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कंटेंट तालिका

परिचय – पेट का भारीपन, गैस, जलन व दर्द

क्या आपको अक्सर पेट में भारीपन महसूस होता है? बदहज़मी, गैस की तकलीफ़, हार्ट बर्न, एसिडिटी और ब्लॉटिंग (पेट का भारीपन) जैसी समस्याओं ने आपका जीना हराम कर रखा है? अगर हां, तो आज से ही आपको अपने जीवनशैली में बदलाव करने की आवश्यकता है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि हम अपनी जीवनशैली में कुछ छोटे-छोटे बदलाव कर इस परेशानी से हमेशा के लिए राहत पा सकते हैं. तो फिर देर किस बात की चलिए जानते हैं कि हमें अक्सर पेट में भारीपन क्यों महसूस होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है.

कारण व उपाय – पेट का भारीपन, गैस, जलन व दर्द का कारण व उपाय

1. भूख से ज्यादा भोजन का सेवन करने से बचें
यदि आप दिनभर खाते पीते रहते हैं तो अपनी इस आदत को बदलना बहुत जरूरी है, क्योंकि बार बार खाने से एसिड रीफ्लक्स (उतार-चढ़ाव) यानी कि गैस की संमस्या हो सकती है. इसलिए पेट के भारीपन से बचने के लिए जरुरी है कि आप अपने खुराक पर नियंत्रण रखें और प्रति मील केवल एक प्रोटीन ही खाएं. आयुर्वेद के अनुसार भोजन करने के बीच कम से कम पांच घंटे का अंतराल होना आवश्यक है, जिससे शरीर के पाचनतंत्र को खाना पचाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके.
2. खाना चबा चबाकर खाएं
बदहजमी पेट में होने वाली भारीपन की समस्या का कारण हैं. बचपन में हमें सीख दी जाती थी कि खाने को 32 बार चबाकर खाएं. ऐसा बोले जाने का सिर्फ एक ही मकसद होता था कि खाने के समय हमारा भोजन उन रसों के साथ ठीक तरह से मिल जाए, जो हमारी पाचन क्रिया में सहायता करते हैं. लेकिन आजकल समय की कमी होने के चलते हम जल्दबाजी में भोजन निगलते हैं, जो बाद में चलकर हमारे पेट के लिए बढ़ी समस्या बन जाती है.
3. प्रोसेस्ड फूड्स (पैकेट वाले भोजन) को कहें ना
प्रोसेस्ड फूड्स में मौजूद प्रिजर्वेटिव्स, रंग और ऐडिटिव्स हमारे शरीर के पाचन में सहायक आंत के अच्छे बैक्टीरिया को ठीक से काम नहीं करने देते. इससे पेट का भारीपन, गैस, एसिडिटी और बदहजमी जैसी स्थिति पैदा हो जाती है. डॉक्टर्स का कहना है कि भोजन में जो थोड़ा-बहुत पोषण होता है, उसे भी ऐडिटिव्स नष्ट कर देते हैं. इसलिए पैकेट वाले खाने से बचे और जितना हो सके भोजन को उसके नैसर्गिक रूप में ही खाएं.
4. कार्बनेटेड ड्रिंक्स को कम करें
कोला और अन्य कार्बनेटेड ड्रिंक्स के सेवन से बचें ये आपके शरीर में गैस भरने का काम करते हैं. इसलिए आप और आपके पेट के लिए अच्छा होगा कि आप कार्बनेटेड ड्रिंक्स के बजाय ताजे फलों के जूस, नारियल पानी, छाछ या जलजीरा का सेवन करें. इससे आपके पेट को ठंडक मिलेगी.

5. व्यायाम करें
पेट की समस्या से राहत पाने के लिए ही नहीं बल्कि अच्छी सेहत के लिए भी व्यायाम करना आवश्यक है.  डॉक्टर्स का कहना है कि जब आप कब्ज से पीड़ित होते हैं तो निचली आंत में अपशिष्ट इकट्ठा होने लगता है, जिससे गैस की समस्या होने लगती है. व्यायाम, योगा या किसी भी प्रकार की शारीरिक गतिविधि मांसपेशियों को शिथिल करने में मदद करती है और आप धीरे धीरे पेट से संबंधित अन्य समस्याओं से दूर चले जाते हैं.
6. खूब सारा पानी पिएं
पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने से पेट के भारीपन यानी ब्लॉटिंग की समस्या उत्पन्न हो जाती है. जब आप शरीर की आवश्यकता के हिसाब से पानी नहीं पीते तो शरीर पानी की कमी महसूस करने लगता है. पानी की कमी होने पर शरीर पानी को इकट्ठा करने लगता है. ऐसे में पानी के अणु सोडियम के साथ मिल जाते हैं और शरीर के अंदर ही रह जाते हैं. इसलिए जब आप पानी पीना कम कर देते हैं तो सबसे पहले आपको पेट की समस्या घेरती है. इसलिए पेट की समस्या से बचने के लिए आपको खूब सारा पानी यानी कि दिनभर में 5-6 लीटर पानी पीना आवश्यक है.
7. कैफीन के सेवन को सीमित करें
चाय, कॉफी और कैफीन वाले अन्य पेय पदार्थ आपके सिस्टम से पानी को निथार कर बहा देते हैं. जिसके कारण शरीर में संवेदनशील बाउल सिंड्रोम की समस्या पैदा हो सकती है. कैफीन का ज्यादा सेवन करने से पेट में दर्द, मरोड़, अचानक व तुरंत पेशाब जाने की समस्या हो सकती है, जो आगे चलकर पेट के भारीपन का कारण बन सकते हैं.
8. धूम्रपान और शराब को कहें ना
धूम्रपान करने से सांस के जरिए बाहर की हवा शरीर के अंदर इकट्ठा हो जाती है, जो पेट में गैस होने की संभावनाओं को बढ़ा देता है. इतना ही नही सिगरेट का धुआं आपके फेफड़ों में इकट्ठा होता है जो आगे चलकर फैफड़े खराब कर देता है. शराब, अल्कोहल पीने से भी बदहजमी और गैस की समस्या पैदा सकती है. इसलिए जरुरी है कि आप धूम्रपान और शराब पीने की अपनी आदत पर लगाम लगाएं.

इन चीजों का सेवन करने से बचें

1- रिफाइन्ड फ्लोर्स: ये ब्लड शुगर, इन्सुलिन स्तर और फैट स्टोरेज को बढ़ाते हैं.
2- बीन्स: इसमें ऑलिगोसैकराइड्स नामक शुगर पाया जाता है, जिसे मानव शरीर आसानी से विघटित नहीं कर पाता. जब ये छोटी आंत में प्रवेश करता है तो बैक्टेरिया इन पर काम करना शुरू करता है और गैस बनने लगती है.
3- फूलगोभी, ब्रोकलि, गोभी, शिमला मिर्च: ये गैस बनानेवाली सब्जियों की सूची में सबसे शीर्ष स्थान पर हैं.
4- सेब: इनमें घुलनशील फाइबर होता है, जो पानी को अवशोषित करता है. ये आंत में पाचन के दौरान टूट जाते हैं और इनकी वजह से गैस बनना शुरू हो जाता है.

घरेलू नुस्खे – गैस की समस्या में तुरंत राहत के लिए घरेलू नुस्खे

हम कुछ घरेलु उपाए बता रहे है जो की बहुत ही फायदेमंद है , ऐसे 10 असरदार घरेलू उपायों को जी चुटकी बजाते ही आप की परेशानी को खत्म कर देते है :-

  1. अदरक- गैस की समस्या में अदरक सबसे बेहतरीन दवा का काम करता है। थोड़ा-सा सूखा अदरक चाय में डालकर पीने से गैस से तुरंत राहत मिल जाती है। अदरक में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लामेंट्री तत्व पाए जाते हैं। यह पेट और इसोफेगस की समस्या तुरंत दूर करने की क्षमता रखता है। इससे गैस की समस्या पैदा करने वाले बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं। अदरक के एक टुकड़े को घी में सेक कर काला नमक लगाकर खाने पर गैस से छुटकारा मिल जाता है। सूखे अदरक का काढ़ा बनाकर पीने से भी यह समस्या खत्म हो जाती है।
  2. नारियल पानी- नारियल पानी गैस की समस्या में दवा का काम करता है। यह विटामिन और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। यह पेट की समस्याओं को दूर करता है। जब भी गैस की समस्या हो, दो से तीन बार नारियल पानी पिएं। आराम मिलेगा।
  3. पपीता- पपीता बीटा-केरोटीन से भरपूर फल है। इसमें खाना जल्दी पचाने वाले तत्व पाए जाते हैं। पपीता में पेपिन नाम का एन्जाइम पाया जाता है, जो बहुत लाभदायक होता है। गैस की समस्या हो रही हो तो खाना कम खाएं और इसके बाद थोड़ा काला नमक डालकर पपीता खाएं। कब्ज और गैस दोनों की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।
  4. अनानास , पाइनएप्पल- अनानास में पाचक एन्जाइम्स मौजूद होते हैं। गैस की समस्या हो तो एल्कलाइन से भरपूर चीजें लेनी चाहिए। पाइनएप्पल में भी एल्कलाइन पाया जाता है। इसीलिए इसे खाने या इसका जूस पीने से गैस की समस्या दूर हो जाती है, लेकिन ध्यान रखें कि हमेशा पका हुआ पाइनएप्पल ही खाएं। कच्चा पाइनएप्पल पेट को फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है।
  5. जीरा- जीरा खाने से डायजेस्टिव सिस्टम से जुड़ी समस्याएं दूर हो जाती हैं। इसीलिए जब भी आपको गैस की समस्या परेशान करे, एक चम्मच जीरा पाउडर ठंडे पानी में घोलकर पिएं, बहुत लाभ होगा।
  6. आलू- शायद ये आपको गैस दूर करने वाला सबसे अजीब उपाय लगे, लेकिन आलू का जूस पीने से भी गैस की समस्या दूर हो जाती है। यह एल्कलाइन का एक अच्छा स्रोत है। इसका जूस बनाने के लिए कच्चे आलू को छीलकर पानी डालकर मिक्सर में पीस लें। इस जूस को छानकर इसमें थोड़ा गर्म पानी मिलाकर पिएं। गैस से राहत मिल जाएगी। यह जूस लिवर को भी साफ कर देता है।
  7. पुदीना- यदि आपको गैस और एसिडिटी की समस्या ज्यादा परेशान कर रही हो, तो पुदीना आपको तुरंत आराम पहुंचा सकता है। पुदीने की कुछ पत्तियां चबा लें या पुदीने की चाय बनाकर पिएं। गैस की समस्या दूर हो जाएगी।
  8. काली मिर्च- काली मिर्च भी गैस की समस्या से छुटकारा पाने का एक असरदार उपाय है। लगभग आधा ग्राम काली मिर्च पीसकर उसमें शहद मिलाकर लेने से आराम मिलता है।
  9. हल्दी- हल्दी में एंटी-इन्फ्लामेंट्री व एंटी-फंगल तत्व पाए जाते हैं। यह कई रोगों में दवा का काम करती है, विशेषकर पेट के रोगों में। थोड़ा हल्दी पाउडर ठंडे पानी से लें और फिर दही या केला खाएं।
  10. लौंग- लौंग एक ऐसा मसाला है, जो गैस की समस्या से परेशान लोगों के लिए एक बेहतरीन औषधि है। लौंग चूसने से या लौंग पाउडर को शहद के साथ लेने से एसिड रिफ्लक्स और गैस की समस्या दूर हो जाती है।

गैस की दवा – पतंजलि दिव्य गैसहर चूर्ण के फायदे

पतंजलि दिव्य गैसहर चूर्ण Patanjali Divy gashar churna in hindi में अजवायन, काली मिर्च, हरड़, जीरा और हींग जैसे घटक पाए जाते है | जो हमारे पेट में जमा अम्ल को खत्म करके हमारी पाचन शक्ति को मजबूत बनाने में हमारी बहुत मदद करते है | हमारे गलत खानपान के कारण ही हमारा पाचन तंत्र खराब हो जाता है | जिसकी वजह से हमें पेट दर्द व गैस जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है | इसीलिए इन सभी समस्याओं को देखकर ही दिव्य गैसहर चूर्ण का निर्माण किया गया है | जिसके सेवन के बाद हमारे शरीर को बहुत जल्दी आराम मिल जाता है | आपको अपने पाचन तन्त्र को मजबूत बनाने के किये इसका सेवन रोजाना सुबह व शाम करना चाहिए | आप 1 अथवा 2 ग्राम चूर्ण 2 या 3 टाइम खाने के बाद ले।  Price – Divya Gashar Churna – 100G MRP₹85

कैसे करे पतंजलि दिव्य गैसहर चूर्ण का सेवन

पतंजलि दिव्य गैसहर चूर्ण का एक चम्मच दिन में दो बार सेवन करने की सलाह दी जाती हैं | इसका सेवन दिन में दो बार खाना खाने के बाद या जब गैस की तकलीफ हो उस समय करना चाहिए | इसे गर्म पानी के साथ खाना चाहिए | इसका सेवन नियमित रूप से करना चाहिए | इसके सेवन से शरीर को कोई दुष्प्रभाव नही होता है | गर्भबती महिलाएं और स्तनपान कराने वाली माताएं भी इसका सेवन कर सकती हैं |

पतंजलि आवंला चटपटा कैंडी – Patanjali Ayurveda Amla Chatpata Candy

पतंजलि का बना आवंला चटपटा प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए विभिन्न जड़ी बूटियों से बना है। यह प्राकृतिक उपचार प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए काम आता हैं। यह सबसे अच्छा प्रतिरक्षा प्रणाली समर्थक है जो आवंला से बना होता है , आवंला इसका एक मुख्य घटक होता है। आवंला शरीर की प्रतिरोधक क्षमता और ऊर्जा को बढ़ाने के लिए शरीर की कोशिकाओं के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति करता है। इस उत्पाद का स्वाद बहुत अच्छा होता है और लोगो के द्वारा इसको भोजन के बाद उचित पाचन के लिए खाया जाता है। इस प्राकृतिक उत्पाद प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने के लिए जड़ी बूटियों का एक घर है। इस उत्पाद में प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली समर्थक( किसी औषधि की एक अतिरिक्त खुराक) सुरक्षित होते हैं और शरीर की कोशिकाओं को ऊर्जा प्रदान करते हैं। हर रोज दो बार 5-10 ग्राम या आवश्यकतानुसार। 3-4 कैंडी एक दिन में खाई जा सकती है। Price – Patanjali Ayurveda Amla Chatpata Candy – 500G MRP₹145

होम्योपैथिक इलाज – पेट में गैस का होम्योपैथिक इलाज, पेट फूलने की होम्योपैथिक दवा

होम्योपैथिक उपचार न केवल समस्या के लक्षणों को ठीक करता है, बल्कि व्यक्ति को कोई और समस्या होने की संभावना भी खत्म करता है।

1- सिनकोना ऑफिसिनैलिस (Cinchona Officinalis)

सामान्य नाम: पेरुवीयन बर्क चाइना (Peruvian bark-China)
लक्षण: ये दवा उन लोगों के लिए अच्छी है, जिन्हें ज्यादा चाय पीने से पेट में गैस की समस्या हुई है। नीचे दिए लक्षणों में इस दवा का उपयोग किया जाता है:

  • पाचन कमजोर होना।
  • खाने के बाद पेट में वजन महसूस होना।
  • भूख न लगना।
  • हिलने-डुलने से फूला हुआ पेट कम होना।
  • लिवर के क्षेत्र में दर्द।
  • खाना पचे बिना ही दोबारा भूख लगना।
  • फल खाने के बाद लक्षण बढ़ जाना।
  • पेट की साइड में दर्द होना।
  • पेट फूलना।
  • मुंह का स्वाद कड़वा होने के साथ खाना पेट से वापिस मुंह में आना।
  • हिलने-डुलने से फूला हुआ पेट कम होना।
  • लिवर के क्षेत्र में दर्द।
  • पित्त की पथरी के कारण पेट में दर्द।
  • पेट में गैस महसूस होना, जो न ऊपर जाती है न नीचे।

2- नक्स वोमिका (Nux Vomica)

सामान्य नाम: पाइजन नट (Poison nut)
लक्षण: ये दवा हर उम्र के व्यक्ति के लिए असरदार है, लेकिन इसका इस्तेमाल पुरुषों में अधिक किया जाता है। ये उन लोगों के लिए अच्छी है, जो बहुत चिंता करते हैं और हमेशा जल्दी में रहते हैं। नीचे दिए लक्षणों में ये दवा उपयोग की जाती है:

  • पेट दर्द के साथ पेट में वजन महसूस होना।
  • पेट फूलना, जो कभी-कभी खाने के बाद बढ़ जाता है।
  • खट्टे व कड़वे डकार आना।
  • मतली के साथ उबकाई व उल्टी आना।
  • पेट पर दबाव डालने पर दर्द।
  • पेट की ऊपरी तरफ फूलना और दबाव बनना, जैसे पथरी में होता है।
  • अत्यधिक पेट फूलना।
  • मुंह से बदबू आना।
  • उत्तेजक और फैट वाला खाना खाने की इच्छा होना।
  • अत्यधिक कॉफी पीने के कारण अपच।
  • डकार व उल्टी करने में दिक्कत।
  • ज्यादा सोचने से लक्षण बदतर हो जाना।
  • आराम करने से लक्षण बेहतर होना।

3- आर्सेनिकम एल्बम (Arsenicum Album)

सामान्य नाम: आर्सेनिक ट्राइऑक्साइड (Arsenic trioxide)
लक्षण: ये दवा उन लोगों के लिए अच्छी है, जिन्हें दवाओं में विश्वास नहीं है और उन्हें लगता है वे मरने वाले हैं। निम्नलिखित लक्षण अनुभव करने पर इस दवा का उपयोग किया जाता है:

  • मतली और उल्टी।
  • सीने में जलन।
  • लगातार डकार आना।
  • जीभ का साफ होना व सूखना।
  • सब्जी, खरबूजा, तरबूज और अन्य पानी वाले फल से लक्षण उत्पन्न होना।
  • दूध पीने का मन करना।
  • पेट में दर्द और उसका फूलना।
  • खाने को देखना या उसकी गंध भी बर्दाश्त न होना।
  • समय-समय पर थोड़ा-थोड़ा पानी पीने की प्यास लगना।
  • पेट में जलन के साथ दर्द।
  • थोड़ा सा खाने-पीने पर भी पेट में दर्द होना।
  • खट्टा खाना, आइसक्रीम और ठंडा पानी पीने के कारण अपच।
  • अत्यधिक बेचैनी के साथ दर्द। इसके कारण व्यक्ति एक जगह से दूसरी जगह घूमता रहता है।

4- एंटीमोनियम क्रूडम (Antimonium Crudum)

सामान्य नाम: ब्लैक सल्फाइड ऑफ़ एंटीमनी (Black sulphide of antimony)
लक्षण: नीचे दिए लक्षणों के लिए ये दवा उपयोगी है:

  • भूख न लगना।
  • खट्टा व अचार खाने का मन होना, जिससे लक्षण बढ़ जाता है।
  • कुछ भी खाने के बाद उसी चीज़ का डकार आना।
  • सीने में जलन, मतली और उल्टी।
  • ब्रेड और पेस्ट्री खाने से पेट की समास्याएं होना।
  • गर्मी में और शाम के समय लक्षण बदतर हो जाना।
  • खाने के बाद पेट फूलना।
  • सुबह के समय पेट से मुंह में मीठा पानी आना।
  • जीभ पर सफेद मोटी परत जमना।
  • बार-बार डकार आना।
  • शाम को और रात के समय अधिक प्यास लगना।
  • बच्चे थोड़ा जमा हुआ दूध निकाल सकते हैं और बाद में फिर से दूध न पीना।
  • अत्यधिक चिड़चिड़ापन।
  • मोटापे की प्रवृत्ति।
  • खुली हवा में और आराम करने से लक्षण बेहतर होना।

5- कार्बो वेजीटेबिलिस (Carbo vegetabilis)

सामान्य नाम: वेजीटेबल चारकोल (Vegetable charcoal)
लक्षण: ये दवा अलसी लोगों के लिए अच्छी है, जो मोटे और सुस्त हैं। ये उन लोगों के लिए भी अच्छी है, जिन्हें पहले हुई कोई बीमारी अभी तक ठीक नहीं हो पाई है। निम्नलिखित लक्षणों के लिए ये दवा अच्छी है:

  • पेट में भारीपन और डकार आना।
  • पेट में दर्द, जैसे वज़न उठाने से होता है।
  • पेट दर्द के साथ ऐंठन, जिसके कारण व्यक्ति झुक जाता है।
  • उनींदापन।
  • दुर्गंध वाली खट्टी डकार।
  • पेट फूलने और दर्द के कारण पेट में खिंचाव।
  • लेटने पर दर्द बढ़ जाना।
  • खाने-पीने के बाद लगातार डकार आना।
  • पेट, पीठ और रीड़ की हड्डी में जलन।
  • पेट में खिंचाव।
  • हल्का खाना खाने से भी पेट में खिंचाव होना।
    कमर और पेट पर टाइट कपडे न पहन पाना।
  • पेट फूलने के कारण सांस फूलना।
  • मीट, दूध और फैट वाला खाना खाने की इच्छा न होना।
  • पेट के ऊपरी क्षेत्र में हाथ लगाने से दर्द होना।

6- पल्सेटिला प्रेटेंसिस (Pulsatilla Pratensis)

सामान्य नाम: विंडफ्लॉवर (Windflower)
लक्षण: ये दवा उन लोगों के लिए अच्छी है, जो स्वभाव में नाज़ुक व चिड़चिड़े होते हैं और उन्हें सिर को ऊंचा रखकर सोना पसंद होता है। ये दवा आयरन कम होने पर भी दी जाती है और महिलाओं में सबसे अच्छे से काम करती है। नीचे दिए लक्षणों को ठीक करने में इसका उपयोग किया जाता है:

  • पेट फूलना, खासकर फैट वाला खाना खाने के बाद।
  • फैट वाले व गरम खाने-पीने के कारण सीने में जलन और अपच।
  • खाने के बाद पेट में खिंचाव महसूस होना, जिसके कारण व्यक्ति को अपने कपडे ढीले करने पड़ते हैं।
  • प्यास न लगना।
  • बहुत पहले खाया खाना भी उल्टी में निकल जाना।
  • खाने के एक घंटे बाद पेट दर्द।
  • पेट में भारीपन महसूस होना, जैसे पथरी में होता है, खासकर सुबह उठने के बाद।
  • बहुत ज्यादा भूख लगना।
  • खाने का स्वाद बहुत समय तक मुंह में रहना, खासकर बर्फ, फल और पेस्ट्री खाने के बाद।
  • लगातार डकार आने के साथ मुंह का स्वाद खराब होना।
  • पेट से मुंह में पानी आने के साथ मुंह से बहुत दुर्गंध आना, जो सुबह के समय बदतर हो जाता है।
  • पेट में दर्द और खिंचाव।
  • पेट में दर्द के साथ ठंड लगना।
  • खुली हवा में जाने का मन होना और बाहर जाकर बेहतर महसूस होना।

7- लाइकोपोडियम क्लेवेटम (Lycopodium Clavatum)

सामान्य नाम: क्लब मॉस (Club moss)
लक्षण: ये दवा उन लोगों को अधिक सूट करती है, जिन्हें बार-बार पाचन संबंधी समस्याएं होती हैं। जो लोग अपनी उम्र से बड़े लगते हैं, उनके लिए भी ये दवा अच्छी है। निम्नलिखित लक्षणों के इलाज के लिए इस दवा का उपयोग किया जाता है:

  • स्टार्च वाले खाने के कारण गैस बनना, जैसे पत्ता गोभी, फलियां आदि।
  • पेट फूलने के साथ भूख ज्यादा लगना।
  • खाने का स्वाद खट्टा लगना।
  • मीठा खाने की इच्छा होना।
  • थोड़ा सा भी खाने के बाद खाना पेट से मुंह में आना।
  • मुंह का स्वाद कड़वा होना।
  • थोड़ा सा खाने के बाद भी पेट भरा हुआ महसूस होना।
  • ऐसा महसूस होना, जैसे पेट में गैस घूम रही है।
  • रात के समय भूख लगना।
  • ठंडे से ज्यादा गरम खाने-पीने का मन करना।
  • लिवर के क्षेत्र में हाथ लगाने पर दर्द।
  • पेट में दर्द, जो दाईं से बाईं तारफ जाता है।
  • शरीर की दाईं तरफ लक्षण महसूस होना।

8- नैट्रम कार्बोनिकम (Natrum Carbonicum)

सामान्य नाम: कार्बोनेट ऑफ़ सोडियम (Carbonate of sodium)
​लक्षण: नीचे दिए लक्षणों में इस दवा से राहत मिलती है:

  • पेट फूलना और हाथ लगाने में दर्द।
  • सुबह के 5 बजे भूख लगना।
  • पाचन कमजोर होना, जो थोड़ा सा भी गलत खाने से खराब हो जाता है।
  • मुंह का स्वाद कड़वा होना।
  • दूध पीने की बिलकुल इच्छा न होना।
  • अपच के कारण लगातार डकार आना।
  • बदहजमी होना, जो सोडा बिस्कुट खाने से बेहतर हो जाती है।
  • गर्मी में लक्षण बदतर होना।
  • दस्त होना, जो दूध पीने से बढ़ जाता है।
  • सटार्च और फैट वाले खाने के कारण पेट फूलना और अपच।

होम्योपैथी दवा लेने के लिए खान-पान और जीवनशैली के बदलाव

आप क्या करें

  • अपनी दिनचर्या में नियमित रूप से कुछ शारीरिक कार्य अवश्य शामिल करें।
  • खाना टाइम से खाये
  • नियमित रूप से व्यायाम करें
  • डॉक्टर के सलाह के अनुसार खाना व दवा ले

आप क्या ना करें

  • परफ्यूम और तेज गंध वाले फूल से दूरी
  • स्ट्रांग कॉफी या चाय न पिए
  • किसी तरह का मानसिक तनाव न होने दें
  • सुस्त जीवनशैली न अपनाएं
  • सुबह टाइम से उठ जाए
  • दवाओं को सीधी धूप में न रखें

अगर सभी प्रयासों के बाद भी न मिले पेट के भारीपन में राहत?

अगर सभी तरह के उपाय अपनाने के बाद भी आपको पेट के भारीपन से राहत न मिले तो इसके पीछे लैक्टोज के प्रति असहनशीलता, ग्लूटन के प्रति संवेदनशीलता या अन्य फूड एलर्जी, संक्रमण, आंत का अवरोध और हार्निया इसका कारण हो सकते हैं. इसलिए इसतरह की समस्या को जरा भी नजरअंदाज न करें और सबसे पहले डॉक्टर से संपर्क करें.

Disclaimer – हमारा एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पाठको सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिले. हालांकि, इसमें दी गई जानकारी को एक योग्य चिकित्सक की सलाह के विकल्प के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए. यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है यह सभी संभावित दुष्प्रभावों, चेतावनी या अलर्ट को कवर नहीं कर सकता है. कृपया अपने चिकित्सक से परामर्श करें और किसी भी बीमारी या दवा से संबंधित अपने सभी प्रश्नों पर चर्चा करें. हमारा मकसद सिर्फ जानकारी देना है.

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