-Tikait said on the first meeting with the Supreme Court committee, we will not go- केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन कर रहे है. किसानों के लिए आज यानी मंगलवार का दिन बहुत अहम है. एक तरफ जहां सरकार और किसान संगठनों के बीच 10वें दौर की बातचीत होनी है, वहीं दूसरी तरफ सुप्राम कोर्ट द्वारा गठित की गई 4 सदस्यीय कमेटी भी आज 19 जनवरी 2021 को पहली बैठक कर रही है. कमेटी के तीनों सदस्य पूसा कैंपस में बातचीत कर रहे हैं. वहीं किसानों ने साफ कर दिया है कि उन्हें ना तो कमेटी की बैठक में हिस्सा लेना है ना ही अपनी बात इस समिति के सामने रखनी है. भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कमेटी की बैठक को लेकर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित की गई कमेटी की आज होने वाली बैठक में हम नहीं जा रहे हैं. कानून सरकार लेकर आई है और वही इनको वापस लेगी.

राकेश टिकैत ने कहा है कि हम सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं लेकिन सरकार और किसान दोनों का ही मानना है कि बातचीत से ही हल निकलेगा. ऐसे में हम सरकार से ही बात करेंगे. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि हल कब तक निकलेगा, वो इसको लेकर कुछ नहीं कह सकते हैं.

कृषि कानूनों पर सभी पक्षों से बात करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने गठित कमेटी की है. सुप्रीम कोर्ट ने चार सदस्यों की कमेटी बनाई थी, जिसमें से भूपिंदर सिंह मान ने खुद को किसानों के खिलाफ ना जाने की बात कहते हुए अलग कर लिया था. अब इस कमेटी में अशोक गुलाटी, अनिल घनवंत और प्रमोद जोशी हैं, जो आज बैठक कर रहे हैं.

आज सरकार और किसान संगठनों के बीच भी दसवें राउंड की बातचीत तय थी. जिसे एक दिन के लिए आगे बढ़ा दिया गया है. सरकार और किसानों के बीच बैठक अब बुधवार को होगी. बुधवार को ही सुप्रीम कोर्ट भी किसानों की 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड पर रोक की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करेगा.

क्यों कर रहे हैं किसान आंदोलन?
केंद्र सरकार बीते साल तीन नए कृषि कानून लेकर आई है, जिनमें सरकारी मंडियों के बाहर खरीद, अनुबंध खेती को मंजूरी देने और कई अनाजों और दालों की भंडार सीमा खत्म करने जैसे प्रावधान किए गए हैं. इसको लेकर किसान जून के महीने से लगातार आंदोलनरत हैं और इन कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. ये आंदोलन जून से नवंबर तक मुख्य रूप से हरियाणा और पंजाब में था. सरकार की ओर से प्रदर्शन पर ध्यान ना देने पर 26 नवंबर को किसानों ने दिल्ली कूच का ऐलान किया. इसके बाद बीते 54 दिन से किसान दिल्ली और हरियाणा को जोड़ने वाले सिंधु बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं. टिकरी, गाजीपुर और दिल्ली के दूसरे बॉर्डर पर भी किसान जमा हैं.-Tikait said on the first meeting with the Supreme Court committee, we will not go-

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