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नींद की कमी क्या है, नींद की कमी से होने वाले रोग, Kam Sone Ke Nuksan
हम इन्सान को जीने के लिए नींद बहोत ही जरुरी है. इन्सान बिना खाए 1-2 महीने तक जीवित रहे सकता है लेकिन बिना सोए 11 दिन में इन्सान की मौत हो सकती है. आज हम जानेगे नींद यानि की Sleep के बारे में बेहद रोचक और मज्दार तथ्य जो आपको चकित करके रखदेगा. नींद की कमी एक ऐसी स्थिति है जिसमें आप पर्याप्त नींद नहीं ले पाते हैं। यह या तो लम्बे समय से चली आ रही दिक्क्त हो सकती है या अचानक से पनपी समस्या भी हो सकती है। अगर एक लंबे समय तक आप ठीक से पूरी नींद न लें तो थकान, दिन में नींद आना, बेचैनी के साथ साथ अचानक बहुत अधिक वजन घटना या वजन बढ़ना जैसी दिक्क्तें हो सकती है।

नींद क्यों जरुरी है – Neend Ki Kami Ke Karan Lakshan Ilaj Dawa Aur Upchar in Hindi
जिंदगी के लिए आहार, निद्रा और मैथुन तीन प्राकृतिक कर्म माने गए हैं। शेक्सपीयर ने नींद को जिंदगी का सबसे महान पोषक माना है। यह तो हम सभी जानते हैं कि शरीर, मन और आत्मा को स्वस्थ रखने के लिए नींद और आराम निहायत जरूरी है, लेकिन ऐसे कितने भाग्यवान लोग हैं, जिन्हें रातभर चैन की नींद आती है?

प्राचीन समय से ही स्वस्थ रहने के नियमों में सबसे पहला स्थान नींद का रहा है। मानव शरीर की यही खासियत है कि दिनभर की शारीरिक थकान की भरपाई रातभर की नींद में पूरी हो जाती है। जो लोग रात में नहीं सोते उन्हें किसी न किसी तरह दिन में इसकी भरपाई करना जरूरी होता है। हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएँ उनींदे ड्राइवरों के कारण होती हैं।

कितनी नींद जरूरी
इस पर कई मतभेद हैं। आधुनिक युग से पहले यानी 1920 के आसपास यूके में माना जाता था कि 9 घंटे की नींद तरोताजा रहने के लिए जरूरी है। अब ऐसा नहीं है। अब साढ़े सात घंटे की नींद को ही विशेषज्ञ पर्याप्त मानते हैं। कई विद्वानों का मानना है कि 6 घंटे की नींद वयस्क मानव शरीर के लिए पर्याप्त है। शर्त यही है कि उसे नींद दवाओं की मदद से नहीं, बल्कि प्राकृतिक रूप से आए।

नींद की कमी के लक्षण

निरंतर नींद की कमी का मुख्य लक्षण होता है दिन में अत्यधिक नींद आना, लेकिन इसके अन्य लक्षण भी हो सकते हैं।

  • उदासी
  • चिड़चिड़ापन
  • बेचैनी
  • नई अवधारणाओं को सीखने में कठिनाई
  • थकान
  • भुलक्कड़पन
  • ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता
  • उबासी लेना
  • ज्यादा भूख लगना और कार्बोहाइड्रेट खाने की इच्छा
  • मनोदशा में निरंतर परिवर्तन

नींद की कमी के कारण

नींद की कमी के सबसे सामान्य कारण निम्नलिखित हैं ,

  • तनावपूर्ण जीवनशैली ।
  • लगातार देर रात तक जागना।
  • काम की ज्यादा व्यस्तता होना।
  • पर्यावरण और नींद की आदतें, सोने के आसपास की जगह
  • किसी बीमारी की वजह से कम नींद हो सकती है।
  • सोने के समय यात्रा आदि करना।
  • शाम को अधिक मात्रा में भोजन करना।
  • कैफीन, निकोटीन का ज्यादा सेवन कम नींद की वजह बन सकता है।
  • कुछ दवाओं की वजह से कम नींद की समस्या हो सकती है।
  • आयु – नींद की कमी का एक जोखिम कारक उम्र भी है। बुजुर्ग, युवा लोगों की तुलना में कम नींद लेते हैं, इसलिए युवाओं की तुलना में उन्हें काफी कम नींद आती है.

नींद की कमी का परीक्षण
नींद की समस्या के समाधान के लिए सबसे जरूरी है कि नींद आने और नींद न आने के क्रम को सही से समझा जाएं। इस क्रम को पहचानने के लिए सबसे पहला कदम है नींद का एक लिखित डाटा रखना। प्रत्येक दिन के आधार पर लिखिए कि आप कितने घंटे सोते हैं, कितनी बार रात को जागते हैं, जागने के बाद आपको कैसा महसूस होता है और दिन के दौरान आपको नींद की कमी या पर्याप्तता संबंधी कैसी भावना महसूस होती है। ये सब आप अपने डॉक्टर के साथ साझा कीजिये।

अगर आप किसी के साथ रहते है जैसे फॅमिली या वाइफ या कोई दोस्त तो उनसे नींद में आपके द्वारा खर्राटे लेना, हांफना या किसी अंग को मरोड़ने के बारे में पूछें, क्योंकि डॉक्टर भी इस बारे में पूछ सकते हैं। जब आपके पास ये सारी जानकारी होगी तो आप इन्हें आसानी से अपने डॉक्टर से शेयर कर सकेंगे और इससे डॉक्टर को आपकी समस्या का निदान करने में सहायता मिलेगी।

  1. नींद के विशेषज्ञ एक पॉलीसौमनोग्राम (Polysomnogram) का उपयोग करके आपकी नींद के एक पैटर्न की पहचान कर सकते हैं या नींद का अध्ययन कर सकते हैं। यह टेस्ट नींद की प्रयोगशाला में किया जाता है।
  2. आपके शरीर पर विभिन्न जगहों पर इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं, जिसमें खोपड़ी और चेहरा भी शामिल होते हैं। नींद की कमी से ग्रस्त व्यक्ति को स्लिप क्लिनिक में रात भर सुलाया जाता है और यह मॉनिटर श्वास, रक्त, हृदय की गति और ताल, मांसपेशियों की गतिविधि और नींद के दौरान मस्तिष्क व आंखों की गति को मापता है।
  3. जो लोग जान-बूझकर बहुत कम सोते हैं, उनका निदान मात्र इस बात को समझा कर किया जाता है कि आप पर्याप्त नींद नहीं लेते हैं और इसमें बदलाव करने की आवश्यकता है।

अच्छी नींद आने के उपाय , नींद की कमी का उपचार
नींद के विकारों का उपचार उनके प्रकार और अंतर्निहित कारणों के आधार पर भिन्न हो सकता है। हालांकि, इसमें आमतौर पर चिकित्सा उपचार और जीवन शैली में बदलाव शामिल होते हैं।

1- नींद आने के व्यवहार और संज्ञानात्मक उपाय
आराम की तकनीक – शरीर को शांत करने में मदद करने के लिए कई चीज़ें कारगर साबित हो सकती है जैसे – मेडिटेशन , माइंडफुलनेस ट्रेनिंग, ब्रीदिंग एक्सरसाइज आदि, इन चीज़ों से इंसान को नींद आने में मदद मिलती है।
संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी – यह थेरेपी लोगों के बर्ताव और उसके पीछे क विचारों को समझने और उसे बदलने के लिए की जाती है यह पॉजिटिव थॉट्स को बढ़ावा देती है और स्लीपिंग पैटर्न विकसित करने में मदद करती है

2- नींद की कमी का चिकित्सा उपचार
नींद की कमी के लिए निम्नलिखित चिकित्सा उपचार हो सकते हैं , डॉक्टर आपकी कंडीशन के अनुसार आपको उपचार का सुझाव देंगे।

  • नींद की गोलियां।
  • मेलेटोनिन (Melatonin) की खुराक।
  • दांत पीसने और किटकिटाने की बिमारी से ग्रस्त लोगों के लिए डेंटल गार्ड।
  • एलर्जी या सर्दी की दवा।
  • किसी भी अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं के लिए दवाएं।

3- जीवनशैली में परिवर्तन
आप अच्छी नींद के लिए निम्नलिखित तरीको को फॉलो कर सकते है।

  • सकारात्मक सोचें।
  • सक्रिय जीवनशैली अपनाएं।
  • सोने से पहले गरिष्ठ भोजन और पेय पदार्थों से बचें।
  • कॉफी, अल्कोहल और धूम्रपान के सेवन से बचें।
  • रात में एक निश्चित समय पर सोने की आदत डालें।
  • सोने से एक घंटे पहले मानसिक तनाव देने वाले कामों से फुरसत ले लें।
  • सोने से पहले ठंडे दूध में शहद मिलाकर पीने से नींद बेहतर होती है।
  • सोने के कमरे को आरामदायक बनाएं।
  • दिन में अनावश्यक नींद लेने की आदत से बचें।
  • सोने से पहले तलवों में सरसों के तेल की मालिश करने से नींद न आने की समस्या को दूर किया जा सकता है।
  • कोई पुस्तक पढ़ें या संगीत सुनें।
  • आहार में सब्जियों और मछली का सेवन करना और चीनी का सेवन कम करना।
  • सोने से पहले कम पानी पीना।
  • योगासन, प्राणायाम और ध्यान को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
  • फिजिकल एक्टिविटी करें – सप्ताह में 150 मिनट या हर दिन लगभग 30 मिनट तक शारीरिक क्रिया करें।

नींद पूरी नहीं होने की वजह से हो सकती हैं ये बीमारियां
एक ओर जहां अच्छा खानपान स्वस्थ जीवन के लिए बेहद जरूरी है वहीं अच्छी नींद लेना भी उतना ही जरूरी है. अच्छी और पर्याप्त नींद के अभाव में स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है. जो लोग नाइट शिफ्ट की जॉब करते हैं उन्हें हमेशा कोई न कोई स्वास्थ्य समस्या बनी ही रहती है.

नाइट शिफ्ट करने वालों की स्वास्थ्य समस्या का पहला लक्षण उनके चेहरे से ही नजर आ जाता है. ऐसे लोगों के चेहरे पर तरह-तरह के दाग-धब्बे और डार्क सर्कल नजर आने लगते हैं.त्वचा के साथ ही कम और खराब नींद लेने का असर मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है. इसके अलावा शरीर में दर्द, थकान, वजन बढ़ना और तनाव जैसी कई समस्याएं हो जाती हैं.

अच्छी और पर्याप्त नींद न मिलने से हो सकती हैं ये बीमारियां

1. मधुमेह
अच्छी नींद नहीं मिलने पर शुगर से भरपूर और जंक फूड खाने की इच्छा बढ़ जाती है. इससे हाई ब्लड प्रेशर और मधुमेह जैसी बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है.
2. ऑस्ट‍ियोपोरोसिस
अच्छी नींद नहीं लेने की वजह से हड्डियां कमजोर होना शुरू हो जाती हैं. इसके अलावा हड्डियों में मौजूद मिनरल्स का संतुलन भी बिगड़ जाता है. इसके चलते जोड़ों के दर्द की समस्या पैदा हो जाती है.
3. कैंसर
कई शोधों में ये बात सामने आई है कि कम नींद लेने की वजह से ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही शरीर में कोशिकाओं को भी काफी नुकसान होता है.
4. हार्ट अटैक
जब हम सोते हैं तो यह वक्त हमारे शरीर की अंदरूनी मरम्मत और सफाई का होता है लेकिन नींद पूरी न होने की वजह से शरीर के विषाक्त पदार्थ साफ नहीं हो पाते और जिसकी वजह से हाई ब्लड प्रेशर की आशंका बढ़ जाती है. इससे हार्ट अटैक होने का खतरा भी बढ़ जाता है.
5. मानसिक स्थिति पर असर
कम सोने का सीधा असर हमारी मानसिक स्थिति पर भी पड़ता है. जितनी देर हम सोते हैं उतनी देर में हमारा दिमाग भी एक नई ऊर्जा जुटा लेता है. लेकिन नींद पूरी नहीं होने पर दिमाग तरोताजा नहीं हो पाता, जिसके चलते कई मानसिक समस्याएं हो जाती हैं और कई बार याददाश्त से जुड़ी परेशानी भी हो जाती है.
6 – अवसाद
कम नींद लेने से कॉर्टिसोल नामक हार्मोन शरीर में बहने लगता है जिससे डिप्रेशन होता है।
7- मोटापा बढ़ना
कम सोने से स्‍ट्रेस हार्मोन कार्टिसोल हार्मोन बढ़ने लगता है जो कि डिप्रेशन बढाने के साथ साथ मोटापा भी बढ़ाता है।
8 – भूलने की बीमारी
सोने से ही दिमाग अपनी दिन भर की थकान को दूर करता है। अगर आप ठीक से सोएंगे नहीं तो आपका दिमाग सुबह डिसटर्ब रहेगा और आपको भूलने की बीमारी होती जाएगी।
9 – अस्थमा का दौरा 
अस्थमा से पीड़ित मरीज में कम नींद की समस्या दौरे का कारण बन सकती है।
10 -चिड़चिड़ापन 
नींद पूरी न हो, तो कुछ समय बाद स्वभाव में चिड़चिड़ापन आने लगता है। इससे व्यवहार असामान्य हो सकता है।
11- मिर्गी का दौरा
कम नींद से मिर्गी का दौरा पड़ सकता है।

Disclaimer – हमारा एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इसके उपभोक्ताओं को विशेषज्ञ-समीक्षा, सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिले। हालांकि, इसमें दी गई जानकारी को एक योग्य चिकित्सक की सलाह के विकल्प के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है यह सभी संभावित दुष्प्रभावों, दवा बातचीत या चेतावनी या अलर्ट को कवर नहीं कर सकता है। कृपया अपने चिकित्सक से परामर्श करें और किसी भी बीमारी या दवा से संबंधित अपने सभी प्रश्नों पर चर्चा करें। हमारा मकसद सिर्फ जानकारी देना है।

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