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गणेश विसर्जन 2021
देशभर में लोग बड़ी धूम-धाम से गणेश चतुर्थी का पर्व मनाते हैं. भक्त नाचते गाते और ढोल-नगाड़ों के साथ अपनी श्रद्धा अनुसार घर में गणपति की स्थापना करते हैं. इसमें कोई डेढ़ दिन, तो कोई तीन और कोई 5 दिन के लिए गणपति को विराजमान करता है. गणेश महाराज को घर में ज्यादा से ज्यादा 10 दिन के लिए ही विराजमान कर सकते हैं. यानी कि गणेश चतुर्थी पर भगवान गणपति की स्थापना के 10 दिन बाद अनंत चतुर्दशी पर प्रतिमा का विसर्जन भी उसी धूम-धाम से किया जाता है. इस दिन भी पिछले 10 दिनों की तरह पूजा, आरती और भोग लगाया जाता है. इसके बाद विसर्जन के समय फिर से पूजा की जाती है. इसे उत्तर पूजा भी कहा जाता है. फिर आरती कर विसर्जन मंत्र के साथ प्राण-प्रतिष्ठित मिट्टी की गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है. इस दिन हर जगह गणपति बप्पा मोरया (Ganpati Bappa Morya) के जयकारे सुनाई देते हैं. कहते हैं कि बप्पा का विसर्जन ये कहते हुए किया जाता है कि बप्पा अगले साल फिर आना.
जिस तरह घर पर गणपति की स्थापना करने के लिए शुभ मुहूर्त देखा जाता है उसी प्रकार बप्पा के विसर्जन के लिए भी शुभ मुहूर्त का इंतजार करना चाहिए. धार्मिक मान्यता है कि अगर शुभ मुहूर्त में ही बप्पा का विसर्जन किया जाए, तो शुभ होता है. पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी का पर्व इस साल 2021 में 10 सितंबर 2021, शुक्रवार को भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाएगा और 19 सितंबर 2021, रविवार को भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को गणेश महोत्सव का समापन होगा. आइए बताते हैं गणेश विसर्जन 2021 का शुभ मुहूर्त-

गणेश विसर्जन शुभ मुहूर्त (Ganesh Visarjan Shubh Muhurat)
गणेश विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त
प्रातः काल (चर, लाभ, अमृत) – 07:39 ए एम से 12:14 पी एम तक
दोपहर (शुभ)- 01:46 पी एम से 03:18 पी एम बजे तक
शाम (शुभ, अमृत, चर)- 06:21 पी एम से 10:46 पी एम बजे तक
रात (लाभ)- 01:43 ए एम से 03:11 ए एम बजे तक (20 सितंबर)
उषाकाल मुहूर्त (शुभ) – 04:40 ए एम से 06:08 ए एम तक (20 सितंबर)
चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ – 19 सितंबर, 2021 को 05:59 ए एम बजे
चतुर्दशी तिथि समाप्त – 20 सितम्बर, 2021 को 05:28 ए एम बजे
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विसर्जन का अर्थ
विसर्जन शब्द संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है पानी में विलीन होना, ये सम्मान सूचक प्रक्रिया है इसलिए घर में पूजा के लिए प्रयोग की गई मूर्तियों को विसर्जित करके उन्हें सम्मान दिया जाता है.

गणेश विसर्जन विधि , गणपति विसर्जन के नियम
1. सबसे पहले प्रतिदिन की जाने वाली आरती-पूजन-अर्चन करें.
2. विशेष प्रसाद का भोग लगाएं.
3. अब श्री गणेश के पवित्र मंत्रों से उनका स्वस्तिवाचन करें.
4. एक स्वच्छ पाटा लें. उसे गंगाजल या गौमूत्र से पवित्र करें. घर की स्त्री उस पर स्वास्तिक बनाएं. उस पर अक्षत रखें. इस पर एक पीला, गुलाबी या लाल सुसज्जित वस्त्र बिछाएं.
5. इस पर गुलाब की पंखुरियां बिखेरें. साथ में पाटे के चारों कोनों पर चार सुपारी रखें.
6. अब श्री गणेश को उनके जयघोष के साथ स्थापना वाले स्थान से उठाएं और इस पाटे पर विराजित करें. पाटे पर विराजित करने के उपरांत उनके साथ फल, फूल, वस्त्र, दक्षिणा, 5 मोदक रखें.
7. एक छोटी लकड़ी लें. उस पर चावल, गेहूं और पंच मेवा और दूर्वा की पोटली बनाकर बांधें. यथाशक्ति दक्षिणा (सिक्के) रखें. मान्यता है कि मार्ग में उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े. इसलिए जैसे पुराने समय में घर से निकलते समय जो भी यात्रा के लिए तैयारी की जाती थी वैसी श्री गणेश के बिदा के समय की जानी चाहिए.

8. नदी, तालाब या पोखर के किनारे विसर्जन से पूर्व कपूर की आरती पुन: संपन्न करें. श्री गणेश से खुशी-खुशी बिदाई की कामना करें और उनसे धन, सुख, शांति, समृद्धि के साथ मनचाहे आशीर्वाद मांगें. 10 दिन जाने-अनजाने में हुई गलती के लिए क्षमा प्रार्थना भी करें.
9. श्री गणेश प्रतिमा को फेंकें नहीं उन्हें पूरे आदर और सम्मान के साथ वस्त्र और समस्त सामग्री के साथ धीरे-धीरे बहाएं.
10. श्री गणेश इको फ्रेंडली हैं तो पुण्य अधिक मिलेगा क्योंकि वे पूरी तरह से पानी में गलकर विलीन हो जाएंगे. आधे अधूरे और टूट-फूट के साथ रूकेंगे नहीं.
11. अगर विसर्जन घर में ही कर रहे हैं तो गमले को सजाएं, पूजन करें. अंदर स्वास्तिक बनाएं और थोड़ी शुद्ध मिट्टी डालकर मंगल मंत्रोच्चार के साथ गणेश प्रतिमा को बैठाएं. अब गंगा जल डालकर उनका अभिषेक करें. फिर सादा स्वच्छ शुद्ध जल लेकर गमले को पूरा भर दें.
12. श्री गणेश प्रतिमा गलने लगेगी तब उनमें फूलों के बीज डाल दें.
13. ध्यान रखें कि प्रसाद गमले में न रखें.
13. श्री गणेश को भावविह्वल होकर प्रणाम करें. गमला घर की किसी स्वच्छ जगह पर रखें.

विसर्जन मंत्र
विसर्जन स्थान पर मौजूद परिवार के सदस्य और अन्य लोग हाथ में फूल और अक्षत लें. फिर यह विसर्जन मन्त्र बोलकर गणेश जी को चढ़ाएं और प्रणाम करें.
ॐ गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ, स्वस्थाने परमेश्वर
यत्र ब्रह्मादयो देवाः, तत्र गच्छ हुताशन ..
ॐ श्री गणेशाय नमः, ॐ श्री गणेशाय नमः, ॐ श्री गणेशाय नमः.
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जल में विसर्जन का महत्व
जल को पंच तत्वों में से एक माना गया है. इसमें घुलकर प्राण प्रतिष्ठित गणेश मूर्ति पंच तत्वों में सामहित होकर अपने मूल स्वरूप में मिल जाती है. जल में विसर्जन होने से भगवान गणेश का साकार रूप निराकार हो जाता है. जल में मूर्ति विसर्जन से यह माना जाता है कि जल में घुलकर परमात्मा अपने मूल स्वरूप से मिल गए. यह परमात्मा के एकाकार होने का प्रतीक भी है. सभी देवी-देवताओं का विसर्जन जल में ही होता है. भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है संसार में जितनी मूर्तियों में देवी-देवता और प्राणी शामिल हैं, उन सभी में मैं ही हूं और अंत में सभी को मुझमें ही मिलना है.

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