12 फरवरी कुंभ संक्रांति 2021 स्नान की तिथि, कुंभ संक्रांति 2021 पूजा मुहूर्त, कुंभ संक्रांति 2021 स्नान-दान, कुंभ संक्रांति पूजा विधि, कुंभ संक्रांति का महत्व, कुंभ मेला, कुंभ संक्रांति कथा, 2021 में कब है कुंभ संक्रांति, Kab Hai Kumbh Sankranti, Kumbh Sankranti 2021 Puja Muhurt, Kumbh Sankranti Puja Vidhi, Kumbha Sankranti Katha, Kumbha Sankranti Mahatva

फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को कुंभ संक्रांति मनाई जाती है. इस बार कुंभ संक्रांति पर्व 12 फरवरी को मनाया जाएगा. सूर्य एक राशि में तिथि अनुसार एक महीने रहते हैं. इस तरह एक साल में सभी 12 राशियों में संचार करते हैं. इसी क्रम में सूर्य का यह संचार 12 फरवरी को कुंभ राशि में होने जा रहा है. सूर्य का राशि परिवर्तन ज्योतिष की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. कुंभ संक्रांति का महत्व सनातन धर्म में बहुत अधिक है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक हिंदू धर्म के सभी देवी देवता पवित्र नदियों में स्नान करते हैं. ऐसे में इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना बेहद विशेष माना जाता है. यदि आप भी कुंभ संक्रांति पर्व पर पूजा अर्चना करना चाहते हैं तो यहां पढ़ें कुंभ संक्रांति का शुभ मुहूर्त, तिथि, शाही स्नान का समय, कुंभ संक्रांति पूजा विधि, कुंभ संक्रांति का महत्व, नियम और मान्यताएं , कुंभ संक्रांति कथा एवं कुंभ मेला के बारे में विस्तृत जानकारी-

  • कुंभ संक्रांति का शुभ मुहूर्त: 12 फरवरी, शुक्रवार Kumbha Sankranti Muhurat
    कुम्भ संक्रान्ति का पुण्य काल मुहूर्त – दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 9 मिनट तक
    पुण्य काल अवधि- 05 घंटे 34 मिनट्स
    कुम्भ संक्रान्ति का महा पुण्य काल- शाम 4 बजकर 18 मिनट से लेकर शाम 6 बजकर 9 मिनट तक
    पुण्य काल अवधि- 01 घंटा 51 मिनट
    कुम्भ संक्रान्ति का क्षण- रात 9 बजकर 27 मिनट पर
  • ये हैं स्नान की प्रमुख तिथियां Kumbha Sankranti Tithi
    पहला स्नान – 14 जनवरी संक्रांति के दिन होगा.
    दूसरा स्नान – 11 फरवरी को मौनी अमावस्या पर होगा.
    तीसरा स्नान – 16 फरवरी को बसंत पंचमी पर होगा.
    चौथा स्नान – 27 फरवरी को माघ पूर्णिमा की तिथि पर होगा.
    पांचवां स्नान – 13 अप्रैल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर होगा.
    छठवां स्नान – 21 अप्रैल को राम नवमी पर होगा.
  • शाही स्नान
    पहला शाही स्नान – 11 मार्च शिवरात्रि
    दूसरा शाही स्नान – 12 अप्रैल सोमवती अमावस्या
    तीसरा मुख्य शाही स्नान – 14 अप्रैल मेष संक्रांति
    चौथा शाही स्नान – 27 अप्रैल बैसाख पूर्णिमा

कुंभ संक्रांति 2021 पूजा विधि Kumbh Sankranti 2021 Puja Vidhi
1. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में सूर्य भगवान की उपासना करें और उन्हें अर्घ्य दें.
2. अर्घ्य देने के बाद आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ करें.
3. सूर्य देव की विधिवत पूजा करें. कुंभ संक्रांति के शुभ दिन सूर्य कवच, सूर्य चालीसा, सूर्य आरती, सूर्य स्तोत्र, आदित्य ह्दय स्तोत्र, सूर्य मंत्र, सूर्य नामावली वादि का विधि विधान से जाप करना चाहिए.
4. पवित्र नदी में नहाएं. मान्‍यता है कि इस दिन गंगा स्‍नान करने से मोक्ष की प्राप्‍ति होती है. इसके अलावा यमुना, गोदावरी या अन्‍य किसी भी पवित्र नदी में स्‍नान किया जा सकता है.
5. गरीबों और ब्राह्मणों को खाने की वस्तुएं और कपड़े दान करें.इस दिन घी का दान सर्वश्रेष्ठ माना गया है. 6. इसके अलावा संतरा फल गरीब बच्चों में बांटने चाहिए. स्वर्ण, स्टील, पीतल, तांबे, कांसे या चांदी के छोटे कलश मंदिर में दान करना चाहिए. इसके अलावा कुंभ संक्रांति के दिन गोदान करना भी बेहद शुभ माना जाता है.

कुंभ संक्रांति का महत्व (Kumbha Sankranti Mahatva)
जो भी व्यक्ति इस दिन ब्रहम मुहूर्त में उठकर सूर्यदेव की उपासना और उन्हें अर्घ्य देता है उसे अपने जीवन के हर क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होती है. इस उपाय से जीवन के अनेक दोष भी समाप्त हो जाते हैं.इस दिन दान करने से अंत काल में उत्तम धाम की प्राप्ति होती है.अगर इस शुभ दिन पर बीज मंत्र का जाप किया जाए तो मनुष्य को अपने दुखों से छुटकारा भी शीघ्र ही मिल जाता है. कुंभ संक्रांति पर आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ भी किया जा सकता है.इस पाठ से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं.इस दिन विधि विधान से पूजा करने पर उस परिवार में किसी भी सदस्य के ऊपर कोई मुशीवत या रोग नहीं आता है.साथ ही भगवान आदित्य के आशीर्वाद से जीवन के अनेक दोष भी दूर हो जाते हैं और इससे प्रतिष्ठा और मान-सम्मान में वृद्धि होती है.कुंभ संक्रांति के दिन किए गए पुण्य कार्य मनुष्य के सभी पापों को नष्ट कर देते हैं.

नियम और मान्यताएं
1. हिंदू धर्म के अनुसार मान्यता है कि किसी भी कुंभ मेले में पवित्र नदी में स्नान या तीन डुबकी लगाने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मानव को जन्म-पुनर्जन्म तथा मृत्यु मोक्ष की प्राप्ति होती है.

2. पवित्र स्नान करने और प्रार्थना करने के बाद, पूजा करके गायों को प्रसाद दिया जाता है, जो इस दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है. लोग ब्राह्मण पंडितों के साथ-साथ गरीबों को भी भोजन और अन्य आवश्यकताएं दान करते हैं, क्योंकि वर्ष के सभी बारह संक्रांतियों पर दान-पुण्य को अत्यधिक शुभ माना जाता है.

3. जबकि यह दिन पूरे देश में मनाया जाता है, पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए, यह दिन फाल्गुन मास की शुरुआत है. मलयालम कैलेंडर के अनुसार, इस त्यौहार को मासिमसम के रूप में जाना जाता है जबकि दक्षिण भारत में संक्रांति को संक्रानम के नाम से जाना जाता है.

क्यों होता है कुंभ का आयोजन?
कुंभ को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं जिनमें प्रमुख कथा समुद्र मंथन के दौरान निकलने वाले अमृत कलश से जुड़ी है. महर्षि दुर्वासा के शाप के कारण जब देवता कमजोर हो गए तो दैत्यों ने देवताओं पर आक्रमण कर उन्हें परास्त कर दिया. तब भगवान विष्णु ने उन्हें दैत्यों के साथ मिलकर क्षीरसागर का मंथन करके अमृत निकालने की सलाह दी. क्षीरसागर मंथन के बाद अमृत कुंभ के निकलते ही इंद्र के पुत्र ‘जयंत’ अमृत-कलश को लेकर आकाश में उड़ गए. उसके बाद दैत्यगुरु शुक्राचार्य के आदेश पर दैत्यों ने अमृत को वापस लेने के लिए जयंत का पीछा कर उसे पकड़ लिया. अमृत कलश पर अधिकार जमाने के लिए देव-दानवों में बारह दिन तक लगातार युद्ध होता रहा. इस युद्ध के दौरान पृथ्वी के चार स्थानों प्रयाग, हरिद्वार, उज्जैन, नासिक में कलश से अमृत बूंदें गिरी थीं. शांति के लिए भगवान ने मोहिनी रूप धारण कर सबको अमृत बांटकर देव-दानव युद्ध का अंत किया. तब से जिस-जिस स्थान पर अमृत की बूंदें गिरीं थीं, वहां कुंभ मेले का आयोजन होता है.

कुंभ संक्रांति कथा
एक बार, देवताओं और राक्षसों ने मिलकर मंथन की पहाड़ी का उपयोग करते हुए दूध के सागर को मंथन रॉड के रूप में और वासुकी को रस्सी के रूप में मंथन करने का फैसला किया. भगवान विष्णु ने एक विशाल कछुए (कूर्मावतार) का रूप धारण किया और अपनी मजबूत पीठ पर मंथन की छड़ी का समर्थन किया. समुद्र से कई चीजें निकलीं और आखिर में अमृत का बर्तन निकला.

अमृत के पात्र को शातिर राक्षसों से बचाने के लिए, देवताओं ने बर्तन को प्रयाग (इलाहाबाद) हरद्वार, उज्जैन, और नासिक सहित चार स्थानों पर छिपा दिया. इन चारों स्थानों में, कुंभ मेले के दिन अमरता का अमृत नीचे गिरा और उन सबसे पवित्र स्थानों को जन्म दिया, जहां मनुष्यों के पापों को दूर करने की सबसे बड़ी शक्ति है. इसलिए इन चार स्थलों में से एक में एक पवित्र डुबकी पुरुषों को पापों से मुक्त करने और इस जीवन के दौरान समृद्धि और इस जीवन के बाद अमरता के लिए नेतृत्व करने के लिए कहा जाता है.

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