दिन, माँ स्कंदमाता बीज मंत्र
पांचवा दिन विधिपूर्वक माँ स्कंदामाता की पूजा करें और पूजा करने के बाद इस मंत्र का जाप करें- ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।
6- नवरात्री का छठा दिन, माँ कात्यायनी बीज मंत्र
षष्ठी नवरात्रि अथवा छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है, माता कात्यायनी की पूजा करने के बाद इस मंत्र का जाप करें- क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:।
7- नवरात्री का सांतवा दिन, माँ कालरात्रि बीज मंत्र
नवरात्री का सांतवा दिन सप्तमी होता है और सप्तमी को मां कालरात्रि की पूजा होती है, मां कालरात्रि को प्रसन्न करने के लिए इस मंत्र का जाप करें- क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
8- नवरात्री का आठवां दिन, माँ महागौरी बीज मंत्र
नवरात्री का आठवां दिन अथवा अष्टमी के पूजन का बेहद महत्व वाला होता है, अष्टमी को मां महागौरी की पूजा की जाती है, माता महागौरी की पूजा करने के बाद इस मंत्र का जाप करें- श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।
9- नवरात्री का नौवां दिन, माँ सिद्धिदात्री बीज मंत्र
नवरात्री का आखिरी दिन नवमी माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है और पूजा करने के बाद इस मंत्र का जाप करें- ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।

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  3. नवरात्र का पहला दिन (नवरात्रि प्रथमा तिथि)-Navratri 1st Day: मां शैलपुत्री की पूजा विधि, शैलपुत्री के मंत्र, शैलपुत्री की कथा, शैलपुत्री की आरती, Maa Shailputri Puja Vidhi.
  4. नवरात्रि का दूसरा दिन (द्वितीय नवरात्र)-Navratri 2nd Day: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, ब्रह्मचारिणी के मंत्र, ब्रह्मचारिणी की कथा, ब्रह्मचारिणी की आरती, Maa Brahmacharini.
  5. नवरात्रि तीसरा दिन (नवरात्रि तृतीय तिथि) Navratri 3rd Day: माता चंद्रघंटा की पूजा विधि, माता चंद्रघंटा के मंत्र, मां चंद्रघंटा की कथा, मां चंद्रघंटा की आरती.
  6. नवरात्रि चौथा दिन चतुर्थी तिथि-Navratri 4th Day: माँ कुष्मांडा की पूजा विधि, मां कुष्मांडा के मंत्र, माँ कुष्मांडा व्रत कथा, मां कुष्मांडा की आरती, माता कुष्मांडा की पूजा का महत्व.
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  11. नवरात्रि का नौवां दिन नवमी-Navratri 9th Day Navratri Last Day: महानवमी पूजा विधि, मां सिद्धिदात्री पूजा विधि, दुर्गा नवमी पूजा (Durga Navami) मां सिद्धिदात्री की कथा.
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प्रथम शैलपुत्री द्वितीय ब्रह्मचारिणी श्लोक, Pratham Shailputri Dwitiya Brahmacharini Shloka
हिन्दू धर्म में नवदुर्गा दुर्गा माता अथवा पार्वती माता के नौ रूपों को एक साथ कहा जाता है. दुर्गा माता के ये नौ रूप पाप का विनाश करने वाले है, इसीलिए इन नौ रूपों को पापों की विनाशिनी कहा जाता है, हर दुर्गा अवतार के अलग अलग वाहन हैं, अस्त्र शस्त्र हैं लेकिन ये सब माँ दुर्गा ही हैं. माता दुर्गा सप्तशती ग्रन्थ के अन्तर्गत देवी कवच स्तोत्र में निम्नांकित श्लोक में नवदुर्गा के नाम क्रमश: दिये गए हैं–
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम् ।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम् ।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना ।।

दुर्गा गायत्री मंत्र, Durga Gayatri Mantra
ओम् कात्यान्ये च विद्मिहे कन्याकुमार्ये धीमहि।
तन्नो: देवी प्रचोदयात ।।
ओम् गिरिजायये विद्मिहे शिवप्रियाये धीमहि।
तन्नो: दुर्गा प्रचोदयात ।।
दुर्गा गायत्री मंत्र का जाप कैसे करें, Durga Gayatri Mantra Ka Jaap Kaise Kare
सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए आपको सुबह स्नान करने के बाद और देवी दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर के सामने दुर्गा गायत्री मंत्र का जाप करना चाहिए. इसके प्रभाव को अधिकतम करने के लिए आपको सबसे पहले दुर्गा गायत्री मंत्र का हिंदी में अर्थ समझना चाहिए.
दुर्गा गायत्री मंत्र के लाभ, Durga Gayatri Mantra ke Labh
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार दुर्गा गायत्री मंत्र का नियमित जप देवी दुर्गा को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे शक्तिशाली तरीका है. दुर्गा गायत्री मंत्र के नियमित जाप से मन को शांति मिलती है और आपके जीवन से सभी बुराई दूर होती है और आप स्वस्थ, धनवान और समृद्ध बनते हैं.

नव दुर्गा का महत्व, Nav Durga Ka Mahatv
नवार्ण मंत्र- ॥ॐ एं ह्रीं क्लीं चामुडायै विच्चे॥
1- शैलपुत्री- सम्पूर्ण जड़ पदार्थ माँ दुर्गा का पहला स्वरूप हैं पत्थर मिट्टी जल वायु अग्नि आकाश सब शैल पुत्री का प्रथम रूप हैं. इस पूजन का अर्थ है प्रत्येक जड़ पदार्थ में परमात्मा को अनुभव करना.
2- ब्रह्मचारिणी- जड़ में ज्ञान का प्रस्फुरण, चेतना का संचार माँ दुर्गा के दूसरे रूप का प्रादुर्भाव है. जड़ चेतन का संयोग है. प्रत्येक अंकुरण में इसे देख सकते हैं.
3- चन्द्रघण्टा- माँ दुर्गा का तीसरा रूप है यहाँ जीव में वाणी प्रकट होती है जिसकी अंतिम परिणिति मनुष्य में बैखरी (वाणी) है.
4- कूष्माण्डा- अर्थात अण्डे को धारण करने वाली; स्त्री ओर पुरुष की गर्भधारण, गर्भाधान शक्ति है जो माँ दुर्गा की ही शक्ति है, जिसे समस्त प्राणीमात्र में देखा जा सकता है.
5- स्कन्दमाता- पुत्रवती माता-पिता का स्वरूप है अथवा प्रत्येक पुत्रवान माता-पिता स्कन्द माता के रूप हैं.
6- कात्यायनी- कात्यायनी के रूप में वही माँ दुर्गा कन्या की माता-पिता हैं. यह देवी का छठा स्वरुप है.
7- कालरात्रि- माँ दुर्गा का सातवां रूप कालरात्रि है जिससे सब जड़ चेतन मृत्यु को प्राप्त होते हैं ओर मृत्यु के समय सब प्राणियों को इस स्वरूप का अनुभव होता है.माँ दुर्गा के इन सात स्वरूपों के दर्शन सबको प्रत्यक्ष सुलभ होते हैं.
8- महागौरी- माँ दुर्गा का आठवाँ स्वरूप महागौरी गौर वर्ण का है.
9- सिद्धिदात्री- माँ दुर्गा का नौंवा रूप सिद्धिदात्री है. यह ज्ञान अथवा बोध का प्रतीक है, जिसे जन्म जन्मान्तर की साधना से पाया जा सकता है. इसे प्राप्त कर साधक परम सिद्ध हो जाता है. इसलिए इसे सिद्धिदात्री कहा है.

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  6. नवरात्रि चौथा दिन चतुर्थी तिथि-Navratri 4th Day: माँ कुष्मांडा की पूजा विधि, मां कुष्मांडा के मंत्र, माँ कुष्मांडा व्रत कथा, मां कुष्मांडा की आरती, माता कुष्मांडा की पूजा का महत्व.
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शारदीय नवरात्रि तिथि 2021 | Shardiya Navratri Date 2021
शारदीय नवरात्रि दिनांक 7 अक्टूबर 2021 से आरम्भ होने वाला है। नवरात्रि में दुर्गा माता की नौ दिनों में 9 स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। माता की नौ स्वरूप है — क्रमशः शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। प्राचीन मान्यता के अनुसार नवरात्रि में 9 दिनों तक माता दुर्गा के 9 स्वरूपों की आराधना करने से जीवन में ऋद्धि-सिद्धि ,सुख- शांति, मान-सम्मान, यश और समृद्धि की प्राप्ति शीघ्र ही होती है। माता दुर्गा हिन्दू धर्म में आद्यशक्ति के रूप में सुप्रतिष्ठित है तथा माता शीघ्र फल प्रदान करनेवाली देवी के रूप में लोक में प्रसिद्ध है। देवीभागवत पुराण के अनुसार आश्विन मास में माता की पूजा-अर्चना वा नवरात्र व्रत करने से मनुष्य पर देवी दुर्गा की कृपा सम्पूर्ण वर्ष बनी रहती है और मनुष्य का कल्याण होता है।
नवरात्रि पर घटस्थापना का विशेष महत्व है. यदि शारदीय नवरात्रि पर आप व्रत रहते हैं और घटस्थापना नहीं करते तो आपको आपकी पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा। घटस्थापना या कलश स्थापना का नवरात्रि में विशेष महत्व है. इसे नवरात्रि के पहला दिन किया जाता है. शुभ मुहुर्त में घट स्थापना पूरे विधि-विधान के साथ की जाती है. शास्त्रों के अनुसार, कलश को भगवान गणेश की संज्ञा दी गई है.

शारदीय नवरात्रि 2021 कैलेंडर
नवरात्रि तिथि  –     दिनांक     –       दिन      – देवी स्वरूप की पूजा
प्रथमा तिथि  –  7 अक्टूबर 2021 – वृहस्पतिवार – घटस्थापना, चन्द्रदर्शन, शैलपुत्री
द्वितीया तिथि – 8 अक्टूबर 2021 – शुक्रवार – ब्रह्मचारिणी पूजा
तृतीया तिथि – 9 अक्टूबर 2021 – शनिवार –  सिन्दूर चंद्रघंटा
चतुर्थी तिथि – 10 अक्टूबर 2021 – रविवार  –  कुष्मांडा
पंचमी तिथि – 10 अक्टूबर 2021 – रविवार   – स्कंदमाता
षष्ठी तिथि –    11 अक्टूबर 2021 – सोमवार –   सरस्वती आवाहन,कात्यायनी
सप्तमी तिथि –12 अक्टूबर 2021 – मंगलवार  – सरस्वती पूजा, कालरात्रि
अष्टमी तिथि – 13 अक्टूबर 2021 – बुधवार  –  महागौरी
नवमी तिथि – 14 अक्टूबर 2021 – वृहस्पतिवार –  सिद्धिदात्री
दशमी तिथि – 15 अक्टूबर 2021 – शुक्रवार –  विजयदशमी
जानकारी के लिए बता दें कि हिन्दू धर्म में नवरात्रि का खास महत्व है. हिन्दू कैलेंडर के अनुसार साल में चार बार नवरात्रि आती है. चैत्र और शारदीय के अलावा दो गुप्त नवरात्रि भी आती है.

शारदीय नवरात्रि घटस्थापना 2021 शुभ मुहूर्त (Shardiya Navratri 2021 Ghatasthapana Shubh Muhurat)
आश्विन घटस्थापना बृहस्पतिवार, अक्टूबर 7, 2021 को
घटस्थापना मुहूर्त – 06:17 AM से 07:07 AM
अवधि – 00 घण्टे 50 मिनट्स
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त – 11:45 AM से 12:32 PM
अवधि – 00 घण्टे 47 मिनट्स
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – अक्टूबर 06, 2021 को 04:34 PM बजे
प्रतिपदा तिथि समाप्त – अक्टूबर 07, 2021 को 01:46 PM बजे
चित्रा नक्षत्र प्रारम्भ – अक्टूबर 06, 2021 को 11:20 PM बजे
चित्रा नक्षत्र समाप्त – अक्टूबर 07, 2021 को 09:13 PM बजे
वैधृति योग प्रारम्भ – अक्टूबर 07, 2021 को 05:12 PM बजे
वैधृति योग समाप्त – अक्टूबर 08, 2021 को 01:40 PM बजे
कन्या लग्न प्रारम्भ – अक्टूबर 07, 2021 को 06:17 PM बजे
कन्या लग्न समाप्त – अक्टूबर 07, 2021 को 07:07 PM बजे

शारदीय नवरात्रि घटस्थापना सामग्री (Shardiya Navratri Ghatasthapana Samigri) घट स्थापना के लिए मिट्टी का कलश, कलश में भरने के लिए शुद्ध जल या गंगाजल, कलश पर बांधने के लिए मोली,इत्र,कलश पर रखने के लिए सिक्के,अशोक या आम के 5 पत्ते,कलश को ढकने के लिए ढक्कन,ढक्कन में रखने के लिए साबूत चावल, एक जटा वाला नारियल, नारियल पर लपेटने के लिए चुनरी या लाल कपडा,फूल माला,जौ बोने के लिए मिट्टी का पात्र,जौ बोने के लिए शुद्ध साफ़ की हुई मिटटी,पात्र में बोने के लिए जौ आदि चीजों की आवश्यकता होती है।

शारदीय नवरात्रि नवरात्रि घटस्थापना विधि (Shardiya Navratri Ghatasthapana Vidhi)
1.घटस्थापना नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि के दिन की जाती है। लेकिन उससे पहले जौ को बोया जाता है। जौ बोने के लिए एक मिट्टी के बर्तन में मिट्टी रखें और उसके ऊपर जौ को डाल दें।
2. जौ बोने के बाद तांबे का कलश लें और उसमें जल और गंगाजल डालें। इसके बाद उसमें साबूत सुपारी डालें और इत्र छिड़कें।
3.कलश में यह सभी सामग्री डालने के बाद उसमें कुछ सिक्के अवश्य डालें।
4. इसके बाद उस कलश पर अशोक या आम के पत्ते रख दें और उस कलश का मुख ढक दें।
5.कलश का मुख ढकने के बाद उस कलश पर अक्षत अवश्य रखें।
6.इसके बाद एक नारियल पर मोली लपेटें और उस नारियल को लाल चुन्नी से लपेट कर कलश पर रख दें।
7.नारियल स्थापित करने के बाद कलश को जौं के पात्र के बीच में रख दें।
8.इसके बाद सभी देवताओं का ध्यान करें और उनसे प्रार्थना करें कि वह मां दुर्गा के साथ नौ दिनों तक इस कलश में स्थान ग्रहण करें।
9.कलश की स्थापना करने के बाद घी का दीपक जलाकर और धूप दिखाकर कलश की पूजा करें।
10. इसके बााद कलश पर माला, फल,फूल, मिठाई और इत्र आदि अर्पित करें।

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  1. नवरात्रि व्रत पूजा विधि, नवरात्र दुर्गा पूजन सामग्री, नवरात्रि घटस्थापना एवं पूजा विधि, कन्यापूजन, नवरात्र व्रत का भोजन, व्रत का प्रसाद, नौ दुर्गा के 9 मंत्र, नवरात्र की आरती.
  2. नवदुर्गा के 9 रूप हैं यह 9 दिव्य औषधियां, Navdurga Ke 9 Roop Hai Ye 9 Divya Ausdhiyan, दिव्य जड़ी बूटी, औषधीय पौधों के नाम, दिव्य गुणों वाली 9 औषधियां.
  3. नवरात्र का पहला दिन (नवरात्रि प्रथमा तिथि)-Navratri 1st Day: मां शैलपुत्री की पूजा विधि, शैलपुत्री के मंत्र, शैलपुत्री की कथा, शैलपुत्री की आरती, Maa Shailputri Puja Vidhi.
  4. नवरात्रि का दूसरा दिन (द्वितीय नवरात्र)-Navratri 2nd Day: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, ब्रह्मचारिणी के मंत्र, ब्रह्मचारिणी की कथा, ब्रह्मचारिणी की आरती, Maa Brahmacharini.
  5. नवरात्रि तीसरा दिन (नवरात्रि तृतीय तिथि) Navratri 3rd Day: माता चंद्रघंटा की पूजा विधि, माता चंद्रघंटा के मंत्र, मां चंद्रघंटा की कथा, मां चंद्रघंटा की आरती.
  6. नवरात्रि चौथा दिन चतुर्थी तिथि-Navratri 4th Day: माँ कुष्मांडा की पूजा विधि, मां कुष्मांडा के मंत्र, माँ कुष्मांडा व्रत कथा, मां कुष्मांडा की आरती, माता कुष्मांडा की पूजा का महत्व.
  7. नवरात्रि का पांचवा दिन नवरात्रि पंचमी-Navratri 5th Day: मां स्कंदमाता की पूजा विधि, मां स्कंदमाता के मंत्र, मां स्कंदमाता की कथा, मां स्कंदमाता की आरती.
  8. नवरात्रि छठा दिन षष्ठी तिथि -Navratri 6th Day: मां कात्यायनी की पूजा विधि, मां कात्यायनी के मंत्र, माता कात्यायनी की कथा, मां कात्यायनी की आरती.
  9. नवरात्रि सातवां दिन सप्तमी पूजा-Navratri 7th Day: मां कालरात्रि की पूजा विधि, मां कालरात्रि के मंत्र, माता कालरात्रि की कथा, मां कालरात्रि की आरती.
  10. नवरात्रि आठवां दिन दुर्गा अष्टमी-Navratri 8th Day: दुर्गा अष्टमी की पूजा विधि (Durga Ashtami Puja Vidhi) महाष्टमी पूजा विधि, महागौरी पूजा विधि, महागौरी की व्रत कथा.
  11. नवरात्रि का नौवां दिन नवमी-Navratri 9th Day Navratri Last Day: महानवमी पूजा विधि, मां सिद्धिदात्री पूजा विधि, दुर्गा नवमी पूजा (Durga Navami) मां सिद्धिदात्री की कथा.
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9-Divya-Ausdhiyan

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नवदुर्गा के 9 रूप हैं यह 9 दिव्य औषधियां
नवदुर्गा, यानि मां दुर्गा के नौ रूप। इन 9 औषधि‍यों में भी विराजते हैं, मां अम्बे के यह नौ रूप, जो समस्त रोगों से बचाकर जगत का कल्याण करते हैं। नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों को सर्वप्रथम मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में दर्शाया गया और चिकित्सा प्रणाली के इस रहस्य को ब्रह्माजी द्वारा उपदेश में दुर्गाकवच कहा गया है।
ऐसा माना जाता है कि यह औषधि‍यां समस्त प्राणि‍यों के रोगों को हरने वाली और और उनसे बचा रखने के लिए एक कवच का कार्य करती हैं, इसलिए इसे दुर्गाकवच कहा गया। इनके प्रयोग से मनुष्य अकाल मृत्यु से बचकर सौ वर्ष जीवन जी सकता है। जानिए दिव्य गुणों वाली 9 औषधियों को जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है.

1. प्रथम शैलपुत्री यानि हरड़ – नवदुर्गा का प्रथम रूप शैलपुत्री माना गया है। कई प्रकार की समस्याओं में काम आने वाली औषधि‍ हरड़, हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप हैं। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है, जो सात प्रकार की होती है।
इसमें हरीतिका (हरी) भय को हरने वाली है। पथया – जो हित करने वाली है। कायस्थ – जो शरीर को बनाए रखने वाली है।> अमृता – अमृत के समान
हेमवती – हिमालय पर होने वाली।
चेतकी – चित्त को प्रसन्न करने वाली है।
श्रेयसी (यशदाता) शिवा – कल्याण करने वाली।

2. द्वितीय ब्रह्मचारिणी यानि ब्राह्मी – ब्राह्मी, नवदुर्गा का दूसरा रूप ब्रह्मचारिणी है। यह आयु और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाली, रूधिर विकारों का नाश करने वाली और स्वर को मधुर करने वाली है। इसलिए ब्राह्मी को सरस्वती भी कहा जाता है।
यह मन एवं मस्तिष्क में शक्ति प्रदान करती है और गैस व मूत्र संबंधी रोगों की प्रमुख दवा है। यह मूत्र द्वारा रक्त विकारों को बाहर निकालने में समर्थ औषधि है। अत: इन रोगों से पीड़ित व्यक्ति को ब्रह्मचारिणी की आराधना करना चाहिए।

3. तृतीय चंद्रघंटा यानि चन्दुसूर – नवदुर्गा का तीसरा रूप है चंद्रघंटा, इसे चन्दुसूर या चमसूर कहा गया है। यह एक ऐसा पौधा है जो धनिये के समान है। इस पौधे की पत्तियों की सब्जी बनाई जाती है, जो लाभदायक होती है। यह औषधि‍ मोटापा दूर करने में लाभप्रद है, इसलिए इसे चर्महन्ती भी कहते हैं। शक्ति को बढ़ाने वाली, हृदय रोग को ठीक करने वाली चंद्रिका औषधि है। अत: इस बीमारी से संबंधित रोगी को चंद्रघंटा की पूजा करना चाहिए।

4. चतुर्थ कुष्माण्डा यानि पेठा – नवदुर्गा का चौथा रूप कुष्माण्डा है। इस औषधि से पेठा मिठाई बनती है, इसलिए इस रूप को पेठा कहते हैं। इसे कुम्हड़ा भी कहते हैं जो पुष्टिकारक, वीर्यवर्धक व रक्त के विकार को ठीक कर पेट को साफ करने में सहायक है। मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के लिए यह अमृत समान है। यह शरीर के समस्त दोषों को दूर कर हृदय रोग को ठीक करता है। कुम्हड़ा रक्त पित्त एवं गैस को दूर करता है। इन बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को पेठा का उपयोग के साथ कुष्माण्डा देवी की आराधना करना चाहिए।

5. पंचम स्कंदमाता यानि अलसी – नवदुर्गा का पांचवा रूप स्कंदमाता है जिन्हें पार्वती एवं उमा भी कहते हैं। यह औषधि के रूप में अलसी में विद्यमान हैं। यह वात, पित्त, कफ, रोगों की नाशक औषधि है।
अलसी नीलपुष्पी पावर्तती स्यादुमा क्षुमा।
अलसी मधुरा तिक्ता स्त्रिग्धापाके कदुर्गरु:।।
उष्णा दृष शुकवातन्धी कफ पित्त विनाशिनी।
इस रोग से पीड़ित व्यक्ति ने स्कंदमाता की आराधना करना चाहिए।

6. षष्ठम कात्यायनी यानि मोइया – नवदुर्गा का छठा रूप कात्यायनी है। इसे आयुर्वेद में कई नामों से जाना जाता है जैसे अम्बा, अम्बालिका, अम्बिका। इसके अलावा इसे मोइया अर्थात माचिका भी कहते हैं। यह कफ, पित्त, अधिक विकार एवं कंठ के रोग का नाश करती है। इससे पीड़ित रोगी को इसका सेवन व कात्यायनी की आराधना करना चाहिए।

7. सप्तम कालरात्रि यानि नागदौन – दुर्गा का सप्तम रूप कालरात्रि है जिसे महायोगिनी, महायोगीश्वरी कहा गया है। यह नागदौन औषधि के रूप में जानी जाती है। सभी प्रकार के रोगों की नाशक सर्वत्र विजय दिलाने वाली मन एवं मस्तिष्क के समस्त विकारों को दूर करने वाली औषधि है।इस पौधे को व्यक्ति अपने घर में लगाने पर घर के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यह सुख देने वाली एवं सभी विषों का नाश करने वाली औषधि है। इस कालरात्रि की आराधना प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति को करना चाहिए।

8. अष्टम महागौरी यानि तुलसी – नवदुर्गा का अष्टम रूप महागौरी है, जिसे प्रत्येक व्यक्ति औषधि के रूप में जानता है क्योंकि इसका औषधि नाम तुलसी है जो प्रत्येक घर में लगाई जाती है। तुलसी सात प्रकार की होती है- सफेद तुलसी, काली तुलसी, मरुता, दवना, कुढेरक, अर्जक और षटपत्र। ये सभी प्रकार की तुलसी रक्त को साफ करती है एवं हृदय रोग का नाश करती है।
तुलसी सुरसा ग्राम्या सुलभा बहुमंजरी।
अपेतराक्षसी महागौरी शूलघ्‍नी देवदुन्दुभि:
तुलसी कटुका तिक्ता हुध उष्णाहाहपित्तकृत् ।
मरुदनिप्रदो हध तीक्षणाष्ण: पित्तलो लघु:।
इस देवी की आराधना हर सामान्य एवं रोगी व्यक्ति को करना चाहिए।

9. नवम सिद्धिदात्री यानि शतावरी – नवदुर्गा का नवम रूप सिद्धिदात्री है, जिसे नारायणी या शतावरी कहते हैं। शतावरी बुद्धि बल एवं वीर्य के लिए उत्तम औषधि है। यह रक्त विकार एवं वात पित्त शोध नाशक और हृदय को बल देने वाली महाऔषधि है। सिद्धिदात्री का जो मनुष्य नियमपूर्वक सेवन करता है। उसके सभी कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति को सिद्धिदात्री देवी की आराधना करना चाहिए।
इस प्रकार प्रत्येक देवी आयुर्वेद की भाषा में मार्कण्डेय पुराण के अनुसार नौ औषधि के रूप में मनुष्य की प्रत्येक बीमारी को ठीक कर रक्त का संचालन उचित एवं साफ कर मनुष्य को स्वस्थ करती है। अत: मनुष्य को इनकी आराधना एवं सेवन करना चाहिए।

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  1. नवरात्रि व्रत पूजा विधि, नवरात्र दुर्गा पूजन सामग्री, नवरात्रि घटस्थापना एवं पूजा विधि, कन्यापूजन, नवरात्र व्रत का भोजन, व्रत का प्रसाद, नौ दुर्गा के 9 मंत्र, नवरात्र की आरती.
  2. नवदुर्गा के 9 रूप हैं यह 9 दिव्य औषधियां, Navdurga Ke 9 Roop Hai Ye 9 Divya Ausdhiyan, दिव्य जड़ी बूटी, औषधीय पौधों के नाम, दिव्य गुणों वाली 9 औषधियां.
  3. नवरात्र का पहला दिन (नवरात्रि प्रथमा तिथि)-Navratri 1st Day: मां शैलपुत्री की पूजा विधि, शैलपुत्री के मंत्र, शैलपुत्री की कथा, शैलपुत्री की आरती, Maa Shailputri Puja Vidhi.
  4. नवरात्रि का दूसरा दिन (द्वितीय नवरात्र)-Navratri 2nd Day: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, ब्रह्मचारिणी के मंत्र, ब्रह्मचारिणी की कथा, ब्रह्मचारिणी की आरती, Maa Brahmacharini.
  5. नवरात्रि तीसरा दिन (नवरात्रि तृतीय तिथि) Navratri 3rd Day: माता चंद्रघंटा की पूजा विधि, माता चंद्रघंटा के मंत्र, मां चंद्रघंटा की कथा, मां चंद्रघंटा की आरती.
  6. नवरात्रि चौथा दिन चतुर्थी तिथि-Navratri 4th Day: माँ कुष्मांडा की पूजा विधि, मां कुष्मांडा के मंत्र, माँ कुष्मांडा व्रत कथा, मां कुष्मांडा की आरती, माता कुष्मांडा की पूजा का महत्व.
  7. नवरात्रि का पांचवा दिन नवरात्रि पंचमी-Navratri 5th Day: मां स्कंदमाता की पूजा विधि, मां स्कंदमाता के मंत्र, मां स्कंदमाता की कथा, मां स्कंदमाता की आरती.
  8. नवरात्रि छठा दिन षष्ठी तिथि -Navratri 6th Day: मां कात्यायनी की पूजा विधि, मां कात्यायनी के मंत्र, माता कात्यायनी की कथा, मां कात्यायनी की आरती.
  9. नवरात्रि सातवां दिन सप्तमी पूजा-Navratri 7th Day: मां कालरात्रि की पूजा विधि, मां कालरात्रि के मंत्र, माता कालरात्रि की कथा, मां कालरात्रि की आरती.
  10. नवरात्रि आठवां दिन दुर्गा अष्टमी-Navratri 8th Day: दुर्गा अष्टमी की पूजा विधि (Durga Ashtami Puja Vidhi) महाष्टमी पूजा विधि, महागौरी पूजा विधि, महागौरी की व्रत कथा.
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नवरात्रि का पहला दिन -Navratri 1st Day (नवरात्रि प्रथमा तिथि)
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मान्यता है कि नवरात्र में पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा करने से व्यक्ति को चंद्र दोष से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन घरों में घटस्थापना की जाती है। कलश या घट स्थापना के पश्चात मां शैलपुत्री की पूजा विधि विधान से की जाती है। माता शैल पुत्री शांति और उत्साह देने वाली और भय नाश करने वाली हैं। उनकी आराधना से भक्तों को यश, कीर्ति, धन, विद्या और मोक्ष की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं मां शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए दिनचर्या, पूजाविधि , मां के मंत्र, कथा, आरती व महत्व के बारे में…

नवरात्र व्रत के पहले दिन कैसी हो आपकी दिनचर्या
नवरात्रि में आहार और दिनचर्या का विशेष महत्व है. ऐसा माना जाता है कि बिना इसके नवरात्रि का शुभ फल नहीं मिल पाता. नवरात्रि में भक्त नौ दिनों तक फलाहार व्रत करते हैं तो कुछ भक्त निर्जला उपवास भी करते हैं. नवरात्र में पूरे नौ दिन तक व्रत रखना आसान बात नहीं है इसलिए यह व्रत बहुत ही कठिन माना जाता है. इन नौं दिनों में माता आदिशक्ति भवानी की कृपा प्राप्त करने के लिए केवल पूजा अर्चना करना ही काफी नहीं होता है बल्कि अपने व्यवहार और दिनचर्या का भी खास ध्यान रखना चाहिए. तभी आपको माता रानी की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है. जानिए नवरात्र व्रत के दौरान कैसी हो आपकी दिनचर्या-

1. बाकि के दिन भले ही आप कुछ देर अधिक सो लें, लेकिन अगर नवरात्र का व्रत करते हैं तो आपको ब्रह्म मुहूर्त में ही सोकर उठ जाना चाहिए. पूरे नौ दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें घर की सफाई करें और नहाएं.
2. इसके बाद सूर्य देव को जल दें, पूरे घर में गौमूत्र और गंगाजल का छिड़काव करें और फिर अपने घर के पूजास्थल या मंदिर में जाकर विधि विधान से मैय्या की पूजा करें.
3. व्रत-उपवास में माता जी की पूजा करने के बाद ही फलाहार करें. यानि सुबह माता जी की पूजा के बाद दूध और कोई फल ले सकते हैं. नमक न खाएं या खाने में सेंधा नमक का ही प्रयोग करें.
4. उसके बाद दिनभर मन ही मन माता जी का ध्यान करते रहें. नवरात्रि के दौरान अपने मन को पूर्णतया मां दुर्गा के ध्यान में लगाना चाहिए.
5. इस समय कोई भी नकारात्मक विचार मन में न लाएं और न ही किसी के प्रति अपने मन में दुर्भावना रखें. शांत रहने की कोशिश करें. झूठ न बोलें और गुस्सा करने से भी बचें. अपनी इंद्रियों पर काबु रखें और मन में कामवासना जैसे गलत विचारों को न आने दें.
6. व्रत रखने वाले लोगों को दिन में नहीं सोना चाहिए.

7. शाम को फिर से माता जी की पूजा और आरती करें. इसके बाद एक बार और फलाहार (फल खाना) कर सकते हैं. अगर न कर सके तो शाम की पूजा के बाद एक बार भोजन कर सकते हैं.
8. माता जी की पूजा के बाद रोज 1 कन्या की पूजा करें और भोजन करवाकर उसे दक्षिणा दें.
नवरात्रि के दौरान तामसिक भोजन नहीं करें. यानि इन 9 दिनों में लहसुन, प्याज, मांसाहार, ठंडा और झूठा भोजन नहीं करना चाहिए.
9. नवरात्रि के नौं दिनों तक साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इन दिनों में क्षौरकर्म न करें. यानि बाल और नाखून न कटवाएं और शेव भी न बनावाएं. इनके साथ ही तेल मालिश भी न करें. नवरात्रि के दौरान दिन में नहीं सोएं.
10. नवरात्रि के व्रत-उपवास बीमार, बच्चों और बूढ़ों को नहीं करना चाहिए. क्योंकि इनसे नियम पालन नहीं हो पाते हैं.
11. घर के मंदिर में कभी भी अंधेरा न रखें. किसी न किसी तरह से उसमें रोशनी आती रहे.
12. कभी भी घर को अकेला न छोड़ें. अखंड ज्योति जला रहे हैं तो उसमें समय समय पर घी डालते रहें.
13. व्रत रखने वाले लोगों को नौ दिन विधि विधान मां की पूजा करनी चाहिए और कथा भी सुनी या पढ़नी चाहिए.

नवरात्रि पर घटस्थापना विधि
1. नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि पर ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि के बाद साफ कपड़े पहनें. पूजा स्थल की साफ-सफाई करके ईशान कोण में एक लकड़ी की चौकी बिछाएं.
2. इसके बाद एक मिट्टी का चौड़े मुंह वाला बर्तन लेकर उसमें मिट्टी रखें. इस मिट्टी के पात्र में थोड़ा सा पानी डालकर मिट्टी गिली करके उसमें जौ बो दें.
3. अब उसके ऊपर एक मिट्टी का कलश या फिर पीतल के कलश में जल भरें और उसके ऊपरी भाग (गर्दन) में कलावा बांधें.
4. कलश में एक बताशा, पूजा की सुपारी, लौंग का जोड़ा और एक सिक्का डालें. अब कलश के ऊपर आम या अशोक के पत्तें लगाएं.
5. इसके बाद एक जटा वाला नारियल लेकर उसके ऊपर लाल कपड़ा लपेटकर मौली बांधकर कलश के ऊपर रख दें. और सबसे पहले गणपति वंदन करें और कलश पर स्वास्तिक बनाएं.
6. घटस्थापना पूरी होने के पश्चात मां दुर्गा का आह्वान करते हुए विधि-विधान से माता शैलपुत्री का पूजन करें.
7. नवरात्र के खत्म होने पर कलश के जल का घर में छींटा मारें और कन्या पूजन के बाद प्रसाद वितरण करें.

मां शैलपुत्री की पूजा विधि
मां शैलपुत्री की अराधना करने से पहले चौकी पर मां शैलपुत्री की तस्वीर या प्रतिमा को स्थापित करें। इसके बाद उस पर एक कलश स्थापित करें। कलश के ऊपर नारियल और पान के पत्ते रख कर एक स्वास्तिक बनाएं। इसके बाद कलश के पास अंखड ज्योति जला कर ऊँ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ओम् शैलपुत्री देव्यै नम: मंत्र का जाप करें। इसके बाद मां को सफेद फूल की माला अर्पित करते हुए मां को सफेद रंग का भोग जैसे खीर या मिठाई आदि लगाएं। इसेक बाद माता कि कथा सुनकर उनकी आरती करें। शाम को मां के समक्ष कपूर जलाकर हवन करें।

शैलपुत्री की पूजा का महत्व
मां शैलपुत्री के मस्तिष्क पर अर्धचन्द्र्मा विराजित है। इसलिए यदि जातक की कुंडली में चन्द्रमा निर्बल है, तो उसे बलिष्ठ करने के लिए मां शैलपुत्री की आराधना अति-उत्तम है। देवी शैलपुत्री के हाथ में सुशोभित त्रिशूल जातक की कुंडली के छठे भाव जो कि शत्रुओं का भाव है, उसे निर्बल करता है, अत : शत्रुओं को परास्त करने के लिए भी मां शैलपुत्री की आराधना करनी चाहिए। मां के हाथ में उपस्थित कमल पुष्प, जातक की कुंडली के द्वादश भाव, जो की कुंडली का अंतिम भाव है का प्रतीक है, द्वादश भाव को भी बलिष्ठ करती हैं माँ शैलपुत्री। मां शैलपुत्री देवी पार्वती का ही स्वरुप हैं जो सहज भाव से पूजन करने से शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को  मनोवांछित फल प्रदान करती हैं। मन विचलित होता हो और आत्मबल में कमी हो तो मां शैलपुत्री की आराधना करने से लाभ मिलता हैं।

नवरात्रि के पहले दिन उपवास में क्या खाये
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री (Navratri First Day Maa Shailputri) का होता है. इस दिन देवी मां की आराधना कर भक्त उचित मात्रा में दूध, पनीर भरा हुआ कुट्टू का चीला, नारियल पानी और सेब, सब्जियों के साथ साबुदाना खिचड़ी, दही, शकरकंद का चाट आवश्यकतानुसार सुबह 7 बजे, दोपहर 2 बजे और रात्रि में 8 बजे समय के अनुसार खा सकते हैं.

प्रतिपदा का रंग है पीला-
पीला रंग ब्रह्स्पति का प्रतीक है। किसी भी मांगलिक कार्य में इस रंग की उपयोगिता सर्वाधिक मानी गई है। इस रंग का संबंध जहां वैराग्य से है वहीं पवित्रता और मित्रता भी इसके दो प्रमुख गुण हैं।
ये लगाएं मां शैलपुत्री को भोग
मां शैलपुत्री के चरणों में गाय का घी अर्पित करने से भक्तों को आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है और उनका मन एवं शरीर दोनों ही निरोगी रहता है।
मंत्र Mantra, प्रथम शैलपुत्री मंत्र
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
प्रार्थना – Prarthana
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
स्तुति – Stuti
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ध्यान – Dhyana
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
पूणेन्दु निभाम् गौरी मूलाधार स्थिताम् प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्।
पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता॥
प्रफुल्ल वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां स्नेमुखी क्षीणमध्यां नितम्बनीम्॥

स्त्रोत – Stotra
प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागरः तारणीम्।
धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
त्रिलोजननी त्वंहि परमानन्द प्रदीयमान्।
सौभाग्यरोग्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह विनाशिनीं।
मुक्ति भुक्ति दायिनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥

कवच – Kavacha
ॐकारः में शिरः पातु मूलाधार निवासिनी।
हींकारः पातु ललाटे बीजरूपा महेश्वरी॥
श्रींकार पातु वदने लावण्या महेश्वरी।
हुंकार पातु हृदयम् तारिणी शक्ति स्वघृत।
फट्कार पातु सर्वाङ्गे सर्व सिद्धि फलप्रदा॥

मां शैलपुत्री की कथा
एक बार प्रजापति दक्ष ने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया। इसमें उन्होंने सारे देवताओं को अपना-अपना यज्ञ-भाग प्राप्त करने के लिए निमंत्रित किया, लेकिन शंकरजी को उन्होंने इस यज्ञ में निमंत्रित नहीं किया। सती ने जब सुना कि उनके पिता एक अत्यंत विशाल यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे हैं, तब वहां जाने के लिए उनका मन विकल हो उठा।
अपनी यह इच्छा उन्होंने शंकरजी को बताई। सारी बातों पर विचार करने के बाद उन्होंने कहा- प्रजापति दक्ष किसी कारण से हमसे नाराज हैं। अपने यज्ञ में उन्होंने सारे देवताओं को निमंत्रित किया है। उनके यज्ञ-भाग भी उन्हें समर्पित किए हैं, लेकिन हमें जान-बूझकर नहीं बुलाया है। कोई सूचना तक नहीं भेजी है। ऐसी स्थिति में तुम्हारा वहां जाना सही नहीं होगा।
शंकरजी के यह कहने से भी सती नहीं मानी। उनका प्रबल आग्रह देखकर भगवान शंकरजी ने उन्हें वहां जाने की अनुमति दे दी। सती ने पिता के घर पहुंचकर देखा कि कोई भी उनसे आदर और प्रेम के साथ बातचीत नहीं कर रहा है। केवल उनकी माता ने स्नेह से उन्हें गले लगाया। बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव भरे हुए थे।
परिजनों के इस व्यवहार से उनके मन को बहुत दुख पहुंचा। यह सब देखकर सती का हृदय क्षोभ, ग्लानि और क्रोध से संतप्त हो उठा। उन्होंने सोचा भगवान शंकरजी की बात न मान, यहां आकर मैंने बहुत बड़ी गलती की है। वे अपने पति भगवान शंकर के इस अपमान को सह न सकीं। उन्होंने अपने उस रूप को तत्क्षण वहीं योगाग्नि द्वारा जलाकर भस्म कर दिया। वज्रपात के समान इस दारुण-दुःखद घटना को सुनकर शंकरजी ने क्रुद्ध हो अपने गणों को भेजकर दक्ष के उस यज्ञ का पूर्णतः विध्वंस करा दिया।
सती ने योगाग्नि द्वारा अपने शरीर को भस्म कर अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्म लिया। इस बार वे शैलपुत्री नाम से विख्यात हुर्ईं।

मां शैलपुत्री की आरती – Maa Shailputri Ki Arati
शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी।
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।

नवरात्रि व्रत में करें इन 6 नियमों का पालन-
1- कन्याओं/महिलाओं का सम्मान करें
भारतीय परंपरा में कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना गया है. यही कारण है कि नवरात्रि में कन्या पूजन या कंजका पूजन कर लोग पुण्य की प्राप्ति करते हैं. नवरात्रि के दिनों में सभी महिलाओं में किसी न किसी देवी का स्वरूप होता है. इसलिए किसी भी कन्या या महिला के प्रति असम्मान का भाव मन में भी नहीं आना चाहिए. कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उन्हें मन ही मन प्रणाम करना चाहिए. हमारे शास्त्रों में यहां तक कहा गया है कि यत्र नार्यास्तु पूजयंते रमंते तत्र देवता.
2- धार्मिक कार्यों में मन लगाएं
माना जाता है कि व्रत करने वाले को नवरात्रि नौ दिनों तक अपना समय भौतिकता वाली बातों में न लगाकर धार्मिक ग्रंथों का अध्यन करना चाहिए. इन दिनों दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तसती का पाठ कर सकते हैं.

3- घर अकेला न छोड़ें
यदि आपने घर में कलश (घट) स्थापना की है या माता की चौकी या अखंड ज्योति लगा रखी है तो उसके पास किसी एक व्यक्ति का रहना जरूरी होता है. इस दौरान नौ दिनों तक घर में किसी एक व्यक्ति का रहना जरूरी होता है. साथ व्रत के दौरान दिन में सोना भी मना है.
4- तामसिक भोजन से परहेज करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के पावन दिनों में सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. आहार, व्यवहार और विचार में आपके सात्विकता होना जरूरी है. आप इन दिनों तामसिक प्रवृत्ति का भोजन जैसे नॉनवेज, प्याज-लहसुन और मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए. कम से कम नवरात्रि के नौ दिनों तक पूरी तरह से सात्विक आहार लेना चाहिए.

5- व्रत के दौरान गुस्सा न करें
नवरात्रि के दिनों में बहुत से लोग क्रोध पर काबू नहीं रख पाते और कलह का वातावरण पैदा करते हैं. ऐसे लोगों को कम से कम नौ दिनों तक व्रत के दौरान गुस्सा करने से बचना चाहिए. हो सकते ज्यादा से ज्यादा मौन व्रत रखें या कम से कम बात करें. व्रत में शारीरिक ऊर्जा की कमी होती है ऐसे में व्रत के दौरान ज्यादा बोलने से आपके शरीर में और ज्यादा कमजोरी आ सकती है. इसलिए शांतिपूर्वक व्रत करना उत्तम माना गया है.
6 – काम वासना पर कंट्रोल रखें
नवरात्रि के दिनों में काम भावना पर नियंत्रण रखने को भी जरूरी बताया गया. नवरात्रि के दौरान महिलाओं और पुरुषों दोनों को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. संभव हो तो अलग-अलग बिस्तर पर सोना चाहिए.

माता शैलपुत्री की कथा और पूजा विधि (Video Credit- The Divine Tales)

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  4. नवरात्रि का दूसरा दिन (द्वितीय नवरात्र)-Navratri 2nd Day: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, ब्रह्मचारिणी के मंत्र, ब्रह्मचारिणी की कथा, ब्रह्मचारिणी की आरती, Maa Brahmacharini.
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नवरात्रि का दूसरा दिन द्वितीय नवरात्र- Navratri 2nd Day
नवरात्रि के दूसरे दिन माता दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की जाती है. ब्रह्म का अर्थ है तपस्या व चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली देवी. मां ब्रह्मचारिणी की विधिवत पूजा करने से ज्ञान सदाचार लगन, एकाग्रता और संयम रखने की शक्ति प्राप्त होती है और व्यक्ति अपने कर्तव्य पथ से भटकता नहीं है. मां ब्रह्मचारिणी की भक्ति से लंबी आयु का वरदान प्राप्त होता है. आइए जानते हैं मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, मंत्र, आरती व कथा आदि के बारे में…

नवरात्र के दूसरे दिन कैसी हो आपकी दिनचर्या
नवरात्रि में आहार और दिनचर्या का विशेष महत्व है. ऐसा माना जाता है कि बिना इसके नवरात्रि का शुभ फल नहीं मिल पाता. नवरात्रि में भक्त नौ दिनों तक फलाहार व्रत करते हैं तो कुछ भक्त निर्जला उपवास भी करते हैं. नवरात्र में पूरे नौ दिन तक व्रत रखना आसान बात नहीं है इसलिए यह व्रत बहुत ही कठिन माना जाता है. इन नौं दिनों में माता आदिशक्ति भवानी की कृपा प्राप्त करने के लिए केवल पूजा अर्चना करना ही काफी नहीं होता है बल्कि अपने व्यवहार और दिनचर्या का भी खास ध्यान रखना चाहिए. तभी आपको माता रानी की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है. जानिए नवरात्र व्रत के दौरान कैसी हो आपकी दिनचर्या-

1. बाकि के दिन भले ही आप कुछ देर अधिक सो लें, लेकिन अगर नवरात्र का व्रत करते हैं तो आपको ब्रह्म मुहूर्त में ही सोकर उठ जाना चाहिए. पूरे नौ दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें घर की सफाई करें और नहाएं.
2. इसके बाद सूर्य देव को जल दें, पूरे घर में गौमूत्र और गंगाजल का छिड़काव करें और फिर अपने घर के पूजास्थल या मंदिर में जाकर विधि विधान से मैय्या की पूजा करें.
3. व्रत-उपवास में माता जी की पूजा करने के बाद ही फलाहार करें. यानि सुबह माता जी की पूजा के बाद दूध और कोई फल ले सकते हैं. नमक न खाएं या खाने में सेंधा नमक का ही प्रयोग करें.
4. उसके बाद दिनभर मन ही मन माता जी का ध्यान करते रहें. नवरात्रि के दौरान अपने मन को पूर्णतया मां दुर्गा के ध्यान में लगाना चाहिए.
5. इस समय कोई भी नकारात्मक विचार मन में न लाएं और न ही किसी के प्रति अपने मन में दुर्भावना रखें. शांत रहने की कोशिश करें. झूठ न बोलें और गुस्सा करने से भी बचें. अपनी इंद्रियों पर काबु रखें और मन में कामवासना जैसे गलत विचारों को न आने दें.
6. व्रत रखने वाले लोगों को दिन में नहीं सोना चाहिए.

7. शाम को फिर से माता जी की पूजा और आरती करें. इसके बाद एक बार और फलाहार (फल खाना) कर सकते हैं. अगर न कर सके तो शाम की पूजा के बाद एक बार भोजन कर सकते हैं.
8. माता जी की पूजा के बाद रोज 1 कन्या की पूजा करें और भोजन करवाकर उसे दक्षिणा दें.
नवरात्रि के दौरान तामसिक भोजन नहीं करें. यानि इन 9 दिनों में लहसुन, प्याज, मांसाहार, ठंडा और झूठा भोजन नहीं करना चाहिए.
9. नवरात्रि के नौं दिनों तक साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इन दिनों में क्षौरकर्म न करें. यानि बाल और नाखून न कटवाएं और शेव भी न बनावाएं. इनके साथ ही तेल मालिश भी न करें. नवरात्रि के दौरान दिन में नहीं सोएं.
10. नवरात्रि के व्रत-उपवास बीमार, बच्चों और बूढ़ों को नहीं करना चाहिए. क्योंकि इनसे नियम पालन नहीं हो पाते हैं.
11. घर के मंदिर में कभी भी अंधेरा न रखें. किसी न किसी तरह से उसमें रोशनी आती रहे.
12. कभी भी घर को अकेला न छोड़ें. अखंड ज्योति जला रहे हैं तो उसमें समय समय पर घी डालते रहें.
13. व्रत रखने वाले लोगों को नौ दिन विधि विधान मां की पूजा करनी चाहिए और कथा भी सुनी या पढ़नी चाहिए.

मां ब्रह्मचारिणी पूजा विधि (Brahmacharini Puja Vidhi)
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में मां को फूल, अक्षत, रोली, चंदन आदि अर्पण करें. उन्हें दूध, दही, घृत, मधु व शर्करा से स्नान कराएं और इसके देवी को पिस्ते से बनी मिठाई का भोग लगाएं. इसके बाद पान, सुपारी, लौंग अर्पित करें. कहा जाता है कि मां पूजा करने वाले भक्त जीवन में सदा शांत चित्त और प्रसन्न रहते हैं. उन्हें किसी प्रकार का भय नहीं सताता.

मां ब्रह्मचारिणी का मंत्र, द्वितीय ब्रह्मचारिणी मंत्र (Brahmacharini Mantra)
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
स्तुति – Stuti
या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
प्रार्थना – Prarthana
दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

ध्यान – Dhyana
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
जपमाला कमण्डलु धरा ब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालङ्कार भूषिताम्॥
परम वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन।
पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

स्त्रोत – Stotra
तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्।
ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
शङ्करप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी।
शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥

कवच – Kavacha
त्रिपुरा में हृदयम् पातु ललाटे पातु शङ्करभामिनी।
अर्पण सदापातु नेत्रो, अर्धरी च कपोलो॥
पञ्चदशी कण्ठे पातु मध्यदेशे पातु महेश्वरी॥
षोडशी सदापातु नाभो गृहो च पादयो।
अङ्ग प्रत्यङ्ग सतत पातु ब्रह्मचारिणी।

दूसरे दिन व्रत में क्या खाएं
नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी Navratri 2nd Day Maa Brahmacharini का होता है. इस दिन बनाना लस्सी, बेक्ड साबुदाना और आलू वड़ा, ग्रीन टी, अमरूद, कुट्टू की रोटी, दही वाले आलू, अनार का रायता, मिंट चटनी के साथ ग्रिल्ड पनीर, लौकी की खीर समयानुसार सुबह 7 बजे, दोपहर 2 बजे और रात्रि में 8 बजे खा सकते हैं.

ब्रह्मचारिणी पूजा का महत्व (Brahmacharini Puja Mahtva)
देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से मनुष्य मे तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है. जीवन की कठिन समय मे भी उसका मन कर्तव्य पथ से विचलित नही होता है. देवी अपने साधको की मलिनता, दुर्गुणों ओर दोषो को दूर करती है. देवी की कृपा से सर्वत्र सिद्धि और विजय प्राप्त होती है. जो व्यक्ति भक्ति भाव एवं श्रद्धा से दुर्गा पूजा के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं उन्हें सुख, आरोग्य की प्राप्ति होती है और मन प्रसन्न रहता है, उसे किसी प्रकार का भय नहीं सताता है. सर्वत्र सिद्धि और विजय की प्राप्ति होती है, तथा जीवन की अनेक समस्याओं एवं परेशानियों का नाश होता है.

देवी ब्रह्मचारिणी कथा (Brahmacharini Katha in Hindi)
माता ब्रह्मचारिणी हिमालय और मैना की पुत्री हैं. इन्होंने देवर्षि नारद जी के कहने पर भगवान शंकर की ऐसी कठोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने इन्हें मनोवांछित वरदान दिया. जिसके फलस्वरूप यह देवी भगवान भोले नाथ की वामिनी अर्थात पत्‍‌नी बनी. जो व्यक्ति अध्यात्म और आत्मिक आनंद की कामना रखते हैं उन्हें इस देवी की पूजा से सहज यह सब प्राप्त होता है. जो व्यक्ति भक्ति भाव एवं श्रद्धादुर्गा पूजा के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करते हैं उन्हें सुख, आरोग्य की प्राप्ति होती है और प्रसन्न रहता है, उसे किसी प्रकार का भय नहीं सताता है.

मां ब्रह्मचारिणी की आरती (Brahmacharini ki Aarti)
जय अम्बे ब्रह्मचारिणी माता। जय चतुरानन प्रिय सुख दाता॥
ब्रह्मा जी के मन भाती हो। ज्ञान सभी को सिखलाती हो॥
ब्रह्म मन्त्र है जाप तुम्हारा। जिसको जपे सरल संसारा॥
जय गायत्री वेद की माता। जो जन जिस दिन तुम्हें ध्याता॥
कमी कोई रहने ना पाए। उसकी विरति रहे ठिकाने॥
जो तेरी महिमा को जाने। रद्रक्षा की माला ले कर॥
जपे जो मन्त्र श्रद्धा दे कर। आलस छोड़ करे गुणगाना॥
माँ तुम उसको सुख पहुँचाना। ब्रह्मचारिणी तेरो नाम॥
पूर्ण करो सब मेरे काम। भक्त तेरे चरणों का पुजारी॥
रखना लाज मेरी महतारी।

नवरात्रि व्रत के नियम
1. पूरे नौ दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और नहाएं. इसके बाद सूर्य देव को जल दें
2. व्रत रखने वाले इस बात का भी ध्यान रखें कि वे पूरे नौ दिन तक नाखून, दाढ़ी-मूंछ और सिर के बाल न कटवाएं.
3. चमड़े के सामान जैसे बेल्ट, चप्पल, जूते या बैग का इस्तेमाल न करें.
4. व्रत रखने वाले लोगों को नींबू भी नहीं काटना चाहिए. साथ ही प्याज, लहसुन और नॉनवेज से दूरी बनाकर रखें.
5. व्रत रखने वाले लोग साफ सुथरे रहें. अनाज और नमक का बिल्कुल भी सेवन न करें. खाने में सेंधा नमक प्रयोग कर सकते हैं.
6. व्रत रखने वाले लोगों को दिन में नहीं सोना चाहिए.
7. व्रत-उपवास रखने वाले लोग माता जी की पूजा करने के बाद ही फलाहार ग्रहण करें. अगर संभव न हो तो शाम की पूजा के बाद एक बार भोजन कर ले.
8. नवरात्रि के दौरान अपने मन को पूर्णतया मां दुर्गा के ध्यान में लगाना चाहिए. इस समय कोई भी नकारात्मक विचार मन में न लाएं और न ही किसी के प्रति अपने मन में दुर्भावना रखें.
9. व्रत के दौरान शांत रहने की कोशिश करें. झूठ न बोलें और गुस्सा करने से भी बचें. अपनी इंद्रियों पर काबु रखें और मन में कामवासना जैसे गलत विचारों को न आने दें.

माता ब्रह्मचारिणी की कथा और पूजा विधि (Video Credit- Indian Rituals)

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  1. नवरात्रि व्रत पूजा विधि, नवरात्र दुर्गा पूजन सामग्री, नवरात्रि घटस्थापना एवं पूजा विधि, कन्यापूजन, नवरात्र व्रत का भोजन, व्रत का प्रसाद, नौ दुर्गा के 9 मंत्र, नवरात्र की आरती.
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  3. नवरात्र का पहला दिन (नवरात्रि प्रथमा तिथि)-Navratri 1st Day: मां शैलपुत्री की पूजा विधि, शैलपुत्री के मंत्र, शैलपुत्री की कथा, शैलपुत्री की आरती, Maa Shailputri Puja Vidhi.
  4. नवरात्रि का दूसरा दिन (द्वितीय नवरात्र)-Navratri 2nd Day: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, ब्रह्मचारिणी के मंत्र, ब्रह्मचारिणी की कथा, ब्रह्मचारिणी की आरती, Maa Brahmacharini.
  5. नवरात्रि तीसरा दिन (नवरात्रि तृतीय तिथि) Navratri 3rd Day: माता चंद्रघंटा की पूजा विधि, माता चंद्रघंटा के मंत्र, मां चंद्रघंटा की कथा, मां चंद्रघंटा की आरती.
  6. नवरात्रि चौथा दिन चतुर्थी तिथि-Navratri 4th Day: माँ कुष्मांडा की पूजा विधि, मां कुष्मांडा के मंत्र, माँ कुष्मांडा व्रत कथा, मां कुष्मांडा की आरती, माता कुष्मांडा की पूजा का महत्व.
  7. नवरात्रि का पांचवा दिन नवरात्रि पंचमी-Navratri 5th Day: मां स्कंदमाता की पूजा विधि, मां स्कंदमाता के मंत्र, मां स्कंदमाता की कथा, मां स्कंदमाता की आरती.
  8. नवरात्रि छठा दिन षष्ठी तिथि -Navratri 6th Day: मां कात्यायनी की पूजा विधि, मां कात्यायनी के मंत्र, माता कात्यायनी की कथा, मां कात्यायनी की आरती.
  9. नवरात्रि सातवां दिन सप्तमी पूजा-Navratri 7th Day: मां कालरात्रि की पूजा विधि, मां कालरात्रि के मंत्र, माता कालरात्रि की कथा, मां कालरात्रि की आरती.
  10. नवरात्रि आठवां दिन दुर्गा अष्टमी-Navratri 8th Day: दुर्गा अष्टमी की पूजा विधि (Durga Ashtami Puja Vidhi) महाष्टमी पूजा विधि, महागौरी पूजा विधि, महागौरी की व्रत कथा.
  11. नवरात्रि का नौवां दिन नवमी-Navratri 9th Day Navratri Last Day: महानवमी पूजा विधि, मां सिद्धिदात्री पूजा विधि, दुर्गा नवमी पूजा (Durga Navami) मां सिद्धिदात्री की कथा.
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  19. राम चालीसा, Ram Chalisa, श्री राम चालीसा, Shri Ram Chalisa, राम चालीसा पाठ, Ram Chalisa Path, श्री राम चालीसा इन हिंदी, Shree Ram Chalisa In Hindi.
  20. कृष्ण चालीसा, Krishna Chalisa, श्री कृष्ण चालीसा, Shri Krishna Chalisa, कृष्ण चालीसा पाठ, Krishna Chalisa Path, श्री कृष्ण चालीसा इन हिंदी, Shree Krishna Chalisa In Hindi.
  21. श्री शिव चालीसा, Shri Shiv Chalisa, श्री शिव भगवान का चालीसा, शिव चालीसा, Shri Shiv Bhagwan Chalisa, श्री शिव चालीसा लिरिक्स, Shri Shiv Chalisa Lyrics.
Maa Chandhghanta

नवरात्रि तीसरा दिन नवरात्रि तृतीय तिथि-Navratri 3rd Day: माता चंद्रघंटा की पूजा विधि, तृतीय चंद्रघंटा मंत्र, माता चंद्रघंटा के मंत्र, मां चंद्रघंटा की कथा, मां चंद्रघंटा की आरती, माता चंद्रघंटा की पूजा का महत्व, Maa Chandraghanta Puja Vidhi, Maa Chandraghanta Mantra, Maa Chandraghanta Ki Aarti, Mata Chandraghanta Ki Katha in Hindi

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नवरात्रि तीसरा दिन (नवरात्रि तृतीय तिथि) Navratri 3rd Day
नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजा- अर्चना की जाती है। इस पूरे विधिविधान से पूजा करने पर माता अपने भक्त को निरोग और लंबी आयु का वरदान देती है। इसके साथ ही मां आध्यात्मिक शक्ति, आत्मविश्वास, मन पर नियंत्रण भी बढ़ाती हैं और शत्रुओं से रक्षा करती हैं। मां चंद्रघंटा शेर पर सवारी करती हैं और इनके दसों हाथों में अस्त्र-शस्त्र हैं। मां के माथे पर चंद्रमा विराजमान है जो उनका रूप और सुंदर बनाता है। इस दिन मणिपुर चक्र को प्रबल करने के लिए साधना की जाती है। मन, कर्म, वचन शुद्ध करके पूजा करने वालों के सब पाप खत्म हो जाते हैं।

नवरात्र के तीसरे दिन कैसी हो आपकी दिनचर्या
नवरात्रि में आहार और दिनचर्या का विशेष महत्व है. ऐसा माना जाता है कि बिना इसके नवरात्रि का शुभ फल नहीं मिल पाता. नवरात्रि में भक्त नौ दिनों तक फलाहार व्रत करते हैं तो कुछ भक्त निर्जला उपवास भी करते हैं. नवरात्र में पूरे नौ दिन तक व्रत रखना आसान बात नहीं है इसलिए यह व्रत बहुत ही कठिन माना जाता है. इन नौं दिनों में माता आदिशक्ति भवानी की कृपा प्राप्त करने के लिए केवल पूजा अर्चना करना ही काफी नहीं होता है बल्कि अपने व्यवहार और दिनचर्या का भी खास ध्यान रखना चाहिए. तभी आपको माता रानी की पूर्ण कृपा प्राप्त होती है. जानिए नवरात्र व्रत के दौरान कैसी हो आपकी दिनचर्या-

1. बाकि के दिन भले ही आप कुछ देर अधिक सो लें, लेकिन अगर नवरात्र का व्रत करते हैं तो आपको ब्रह्म मुहूर्त में ही सोकर उठ जाना चाहिए. पूरे नौ दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें घर की सफाई करें और नहाएं.
2. इसके बाद सूर्य देव को जल दें, पूरे घर में गौमूत्र और गंगाजल का छिड़काव करें और फिर अपने घर के पूजास्थल या मंदिर में जाकर विधि विधान से मैय्या की पूजा करें.
3. व्रत-उपवास में माता जी की पूजा करने के बाद ही फलाहार करें. यानि सुबह माता जी की पूजा के बाद दूध और कोई फल ले सकते हैं. नमक न खाएं या खाने में सेंधा नमक का ही प्रयोग करें.
4. उसके बाद दिनभर मन ही मन माता जी का ध्यान करते रहें. नवरात्रि के दौरान अपने मन को पूर्णतया मां दुर्गा के ध्यान में लगाना चाहिए.
5. इस समय कोई भी नकारात्मक विचार मन में न लाएं और न ही किसी के प्रति अपने मन में दुर्भावना रखें. शांत रहने की कोशिश करें. झूठ न बोलें और गुस्सा करने से भी बचें. अपनी इंद्रियों पर काबु रखें और मन में कामवासना जैसे गलत विचारों को न आने दें.
6. व्रत रखने वाले लोगों को दिन में नहीं सोना चाहिए.

7. शाम को फिर से माता जी की पूजा और आरती करें. इसके बाद एक बार और फलाहार (फल खाना) कर सकते हैं. अगर न कर सके तो शाम की पूजा के बाद एक बार भोजन कर सकते हैं.
8. माता जी की पूजा के बाद रोज 1 कन्या की पूजा करें और भोजन करवाकर उसे दक्षिणा दें.
नवरात्रि के दौरान तामसिक भोजन नहीं करें. यानि इन 9 दिनों में लहसुन, प्याज, मांसाहार, ठंडा और झूठा भोजन नहीं करना चाहिए.
9. नवरात्रि के नौं दिनों तक साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इन दिनों में क्षौरकर्म न करें. यानि बाल और नाखून न कटवाएं और शेव भी न बनावाएं. इनके साथ ही तेल मालिश भी न करें. नवरात्रि के दौरान दिन में नहीं सोएं.
10. नवरात्रि के व्रत-उपवास बीमार, बच्चों और बूढ़ों को नहीं करना चाहिए. क्योंकि इनसे नियम पालन नहीं हो पाते हैं.
11. घर के मंदिर में कभी भी अंधेरा न रखें. किसी न किसी तरह से उसमें रोशनी आती रहे.
12. कभी भी घर को अकेला न छोड़ें. अखंड ज्योति जला रहे हैं तो उसमें समय समय पर घी डालते रहें.
13. व्रत रखने वाले लोगों को नौ दिन विधि विधान मां की पूजा करनी चाहिए और कथा भी सुनी या पढ़नी चाहिए.

चंद्रघंटा माता की पूजा विधि Maa Chandraghanta Puja Vidhi
मां को केसर और केवड़ा जल से स्नान करायें। मां को सुनहरे या भूरे रंग के वस्त्र पहनाएं और खुद भी इसी रंग के वस्त्र पहनें। केसर-दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाएं। मां को सफेद कमल और पीले गुलाब की माला अर्पण करें। पंचामृत, चीनी व मिश्री का भोग लगाएं। दुर्गा सप्तशती के अध्याय का पाठ और देवी का कवच पढ़कर चंद्रघंटा बीज मन्त्र का उच्चारण करें. यह बीज मन्त्र इस प्रकार है- एम् श्रीं शक्त्यै नमः इसके बाद माता की आरती कर भक्तजनों को प्रसाद बांट दें.

मंत्र Mantra, तृतीय चंद्रघंटा मंत्र
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
प्रार्थना – Prarthana
पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यम् चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
स्तुति – Stuti
या देवी सर्वभू‍तेषु माँ चन्द्रघण्टा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

ध्यान – Dhyana
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
सिंहारूढा चन्द्रघण्टा यशस्विनीम्॥
मणिपुर स्थिताम् तृतीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
खङ्ग, गदा, त्रिशूल, चापशर, पद्म कमण्डलु माला वराभीतकराम्॥
पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालङ्कार भूषिताम्।
मञ्जीर, हार, केयूर, किङ्किणि, रत्नकुण्डल मण्डिताम॥
प्रफुल्ल वन्दना बिबाधारा कान्त कपोलाम् तुगम् कुचाम्।
कमनीयां लावण्यां क्षीणकटि नितम्बनीम्॥

स्त्रोत – Stotra
आपदुध्दारिणी त्वंहि आद्या शक्तिः शुभपराम्।
अणिमादि सिद्धिदात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्॥
चन्द्रमुखी इष्ट दात्री इष्टम् मन्त्र स्वरूपिणीम्।
धनदात्री, आनन्ददात्री चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्॥
नानारूपधारिणी इच्छामयी ऐश्वर्यदायिनीम्।
सौभाग्यारोग्यदायिनी चन्द्रघण्टे प्रणमाम्यहम्॥

कवच – Kavacha
रहस्यम् शृणु वक्ष्यामि शैवेशी कमलानने।
श्री चन्द्रघण्टास्य कवचम् सर्वसिद्धिदायकम्॥
बिना न्यासम् बिना विनियोगम् बिना शापोध्दा बिना होमम्।
स्नानम् शौचादि नास्ति श्रद्धामात्रेण सिद्धिदाम॥
कुशिष्याम् कुटिलाय वञ्चकाय निन्दकाय च।
न दातव्यम् न दातव्यम् न दातव्यम् कदाचितम्॥

तीसरे दिन व्रत में क्या खाएं
नवरात्रि का तीसरा दिन चंद्रघंटा (Navratri 3rd Day Maa Chandraghantetti) का होता है। इस दिन राजगिरा और मखाना का दलिया, लेमोनेड और पपीता, सावां के चावल का पुलाव और पुदीना का रायता, मिक्स्ड फ्रूट में दही और हनी मिलाकर, पनीर की खीर का आहार उचित मात्रा और समयानुसार सुबह 7 बजे, दोपहर 2 बजे और रात्रि में 8 बजे खा सकते हैं.

देवी चंद्रघंटा की पूजा का महत्व Maa Chandraghanta Ki Puja ka Mahtva
चंद्रघंटा शक्ति की पूजा और साधना से मणिपुर चक्र जाग्रत होता है। इनकी पूजा करने से वीरता-निर्भरता एवं विनम्रता का विकास होता है। इनकी पूजा से मुख, नेत्र तथा सम्पूर्ण काया में कान्ति बढ़ने लगती है। मां चन्द्रघंटा की पूजा करने वालों को शान्ति और सुख का अनुभव होने लगता है। मां चन्द्रघंटा की कृपा से हर तरह के पाप और सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। इनके आशीर्वाद से ऐश्वर्य और समृद्धि के साथ सुखी दाम्पत्य जीवन प्राप्त होता है। इनकी पूजा से विवाह में आ रही अड़चनें दूर होती हैं। मां चंद्रघंण्टा परिवार की रक्षक हैं। इनका संबंध शुक्र से है। यदि आपकी कुंडली में शुक्र दोष हो तो आप मां चंद्रघण्टा की पूजा करें, इससे सभी दोष दूर हो जाएंगे।

माता चंद्रघंटा की कथा Mata Chandraghanta ki Katha in Hindi
देवताओं और असुरों के बीच लंबे समय तक युद्ध चला. असुरों का स्‍वामी महिषासुर था और देवाताओं के इंद्र. महिषासुर ने देवाताओं पर विजय प्राप्‍त कर इंद्र का सिंहासन हासिल कर लिया और स्‍वर्गलोक पर राज करने लगा. इसे देखकर सभी देवतागण परेशान हो गए और इस समस्‍या से निकलने का उपाय जानने के लिए त्र‍िदेव ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश के पास गए.
देवताओं ने बताया कि महिषासुर ने इंद्र, चंद्र, सूर्य, वायु और अन्‍य देवताओं के सभी अधिकार छीन लिए हैं और उन्‍हें बंधक बनाकर स्‍वयं स्‍वर्गलोक का राजा बन गया है. देवाताओं ने बताया कि महिषासुर के अत्‍याचार के कारण अब देवता पृथ्‍वी पर विचरण कर रहे हैं और स्‍वर्ग में उनके लिए स्‍थान नहीं है.
यह सुनकर ब्रह्मा, विष्‍णु और भगवान शंकर को अत्‍यधिक क्रोध आया. क्रोध के कारण तीनों के मुख से ऊर्जा उत्‍पन्‍न हुई. देवगणों के शरीर से निकली ऊर्जा भी उस ऊर्जा से जाकर मिल गई. यह दसों दिशाओं में व्‍याप्‍त होने लगी.
तभी वहां एक देवी का अवतरण हुआ. भगवान शंकर ने देवी को त्र‍िशूल और भगवान विष्‍णु ने चक्र प्रदान किया. इसी प्रकार अन्‍य देवी देवताओं ने भी माता के हाथों में अस्‍त्र शस्‍त्र सजा दिए. इंद्र ने भी अपना वज्र और ऐरावत हाथी से उतरकर एक घंटा दिया. सूर्य ने अपना तेज और तलवार दिया और सवारी के लिए शेर दिया.
देवी अब महिषासुर से युद्ध के लिए पूरी तरह से तैयार थीं. उनका विशालकाय रूप देखकर महिषासुर यह समझ गया कि अब उसका काल आ गया है. महिषासुर ने अपनी सेना को देवी पर हमला करने को कहा. अन्‍य देत्‍य और दानवों के दल भी युद्ध में कूद पड़े.
देवी ने एक ही झटके में ही दानवों का संहार कर दिया. इस युद्ध में महिषासुर तो मारा ही गया, साथ में अन्‍य बड़े दानवों और राक्षसों का संहार मां ने कर दिया. इस तरह मां ने सभी देवताओं को असुरों से अभयदान दिलाया.

चंद्रघंटा माता की आरती Maa Chandraghanta ki Aarti
जय मां चंद्रघंटा सुख धाम
पूर्ण कीजो मेरे काम
चंद्र समान तू शीतल दाती
चंद्र तेज किरणों में समाती
क्रोध को शांत बनाने वाली
मीठे बोल सिखाने वाली
मन की मालक मन भाती हो
चंद्र घंटा तुम वरदाती हो
सुंदर भाव को लाने वाली
हर संकट मे बचाने वाली
हर बुधवार जो तुझे ध्याये
श्रद्धा सहित जो विनय सुनाय
मूर्ति चंद्र आकार बनाएं
सन्मुख घी की ज्योत जलाएं
शीश झुका कहे मन की बाता
पूर्ण आस करो जगदाता
कांची पुर स्थान तुम्हारा
करनाटिका में मान तुम्हारा
नाम तेरा रटू महारानी
‘भक्त’ की रक्षा करो भवानी

नवरात्रि व्रत के नियम
1. पूरे नौ दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठें और नहाएं. इसके बाद सूर्य देव को जल दें
2. व्रत रखने वाले इस बात का भी ध्यान रखें कि वे पूरे नौ दिन तक नाखून, दाढ़ी-मूंछ और सिर के बाल न कटवाएं.
3. चमड़े के सामान जैसे बेल्ट, चप्पल, जूते या बैग का इस्तेमाल न करें.
4. व्रत रखने वाले लोगों को नींबू भी नहीं काटना चाहिए. साथ ही प्याज, लहसुन और नॉनवेज से दूरी बनाकर रखें.
5. व्रत रखने वाले लोग साफ सुथरे रहें. अनाज और नमक का बिल्कुल भी सेवन न करें. खाने में सेंधा नमक प्रयोग कर सकते हैं.
6. व्रत रखने वाले लोगों को दिन में नहीं सोना चाहिए.
7. व्रत-उपवास रखने वाले लोग माता जी की पूजा करने के बाद ही फलाहार ग्रहण करें. अगर संभव न हो तो शाम की पूजा के बाद एक बार भोजन कर ले.
8. नवरात्रि के दौरान अपने मन को पूर्णतया मां दुर्गा के ध्यान में लगाना चाहिए. इस समय कोई भी नकारात्मक विचार मन में न लाएं और न ही किसी के प्रति अपने मन में दुर्भावना रखें.
9. व्रत के दौरान शांत रहने की कोशिश करें. झूठ न बोलें और गुस्सा करने से भी बचें. अपनी इंद्रियों पर काबु रखें और मन में कामवासना जैसे गलत विचारों को न आने दें.

माँ दुर्गा के स्वरूप चन्द्रघंटा माता की पूजा विधि (Video Credit: Indian Rituals)

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  1. नवरात्रि व्रत पूजा विधि, नवरात्र दुर्गा पूजन सामग्री, नवरात्रि घटस्थापना एवं पूजा विधि, कन्यापूजन, नवरात्र व्रत का भोजन, व्रत का प्रसाद, नौ दुर्गा के 9 मंत्र, नवरात्र की आरती.
  2. नवदुर्गा के 9 रूप हैं यह 9 दिव्य औषधियां, Navdurga Ke 9 Roop Hai Ye 9 Divya Ausdhiyan, दिव्य जड़ी बूटी, औषधीय पौधों के नाम, दिव्य गुणों वाली 9 औषधियां.
  3. नवरात्र का पहला दिन (नवरात्रि प्रथमा तिथि)-Navratri 1st Day: मां शैलपुत्री की पूजा विधि, शैलपुत्री के मंत्र, शैलपुत्री की कथा, शैलपुत्री की आरती, Maa Shailputri Puja Vidhi.
  4. नवरात्रि का दूसरा दिन (द्वितीय नवरात्र)-Navratri 2nd Day: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, ब्रह्मचारिणी के मंत्र, ब्रह्मचारिणी की कथा, ब्रह्मचारिणी की आरती, Maa Brahmacharini.
  5. नवरात्रि तीसरा दिन (नवरात्रि तृतीय तिथि) Navratri 3rd Day: माता चंद्रघंटा की पूजा विधि, माता चंद्रघंटा के मंत्र, मां चंद्रघंटा की कथा, मां चंद्रघंटा की आरती.
  6. नवरात्रि चौथा दिन चतुर्थी तिथि-Navratri 4th Day: माँ कुष्मांडा की पूजा विधि, मां कुष्मांडा के मंत्र, माँ कुष्मांडा व्रत कथा, मां कुष्मांडा की आरती, माता कुष्मांडा की पूजा का महत्व.
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  8. नवरात्रि छठा दिन षष्ठी तिथि -Navratri 6th Day: मां कात्यायनी की पूजा विधि, मां कात्यायनी के मंत्र, माता कात्यायनी की कथा, मां कात्यायनी की आरती.
  9. नवरात्रि सातवां दिन सप्तमी पूजा-Navratri 7th Day: मां कालरात्रि की पूजा विधि, मां कालरात्रि के मंत्र, माता कालरात्रि की कथा, मां कालरात्रि की आरती.
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  11. नवरात्रि का नौवां दिन नवमी-Navratri 9th Day Navratri Last Day: महानवमी पूजा विधि, मां सिद्धिदात्री पूजा विधि, दुर्गा नवमी पूजा (Durga Navami) मां सिद्धिदात्री की कथा.
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