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रस्सी कूदने के फायदे और नुकसान , किन लोगों को रस्सी नहीं कूदनी चाहिए? 

क्या आप भी वजन घटाने के बारे में सोच रहे हैं, लेकिन काम की व्यस्तता के कारण जिम नहीं जा पा रहे हैं या एक्सराइज आदि के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं. अगर हां, तो अब आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है. क्योंकि बचपन में खेले जाने वाला रस्सी कूद यानी स्किपिंग का खेल आपको बेहद कम समय में ही फिट और स्लिम बना देगा. रोजाना केवल 10 से 15 मिनट रस्सी कूदकर आप अपना वजन घटा सकती हैं. स्किपिंग यानी रस्सी कूदना एक बेहतरीन ऐरोबिक एक्सरसाइज है. इससे पूरे शरीर की एक्सरसाइज होती है. यह वजन कम करने के साथ ही बांह और काफ मसल्स को टोन करने में मदद करता है.  नियमित रूप से रस्सी कूदने से हड्डियां मजबूत होती हैं और एकाग्रता व स्टेमिना भी बढ़ता है.

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि 10 मिनट स्किपिंग करने से उतना ही फायदा मिलता है, जितना की 30 मिनट जॉगिंग, 15 मिनट दौड़ने व 12 मिनट तैराकी करने से. यानी कि 10 मिनट तक लगातार रस्सी कूदकर आप 100 कैलोरी बर्न कर सकती हैं. लेकिन रस्सी कूद यानी स्किपिंग एक शॉर्ट ड्यूरेशन एक्सरसाइज है यानी इसे ज़्यादा से ज़्यादा २० मिनट तक ही करना चाहिए. इससे ज़्यादा समय तक लगातार स्किपिंग करने से आपके लोअर बॉडी पर अत्यधिक दबाव पड़ सकता है, जिससे घुटनों के चोटिल होने का ख़तरा बढ़ जाता है.

benefits of skipping

कैसे करें रस्सी कूद शुरुआत : ध्यान दे रस्सी कूदना एक खेल है. इसे करने के लिए हाथों और पैरों के बीच समन्वय बैठाने की आवश्यकता होती है. इसके लिए आपके बांहों और पैरों के बीच ट्यूनिंग होना जरूरी है. यदि आप पहली बार रस्सी कूद रही हैं तो आपको सीखने में कुछ समय लग सकता है इसलिए शुरुआत में 50 से 150 रिपिटिशन करें और फिर धीरे-धीरे समय बढ़ाएं.शुरुआत में एक मिनट रस्सी कूदें और फिर 30 सेकंड आराम करें. ऐसा 4 बार यानी कुछ छह मिनट तक करें और फिर दो-तीन मिनट आराम करें. इस तरह स्किपिंग करने से हृदयगति संतुलित रहती है और कैलोरीज़ भी बर्न होती हैं.

रस्सी कूदने का सही समय – Right Time to do Skipping in Hindi
जिस प्रकार व्यायाम करने का निश्चित समय होता है, उसी प्रकार रस्सी कूदने का भी उचित समय सुबह ही है। इससे पूरे शरीर में रक्त संचार बेहतर हो सकता है। इसके अलावा, आप शाम को भी रस्सी कूद सकते हैं। ये दोनों ही समय रस्सी कूदने के लिए बेहतर होते हैं।

क्या है रस्सी कूदने का सही तरीका – Ways to do Skipping in Hindi

अगर आपने पहले कभी रस्सी नहीं कूदा है तो शुरुआत कम गिनती से करें. एक दिन में 50 बार रस्सी कूदने से शुरु करें. कुछ दिन के बाद जब यह आपके लिए आसान हो जाये तो 75-100 बार रस्सी कूदें. धीरे-धीरे एक दिन में 300 बार तक रस्सी कूदना कर सकते हैं.  कुछ बातें ध्यान में रखें कि रस्सी कूदते समय जब सांस फूलने लगे तो रस्सी कूदना बंद कर दें. एक स्पीड में रस्सी कूदें जिससे हार्ट रेट एक सी बनी रहे. रस्सी कूदने से कुछ देर पहले थोड़ा पानी पी लें, नहीं तो कूदने के बीच प्यास लग सकती है. रस्सी कूदते हुए और कूदने के तुरंत बाद पानी न पियें. रस्सी कूदने के कई तरीके होते हैं, लेकिन इनमें से कुछ कठिन होते हैं। उन्हें करने के लिए अभ्यास की जरूरत होती हैं। यहां हम सामान्य से लेकर कठिन तरीकों के बारे में बता रहे हैं।

दोनों पैरों से कूदना (Two leg jump rope) – दोनों पैरों को एकसाथ उठाकर रस्सी कूदना आसान और आम है। जो लोग पहली बार रस्सी कूदने के बारे में सोच रहे हैं, वो इस तरीके से शुरुआत कर सकते हैं।

एक पैर से कूदना (Single-Leg Jump)- इस तरीके को काफी अभ्यास के बाद ही किया जा सकता है। इसमें एक पैर से कूदा जाता है, जिससे लिए पूरे का शरीर संतुलन बनाना जरूरी होता है। अगर किसी ने रस्सी कूदना शुरू ही किया है, तो इसे न करे।

कूदते हुए हाथ क्रॉस करना (cross hand jump)- इस तरह के रस्सी कूद में कूदने वाला अपने हाथों को सामने की तरफ क्रॉस कर लेता है। कई बार इस तरीके को करते समय रस्सी के पैरों में फंसकर गिरने का डर रहता है। इसलिए, यह तरीका सिर्फ अनुभवी लोग ही कर सकते हैं।

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रस्सी कूदने के फायदे – Benefits of Skipping Rope in Hindi

सही समय और नियम से रस्सी कूदना हर किसी के लिए लाभदायक हो सकता है। ये लाभ कुछ इस प्रकार हो सकते हैं।

रस्सी कूदने से हृदय स्वास्थ्य में सुधार होता है

रस्सी कूदने से हृदय को स्वस्थ रखा जा सकता है। दरअसल, रस्सी कूदने से हृदय की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। रस्सी कूदने से कार्डियो सर्कुलेशन यानी ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जो ब्लड को पंप करने के लिए जरूरी होता है। हृदय के स्वस्थ रहने से हार्ट स्ट्रोक और हृदय से जुड़े अन्य जोखिम से बचा जा सकता है । यही वजह है कि रस्सी कूदना को कार्डियो एक्सरसाइज की लिस्ट में जगह दी गई है।

रस्सी कूदने से स्टैमिना बढ़ता है

अगर आप अपने पूरे शरीर का व्यानयाम कम वक्तम में करना चाहते हैं तो रस्सी कूदिये। रस्सी कूदने से हाथों, पैरों के शरीर के अन्ये अंगों का भी व्याकयाम हो जाता है और पूरा शरीर ऊर्जावान बन जाता है।

रस्सी कूदने से कैलोरी बर्न होती है

अगर कोई मोटापा कम करना चाहता है, तो उनके लिए रस्सी कूदना लाभकारी हो सकता है। रोप स्किपिंग से शरीर में मौजूद अतिरिक्त कैलोरी को बर्न करने में मदद मिल सकती है। इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि रस्सी कूदने के फायदे कैलोरी बर्न करने के लिए हो सकते हैं ।

रस्सी कूदने से दिल स्वस्थ रहता है

रस्सी कूदने से दिल भी स्वकस्थ रहता है। इसके कारण दिल तेजी से धड़कता है जिसके फलस्वरूप आक्सीजन अधिक मात्रा में फेफड़ों में जाती हैं व पूरे शरीर में रक्त का संचार तीव्र गति से होता है। इससे शरीर का तनाव कम होता है और शरीर के सभी अंग अधिक कार्यक्षमता से कार्य करते हैं।

रस्सी कूदने से हड्डी के घनत्व में सुधार होता है

क्या आपको लगता है कि कैल्शियम की गोलियां निगलने से आपकी हड्डी घनत्व में सुधार हो सकता है? खैर, यह कर सकता है, लेकिन अभ्यास आपकी हड्डी की ताकत बढ़ाने के लिए एक अधिक प्राकृतिक तरीका है। इससे हड्डी को उत्तेजित करने में मदद मिलती है और इसे मजबूत करती है। इसका एक लाभ यह है कि दबाव चलने के विपरीत दोनों पैरों पर है यह आपकी हड्डी की घनत्व को बेहतर बनाने में मदद करता है और आपको स्वस्थ रहने में मदद करता है।

लम्बाई बढ़ाने का आसान तरीका है रस्सी कूदना

अगर आप अपनी कम हाइट से परेशान हैं और अपनी हाइट बढ़ाने के लिए कोई अभ्यास की तलाश कर रहे हैं तो रस्सी कूदना आपके लिए बहुत ही फायदेमंद हो सकता है। रस्सी कूदने से आपकी हाइट जल्दी बढ़ेगी। यह आपकी हड्डी और मांशपेशियों के विकास में मदद करता है।

मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभदायक

शारीरिक गतिविधि का मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। एनसीबीआई द्वारा पब्लिश एक अध्ययन के मुतबिक, जो लोग ज्यादा शारीरिक गतिविधि नहीं करते हैं, उनमें डिप्रेशन (अवसाद) के लक्षण नजर आ सकते हैं। वहीं, रस्सी कूद जैसे अधिक श्रम वाले व्यायाम करने वालों में अवसाद के लक्षण कम होते पाए गए हैं। इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि शारीरिक गतिविधि के लिए रस्सी कूदना एक बेहतर उपाय साबित हो सकता है।

रस्सी कूद जोड़ों के लिए लाभदायक है

रस्सी कूदने के फायदे जोड़ों के लिए भी हो सकते हैं। नियमित रूप से रस्सी कूदने पर टखने, घुटने, कूल्हे और कंधों के जोड़ों की गतिविधि में तेजी आती है। इसका सकारात्मक असर जोड़ों पर दिखाई दे सकता है और उनमें सुधार हो सकता है। फिलहाल, इस संबंध में और शोध की आवश्यकता है।

किन लोगों को रस्सी नहीं कूदनी चाहिए? – Who Should Avoid Skipping in Hindi
कुछ समस्याएं ऐसी होती है, जो रस्सी कूदने पर बढ़ सकती है या अन्य जोखिम उत्पन्न कर सकती है। ऐसे में उन अवस्थाओं में रस्सी नहीं कूदनी चाहिए। ये स्थितियों कुछ इस प्रकार हो सकती हैं :

जो लोग दिल से जुड़ी किसी भी तरह की बीमारी से जूझ रहे हैं, उन्हें रस्सी नहीं कूदनी चाहिए।
अगर किसी की सर्जरी हुई है, जो पूरी तरह से ठीक नहीं हुई है, तो रस्सी कूदने से बचना चाहिए।
उच्च रक्तचाप वालों को रस्सी नहीं कूदनी चाहिए। अगर वो फिर भी ऐसा करना ही चाहते हैं, तो पहले एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें। जिन्हें हड्डियों से संबंधित किसी प्रकार की समस्या है, उन्हें रस्सी नहीं कूदनी चाहिए।

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रस्सी कूदने के नुकसान – Side Effects of Skipping in Hind

जिस तरह रस्सी कूदना शरीर को फायदा पहुंचा सकती है, वैसे ही इससे कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। जो इस तरह के हो सकते हैं :

– रस्सी कूदते समय रस्सी के टूटने पर चोट लग सकती है।
– कई बार पैरों में मोच आ सकती है।
– इसे करते समय मांसपेशियों में खिंचाव उत्पन्न हो सकता है।

अच्छी गुणवत्ता वाली रस्सी का प्रयोग करें क्योंकि अभ्यास के दौरान अगर रस्सी टूट गई तो आपको चोट भी लग सकती है।
रस्सी कूद को खुले क्षेत्र में करें क्योंकि अभ्यास के दौरान रस्सी किसी वस्तु में फंस गई तो आपको चोट भी लग सकती है।
रस्सी कूदने के लिए आप एक उच्च प्रभाव वाली स्पोर्ट्स ब्रा पहनें क्योंकि स्किपिंग से स्तन ऊपर नीचे अधिक हिलते है। इससे स्तन की मांसपेशियों में अधिक खिंचाव आ सकता है और हो सकता है आपके स्तन शिथिल भी हो जाएंगे।
रस्सी कूदना एक उच्च तीव्रता वाला व्यायाम है इसलिए व्यायाम शुरू करने से पहले व्यक्ति को उचित वार्म-अप करना चाहिए। स्किपिंग से पहले स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज बहुत जरूरी है।
कई अध्ययनों का दावा है कि नंगे पैर यानि बिना जूते चप्पल के रस्सी कूदना बेहतर है क्योंकि यह आपके पैरों को मजबूत बनाता है। यह पैरों से संबंधित कई समस्याओं को ठीक करने में भी मदद करता है।
रस्सी कूदना समय के साथ धीरे-धीरे अपने शरीर के धीरज स्तर और स्थिति के साथ अभ्यास करें। ध्यान रखें स्किपिंग रोप का उपयोग केवल कैलोरी जलाने के लिए ना करें।

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