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दिमाग की टीबी के लक्षण, Brain TB Symptoms in Hindi
ब्रेन टीवी के लक्षण, ब्रेन टीवी के कारण,  मस्तिष्क टीबी का उपचार
ट्यूबरक्लोसिस यानी कि टीबी एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है जो कि सामान्यतः हमारे फेफड़ों को प्रभावित करती है। यह एक घातक बीमारी है जिसका सही समय पर सही तरीके से इलाज न किया जाए तो जानलेवा भी हो सकती है। टीबी फेफड़ों के अलावा हमारे दिमाग को भी प्रभावित कर सकती है। ऐसे में दिमाग के ऊतकों में सूजन आ जाती है। इसे मेनिनजाइटिस ट्यूबरक्लोसिस कहा जाता है। मेनिनजाइटिस टीबी को टीबी मेनिनजाइटिस या ब्रेन टीबी भी कहते हैं। ट्यूबरकुलस मेनिन्जाइटिस को टीबी मेनिन्जाइटिस या ट्यूबरकुलर मैनिंजाइटिस के रूप में भी जाना जाता है। ट्यूबरकुलस मैनिंजाइटिस माइकोबैक्टीरियम तपेदिक संक्रमण है मेनिन्जेस झिल्ली की प्रणाली जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को कवर करती है। यह बच्चों और हर वर्ग के वयस्कों को हो सकती है। भारत में यह बीमारी तेजी से फैल रही है।

ब्रेन टीवी क्या है , Brain TB Kya Hai
टीबी दिमाग (Brain tuberculosis) में भी होती है। इसमें दिमाग के ऊतकों में सूजन आ जाती है, जिसे मेनिनजाइटिस ट्यूबरक्लोसिस, मेनिनजाइटिस या ब्रेन टीबी भी कहा जा सकता है। दिमागी टीबी बड़ों से लेकर बच्चों की भी हो सकती है। डाक्टर्स का कहना है कि भारत में टीबी के हर 70 मामलों में से बीस मरीज ब्रेन टीबी के होते हैं।मेनिन्जेस के माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस कार्डिनल विशेषता है और सूजन मस्तिष्क के आधार की ओर केंद्रित होता है। जब सूजन मस्तिष्क स्टेम सबराचनोइड क्षेत्र में होती है, तो कपाल तंत्रिका जड़ें प्रभावित हो सकती हैं।रक्त-जनित प्रसार निश्चित रूप से होता है, संभवतः रक्त और मस्तिष्क की बाधा को पार करके; लेकिन रोगियों के अनुपात में मस्तिष्क में एक कॉर्टिकल फोकस के टूटने से टीबी मेनिन्जाइटिस हो सकता है, यहां तक कि एक छोटे से अनुपात में यह रीढ़ में एक हड्डी के फोकस के टूटने से मिलता है।जानें, ब्रेन टीबी के कारण, लक्षण और उसके उपचार (Brain tuberculosis causes, symptoms and treatment) के बारे में.

ब्रेन टीवी है जानलेवा
1- भारत में हर साल 20 लाख लोग टीबी की चपेट में आते हैं
2- लगभग 5 लाख प्रतिवर्ष मर जाते हैं।
3- भारत में टीबी के मरीजों की संख्या दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा है।
4- यदि एक औसत निकालें तो दुनिया के 30 प्रतिशत टीबी रोगी भारत में पाए जाते हैं।
5- दुनिया में छह-सात करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रस्त हैं और प्रत्येक वर्ष 25 से 30 लाख लोगों की इससे मौत हो जाती है।

ब्रेन टीबी के कारण (Causes Of Brain TB)
1- एचआईवी एड्स, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता और डायबिटीज मेलिटस ब्रेन टीबी के प्रमुख रिस्क फैक्टर्स हैं।
2- मदिरापान तथा धूम्रपान करने से भी इस रोग की चपेट में आया जा सकता है।
3- गरीबी के कारण अपर्याप्त व पौष्टिकता से कम भोजन, कम जगह में बहुत लोगों का रहना, स्वच्छता का अभाव तथा गाय का कच्चा दूध पीना आदि हैं।
4- स्लेट फेक्टरी में काम करने वाले मजदूरों को भी इसका खतरा रहता है।
5- जिस व्यक्ति को TB है, उसके संपर्क में रहने से, उसकी वस्तुओं का सेवन करने, प्रयोग करने से।
6- टी.बी. के मरीज द्वारा यहां-वहां थूक देने से इसके विषाणु उड़कर स्वस्थ व्यक्ति पर आक्रमण कर देते हैं।

ब्रेन टीबी के इसके लक्षण (Symptoms Of Brain TB)
ब्रेन टीबी के लक्षण शरीर में धीरे-धीरे उबरते हैं। शुरुआत में थकान, कम तीव्रता का बुखार, हमेशा बीमार बने रहना, मिचली, उल्टी, चिड़चिडापन और आलस जैसी समस्याएं सामने आती हैं। दिन-ब-दिन ये लक्षण और भी खतरनाक होते जाते हैं। ऐसे में इसकी सही समय पर पहचान करके इलाज करवाना जरूरी है।
ब्रेन टीबी के लक्षण, Brain TB Ke Lakshan
1- लगातार 3 हफ्ते तक खांसी का आना
2- सामान्य रूप से भूख नहीं लगना
3- वजन का कम होना
4- बेचैनी एवं सुस्ती छाई रहना
5- सर्दी और बुखार लगना , हलका बुखार रहना या हरारत रहना
6- सांस लेने में समस्या होना
7- गर्दन की ग्रंथियों में सूजन
8- सीने में दर्द या तकलीफ होना
9- गर्दन की लिम्फ ग्रंथियों में सूजन आ जाना तथा वहीं फोड़ा होना

ब्रेन टीबी का निदान
1- टीबी मेनिन्जाइटिस का निदान कमर का दर्द ( पंचर ) द्वारा एकत्र मस्तिष्कमेरु द्रव ( Cerebrospinal Fluid )का विश्लेषण करके किया जाता है। संदिग्ध टीबी मेनिन्जाइटिस के लिए सीएसएफ इकट्ठा करते समय, कम से कम 1 मिलीलीटर तरल पदार्थ लिया जाना चाहिए (अधिमानतः 5 से 10 मिलीलीटर)। मस्तिष्कमेरु द्रव में आमतौर पर उच्च प्रोटीन, कम ग्लूकोज और लिम्फोसाइटों की एक बढ़ी हुई संख्या होती है। एसिड-फास्ट बेसिली को कभी-कभी सीएसएफ स्मीयर पर देखा जाता है, लेकिन आमतौर पर, एम। तपेदिक संस्कृति में उगाया जाता है। एकत्र सीएसएफ में एक मकड़ी का जाला टीबी मेनिनजाइटिस की विशेषता है, लेकिन एक दुर्लभ खोज है। ELISPOT ( Enzyme-linked immunosorbent spot ) एंजाइम से जुड़ा हुआ इम्यूनोसॉर्बेंट स्पॉट का परीक्षण तीव्र टीबी मेनिन्जाइटिस के निदान के लिए उपयोगी नहीं है और अक्सर रिजल्ट गलत देता है, लेकिन उपचार शुरू होने के बाद विरोधाभास सकारात्मक हो सकता है, जो निदान की पुष्टि करने में मदद करता है।
2- न्यूक्लिक एसिड प्रवर्धन परीक्षण, Nucleic Acid Amplification Tests (NAAT)
यह परीक्षणों का एक समूह है जो माइकोबैक्टीरियल न्यूक्लिक एसिड का पता लगाने के लिए पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (पीसीआर) का उपयोग करता है। ये टेस्ट अलग-अलग होते हैं जिनमें न्यूक्लिक एसिड अनुक्रम का पता चलता है और उनकी सटीकता में भिन्नता होती है। दो सबसे आम व्यावसायिक रूप से उपलब्ध परीक्षण प्रवर्धित माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस डायरेक्ट टेस्ट (एमटीडी, जनरल-प्रोब) और एम्प्लिकोर हैं।
3- ब्रेन टीबी का इलाज , टीबी मेनिन्जाइटिस का इलाज
टीबी मेनिन्जाइटिस का उपचार दो महीने के लिए आइसोनियाजिड, रिफैम्पिसिन, पाइरेजाइनमाइड और एथमब्युटोल ( Isoniazid, Rifampicin, Pyrazinamide and Ethambutol ) है, इसके बाद आइसोनियाजिड और रिफैम्पिसिन को अकेले दस महीने तक रखा जा सकता है। साइटोइड्स उन लोगों में मृत्यु के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं जिनको एचआईवी नहीं है। पहले छह हफ्तों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। उपचार के लिए, कुछ लोगों को थैलिडोमाइड ( Thalidomide ) जैसे इम्युनोमोडायलेटरी एजेंटों ( Immunomodulatory Agents )की आवश्यकता हो सकती है। टीबी मेनिन्जाइटिस वाले लगभग एक तिहाई लोगों में दीमाग के पर्दों में पानी आ जाना ( Hydrocephalus ) जटिलता पैदा करता है। एस्पिरिन मृत्यु दर में कमी या देरी करने में सहायक हो सकता है , संभवतः जटिलताओं जैसे मृत उत्तको (इन्फार्क्ट्स Infarcts)  को कम करके।
4- सही डाइट से इलाज
सही डाइट से ब्रेन टीबी (Brain tuberculosis in hindi) से बचा जा सकता है। इसे रोकने में डाइट भी अहम भूमिका निभा सकती है। इसके लिए रोगी को अपने डाइट में ताजे फल, सब्जियां और काफी मात्रा में प्रोटीन आदि पोषक तत्वों को जरूर शामिल करें। इनसे इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और बीमारी से लड़ने में मदद मिलती है।
5- डाइट में इन्हें भी करें शामिल
ताजे रसदार फल जैसे- अंगूर, सेब, संतरे, तरबूज और अनानास को अपने डाइट में शामिल करें। दूध में कैल्शियम भरपूर होता है। ऐसे में ब्रेन टीबी से बचने के लिए यह बेहतरीन विकल्प हो सकता है। स्ट्रॉन्ग चाय या काफी के सेवन से भी परहेज करें। इसके अलावा शुगर और डिब्बाबंद फूड्स से परहेज करने की कोशिश करें।

चिकित्सक की सलाह का सही से पालन करे
1- सावधानी जरूरी – फेफड़ों में हुई टीबी का अगर सही समय पर इलाज न हो तो यह ब्रेन और स्पाइन तक पहुंच सकती है। ब्रेन और स्पाइन में टीबी होने की वजह से मरीज को परैलिसिस हो सकता है और वह कोमा में भी जा सकता है।
2- इलाज बीच में न छोड़ें –  हाईजीन पर ध्यान न देने से भी टीबी की बीमारी होती है। जिन लोगों की इम्यूनिटी पावर कमजोर होती है, उन्हें यह बीमारी जल्दी होती है। यह खून के जरिए शरीर के किसी भी अंग पर हमला कर सकती है। इसलिए इलाज को बीच में न छोड़ें। 6 महीने से 18 महीने तक पूरा इलाज करवाएं।
3- गल सकती हैं हड्डियां – टीबी का प्रारंभिक लक्षण कमर में दर्द और हल्का बुखार, भूख न लगना और वजन कम होना है। कमर के जिस हिस्से में दर्द हो उसका एक्स-रे करवाकर देखें। हड्डियां गल तो नहीं रही हैं। शुरुआत में डायग्नोस न होने पर बीमारी फैलकर रीढ़ की हडि्डयों को गला सकती है।
4- बुखार-सिर दर्द को इग्नोर न करें – लंबे समय तक बुखार और सिर में दर्द हो तो डॉक्टर को दिखाएं। दिमागी बुखार को सबसे पहले डायग्नोस करें। रीढ़ की हड्डी से पानी निकालकर इसकी जांच करवाई जाती है। दिक्कत बढ़ने पर दिमाग के पानी का प्रवाह कम हो जाता है। दिमाग में पानी की थैली का साइज बढ़ जाता है जिससे पेशंट कोमा में जा सकता है। सर्जरी करके एक्सट्रा पानी को नली के जरिए बाइपास करके पेट से बाहर निकाला जाता है।

ब्रेन टीबी के घरेलू उपाय, ब्रेन टीबी का घरेलू इलाज
हम आपसे ब्रेन टीबी के कुछ घरेलू उपाय शेयर कर रहे है ये कोई इस्थिर समाधान नहीं है पर आपको थोड़ा राहत जरूर मिलेगी और आपका सवास्थ भी सही रहेगा।
1- लहसुन – सल्फयूरिक एसिड से भरपूर लहसुन टीबी के कीटाणुओं को खत्म करने में मदद करता है। इसके लिए आधा चम्मच लहसुन, 1 कप दूध और 4 कप पानी को एक साथ उबालें। इसे दिन में 3 बार पीने से टीबी रोग दूर हो जाता है।
2- हींग – एक १ चुटकी हींग में आधा कप प्याज का रस मिलाएं। रोजाना सुबह खाली पेट इसका सेवन टीबी रोग को 1 हफ्ते में ही दूर कर देता है।
3- संतरा – टीबी रोग होने पर ताजा संतरे के जूस में नमक और शहद मिलाकर रोजाना सुबह-शाम पीएं। इसके अलावा संतरा खाने से भी टी बी के रोगी को फायदा होता है।
4- शहद – 200 ग्राम शहद, 200 ग्राम मिश्री, 100 ग्राम घी को अच्छी तरह मिक्स कर लें। दिन में 2-3 बाद इसे टीबी मरीज को चटाए और इसके बाद गाय या बकरी का दूध पिला दें। इससे टीबी जड़ से खत्म हो जाएगी।
5- पीपल के पत्ते – पीपल के पत्तों को जलाकर इसकी 10 ग्राम राख को 20 ग्राम तक बकरी के गर्म दूध में मिक्स करें। इसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर रोजाना पीएं। टीबी रोग हमेशा के लिए दूर हो जाएगा।
6- काली मिर्च – फेफड़ों में जमा कफ और खांसी को दूर करने के लिए थोड़े से मक्खन में 8-10 काली मिर्च फ्राई करके इसमें 1 चुटकी हींग मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण को तीन बराबर भागों में बांटकर दिन में 7-8 बार लें।

Disclaimer – हमारा एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इसके उपभोक्ताओं को विशेषज्ञ-समीक्षा, सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिले। हालांकि, इसमें दी गई जानकारी को एक योग्य चिकित्सक की सलाह के विकल्प के रूप में उपयोग नहीं किया जाना चाहिए। यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है यह सभी संभावित दुष्प्रभावों, दवा बातचीत या चेतावनी या अलर्ट को कवर नहीं कर सकता है। कृपया अपने चिकित्सक से परामर्श करें और किसी भी बीमारी या दवा से संबंधित अपने सभी प्रश्नों पर चर्चा करें। हमारा मकसद सिर्फ जानकारी देना है।

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