1 Month Pregnancy Rokne Ki Tablet ,Abortion Methods in Hindi abortion ke prakaar tareeke 1 mahine ki pregnancy rokne ki tablet

महिला स्वास्थ्य व गर्भपात, गर्भपात के प्रकार, तरीके व प्रक्रिया, 1 Month Pregnancy Rokne Ki Tablet, 1 Month प्रेगनेंसी रोकने के लिए टेबलेट नाम, One Month Pregnancy Ko Rokne Ki Tablet, बच्चा गिराने की दवा, भारत में गर्भपात कानून, गर्भपात का अधिकार, गर्भपात की प्रक्रिया, गर्भपात प्रक्रिया, Abortion Ke Tarike, Bacha Girane Ki Dva, Mahine Ki Pregnancy Rokne Ki Tablet, Bacha Girane Ki Tablet Name List Price

महिला स्वास्थ्य व गर्भपात, गर्भपात के प्रकार, तरीके व प्रक्रिया, 1 Month Pregnancy Rokne Ki Tablet, 1 Month प्रेगनेंसी रोकने के लिए टेबलेट नाम, One Month Pregnancy Ko Rokne Ki Tablet, बच्चा गिराने की दवा, भारत में गर्भपात कानून, गर्भपात का अधिकार, गर्भपात की प्रक्रिया, गर्भपात प्रक्रिया, Abortion Ke Tarike, Bacha Girane Ki Dva, Mahine Ki Pregnancy Rokne Ki Tablet, Bacha Girane Ki Tablet Name List Price

परिचय – महिला स्वास्थ्य व गर्भपात

एक गर्भवती महिला अपनी गर्भावस्था के दौरान अनेक समस्याओं का सामना करने में सक्षम होती है किंतु गर्भधारण के बाद किसी भी कारण से यदि गर्भपात की स्थिति उत्पन्न हो जाए तो यह समस्या उसके लिए अत्यधिक असहनीय हो जाती है। हालांकि पति-पत्नी दोनों के लिए गर्भपात का निर्णय ले पाना बहुत मुश्किल होता है।गर्भपात अनेक कारणों से हो सकता है और इसे करने के कई तरीके व दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। गर्भपात के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लेख को पूरा पढ़ें।

गर्भपात क्या है?

गर्भ में पल रहे भ्रूण या गर्भावस्था को खत्म करने को ‘गर्भपात’ कहते हैं और यह क्रिया एक माँ के लिए मानसिक व शारीरिक रूप से अधिक पीड़ादायक होती है। गर्भपात करने के लिए डॉक्टर दवाओं व सर्जरी का उपयोग करते हैं। गर्भ में पल रहे शिशु की अनायास या प्राकृतिक रूप से मृत्यु हो जाने पर भी गर्भपात हो सकता है जिसे आम भाषा में ‘मिसकैरेज’ कहते हैं।
गर्भपात के बाद महिलाओं को इसके दुष्प्रभावों का भी सामना करना पड़ सकता है, जिसमें शामिल हैं अत्यधिक रक्तस्राव, श्रोणि में ऐंठन या दर्द महसूस होना, जी मिचलाना और उल्टी होना। गर्भपात के बाद यदि आप इन लक्षणों का सामना करती हैं तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

गर्भपात के प्रकार

महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गर्भपात की प्रक्रिया गर्भावस्था के विभिन्न चरण पर निर्भर करती है। गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में गर्भपात सरल होता है और इसे दवाओं के सेवन से भी किया जा सकता है। किंतु यदि किसी महिला की गर्भावधि अधिक हो चुकी है तो डॉक्टर ज्यादातर सर्जरी करवाने की सलाह देते हैं। गर्भावस्था के चरण के आधार पर गर्भपात निम्नलिखित समय के दौरान किया जा सकता है;

  • पहली तिमाही अर्थात 1-3 महीनों में गर्भपात करवाया जा सकता है जो सरल होता है और इसे दवाओं के माध्यम से भी किया जा सकता है।
  • दूसरी तिमाही के अंतराल में 4-6 महीनों के बीच गर्भपात करवाया जा सकता है।
  • गर्भपात की यह प्रक्रिया तीसरी तिमाही में 7-9 महीनों के बीच सर्जरी द्वारा करवाने की सलाह दी जाती है।

गर्भावधि के अनुसार गर्भपात करवाने के अलग-अलग तरीके होते हैं जिन्हें निम्नलिखित अनुसार उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

चिकित्सीय गर्भपात

चिकित्सीय प्रक्रिया में गर्भपात कराने के लिए कुछ दवाओं व इंजेक्शन द्वारा हॉर्मोन या रसायन का उपयोग किया जाता है। मिफेप्रिस्टोन (Mifepristone) और मिसोप्रोस्टोल (Misoprostol) दो सामान्य रूप से उपयोग किए जाने वाले तत्व हैं जो RU- 486, गर्भपात की गोली/पिल या मिफेप्रैक्स (Mifeprex) के रूप में उपलब्ध हैं।गर्भपात के लिए इन तरीकों का उपयोग आमतौर पर गर्भावस्था की पहली तिमाही की शुरुआत से लेकर मध्य तक किया जाता है।

सर्जरी के द्वारा गर्भपात

इनवेसिव या सर्जरी के कुछ तरीके हैं जैसे मैनुअल वैक्यूम एस्पिरेशन, डायलेटेशन व क्यूरेटेज। दूसरी तिमाही में गर्भपात या चिकित्सा द्वारा किए गए असफल गर्भपात के लिए डायलेटेशन या इवैक्युएशन का उपयोग किया जा सकता है।

चिकित्सीय गर्भपात करने के दो तरीके

चिकित्सीय गर्भपात करने के दो सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले तरीके निम्नलिखित हैं:

1. मिथोट्रेक्सेट (एम.टी.एक्स.) और मिसोप्रोस्टोल

गर्भावस्था के पहले 7 हफ्तों तक गर्भपात के इस तरीके का अधिक उपयोग किया जाता है। मिथोट्रेक्सेट की पिल या लिक्विड, डीहाइड्रोफोलेट रेडक्टेस के एंजाइम को अवरुद्ध करती है और डी.एन.ए. सिंथेसिस के लिए उपयुक्त थाइमिडीन के उत्पादन को रोकती है। यह गर्भ में पल रहे भ्रूण के लिए विषाक्त होती है, इसकी लगभग 75 मि.ग्रा. की मात्रा गर्भावस्था को खत्म करने में सक्षम है। मिसोप्रोस्टोल एक प्रोस्टाग्लैंडीन होता है जो गर्भाशय के लिए एक यूटेरोटॉनिक की तरह कार्य करता है और गर्भाशय के संकुचन को उत्तेजित करके भ्रूण को बाहर निकालता है।

2. मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल

मिफेप्रिस्टोन नामक पहली पिल, गर्भावस्था को सक्रीय करने वाले आवश्यक हॉर्मोन को अवरुद्ध करती है। मिसोप्रोस्टोल नामक दूसरी पिल गर्भाशय की ऐंठन को बढ़ाती है जिससे रक्त-स्राव होता है और इस प्रकार से गर्भपात हो जाता है (यह मिसकैरेज के समान होता है)।

सर्जरी के द्वारा गर्भपात करने के दो तरीके

गर्भावस्था की पहली तिमाही के अंत में गर्भपात या चिकित्सीय तरीकों द्वारा असफल गर्भपात में सर्जरी के निम्नलिखित तरीकों का उपयोग किया जा सकता है:

1. मैनुअल एस्पिरेशन

एम.वी.ए. या मैनुअल वैक्यूम एस्पिरेशन सर्जरी का सबसे कम प्रभावी तरीका है जिसका उपयोग गर्भधारण के दूसरे से तीसरे महीने में गर्भपात के लिए किया जाता है। सर्जरी की इस प्रक्रिया में दर्द न हो इसलिए महिला को एनेस्थीसिया देकर गर्भ में पल रहे भ्रूण को सक्शन ट्यूब के जरिए गर्भाशय ग्रीवा से बाहर खींचा जाता है।

2. डायलेटेशन व क्यूरेटेज (डी. एंड. सी.)

डॉक्टर द्वारा स्टील के चम्मच जैसे आकार के यंत्र की मदद से गर्भनाल को अलग करके हटाते हुए भ्रूण को गर्भाशय से बाहर निकाला जाता है। इस तरीके का उपयोग 3 महीने की गर्भावस्था में गर्भपात की प्रक्रिया के रूप में किया जा सकता है और इसमें एम.वी.ए. की तुलना में अधिक रक्त की हानि होती है।

पहली तिमाही में किए जाने वाले गर्भपात के तरीके

गर्भवती महिला के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पहली तिमाही में गर्भपात करवाना सुरक्षित माना जाता है। इस दौरान गर्भपात दवाओं/चिकित्सीय या सर्जरी, दोनों तरीकों के माध्यम से किया जा सकता है। हालांकि, गर्भावस्था के शुरूआती माह से लेकर अंतिम माह तक गर्भपात हमेशा चिकित्सीय ही होना चाहिए।

दूसरी तिमाही में किए जाने वाले गर्भपात के तरीके

1. सर्जरी: डायलेशन व इवैक्युएशन (डी. एंड ई.)

डी. एंड ई. प्रक्रिया डायलेशन व क्यूरेटेज (डी. एंड सी.) के समान होती है और आमतौर पर गर्भपात के लिए इसका उपयोग गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में 24वें सप्ताह तक किया जा सकता है। इन दोनों प्रक्रियाओं में अंतर यह है कि डॉक्टर द्वारा यंत्र की मदद से भ्रूण को निकालने के बजाय, डॉक्टर एक चिमटी के द्वारा भ्रूण को गर्भाशय ग्रीवा से बाहर निकालते हैं और अंत में बचे हुए गर्भाधान के अन्य टिशू को हटाने के लिए वैक्यूम एस्पिरेशन का उपयोग किया जाता है। गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में भ्रूण के सिर का निर्माण होने के कारण गर्भपात की इस प्रक्रिया से गर्भाशय ग्रीवा को अत्यधिक हानि होती है और नाड़ी से अत्यधिक रक्त-स्राव भी होता है।

2. इंस्टीलेशन

हालांकि यह सामान्य से बहुत कम होता है लेकिन दूसरी तिमाही के अंतिम चरण (गर्भावस्था के 5वें या 6वें महीने में गर्भपात की प्रक्रिया) से लेकर तीसरी तिमाही तक रासायनिक गर्भपात के तरीकों का उपयोग किया जाता है जिसमें इंजेक्शन द्वारा कुछ दवाओं या रसायनों को पेट में या गर्भाशय ग्रीवा के माध्यम से एमनियोटिक थैली में डाला जाता है जिस कारण से भ्रूण की मृत्यु के बाद वह गर्भ से बाहर निकल जाता है।

3. सोडियम पोइज़निंग (4 महीने से अधिक)

“सलाइन ऐम्नीओसेन्टीसिस” या “हाइपरटॉनिक सलाइन” गर्भपात के तरीके के रूप में भी जाना जाता है, आमतौर पर इसका उपयोग गर्भावस्था के 16 सप्ताह के बाद किया जाता है। इस प्रक्रिया में एमनियोटिक द्रव को सोडियम सॉल्यूशन से बदल दिया जाता है और यह हाइपरटॉनिक सलाइन बच्चे के लिए विषाक्त होता है।

4. यूरिया (5-8 महीने)

ऑक्सीटॉसिन या प्रोस्टाग्लैंडिन-युक्त यूरिया के उपयोग से भी गर्भपात किया जा सकता है। हाइपरटॉनिक सलाइन से अधिक खतरा हो सकता है इसलिए डॉक्टर प्रोस्टाग्लैंडिन-युक्त यूरिया के इंजेक्शन की सलाह देते हैं।

5. प्रोस्टाग्लैंडिंस (4-9 महीने)

प्रोस्टाग्लैंडिंस प्राकृतिक रूप से होते हैं या यह शरीर में आंतरिक रूप से मौजूद पदार्थ होते हैं जो सामान्यतः प्रसव के लिए आवश्यक हैं। अत्यधिक पैरेन्टेरल प्रोस्टाग्लैंडिन्स को इंजेक्ट करने से तीव्र प्रसव-पीड़ा शुरू हो जाती है, जिसके परिणाम-स्वरूप गर्भपात सहजता से होता है। इस तरीके का उपयोग आमतौर पर दूसरी तिमाही (5वें या 6वें महीने की गर्भपात प्रक्रिया) के दौरान किया जाता है।

तीसरी तिमाही में किए जाने वाले गर्भपात के तरीके

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में भ्रूण का महत्वपूर्ण शारीरिक विकास होता है। यदि गर्भावस्था के दौरान संरचनात्मक विसंगतियां या आनुवंशिक (जेनेटिक) रोगों की समय रहते जांच नहीं हो पाई है, तो यह तीसरी-तिमाही में गर्भपात का संकेत हो सकता है, इस स्थिति में केवल सर्जरी द्वारा गर्भपात किया जा सकता है ।

आंशिक-गर्भपात (5-8 महीनों के बीच गर्भपात)

इस तकनीक का उपयोग गर्भपात के लिए उन महिलाओं में किया जाता है जिनकी गर्भावधि 5-8 महीने की हो जाती है। डॉक्टर द्वारा सोनोग्राफी और चिमटी की मदद से बच्चे के शरीर और अन्य उपकरणों से शिशु के सिर को गर्भाशय से बाहर निकाला जाता है।

हिस्टेरोटॉमी (6-9 महीनों के बीच गर्भपात)

डॉक्टर सर्जरी या ऑपरेशन द्वारा गर्भाशय में चीरा लगाकर भ्रूण और गर्भनाल को बाहर निकालते हैं। यह प्रक्रिया सी-सेक्शन (सिजेरियन) के समान होती है किन्तु इस तरीके का उपयोग तब किया जाता है जब गर्भ में ही भ्रूण की मृत्यु हो चुकी हो।

गर्भपात के प्राकृतिक तरीके

जब एक गर्भवती महिला बिना चिकित्सीय सलाह के दवाओं या गैर-औषधीय पदार्थों का उपयोग करके अपनी गर्भावस्था को समाप्त करने का प्रयास करती है, तो इसे ‘स्व-गर्भपात’ कहा जाता है। स्व-गर्भपात के लिए चिकित्सक से सलाह लेने व आपके लिए इसके कौन से तरीके सही हैं, यह जानकारी लेने को ‘इन-क्लिनिक’ गर्भपात कहते हैं। शुरुआती महीनों में स्व-गर्भपात के तरीके आसान और अधिक सफल रहे हैं। किन्तु खयाल रहे यह तरीके आपके स्वास्थ्य के लिए खतरा हो सकते हैं और इसका असफल प्रयास भ्रूण व आपके स्वास्थ्य को गंभीर व स्थायी नुकसान भी पहुँचा सकता है।

स्व-गर्भपात के लिए आमतौर पर प्रचलित तरीके निम्नलिखित हैं:

  • अतिरिक्त शारीरिक परिश्रम: भारी वजन उठाने से पेट पर दबाव बढ़ सकता है जिससे गर्भपात होने की संभावना होती है।
  • गर्भान्तक खाद्य पदार्थों और उत्पादों का सोवन: कुछ खाद्य पदार्थ और उत्पाद, जैसे मटन मज्जा, सूखी मेंहदी का पाउडर गाजर के बीज का सूप गर्भपात का कारण बन सकते हैं और इसके अलावा विटामिन ‘सी’, पपीता और इत्यदि से भी सहज गर्भपात होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • पेट पर आघात: पेट पर अत्यधिक मालिश करने से और पेट के आस-पास अन्य शारीरिक आघात के परिणामस्वरूप गर्भपात हो सकता है।
  • पेट के बल गिरना: गर्भवती महिला का पेट के बल गिरने से भी गर्भपात होने की संभावना बढ़ सकती है।
    नुकीले उपकरण: सुई, हुक, सेफ्टी पिन आदि जैसे नुकीला उपकरण चुभने से भी गर्भपात हो सकता है।
    गर्भाशय ग्रीवा के माध्यम से गर्भाशय गुहा में वैक्यूम उपकरण डालने से भी गर्भपात की संभावना बढ़ सकती है।
    हानिकारक रसायन का उपयोग: कुछ पदार्थ जैसे तारपीन का तेल, कुछ योनिक पेसरीज़ जननांग पथ और इसके आस-पास के अणु-जीवों के लिए हानिकारक और प्रभावी होते हैं। इनके संपर्क से भी सहज गर्भपात हो सकता है।

एक माँ के लिए गर्भपात महत्वपूर्ण प्रक्रिया है और उसके जीवन पर इसका अत्यधिक प्रभाव पड़ सकता है। गर्भपात करने के मान्य कारण होना चाहिए और साथ ही इसे सही समय पर व सही तरीके से पूरी चिकित्सीय परीक्षण के साथ करना अनिवार्य है।

गर्भपात की गोली खाने के बाद क्या होता है ?

गर्भपात की गोली या एबॉर्शन पिल्स हमेशा डॉक्टर की सलाह के बाद ही लेनी चाहिए। आइये जानते हैं कि यह दवा किस तरह काम करती है।

  • प्रोजेस्टेरोन हार्मोन को बनने से या उसके क्रियाविधि को रोकती है।
  • मायोमेट्रियम (गर्भाशय की अंदुरुनी मध्य परत) को संकुचित करती है।
  • ट्रोफोब्लास्ट (Trophoblast) को बढ़ने से रोकती है। ट्रोफोब्लास्ट वे कोशिकाएं होती हैं जो भ्रूण को पोषण देती हैं और प्लेसेंटा को विकसित करती हैं।

गर्भपात की गोली को इस्तेमाल करने का तरीका क्या है?

महिलाओं को दो अलग तरह की गोलियां लेनी पड़ती हैं। पहली गोली डॉक्टर की देखरेख में लेने के 36-48 घंटों के बाद दोबारा दूसरी गोली लेने के लिए डॉक्टर के पास आना पड़ता है।

पहली गोली गर्भपात के लिए गर्भाशय को तैयार करती है। आपको बता दें कि सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा), गर्भ में विकसित हो रहे भ्रूण को सहारा देती है और यह दवा उस सर्विक्स को नरम करती है। इसके अलावा यह प्रोजेस्टेरोन को रोकती है और गर्भाशय के सतह को तोड़ देती है। वहीं दूसरी गोली गर्भाशय को सिकुड़ने में मदद करती है जिससे भ्रूण के साथ यूटेराइन लाइनिंग बाहर निकल जाती है।

आमतौर पर गर्भपात की गोलियों को गर्भावस्था के शुरूआती हफ़्तों में ही लेने की सलाह दी जाती है इसके बाद में फिर सर्जिकल अबॉर्शन को ही उचित माना जाता है। हालांकि मेडिकल अबॉर्शन गर्भावस्था के 20 हफ़्तों तक मान्य है लेकिन एमटीपी एक्ट के अनुसार 12 हफ़्तों के बाद आप कम से कम दो गायनकोलॉजिस्ट की सलाह के बाद ही ऐसा करवा सकती हैं।

क्या गर्भपात की गोली के साइड इफेक्ट भी होते है ?

जी हां, गर्भपात की गोली के नुकसान भी कई हैं और हर महिला को इसकी जानकारी जरुर होनी चाहिए। आइये कुछ प्रमुख दुष्प्रभावों के बारे में जानते हैं।

  • मिचली और उल्टी आना
  • थकान
  • डायरिया
  • ठंड के साथ या बिना ठंड वाला बुखार
  • पेल्विक हिस्से में तेज दर्द या क्रैम्प
  • चक्कर आना

मिचली, उल्टी और डायरिया जैसे दुष्प्रभाव मेडिकल एबॉर्शन के कुछ दिन बाद ही अपने आप ठीक हो जाते हैं। अगर ये लक्षण जारी रहते हैं तो अपने नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।

भारत में गर्भपात कानून 

भारत में गर्भपात केवल बीस हफ्तों की गर्भावस्था के लिए वो भी विशिष्ट परिस्थितियों में वैध है, जिसे विस्तारपूर्वक निम्न प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है:

  • बार बार गर्भधारण करने से गर्भवती महिला के जीवन पर बुरा असर पड़ता है और उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को हानि पहुंचती है।
  • एक खतरा यह भी रहता है कि यदि बच्चा पैदा हुआ है, तो वो शारीरिक या मानसिक असामान्यताओं से पीड़ित या गंभीर रूप से विकलांग हो सकता है।
  • हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार की शिकार महिला को 24वें सप्ताह में गर्भ गिराने की अनुमति दी थी जो गर्भावस्था अधिनियम, 1971 के मेडिकल टर्मिनेशन प्रेगनेंसी एक्ट के तहत निर्धारित 20 सप्ताह की सीमावधि से परे है।

इस अधिनियम के तहत एक महिला को गर्भावस्था के पहले 12 हफ्तों के भीतर गर्भपात कराने की अनुमति दी गयी है, लेकिन वो भी एक पंजीकृत चिकित्सक से, जिसने किसी गर्भवती महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के गंभीर खतरे का निदान किया हो। यदि भ्रूण 12 से 20 सप्ताह का हो गया है, तो गर्भपात की प्रक्रिया के लिए दो चिकित्सकों की अनुमति की आवश्यकता होती है।

गर्भपात के बाद माहवारी कब आती है 

यदि पहली तिमाही के दौरान गर्भपात हुआ है तो चार से 12 सप्ताह बाद आपको पीरियड्स होने शुरु हो जाने चाहिए। गर्भपात के बाद पहली माहवारी सामान्य से हल्की या कम हो सकती है या सर्जिकल गर्भपात के बाद यह सामान्य रूप से भी हो सकती है। अगर पहली माहवारी सामान्य से अधिक लंबी है या मात्रा में अधिक है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यदि आपने चिकित्सा गर्भपात कराया है जो दवा द्वारा होता है तो आपको गर्भपात के बाद पहले पीरियड में सामान्य से अधिक रक्तस्राव हो सकता है।
आप गर्भपात के ठीक बाद अण्डोत्सर्ग (Ovulate) कर सकती हैं। हालांकि, यह समय अलग-अलग महिलाओं के लिए भिन्न हो सकता है और इस बात पर निर्भर करता है कि गर्भपात, गर्भधारण के कितने समयांतराल बाद हुआ है।
इस दौरान, गर्भावस्था से सभी अवशेषों को निकालना, आपके शरीर की पहली प्राथमिकता होती है। इसमें अन्य चीज़ों के अलावा भ्रूण के ऊतक भी गर्भाशय से निकलते हैं, और यह अत्यधिक रक्तस्राव के रूप में बाहर निकलते हैं। आप इसे गर्भपात के बाद पहली माहवारी समझ सकते हैं। यह एक दिन या एक सप्ताह के भीतर हो सकती है। अगर अपने मेडिकल गर्भपात कराती हैं तो भ्रूण के ऊतकों को सर्जरी द्वारा बाहर निकाला जा सकता है।

गर्भपात के बाद गर्भवती होने की संभावना  

डॉक्टर आमतौर पर गर्भपात के बाद कम से कम 3 महीने के लिए गर्भ धारण न करने की सलाह देते हैं। यदि गर्भपात बीच में या देर से हुआ हो तो और अधिक समय तक गर्भ धारण न करने को कहते हैं। हालांकि, जो महिलायें गैर कानूनी या गर्भावस्था में जटिलताओं के कारण गर्भपात का शिकार हुयी हैं उन्हें लंबे समय तक इंतजार करना चाहिए। जब चिकित्सक परीक्षण के बाद सुनिश्चित कर दें तब गर्भावस्था सामान्य रूप से सुरक्षित होती है।
गर्भपात के तुरंत बाद महिला गर्भवती हो सकती है। महिलाओं में ओव्यूलेशन एक प्राकृतिक घटना है जो हार्मोन द्वारा नियंत्रित होती है। अगर कोई गर्भनिरोधक विकल्प उपयोग नहीं किया जाता है तो सामान्य चक्र फिर से शुरू होने पर गर्भधारण की संभावना होती है। इसलिए अगर आप फिर से गर्भवती नहीं होना चाहती हैं तो डॉक्टर से सलाह लेने के बाद जन्म नियंत्रण विधियों का इस्तेमाल करें।)
गर्भपात के 7 से 10 दिनों के भीतर भी गर्भधारण किया जा सकता है, चाहे महिला को अब भी रक्तस्राव हो रहा हो। गर्भावस्था समाप्ति के एक सप्ताह के बाद ही जन्म नियंत्रण तकनीक का उपयोग करना आवश्यक है। जिन महिलाओं ने एस्पिरेशन प्रक्रिया या आरंभिक गर्भपात कराया है उनमें तुरंत गर्भवती होने की सम्भावनायें अधिक होती हैं। पहली तिमाही में सर्जिकल गर्भपात या डाइलेशन और क्यूरेटेज कराने वाली महिलाओं को डॉक्टर कम से कम एक माह तक इंतजार करने की सलाह देते हैं जिससे गर्भाशय का घाव भर सके।

सुरक्षित और असुरक्षित गर्भपात  

जब गर्भपात निम्न प्रकार से किया जाता है तब यह सुरक्षित होता है:

  • एक प्रशिक्षित और अनुभवी स्वास्थ्य चिकित्सक द्वारा।
  • उचित उपकरणों की सहायता से।
  • स्वच्छ तरीके से जैसे, जो भी योनि और गर्भ के संपर्क में जाता है वह जीवाणुहीन (Sterile) होना चाहिए।
  • पिछली माहवारी के 3 महीने (12 सप्ताह) बाद तक।

जब गर्भपात निम्न प्रकार से किया जाता है तब यह असुरक्षित होता है:

  • किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा जो इस प्रक्रिया को करने के लिए प्रक्षिशित नहीं है।
  • गलत उपकरणों या दवाओं के उपयोग द्वारा।
  • अस्वच्छ परिस्थितियों में।
  • गर्भावस्था के 3 महीने (12 सप्ताह) के बाद, जब तक यह किसी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में नहीं किया जाता है, जिसमें विशेष उपकरणों का उपयोग होता है।

Disclaimer – हमारा एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पाठको सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिले. हालांकि, इसमें दी गई जानकारी को एक योग्य चिकित्सक की सलाह के विकल्प के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए. यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है यह सभी संभावित दुष्प्रभावों, चेतावनी या अलर्ट को कवर नहीं कर सकता है. कृपया अपने चिकित्सक से परामर्श करें और किसी भी बीमारी या दवा से संबंधित अपने सभी प्रश्नों पर चर्चा करें. हमारा मकसद सिर्फ जानकारी देना है.

स्वास्थ्य से सम्बंधित आर्टिकल्स – 

  1. बीकासूल कैप्सूल खाने से क्या फायदे होते हैं, बिकासुल कैप्सूल के लाभ, Becosules Capsules Uses in Hindi, बेकासूल, बीकोस्यूल्स कैप्सूल
  2. शराब छुड़ाने की आयुर्वेदिक दवा , होम्योपैथी में शराब छुड़ाने की दवा, शराब छुड़ाने के लिए घरेलू नुस्खे , शराब छुड़ाने का मंत्र , शराब छुड़ाने के लिए योग
  3. कॉम्बिफ्लेम टेबलेट की जानकारी इन हिंदी, कॉम्बिफ्लेम टेबलेट किस काम आती है, Combiflam Tablet Uses in Hindi, Combiflam Syrup Uses in Hindi
  4. अनवांटेड किट खाने के कितने दिन बाद ब्लीडिंग होती है, अनवांटेड किट खाने की विधि Hindi, अनवांटेड किट ब्लीडिंग टाइम, अनवांटेड किट की कीमत
  5. गर्भाशय को मजबूत कैसे करे, कमजोर गर्भाशय के लक्षण, गर्भाशय मजबूत करने के उपाय, बच्चेदानी का इलाज, बच्चेदानी कमजोर है, गर्भाशय योग
  6. जिम करने के फायदे और नुकसान, जिम जाने से पहले क्या खाएं, जिम जाने के बाद क्या खाएं,  जिम जाने के फायदे, जिम जाने के नुकसान,  जिम से नुकसान
  7. माला डी क्या है, Mala D Tablet Uses in Hindi, माला डी कैसे काम करती है, Maladi Tablet, माला डी गोली कब लेनी चाहिए
  8. Unienzyme Tablet Uses in Hindi, Unienzyme गोली, यूनिएंजाइम की जानकारी, यूनिएंजाइम के लाभ, यूनिएंजाइम के फायदे,यूनिएंजाइम का उपयोग
  9. मानसिक डर का इलाज, फोबिया का उपचार, डर के लक्षण कारण इलाज दवा उपचार और परहेज, डर लगना, मानसिक डर का इलाज, मन में डर लगना
  10. हिंदी बीपी, उच्च रक्तचाप के लिए आहार, High Blood Pressure Diet in Hindi, हाई ब्लड प्रेशर में क्या नहीं खाना चाहिए, हाई ब्लड प्रेशर डाइट
  11. क्या थायराइड लाइलाज है, थ्रेड का इलाज, थायराइड क्‍या है, थायराइड के लक्षण कारण उपचार इलाज परहेज दवा,  थायराइड का आयुर्वेदिक
  12. मोटापा कम करने के लिए डाइट चार्ट, वजन घटाने के लिए डाइट चार्ट, बाबा रामदेव वेट लॉस डाइट चार्ट इन हिंदी, वेट लॉस डाइट चार्ट
  13. हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण और उपचार, हाई ब्लड प्रेशर, बीपी हाई होने के कारण इन हिंदी, हाई ब्लड प्रेशर १६० ओवर ११०, बीपी हाई होने के लक्षण
  14. खाना खाने के बाद पेट में भारीपन, पेट में भारीपन के लक्षण, पतंजलि गैस की दवा, पेट का भारीपन कैसे दूर करे, पेट में भारीपन का कारण
  15. योग क्या है?, Yoga Kya Hai, योग के लाभ, योग के उद्देश्य, योग के प्रकार, योग का महत्व क्या है, योग का लक्ष्य क्या है, पेट कम करने के लिए योगासन, पेट की चर्बी कम करने के लिए बेस्‍ट योगासन

महिला स्वास्थ्य व गर्भपात, गर्भपात के प्रकार, तरीके व प्रक्रिया, 1 Month Pregnancy Rokne Ki Tablet, 1 Month प्रेगनेंसी रोकने के लिए टेबलेट नाम, One Month Pregnancy Ko Rokne Ki Tablet, बच्चा गिराने की दवा, भारत में गर्भपात कानून, गर्भपात का अधिकार, गर्भपात की प्रक्रिया, गर्भपात प्रक्रिया, Abortion Ke Tarike, Bacha Girane Ki Dva, Mahine Ki Pregnancy Rokne Ki Tablet, Bacha Girane Ki Tablet Name List Price

Bachcha Girane Ki Dawai, Best Ways To Avoid Pregnancy After One Month in Hindi bacha girane ki medicine

दालचीनी गर्भपात खुराक, महीने बाद गर्भावस्था को कैसे खत्म करें, Bachcha Girane Ki Dawai, Baccha Girane Ki Dava, Garbh Girane Ki Dava Bataiye, Bacha Girane Ka Medicine Name, Pregnancy Girane Ka Gharelu Upay, Pregnancy Khatam Karne Wali Dawai, बच्चा गिराने की दवा, Baccha Girane Wali Dava, Bacche Girane Ki Dava, Pregnancy Ko Girane Ki Dava, Pregnancy Khatm Karne Ki Dwa, गर्भ गिराने की दवा, Garbh Girane Ke Gharelu Upay, Bacha Girane Ki Tablet Name List Price

दालचीनी गर्भपात खुराक, महीने बाद गर्भावस्था को कैसे खत्म करें, Bachcha Girane Ki Dawai, Baccha Girane Ki Dava, Garbh Girane Ki Dava Bataiye, Bacha Girane Ka Medicine Name, Pregnancy Girane Ka Gharelu Upay, Pregnancy Khatam Karne Wali Dawai, बच्चा गिराने की दवा, Baccha Girane Wali Dava, Bacche Girane Ki Dava, Pregnancy Ko Girane Ki Dava, Pregnancy Khatm Karne Ki Dwa, गर्भ गिराने की दवा, Garbh Girane Ke Gharelu Upay, Bacha Girane Ki Tablet Name List Price

परिचय – अनचाहा गर्भ, गर्भपात

आज मेल हो या फीमेल अपने करियर को लेकर बहुत सीरियस है, हर कोई अपनी लाइफ मै कुछ बड़ा करना चाहता है। ये भी एक कारण है की आज की पीढ़ी फैमिली थोड़ा देर से शुरू करते है क्योंकि उनके पास वक्त ही बहुत कम है। लेकिन कभी कभी प्रोटेक्शन न लेने से या भूल जाने से प्रेगनेंसी हो सकती है। गर्भावस्था की न्यूज मिलना कई जोड़ों के लिए एक बड़ी खुशखबरी होती है। वहीं कुछ के लिए ये एक चिंता का विषय हो सकता है। कभी-कभी कुछ जोड़ों को अनेक कारणों से बच्चा नहीं चाहिए होता, ऐसे में अनचाही गर्भावस्था परेशान करने वाली और भविष्य की योजनाओं को प्रभावित करने वाली हो सकती है। कई बार ऐसे कपल गर्भपात करवाने यानि गर्भावस्था को खत्म करने का निर्णय लेते हैं। यदि आप भी किसी कारण से अपना अनचाहा गर्भ गिराना चाहती हैं तो जानने के लिए आगे पढ़िए।

अनचाहे गर्भ को गिराने के उपाय, Bachcha Girane Ki Dawai

हर्बल एबॉर्शन, Bachcha Girane Ki Dawai
कुछ महिलाएं गर्भ गिराने के लिए जड़ी-बूटियों का विकल्प चुनती हैं। यद्यपि इस तरह के बहुत सारे उपाय हैं, लेकिन वे गर्भपात के लिए सुरक्षित नहीं होते। यारो (वैज्ञानिक नाम एकिलिया मिलफोलियम) जैसी जड़ी-बूटी एक निश्चित मात्रा में लेने पर गर्भपात का कारण बन सकती है।
केमिकल एबॉर्शन, Bachcha Girane Ki Dawai
इस तरीके में जाइगोट गर्भाशय की दीवार से चिपकाया जाता है क्योंकि इससे गर्भावस्था की प्रगति रुक सकती है। इस विधि में एक वजाइनल रिंग और बर्थ कंट्रोल पैच का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें गर्भाशय की डिंब के इम्प्लांटेशन को रोका जाता है। हालांकि यह तरीका सबसे अंतिम उपाय होना चाहिए।
हार्मोनल एबॉर्शन
इस प्रक्रिया में, समय से पहले लेबर प्रेरित करने के लिए प्रोस्टाग्लैंडीन जैसे हार्मोन को गर्भाशय में इंजेक्ट किया जाता है। यह भ्रूण की मृत्यु और बाद में उसके शरीर से निकलने का कारण बनता है।
सलाइन वॉटर विधि
इस तरीके में डिहाइड्रेशन के लिए गर्भाशय में खारे पानी को इंजेक्ट किया जाता है। खारा पानी भ्रूण को समाप्त कर देता है।

महीने बाद गर्भावस्था को कैसे खत्म करें

एक महीने के बाद गर्भावस्था को खत्म करने के दो तरीके हैं – एक मेडिकल एबॉर्शन या दूसरा सर्जिकल एबॉर्शन। जैसा कि नाम से पता चलता है, मेडिकल एबॉर्शन में गर्भावस्था की प्रगति को बाधित करने के लिए दवा का उपयोग किया जाता है। दवाओं का प्रयोग सबसे बेहतर है क्योंकि वे नॉन-इनवेसिव होती हैं।

1. मेडिकल एबॉर्शन

इसमें भ्रूण के विकास को रोकने के लिए निर्धारित दवाओं का उपयोग किया जाता है। आमतौर पर इसके लिए मिफेप्रिस्टोन और मेथोट्रेक्सेट युक्त गोलियां लेने की सलाह दी जाती है। इनको थोड़े अंतराल के बाद एक के बाद एक लिया जाना चाहिए। इसके बाद, गर्भाशय के संकुचन शुरू होते हैं और गर्भ बाहर निकल जाता है। इसमें ब्लीडिंग होती है जो लगभग 2 सप्ताह तक जारी रह सकती है। गर्भपात की पुष्टि के लिए इस समय के दौरान आपको 3 बार अपने डॉक्टर से मिलने जाना पड़ सकता है।
मेडिकल एबॉर्शन किसे नहीं करवाना चाहिए
मेडिकल एबॉर्शन उपयुक्त नहीं है, यदि:
1. आप 9 सप्ताह से अधिक समय से गर्भवती हैं।
2. आपको एड्रेनल फेलियर की समस्या होती रहती है या खून के थक्के जमने से जुड़ा ब्लड क्लॉटिंग डिसऑर्डर है।
3. आपके शरीर में आईयूडी (इंट्रायूट्रिन डिवाइस) लगी है।
4. आप पहले से कुछ ऐसी दवाएं ले रही हैं जिनकी वजह से मेडिकल एबॉर्शन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
5. डॉक्टर या अस्पताल पास में नहीं है।

2. सर्जिकल एबॉर्शन

गर्भपात के लिए पिछले 40 सालों से सर्जिकल तरीके का उपयोग किया जा रहा है। यद्यपि यह एक जल्दी होने वाली प्रक्रिया है, फिर भी इसे हॉस्पिटल या क्लिनिक में एक योग्य डॉक्टर द्वारा ही किया जाना चाहिए। यह तरीका पहली तिमाही के दौरान किसी भी समय उपयोग किया जा सकता है।
सर्जिकल एबॉर्शन क्या है?
सर्जिकल एबॉर्शन की प्रक्रिया में उपकरणों का उपयोग किया जाता है। इसमें लोकल एनेस्थीशिया देकर और प्रक्रिया के दौरान और बाद में दवाएं दी जाती हैं। आपको अपने साथी के साथ क्लिनिक जाना चाहिए।
सर्जिकल एबॉर्शन प्रक्रिया
आपकी गर्भावस्था कितनी आगे बढ़ गई है, इसके आधार पर सर्जिकल एबॉर्शन की किसी भी प्रक्रिया का उपयोग किया जा सकता है। वैक्यूम एस्पिरेशन गर्भावस्था के पहले महीने में और 16 सप्ताह तक की जा सकती है जबकि डायलेशन और इवैक्युएशन (डी एंड ई) 16 सप्ताह के बाद की जा सकती है। 21 सप्ताह के बाद डायलेशन और एक्सट्रैक्शन (डी एंड एक्स) किया जा सकता है। इन विधियों को नीचे संक्षेप में समझाया गया है:

वैक्यूम/सक्शन एस्पिरेशन (6-16 सप्ताह) , डेढ़ महीना बच्चा गिराने की दवा

वैक्यूम एस्पिरेशन, जिसे सक्शन एस्पिरेशन और सक्शन क्यूरेटेज भी कहा जाता है, एक विधि है जिसमें डायलेटर का उपयोग लोकल एनेस्थीशिया के बाद सर्विक्स को फैलाने के लिए किया जाता है। सर्विक्स को विभिन्न आकारों के अब्सॉर्बेंट रॉड की मदद से खुला रखा जाता है। फिर, एक पतली ट्यूब, जो एक पंप से जुड़ी होती है, सर्विक्स के माध्यम से गर्भाशय में डाली जाती है। पंप, मैन्युअल या इलेक्ट्रिकल हो सकता है, इसका उपयोग गर्भाशय के अंदर से भ्रूण को बाहर निकालने के लिए किया जाता है। इसके बाद मासिक धर्म के समान ब्लीडिंग होती है।
हालांकि इस प्रक्रिया में केवल 15 मिनट लगते हैं, पर आपको कुछ घंटों के लिए अस्पताल में रहना पड़ सकता है। इन्फेक्शन को दूर रखने के लिए डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक्स लेने के लिए भी कह सकते हैं।
वैक्यूम/सक्शन एस्पिरेशन साइड इफेक्ट्स –सक्शन एस्पिरेशन के बाद आपको कुछ साइड इफेक्ट्स का अनुभव होगा जैसे चक्कर आना, ऐंठन, मतली और पसीना आना। कुछ महिलाओं को बहुत ज्यादा ब्लीडिंग, खून के थक्के, सर्विक्स को क्षति और गर्भाशय में घाव भी हो सकता है। यदि गर्भाशय में कोई भी टिश्यू रह गया तो इन्फेक्शन होने की संभावना होती है। यदि आपको बुखार, दर्द या किसी भी प्रकार की पेट की तकलीफ होती है, तो आपको तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

डायलेशन और इवैक्युएशन (डी एंड ई) (16 सप्ताह बाद)

यह एक अन्य प्रकार का सर्जिकल एबॉर्शन है, जिसमें सर्जरी से 24 घंटे पहले सर्विक्स में सिंथेटिक डायलेटर डाला जाता है। भ्रूण को खत्म करने के लिए सबसे पहले एक इंजेक्शन दिया जाता है। फिर सर्विक्स को फैलाकर गर्भाशय की परत को हटाने के लिए एक ट्यूब डाली जाती है। एक क्यूरेट और सक्शन डिवाइस गर्भाशय की सफाई करने में मदद करता है। इस प्रक्रिया में लगभग आधा घंटा लगता है और इन्फेक्शन को रोकने के लिए एंटीबायोटिक्स दिए जाते हैं।

डायलेशन और एक्सट्रैक्शन (डी एंड एक्स) (21 सप्ताह बाद)

डी एंड एक्स का उपयोग केवल तब किया जाता है जब गर्भावस्था में कॉम्प्लीकेशन्स होते हैं। इस विधि में, सर्जरी से दो दिन पहले सर्विक्स में एक सिंथेटिक डायलेटर रखा जाता है। तीसरे दिन, सर्विक्स के फैलने और एमनियोटिक थैली के टूटने के बाद, फोरसेप्स की मदद से भ्रूण को बाहर निकाल लिया जाता है। यदि भ्रूण ‘ब्रीच पोजीशन’ में है यानि भ्रूण का सिर ऊपर की ओर है, तो इसे खत्म करने के लिए खोपड़ी में एक छोटा चीरा बनाया जाता है। जब भ्रूण बर्थ कैनाल से पूरी तरह से हटा दिया जाता है तो प्रक्रिया पूरी हो जाती है।

मेडिकल एबॉर्शन बनाम सक्शन एस्पिरेशन

आपके आखिरी पीरियड के पहले दिन से 10 सप्ताह तक मेडिकल एबॉर्शन किया जा सकता है, जबकि सक्शन एस्पिरेशन की प्रक्रिया 12 सप्ताह तक की जा सकती है। इन दोनों प्रक्रियाओं में भारी मासिक धर्म के दौरान अनुभव होने वाली ऐंठन और बेचैनी हो सकती है। इन दोनों तरीकों में लगभग 99 प्रतिशत सफलता दर है। यदि मेडिकल एबॉर्शन विफल हो जाता है, तो आपको एक सक्शन एस्पिरेशन करवाना पड़ेगा। जब सक्शन एस्पिरेशन विफल हो जाता है, तो इसे दोबारा करना पड़ सकता है।
जोखिम
मेडिकल एबॉर्शन में सेहत से जुड़े कॉम्प्लीकेशन्स का खतरा गर्भावस्था को जारी रखने की तुलना में कम से कम 10 गुना कम है। सामान्य तौर पर इस प्रकार के गर्भपात में ज्यादा बड़ी समस्याएं नहीं होती हैं। मेडिकल एबॉर्शन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली गोलियां 1980 से इस्तेमाल हो रही हैं। सर्जिकल एस्पिरेशन के लिए भी जोखिम इसी तरह हैं। पहले आठ हफ्तों में ये तरीके सबसे सुरक्षित हैं और पहली तिमाही में इनके इस्तेमाल पर समस्याएं लगभग न के बराबर होती हैं।
फायदे
मेडिकल एबॉर्शन में एनेस्थीशिया, सर्जिकल उपकरणों या यहाँ तक कि हॉस्पिटल जाने की भी जरूरत नहीं होती है। यह एक नेचुरल मिसकैरेज की तरह होता है और गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में उपयोग किया जा सकता है। एस्पिरेशन एबॉर्शन में ब्लीडिंग कम होती है और गर्भावस्था के कई दिन बीत जाने के बाद भी इसे किया जा सकता है।
नुकसान
मेडिकल एबॉर्शन को कम से कम दो दिन लगते हैं और अगले दो सप्ताह तक ब्लीडिंग जारी रह सकती है। एस्पिरेशन एबॉर्शन अधिक तकलीफदेह होता है और इसमें एनेस्थीशिया के उपयोग की आवश्यकता होती है।

घरेलू उपाय – महीने बाद गर्भ गिराने के लिए घरेलू उपाय

गर्भावस्था के शुरूआती दिनों में ही गर्भपात के लिए कुछ आजमाए और परखे हुए घरेलू उपाय हैं, जो इस प्रकार हैं:
पपीता
पपीता जितना गुणकारी फल है उतना ही गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक है। ऑक्सीटोसिन और प्रोस्टाग्लैंडीन से भरपूर पपीता गर्भाशय में संकुचन पैदा कर सकता है। इस फल में फाइटोकेमिकल्स भी होते हैं जो प्रोजेस्टेरोन की एक्टिविटी को प्रभावित कर सकते हैं। कच्चा पपीता खाने से गर्भ गिराने में मदद मिल सकती है।
दालचीनी
गर्भपात के लिए एक और लोकप्रिय घरेलू उपाय कच्ची दालचीनी या दालचीनी के सप्लीमेंट्स खाना है। दालचीनी में पाए जाने वाले तत्व लेबर की शुरुआत कर सकते हैं। चूंकि दालचीनी की खुराक से एलर्जी का रिएक्शन हो सकता है, इसलिए इसे लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें।

गर्भपात से उबरना

गर्भपात या गर्भ का गिराना शारीरिक और भावनात्मक रूप से एक थकाने वाली घटना होती है। आराम करना और पोषण प्राप्त करना और धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में वापस आना आवश्यक है। आपके डॉक्टर आपको काम से समय निकालने और थोड़े समय के लिए व्यायाम से दूर रहने की सलाह देंगे। आपको ढेर सारा पानी और तरल पदार्थों का सेवन करके खुद को हाइड्रेटेड रखना होगा। आपका आहार संतुलित और स्वस्थ होना चाहिए और यह मिनरल, विटामिन और प्रोटीन से भरपूर होना चाहिए । आपको तब तक संभोग से बचना चाहिए जब तक कि आपका मन और मस्तिष्क वास्तव में तैयार न हो। एक बार जब गर्भपात हो जाने के बाद इसके बारे में सोचना बंद कर दें और खुद को दोषी न समझें या निगेटिव महसूस न करें। अपने करीबी लोगों, अपने डॉक्टर से बात करके या अपने विचारों को एक डायरी में लिखकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करें।

गर्भ रखने या गिराने का निर्णय आपको करना है और डॉक्टर के परामर्श से यह करना बेहतर है। यह इन्फेक्शन और किसी भी बड़ी कॉम्प्लिकेशन को रोकने में मदद कर सकता है। यदि आप स्वयं ऐसा करती हैं और अत्यधिक ब्लीडिंग या असामान्य दर्द जैसी परेशानियों का सामना करती हैं, तो तुरंत डॉक्टर से मदद लेने में संकोच न करें! इसके अलावा, भविष्य में पुनः गर्भपात से बचने के लिए पर्याप्त गर्भनिरोधक और जन्म नियंत्रण उपायों का उपयोग करें। कई गर्भपात करवाना आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है और भविष्य में गर्भवती होने में समस्याएं पैदा होने का कारण बन सकता है।

Disclaimer – हमारा एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इसके उपभोक्ताओं को विशेषज्ञ-समीक्षा, सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिले। हालांकि, इसमें दी गई जानकारी को एक योग्य चिकित्सक की सलाह के विकल्प के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है यह सभी संभावित दुष्प्रभावों, दवा बातचीत या चेतावनी या अलर्ट को कवर नहीं कर सकता है। कृपया अपने चिकित्सक से परामर्श करें और किसी भी बीमारी या दवा से संबंधित अपने सभी प्रश्नों पर चर्चा करें। हमारा मकसद सिर्फ जानकारी देना है।

दालचीनी गर्भपात खुराक, महीने बाद गर्भावस्था को कैसे खत्म करें, Bachcha Girane Ki Dawai, Baccha Girane Ki Dava, Garbh Girane Ki Dava Bataiye, Bacha Girane Ki Dava, Bacha Girane Ka Medicine Name, Pregnancy Girane Ka Gharelu Upay, Pregnancy Khatam Karne Wali Dawai, बच्चा गिराने की दवा, Bacha Girane Ki Dawai, Baccha Girane Wali Dava, Bacche Girane Ki Dava, Pregnancy Ko Girane Ki Dava, Pregnancy Khatm Karne Ki Dwa, गर्भ गिराने की दवा, Garbh Girane Ke Gharelu Upay, Bacha Girane Ki Tablet Name List Price

स्वास्थ्य से सम्बंधित आर्टिकल्स – 

  1. बीकासूल कैप्सूल खाने से क्या फायदे होते हैं, बिकासुल कैप्सूल के लाभ, Becosules Capsules Uses in Hindi, बेकासूल, बीकोस्यूल्स कैप्सूल
  2. शराब छुड़ाने की आयुर्वेदिक दवा , होम्योपैथी में शराब छुड़ाने की दवा, शराब छुड़ाने के लिए घरेलू नुस्खे , शराब छुड़ाने का मंत्र , शराब छुड़ाने के लिए योग
  3. कॉम्बिफ्लेम टेबलेट की जानकारी इन हिंदी, कॉम्बिफ्लेम टेबलेट किस काम आती है, Combiflam Tablet Uses in Hindi, Combiflam Syrup Uses in Hindi
  4. अनवांटेड किट खाने के कितने दिन बाद ब्लीडिंग होती है, अनवांटेड किट खाने की विधि Hindi, अनवांटेड किट ब्लीडिंग टाइम, अनवांटेड किट की कीमत
  5. गर्भाशय को मजबूत कैसे करे, कमजोर गर्भाशय के लक्षण, गर्भाशय मजबूत करने के उपाय, बच्चेदानी का इलाज, बच्चेदानी कमजोर है, गर्भाशय योग
  6. जिम करने के फायदे और नुकसान, जिम जाने से पहले क्या खाएं, जिम जाने के बाद क्या खाएं,  जिम जाने के फायदे, जिम जाने के नुकसान,  जिम से नुकसान
  7. माला डी क्या है, Mala D Tablet Uses in Hindi, माला डी कैसे काम करती है, Maladi Tablet, माला डी गोली कब लेनी चाहिए
  8. Unienzyme Tablet Uses in Hindi, Unienzyme गोली, यूनिएंजाइम की जानकारी, यूनिएंजाइम के लाभ, यूनिएंजाइम के फायदे,यूनिएंजाइम का उपयोग
  9. मानसिक डर का इलाज, फोबिया का उपचार, डर के लक्षण कारण इलाज दवा उपचार और परहेज, डर लगना, मानसिक डर का इलाज, मन में डर लगना
  10. हिंदी बीपी, उच्च रक्तचाप के लिए आहार, High Blood Pressure Diet in Hindi, हाई ब्लड प्रेशर में क्या नहीं खाना चाहिए, हाई ब्लड प्रेशर डाइट
  11. क्या थायराइड लाइलाज है, थ्रेड का इलाज, थायराइड क्‍या है, थायराइड के लक्षण कारण उपचार इलाज परहेज दवा,  थायराइड का आयुर्वेदिक
  12. मोटापा कम करने के लिए डाइट चार्ट, वजन घटाने के लिए डाइट चार्ट, बाबा रामदेव वेट लॉस डाइट चार्ट इन हिंदी, वेट लॉस डाइट चार्ट
  13. हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण और उपचार, हाई ब्लड प्रेशर, बीपी हाई होने के कारण इन हिंदी, हाई ब्लड प्रेशर १६० ओवर ११०, बीपी हाई होने के लक्षण
  14. खाना खाने के बाद पेट में भारीपन, पेट में भारीपन के लक्षण, पतंजलि गैस की दवा, पेट का भारीपन कैसे दूर करे, पेट में भारीपन का कारण
  15. योग क्या है?, Yoga Kya Hai, योग के लाभ, योग के उद्देश्य, योग के प्रकार, योग का महत्व क्या है, योग का लक्ष्य क्या है, पेट कम करने के लिए योगासन, पेट की चर्बी कम करने के लिए बेस्‍ट योगासन