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डिप्रेशन / अवसाद के लक्षण कारण प्रकार उपचार आहार और डिप्रेशन से होने वाले रोग – अवसाद के लक्षण और उपचार

दुख, पीड़ा, बुरा महसूस करना और कोई भी काम करने में मन नहीं लगता.अमूमन ऐसा कभी न कभी हर किसी की जिंदगी में होता है, लेकिन यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो यह डिप्रेशन या अवसाद हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दुनिया में विभिन्न बीमारियों का सबसे बड़ा कारण डिप्रेशन है। दुनियाभर में 350 मिलियन लोग इससे प्रभावित हैं। यह बच्चों, वयस्कों, महिलाओं, पुरुषों, सभी को समान रूप से प्रभावित करता है। What is Depression Reasons Symptoms Types Diet and Treatment in Hindi

डिप्रेशन क्या है?   अवसाद क्या है? 

अमेरिकन सैकेट्रिक असोसिऐसन  (American psychiatric association) के अनुसार अवसाद एक सामान्य किंतु गम्भीर मनोविकार है। जो हमारे अंदर नकारात्मक विचारों और कृत्यों का उत्पन्न करता है।अवसाद या डिप्रेशन का तात्पर्य मनोविज्ञान के क्षेत्र में मनोभावों संबंधी दुख से होता है। इसे रोग या सिंड्रोम की संज्ञा दी जाती है। डिप्रेशन के अनेक कारण होते हैं जैसे व्यक्ति के प्रेम संबंध , कुपोषण, आनुवांशिकता, हार्मोन, मौसम, तनाव, बीमारी, नशा, अप्रिय स्थितियों में लंबे समय तक रहना, पीठ में तकलीफ आदि प्रमुख हैं।को लेकर गंभीर होती है। किसी भी व्यक्ति के जीवन में अपने जीवन साथी के प्रति बहुत अधिक लगाव प्रमुखता या इसका सबसे बड़ा कारण होता है। अवसाद की अवस्था में व्यक्ति स्वयं को लाचार और निराश महसूस करता है। उस व्यक्ति-विशेष के लिए सुख, शांति, सफलता, खुशी यहाँ तक कि संबंध तक बेमानी हो जाते हैं। संबंधों में बेईमानी का परिचायक उसके द्वारा उग्र स्वभाव, गाली गलौज व अत्यधिक शंका करना इसमें शामिल होता है इस दौरान उसे सर्वत्र निराशा, तनाव, अशांति, अरुचि प्रतीत होती है।

अवसाद किस में पाया जाता है ?

बच्चो और व्यस्कों में भी डिप्रेशन की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। तनाव युक्त जीवन, अत्यधिक महत्वकांक्षी होना इन्हें और बढ़ाता है। मुख्यतः चालीस वर्ष को मीन ऐज (Age) माना गया है डिप्रेशन की शुरुवात के लिए, किंतु यह हर उम्र में हो सकता है। W.H.O. (डब्लू.एच.ओ.) के अनुसार हर 6 महिला में 1 और 8 पुरुषों में 1 (एक) डिप्रेशन का शिकार है।
आत्महत्या- विश्व में आठ लाख (800000) लोग हर वर्ष आत्महत्या करते हैं, W.H.O.के डाटा के अनुसार इनमें से 1, 35, 000 (17%) हमारे भारतवासी हैं। आत्महत्या का अनुपात अब २०१८ में हर 1, 00, 000 व्यक्तियों में 10.9 हो चूका है, जो कि पहले 7.9 था। हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या का शिकार हो जाता है और हर 3 सेकेंड में एक व्यक्ति प्रयास करता है मरने के लिए। ये डाटा विश्व स्तर पर W.H.O. (वल्र्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन) द्वारा दिया गया है। Home Remedies for Depression in Hindi

  • गाँव या देहात में रहने वालों में शहरों के मुताबिक अवसाद अधिक देखा जाता है।
  • शिक्षितों में अशिक्षितों के मुताबिक अधिक मात्रा है।
  • गरीबों और धनवानों में इसकी मात्रा बराबर की है।

अवसाद के लक्षण 

मनोदशा – चिंता, उदासीनता, असंतोष, खालीपन, अपराध बोध, निराशा, मिजाज बदलते रहना, घबराहट अथवा सुख प्रदान करने वाले कार्यों से भी सुख की अनुभूति ना होना। अवसाद में व्यक्ति व्यथित होता है, या तो वह दुखी रहता है या उसकी ऊर्जा का हृास कर लेता है। जो उसके मानसिक स्तर को प्रभावित करता है ऐसी स्थिति में व्यक्ति बहुत ही तनाव ग्रस्त और परितक्त्या अनुभव करता है। उसके मन में अपने प्रति संशय उन्पन्न होने लगता है जिसके कारण उसकी कार्य क्षमता प्रभावित होती है उसे यह अवस्था और अधिक अवसाद में ले जाती है, इस अवस्था में व्यक्ति में अपना भला बुरा सोचने की क्षमता समाप्त हो जाती है और वह घृणित से घृणित कार्य जैसे आत्महत्या हाथ की नसें काटना, फाँसी लगाना इत्यादि कार्य करके स्वयं को ही हानि पहुँचाता है। वह स्वयं की शक्ति को पहचानने में असमर्थ हो जाता है और सदा लाचारी की स्थिति में रहता है। उसे निराशा सदा घेरे रहती है और अपने आस-पास किसी को पसंद नहीं करता है। अकेलापन उसे अच्छा लगता है। किसी की भी बात भले ही मजाक में कही गई हो उसे तीर की तरह चुभ जाती है हर बात को अपने से जोड़ लेता है और सब पर संदेह करता है। भूतकाल को याद करके या बीती बातों को याद करके अकेले में रोता है। वह अपने मन की बात किसी से नही बताता क्योंकि उसे अपने परम हितैशियों पर भी विश्वास नहीं होता न ही ईश्वर पर, वह हर दम अपनी परिस्थिति के लिए उन्हें कोसता रहता है। कुछ मरीज वाचाल होते हैं क्रोध व्यक्त करते हैं चिड़चिड़ापन दिखाते हैं अत्यधिक गुस्सा, नफरत प्रगट करते हैं और कुछ अन्तर्मुखी होते हैं उनके लिए अवसाद बेहद गम्भीर स्थिति उत्पन्न कर देता है, एकांकी जीवन शैली को अपनाकर वे गहन मौन में चले जाते हैं और यह अवस्था उनकी हृदय गति को बिलकुल कम कर देती है जिससे कभी-कभी सोते-सोते उनकी मृत्यु भी हो सकती है। कुछ अवसादग्रस्त व्यक्ति जो दिन में काम करते हैं व्यस्त होते हैं, तब तक अवसाद की स्थिति से दूर रहते हैं किंतु जैसे ही वे अकेले हो जाते हैं फिर वे उसी भूतकाल में डूब जाते हैं, या भविष्य की चिंता करते हैं। बहुत ही कम समय के लिये वह वर्तमान क्षणों का आनन्द ले पाते हैं। Home Remedies for Depression in Hindi

निद्रा –  साधारणतह एक व्यस्क को 7-8 घंटे की नींद की आवश्यकता है किंतु, अवसाद में व्यक्ति अपनी निद्रा का लाभ नहीं ले पाता, उसकी नींद सुबह बहुत जल्दी खुल जाती है या वह अनिद्रा का शिकार हो जाता है। नींद के बाद भी उसे थकावट और आलस्य महसूस होत है। कुछ मरीजों में अत्यधिक नींद भी पाई गई है पर उसमें भी वह थका हुआ ही उठता है व्यक्ति, खुद को तरोताजा महसूस नहीं कर पाता । वह हमेशा थकान और बेचैनी का अनुभव करता है।

संज्ञानात्मक – एकाग्रता की कमी, हर कार्य में धीमी गति का होना, आत्महत्या के विचार, कुछ याद ना रहना या सामान्य चीजें भूलना मुख्य हैं। कुछ नई कुछ पुरानी बातें अचानक याद आना और खुश हो जाना। ज्यादातर डिप्रेशन के मरीज बाद में भूलने की बीमारी या एलजाइमर (Alzimer) से ग्रस्त हो जाते हैं। वह ध्यान लगा के कोई काम करने में स्वयं को असमर्थ पाते हैं।

नशा – कुछ लोग नशा करने लगते हैं कि वे हरदम वास्तविकता से दूर रहें क्योंकि उनमें इसे स्वीकार करने की शक्ति नहीं होती। हम कह सकते हैं कि वे डरपोक हो जाते हैं। जीवन के उतार चढ़ाव को बर्दाश करने की क्षमता उनमें नहीं होती। कैफीन (कॉफी), चाय, जंक फूड इत्यादि से भी गलत प्रभाव पड़ता है। सिगरेट (धूम्रपान) अथवा तंबाकू सेवन आदि भी गलत प्रभाव डालते हैं।

विशेष शारीरिक लक्षण 

  • नींद और भूख की अधिकता। कार्बोहाइड्रेट क्रेविंग (यानि जंक फूड खाने की तीव्र इच्छा जैसे पीज्जा, पेस्ट्री, बर्गर आदि)
  • मनोसंचालन मंणन (साइकोमोटर रिटार्डेशन):- इसमें लीडेन पैरालिसिस (धीमा लकवा) भी देखा जाता है। शरीर एक लकड़ी के लट्ठे की तरह प्रतीत होता है।जल्दी-जल्दी बर्ताव बदलता है और ऐसे नवजवान लड़के, लड़कियाँ अति भावुक होते हैं।
  • कमजोरी, इनमें लो मूड़ दिखता है।इन टीनएजर्स के साथ माता-पिता को काफी संघर्ष का सामना करना पड़ता है।इनमें पारस्परिक अस्विकृति भी पायी जाती है।
  • कब्ज, सर दर्द, वनज गिरना भी अवसाद में पाया जाता है।ऐसे युवा अपनी बात मनवाने के लिए कुछ दिखावा भी करते हैं जिसे प्रोजेक्शन कहते हैं, यह उच्च स्तरीय परिवारों में अधिक देखा जाता है।

अवसाद या डिप्रेशन किन कारणों से होता है ? 

जैविक, आनुवांशिक, मनोसामाजिक, जैव रासायनिक असंतुलन के कारण अवसाद हो सकता है। अवसाद के भौतिक कारण भी अनेक हैं जैसे कुपोषण, आनुवांशिकता (Heriditory) हॉर्मोन, मौसम, तनाव, बीमारी, नशा, अप्रिय स्थितियों में लंबे समय तक रहना, पीठ में तकलीफ आदि प्रमुख कारण हैं। 90% अवसाद के मरीज नींद की समस्या से ग्रस्त होते हैं। अपने ढंग से न जी पाना और बहुत अधिक महत्वकांक्षी होना जिससे इच्छाओं की पूर्ति न हो पाना अवसाद को जन्म देता है। कोई हादसा या प्रिय जन से बिछड़ जाना भी डिप्रेशन को जन्म दे सकता है।
एक बड़ा कारण अपने समाज में यह भी है, कि सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग, हमारे मन से इस गहरी परत ने ना जाने कितने मनोविकारों को जन्म दिया है। अपना जीवन साथी अपनी जीविका, करियर अपनी पसंद से ना चुन पाना एक बड़ा कारण है तनाव व दुख का जो आगेचल के अवसाद का रुप ले लेता है।
अवसाद या डिप्रेशन के उपचार के लिए पढ़ें अगला पत्र जिसमें योग, प्राणायाम और ध्यान के बारें में बताया गया है। What is Depression Reasons Symptoms Types Diet and Treatment in Hindi

पुरुषों में डिप्रेशन के लक्षण

  • परिवार और समाज के दूरी बना लेना
  • बिना ब्रेक के काम करना
  • जरूरी काम या पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने में कठिनाई होना
  • बात-बात पर गुस्सा होना
  • रिश्तों में खटास बना लेना

महिलाओं में डिप्रेशन के लक्षण

  • चिड़चिड़ापन
  • चिंता
  • मूड स्विंग
  • थकान
  • नकारात्मक विचार आना

किशोरों में डिप्रेशन के लक्षण

  • स्कूल की पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित न कर पाना
  • नींद नहीं आना
  • बहुत ज्यादा सोना
  • भूख में कमी या बहुत भूख लगना
  • सामाजिक कार्यों और गतिविधियों से बचना

बच्चों में डिप्रेशन के लक्षण

  • दोस्तों और परिवार से अलग-अलग रहना
  • स्कूल की पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
  • खुद को दोषी, असहाय या बेकार महसूस करना
  • बेचैनी
  • बात-बात पर रोना
  • लो एनर्जी महसूस करना
  • उद्दंड व्यवहार
  • बात-बात पर गुस्सा करना

डिप्रेशन के लक्षण कारण 

रोग : मानिसक कमजोरी के साथ साथ कुछ लोग अपनी शारीरिक कमजोरी और रोगों के कारण भी अधिक चिंतित रहने लगते है जो धीरे धीरे उनके संतुलन को खराब करने लगती है और ये परेशानी ही उनके अवसाद का कारण बन जाती है।
पारिवारिक समस्याएं : कुछ लोगों के घर में अनेक तरह की समस्या होती है जैसे गरीबी, अशांति, पारिवारिक झगड़ें, धन की कमी आदि। ऐसे लोग हर छोटी छोटी बात पर भी अधिक विचार करने लगते है और उसके पीछे के कारण को खोजने के चक्कर में खुद को एक भयंकर बीमारी का रोगी बना लेते है।
अकेलापन : अकेलापन व्यक्ति के जीवन में बहुत गलत प्रभाव डालता है। आजकल युवा वर्ग में ये कारण अधिक पाया जाता है जब उनका प्रेमी या प्रेमिका उनके साथ धोखा कर देते है तो वो खुद को अकेला महसूस करने लगते है और डिप्रेशन का शिकार हो जाते है।
अनुवंशिक : डिप्रेशन अनुवंशिक भी है। अगर आपके माता पिता आपके जन्म से पूर्व अधिक चिंतित रहते थे तो आपको भी चिंतित रहने की आदत हो सकती है। खासतौर पर आपकी मां, अगर वो आपके गर्भ में होने के समय किसी बात से परेशान रहती थी तो आपका अवसाद से ग्रस्त होना लगभग शत प्रतिशत होता है। इसीलिए गर्भवती स्त्री को खुश रहने की सलाह दी जाती है।
बेरोजगारी : डिप्रेशन के मुख्य कारणों में से एक है बेरोजगारी। ऐसे बहुत से छात्र है जो बड़ी कठिनाइयों और बेजोड़ मेहनत के कारण अपनी शिक्षा को प्राप्त करते है किन्तु उनको अच्छी नौकरी नहीं मिल पाती। शिक्षित होने के कारण ऐसे छात्र मानसिक रूप से मजबूत होते है और वे काफी प्रयास करते है किन्तु उनके अथक प्रयास के बाद भी उन्हें नौकरी नही मिलती तो अंत में वे डिप्रेशन का शिकार हो जाते है।

अवसाद (डिप्रेशन) के प्रकार 

मेजर डिप्रेशन –  इस स्थिति में व्यक्ति का मिज़ाज बदलते रहेता है। यह व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों और व्यक्तिगत सम्बन्धों पर भी प्रभाव डालता है।
बाई पोलर डिसॉर्डर – इसे मैनिक डिप्रेशन भी कहेते हैं। चिडचिडपन, ग़ुस्सा, मतिभ्रम जैसी स्थिति इनमे पाई जाती है। एकदम निराश फिर अत्यधिक ख़ुश होना इनमे मुख्य है।
सायकलोथमिक डिसॉर्डर – इसमें लच्छन सूक्ष्म से लगते हैं। इसमें माइल्ड डिप्रेशन और ह्यपोमानिया देखा जाता है।
डिस्थीमिक डिसऑर्डर – इसमें मरीज़ को दो वर्ष या उससे अधिक समय तक डिप्रेशन अनुभव होता है। वह अपने आप को अस्वस्थ भी महसूस करता है तथा दैनिक कार्यों में भी कठिनाई महसूस करता है।
पोस्टमार्टम डिप्रेशन – पोस्टपार्टम डिप्रेशन एक गम्भीर समस्या है जो बच्चे के जन्म के कुछ महीनो बाद माँ को हो सकता है। गर्भपात से भी महिला इस स्थिति में जा सकती है।
सीकोटिक डिप्रेशन – यह एक बहुत ही गम्भीर समस्या है, इसमें लोग अन्य लक्षणों के साथ मतिभ्रम, तर्कहीन विचार, ऐसी चीज़ें देखना सुनना जो नहीं हैं के शिकार हो जाते हैं।
अनाक्लिटिक डिप्रेशन (Anaclictic depression) – नवजात शिशु में पाया गया है, जिसमें बच्चा किन्हीं कारणों से अपनी माँ से अलग होता है। माँ का प्यार ना मिलने से शिशु डिप्रेशन का शिकार हो जाता है।
एटिपिकल डिप्रेशन (Atypical depression) – ये युवाओं में पाया जाता है। इन मरीजों में कार्बोहाड्रेट क्रेविंग भी पायी जाती है।
सीज़नल अफेक्टिव डिसऑर्डर – यह मौसम के अनुसार होता है। आमतौर पर यह स्प्रिंग या सर्दियों में शुरू होता है और गर्मियों में ख़त्म।

अवसाद (डिप्रेशन) का उपचार – डिप्रेशन कैसे ठीक हो सकता है?

भाग्यवश अवसाद का निवारण है, यह लाइलाज नहीं। यदि आपके आस-पास कोई भी व्यक्ति बताए गए 2-3 लक्षणों या अधिक से ग्रस्त है तो उसे तुरंत डाॅक्टर के पास लेकर जाऐं। 2 हफ्ते से अधिक यदि कोई व्यक्ति दुखी या उदास है और खाना-पीना ठीक से ना ले रहा हो तो वह अवसाद से ग्रसित हो सकता है। उसे डाॅक्टर की सलाह लेनी चाहिए। दवाइयाँ और मनोचिकित्सा एक साथ लेने से अधिक असर होता है।
अवसाद की समस्या गंभीर हो जाने पर डॉक्टर से सलाह करके उपचार करना जरुरी है। आहार, योग, प्राणायाम और ध्यान उपचार हेतु बहोत लाभदायक है और पूरी तरह इसे ठीक करने में सहायक है। इसी के साथ अन्य कारण जैसे कुपोषण और बीमारियाँ जो साथ में हैं उन्हें ठीक करना मुख्य होता है।

  • आहारः-  एक पुरानी कहावत है, जैसा खाये अन्न वैसा होवे मन। भोजन में जरुरी पोषक तत्व ना होने से अवसाद की स्थिति और बिगड़ जाती है। सही आहार अवसाद को ठीक करने में अति सहायक है। 70 -90% मनोविकारों में लाभ मिलता है। एपिजीन में परिवर्तन करने वाले स्वास्थ्य दायक आहार का प्रयोग करें जिससे मन अच्छा रहेगा और नींद भी ठीक होगी जो कि आपकी कार्य क्षमता​ को बढ़ाएगी।
    सिरोटोनिन को फील गुड हॉर्मोन कहते हैं जो आपके मन को अच्छा रखता है और अच्छी नींद में सहायक है। ट्रिप्टोफैन युक्त आहार सिरोटोनिन की मात्रा बढ़ाने में सहायक है जैसे चना इत्यादि।
  • सहायक आहारः-  विटामिन बी 12 और फोलेट युक्त आहार- दूध, साबुत अनाज, ब्रकोलि, बादाम, पालक, दालें, सप्लिमेंट्स इत्यादि
  • सेलेनियम – सेलेनियम युक्त आहार डिप्रेशन के लक्षण घटाने में अति सहायक माना जाता है। ये साबुत अनाज और दालें आदि। ब्राउन राइस, ओट मिल और त्रिकोण फल में भी सेलेनियम पाया जाता है।
  • विटामिन डी – सूरज की किरणें, सप्लिमेंटस, जूस अनाज, ब्रेड इत्यादि।
  • ओमेगा-3 फैटी एसिड – बादाम, अखरोट, अलसी, आदि सप्लिमेंट भी ले सकते हैं।
  •  प्रतिऑक्सीकारक / एंटीऑक्सीडेंट- ये हमारे शरीर में बन रहे फ्री रैडिकलस से लड़के उन्हें खत्म करते हैं और खराब सेल बनने से रोकते हैं। विटामिन ई, विटामिन सी और विटामिन ए इसका मुख्य अंग है।
  • बीटा कैरोटिन- ब्रैकोली, गाजर, पालक, सकरकंद, कद्दू, एैप्रीकोट।
  • विटामिन सी- किवि, टमाटर, ब्लू बेरी, ब्रैकोली, अंगूर, संतरा, काली मिर्च, आलू, अवोकाएडो आदि।
  • जिंक- मक्का, साबुत अनाज, बीन्स, नट्स आदि अथवा इसे सप्लिमेंट्स में लिया जा सकता है।
  • प्रोटीन- यह अत्यधिक महत्वपूर्ण अंग है जीवन के लिए। बीन्स, मटर, चीज, दूध दही, सोयाबीन आदि मुख्य तत्व हैं प्रोटीन के।

कुछ सामान्य आहार परिवर्तन

  • मैदे की जगह आप आटे (गेंहू का आटा) का प्रयोग करें ये अधिक हल्का होता है।
  • चीनी की जगह शहद या गुड़ का प्रयोग करें।
  • नट्स, बीन्स और फल एक साथ आहार में शामिल करें।
  • ओटमिल को नाष्ते में शामिल करें।
  • आर्टिफीशियल फ्लेवर की जगह दालचीनी, नटमेग या नेचुरल वेनिला का प्रयोग करना अच्छा होगा।
  • लो फैट क्रीम चीज (Cheese) का प्रयोग उत्तम होगा।
  •  प्रयास करें ताज़ा और शुद्ध भोजन करें और सही समय पर भोजन कर लें।
  • रात का भोजन 8-9 के बीच और दोपहर का 12 से 1 के बीच करने का प्रयास करें।
  • कैफीन, शराब, धूम्रपान, तम्बाकू इत्यादि से बचें।

डिप्रेशन से बचने के घरेलू उपाय , Home Remedies for Depression

युर्वेद एक प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है जो वात,पित्त, कफदोषों को संतुलित कर शरीर को स्वस्थ बनाती है। आयुर्वेदिक औषधियाँ व्यक्ति को शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ बनाती हैं एवं व्यक्ति को ऊर्जावान बनाती हैं। इनके सेवन से रोगी के शरीर में कोई भी विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है।
डिप्रेशन मै काजू का सेवन- डिप्रेशन मै काजू का सेवन से बहुत लाभ होता है। 4 से 6 काजू को पीसकर एक कप दूध में मिलाकर पीने से डिप्रेशन का असर कम होता है और आपकी हेल्थ के लिए भी अच्छा है।
नींबू ,हल्दी और शहद का लाभ – एक चम्मच नींबू का रस, एक चम्मच हल्दी पाउडर, एक चम्मच शहद, दो कप पानी इन सब को एक बर्तन मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें और इसे पी लें। नियमित रूप से इसके सेवन से अवसाद से निकलने में मदद मिलती है।
सेब के सेवन है जरूरी – सुबह उठकर खाली पेट सेब खाएँ। यह आपके शारीरिक स्वास्थ्य को तो बेहतर रखता ही है। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।
इलायची से मिलती है राहत – आप दो से तीन इलायची को पीसकर एक गिलास पानी में उबालकर पी लें या फिर हर्बल चाय में इलायची डाल कर पिएँ।

डिप्रेशन से मुक्ति दिलाए लाल गुलाब –  लाल गुलाब अवसाद पर काबू पाने में आपकी काफी मदद करेगा। इसके लिए 250 मिलीलीटर पानी में 25-30 गुलाब की पंखुड़ियों को डाल कर उबाल लें। आप चाहें तो स्वाद के लिए मिश्री का उपयोग भी कर सकते हैं। प्रतिदिन दो बार इस काढ़े को पिएं। इससे आपकी नसों में शांति बनी रहती है।
ब्राह्मी तेल की मालिश – ब्राह्मी फिर से जवान कर देने वाली आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है। इसके तेल की मालिश मन को शांत करती है। यह अवसाद के इलाज में व्यापक रूप से प्रयोग की जाती है।
शतावरी डिप्रेशन कम करती है – शतावरी मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है। इसमें फोलिक एसिड (folic acid) और ट्रिप्टोफेन (Tryptophan) है। ये घटक मूड बढ़ाने वाले रसायनों का उत्पादन करते हैं। डिप्रेशन जैसी समस्या से छुटकारा पाने के लिए गर्म दूध या शहद के साथ शतावरी पाउडर का सेवन करें या फिर सब्जी के रूप में अपने आहार में शतावरी का उपयोग करें।
डिप्रेशन में बादाम के लाभ – बादाम में प्रोटीन, विटामिन ई, मैग्नीशियम, फाइबर और कई आवश्यक अमीनो एसिड पाए जाते हैं। गर्म दूध में एक चम्मच बादाम का पेस्ट रोजाना मिलाकर पीने से अवसाद जैसी समस्या में काफी तेजी से आराम मिलता है।

कैमोमाइल चाय है डिप्रेशन का घरेलू उपाय – वैज्ञानिक तौर पर साबित हुआ है कि कैमोमाइल एक प्राकृतिक एंटीडिप्रेसेंट जड़ी बूटी है। इसका उपयोग मन को शांत करता है और डिप्रेशन से बाहर निकलता है। इसका उपयोग बहुत ही सुरक्षित है। कैमोमाइल बच्चों द्वारा भी इस्तेमाल किया जा सकता है। दवा के उपचार के विपरीत इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं है। यह चिंता को दूर करने में भी बहुत प्रभावी है और डिप्रेशन के समय नींद नहीं आने की समस्या में भी बहुत लाभदायक है। रात के खाने के बाद एक कप कैमोमाइल चाय पीने से अच्छी नींद आती है और पाचन भी बेहतर होता है।
केसर से खत्म करें डिप्रेशन को – केसर अवसाद जैसी समस्या के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। यह एक शक्तिशाली और सुरक्षित जड़ी बूटी है जो आपके मूड को बहुत प्रभावी ढंग से खुश रखता है। अध्ययन ने यह साबित किया है कि हल्के और मध्यम अवसाद से पीड़ित कई लोगों ने अपने दैनिक आहार में केवल 30 ग्राम केसर का उपयोग करके अपने मूड में भारी बदलाव का अनुभव किया है। केसर व्यक्ति को आराम देने और मूड को सूधारने में मदद करता है।
डिप्रेशन में करें अश्वगंधा का उपयोग – अश्वगंधा अवसाद के लिए सबसे अच्छा आयुर्वेदिक उपाय है। प्रतिदिन शहद के साथ एक चम्मच अश्वगंधा का सेवन करें। यह अवसाद जैसी समस्या को दूर करेगा।
गिलोय करे डिप्रेशन से दूर – गुदुची या गिलोय फिर से युवा करने के गुणों के लिए जाना जाता है। इसका उपयोग चिंता, अवसाद, सिरदर्द और मनोदशा विकारों के इलाज में व्यापक रूप से किया जाता है। यह मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा करता है और तनाव से राहत देता है। 500 मिली ग्राम गुदुची पाउडर को गोल्डन लिक्विड हनी (golden liquid-honey) के साथ मिलाकर प्रतिदिन दो बार इसका सेवन करें।

पतंजलि डिप्रेशन मेडिसिन , पतंजलि डिप्रेशन मेडिसिन इन हिंदी

  • पतंजलि दिव्य मेधा वटी , Patanjali Divya Medha Vati Extra Power 92 GM – मस्तिष्क की कमजोरी, सिरदर्द, नींद न आना, चिड़चिड़ा स्वभाव, मिर्गी आदि की शिकायतें ठीक करता है। अत्यधिक सपनों की समस्या और अवसाद और चिंता के कारण लगातार नकारात्मक विचारों को इस दवा द्वारा हल किया जाएगा और यह आत्मविश्वास और उत्साह बढ़ाता है। Price – MRP: Rs 185 for 92GM
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डिप्रेशन की होम्योपैथिक दवा – डिप्रेशन की बीमारी में होम्योपैथी दवा
होम्योपैथिक दवायें बहुत अच्छा असर करती हैं और होम्योपैथिक में डिप्रेशन की बीमारी की बहुत सारी दवाएं हैं जो डिप्रेशन के कारण को पूरी तरह दूर करती हैं। दवा का चुनाव रोग के कारण पर निर्भर करता है। अतः खुद अपना इलाज करने का प्रयास न करे किसी अच्छे चिकित्सक से ही परामर्श लें और उसी के अनुसार दवा का सेवन करें।
औरम-मेट (AUR-MET)– जिंदगी से निराश, आत्महत्या करने की बार-बार कोशिश करे या आत्महत्या के विचार अक्सर मन में आएं, नींद न आएं, लड़ाई झगड़े के सपने बार बार देखे और नींद में रोए तो यह दवा उपयोगी होती है।
स्टेफीसेग्रिया(STAPHYSAGRIA)– किसी के द्वारा अपमान किए जाने को मन में रख लेने के कारण तनाव या डिप्रेशन हो, लोग उसके बारे में क्या सोचते हैं यही सोच-सोचकर डिप्रेशन हो रहा हो तो यह दवा उपयोगी होती है।
एसिड फॉस(ACID-PHOS)– व्यक्ति प्रेम मे असफलता के कारण डिप्रेशन, किसी भी चीज में कोई रुचि न रहना, मानसिक रूप से थका हुआ, हमेशा चिंतित सा रहता है तो यह दवा उपयोगी होती है।
नेट म्यूर(NAT-MUR)– लड़ाई झगड़े या गुस्से के दुष्प्रभाव के कारण डिप्रेशन, अकेले में मरीज रोना चाहता है, चिड़चिड़ा हो जाता है. आर्थिक कारण के वजह से डिप्रेशन या फिर कुछ क्रोनिक बीमारियो के कारण हो तो यह दवा उपयोगी होती है।
आर्स अल्ब(ARS-ALB)–  मरने का डर, मरीज सोचता है कि दवा खाना बेकार है, अकेले रहने से डर लगता है, भूत-प्रेत दिखने की बातें करे या आत्महत्या करने की प्रबल इच्छा हो तो यह दवा उपयोगी होती है।
नक्स-वोमिका(NUX-VOMICA)– अत्याधिक चिड़चिड़ापन, पढ़ाई या नौकरी के कारण चिड़चिड़ापन। रात को 3 बजे के बाद सो न सकने वाला, नर्वसनेस के साथ-साथ कब्ज की भी शिकायत रहे और रोगी को किसी भी प्रकार की आवाज़, गंध या रोशनी सहन नहीं होती हो तो यह दवा उपयोगी होती है।
आर्ज़-नेट(ARG-NIT)– मानसिक और शारीरिक रूप से खुद पर काबू ना रह पाए, हमेशा डरा हुआ और नर्वस रहे, डरावने सपने दिखें खासकर के सांप के, एग्जाम देने में डर लगे, आत्मविश्वास की कमी हो और अपने आसपास तरह-तरह की वस्तुओं का आभास हो तो यह दवा उपयोगी होती है।

योग, प्रणायाम और ध्यान

योग और प्राणायाम 
अनलोम विलोम, भ्रामरी प्राणायाम, बंध और सूर्य नमस्कार तथा योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। घर के बाहर निकलें, प्रतिदिन सैर पर जाएं और व्यायाम को अपने जीवन में स्थान दें तनाव अपने आप आपसे दूर हो जाएगा।
एक महत्वपूर्ण बात याद रखें, इससे फर्क नहीं पड़ता आप कौन हैं, जीवन तब तक सही नहीं चलता जब तक आप सही चीजें नहीं करते।
यदि आप सही परिणाम चाहते हैं तो सही कार्यों का चयन करें फिर जीवन हर दिन एक खूबसूरत चमत्कार से कम नहीं है। हमें अपने जीवन का चार्ज अथवा जिम्मेदारी लेनी होगी जिससे हमारे अन्दर की असीमित क्षमताएं निखर कर आएगीं और तनाव रहित जीवन बनाना आसान हो जाएगा।
कुछ योग-आसन जो आपकी मदद कर सकते हैं:
भुजंगासन , धनुरासन , अर्धमत्स्येन्द्रासन ,  नौकासन , त्रिकोनासन , अधोमुख श्वान आसन
कुछ प्राणायाम जो आपकी मदद कर सकते हैं:-
नाड़ी शोधन, उज्जाई, भस्त्रिका, कपालभांति और भ्रामरी प्राणायाम।

किसी योग गुरु या मनोचिकित्सक के मार्गदर्शन में ही इसका पालन करें। टी.वी. पर देख कर या गलत अभ्यास करने से लाभ की जगह नुक़सान भी हो सकता है।

अवसाद (डिप्रेशन) से बचने के उपाय

अच्छे दोस्त बनाएं – अच्छे दोस्त आपको आवश्यक सहानुभूति प्रदान करते हैं और साथ ही साथ अवसाद के समय आपको सही निजी सलाह भी देते हैं।
संतुलित आहार लें – फल, सब्जी, मांस, फलियां, और कार्बोहाइड्रेट आदि का संतुलित आहार लेने से मन खुश रहता है। एक संतुलित आहार न केवल अच्छा शरीर बनता है बल्कि यह दुखी मन को भी अच्छा बना देता है।
बातचीत करें – अपनी समस्याओं के संबंध में बात करना भी तनाव दूर करने का उत्तम जरिया है। हममें से अधिकतर लोग खुद तक ही सीमित रहते हैं। अंदर ही अंदर घुटते रहने से और भी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
अपने लिए समय निकालें – यह बेहद महत्वपूर्ण है कि आप व्यस्तता के बावजूद अपनी जरूरतों और देखभाल के लिए भी कुछ समय निकालें। आराम करने के लिए भी पर्याप्त समय बचा कर रखें।
लिखना शुरू करें – अपनी रोजाना की गतिविधियों और भावनाओं को लिखने से आत्मनिरीक्षण और विश्लेषण करने में आपको मदद मिलती है। एक जर्नल या डायरी रखें जिसमे रोजाना लिखें की आप जीवन के बारें में क्या महसूस करते हैं। यह आपके अवसाद को दूर करने में सहायक होगा।
मनोचिकित्सक से सलाह लें – अवसाद को दूर भगाने का सबसे मुख्य और आसान तरीका है कि आप मनोचिकित्सक की सलाह लें । मनोचिकित्सक की सलाह से आपको अवसाद की जड़ तक जाने और इसे दूर करने में मदद मिलेगी।
डिप्रेशन कब तक रहता है?
पहले-पहल मन न लगना, उदास रहना जैसे लक्षण देरी करने पर डिप्रेशन का रूप ले लेते हैं। अगर हफ्ते 10 दिन तक उदासी बनी रहे तो अपने फिजिशन से मिल लें

डिप्रेशन से होने वाले रोग , डिप्रेशन के कारण बीमारियां

हमें दैनिक कार्यों में अनेक प्रकार के तनाव झेलने पड़ते हैं. खासतौर पर वर्तमान युग की तेज रफ्तार जिन्दगी में हमें रोज अनेकों समस्याओं से जूझना पड़ता है और इसके कारण तनाव होता है. लगातार मानसिक दबाव या तनाव अनेक मानसिक विकारों को जन्म देता है, अनेक शारीरिक समस्याओं का शिकार बनता है. जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, थायरोइड इत्यादि. चलिये जानें डिप्रेशन के कारण कौंन कौंन सी बीमारियां हो सकती हैं-
कैंसर – कैंसर के लगभग 60 प्रतिशत रोगी डिप्रेशन से भी ग्रस्त होते हैं क्योंकि अवसाद के कारण इक्यूनसिस्टम बदल जाता है. किसी भी व्यक्ति के अवसाद ग्रस्त होने के पीछे मनोवैज्ञानिक, सामाजिक, आनुवांशिक तथा जैव वैज्ञानिक कारण हो सकते हैं. अवसाद से पीडि़त रोगी का उपचार आमतौर पर सायकोथैरेपी के द्वारा किया जाता है.
मोटापा – एक अध्ययन में पाया गया है कि बचपन के अवसाद का अगर जल्द इलाज और रोकथाम कर लिया जाए, तो वयस्क होने पर दिल की बीमारी का खतरा कम हो सकता है. अवसादग्रस्त बच्चों के मोटे, निष्क्रिय होने और धूम्रपान करने की संभावना होती है जो किशोरावस्था में ही दिल की बीमारियों के कारण बन सकते हैं. अमेरिका की युनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा में मनोविज्ञान में यह शोध हुआ.
डिमेंशिया – नए शोध से पता चला है कि अवसाद से ग्रस्त लोगों में डिमेंशिया होने का ख़तरा सामान्य से दो गुना अधिक हो सकता है. डिमेंशिया से इंसान की मानसिक क्षमता, व्यक्तित्व और व्यवहार पर प्रभाव पड़ता है. जिन लोगों को डिमेंशिया होता है उनकी याद्दाश्त पर असर पड़ता है. अमरीकन पत्रिका न्यूरोलॉजी में ये तथ्य प्रकाशित हुए.
समय से पहले बुढ़ापा – मानसिक बीमारी पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर (पीटीएसडी) से पीड़ित लोगों को समय से पहले बुढ़ापा आने का खतरा होता है. नए शोध में यह बात सामने आई है. पीटीएसडी कई मानसिक विकारों जैसे गंभीर अवसाद, गुस्सा, अनिद्रा, खान-पान संबंधी रोगों तथा मादक द्रव्यों के सेवन से जुड़ी व्याधि है. सैन डिएगो स्थित युनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में साइकेट्री के प्रोफेसर दिलीप वी. जेस्ते व उनके साथियों ने पीटीएसडी में समय से पूर्व बुढ़ापे पर प्रकाशित प्रासंगिक अनुभवजन्य अध्ययनों की व्यापक समीक्षा की.
दिल की बीमारियां – एक अध्ययन में पाया गया है कि बचपन के अवसाद का अगर जल्द इलाज और रोकथाम कर लिया जाए, तो वयस्क होने पर दिल की बीमारी का खतरा कम हो सकता है. अवसादग्रस्त बच्चों के मोटे, निष्क्रिय होने और धूम्रपान करने की संभावना होती है जो किशोरावस्था में ही दिल की बीमारियों के कारण बन सकते हैं
मधुमेह – अवसाद की समस्या मधुमेह की ओर इशारा करती है. कई सालों से यह माना जाता था कि अवसाद की समस्या की जड़ मधुमेह है. हाल के कई शोधों में यह बिंदु सामने आया कि अवसाद से समस्या जटिल होती है. विशेषज्ञों का मानना है कि मधुमेह के पीछे चिंता और तनाव का ही हाथ होता है. यदि कोई व्यक्ति अवसाद ग्रस्त है तो उसे मधुमेह होने की संभावना सामान्य व्यक्ति के मुकाबले दुगनी होती है.
बहरेपन का खतरा अधिक – हाल ही में हुए एक शोध में बहरेपन से संबंधित एक नई जानकारी मिली है. इस शोध की मानें तो अवसाद में रहने वाले लोगों को बहरेपन का खतरा ज्‍यादा होता है. अमेरीका में हुए इस शोध में शोधकर्ताओं ने 18 साल व इससे अधिक उम्र के पुरुषों और महिलाओं पर अध्ययन किया. इसका असर पुरुषों की तुलना में महिलाओं पर अधिक दिखा.
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