मरेंगे तो वहीं जा कर जहां पर जिदगी है: गुलजार, Marenge To Wahin Jaa Kar Jahan Par Zindagi Hai-  Gulzar Poem lyrics in hindi

महामारी लगी थी
घरों को भाग लिए थे सभी मजदूर, कारीगर
मशीनें बंद होने लग गई थीं शहर की सारी
उन्हीं से हाथ पाओं चलते रहते थे
वर्ना जिन्दगी तो गांव ही में बो के आए थे।

वो एकड़ और दो एकड़ जमीं, और पांच एकड़
कटाई और बुआई सब वहीं तो थी

ज्वारी, धान, मक्की, बाजरे सब।
वो बँटवारे, चचेरे और ममेरे भाइयों से
फ़साद नाले पे, परनालों पे झगड़े
लठैत अपने, कभी उनके।

वो नानी, दादी और दादू के मुकदमे
सगाई, शादियां, खलियान,
सूखा, बाढ़, हर बार आसमां बरसे न बरसे।

मरेंगे तो वहीं जा कर जहां पर जिदगी है
यहां तो जिस्म ला कर प्लग लगाए थे !

निकालें प्लग सभी ने,
‘ चलो अब घर चलें ‘ – और चल दिये सब,
मरेंगे तो वहीं जा कर जहां पर जिदगी है !

– गुलजार

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