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गर्भपात के नुकसान, Garbhpat Ke Nuksan, अबॉर्शन के नुकसान
गर्भपात के बाद किसी भी तरह के खतरे के लक्षण महसूस होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। इस स्थिति में कभी कभी मैनुअल वैक्यूम एस्पिरेशन या डाइलेशन और क्यूरेटेज का उपयोग करके गर्भ पूरी तरह से खाली किया जाता है। यदि तुरंत परिवहन उपलब्ध नहीं है या अस्पताल बहुत दूर है उस स्थिति में यह जानकारी आपकी मदद कर सकती है।

योनि से अत्यधिक रक्तस्राव-  गर्भपात के बाद योनि से भारी रक्तस्राव सबसे आम समस्या है। यह आमतौर पर गर्भ में बचे भ्रूण के अवशेषों के कारण होता है। इसे अपूर्ण गर्भपात कहा जाता है। यदि अवशेष निकाल दिए जाते हैं तो अकसर रक्तस्राव बंद हो जाता है। कभी कभी अत्यधिक रक्तस्राव गर्भाशय ग्रीवा के फटने के कारण भी होता है जिसे रक्तस्राव को रोकने के लिए सिलना (टांके लगाना) ज़रूरी होता है। ऐसी स्थिति में यदि तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करना संभव नहीं है, तो रक्तस्राव को पैड्स की सहायता से रोकने की कोशिश करें।

सदमा- गर्भपात का सदमा एक अच्छे भले जीवन को झकझोर देने वाली स्थिति है जिसमें भारी रक्तस्राव जैसे लक्षण भी उत्पन्न हो सकते हैं। शरीर के अंदर रक्त स्राव के कारण भी सदमा (Shock) लग सकता है।

संक्रमण- अगर गर्भपात आखिरी माहवारी के तुरंत बाद 3 महीने (12 सप्ताह) के अंदर कराया है तो हल्का संक्रमण हो सकता है।

गंभीर संक्रमण एक ऐसा संक्रमण है जो रक्त में फैल (सेप्सिस) जाता है। यदि गर्भपात पिछले मासिक रक्तस्राव से 3 या 4 महीनों के बाद किया गया था या गर्भपात के दौरान गर्भ में चोट लग गई है तो महिला को गंभीर संक्रमण होने की अधिक संभावना होती है। सेप्सिस बहुत खतरनाक स्थिति होती है और यह भी सदमा पैदा कर सकती है। संक्रमण निम्न कारणों से हो सकता है:

  • अस्वच्छ हाथों के उपयोग से या कोई वस्तु गर्भ के अंदर रह गयी हो।
  • गर्भ में गर्भावस्था के अवशेष रह गए हों जो संक्रमण का कारण बनते हैं।
  • यदि महिला को पहले से ही संक्रमण हो।
    गर्भ की दीवार में छिद्र किया गया हो।

आंतरिक चोट
जब किसी तेज़ या नुकीले उपकरण के प्रयोग से गर्भ में छिद्र या चोट हो लग जाती है तो इस स्थिति को आंतरिक चोट कहते हैं। ये उपकरण अन्य आंतरिक अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं, जैसे फैलोपियन ट्यूब, अंडाशय, आंतें और मूत्राशय आदि। जब महिला को आंतरिक चोट लगती है तो उसके पेट के अंदर गंभीर रक्तस्राव हो सकता है लेकिन योनि से लगभग कोई रक्तस्राव नहीं होता।

पेट में अधिक दर्द और ऐंठन
इन गोलियों को खाने से पेट में दर्द और ऐंठन होता है। कुछ उसी तरह जैसे पीरियड्स के दौरान होता है। लेकिन यह उससे कहीं ज्‍यादा होता है। चूंकि शरीर भारी मात्रा में रक्‍त और दूसरे द्रव लगातार निकलते रहते हैं इसलिए पेट, पैरों और शरीर के कई हिस्‍सों में ऐंठन की शिकायत हो सकती है।

जी मिचलाना, दस्‍त
अबॉर्शन वाली गोलियों को खाने से जी मिचलाने और उल्‍टी की शिकायत होती है। कभी-कभी पेट में होने वाली मरोड़ों से दस्‍त भी लग सकते हैं।

पूरी तरह से गर्भपात न होना
कुछ मामलों में ऐसा होता है कि गोली के असर से भ्रूण पूरी तरह शरीर बाहर नहीं आ पाता। ऐसे हालात में सर्जरी करानी पड़ सकती है।

गर्भपात (एबॉर्शन) के बाद सावधानियां 
आपके गर्भपात के बाद डॉक्टर आपको विशिष्ट देखभाल के निर्देश देंगे। कभी-कभी यह दुष्प्रभावों को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं होते हैं। दुष्प्रभावों को कम करने के लिए, आप निम्न उपाय अपना सकती हैं:

  • हीटिंग पैड का उपयोग करें, जो ऐंठन को कम करने में मदद करता है।
  • हाइड्रेटेड रहें, खासकर तब जब आपको उल्टी या दस्त का सामना करना पड़ रहा हो।
  • यदि संभव हो तो, घर में रहने की योजना बनाएं ताकि आप अपने घर में बेहतर आराम कर सकें।
  • ऐंठन और दर्द को कम करने के लिए इबुप्रोफेन (Ibuprofen) जैसी दवाएं लें।
  • पेट में ऐंठन की जगह पर मालिश करें।
  • स्तन असहजता से राहत पाने के लिए सही और फिट ब्रा पहनें।

जब दवा द्वारा गर्भपात नहीं करवाना चाहिए

  • महिला में खून की कमी हो 150 प्रतिशत से कम खून में दवा न दें 8 ग्राम से कम.
  • महिला को उच्च रक्त चाप की बीमारी हो.
  • कॉपर टी लगे रहने के साथ गर्भ ठहर गया हो.
  • पूर्व में सिजेरियन ऑपरेशन हुआ हो.
  • महिला की उम्र 35 साल से ज्यादा हो तथा उसे बीडी सिगरेट की आदत हो.

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