Jyada Neend Aana, Excessive sleepiness You Should Not Ignor Oversleeping Know Why Hypersomnia

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Jyada Neend Aana

परिचय – ज्यादा नींद आना, हाइपरसोम्निया क्या है?

उम्र और शारीरिक स्थिति के अनुसार सभी की नींद की अवधि अलग-अलग होती है। लेकिन जरूरत से ज्यादा सोना और उसके बाद भी कमजोरी महसूस होना और हर समय नींद आना जैसी समस्या आपके फिट न होने को बताता है। क्या आपको भी हर समय नींद की समस्या रहती है। ऐसा होने पर किसी काम में मन नहीं लगता है। अगर आपके साथ भी ऐसा है तो हो सकता है कि आप हाइपरसोम्निया नामक बीमारी से ग्रसित हों.
हाइपरसोम्निया – हाइपरसोम्निया एक स्लीप डिसॉर्डर है, जिसमें रात में बहुत नींद आती है और सुबह उठने में भी परेशानी होती है। इससे पीडि़त लोगों को सारा दिन नींद आती रहती है, चाहे काम कर रहे हों या बात कर रहे हों। दिक्कत तब होती है कि जब दिन में 1-2 बार झपकी लेने के बाद भी तरोताजा महसूस नहीं करते। यह जीवन के लिए घातक स्थिति नहीं है, लेकिन इससे जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है और कई रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

दो तरह के स्लीप डिसॉर्डर (हाइपरसोम्निया)

1- प्राइमरी हाइपरसोम्निया : यह सोने और जागने की क्रिया को नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क के तंत्र में खराबी आने से होता है।
2- सेकेंडरी हाइपरसोम्निया : यह उस स्थिति का नतीजा होता है, जिसके कारण गहरी नींद नहीं आती और थकान होती है। जैसे स्लीप एप्निया, इसके कारण रात में सांस लेने में परेशानी होती है और कई बार नींद खुलती है। कई दवाओं, कैफीन और एल्कोहल का अधिक मात्रा में सेवन भी हाइपरसोम्निया का कारण बन सकता है। थाइरॉएड और किडनी की परेशानियों में भी ऐसा होता है।

लक्षण – हाइपरसोम्निया के लक्षण

1. हाइपरसोम्निया का सबसे प्रमुख लक्षण है लगातार थकान बने रहना।
2. अधिक नींद लेने के बाद भी सुबह उठने में परेशानी होना।
3. ऊर्जा की कमी, चिड़चिड़ापन, एंग्जाइटी, भूख न लगना, सोचने और बोलने में परेशानी होना,
4. बेचैनी व चीजों को याद न रख पाना आदि लक्षण देखने को मिलते हैं।

कारण – हाइपरसोम्निया के कारण

1- स्लीप डिसॉर्डर नैक्रोप्लास्टी (दिन में उनींदापन महसूस करना) और स्लीप एप्निया (रात में नींद में सांस रुक जाना)।
2- लगातार कई रातों तक नींद पूरी न हो पाना। शिफ्ट जॉब में काम करना
3- मोटापा और शारीरिक सक्रियता की कमी
4- नशीली दवाओं व शराब का सेवन
5- कैफीन का अधिक मात्रा में सेवन
6- सिर में चोट लग जाना या कोई न्यूरोलॉजिकल समस्या
7- कुछ दवाओं का असर
8- आनुवंशिक कारण
9- कई मानसिक और शारीरिक समस्याएं जैसे अवसाद, हाइपो-थाइरॉएडिज्म और किडनी संबंधी रोग।

जांच व उपचार – हाइपरसोम्निया की जांच व उपचार

हर समय बहुत नींद आती है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। डॉक्टर आपके सोने-उठने के समय, अवधि, खानपान की आदतों, भावनात्मक समस्याओं और स्वास्थ्य स्थिति के बारे में पूछेगा। डॉक्टर कुछ जरूरी टेस्ट कराने के लिए भी कह सकता है जैसे ब्लड टेस्ट, कम्प्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन (सीटी स्कैन), पोली-सोमनोग्रॉफी (स्लीप टेस्ट)। अधिक गंभीर मामलों में इलेक्ट्रोइन्सेफैलोग्राम (ईईजी) कराने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा नींद के दौरान हृदय की धड़कनों, सांसों और मस्तिष्क की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। मरीज की स्थिति के अनुसार ही उन्हें दवाएं दी जाती हैं।

नुकसान – क्या होता है नुकसान

1- डायबिटीज: हाइपरसोम्निया से डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। जो लोग हर रात में नौ घंटे से अधिक सोते हैं, उनमें डायबिटीज की आशंका उन लोगों की तुलना में 50 फीसदी अधिक होती है, जो सात घंटे की नींद लेते हैं।
2- डिप्रेशन: अत्यधिक सोने से अवसाद के लक्षण और गंभीर हो सकते हैं। दिन में उनींदापन और किसी काम पर ध्यानकेंद्रित न कर पाना अवसाद को और बढ़ा देता है।
3- मोटापा: अध्ययन कहते हैं कि जो लोग लगातार छह वर्षों तक हर रात 9-10 घंटे की नींद लेते हैं, उनमें मोटापे का खतरा, उन लोगों की तुलना में 21 प्रतिशत तक बढ़ जाता है, जो 7-8 घंटे की नींद लेते हैं। इसके अलावा अधिक सोने वालों में सिरदर्द व कमर दर्द की समस्या भी अधिक होती है। कम उम्र में मृत्यु का खतरा भी बढ़ता है।

बचाव – ज्यादा नींद आने की बीमारी से कैसे बचें

1- नियत समय पर सोएं।
2- आठ घंटे से अधिक न सोएं।
3- नियमित व्यायाम करें।
4- एल्कोहल व कैफीन का सेवन कम करें।
5- पौष्टिक खाना खाएं।
6- योग और ध्यान करें।
7- गैजेट्स का इस्तेमाल कम करें।

शोधकर्ताओं के द्वारा यह पाया गया कि जो लोग 7-8 घंटे से ज़्यादा की नींद लेते हैं उनका स्टेटिस्टिकल ग्राफ़ मृत्यु की ओर नॉर्मल लोगों की अपेक्षा ज़्यादा है। इसका मतलब है कि अत्यधिक नींद लेने वाले व्यक्ति नार्मल लोगों की अपेक्षा ज़िंदगी का लुत्फ़ कम ले पाते हैं।इस तरह इन आंकड़ों को देखते हुए हम कह सकते हैं कि हमें ना तो बहुत कम सोना चाहिए और न ही बहुत ज़्यादा। यक़ीनन हर एक चीज़ की एक लिमिट होती है जिस को पार करने पर हमें कुछ परेशानियाँ भी उठानी पड़ती है। ठीक यही चीज़ नींद के मामले में भी लागू होती है।

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Jyada Neend Aane Ka Karan Aur Upay

परिचय – ज्यादा नींद आना, Jyada Nind Aana

अक्सर कुछ लोगों की शिकायत होती है कि रात और दिन में भरपूर सोने के बावजूद भी दिन भर झपकी आती है. अगर यह लम्बे समय से है तो यह आलस नहीं बल्कि बीमारी का संकेत है। पर्याप्त सोने के बाद भी हर वक्त नींद आना डिप्रेशन, इन्सोमेनिया, डायबिटीज, हार्ट डिजीज या अन्य बीमारी का लक्षण हो सकता है।
उम्र और शारीरिक स्थिति के अनुसार सभी की नींद की अवधि अलग-अलग होती है। लेकिन जरूरत से ज्यादा सोना और उसके बाद भी कमजोरी महसूस होना और हर समय नींद आना जैसी समस्या आपके फिट न होने को बताता है। इस आर्टिकल में आगे जानिए कि वो कौन सी बीमारी है, जिसकी वजह से ज्यादा नींद आती है।

ज्यादा नींद आने के कारण और लक्षण, Jyada Nind Aane Ka Karan & Lakshan

कई बार हमारा शरीर स्वस्थ नहीं होता और पूरी नींद लेने के बाद भी थकान महसूस होती है, और दिन रात नींद आती है. ज्यादा नींद आने का बड़ा कारण यहां दी जाने वाली बिमारियां भी हो सकती हैं-

डिप्रेशन में आती है ज्यादा नींद
हमेशा नींद आना और शरीर में ऊर्जा की कमी होना डिप्रेशन का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति का किसी काम में मन नहीं लगता है और उसे दिन भर सोते रहने की इच्छा होती है। अगर यह समस्या ज्यादे दिनों तक रहती है तो परेशानी गंभीर हो सकती है।

खर्राटे आना
खर्राटे की समस्या को ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया कहते हैं। इसका संबंध नींद और सांस दोनों से है। इसमें सोने पर नाक और मुंह के उपरी हिस्से में हवा भर जाती है जिससे आप मुंह से सांस लेने लगते हैं जबकि हवा के दबाव के कारण नाक से आवाज आने लगती है। इस बीमारी से फेफड़ों को हवा बाहर निकालने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इस बीमारी के मुख्य लक्षणों में नींद में बेचैनी महसूस करना, दिन में ज्यादा सोना और दिनभर सुस्त रहना, हर वक्त थकावट महसूस करना, किसी चीज पर ध्यान न लगा पाना, सोते समय सांस में रुकावट महसूस करना आदि शामिल हैं।

मांसपेशियों में दर्द रहना
मांसपेशियों में दर्द रहने किस समस्या को फाइब्रोमाएल्जिया कहते हैं। इसमें मांसपेशियों में दर्द के साथ थकान महसूस होना इस रोग का प्रमुख लक्षण होता है। इस बीमारी की सही पहचान और समझ न होने से इसके इलाज में काफी वक्त लग जाता है। फाइब्रोमाएल्जिया मस्कुलोस्के-लेटल के कार्य को प्रभावित करता है जिससे तंत्रिका तंत्र भी सही तरीके से काम नहीं करता। ऐसे में एकाग्रता की कमी और थकान बनी रहती है।

हाइपरसोमनिया की बीमारी
रात में सोने के बाद भी दिन में लंबे समय के लिए सोना भी एक समस्या है। अगर इसके बाद भी उनींदापन महसूस करना भी हाइपरसोमनिया बीमारी की ओर संकेत कर रहा है। इसमें व्यक्ति १० घंटे से भी ज्यादा सोता है। लेकिन यह नींद व्यक्ति को रिलेक्स नहीं करती और दोबारा सोने की इच्छा होती है। इसी तरह रीकरेंट हाइपरसोमनिया में ज्यादा नींद आती है। इसमें 18 घंटे तक व्यक्ति सो सकता है।

अन्य बीमारियों का होना
एनीमिया, थायराइड, शुगर और कॉलेस्ट्रोल का बढ़ा हुआ स्तर। हाइपोथायरॉइड और डायबिटीज की स्थिति में शरीर में मेटाबॉलिज्म बिगड़ जाता है जिससे कोशिकाओं को पर्याप्त भोजन नहीं मिलता है। इससे शरीर की ऊर्जा तेजी से खत्म हो जाती है और थकान व नींद महूसस होती है। इससे बचाव के लिए एक उम्र के बाद रूटीन टेस्ट कराते रहें।

मिनरल्स की कमी भी है ज्यादा नींद आने का कारण
शरीर को चलाने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है और इसकी पूर्ति के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है. शरीर को चलाने के करीब 40 प्रकार के पोषक तत्व जरूरी हैं। अगर इनमे से किसी की कमी होती है तो ज्यादा थकान और नींद आती है।

आयरन की कमी होना है ज्यादा नींद आने का कारण
इसकी कमी से मरीज को हर वक्त सोते रहने की इच्छा, थकान और चिड़चिड़ापन महसूस होता है। आयरन की कमी यानी मांसपेशियों और कोशिकाओं तक कम मात्रा में ऑक्सीजन का पहुंचना। ऐसे में जरूरी है कि आयरन युक्त डाइट जैसे राजमा, हरी सब्जियां, नट्स आदि का सेवन करें। इसके साथ ही कई और तत्व भी जरूरी होते हैं इसकी पूर्ति के लिए नियमित मौसमी फल और सब्जियों खूब खाएं।

समय से डाइट न लेना
शरीर के मेटाबॉलिज्म को शुरू करने के लिए डाइट बहुत जरूरी है। इसमें भी हर दिन सुबह का नाश्ता बहुत जरूरी होता है। नाश्ता न करने पर पूरे दिन थकान महसूस होती है। काब्र्स, प्रोटीन और गुड फैट के कॉम्बिनेशन वाला नाश्ता करना चाहिए। इसके साथ ही समय पर बाकी के मील्स भी लेते रहें।

फिजिकल एक्टिविटी न करना
नियमित रूटीन में वर्कआउट को शामिल करना भी इस समस्या से निजात दिलाता है। रोजाना वर्कआउट करने पर शरीर से हैप्पी हॉर्मोन्स का स्त्राव होता है जो ऊर्जावान बनाए रखते हैं। रोजाना कम से कम ३० मिनट समय अपने लिए निकालें।

शरीर में पानी की कमी होना
शरीर में पानी की कमी होने पर भी थकान महसूस होती है। भरपूर मात्रा में पानी न पीने से रक्त का वॉल्यूम कम हो जाता है जिससे शरीर में ऑक्सीजन और आवश्यक पोषक तत्व के संचार की गति कम हो जाती है। हर मौसम में कम से कम १२ गिलास पानी जरुर पीना चाहिए।

ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक गेजेट्स यूज़ करना
हमेशा मोबाइल फोन और कंप्यूटर या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स से चिपके रहना भी थकान का एक मुख्य कारण है। इन दिनों यह समस्या हर उम्र के लोगों में दिखाई दे रही है। दरअसल लंबे समय तक स्क्रीन पर देखते रहने से शरीर के पूरे सिस्टम पर प्रभाव पड़ता है और नींद बाधित होती है। इससे आप सुस्ती महसूस करते हैं।

चाय-कॉफी ज्यादा पीना
जरूरत से ज्यादा चाय या कॉफी के सेवन से शरीर में अत्यधिक कैफीन की मात्रा पहुंचने से नींद प्रभावित होती है। नींद पूरी न होने से भी हर वक्त थकान और नींद आने की समस्या रहती है। कई बार तनाव की वजह से दिन भर सुस्ती बनी रहती है और इसका असर सीधा आपकी परफॉर्मेंस पर पड़ता है। नशा करने से भी यह समस्या होती है।

ज्यादा नींद-थकान को दूर करने के उपाय

  • अपनी डाइट में केला, ग्रीन टी, सीताफल के बीज, ओटमील, दही, तरबूज, अखरोट, बींस, पालक आदि जरूर शामिल करें।
  • खाने में हमेशा हाई फाइबर वाले फूड्स ही लें क्योंकि इसमें कंपलेक्स कार्बोहाइडे्रट की मात्रा ज्यादा होती है। इससे ब्लड शुगर कंट्रोल में रहता है और थकावट नहीं होती है।
  • दो टाइम भरपेट खाना खाने की बजाय थोड़ी-थोड़ी देर पर कुछ हेल्दी खाते रहें। इससे ब्लड शुगर कंट्रोल में रहेगा। सुबह का नाश्ता टाइम पर जरूर लें।
  • दिन में एक बार पालक जरूर खाएं। इसमें पोटेशियम के साथ आयरन और विटामिन बी गु्रप के कई विटामिन होते हैं जो शरीर को ऊर्जावान बनाए रखते हैं।
  • ध्यान योग करें और हमेशा सकारात्मक सोचें। शवासन और भ्रामरी करना लाभकारी होता है।
  • ज्यादा चाय कॉफी का सेवन न करें। अगर कोई नशा करते है तो उसको तत्काल छोड़ दें।दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी या कोई तरल पदार्थ लेते रहें। इससे शरीर से हानिकारक तत्व बाहर निकलते हैं और ऊर्जा मिलती है।

नींद को नियमित करने के तरीके

  • शरीर के साथ युद्ध मत लड़ें
  • यौगिक अभ्यास – शांभवी महामुद्रा
  • यौगिक अभ्यास – शून्य ध्यान
  • आहार में प्राकृतिक खाद्य पदार्थ शामिल करें
  • गैस से ले कर प्लेट तक : झट ले आएँ
  • कितना भोजन करें
  • नींद को जबरन न रोकें
  • भोजन के तुरंत बाद न सोएँ
  • सोने की उचित मुद्रा
  • अपने तंत्र को साफ रखें

नुकसान – ज्यादा सोने के नुकसान

एक्सपर्ट मानते हैं कि एक व्यक्ति को सामान्य तौर पर 8 घण्टे से ज्यादा की नींद नहीं लेनी चाहिए, लेकिन अमूमन लोग 10 घण्टे तक सोते हैं। इससे कोई नुकसान नहीं होता। नुकसान तब होता है, जब आप इससे ज्यादा सोते हैं। इससे ज्यादा सोने वालों में सुस्ती घर कर जाती है। दिन के किसी भी पहर उन्हें खुद में उत्साह महसूस नहीं होता। याद्दाश्त भी कमजोर पड़ने लगती है। आलस सा सवार रहता है। शरीर हमेशा भारी-भारी सा लगता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए बेहतर है कि नींद को सामान्य किया जाए।
1- दर्द को बढ़ाता है ज़्यादा सोना – जी हाँ! यदि आप हद से ज़्यादा सोते हैं तो ये आपके दर्द को बढ़ा सकता है।ज़्यादा सोने से आपको सर दर्द, चक्कर आने की समस्या, पीठ में दर्द और पैरों में दर्द की समस्या भी हो सकती है।कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि ज़्यादा सोना और कठोर बिस्तर दोनों ही चीज़ें हमारे स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। इससे हमें ना सिर्फ़ दर्द का सामना करना पड़ता है बल्कि कभी कभी हमें तनाव और फ़्रस्ट्रेशन भी होने लगता है।
2- ज्यादा नींद लेने से हृदय रोगों का जन्म होता है – बहुत कम सोना और बहुत ज़्यादा सोना दोनों ही चीज़ें हृदय रोगों को जन्म देती हैं।लार्ज नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रीशन एग्जामिनेशन सर्वे की रिपोर्ट के द्वारा इस बात का दावा किया गया है कि कम और ज़्यादा दोनों ही प्रकार का स्लीपिंग शेड्यूल हृदय रोगों को जन्म देता है।बहुत कम और बहुत ज़्यादा सोने से कोरोनरी हार्ट डिजीज का ख़तरा बढ़ जाता है।इसी तरह नर्स हेल्थ स्टडी के द्वारा एक परिणाम निकाला गया जिसमें कि यह पाया गया कि स्लीपिंग शेड्यूल हृदय रोगों से सीधा सीधा जुड़ा हुआ है।
3- मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है ज़्यादा सोना – यदि हम 7-8 घंटे से ज़्यादा की नींद लेते हैं तो यह हमारे मस्तिष्क को प्रभावित करता है। अक्सर देखा जाता है कि जब हम ज़्यादा मात्रा में नींद लेते हैं तो हमें तनाव या फ़्रस्ट्रेशन हो जाता है।हमें ऐसा महसूस होता है कि जैसे हमारा मस्तिष्क भारी हो रहा हो और हमें कुछ समझ में नहीं आता है।हमें किसी भी बिंदु पर अपना कंसंट्रेशन करने के लिए काफ़ी ज़्यादा एफर्ट करना पड़ता है। हम आसानी से किसी भी चीज़ की तरफ़ ध्यान नहीं दे पाते हैं।ज़्यादा सोने से हमारी काग्निटिव क्षमता पर प्रभाव पड़ता है। किसी भी चीज़ को याद रखना या किसी भी चीज़ को याद करना, ये दोनों ही हमें काफ़ी मुश्किल काम लगते हैं।आप यक़ीन नहीं करेंगे लेकिन ये सच है कि 7-8 घंटे से ज़्यादा सोने पर कभी कभी हमें शॉर्टटर्म मेमोरी लॉस की समस्या से भी गुज़रना पड़ता है।लुमोसिटी ब्रेन ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म में हुए शोध में इस बात का ख़ुलासा किया गया है कि सात घंटे की नींद लेने पर काग्निटिव परफॉर्मेंस तीन गुना अच्छी होती है।इसी के साथ इस बात का भी ख़ुलासा किया गया कि 7 या 8 घंटे से अधिक की नींद लेने पर काग्निटिव परफॉर्मेंस प्रभावित होता है।

4- अल्ज़ाइमर – कुछ अन्य शोधों में इस बात का ख़ुलासा किया गया है कि बहुत कम या बहुत ज़्यादा सोने से अल्ज़ाइमर की समस्या हो जाती है।
5- बेचैनी – यदि अत्यधिक मात्रा में नींद ली जाए तो यह न सिर्फ़ तनाव को जन्म देता है बल्कि बेचैनी की समस्या को भी पैदा करता है।
6- डिप्रेशन- जो लोग 7-8 घंटे से ज़्यादा की नींद लेते हैं उन में लगातार डिप्रेशन की समस्या बनी रहती है।ओल्डर अडल्ट्स के अध्ययन में इस बात की पुष्टि की गई कि जो लोग 10 घंटे से अधिक की नींद लेते हैं उनकी मेंटल हेल्थ 7-8 घंटे नींद लेने वाले व्यक्तियों की अपेक्षा नकारात्मक होती है।कुछ शोध यह भी दावा करते हैं कि अत्यधिक नींद हमारी ओवर ऑल हेल्थ को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है।
7- ज्यादा नींद लेने से वजन बढ़ता है – शोधों में इस बात का ख़ुलासा किया गया है कि अत्यधिक सोना वज़न बढ़ाने की समस्या को जन्म देता है।कनाडा में हुए एक अध्ययन में इस बात का दावा किया गया कि ज़्यादा सोना या फिर कम सोना दोनों ही चीज़ें शरीर का वज़न बढ़ाती हैं।जो लोग 7-8 घंटे से कम या 7-8 घंटे से ज़्यादा की नींद लेते हैं उनका वज़न लगभग एक किलोग्राम तक बढ़ता है।अध्ययन में यह पाया गया कि जो लोग नौ घंटे से ज़्यादा की नींद लेते हैं वे नॉर्मल लोगों की अपेक्षा 21% तक वेट गेन कर सकते हैं।
8- ज्यादा नींद आने से सूजन बढ़ सकता है – 7-8 घंटे की नींद लेना ही हमारे स्वास्थ्य के लिए उचित है। यदि हम इस मात्रा से अधिक की नींद लेते हैं तो हमारे शरीर में कई बीमारियों के साथ साथ इन्फ्लामेशन की समस्या भी हो जाती है।एक शोध में यह पाया गया कि सीआरपी (सूजन मापन) का स्तर नींद के स्तर के साथ ही बढ़ता और घटता है। वे लोग जो 7-8 घंटे से ज़्यादा की नींद लेते हैं उनमें 8% तक सीआरपी का स्तर बढ़ता है।
9- हार्ट अटैक या हार्ट स्ट्रोक का ख़तरा – जब हम पर्याप्त मात्रा में नींद नहीं लेते हैं तो हमारे शरीर में हार्ट अटैक या हार्ट स्ट्रोक के चांसेस बढ़ जाते हैं।हमारे शरीर के लिए 7-8 घंटे की नींद बहुत ही ज़्यादा ज़रूरी है।यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैंब्रिज में हुए एक शोध में इस बात का ख़ुलासा किया गया कि जो लोग 8 घंटे से ज़्यादा की नींद लेते हैं उनमें हार्ट स्ट्रोक के चांसेस नॉर्मल लोगों की अपेक्षा 46% तक ज़्यादा होते हैं।इसी तरह एक और शोध में इस बात का ख़ुलासा किया गया कि जो लोग आठ घंटे से ज़्यादा सोते हैं फिर चाहे वह रात हो या दिन उनमें हार्ट स्ट्रोक के चांसेस 90% तक होते हैं।
10- मृत्यु के आंकड़े बढ़ाता है ज़्यादा सोना – सेकेंड नर्स हेल्थ स्टडी के शोधकर्ताओं द्वारा इस बात का ख़ुलासा किया गया है कि ज़्यादा सोने से मृत्यु के आंकड़े भी बढ़ते हैं। इसका मतलब है कि वे लोग जो 7-8 घंटे से ज़्यादा की नींद लेते हैं वे नार्मल लोगों की अपेक्षा थोड़ा कम जी पाते हैं।शोधकर्ताओं द्वारा लाइफ़स्टाइल, रिलेशनशिप, डिप्रेशन और इकॉनोमिक फैक्टर को मृत्यु से रिलेट किया गया।इसके अलावा भी शोधकर्ताओं ने एक और चीज़ का अध्ययन किया कि किस चीज़ के बढ़ने से मृत्यु का आंकड़ा बढ़ता है और इसके लिए उन्होंने ऊपर दिए हुए फैक्टर्स के अलावा ज़्यादा सोने वाले फैक्टर्स को भी अपने सर्वे में शामिल किया।

शोधकर्ताओं के द्वारा यह पाया गया कि जो लोग 7-8 घंटे से ज़्यादा की नींद लेते हैं उनका स्टेटिस्टिकल ग्राफ़ मृत्यु की ओर नॉर्मल लोगों की अपेक्षा ज़्यादा है। इसका मतलब है कि अत्यधिक नींद लेने वाले व्यक्ति नार्मल लोगों की अपेक्षा ज़िंदगी का लुत्फ़ कम ले पाते हैं।इस तरह इन आंकड़ों को देखते हुए हम कह सकते हैं कि हमें ना तो बहुत कम सोना चाहिए और न ही बहुत ज़्यादा। यक़ीनन हर एक चीज़ की एक लिमिट होती है जिस को पार करने पर हमें कुछ परेशानियाँ भी उठानी पड़ती है। ठीक यही चीज़ नींद के मामले में भी लागू होती है।

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